
मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ
खंड 9सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों का मसीह, सत्य व्यक्त करता है, परमेश्वर के घर से शुरूआत करते हुए न्याय का कार्य करता है और लोगों को शुद्ध करने और बचाने के लिए आवश्यक सभी सत्यों की आपूर्ति करता है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों ने परमेश्वर की वाणी सुनी है, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए गए हैं, उन्होंने मेमने की दावत में भाग लिया है और राज्य के युग में परमेश्वर के लोगों के रूप में परमेश्वर के आमने-सामने अपना जीवन शुरू किया है। उन्होंने परमेश्वर के वचनों की सिंचाई, चरवाही, प्रकाशन और न्याय प्राप्त किया है, परमेश्वर के कार्य की एक नई समझ हासिल की है, शैतान द्वारा उन्हें भ्रष्ट किए जाने का असली तथ्य देखा है, सच्चे पश्चात्ताप का अनुभव किया है और सत्य का अभ्यास करने पर और स्वभाव में बदलाव से गुजरने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है; उन्होंने परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव करते हुए भ्रष्टता के शुद्धिकरण के बारे में विभिन्न गवाहियाँ तैयार की हैं। अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय कार्य ने विजेताओं का एक समूह बनाया है जो अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए यह गवाही देते हैं कि अंत के दिनों में महान श्वेत सिंहासन का न्याय पहले ही शुरू हो चुका है!
अनुभवजन्य गवाहियाँ
4अलग-थलग किए जाने के बाद आत्म-चिंतन
9कर्तव्य में फेरबदल के बाद मैंने सबक सीखे
27मैं दूसरों की समस्याएँ बताने की हिम्मत क्यों नहीं करती थी
28अब मैं शांति से मौत का सामना कर सकती हूँ
38जब मैंने अपनी माँ के गंभीर रूप से बीमार होने की खबर सुनी
43दूसरों को विकसित करने से मुझे जो हासिल हुआ
50क्या ज्ञान का अनुसरण एक अच्छे भविष्य की गारंटी देता है?
55समस्या बताना कमियाँ निकालना नहीं है
57मैंने अपने बेटे के प्रति आभारी होने की भावना त्याग दी
62अब मैं झटकों और असफलताओं का सही ढंग से सामना कर सकती हूँ
68मैंने अपने झूठ बोलने का समाधान कैसे किया
71मैंने अपनी बीमारी की चिंता से कैसे छुटकारा पाया
89समस्याएँ रिपोर्ट करने के डर के पीछे का कारण
92क्या माता-पिता की दयालुता एक ऐसा कर्ज़ है जिसे कभी चुकाया नहीं जा सकता?
93मुझे अब अपनी पत्नी की बीमारी की चिंता नहीं रहती
10अगुआ बनने की मेरी अनिच्छा के पीछे क्या छिपा है?
17अपना कर्तव्य खोने के बाद पछतावा
30मेरे बेटे के लिए मेरी उम्मीदें टूटने के बाद
32क्या यह विचार कि “महिला अपनी तारीफ करने वालों के लिए ही सजती-सँवरती है” सही है?
33इंसान को जीवन में किसका अनुसरण करना चाहिए?
35वास्तविक कार्य न करने पर चिंतन
49बुढ़ापे के सहारे के लिए अब मैं अपने बेटे पर निर्भर नहीं रहती
64मेरा बीमार होना परमेश्वर का आशीष था
65मैंने आखिरकार प्रभु की वापसी का स्वागत किया है
67अपने कर्तव्य में सही इरादे रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है