74. धन के अपने अनुसरण के भँवर से बाहर निकलना

चेन यांग, चीन

जब मैं बच्ची थी, मेरा परिवार बहुत गरीब था, मेरे माता-पिता किसान थे और खेती करके अपना गुज़ारा करते थे, और मेरे पिता अक्सर पैसे कमाने के लिए बोरियाँ ढोने का काम करते थे। ज़िंदगी को थोड़ा आसान बनाने के लिए, मैं और मेरी माँ गेहूँ की कटाई के दौरान खेतों में जाती थीं और बचा-खुचा गेहूँ बटोरती थीं ताकि उसे बेचकर कुछ अतिरिक्त पैसे कमा सकें। हर बार मैं लोगों को यह कहते हुए हमारा मज़ाक उड़ाते सुनती थी, “फिर से अपनी माँ के साथ गेहूँ बीन रही हो? क्या तुम्हारे पिता तुम्हारा पेट नहीं भर सकते?” मुझे बहुत बुरा लगता था, और मैंने ठान लिया कि भविष्य में, मैं पैसे कमाने के लिए कड़ी मेहनत करूँगी और दूसरों से ऊपर उठूँगी, ताकि कोई दोबारा हमारा मज़ाक न उड़ाए। सात साल की उम्र में मैं अपने पेड़ों से तेंदूफल तोड़ती थी और उन्हें सड़क पर बेचती थी। हाई स्कूल में, मैंने गर्मियों में ट्यूशन कक्षा चलाने की कोशिश की और यूँ तो यह नाकाम रही, फिर भी मैंने पैसे कमाना नहीं छोड़ा। कॉलेज में, मैंने छुट्टियों के दौरान पैसे कमाने के लिए सड़क किनारे ठेला लगाया, और पार्ट-टाइम काम भी किया। असल में, 2006 में, जब मैं मिडिल स्कूल में थी, मैं अपनी माँ के साथ परमेश्वर में विश्वास करने लगी और सभाओं में जाने लगी थी। लेकिन, उस समय मैंने अपने स्कूल और काम पर ध्यान दिया, अपनी आस्था को दरकिनार कर दिया। कभी-कभी जब मैं घर आती तो मेरी माँ मुझे परमेश्वर के वचन दिखाती थी, लेकिन मैं बेसब्र होकर मना कर देती थी, यह सोचlती थी कि सभाओं में भाग लेना और परमेश्वर के वचन पढ़ना समय की बर्बादी है। मेरा पूरा ध्यान अपना करियर बनाने पर था, मेरा मानना था कि मैं सिर्फ़ अपनी कोशिशों से ही ज़्यादा पैसे कमा सकती हूँ। आख़िरकार, आज की दुनिया में सफलता घर, गाड़ी और पैसे से ही तो मापी जाती है? जब कोई व्यक्ति पर्याप्त पैसा कमाता है तभी वह दूसरों की प्रशंसा पा सकता है, और उसके माता-पिता को भी इसका फ़ायदा पहुँचता है।

चूँकि संगीत की प्रस्तुति मेरा प्रमुख विषय था, 2016 में स्नातक होने के बाद मैंने एक स्थानापन्न शिक्षक के रूप में काम किया। 2018 में मैंने अपना व्यवसाय शुरू किया और एक कला विद्यालय की स्थापना कर दी। छात्रों को भर्ती करने के लिए मैं दिन में चिलचिलाती धूप में घर-घर जाकर परचे बाँटती थी और रात में अपना वाद्य यंत्र लेकर शहर भर में घूमती थी, अक्सर रात को ग्यारह बजे के आसपास ही घर पहुँच पाती थी। सारे दबाव और देर रात तक जागने के कारण मुझे अक्सर सिरदर्द रहने लगा, लेकिन ज़्यादा छात्रों के दाखिले और ज़्यादा पैसे कमाने के बारे में सोचकर मुझे यह सब सार्थक लगता था। अपने कड़े प्रयासों के जरिए मैंने अधिकाधिक छात्र भर्ती किए। इससे मैंने जीवन में पहली बार अच्छी-ख़ासी कमाई की। मेरे स्कूल को फलता-फूलता देखकर मेरे पड़ोसी और छात्रों के माता-पिता मेरे सक्षम और निपुण होने की तारीफ़ करते थे। उनकी स्वीकृति सुनकर मुझे गर्व महसूस होता था और आख़िरकार मैं सिर उठाकर चल सकती थी।

एक कला विद्यालय के लिए, जुलाई साल का सुनहरा समय होता है। चूँकि छात्रों की गर्मी की छुट्टियाँ होती हैं, अगर दाखिले ज़्यादा हों, तो इस एक महीने में दसियों हज़ार का मुनाफ़ा हो सकता है। जुलाई 2021 में, ज़्यादा पैसे कमाने के इस अवसर का फ़ायदा उठाने के लिए, मैंने और अधिक पाठ्यक्रम जोड़े और छात्रों के भोजन की ज़िम्मेदारी भी ले ली। इतने सारे छात्रों के भोजन का ध्यान रखने से मेरे काम का बोझ बहुत बढ़ गया, और मुझे हर दिन सामग्री ख़रीदने के लिए बाहर जाना पड़ता था। मुझे याद है एक सुबह बहुत तेज़ बारिश हो रही थी, मैं बारिश में एक-एक करके सब्ज़ियों की टोकरियाँ गाड़ी तक ले गई, जिनमें से हर एक का वज़न दसियों किलो था। मैं पूरी तरह से भीग गई थी, लेकिन मुझे यह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं लगा। मैंने मन में सोचा, “बस इसी एक महीने की बात है; अगर मैं इसे झेल लूँ तो यह जल्दी ही बीत जाएगा। इस महीने के बाद पैसे गिनने की बारी होगी और मैं उस उच्च-गुणवत्ता वाले जीवन के एक कदम और करीब आ जाऊँगी जिसके लिए मैं तरसती आ रही हूँ।” बस इस बारे में सोचकर ही मैं ख़ुश हो जाती थी। लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि जुलाई के तीसरे हफ़्ते में, मुझे खबर मिलेगी कि महामारी के कारण सभी स्कूलों को कक्षाएँ बंद करनी होंगी। यह खबर मुझ पर बिजली की तरह गिरी। मैंने इन गर्मियों की कक्षाओं की तैयारी के लिए बहुत ज़्यादा मेहनत की थी, बहुत अधिक श्रम, साजोसामान और पैसा लगाया था। मेरी योजना के अनुसार, बस यह महीना निकल जाता तो मैं आसानी से पैसे अपनी जेब में डाल सकती थी, लेकिन तब तक सिर्फ़ आधी ही कक्षाएँ पूरी हुई थीं, और मुझे अभी भी अधूरी कक्षाओं के पैसे वापस करने थे। जो पैसा लगभग मेरे हाथ में था उसे हाथ से जाता देख, मैं बस रोना चाहती थी, लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकती थी। पैसे वापस करने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि मैंने इस गर्मी में लगभग मुफ़्त में ही काम किया और इसे लेकर मैं काफी परेशान थी। मैं हताश होकर अपने दिन बिताती थी। महामारी के कारण कक्षाएँ बंद होने से, मुझे अचानक खाली समय मिल गया। लगभग उन्हीं दिनों एक बहन मेरे घर आई और उसने मेरे साथ संगति की कि परमेश्वर सभी चीजों का संप्रभु है और वह हममें से हर एक के भाग्य की पहले ही व्यवस्था कर चुका है। उसने यह भी कहा कि इन कई सालों के दौरान जब मैं सभाओं में नहीं आई थी, भाई-बहन हमेशा मेरे बारे में सोचते रहते थे, मेरी मदद करना और मुझे सहारा देना चाहते थे। मुझे याद आया कि कैसे इतने लंबे समय से मैंने परमेश्वर के वचन नहीं पढ़े थे और खुद को उससे दूर कर लिया था, फिर भी वह मेरी परवाह कर रहा था और उसने मुझे दिलासा देने के लिए बहन की व्यवस्था की। मेरे दिल को बहुत गर्मजोशी महसूस हुई। इस बार, मैंने फिर से मना नहीं किया, और तेरह साल बाद, आख़िरकार मैं परमेश्वर के घर लौट आई और कलीसियाई जीवन फिर से शुरू कर दिया।

एक बार मैंने भक्ति के दौरान परमेश्वर के ये वचन पढ़े : “कोई व्यक्ति कौन-सा व्यवसाय चुनता है, कोई व्यक्ति कैसे जीविका अर्जित करता है : क्या लोगों का इस पर कोई नियन्त्रण है कि वे अच्छा चुनाव करते हैं या बुरा चुनाव? क्या वो उनकी इच्छाओं एवं निर्णयों के अनुरूप होता है? अधिकांश लोगों की ये इच्छाएं होती हैं—कम काम करना और अधिक कमाना, बहुत अधिक परिश्रम न करना, अच्छे कपड़े पहनना, हर जगह नाम और प्रसिद्धि हासिल करना, दूसरों से आगे निकलना, और अपने पूर्वजों का सम्मान बढ़ाना। लोग सब कुछ बेहतरीन होने की इच्छा रखते हैं, किन्तु जब वे अपनी जीवन-यात्रा में पहला कदम रखते हैं, तो उन्हें धीरे-धीरे समझ में आने लगता है कि मनुष्य का भाग्य कितना अपूर्ण है, और पहली बार उन्हें समझ में आता है कि भले ही इंसान अपने भविष्य के लिए स्पष्ट योजना बना ले, भले ही वो महत्वाकांक्षी कल्पनाएँ पाल ले, लेकिन किसी में अपने सपनों को साकार करने की योग्यता या सामर्थ्य नहीं होता, कोई अपने भविष्य को नियन्त्रित नहीं कर सकता। सपनों और हकीकत में हमेशा कुछ दूरी रहेगी; चीज़ें वैसी कभी नहीं होतीं जैसी इंसान चाहता है, और इन सच्चाइयों का सामना करके लोग कभी संतुष्टि या तृप्ति प्राप्त नहीं कर पाते। कुछ लोग तो अपनी जीविका और भविष्य के लिए, अपने भाग्य को बदलने के लिए, किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं, हर संभव प्रयास करते हैं और बड़े से बड़ा त्याग कर देते हैं। किन्तु अंततः, भले ही वे कठिन परिश्रम से अपने सपनों और इच्छाओं को साकार कर पाएं, फिर भी वे अपने भाग्य को कभी बदल नहीं सकते, भले ही वे कितने ही दृढ़ निश्चय के साथ कोशिश क्यों न करें, वे कभी भी उससे ज्यादा नहीं पा सकते जो नियति ने उनके लिए तय किया है। योग्यता, बौद्धिक स्तर, और संकल्प-शक्ति में भिन्नताओं के बावजूद, भाग्य के सामने सभी लोग एक समान हैं, जो महान और तुच्छ, ऊँचे और नीचे, तथा उत्कृष्ट और निकृष्ट के बीच कोई भेद नहीं करता। कोई किस व्यवसाय को अपनाता है, कोई आजीविका के लिए क्या करता है, और कोई जीवन में कितनी धन-सम्पत्ति संचित करता है, यह उसके माता-पिता, उसकी प्रतिभा, उसके प्रयासों या उसकी महत्वाकांक्षाओं से तय नहीं होता, बल्कि सृजनकर्ता द्वारा पूर्व निर्धारित होता है(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III)। परमेश्वर के वचनों ने मुझे जैसे एक सपने से जगा दिया, और मैं समझ गई कि मेरा भाग्य और मेरे पास धन का होना परमेश्वर की संप्रभुता और उसकी व्यवस्थाओं के अधीन है। चाहे मैं कितनी भी मेहनत और संघर्ष करूँ, अंततः मैं परमेश्वर की पूर्वनियतियों को नहीं बदल सकती हूँ। पहले, मैं परमेश्वर की संप्रभुता को नहीं जानती थी, और मैं हमेशा अपना भाग्य बदलने के लिए अपनी कोशिशों पर निर्भर रहना चाहती थी। जब मैं छोटी थी, मेरा परिवार गरीब था, और दूसरे हमेशा मेरा मज़ाक उड़ाते थे, इसलिए मैंने सपना देखा कि एक दिन मैं धन-दौलत का जीवन जी सकती हूँ जिससे दूसरों से सराहना मिलेगी। इसीलिए, बचपन में, मैंने बड़ों की नकल करके चीज़ें बेचना सीखा, और हाई स्कूल उत्तीर्ण करने से पहले मैं गर्मी की छुट्टियों में ट्यूशन क्लास चलाती थी। कॉलेज में, मैंने सड़क किनारे ठेला लगाना और पार्ट-टाइम नौकरियाँ करना जारी रखा, और फिर स्नातक होने के बाद, मैंने एक स्कूल खोलकर अपना व्यवसाय शुरू किया। यह सब सिर्फ़ ज़्यादा पैसे कमाने के लिए था। लेकिन जब अचानक महामारी आई और मुझे कक्षाएँ बंद करनी पड़ीं, तो मेरी सारी योजनाएँ बर्बाद हो गईं, और मुझे अपनी जेब में आ चुके पैसों को वापस जाते हुए देखना पड़ा। तब मैंने सच में महसूस किया कि कड़ी मेहनत से जरूरी नहीं कि फल मिल ही जाए और हर चीज इंसान की योजनाओं के अनुसार नहीं होती है। इंसान का भाग्य पूरी तरह से परमेश्वर के हाथों में है। इस जीवन में मेरे पास कितना धन होगा यह मेरी कोशिशों और योजनाओं पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सृष्टिकर्ता की पूर्वनियति और संप्रभुता पर निर्भर करता है। इंसान की योजनाएँ और कोशिशें सिर्फ़ आदर्श और आकांक्षाएँ हैं। वे किसी भी अंतिम परिणाम को तय नहीं कर सकते हैं, न ही परमेश्वर की पूर्वनियतियों को बदल सकते हैं। परमेश्वर ने मुझे संगीत और प्रस्तुति में प्रतिभा दी ताकि मैं अपनी आजीविका कमा सकूँ। लेकिन मैं असंतुष्ट रही, धन और प्रचुरता का जीवन जीने के लिए हमेशा अपनी कोशिशों पर निर्भर रहना चाहती थी, परमेश्वर के आयोजनों और व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण नहीं कर पा रही थी। अंत में, मैं न सिर्फ़ अपनी इच्छाएँ पूरी करने में नाकाम रही, बल्कि मैंने ख़ुद को थका भी दिया और अंदर से बहुत पीड़ा महसूस की। मैं सच में मूर्ख थी! फिर मैंने परमेश्वर के और वचन पढ़े और अभ्यास का एक मार्ग पाया। परमेश्वर कहता है : “इस बात को मान लेने के बाद तुम्हें जीवन के अपने पुराने दृष्टिकोण को त्याग देना चाहिए, विभिन्न जालों से दूर रहना चाहिए, तुम्हें परमेश्वर को तुम्हारे जीवन का नियंत्रण करने देना चाहिए और इसके लिए व्यवस्थाएँ करने देना चाहिए, केवल परमेश्वर के आयोजनों और मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करने का दृढ़ संकल्प करना चाहिए, खुद से कोई चुनाव नहीं करने चाहिए और एक ऐसा इंसान बनना चाहिए जो परमेश्वर की आराधना करता हो(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III)। मैं परमेश्वर की पूर्वनियति के विरुद्ध अब और संघर्ष नहीं करना चाहती थी और उसकी संप्रभुता और व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने को तैयार थी। उसके बाद, मैंने सक्रिय रूप से सभाओं में भाग लिया और परमेश्वर के वचन खाए और पीए, और मैंने नवागतों को सींचने का प्रशिक्षण भी लेना शुरू कर दिया। मेरे दिल ने सहज और मुक्त महसूस किया और मैंने परमेश्वर का अनुग्रह देखा। महामारी के दौरान, सभी उद्योग मंदी में थे, और अधिकतर शिक्षण संस्थानों ने भारी नुकसान सहा। लेकिन, मेरा स्कूल न सिर्फ़ सामान्य रूप से चल पा रहा था, बल्कि दो अन्य संस्थानों ने तो मुझसे साझेदारी के लिए संपर्क किया, मुझे इस मुश्किल दौर से गुज़रने में मदद दी।

जून 2022 में, मैंने सिंचन समूह अगुआ का कर्तव्य संभाला। परमेश्वर के वचन खाने और पीने से, मैं समझ गई कि इस समय, परमेश्वर मानवजाति के अपने अंतिम उद्धार को कार्यान्वित कर रहा है और अंत में परमेश्वर इस युग को समाप्त करने के लिए विभिन्न महाविनाशों का उपयोग करेगा, अपने-अपने कर्मों के अनुसार भले को इनाम और बुरे को दंड देगा। सिर्फ़ वे जो सत्य का अभ्यास करते हैं, अपना कर्तव्य अच्छे ढंग से निभाते हैं और अपने भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध करवा चुके हैं, परमेश्वर द्वारा बचाए जा सकते हैं और वे जीवित रह सकते हैं। जहाँ तक मेरी बात है, हर हफ़्ते मेरी अनियमित कक्षाओं के अलावा, मुझे सहयोगी परिसरों में भी विभिन्न मसलों को सँभालना पड़ता था, और मेरे पास सत्य का अनुसरण करने और अपना कर्तव्य अच्छी तरह से करने के लिए पर्याप्त समय या ऊर्जा ही नहीं थी। इसलिए मैंने अपने कर्तव्य के लिए ज़्यादा समय निकालने के लिए अपनी नौकरी का कुछ हिस्सा छोड़ने के बारे में सोचा। लेकिन मैं दुविधा में थी, मैंने सोचा, “मेरा कर्तव्य पढ़ाने और पैसे कमाने से ज़्यादा ज़रूरी है, लेकिन पढ़ाना बहुत थकाने वाला भी नहीं है, और सहयोगी परिसर भी लगातार विकसित हो रहे हैं। अगर मैं इन चीज़ों को छोड़ दूँ, तो मैं बहुत कम कमाऊँगी!” मैं इन चीज़ों को त्यागने के लिए थोड़ी-बहुत अनिच्छुक महसूस कर रही थी। फिर मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की, उससे मार्गदर्शन माँगा ताकि मैं ये बोझ त्याग सकूँ और उसके वचन खाने-पीने और अपना कर्तव्य निभाने के लिए और अधिक समय निकाल सकूँ। उसके बाद मैंने परमेश्वर के वचनों के बारे में सोचा : “राज्य मानवजाति के बीच फैल रहा है, यह मानवजाति के बीच बन रहा है और यह मानवजाति के बीच खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। मेरे लोग, जो आज के राज्य में हैं, तुम लोगों में से कौन मानवजाति का सदस्य नहीं है? तुममें से कौन मानवीय स्थिति के बाहर है? जब मेरा नया शुरुआती बिंदु सार्वजनिक किया जाएगा तो लोग किस तरह से प्रतिक्रिया देंगे? तुम लोगों ने अपनी आँखों से मानव दुनिया की दशा देखी है; क्या तुमने अभी तक इस दुनिया में हमेशा के लिए रहने के विचार दूर नहीं किए हैं?(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 19)। परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार दुनिया के सभी राष्ट्रों में फैल चुका है, विभिन्न आपदाएँ और युद्ध आ चुके हैं, और मानव-जाति को बचाने का परमेश्वर का कार्य समाप्त होने वाला है। अगर मैंने अपना कर्तव्य ठीक ढंग से न निभाया और धन के अनुसरण पर ध्यान देती रही, तो मैं सत्य को प्राप्त करने और खुद को बचाए जाने का अवसर बस बर्बाद कर बैठूँगी। अंत में, अगर मैं आपदा में पड़ गई, तो कोई भी रक़म मेरी जान नहीं बचा पाएगी। सत्य का अनुसरण करना और अपना कर्तव्य उचित ढंग से निभाना ही वास्तव में मायने रखता है। इसलिए मैंने सबसे पहले अपनी निजी स्कूल की कक्षाओं से इस्तीफ़ा दे दिया, और फिर, एक के बाद एक, मैंने दोनों परिसरों के साथ अपनी साझेदारियाँ समाप्त कर दीं। इससे मुझे सोमवार से शुक्रवार तक अपना कर्तव्य निभाने का समय मिल गया, यानी मैं सिर्फ़ सप्ताहांत पर पढ़ाती थी। यूँ तो अब मेरे साझेदार स्कूल पहले से कम थे और मैं कम पैसे कमाती थी, लेकिन मेरे पास परमेश्वर के वचन खाने-पीने और अपना कर्तव्य निभाने के लिए ज़्यादा समय था और मेरा दिल सहज और सुकून महसूस करता था। मैंने सोचा कि मैंने पैसों से अपना लगाव कुछ हद तक छोड़ दिया है, लेकिन मुझे क्या पता था कि एक और बड़ा प्रलोभन मेरी प्रतीक्षा कर रहा था।

अप्रैल 2023 में, मेरी भाभी ने मुझे एक ऑनलाइन स्टोर के कारोबार के बारे में बताया, और उसने कहा कि मैं 3 से 6 महीनों में 5,00,000 युआन कमा सकती हूँ। मैं काफ़ी ललचा गई, सोचने लगी, “इतने कम समय में 5,00,000 कमाना—यह तो मेरे पढ़ाने से होने वाली कमाई से कहीं ज़्यादा होगा। मेरे पास पहले से ही एक घर है, लेकिन अगर मैं अपनी कार को एक लक्ज़री ब्रांड की कार से बदल सकूँ, तो शहर में गाड़ी चलाते समय मैं और भी प्रभावशाली दिखूँगी।” लेकिन, उस समय, मैं बेचैन थी और धोखा खाने से डर रही थी, और मुझे यह भी चिंता थी कि व्यवसाय करने से मेरा कर्तव्य प्रभावित होगा, इसलिए मैंने मना कर दिया। बाद में, मेरी भाभी ने एक स्टोर खोला और मैनेजर बन गई, और मैंने उसकी आमदनी को धीरे-धीरे प्रति दिन दसियों युआन से बढ़कर एक से दो हज़ार तक पहुँचते देखा। कुछ लोग जिन्होंने उसका अनुसरण किया, वे मुझसे कम काबिल थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने स्टोर खोले और मैनेजर बन गए, वे रोज हज़ारों युआन कमा रहे थे। इस सबने मुझे और भी ज़्यादा ललचा दिया। मैंने सोचा, “यह तो आसान पैसा लगता है। अगर मैं भी प्रति दिन हज़ारों कमा सकूँ, तो मैं तीन महीनों में 5,00,000 कमा सकती हूँ—तब तो नई कार की मेरी इच्छा जल्द ही पूरी हो जाएगी।” नई कार खरीदने के बाद दूसरों द्वारा मेरी प्रशंसा और ईर्ष्या किए जाने के विचार ने मुझे प्रेरित किया, और बिना किसी झिझक के, मैंने कुछ हज़ार युआन का निवेश कर दिया। बाद में, और ज़्यादा पैसे कमाने के लिए, मैंने दोस्तों और रिश्तेदारों को इस व्यवसाय से जोड़ने के लिए परिचित कराया, वादा किया कि वे निश्चित रूप से पैसा कमाएंगे और अगर उन्हें नुक़सान हुआ तो मैं उनकी भरपाई करूँगी। मैं अपनी टीम का विस्तार करती रही, और मेरा प्रदर्शन बढ़ता रहा। जून तक, मैं भी एक स्टोर मैनेजर बन गई थी, और मेरी दैनिक आमदनी लगभग 2,000 युआन थी। जुलाई में, मैंने एक और शाखा खोली। कारोबार पहले से ज़्यादा व्यस्त हो गया, और मैं ज़्यादा पैसे भी कमा रही थी।

अगस्त 2023 में, भाई-बहनों ने मुझे एक सिंचन उपयाजक चुना। अपने कर्तव्यों पर असर पड़ने से बचाने के लिए मैं अपने कर्तव्य हमेशा दिन में निभाती थी और घर लौटने के बाद रात में ऑनलाइन स्टोर का काम देखती थी। अक्सर, मैं रात 1 या 2 बजे भी कॉन्फ़्रेंस कॉल पर होती थी। मैं अक्सर इतनी व्यस्त रहती थी कि मेरे पास खाने का भी समय नहीं होता था। सिर्फ़ तीन महीनों में, मैंने आठ स्टोर खोल लिए थे, और मैंने 20 लाख से ज़्यादा की बिक्री कर ली थी। लेकिन चूँकि मैं देर रात तक जागती रहती, मुझे अक्सर दिन में सिरदर्द होता और मैं थकी रहती, मुझे चक्कर आते और ऊर्जा की कमी महसूस होती। इसने मेरी उस दशा को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया जिसमें मैं अपने कर्तव्य निभाती थी। मैं सभाओं में भी सिर्फ़ रस्म अदायगी कर रही थी, और मैं समस्याओं का पता नहीं लगा पाती थी या अपने भाई-बहनों की मुश्किलों का समाधान नहीं कर पाती थी। जैसे ही मैं घर पहुँचती, ऑनलाइन स्टोर के मसले मेरा इंतज़ार कर रहे होते थे और मैं थककर चूर महसूस करती थी। लेकिन पैसे कमाने के लिए, मैं ख़ुद को मुक्त करने में असहाय महसूस करती थी, जैसे कि मुझे नियंत्रित किया जा रहा हो। मैंने अपनी भाभी से पूछा, “किस मुकाम पर मैं 5,00,000 कमा पाऊँगी और फिर मुझे ऑनलाइन स्टोर नहीं सँभालने होंगे?” उसने जवाब दिया, “जब तुम्हारी टीम का प्रदर्शन 50 लाख तक पहुँच जाएगा, तो तुम इस उद्योग से अलग हो सकती हो और स्टोर सँभालना बंद कर सकती हो। तब तक, तुम ठीक 5,00,000 कमा चुकी होगी।” जब मैंने यह सुना, तो मेरा सिर चकरा गया, और मुझे अचानक एहसास हुआ कि मेरे साथ धोखा हुआ है। मैंने सोचा था कि 5,00,000 कमाने में सिर्फ़ तीन महीने लगेंगे, और तब तक मैंने पैसे भी कमा लिए होंगे और अपने कर्तव्यों में देरी भी नहीं की होगी। मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि 50 लाख युआन के टीम प्रदर्शन की भी कोई शर्त होगी। मैं उस शर्त तक कब पहुँच पाऊँगी और मुक्त हो पाऊँगी? यह संख्या बहुत दूर महसूस हुई। मैं इतनी चिंतित थी कि न खा सकती थी, न सो सकती थी। उस समय, मैं प्रति दिन 8,000 युआन से ज़्यादा कमा रही थी, लेकिन मैं बिल्कुल भी ख़ुश नहीं थी। मुझे एहसास हुआ कि मैं गलत रास्ते पर चली गई हूँ और मैं बहुत पीड़ा में थी, इसलिए मैंने प्रार्थना की, “हे परमेश्वर, अब मैं जान गई हूँ कि मैं धन के भँवर में फँस गई हूँ। मैंने सोचा था कि यह सिर्फ़ कुछ हज़ार युआन का छोटा-मोटा कारोबार है, और मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि यह मुझे बाँधने वाली बेड़ियाँ बन जाएगा। मैं इससे कैसे छुटकारा पा सकती हूँ? हे परमेश्वर, कृपया मेरी मदद कर और मेरा मार्गदर्शन कर।” प्रार्थना करने के बाद, मैंने 5,00,000 न कमाने का फ़ैसला किया। मैंने अपनी भाभी को फ़ोन किया और उसे अपना फ़ैसला बताया। मेरी भाभी ने देखा कि मैं अपने फ़ैसले पर अडिग हूँ और इसलिए वह मान गई। मेरे पीछे हटने के कुछ ही समय बाद, एक दिन, मुझे अचानक खबर मिली कि यह ऑनलाइन स्टोर का कारोबार असल में इंटरनेट पर प्रचलित एक नए तरह की धोखाधड़ी थी। इसमें पहले लोगों को पैसा कमाने दिया जाता है, और फिर, जब वे बेफ़िक्र हो जाते हैं, तो धोखेबाज़ सारा निवेश किया हुआ पैसा लेकर भाग जाते हैं। आख़िरकार मुझे एहसास हुआ कि मेरे साथ धोखा हुआ है। मैं स्तब्ध रह गई और मैंने खुद को पंगु महसूस किया। मैंने टीम को बढ़ाने के लिए बहुत से लोगों को इससे जोड़ा था और हर एक को गारंटी दी थी कि किसी भी नुक़सान के लिए मैं ज़िम्मेदार होऊँगी। अब जब ऑनलाइन स्टोर बंद हो गए थे, तो वे सभी लोग मुझसे पैसे माँगने लगे जिन्हें मैंने जोड़ा था। बस इसी तरह पैसे के लालच के कारण मैं एक घोटाले में घसीटी गई। कई लाख का मुआवज़ा चुकाने की नौबत आने पर, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। पूरे एक हफ़्ते तक, मैं धमकियों, गालियों और पूछताछ से घिरी हुई थी, और मुझ पर पैसे माँगने वाले फ़ोन कॉल्स और संदेशों की बौछार हो रही थी। मैं इतनी डर गई थी कि मुझमें अपने फ़ोन को देखने की भी हिम्मत नहीं हुई, और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस सब का सामना कैसे करूँ। दर्द इस हद तक बढ़ गया कि मैंने सब कुछ ख़त्म करने के लिए किसी इमारत से कूदने के बारे में भी सोचा। मैंने सोचा कि भले ही मेरे साथ भी धोखा हुआ है, मैं परिणाम भुगतने से बच नहीं सकती, इसलिए अंत में, मैंने मुआवज़े के तौर पर लगभग 2,00,000 युआन चुकाए। एक हफ़्ते में मेरा वज़न पाँच किलो से ज़्यादा घट गया। अपनी पीड़ा और निराशा में मैंने रोते-रोते प्रार्थना की, “हे परमेश्वर, मैं गलत थी। मैं जानती हूँ कि मेरी महत्त्वाकांक्षा और इच्छाओं ने मुझे बर्बाद कर दिया। मैं इतनी अधिक पीड़ा में हूँ, लेकिन मैं जानती हूँ कि मेरे साथ ये चीजें तेरी अनुमति से घटित हुई हैं। कृपया मेरा मार्गदर्शन करो कि मैं तुम्हारा इरादा समझ सकूँ।” प्रार्थना करने के बाद, मेरा दिल धीरे-धीरे शांत हो गया, और मैं सत्य खोजने को तैयार हो गई।

मैंने खोज में परमेश्वर के वचन पढ़े और मैं यह समझ गई कि शैतान कैसे प्रसिद्धि और लाभ के ज़रिए लोगों को भ्रष्ट करता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “शैतान लोगों के विचारों को नियंत्रित करने के लिए प्रसिद्धि और लाभ का इस्तेमाल करता है, उनसे और कुछ नहीं, बस इन दो ही चीजों के बारे में सोच-विचार करवाता है और उनसे प्रसिद्धि और लाभ के लिए संघर्ष करवाता है, प्रसिद्धि और लाभ के लिए कष्ट उठवाता है, प्रसिद्धि और लाभ के लिए अपमान सहन करवाता है और भारी बोझ उठवाता है, प्रसिद्धि और लाभ के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करवाता है और उनसे प्रसिद्धि और लाभ की खातिर हर फैसला या निर्णय करवाता है। इस तरीके से शैतान लोगों पर अदृश्य बेड़ियाँ डाल देता है और इन बेड़ियों के रहते उनमें उन्हें तोड़ देने की न तो क्षमता होती है, न ही साहस होता है। अनजाने में वे बड़ी ही कठिनाई से कदम-दर-कदम आगे घिसटते हुए ये बेड़ियाँ ढोते रहते हैं। इस प्रसिद्धि और लाभ की खातिर मानवजाति भटककर परमेश्वर से दूर हो जाती है, उसके साथ विश्वासघात करती है और अधिकाधिक दुष्ट होती जाती है। इस तरह, एक के बाद एक पीढ़ी शैतान की प्रसिद्धि और लाभ के बीच नष्ट होती जाती है(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI)। “‘दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है’ यह शैतान का एक फ़लसफ़ा है। यह संपूर्ण मानवजाति में, हर मानव-समाज में प्रचलित है; तुम कह सकते हो, यह एक रुझान है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह हर एक व्यक्ति के हृदय में बैठा दिया गया है, जिन्होंने पहले तो इस कहावत को स्वीकार नहीं किया, किंतु फिर जब वे जीवन की वास्तविकताओं के संपर्क में आए, तो इसे मूक सहमति दे दी, और महसूस करना शुरू किया कि ये वचन वास्तव में सत्य हैं। क्या यह शैतान द्वारा मनुष्य को भ्रष्ट करने की प्रक्रिया नहीं है? ... चाहे इस कहावत के संबंध में किसी के पास कितना भी अनुभव हो, इसका किसी के हृदय पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है? तुम लोगों में से प्रत्येक को शामिल करते हुए, दुनिया के लोगों के स्वभाव के माध्यम से कोई चीज प्रकट होती है। यह क्या है? यह पैसे की उपासना है। क्या इसे किसी के हृदय में से निकालना कठिन है? यह बहुत कठिन है! ऐसा प्रतीत होता है कि शैतान का मनुष्य को भ्रष्ट करना सचमुच गहन है! शैतान लोगों को प्रलोभन देने के लिए धन का उपयोग करता है, और उन्हें भ्रष्ट करके उनसे धन की आराधना करवाता है और भौतिक चीजों की पूजा करवाता है। और लोगों में धन की इस आराधना की अभिव्यक्ति कैसे होती है? क्या तुम लोगों को लगता है कि बिना पैसे के तुम लोग इस दुनिया में जीवित नहीं रह सकते, कि पैसे के बिना एक दिन जीना भी असंभव होगा? लोगों की हैसियत इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास कितना पैसा है, और वे उतना ही सम्मान पाते हैं। गरीबों की कमर शर्म से झुक जाती है, जबकि धनी अपनी ऊँची हैसियत का मज़ा लेते हैं। वे ऊँचे और गर्व से खड़े होते हैं, जोर से बोलते हैं और अहंकार से जीते हैं। यह कहावत और रुझान लोगों के लिए क्या लाता है? क्या यह सच नहीं है कि पैसे पाने के लिए लोग कुछ भी बलिदान कर सकते हैं? क्या अधिक पैसे की खोज में कई लोग अपनी गरिमा और ईमान का बलिदान नहीं कर देते? क्या कई लोग पैसे की खातिर अपना कर्तव्य निभाने और परमेश्वर का अनुसरण करने का अवसर नहीं गँवा देते? क्या सत्य प्राप्त करने और बचाए जाने का अवसर खोना लोगों का सबसे बड़ा नुकसान नहीं है? क्या मनुष्य को इस हद तक भ्रष्ट करने के लिए इस विधि और इस कहावत का उपयोग करने के कारण शैतान कुटिल नहीं है? क्या यह दुर्भावनापूर्ण चाल नहीं है? जैसे-जैसे तुम इस लोकप्रिय कहावत का विरोध करने से लेकर अंततः इसे सत्य के रूप में स्वीकार करने तक की प्रगति करते हो, तुम्हारा हृदय पूरी तरह से शैतान के चंगुल में फँस जाता है, और इस तरह तुम अनजाने में इस कहावत के अनुसार जीने लगते हो। इस कहावत ने तुम्हें किस हद तक प्रभावित किया है? हो सकता है कि तुम सच्चे मार्ग को जानते हो, और हो सकता है कि तुम सत्य को जानते हो, किंतु उसकी खोज करने में तुम असमर्थ हो। हो सकता है कि तुम स्पष्ट रूप से जानते हो कि परमेश्वर के वचन सत्य हैं, किंतु तुम सत्य को पाने के लिए क़ीमत चुकाने का कष्ट उठाने को तैयार नहीं हो। इसके बजाय, तुम बिल्कुल अंत तक परमेश्वर का विरोध करने में अपने भविष्य और नियति को त्याग दोगे। चाहे परमेश्वर कुछ भी क्यों न कहे, चाहे परमेश्वर कुछ भी क्यों न करे, चाहे वह प्रेम कितना गहरा और कितना महान क्यों न हो जो परमेश्वर को तुम्हारे प्रति है, जहाँ तक तुम समझने में समर्थ हो, तुम फिर भी हठपूर्वक अपने रास्ते पर ही चलते रहने का आग्रह करोगे और इस कहावत की कीमत चुकाओगे(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V)। परमेश्वर के वचनों पर विचार करते हुए, मैं समझ गई कि यह शैतान ही है जो लोगों में बहुत सारे गलत विचार और ख्याल डाल चुका है, लोगों से धन, प्रसिद्धि, लाभ और भौतिक इच्छाओं की आराधना करवा रहा है, एक-मन से धन, प्रसिद्धि और लाभ का अनुसरण करवा रहा है और सत्य खोजने और परमेश्वर का उद्धार पाने के लिए लोगों को परमेश्वर के सामने आने में असमर्थ बना रहा है। मैं शैतान द्वारा डाले गए ज़हर के सहारे जी रही थी, जैसे कि “दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है,” “पैसा ही सब कुछ नहीं है, किन्तु इसके बिना, आप कुछ नहीं कर सकते हैं,” “भीड़ से ऊपर उठो,” और “दूसरों से ऊँचा स्थान रखो।” मैंने सोचा था कि पैसा ही हर चीज़ का जवाब है, कि कोई इंसान उसके बिना जीवित नहीं रह सकता और अगर किसी के पास पैसा है, तो उसकी सामाजिक स्थिति सम्मानजनक हो जाती है और दूसरे फिर उसे नीची नज़र से देखने या उसका मज़ाक उड़ाने की हिम्मत नहीं करेंगे। जब मैं छोटी थी, तो मेरा मज़ाक उड़ाया जाता था क्योंकि मेरा परिवार गरीब था, इसलिए मैं अमीर बनना और समृद्धि का जीवन जीना चाहती थी, ताकि दूसरे मेरी तारीफ़ करें। पैसा कमाने के लिए, मैंने हर तरह के तरीक़े आज़माए, और मैंने सभाओं में जाना और परमेश्वर के वचन पढ़ना बंद कर दिया। यहाँ तक कि जब मेरी माँ परमेश्वर के वचनों की पुस्तक लेकर मेरे पास आती थी तो मैं अधीर होकर इसे हटा देती थी। एक कला विद्यालय खोलने के बाद, मैं हमेशा यह सोचती रहती थी कि ज़्यादा पैसे कमाने के लिए कैसे बाज़ार में प्रचार करूँ और ज़्यादा छात्रों की भर्ती करूँ। हर दिन, मेरा दिमाग़ तनाव में रहता था, और मैं इस हद तक थक जाती थी कि मुझे नींद न आने और सिरदर्द की समस्या हो गई। आख़िरकार, महामारी के कारण, सब कुछ बंद हो गया, और सिर्फ़ तभी मैं परमेश्वर की उपस्थिति में लौटी। बाद में, परमेश्वर के वचन पढ़कर, मुझे एहसास हुआ कि जीवन में मेरा भाग्य और मेरे पास कितना धन होगा, यह सब परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत था और मेरी कोशिशों और योजनाओं पर निर्भर नहीं था। लेकिन, चूँकि पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के लिए मेरी इच्छा बहुत प्रबल थी, मैं उन बुरे साधनों को नहीं पहचान पाई जिनका उपयोग शैतान लोगों को नुक़सान पहुँचाने के लिए करता है। इसलिए जब मैं एक बार फिर पैसे के लालच में आ गई, एक लक्ज़री कार ख़रीदने और लोगों से प्रशंसा और ईर्ष्या पाने के लिए अतिरिक्त 5,00,000 युआन कमाने के चक्कर में, मैं भटक गई और एक ऑनलाइन धोखे में फँस गई, एक सम्मानित स्कूल प्रिंसिपल से लोगों को उनके पैसे के लिए धोखा देने वाली घोटालेबाज बन गई। भारी मुआवज़े की रक़म और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से अंतहीन आलोचना और गाली-गलौज का सामना करते हुए, मुझे लगा जैसे मैं गली की चुहिया हूँ। मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह से, मैंने ज़बरदस्त झटके और तकलीफ़ें सहीं, और मैंने तो इस सबसे बचने के लिए अपनी जान देने के बारे में भी सोचा। मैंने देखा कि पैसा, प्रसिद्धि और लाभ एक अदृश्य रस्सी की तरह थे जिसने मुझे कसकर बाँध रखा था, और मैं इन शैतानी ज़हरों के सहारे जीती आई थी, पैसे, प्रसिद्धि और लाभ की प्राप्ति को ही अपने जीवन का लक्ष्य मानती थी, और नतीजतन, मुझे शैतान ने धोखा दिया, और मैंने अकथनीय कष्ट झेले। मैंने देखा कि धन, प्रसिद्धि और लाभ का अनुसरण करना मेरे जीवन को सिर्फ़ और दर्दनाक बना सकता है, मुझे परमेश्वर से भटका सकता है, और मुझसे परमेश्वर के उद्धार का मौक़ा छीन सकता है। फिर मैंने सोचा कि कैसे बहुत से लोग, व्यापार में पैसा गँवाने के बाद, अवसाद का शिकार हो जाते हैं, और कुछ, इसे सहन न कर पाने के कारण, अपनी जान देने के लिए कूद भी जाते हैं। मैंने देखा कि पैसे का अनुसरण करना विनाश का मार्ग है। मैं बहुत ख़ुश थी कि मैं परमेश्वर का अनुसरण करने लगी थी, जिससे जब ये चीजें मेरे साथ घटित हुईं तो मेरे पास परमेश्वर के वचनों की प्रबुद्धता और अगुआई थी, जिसने मुझे सत्य को समझने और यह विवेकशीलता प्राप्त करने में सक्षम बनाया कि शैतान किस तरह लोगों को भ्रष्ट करने के लिए पैसे, प्रसिद्धि और लाभ का उपयोग करता है। वरना, मैं भी आत्महत्या करने वालों में से एक होती। यूँ तो इस मामले में मैंने पैसा गँवाया, लेकिन मैंने मुझे बचाने के परमेश्वर के श्रमसाध्य इरादे देख लिए। मैंने तहे दिल से परमेश्वर का धन्यवाद किया!

एक दिन मैंने भक्ति के दौरान परमेश्वर के वचन पढ़े और मैं यह समझ गई कि परमेश्वर लोगों से क्या माँग करता है और अनुसरण करने के लिए वास्तव में क्या सार्थक है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “परमेश्वर तुमसे यह नहीं चाहता कि तुम अपनी सारी ताकत सिर्फ जीवित रहने और जीते रहने में लगा दो। वह तुमसे भव्य जीवन जीने और उसके माध्यम से उसे महिमामंडित करने की अपेक्षा नहीं करता, न ही वह तुमसे इस दुनिया में कोई महान कर्म करने, कोई चमत्कार करने, मानवजाति के लिए कोई योगदान करने, किसी भी संख्या में लोगों को सहायता प्रदान करने या किसी भी संख्या में लोगों की रोजगार संबंधी समस्याओं का समाधान करने की अपेक्षा करता है। तुम्हारे लिए एक महान करियर बनाना, दुनिया भर में प्रसिद्ध होना और फिर इन चीजों का इस्तेमाल करके परमेश्वर के नाम की महिमा करना, और दुनिया में यह ऐलान करना अनावश्यक है, ‘मैं एक ईसाई हूँ, मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करता हूँ।’ परमेश्वर सिर्फ यह आशा करता है कि तुम इस संसार में एक साधारण जन और एक सामान्य व्यक्ति बन सको। तुम्हें कोई चमत्कार करने की जरूरत नहीं है; तुम्हें विभिन्न व्यवसायों या क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने, या एक प्रसिद्ध व्यक्ति या एक महान हस्ती बनने की जरूरत नहीं है। तुम्हें ऐसा व्यक्ति बनने की जरूरत नहीं है जो लोगों की प्रशंसा या सम्मान बटोरे, न ही तुम्हें विभिन्न क्षेत्रों में कोई अभूतपूर्व प्राप्ति या कोई उपलब्धि हासिल करने की जरूरत है। परमेश्वर को महिमामंडित करने के लिए तुम्हें विभिन्न व्यवसायों में कोई योगदान देने की निश्चित रूप से कोई जरूरत नहीं है। तुमसे परमेश्वर की अपेक्षा सिर्फ यह है कि तुम अपना जीवन अच्छी तरह से जिओ, बुनियादी जरूरतें पूरी करो, भूखे न रहो, सर्दियों में गर्म और गर्मियों में उपयुक्त कपड़े पहनो। अगर तुम्हारा जीवन सामान्य है और तुममें जीवित रहने की क्षमता है, तो यह पर्याप्त है—परमेश्वर की तुमसे यही अपेक्षा है। तुममें चाहे जो भी गुण, प्रतिभा या विशेष क्षमताएँ हों, परमेश्वर नहीं चाहता कि तुम उनका उपयोग सांसारिक सफलता प्राप्त करने के लिए करो। इसके बजाय, वह चाहता है कि तुममें जो भी प्रतिभा या काबिलियत है, उसे तुम अपना कर्तव्य निभाने में, जो वह तुम्हें सौंपता है उसमें और सत्य का अनुसरण करने में और अंततः उद्धार प्राप्त करने में लगाओ। यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है, और परमेश्वर इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहता(वचन, खंड 6, सत्य के अनुसरण के बारे में, सत्य का अनुसरण कैसे करें (21))। “अंत के दिन एक विशेष समय भी हैं। एक दृष्टि से, कलीसिया के मामले व्यस्त और जटिल हैं; दूसरे नजरिये से, इस क्षण जबकि परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार फैल रहा है, परमेश्वर के घर के भीतर की विभिन्न परियोजनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक लोगों को अपना समय और ऊर्जा देने, अपने प्रयासों का योगदान देने और अपने कर्तव्यों को पूरा करने की आवश्यकता है। इसलिए, तुम्‍हारा पेशा जो भी हो, यदि जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के अलावा, तुम परमेश्वर के घर में अपने कर्तव्य को पूर्ण करने, और विभिन्न परियोजनाओं में सहयोग करने के लिए अपना समय और ऊर्जा समर्पित करने में सक्षम हो, तो परमेश्वर की दृष्टि में, यह न केवल वांछनीय है बल्कि इसका विशेष मोल भी है। यह परमेश्वर द्वारा याद रखने योग्य है, और निश्चित रूप से यह इस योग्य भी है कि लोग इसमें इतना निवेश और व्‍यय करें। ऐसा इसलिए कि यद्यपि तुमने देह के सुखों का त्याग किया है, लेकिन तुम्‍हें जो प्राप्त हुआ है, वह है परमेश्वर के वचनों का अमूल्‍य जीवन, एक अनंत जीवन, एक अमूल्य खजाना जिसका दुनिया में किसी भी चीज से, पैसे या किसी अन्य चीज से आदान-प्रदान नहीं किया जा सकता है। और यह अमूल्य खजाना, वह चीज जिसे तुम समय और ऊर्जा का निवेश करके, स्‍वयं के प्रयासों और अनुसरण के माध्यम से प्राप्त करते हो : यह एक विशेष उपकार है और कुछ ऐसा है जिसे तुमने भाग्‍यशाली होने के कारण पाया है, है न? परमेश्वर के वचनों और सत्य का किसी का जीवन बन जाना : यह एक अमूल्य खजाना है जिसके बदले में अपना सब कुछ अर्पित कर देना उचित है। ... यदि भोजन और वस्त्र प्राप्त करने के बाद, तुम अतिरिक्त समय और ऊर्जा लगाते हो, अधिक पैसा कमाते हो, अधिक भौतिक सुख प्राप्त करते हो, और तुम्‍हारा शरीर संतुष्ट हो जाता है, लेकिन ऐसा करने में, तुम अपने उद्धार की आशा को नष्‍ट कर देते हो तो यह निस्संदेह तुम्‍हारे लिए अच्छी बात नहीं है। तुम्‍हें इस बारे में परेशान और चिंतित होना चाहिए; तुम्‍हें अपने काम को या जीवन के बारे में अपने रवैये और भौतिक जीवन की गुणवत्ता से संबंधित माँगों को समायोजित करना चाहिए; तुम्‍हें शारीरिक जीवन की कुछ ऐसी इच्छाओं, योजनाओं और उद्देश्‍यों को छोड़ देना चाहिए जो वास्तविकता से मेल नहीं खाते हैं। तुम्‍हें परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए, उसके समक्ष आना चाहिए, और अपने कर्तव्य को पूरा करने का संकल्प लेना चाहिए, अपने मन और शरीर को परमेश्वर के घर के विभिन्न कार्यों में लगाना चाहिए, ताकि भविष्य में, जिस दिन परमेश्वर का कार्य समाप्त हो जाए, जब वह तमाम तरह के सभी लोगों के काम की जाँच करे और इन तमाम तरह के सभी लोगों के आध्‍यात्मिक कद को नापे तो तुम उनका एक हिस्‍सा हो। जब परमेश्वर का महान कार्य पूरा हो जाएगा, जब परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा, जब यह आनंदमय दृश्य सामने आएगा, तो उसमें तुम्हारा परिश्रम, तुम्हारा निवेश और तुम्हारा बलिदान भी शामिल होगा। जब परमेश्वर महिमा पाता है, जब उसका कार्य पूरे ब्रह्मांड में फैलता है, जब हर कोई परमेश्वर के महान कार्य के सफलतापूर्वक पूर्ण होने का जश्न मना रहा होता है, तब आनंद के उस क्षण के सामने आने पर, तुम वह व्यक्ति होगे जो इस आनंद से जुड़ा हुआ है। तुम इस आनंद के भागीदार होगे, जिस समय बाकी सभी लोग आनंद से उछल और चिल्‍ला रहे होंगे, उस समय तुम वह व्यक्ति नहीं होगे जो रो रहा और दाँत पीस रहा होगा, अपनी छाती पीट और पीठ पर मार रहा होगा, जिसे दंड मिल रहा होगा, जिसे परमेश्वर द्वारा पूरी तरह से तिरस्कृत करके निकाल दिया जाएगा(वचन, खंड 6, सत्य के अनुसरण के बारे में, सत्य का अनुसरण कैसे करें (20))। परमेश्वर के वचनों से मुझे यह एहसास हुआ कि उसे यह जरूरत नहीं है कि उसकी महिमा करने या उसकी गवाही देने के लिए लोग प्रसिद्ध या महान बनें। परमेश्वर सिर्फ़ यह उम्मीद करता है कि जब तक लोगों के पास कपड़े और भोजन हैं, वे अपना और अधिक समय सत्य का अनुसरण करने और अपने कर्तव्यों को उचित ढंग से निभाने में लगाएंगे। मैंने सोचा कि मुझमें बचपन से ही संगीत की प्रतिभा रही है। स्नातक होने के बाद, मैंने अपनी प्रतिभा से अपनी आजीविका कमाई, और मेरे जीवन में, मेरे पास न सिर्फ़ कपड़ा और भोजन था, बल्कि कुछ अतिरिक्त भी था। लेकिन, मैं उससे संतुष्ट नहीं थी, बल्कि ज़्यादा पैसा कमाना और ज़्यादा लोगों की प्रशंसा पाना चाहती थी। मैंने सोचा कि सबसे अलग दिखना किसी भी चीज़ से ज़्यादा ज़रूरी है। पीछे मुड़कर सोचती हूँ, परमेश्वर को पाने से पहले, मैंने कुछ पैसे कमाए और लोगों की प्रशंसा का आनंद लिया, लेकिन अंदर से मैं सहज महसूस नहीं करती थी, कोई वास्तविक खुशी की तो बात ही छोड़ दो। हर दिन, काम के अलावा, मैं सिर्फ़ बोरियत दूर करने के लिए दोस्तों के साथ खाती-पीती और मस्ती करती थी, और मैं जीवन के उद्देश्य या उसके अर्थ या मूल्य को बिल्कुल भी नहीं समझती थी। पैसे ने मुझे अस्थायी भौतिक सुख तो दिया, पर वह मेरे अंदर के गहरे खालीपन को नहीं बदल सका। परमेश्वर के वचन पढ़कर, मैं समझ गई कि पैसे, प्रसिद्धि और लाभ का अनुसरण करने से भी खालीपन ही मिलता है, और इसका कोई मतलब नहीं है। सत्य का अनुसरण करने और एक सृजित प्राणी के कर्तव्य अच्छी तरह निभाने से ही जीवन सार्थक और मूल्यवान हो सकता है। मुझे प्रभु यीशु का कथन याद आया : “यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा?(मत्ती 16:26)। अतीत में, जब मेरे पास पैसे नहीं थे, तो मैं हमेशा सोचती थी कि एक बार जब मेरे पास पैसे आ जाएँगे, तो मैं संतुष्ट हो जाऊँगी, लेकिन पैसे होने के बाद भी, मैं ख़ुद को खाली महसूस करती और जीवन को निरर्थक पाती थी। पैसा वह नहीं है जिसकी लोगों को सच में ज़रूरत है। उदाहरण के लिए, मेरे गृहनगर में एक व्यक्ति था जो एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित था। वह एक पुल पर गया, अपने सारे पैसे नीचे फेंक दिए, और फिर उसने सब कुछ ख़त्म करने के लिए नदी में छलाँग लगा दी। जब बीमारी और मृत्यु का सामना होता है, चाहे आपके पास कितना भी पैसा, प्रसिद्धि और लाभ क्यों न हो, या कितने ही लोग आपकी तारीफ़ क्यों न करते हों, यह सब पूरी तरह से बेकार है। ये चीज़ें जीवन को नहीं ख़रीद सकती हैं और परमेश्वर का अनुसरण न करना, सत्य का अनुसरण न करना और कर्तव्य अच्छे ढंग से न निभाना अंततः खालीपन की ओर ले जाता है। परमेश्वर का कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है, और सत्य का अनुसरण करने के अवसर और समय ख़त्म हो रहे हैं। मुझे अपने समय का पूरा उपयोग करना चाहिए, परमेश्वर के और वचन खाने और पीने चाहिए और एक सृजित प्राणी के रूप में अपने कर्तव्य उचित ढंग से निभाने चाहिए। यही सबसे सार्थक है। मैंने लूत की पत्नी के बारे में सोचा। उसे स्वर्गदूतों ने बचाया था और वह सदोम शहर से पहले ही बच निकली थी, लेकिन चूँकि वह अपनी संपत्ति और धन को नहीं छोड़ सकी, उसने पीछे मुड़कर देखा और नमक का एक खंभा बन गई, जो शर्म का प्रतीक बन गया। हम अब मार्ग के अंतिम चरण में हैं और मुझे लूत की पत्नी के साथ जो हुआ उससे सबक़ सीखना चाहिए। मुझे धन, प्रसिद्धि और लाभ का अनुसरण त्यागना है और अपने कर्तव्यों को अच्छी तरह से निभाना है और सत्य का अनुसरण करना है। यही सबसे सार्थक जीवन है जिसे परमेश्वर अनुमोदन करता है।

मैं अब कलीसिया में एक अगुआ का कर्तव्य कर रही हूँ। सत्य से ख़ुद को लैस करने और अपने कर्तव्य अच्छे ढंग से निभाने के लिए और अधिक समय और ऊर्जा पाने के वास्ते मैंने सिर्फ़ दर्ज़न भर छात्रों को ही रखा है, और मैं अपने दैनिक ख़र्चों को पूरा करने के लिए हफ़्ते में 6 घंटे काम करती हूँ, अपना अधिकांश समय अपने कर्तव्य निभाने में लगाती हूँ। अपने कर्तव्य निर्वहन के जरिए मैंने यह सीख लिया है कि दूसरों के साथ कैसे मिलना-जुलना है, अपने कर्तव्यों को मानक स्तर तक कैसे निभाना है और अन्य बातों के अलावा, अपने भ्रष्ट स्वभावों को कैसे जानना है। अब, मैं हर दिन परमेश्वर के वचन पढ़ती हूँ और अपने कर्तव्य करती हूँ। मैं अब पैसे, प्रसिद्धि और लाभ से बंधी और पीड़ित नहीं हूँ, और मैं अपने दिल में हल्का और सहज महसूस करती हूँ। मुझे बचाने के लिए परमेश्वर का धन्यवाद!

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