20. मैंने ईमानदार बनकर शांति और खुशी पाई है

यांग चेंग, चीन

मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति काफी औसत थी : मेरे माता-पिता के पास कोई व्यावसायिक कौशल नहीं था, इसलिए वे केवल खेती-बाड़ी करके ही गुजारा कर पाते थे। गाँव के बगल में एक कारखाना था, जहाँ मेरे पिता भी कुछ पैसे कमा लेते थे। हालाँकि उनकी आमदनी कम थी, लेकिन यह हमारे पाँच सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त थी। लेकिन जब मैं बारह साल का हुआ, तो मैं इससे संतुष्ट नहीं था और अमीर लोगों के जीवन की खासकर सराहना करता था। मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त था जिसके परिवार के पास एक बड़ा ट्रक था। उनका जीवनस्तर हमारे गाँव के सभी परिवारों में सबसे अच्छा था, और हर कोई उनकी सराहना करता था। उसके कुनबे के लोग भी मसले पैदा होने पर अक्सर इसी परिवार से बात करते थे। ये बातें देखकर, मैंने तय किया कि बड़ा होकर, मुझे और पैसे कमाने हैं और उनके परिवार जैसा जीवन जीना है। यह इच्छा मेरे दिल में गहराई से अंकित हो गई थी। स्कूल में मेरे ग्रेड अच्छे नहीं थे, इसलिए एलीमेंट्री स्कूल पास करने के बाद मैं पैसे कमाने के लिए एक निर्माण स्थल पर काम करने चला गया। जब मैं सत्रह साल का था, तब मैंने बढ़ई का काम सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे, सामाजिक माहौल के प्रभाव में आकर, “पैसा सबसे पहले है”, और “दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है” मेरे आदर्श वाक्य बन गए और इन्होंने पैसे के लिए मेरी चाहत को और भी प्रबल बना दिया।

मैंने कई सालों तक एक बढ़ई के लिए काम किया, लेकिन ज्यादा पैसे नहीं कमाए। मैंने सोचा, “अगर मैं ऐसे ही चलता रहा, तो मैं वह जीवन कब जी पाऊँगा जिसकी दूसरे लोग प्रशंसा करते हैं?” इसलिए, मैंने एक अलग रास्ता ढूँढ़ा और अपना मालिक खुद बन गया, भवनों की नए सिरे से आंतरिक मरम्मत का काम करने लगा। शुरुआत में, ज्यादा काम पाने के लिए, मैंने अपनी कीमतें बहुत कम रखीं और ग्राहकों के साथ मिलकर सामग्री खरीदी, काम को अच्छी तरह से पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। जब भवन निर्माण सामग्री की दुकान के मालिक द्वारा घटिया सामग्री भेजी जाती थी, तो मैं उससे इसे अच्छी सामग्री से बदलने के लिए कहता था। मेरे ग्राहक इस बात के लिए मेरे बहुत कृतज्ञ होते थे कि मैं उनके प्रति इतना विचारशील हूँ। हमारे काम की गुणवत्ता अच्छी थी और मेरी कीमतें कम थीं, जिससे हमारे ग्राहकों ने हमारी तारीफ की, और धीरे-धीरे, हमें और काम मिलने लगा। बाद में, भवन निर्माण सामग्री की एक दुकान के मालिक ने अपने लिए और अधिक नियमित ग्राहक पक्के करने के लिए मुझे विशेष रूप से रात के खाने पर आमंत्रित किया। उसने मुझसे पूछा, “सामग्री खरीदते समय दूसरे बॉस तुम्हें कितना कमीशन देते हैं?” मैंने उलझन में पूछा, “कैसा कमीशन? मुझे कोई कुछ नहीं देता।” मालिक हैरान हुआ और बोला, “तुम बहुत ज्यादा ईमानदार हो। उस तरह काम करके तुम कितना पैसा कमा सकते हो? हम किस युग में जी रहे हैं? तुम्हें जमाने के साथ चलना होगा! जैसा कि कहावत है, ‘चालाकी के बिना धन नहीं आता।’ तुम चाहे किसी भी उद्योग में हो, कमीशन आम बात है। आम तौर पर, ग्राहक अपना घर रेनोवेट कराते समय सामग्री पर 10,000 से 20,000 युआन खर्च करते हैं। तुम उसमें से एक या दो हजार का कमीशन पा सकते हो। अगर बिना किसी मेहनत के, बस अपनी जुबान हिलाकर तुम्हें वह मिल सकता है, तो ऐसा क्यों न करें? ऐसा कैसा रहेगा? तुम मेरे पास ग्राहक लाओ, और मैं वादा करता हूँ कि साल में तुम्हें दसियों हजार और कमाने में मदद करूँगा।” जब मैंने पहली बार यह सुना, तो मुझे लगा कि पैसा कमाने का यह वाकई एक अच्छा तरीका होगा, लेकिन फिर मैंने सोचा, “क्या यह ग्राहकों को धोखा देना नहीं है?” मुझे लगा कि मेरा जमीर इसके लिए गवाही नहीं देगा, इसलिए मैंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं ऐसा कर सकता हूँ। मेरे ज्यादातर ग्राहक परिचितों द्वारा भेजे जाते हैं। अगर उन्हें पता चल गया कि मैं उन्हें धोखा दे रहा हूँ, तो यह धंधा खत्म हो जाएगा!” बॉस ने विश्वास के साथ कहा, “मैं दशकों से यह काम कर रहा हूँ, और कोई भी ग्राहक कभी मुझे ढूँढ़ते हुए नहीं आया, इसलिए चिंता मत करो! तुम्हें अपना तरीका बदलना होगा, वरना तुम कोई पैसा नहीं कमा पाओगे। लोग अक्सर कहते हैं, ‘केवल मूर्ख ही अपने हाथ आया पैसा नहीं लेता।’ इसके बारे में सोचो। क्या यह सच नहीं है?” मुझे लगा कि उसकी बात में दम है, और अगर मैं उसके साथ काम करूँ तो मैं और भी बहुत सारा पैसा कमा सकता हूँ। इसके अलावा, अगर मैं ईमानदारी से काम करता रहा, तो मैं उस सराहनीय उम्दा जीवन को कब हासिल कर पाऊँगा जिसका मैं अनुसरण करता हूँ? साथ ही, मेरे कार्यक्षेत्र के दूसरे लोग काम पर कार से आते थे, जो बहुत प्रभावशाली लगता था और उनके ग्राहक भी उन्हें सराहते थे। दूसरी ओर, चाहे मेरी कंपनी कितनी भी छोटी क्यों न हो, मैं अभी भी एक बॉस था, लेकिन मैं मोटरसाइकिल चलाता था। यह बहुत अपमानजनक था! जब मैंने इस बारे में सोचा, तो मैं सहमत हो गया। कुछ दिनों बाद, मेरे दोस्त का एक रिश्तेदार मेरे पास आया क्योंकि उसे अपने कार्यालय का नवीनीकरण करवाना था, और उसने मुझसे सामग्री खरीदने में मदद करने के लिए कहा। भवन निर्माण सामग्री की दुकान के मालिक ने मुझसे कहा, “यह एक दुर्लभ अवसर है। अगर तुम उसके लिए कीमत में थोड़ा और इजाफा कर दो, तो तुम्हारा कमीशन ज्यादा होगा।” मुझे लगा कि मेरा जमीर इसके लिए गवाही नहीं देगा। लेकिन, यह देखकर कि मेरा मन नहीं मान रहा था, उसने कहा, “तुम बहुत सीधे हो; आजकल अंतरात्मा को कौन गंभीरता से लेता है? भले ही तुम ग्राहक के पैसे बचा लो, तो भी वह तुम्हारे बारे में कुछ अच्छा नहीं कहेगा। चिंता मत करो, उसे खरीद के ऑर्डर में कोई गड़बड़ी नहीं दिखेगी।” लेकिन मुझे अभी भी थोड़ी झिझक महसूस हो रही थी, इसलिए मैं बस थोड़ा कम कमीशन लेने के लिए सहमत हो गया। बाद में, सामग्री की दुकान का मालिक कंपनी में आया और उसने मेरे दोस्त के रिश्तेदार को खरीद का ऑर्डर सौंप दिया। मुझे चिंता थी कि उसे पता चल जाएगा, और मेरा दिल जाल में फँसे खरगोश की तरह धड़क रहा था। मैंने सोचा, “मेरे दोस्त का रिश्तेदार एक होशियार व्यक्ति है। अगर उसे पता चल गया कि इसमें कुछ गड़बड़ चल रही है, तो क्या मेरी पूरी तरह बेइज्जती नहीं हो जाएगी?” मैं घबराया हुआ था, इसलिए मैंने अपने दोस्त के रिश्तेदार के चेहरे की ओर देखने की हिम्मत नहीं की। जब मैं बहुत बेचैनी महसूस कर रहा था, तभी उसने मुझसे पूछा, “क्या तुमने सारी सामग्री की जाँच कर ली है?” मैंने सोचा, “क्या उसे कुछ गड़बड़ दिखी?” मैं थोड़ा डर गया, और दोषी महसूस करते हुए बोला, “हाँ, मैंने कर ली है।” अप्रत्याशित रूप से, उसने बस कीमत देखी और उस पर हस्ताक्षर कर दिए, और सीधे उस मालिक से पैसे लेने के लिए वित्त विभाग में जाने को कहा जिसने सामग्री बेची थी। इस समय, मैं थोड़ा-सा तनावमुक्त होने लगा। मैंने मन ही मन सोचा, “भविष्य में अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर ऐसे बहुत सारे काम न करना ही बेहतर है। अगर मैं ऐसा करता हूँ, तो मेरी अंतरात्मा बेचैन रहेगी!”

बाद में, भवन निर्माण सामग्री की दुकान के मालिक ने मुझे 2,800 युआन का कमीशन दिया और मुझे खाना भी खिलाया। मैंने आसानी से मिले उस पैसे को देखा और मन ही मन सोचा, “मैंने बिना किसी मेहनत के, बस बोलकर ही इतना पैसा कमा लिया। इस बात में वाकई दम है कि ‘चालाकी के बिना धन नहीं आता।’ यह तो बस एक छोटा सा प्रोजेक्ट था। अगर मुझे कुछ बड़े प्रोजेक्ट मिल जाएँ, तो मैं कितना और पैसा कमा लूँगा? अगर मैं ऐसा करना जारी रखता हूँ, तो मेरी आमदनी निश्चित रूप से काफी अच्छी होगी। कुछ ही सालों में, मैं एक अमीर आदमी का जीवन जी रहा होऊँगा।” लेकिन जब मैंने सोचा कि कैसे यह पैसा मैंने अपनी प्रतिष्ठा बेचकर कमाया है, तो मैंने अभी भी असहज महसूस किया। दूसरी ओर, अगर मैं पहले की तरह ईमानदारी से काम करता रहा, तो मैं बिल्कुल भी मोटा पैसा नहीं कमा पाऊँगा। मैं कई दिनों तक इसी उधेड़बुन में रहा, और अंत में, आसानी से मिल रहे पैसे को देखते हुए, मैंने लाभ को चुन लिया। तब से, “चालाकी के बिना धन नहीं आता” मेरा आदर्श वाक्य बन गया। और अधिक पैसा कमाने और दूसरों से बेहतर जीवन जीने के लिए, मैंने लगातार अपने ग्राहकों के साथ चालें चलीं और ऐसे काम किए जो मेरी अंतरात्मा के विरुद्ध थे। एक बार, मैंने घटिया गुणवत्ता वाले बोर्डों का एक बैच खरीदा और मजदूरों से कहा, “अगर ग्राहक आए, तो काम शुरू मत करना। उसे यह मत देखने देना कि तुम कौन सी सामग्री इस्तेमाल कर रहे हो।” लेकिन जब काम चल ही रहा था, तभी अचानक ग्राहक आ गया। मेरा कलेजा मुँह को आ गया और मेरी हथेलियों से पसीना छूट रहा था; मुझे बहुत डर था कि ग्राहक खामियाँ पकड़ लेगा। अगर इसका पता चल जाता, तो न केवल मेरी मजदूरी चली जाती, बल्कि सामग्री पर खर्च किए गए मेरे पैसे भी डूब जाते। सौभाग्य से, ग्राहक ने उस समय उस पर ध्यान नहीं दिया। काम के बाद जब मैं घर पहुँचा, तब भी मैं चिंतित था, “क्या ग्राहक रात में साइट पर जाएगा? क्या होगा अगर उसे पता चल जाए कि सामग्री में कोई समस्या है?” मैं लगातार बेचैन था, और जब तक काम पूरा नहीं हो गया और उसने बिल का भुगतान नहीं कर दिया, तब तक मैंने चैन की साँस नहीं ली। धीरे-धीरे, मैंने अधिक से अधिक पैसा कमाया, और मैंने न केवल एक घर खरीदा और कुछ बचत जमा की, बल्कि अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से सराहना और प्रशंसा भी पाई। अतीत में जब मेरे पास पैसे नहीं थे, जब भी मैं अपने जानकारों से मिलता था, मैं उनसे बात करता था लेकिन वे मुझे जवाब नहीं देते थे। अब, जब वे मुझसे मिलते हैं, तो वे हमेशा पहले मुझे नमस्ते करते हैं, और मुस्कुराहट के साथ मेरा स्वागत करते हैं। कभी-कभी मैं उनसे मदद माँगता हूँ, और उनमें से ज्यादातर आसानी से सहमत हो जाते हैं। मुझे लगा कि ये कहावतें, “पैसा ही सब कुछ नहीं है, किन्तु इसके बिना, आप कुछ नहीं कर सकते हैं”, और “दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है”, काफी हद तक सच हैं। लेकिन कभी-कभी मैं रुक जाता था और सोचता था कि यूँ तो पिछले कुछ सालों के दौरान मैंने अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर पैसे कमाए हैं और एक घर और एक कार खरीदी है, फिर भी मैं बहुत खुश महसूस नहीं करता हूँ। इसके बजाय, मैं दिन भर चिंताओं और आशंकाओं के बीच जीता रहा हूँ। अगर ग्राहकों को पता चल गया कि मैंने ये अनैतिक काम किए हैं, तो वे निश्चित रूप से मुझ पर उँगली उठाएँगे और मुझे बुरा-भला कहेंगे। वह नजारा कैसा होगा, इसकी कल्पना करना भी मेरे लिए असहनीय था। मैं और मेरे ग्राहक एक ही काउंटी शहर के थे, इसलिए हम हमेशा एक-दूसरे से मिलते-रहते थे, लेकिन कभी-कभी जब मैं उनसे टकरा जाता, तो मैं सिर उठाने और उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं करता था। मैं अपने दिल में निंदा और आरोपों से अपना पल्ला नहीं छुड़ा सका था और कभी-कभी मैं सपने में ग्राहकों को अपने दरवाजे पर आते देखता था, जिससे मैं डरकर जाग जाता था। कभी-कभी मैं यह भी सोचता था, “लोगों को धोखा देना बंद करो। बेहतर होगा कि मैं पहले जैसा ही काम करूँ, ईमानदारी से और अच्छी तरह से काम करूँ। अगर मैं केवल थोड़े पैसे कमाऊँ तो भी ठीक रहेगा।” लेकिन फिर मैं इस बारे में सोचता था कि कैसे जब मेरे बच्चे बड़े होंगे तो उन्हें हर तरह की चीजों के लिए पैसों की जरूरत होगी और इसके अलावा, पैसों के बिना, मेरा भौतिक जीवन स्तर भी गिर जाएगा। मैं थोड़ा-सा अनमना महसूस कर रहा था और दुविधा में फँस गया था। मैं अक्सर आह भरता था, “जीवन इतना पीड़ादायक क्यों है?”

अक्टूबर 2013 में, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य स्वीकार कर लिया और एक कलीसियाई जीवन जीने लगा। सभाओं में, मैंने पाया कि मेरे भाई-बहन खुलकर बताते थे कि उनके दिल में क्या है, और अपने जीवन में प्रकट होने वाली भ्रष्टता पर चर्चा करते थे। यह ऐसी चीज है जो आपको समाज में कभी देखने को नहीं मिलेगी। एक बार, एक सभा में, एक बहन ने एक ईमानदार व्यक्ति होने के अपने अनुभव के बारे में संगति की। जब उसने इस बारे में बात की कि कैसे वह और उसका पति चीजें बेचने के लिए झूठ बोलते थे और लोगों को धोखा देते थे, तो मैंने, वैसा ही महसूस करते हुए कहा, “इस दुनिया में लोग बदतर होते जा रहे हैं। यह सब बस तुम मुझे धोखा दो, मैं तुम्हें धोखा दूँ, यही है। बिल्कुल मेरी तरह, अगर मैंने निर्माण कार्य में बस ईमानदारी से काम किया तो मैं कभी कोई पैसा नहीं कमा पाऊँगा। ज्यादा पैसा कमाने के लिए चालें चलनी पड़ती हैं और धोखा देना पड़ता है।” तब बहन ने कहा, “यह सब शैतान द्वारा लोगों को भ्रष्ट करने का परिणाम है। यह हमें पाप में जीने, अपने स्व-आचरण में हर बुनियादी सीमा को खोने पर मजबूर करता है और हमें अपनी अंतरात्मा को महसूस करने में शायद ही सक्षम छोड़ता है।” उस समय, हमने परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ा : “शैतान मनुष्य के किन पहलुओं को भ्रष्ट करने के लिए इनमें से प्रत्येक प्रवृत्ति का उपयोग करता है? शैतान मुख्य रूप से मनुष्य के अंतःकरण, समझ, मानवता, नैतिक मूल्य और जीवन के दृष्टिकोण भ्रष्ट करता है। और क्या ये सामाजिक प्रवृत्तियाँ धीरे-धीरे लोगों को विकृत और भ्रष्ट नहीं करतीं? शैतान इन सामाजिक प्रवृत्तियों का उपयोग कदम दर कदम लोगों को लुभाकर दानवों के घोंसले में लाने के लिए करता है, ताकि लोग सामाजिक प्रवृत्तियों में अनजाने ही धन, भौतिक इच्छाओं, बुराई और हिंसा पर श्रद्धा रखें। जब ये चीजें मनुष्य के हृदय में प्रवेश कर जाती हैं, तो मनुष्य क्या बन जाता है? मनुष्य एक दानव और शैतान बन जाता है! क्यों? क्योंकि मनुष्य के हृदय में कौन-सा मनोवैज्ञानिक झुकाव होता है? मनुष्य किसका सम्मान करता है? मनुष्य बुराई और हिंसा में आनंद लेना शुरू कर देता है, खूबसूरती या अच्छाई के प्रति प्रेम नहीं दिखाता, शांति के प्रति तो बिल्कुल भी नहीं। लोग सामान्य मानवता में सादा जीवन जीने की इच्छा नहीं करते बल्कि ऊँचा रुतबा और अपार धन-समृद्धि का आनंद उठाना, दैहिक सुखों का आनंद लेना चाहते हैं और बिना किसी प्रतिबंध या बंधनों के अपनी देह को संतुष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ते; दूसरे शब्दों में, वे जो चाहते हैं, करते हैं। ... लोगों के बीच कोई स्नेह नहीं रह जाता, परिवार के सदस्यों के बीच कोई प्रेम नहीं रह जाता, रिश्तेदारों और मित्रों के बीच कोई तालमेल नहीं रह जाता; हिंसा इंसानी रिश्तों की विशेषता बन जाती है। सभी लोग अपने साथी मनुष्यों के बीच रहने के लिए हिंसक तरीके इस्तेमाल करना चाहते हैं; वे अपनी रोजी-रोटी हिंसा का उपयोग करके कमाते हैं; अपनी स्थिति और लाभ हिंसा का उपयोग करके प्राप्त करते हैं, और जो चाहे वह करने के लिए हिंसक और दुष्ट तरीके इस्तेमाल करते हैं। क्या यह मानवता भयानक नहीं है?(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI)। परमेश्वर के वचनों से मैं समझ गया कि शैतान हमें लुभाने के लिए प्रसिद्धि, लाभ और धन का उपयोग करता है, और हमें धन को सबसे ऊपर मानने के लिए मजबूर करता है। पैसा पाने और दूसरों द्वारा प्रशंसा पाने के लिए, हम बेईमान हो जाते हैं और अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध दूसरों को धोखा देते हैं। हम पारिवारिक स्नेह या दोस्ती पर भी कोई ध्यान नहीं देते, और सारी अंतरात्मा और विवेक गायब हो जाते हैं। मैंने इस बारे में सोचा कि कैसे जब मैंने व्यवसाय करना शुरू किया ही था तो तब भी मैं ईमानदारी से पैसे कमा पा रहा था, लेकिन जब मैंने दूसरे लोगों को धोखा देते और इस तरह भारी मात्रा में पैसा कमाते, अच्छे भौतिक जीवन का आनंद लेते और प्रशंसा पाते देखा, तो मैं भी उसी बहाव में बहने लगा और अपनी अंतरात्मा को धोखा दे बैठा, अपने ग्राहकों को ठगने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करने लगा। मैंने न केवल कमीशन लिया, बल्कि निर्माण सामग्री के साथ भी छेड़छाड़ की। यूँ तो मैंने कुछ पैसा कमाया, लेकिन वह सारा पैसा धोखे और चालबाजी से प्राप्त किया गया था, और मैं दिन भर बेचैन रहता था। पता चला कि यह सब शैतान द्वारा मानवजाति को भ्रष्ट करने का परिणाम था।

बाद में, मैंने परमेश्वर के और वचन पढ़े और समझ गया कि परमेश्वर किस तरह के लोगों से प्रसन्न होता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “तुम लोगों को पता होना चाहिए कि परमेश्वर उन लोगों को पसंद करता है जो ईमानदार हैं। परमेश्वर के पास विश्वासयोग्यता का सार है, अतः उसके वचनों पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है; इसके अतिरिक्त, उसके क्रियाकलाप दोषरहित और निर्विवाद हैं। यही कारण है कि परमेश्वर उन लोगों को पसंद करता है जो उसके साथ पूरी तरह से ईमानदार होते हैं। ईमानदारी का अर्थ है अपना हृदय परमेश्वर को अर्पित करना; किसी भी बात में परमेश्वर के प्रति झूठा न होना; हर बात में उसके साथ खुलापन रखना, कभी तथ्यों को न छुपाना; अपने से ऊपर वाले लोगों को कभी भी धोखा देने की कोशिश न करना और अपने से नीचे वालों से चीजें न छिपाना और ऐसी चीजें न करना जो मात्र परमेश्वर की चापलूसी करने की कोशिशें हों। संक्षेप में, ईमानदार होने का अर्थ है अपने क्रियाकलापों और शब्दों में शुद्ध होना, न तो परमेश्वर को और न ही इंसान को धोखा देना(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तीन चेतावनियाँ)। परमेश्वर के वचनों से मैं समझ गया कि परमेश्वर विश्वसनीय और पवित्र है। परमेश्वर पूरी ईमानदारी से बोलता है, और अपने वचनों में शुद्ध है, और वह ईमानदार लोगों को पसंद करता है। परमेश्वर आशा करता है कि हम हमेशा उसके वचनों के अनुसार बोलेंगे और कार्य करेंगे, निष्कपट और खरे होंगे, न तो परमेश्वर को और न ही लोगों को छलने की कोशिश करेंगे। केवल इसी तरह से हम मानव के समान जी सकते हैं और परमेश्वर के द्वारा अनुमोदित किए जा सकते हैं। परमेश्वर का इरादा समझ चुकने के बाद मुझे पता था कि निर्माण कार्य करते समय मुझे परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को स्वीकार करना चाहिए और अपने सभी ग्राहकों के प्रति ईमानदार होना चाहिए। मैंने सोचा कि कैसे मैं पिछले कुछ वर्षों के दौरान पैसा कमाने के लिए दिन भर झूठ बोल रहा था और धोखा दे रहा था और एक ऐसे ढंग से आचरण कर रहा था जो मेरी अंतरात्मा को धोखा देता था। इसने परमेश्वर की वितृष्णा और घृणा को आमंत्रित किया। इसलिए, मैंने एक ईमानदार व्यक्ति होने का अभ्यास करना शुरू कर दिया और ग्राहकों से अधिक वसूली करना और गुणवत्ता से समझौता करना बंद कर दिया। इस तरह से कार्य करने से मैंने बहुत खुद को और भी बहुत अधिक तनावमुक्त और थोड़ा-सा और शांत और सहज महसूस किया। हालाँकि, कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ कि इस तरह से प्रोजेक्ट करके मैं ज्यादा पैसे नहीं कमा सकता। मुझे ख्याल आया कि कैसे यूँ तो परमेश्वर हमसे ईमानदार इंसान बनने की अपेक्षा करता है, लेकिन आजकल हर उद्योग में लोग केवल चालबाजी और धोखाधड़ी करके ही पैसा कमा सकते हैं, और मैं बहुत दुविधा में था। मुझे नहीं पता था कि अभ्यास कैसे करूँ। थोड़ी झिझक के बाद, मैंने फिर से अपने निजी हितों को चुना। मैंने मन ही मन सोचा, “ईमानदार इंसान बनने में समय लगता है। भविष्य में एक ईमानदार इंसान बनने का अभ्यास करना कभी भी विलंब नहीं होता है।” एक बार, एक ग्राहक के लिए रेनोवेशन करते समय मैंने अच्छी सामग्री की जगह कम गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया, जिसमें साधारण और नकली उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया। कुछ ही समय बाद, ग्राहक ने गलती से उस क्षेत्र को पानी से भिगो दिया जिसका नवीनीकरण किया गया था, और नतीजतन, गुणवत्ता की समस्याएँ स्पष्ट हो गईं। ग्राहक ने देखा कि मैंने जो सामग्री इस्तेमाल की थी वह अच्छी गुणवत्ता की नहीं थी, इसलिए उसने अंतिम बिल से 10,000 युआन काटने पर जोर दिया। फिर भी, मैं अभी भी नहीं जागा। कुछ समय बाद, एक वस्त्र भंडार की मालकिन ने मुझसे अपनी दुकान का अग्रभाग सजाने के लिए कहा। मेरे अनुभव में, वस्त्र भंडार का अग्रभाग एक ऐसी चीज है जो बार-बार बदलती रहती है। मैंने मन ही मन सोचा, “अगर मैं उसे अच्छी सामग्री न दूँ, तो भी उसे पता नहीं चलेगा और मैं इससे और अधिक कमाई कर सकता हूँ। मैं इस प्रोजेक्ट का उपयोग उन दस हजार युआन की भरपाई करने के लिए भी कर सकता हूँ जो मैंने पहले खो दिए थे।” इसलिए, मैंने उसकी दुकान के लिए साधारण सामग्री का इस्तेमाल किया। काम के दौरान, एक मजदूर ने कहा, “मालिक, आप वास्तव में जानते हैं कि कारोबार कैसे किया जाता है। आप जिन पैनलों का उपयोग कर रहे हैं वे न केवल एल्यूमीनियम-प्लास्टिक मिश्रित पैनल हैं, बल्कि वे कम गुणवत्ता वाली सामग्री भी हैं। आप इस प्रोजेक्ट से बहुत कमाई कर रहे होंगे, है न?” मैंने गुस्से में कहा, “अगर मैं ऐसा न करूँ तो क्या पिछली बार के मेरे नुकसान की भरपाई तुम करोगे?” प्रोजेक्ट तेजी से पूरा हो गया, लेकिन बिल का भुगतान होने से पहले, ग्राहक ने फोन किया और कहा कि एक पैनल गिर चुका था और किसी को लगभग लग और घायल कर ही चुका था। जब मैं वहाँ पहुँचा, तो वस्त्र भंडार की मालकिन ने गुस्से में कहा, “तुमने मेरे काम में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। तो अब तुम पैसे का हिसाब कैसे करोगे?” मेरे पास गलती मानने और माफी माँगने के अलावा कोई चारा नहीं था, “मैं इसे अभी तुम्हारे लिए ठीक कर दूँगा। मैं तुमसे केवल सामग्री का पैसा लूँगा, मजदूरी का नहीं।” ग्राहक मान गई। बाद में, मैं उलझन में यह सोचे बिना नहीं रह सका, “ऐसा क्यों है कि आजकल चीजें हमेशा गलत हो रही हैं? मैं इस अवसर का उपयोग अपने नुकसान की कुछ भरपाई करने के लिए करना चाहता था, लेकिन अब नुकसान अधिकाधिक बड़ा होता जा रहा है। गनीमत रही कि इस बार किसी को चोट नहीं लगी, वरना मैं बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ जाता।” उस समय, मैंने विचार करना शुरू किया, “मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि परमेश्वर ईमानदार लोगों से प्रेम करता है, लेकिन जब मैं नवीनीकरण करता हूँ, तो मैं अभी भी लोगों को धोखा देने पर जोर देता हूँ। इसका कारण क्या है?”

बाद में, मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े और मेरा दिल थोड़ा-सा उजला हो गया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “इससे पहले कि लोग परमेश्वर के कार्य का अनुभव करें और सत्य को समझें, शैतान की प्रकृति नियंत्रण सँभाल लेती है और उन पर भीतर से प्रभुत्व जमाती है। उस प्रकृति में विशिष्ट रूप से क्या शामिल होता है? उदाहरण के लिए, तुम स्वार्थी क्यों हो? तुम अपने रुतबे की रक्षा क्यों करते हो? तुम अपनी भावनाओं से इतने प्रभावित क्यों होते हो? तुम उन अधार्मिक और बुरी चीजों को क्यों पसंद करते हो? तुम्हें ऐसी चीजें पसंद आने का आधार क्या है? ये चीजें कहाँ से आती हैं? तुम इन्हें पसंद और स्वीकार क्यों करते हो? अब तक, तुम सब लोगों ने यह समझ लिया है : मुख्य कारण यह है कि मनुष्य के भीतर शैतान के जहर भरे हैं। तो शैतान के जहर क्या हैं? इन्हें कैसे व्यक्त किया जा सकता है? उदाहरण के लिए, यदि तुम पूछते हो, ‘लोगों को कैसे जीना चाहिए? लोगों को किसलिए जीना चाहिए?’ तो सभी जवाब देंगे, ‘हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाए।’ बस यह अकेला वाक्यांश समस्या की जड़ को व्यक्त करता है। शैतान का फलसफा और तर्क लोगों का जीवन बन गए हैं। लोग चाहे जिसका भी अनुसरण करें, वास्तव में वे यह अपने लिए ही करते हैं—और इसलिए वे सभी अपने लिए जीते हैं। ‘हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाए’—यही मनुष्य का जीवन-दर्शन है, और इंसानी प्रकृति का भी प्रतिनिधित्व करता है। ये शब्द पहले ही भ्रष्ट इंसान की प्रकृति बन गए हैं, और वे भ्रष्ट इंसान की शैतानी प्रकृति की सच्ची तस्वीर हैं। यह शैतानी प्रकृति पूरी तरह से भ्रष्ट मानवजाति के अस्तित्व का आधार बन चुकी है। कई हजार सालों से वर्तमान दिन तक भ्रष्ट मानवजाति ने शैतान के इस जहर के अनुसार जीवन जिया है(वचन, खंड 3, अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन, पतरस के मार्ग पर कैसे चलें)। परमेश्वर के वचनों के प्रकाशन से, मैं समझ गया कि लोगों को ललचाने और भ्रष्ट करने के लिए शैतान ऐसे शैतानी जहरों का इस्तेमाल करता है, जैसे “हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाए”, “पैसा सबसे पहले है” और “चालाकी के बिना धन नहीं आता।” जब लोग इन चीजों के सहारे जीते हैं, तो वे अधिकाधिक स्वार्थी और नीच बनते जाते हैं और उन्हें लगता है कि लाभ सबसे पहले आता है। देशों और राष्ट्रों से लेकर परिवारों और व्यक्तियों तक, हर कोई अपने हितों के लिए चालें चलने और धोखा देने को तैयार है। वे अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए दूसरों के हितों को नुकसान पहुँचाने के लिए भी तैयार हैं। उनकी अंतरात्मा खत्म हो जाती है और उनकी मानवता खो जाती है। पहले, मैं अपनी अंतरात्मा के आधार पर नवीनीकरण कर सकता था, और अपने ग्राहकों के लिए अच्छा काम करने की खातिर और अधिक कष्ट सहने को तैयार था। हालाँकि यह थोड़ा थका देने वाला था, लेकिन मेरा दिल शांत और सहज था। बाद में, मैंने अपने उद्योग में लोगों को कार चलाते और एक साल में एक लाख युआन से अधिक कमाते देखा, और मुझे बहुत ईर्ष्या हुई। दूसरों से प्रशंसा पाने और एक उम्दा जीवन जीने के लिए मैं अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर धोखा देता था और कमीशन लेता था। मैं घटिया उत्पादों को अच्छे के रूप में चलाने के लिए नकली उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करता था और ग्राहकों को पता चलने के बाद भी मैं नहीं रुका; मैं पैसे की अपनी खोज को छोड़ने के बजाय अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाना पसंद करता था। मैंने देखा कि मैं बुराई के ज्वार में पूरी तरह से समा गया था। मैंने व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने स्व-आचरण की बुनियादी सीमाओं को त्याग दिया, बेईमानी से अपने ग्राहकों को धोखा दिया, और अधिकाधिक स्वार्थी और लालची बन गया, अपनी सत्यनिष्ठा और गरिमा खो दी। उन वर्षों में, हालाँकि मैंने दूसरों को धोखा देकर कुछ पैसे कमाए थे, लेकिन मेरे दिन खुशी से नहीं बीते। जैसे ही मैं यह सोचता था कि कैसे मैं लोगों को धोखा दे रहा हूँ तो मेरा दिल तड़प उठता था और मैं अपने दोस्तों और ग्राहकों का सामना करने की हिम्मत नहीं कर पाता था। मेरा दिल लगातार बेचैन रहता और मेरी अंतरात्मा मुझे धिक्कारती थी। मैं रात में चैन से सो भी नहीं पाता था और कभी-कभी बुरे सपनों से चौंककर जाग जाता था। परमेश्वर में विश्वास करना शुरू करने के बाद, मुझे अच्छी तरह पता था कि परमेश्वर ईमानदार लोगों से प्रेम करता है और केवल ईमानदार लोग ही बचाए जा सकते हैं और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। लेकिन मैं लालच से प्रेरित होकर चलता था और मैं लाभ के लिए कपटी था, पाप के बीच जी रहा था और खुद को बाहर नहीं निकाल पा रहा था। अगर परमेश्वर के वचनों का प्रकाशन न होता, तो मैं झूठ बोलने और धोखा देने की गंभीरता को नहीं समझ पाता। मैं बुराई के ज्वार में अधिक से अधिक समाता जाता, अपनी अंतरात्मा की अवहेलना करके गलत तरीके से धन कमाता रहता। अंत में, मैं केवल शैतान द्वारा निगल लिया जाता, और दंड पाने के लिए उसके साथ नरक में चला जाता। मैंने परमेश्वर के उद्धार के लिए अपने दिल की गहराइयों से उसका धन्यवाद किया और चुपके से संकल्प लिया कि अब अपने ग्राहकों को धोखा नहीं दूँगा या नहीं ठगूँगा। मुझे ईमानदारी से बोलना था, ईमानदारी से काम करना था और सत्यनिष्ठा और गरिमा वाला व्यक्ति बनना था।

कुछ समय बाद, मुझ पर प्रलोभन आ पड़ा। किसी सिफारिश के माध्यम से मैंने 70,000 युआन की एक परियोजना पकड़ी। ग्राहक बीस साल से कुछ ऊपर का था और सजावट के बारे में कुछ नहीं जानता था। मैं ग्राहक के साथ इस बात पर सहमत हो गया कि वह प्रोजेक्ट के बजट के अनुसार भुगतान नहीं करेगा बल्कि उससे परियोजना में इस्तेमाल की गई सामग्री की मात्रा के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। एक बार जब हम सहमत हो गए, तो हमने काम शुरू कर दिया। ग्राहक शायद ही कभी साइट पर आता था, और मैंने मन ही मन सोचा, “यह एक बहुत अच्छा मौका है। सामग्री की गुणवत्ता से समझौता करके मैं अपनी जेब भरने के लिए हजारों युआन बचा सकता हूँ।” लेकिन फिर मैंने सोचा, “मुझे एक ईमानदार इंसान बनना है और झूठ बोलना और धोखा देना बंद करना है।” लेकिन, अपने दिल में मैं अभी भी पैसा कमाने के इस अच्छे अवसर को नहीं जाने दे पा रहा था। “अगर मैं एक ईमानदार इंसान होने का अभ्यास करता हूँ, तो मैं उस मुफ्त पैसे को खो दूँगा जो बस मेरे हाथ में आने ही वाला था। इसके अलावा, ऐसे अवसर दुर्लभ हैं। अगर मैं इसे हाथ से जाने दूँ, तो मुझे नहीं पता कि अगला अवसर कब आएगा।” ठीक जब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या विकल्प चुनूँ, मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े और अपने दिल में शक्ति हासिल की। परमेश्वर कहता है : “परमेश्वर का लोगों से ईमानदार बनने की माँग करना यह साबित करता है कि वह धोखेबाज लोगों से सचमुच नफरत करता है और उन्हें नापसंद करता है। धोखेबाज लोगों के प्रति परमेश्वर की नापसंदगी उनके काम करने के तरीके, उनके स्वभावों, उनके इरादों और उनकी धोखेबाजी के साधनों के प्रति नापसंदगी है; परमेश्वर को ये सब बातें नापसंद हैं। यदि धोखेबाज लोग सत्य स्वीकार कर पाते हैं, अपने धोखेबाज स्वभाव को मान पाते हैं और ईमानदार लोग बनने के लिए परमेश्वर का उद्धार स्वीकार करने और सत्य का अभ्यास करने को तैयार होते हैं तो उनके पास भी बचाए जाने की उम्मीद होती है, क्योंकि परमेश्वर किसी के प्रति पक्षपात नहीं करता है और न ही सत्य ऐसा करता है। और इसलिए, यदि हम परमेश्वर को प्रसन्न रखने वाले लोग बनना चाहते हैं तो हमें सबसे पहले अपने आचरण के सिद्धांतों को बदलना होगा, शैतानी फलसफों के अनुसार जीना बंद करना होगा, अपनी जिंदगी जीने के लिए झूठ बोलने और धोखा देने पर निर्भर रहना बंद करना होगा और हमें अपने सारे झूठ त्याग कर ईमानदार लोग बनने की कोशिश करनी होगी। तब हमारे प्रति परमेश्वर का दृष्टिकोण बदलेगा(वचन, खंड 3, अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन, एक ईमानदार व्यक्ति होने का सबसे बुनियादी अभ्यास)। परमेश्वर लोगों के कपटी होने और धोखा देने से सबसे ज्यादा घृणा करता है। परमेश्वर लोगों से ईमानदार होने, अपनी हर बात और काम में निष्कपट और सीधा होने, और कपटी न होने या दूसरों को धोखा न देने की अपेक्षा करता है। मुझे एक ईमानदार इंसान होने का अभ्यास करना था, और कपटी होना और दूसरों को धोखा देना बंद करना था। इसलिए, मैंने इस्तेमाल की गई सामग्री का सावधानीपूर्वक हिसाब लगाया। जब परियोजना लगभग पूरी हो गई तो मैंने हिसाब लगाया कि इसमें केवल 57,000 युआन खर्च हुए थे और 10,000 से अधिक बचे थे। यह दो कर्मचारियों के एक महीने के वेतन के बराबर था। मैं यह तय करने की कोशिश कर रहा था कि क्या मुझे बचे हुए पैसे रखने चाहिए या ग्राहक को सच बताना चाहिए, या शायद इसे दो भागों में बाँट दूँ, आधा-आधा रख लूँ—यह उचित होता क्योंकि मैंने जो सामग्री खरीदी थी वह सस्ती थी, परियोजना में कोई बर्बादी नहीं हुई थी और मैंने पैसे बचाने में उसकी मदद की। लेकिन जब मैं चालान बनाने वाला था, तो मेरा दिल बेचैन हो गया। मुझे एहसास हुआ कि मैं फिर से लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रहा था, और मुझे परमेश्वर के वचन याद आए : “परमेश्वर ठीक तुम्हारी बगल में है, तुम्हारे प्रत्येक शब्द और कर्म का अवलोकन कर रहा है, तुम्हारे क्रियाकलापों, तुम्हारे मन में हुए परिवर्तनों का अवलोकन कर रहा है—यह परमेश्वर का कार्य है(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, परमेश्वर का स्वभाव और उसका कार्य जो नतीजा हासिल करेगा, उसे कैसे जानें)। जब मैंने परमेश्वर के वचनों पर विचार किया, तो मैं थोड़ा डर गया, जैसे कि परमेश्वर मेरे पास खड़ा हो और मुझे देख रहा हो। परमेश्वर के वचनों ने मुझे एक बार फिर एक ईमानदार इंसान बनने और पैसे के लिए झूठ न बोलने या धोखा न देने की याद दिलाई। इसलिए, मैंने जल्दी से ग्राहक से वास्तविक राशि ली। ग्राहक ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, “इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! आपने मेरे पैसे बचाए। इस बार मैंने एक उचित व्यक्ति से बात की है। अगर मैंने किसी बेईमान व्यक्ति को काम पर रखा होता, तो मुझे और पैसे खर्च करने पड़ते।” उसे ऐसा कहते सुनकर, मेरा दिल वास्तव में खुश और सहज महसूस करने लगा।

उसके बाद, कभी-कभी जब निर्माण परियोजनाओं में बड़े संभावित लाभ शामिल होते थे, तब भी मेरे मन में कपटी होने और धोखा देने के विचार आते थे, लेकिन मैं परमेश्वर से प्रार्थना करता था और परमेश्वर के वचनों के अनुसार अभ्यास करता था, एक ईमानदार इंसान होने का अभ्यास करता था। इस तरह अभ्यास करने से मेरा दिल बहुत ही सहज महसूस करता था और मुझे पहले से ज्यादा प्रोजेक्ट मिलते थे। इनमें से 80% अन्य ग्राहकों की आपसी सिफारिशों का परिणाम थे। हमारे सारे ग्राहक हमारी इस बात के लिए प्रशंसा करते थे कि हम ईमानदार हैं, अच्छा काम करते हैं और अच्छी सामग्री इस्तेमाल करते हैं। जब हम कार्य कर रहे होते थे तो उन्हें हम पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत नहीं होती थी और हमारे द्वारा किए जा रहे कार्य पर उन्हें बहुत भरोसा होता था। मैं इस बदलाव को हासिल कर पाया, यह सब परमेश्वर के वचनों के अनुसार अभ्यास करने के कारण हुआ। मैं परमेश्वर का कृतज्ञ हूँ कि उसने मेरी ओर अपने उद्धार का हाथ बढ़ाया और मुझे पाप के दलदल से बचाया। मैं अपने दिल की गहराइयों से परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ!

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