1. सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के माध्यम से, मेरे लिए यह निश्चित हो गया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी है, और मैं अब अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करता हूँ। लेकिन हाल ही में मेरे परिवार में कुछ नाराज़गी भरी और परेशान करने वाली बातें हुई हैं। ऐसी बातें क्यों होती हैं, और मुझे उनके साथ कैसे पेश आना चाहिए?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए" (1 पतरस 5:8)।

"उस तिहाई को मैं आग में डालकर ऐसा निर्मल करूँगा, जैसा रूपा निर्मल किया जाता है, और ऐसा जाँचूँगा जैसा सोना जाँचा जाता है। वे मुझ से प्रार्थना किया करेंगे, और मैं उनकी सुनूँगा। मैं उनके विषय में कहूँगा, 'ये मेरी प्रजा हैं,' और वे मेरे विषय में कहेंगे, 'यहोवा हमारा परमेश्‍वर है'" (जकर्याह 13:9)।

"यहोवा ने शैतान से पूछा, 'क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।' शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, 'क्या अय्यूब परमेश्‍वर का भय बिना लाभ के मानता है? क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।' यहोवा ने शैतान से कहा, 'सुन, जो कुछ उसका है, वह सब तेरे हाथ में है; केवल उसके शरीर पर हाथ न लगाना।' तब शैतान यहोवा के सामने से चला गया" (अय्यूब 1:8-12)।

"तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुँड़ाकर भूमि पर गिरा और दण्डवत् करके कहा, 'मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है'" (अय्यूब 1:20-21)।

"तब उसकी स्त्री उससे कहने लगी, 'क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्‍वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा।' उसने उससे कहा, 'तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्‍वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें?' इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुँह से कोई पाप नहीं किया" (अय्यूब 2:9-10)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर अपना कार्य करता है, वह एक व्यक्ति की देखभाल करता है, उस पर नज़र रखता है, और शैतान इस पूरे समय के दौरान उसके हर कदम का पीछा करता है। परमेश्वर जिस किसी पर भी अनुग्रह करता है, शैतान भी पीछे-पीछे चलते हुए उस पर नज़र रखता है। यदि परमेश्वर इस व्यक्ति को चाहता है, तो शैतान परमेश्वर को रोकने के लिए अपने सामर्थ्य में सब-कुछ करता है, वह परमेश्वर के कार्य को भ्रमित, बाधित और नष्ट करने के लिए विभिन्न बुरे हथकंडों का इस्तेमाल करता है, ताकि वह अपना छिपा हुआ उद्देश्य हासिल कर सके। क्या है वह उद्देश्य? वह नहीं चाहता कि परमेश्वर किसी भी मनुष्य को प्राप्त कर सके; उसे वे सभी लोग अपने लिए चाहिए जिन्हें परमेश्वर चाहता है, ताकि वह उन पर कब्ज़ा कर सके, उन पर नियंत्रण कर सके, उनको अपने अधिकार में ले सके, ताकि वे उसकी आराधना करें, ताकि वे बुरे कार्य करने में उसका साथ दें। क्या यह शैतान का भयानक उद्देश्य नहीं है? तुम लोग अकसर कहते हो कि शैतान कितना बुरा, कितना खराब है, परंतु क्या तुमने उसे देखा है? तुम सिर्फ यह देख सकते हो कि मनुष्य कितना बुरा है। तुमने असल में नहीं देखा है कि शैतान वास्तव में कितना बुरा है। पर क्या तुम लोगों ने अय्यूब से संबंधित इस मामले में शैतान की बुराई देखी है? (हाँ।) इस मामले ने शैतान के भयंकर चेहरे और उसके सार को बिलकुल स्पष्ट कर दिया है। परमेश्वर के साथ युद्ध करने और उसके पीछे-पीछे चलने में शैतान का उद्देश्य उस समस्त कार्य को नष्ट करना है, जिसे परमेश्वर करना चाहता है; उन लोगों पर कब्ज़ा और नियंत्रण करना है, जिन्हें परमेश्वर प्राप्त करना चाहता है; उन लोगों को पूरी तरह से मिटा देना है, जिन्हें परमेश्वर प्राप्त करना चाहता है। यदि वे मिटाए नहीं जाते, तो वे शैतान द्वारा इस्तेमाल किए जाने के लिए उसके कब्ज़े में आ जाते हैं—यह उसका उद्देश्य है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV' से उद्धृत

मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य अंतःक्रिया प्रतीत होता है, मानो कि यह मानव व्यवस्थाओं के द्वारा, या मानवीय हस्तक्षेप से उत्पन्न हुआ हो। किन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी है, और लोगों से अपेक्षा करता है कि परमेश्वर के लिए अपनी गवाही में वे अडिग बने रहें। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब को आजमाया गया था: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के साथ दाँव लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कर्म थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था। परमेश्वर द्वारा तुम लोगों में किए गए हर कदम के पीछे शैतान की परमेश्वर के साथ बाज़ी होती है—इस सब के पीछे एक संघर्ष होता है। ... जब परमेश्वर और शैतान आध्यात्मिक क्षेत्र में संघर्ष करते हैं, तो तुम्हें परमेश्वर को कैसे संतुष्ट करना चाहिए, और किस प्रकार उसकी लिए गवाही में तुम्हें अडिग रहना चाहिए? तुम्हें यह पता होना चाहिए कि जो कुछ भी तुम्हारे साथ होता है वह एक महान परीक्षण है और ऐसा समय है जब परमेश्वर चाहता है तुम उसके लिए एक गवाही दो। बाह्य तौर पर, ये कोई बड़े कार्य जैसे न प्रतीत न हों, किन्तु जब ये चीज़ें होती हैं तो ये दर्शाती हैं कि तुम परमेश्वर से प्रेम करते हो या नहीं। यदि तुम करते हो, तो तुम उसके लिए गवाही देने में अडिग रह पाओगे, और यदि तुमने उसके प्रेम को अभ्यास में नहीं लाया है, तो यह दर्शाता है कि तुम वह व्यक्ति नहीं हो जो सत्य को अभ्यास में लाता है, यह कि तुम सत्य से रहित हो, और जीवन से रहित हो, यह कि तुम बुद्धिहीन हो! लोगों के साथ जो कुछ भी होता है यह तब होता है जब परमेश्वर को आवश्यकता होती है कि लोग उसके लिए अपनी गवाही में अडिग बने रहें। इस क्षण में तुम्हारे साथ कुछ भी बड़ा घटित नहीं हुआ है, और तुम बड़ी गवाही नहीं देते हो, किन्तु तुम्हारे जीवन का प्रत्येक विवरण परमेश्वर के लिए गवाही से सम्बन्धित है। यदि तुम अपने भाइयों और बहनों, अपने परिवार के सदस्यों और अपने आसपास के सभी लोगों की प्रशंसा प्राप्त कर सकते हो; यदि, एक दिन, अविश्वासी आएँ और जो कुछ तुम करते हो उसकी तारीफ़ करें, और देखें कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह अद्भुत है, तो तुमने गवाही दे दी होगी। यद्यपि तुम्हारे पास कोई परिज्ञान नहीं है और तुम्हारी क्षमता कमज़ोर है, फिर भी परमेश्वर द्वारा तुम्हारी सिद्धता के माध्यम से, तुम उसे संतुष्ट करने और उसकी इच्छा के प्रति सावधान होने में समर्थ हो जाते हो और दूसरों को हो कि सबसे कमज़ोर क्षमता के लोगों में उसने कितना महान कार्य किया है। जब लोग परमेश्वर को जान जाते हैं और शैतान के सामने विजेता बन जाते और परमेश्वर के प्रति अत्यधिक वफादार बन जाते हैं, तब इस समूह के लोगों की तुलना में किसी और के पास अधिक आधार नहीं होता, और यही सबसे बड़ी गवाही है। यद्यपि तुम महान कार्य करने में अक्षम हो, किन्तु तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने में समर्थ हो। अन्य लोग अपनी धारणाओं को एक ओर नहीं रख सकते हैं, किन्तु तुम रख सकते हो; अन्य लोग अपने वास्तविक अनुभवों के दौरान परमेश्वर की गवाही नहीं दे सकते हैं, किन्तु तुम परमेश्वर के प्रेम को चुकाने और उसके लिए ज़बर्दस्त गवाही देने के लिए अपनी वास्तविक कद-काठी और कार्यकलापों का उपयोग कर सकते हो। केवल यही परमेश्वर को वास्तव में प्रेम करना गिना जाता है। यदि तुम इसमें अक्षम हो, तो तुम अपने परिवार के सदस्यों के बीच, अपने भाइयों और बहनों के बीच या संसार के अन्य लोगों के सामने गवाही नहीं देते हो। यदि तुम शैतान के सामने गवाही नहीं दे सकते हो, तो शैतान तुम्हारी हँसी उड़ाएगा, वह तुम्हें एक मजाक के रूप, खेलने वाली चीज के रूप में लेगा, वह बार-बार तुम्हें मूर्ख बनाएगा, और तुम्हें उन्मादी बनाएगा। भविष्य में, महान परीक्षण तुम्हारे ऊपर पड़ेंगे—किन्तु आज, यदि तुम परमेश्वर को एक सच्चे हृदय से प्रेम करते हो, और इस बात की परवाह किए बिना कि आगे कितनी भी बड़ी परीक्षाएँ हैं, चाहे तुम्हारे साथ कुछ भी होता हो, तुम अपनी गवाही में अडिग रहते हो, और परमेश्वर को संतुष्ट कर पाते हो, तब तुम्हारे हृदय को सांत्वना मिलेगी, और भविष्य में चाहे कितने ही बड़े परीक्षण क्यों न आएँ तुम भयहीन रहोगे। तुम लोग नहीं देख सकते हो कि भविष्य में क्या होगा; तुम लोग केवल आज की परिस्थितियों में ही परमेश्वर को संतुष्ट कर सकते हो। तुम लोग किसी भी महान कार्य को करने में अक्षम हो, और तुम लोगों को वास्तविक जीवन में परमेश्वर के वचनों को अनुभव करने के माध्यम से उसे संतुष्ट करने, और एक मज़बूत और ज़बर्दस्त गवाही देने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जो शैतान पर शर्मिंदगी लाती है। यद्यपि तुम्हारी देह असंतुष्ट रहेगी और उसने पीड़ा भुगती होगी, किन्तु तुमने परमेश्वर को संतुष्ट कर दिया होगा और तुम शैतान पर शर्मिंदगी लाए होगे। यदि तुम हमेशा इस तरह से अभ्यास करते हो, तो परमेश्वर तुम्हारे सामने एक मार्ग खोल देगा। एक दिन जब एक बड़ा परीक्षण आएगा, तो अन्य लोग गिर जाएँगे, किन्तु तुम तब भी अडिग रहने में समर्थ होगे: तुमने जो क़ीमत चुकाई है उसकी वजह से, परमेश्वर तुम्हारी रक्षा करेगा ताकि तुम अडिग बने रहो और गिरो नहीं। यदि, साधारणतया, तुम सत्य को अभ्यास में लाने और परमेश्वर को सचमुच प्रेम करने वाले हृदय से परमेश्वर को संतुष्ट करने में समर्थ हो, तो परमेश्वर भविष्य के परीक्षणों के दौरान निश्चित रूप से तुम्हारी सुरक्षा करेगा। यद्यपि तुम मूर्ख और छोटी कद-काठी और कमज़ोर क्षमता वाले हो, तब भी परमेश्वर तुम्हारे खिलाफ भेदभाव नहीं करेगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम्हारी प्रेरणाएँ उचित हैं या नहीं। आज, तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने में समर्थ हो, जिसमें तुम छोटी से छोटी बात पर ध्यान रखते हो, तुम सभी चीज़ों में परमेश्वर को संतुष्ट करते हो, तुम्हारे पास परमेश्वर को सच्चाई से प्रेम करने वाला हृदय है, तुम अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को देते हो और यद्यपि कुछ ऐसी बातें हैं जो तुम्हारी समझ में नहीं आ सकती हैं, किन्तु तुम अपनी प्रेरणाओं को सुधारने, और परमेश्वर की इच्छा को खोजने के लिए परमेश्वर के सामने आ सकते हो, और तुम वह सब कुछ करते हो जो परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए आवश्यक है। हो सकता है कि तुम्हारे भाई और बहन तुम्हारा परित्याग कर दें, किन्तु तुम्हारा हृदय परमेश्वर को संतुष्ट कर रहा होगा, और तुम देह के सुख का लालच नहीं करोगे। यदि तुम हमेशा इस तरह से अभ्यास करते हो, तो जब तुम्हारे ऊपर बड़े परीक्षण आएँगे तो तुम्हें बचा लिया जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है' से उद्धृत

यदि तुम पर कई चीजें आ पड़ती हैं जो तुम्हारी धारणाओं के अनुरूप नहीं हैं, परन्तु फिर भी तुम उन्हें एक ओर करने और इन चीज़ों से परमेश्वर के कार्यों का ज्ञान पाने में समर्थ हो, और शुद्धिकरण के बीच तुम परमेश्वर के प्रति प्यार से भरा अपना हृदय प्रकट करते हो, तो यह गवाह होना है। यदि तुम्हारा घर शांतिपूर्ण है, तुम देह के आराम का आनंद लेते हो, कोई भी तुम्हारा उत्पीड़न नहीं करता है, और कलीसिया में तुम्हारे भाई-बहन तुम्हारा आज्ञापालन करते हैं, तो क्या तुम परमेश्वर के लिए प्यार से भरा अपना हृदय प्रदर्शित कर सकते हो? क्या यह परिस्थिति तुम्हारा शुद्धिकरण कर सकती है? यह केवल शुद्धिकरण के माध्यम से है कि परमेश्वर के लिए तुम्हारा प्यार दर्शाया जा सकता है, और केवल तुम्हारी धारणाओं के विपरीत घटित होने वाली चीज़ों के माध्यम से ही तुम पूर्ण बनाए जा सकते हो। कई नकारात्मक और विपरीत चीज़ों की सेवा और शैतान के तमाम प्रकटीकरणों—उसके कामों, आरोपों और उसकी बाधाओं और धोखों के माध्यम से परमेश्वर तुम्हें शैतान का भयानक चेहरा साफ़-साफ़ दिखाता है और इस प्रकार शैतान को पहचानने की तुम्हारी क्षमता को पूर्ण बनाता है, ताकि तुम शैतान से नफ़रत करो और उसे त्याग दो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जिन्हें पूर्ण बनाया जाना है उन्हें शुद्धिकरण से अवश्य गुज़रना चाहिए' से उद्धृत

हर एक कार्य जो परमेश्वर करता है वह आवश्यक होता है, और वह असाधारण महत्व रखता है, क्योंकि जो कुछ भी वह मनुष्य में करता है वह उसके प्रबंधन और मनुष्यजाति के उद्धार से सम्बन्धित होता है। स्वाभाविक रूप से, परमेश्वर ने जो कार्य अय्यूब में किया वह कुछ अलग नहीं है, भले ही अय्यूब परमेश्वर की नज़रों में सिद्ध और खरा था। दूसरे शब्दों में, इस बात पर ध्यान दिए बिना कि परमेश्वर क्या करता है या किन उपायों के द्वारा वह इसे करता है, भले ही उसकी कीमत, या उसका कुछ भी क्यों न हो, उसके कार्यों का उद्देश्य बदलता नहीं है। उसका उद्देश्य है कि वह मनुष्य में परमेश्वर के वचनों, परमेश्वर की अपेक्षाओं, और मनुष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा का काम करे; दूसरे शब्दों में, यह मनुष्य के भीतर वह सब कुछ करने के लिए है जिसे परमेश्वर मानता है कि ये उसके कदमों के अनुसार सकारात्मक हैं, जो मनुष्य को सक्षम बनाता है ताकि वह परमेश्वर के हृदय को समझे और परमेश्वर के सार को बूझे, और उसे परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं को मानने देता है, और इस प्रकार मनुष्य को परमेश्वर का भय मानना और दुष्टता का परित्याग करना प्राप्त करने देता है—जो भी वह करता है उसमें यह सब परमेश्वर के उद्देश्य का एक पहलू है। अन्य पहलू है कि, क्योंकि शैतान एक विषमता और परमेश्वर के कार्य में काम आने वाली एक वस्तु है, इसलिए मनुष्य प्रायः शैतान को दे दिया जाता है; यही वह साधन है जिसे परमेश्वर लोगों को शैतान के प्रलोभनों और हमलों के बीच लोगों को शैतान की दुष्टता, कुरूपता और घिनौनेपन को देखने देने के लिए उपयोग करता है, इस प्रकार लोग को शैतान से घृणा करवाता है और उन्हें वह जानने में समर्थ बनाता जो नकारात्मक है। यह प्रक्रिया उन्हें धीरे-धीरे स्वयं को शैतान के नियन्त्रण से, और शैतान के आरोपों, हस्तक्षेप और हमलों से स्वतन्त्र होने देती है—जब तक कि, परमेश्वर के वचनों, परमेश्वर के बारे में उनके ज्ञान और आज्ञाकारिता, और परमेश्वर में उनके विश्वास और भय के कारण, वे शैतान के हमलों के ऊपर विजय नहीं पा लेते हैं, और शैतान के आरोपों के ऊपर विजय नहीं पा लेते हैं; केवल तभी वे पूरी तरह से शैतान के अधिकार क्षेत्र से मुक्त कर गए होंगे। लोगों की मुक्ति का अर्थ है कि शैतान को हरा दिया गया है; इसका अर्थ है कि वे अब और शैतान के मुँह का भोजन नहीं हैं—कि उन्हें निगलने के बजाय, शैतान ने उन्हें छोड़ दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसे लोग खरे हैं, क्योंकि उन्हें परमेश्वर के प्रति विश्वास, आज्ञाकारिता और भय है, और क्योंकि उन्होंने शैतान के साथ पूरी तरह से नाता तोड़ लिया है। वे शैतान को लज्जित करते हैं, वे शैतान को कायर बना देते हैं, और वे पूरी तरह से शैतान को हरा देते हैं। परमेश्वर का अनुसरण करने में उनका दृढ़ विश्वास, और परमेश्वर का भय और उसकी आज्ञाकारिता शैतान को हरा देता है, और उन्हें शैतान से पूरी तरह से छुड़वा देता है। केवल ऐसे लोग ही सचमुच में परमेश्वर के द्वारा हासिल किए गए हैं, और मनुष्य को बचाने में यही परमेश्वर का चरम उद्देश्य है। यदि वे बचाए जाने की इच्छा करते हैं, और पूरी तरह से परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाने की कामना करते हैं, तो उन सभी को जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं शैतान के बड़े और छोटे प्रलोभनों और हमलों का सामना अवश्य करना चाहिए। जो लोग इन प्रलोभनों और हमलों से उभरकर निकलते हैं और शैतान को पूरी तरह से हराने में समर्थ हैं ये वे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर के द्वारा बचाया जा चुका है। कहने का तात्पर्य है कि, वे लोग जिन्हें परमेश्वर के लिए बचाया गया है ये वे लोग हैं जो परमेश्वर की परीक्षाओं से होकर गुज़र चुके हैं, और जिन पर शैतान के द्वारा अनगिनत बार परीक्षण और हमला किया जा चुका है। ऐसे लोग जिन्हें परमेश्वर द्वारा बचा लिया गया है वे परमेश्वर की इच्छा और अपेक्षाओं को समझते हैं, और परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं को चुपचाप स्वीकार करने में समर्थ हैं, और वे शैतान के प्रलोभनों के बीच परमेश्वर का भय मानने और दुष्टता से दूर रहने के मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। जिन्हें परमेश्वर के द्वारा बचाया गया है वे ईमानदारी को धारण करते हैं, वे उदारहृदय के हैं, वे प्रेम और घृणा के बीच अन्तर करते हैं, उनमें न्याय की समझ है और वे न्यायसंगत हैं, और वे परमेश्वर की परवाह करने और सब सँजोकर रखने में समर्थ हैं जो परमेश्वर का है। शैतान के द्वारा ऐसे लोगों को बाध्य नहीं किया जाता है, उनकी जासूसी नहीं की जाती है, उन पर दोष नहीं लगाया जाता है, या दुर्व्यवहार नहीं किया जाता है, वे पूरी तरह से स्वतन्त्र हैं, उन्हें पूरी तरह से मुक्त किया और छुड़ाया जा चुका है। अय्यूब सिर्फ ऐसी स्वतन्त्रता वाला मनुष्य था, और यह निश्चित रूप से उस बात का महत्व है कि क्यों परमेश्वर ने उसे शैतान को सौंपा था।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II' से उद्धृत

मनुष्य के लिए परमेश्वर के स्थायी प्रावधान और भरण-पोषण के कार्य के दौरान, परमेश्वर मनुष्य को अपनी सम्पूर्ण इच्छा और अपेक्षाओं को बताता है, और मनुष्य को अपने कर्मों, स्वभाव, और स्वरूप को दिखता है। उद्देश्य मनुष्य को कद-काठ से सुसज्जित करना, और मनुष्य को अनुमति देना है ताकि वह परमेश्वर का अनुसरण करते हुए उससे विभिन्न सच्चाईयों को प्राप्त करे—ऐसी सच्चाईयाँ जो शैतान से लड़ने के लिए परमेश्वर के द्वारा मनुष्य को दिए गए हथियार हैं। इस प्रकार से सुसज्जित होकर, मनुष्य को परमेश्वर की परीक्षाओं का सामना अवश्य करना चाहिए। परमेश्वर के पास मनुष्य की परीक्षा लेने के कई माध्यम और मार्ग हैं, परन्तु उनमें से प्रत्येक को परमेश्वर के शत्रु अर्थात् शैतान के "सहयोग" की आवश्यकता पड़ती है। कहने का तात्पर्य है कि, शैतान से युद्ध करने के लिए मनुष्य को हथियार देने के बाद, परमेश्वर मनुष्य को शैतान को सौंप देता है और शैतान को मनुष्य की कद-काठी की "परीक्षा" लेने देता है। यदि मनुष्य शैतान की युद्ध संरचनाओं को तोड़कर बाहर निकल सकता है, यदि वह शैतान की घेराबंदी से बचकर निकल सकता है और तब भी जीवित रह सकता है, तो मनुष्य ने परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया होगा। परन्तु यदि मनुष्य शैतान की युद्ध संरचनाओं को छोड़कर जाने में असफल होता है, और शैतान के प्रति समर्पण कर देता है, तो उसने परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं किया होगा। परमेश्वर मनुष्य के जिस किसी भी पहलू की जाँच करता है, तो उसकी जाँच के मापदंड हैं कि शैतान के द्वारा आक्रमण किए जाने पर मनुष्य अपनी गवाही में डटा रहता है या नहीं, और शैतान के द्वारा फुसलाए जाते समय उसने परमेश्वर को छोड़ा है या नहीं और शैतान के सामने आत्मसमर्पण किया और उसके अधीन हुआ है या नहीं। ऐसा कहा जा सकता है कि मनुष्य को बचाया जा सकता है या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह शैतान पर विजय प्राप्त करके उसे हरा सकता है या नहीं, और वह स्वतन्त्रता प्राप्त कर सकता है या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह शैतान के बन्धनों पर विजय पाने के लिए, शैतान से आशा का पूरी तरह से त्याग करवाते हुए और उसे अकेला छोड़ते हुए, परमेश्वर के द्वारा उसे दिये गए हथियारों को, अपने दम पर, उठा सकता है या नहीं। यदि शैतान आशा को त्याग देता है और एक व्यक्ति को छोड़ देता है, तो इसका अर्थ है कि शैतान ऐसे व्यक्तियों को परमेश्वर से लेने के लिए फिर कभी कोशिश नहीं करेगा, फिर कभी ऐसे व्यक्तियों पर दोष नहीं लगाएगा और इनके साथ हस्तक्षेप नहीं करेगा, उन्हें फिर कभी प्रचंड तरीके से प्रताड़ित नहीं करेगा या उन पर आक्रमण नहीं करेगा; केवल इस प्रकार के किसी व्यक्ति को ही सचमुच में परमेश्वर के द्वारा प्राप्त कर लिया गया होगा। यही वह सम्पूर्ण प्रक्रिया है जिसके द्वारा परमेश्वर लोगों को प्राप्त करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II' से उद्धृत

पिछला: 7. आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु लौट आया है, और वह अंतिम दिनों का मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, है। लेकिन धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर्स कहते हैं कि आप जिसमें विश्वास करते हैं वह प्रभु यीशु नहीं है, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ईसाई धर्म की नहीं है। क्या इन पादरियों और एल्डर्स की बातों में कोई विश्वसनीयता है?

अगला: 2. हाल ही में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कुछ वचनों को पढ़ने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के बाद, मैंने अपनी भावना में काफी प्रदत्त और शिक्षित महसूस किया है। प्रभु की उपासना करने के वर्षों में मैंने समझा था, उससे कहीं अधिक मैं अब समझता हूँ, इसलिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी होनी ही चाहिए। लेकिन जब से मेरे पादरी को पता चला कि मैं अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य में रुचि ले रहा हूँ, वह मुझे रोकने के लिए हर कोशिश करता रहा है। वह हर दिन मुझे इसके बारे में परेशान करता है। यहाँ तक कि उसने मेरे परिवार को भी मुझ पर नज़र रखने के लिए, और मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने या चर्च के उपदेशों को सुनने की अनुमति न देने के लिए, कहा है। मुझे अंदर ही अंदर आहत महसूस होता है। मुझे इन चीजों का अनुभव कैसे करना चाहिए?

क्या आप जानना चाहते हैं कि सच्चा प्रायश्चित करके परमेश्वर की सुरक्षा कैसे प्राप्त करनी है? इसका तरीका खोजने के लिए हमारे ऑनलाइन समूह में शामिल हों।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

2. परमेश्वर केवल उस कलीसिया को आशीष क्यों देता है जो उसके कार्य को स्वीकार कर उसका अनुपालन करती है? वह धार्मिक संगठनों को क्यों शाप देता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:पवित्र आत्मा के कार्य की स्पष्टतम अभिव्यक्ति यहीं और अभी को सम्मिलित करने में है, और अतीत से चिपके रहने में नहीं...

2. क्या मसीह वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है या वह खुद ही परमेश्वर है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:"फिलिप्पुस ने उससे कहा, 'हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे, यही हमारे लिये बहुत है।' यीशु ने उससे कहा, 'हे...

3. अंतिम दिनों में परमेश्वर के द्वारा व्यक्त सत्य मनुष्य को शुद्ध करने, उसे परिपूर्ण करने और उसका जीवन बन जाने में सक्षम क्यों है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:जीवन का मार्ग कोई ऐसी चीज़ ऐसी नहीं जिसे कोई भी धारण कर ले, न ही इसे हर कोई आसानी से प्राप्त कर सकता है। ऐसा इसलिए...

वचन देह में प्रकट होता है अंत के दिनों के मसीह के कथन (संकलन) अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश अंत के दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें