2. हाल ही में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कुछ वचनों को पढ़ने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के बाद, मैंने अपनी भावना में काफी प्रदत्त और शिक्षित महसूस किया है। प्रभु की उपासना करने के वर्षों में मैंने समझा था, उससे कहीं अधिक मैं अब समझता हूँ, इसलिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी होनी ही चाहिए। लेकिन जब से मेरे पादरी को पता चला कि मैं अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य में रुचि ले रहा हूँ, वह मुझे रोकने के लिए हर कोशिश करता रहा है। वह हर दिन मुझे इसके बारे में परेशान करता है। यहाँ तक कि उसने मेरे परिवार को भी मुझ पर नज़र रखने के लिए, और मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने या चर्च के उपदेशों को सुनने की अनुमति न देने के लिए, कहा है। मुझे अंदर ही अंदर आहत महसूस होता है। मुझे इन चीजों का अनुभव कैसे करना चाहिए?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो” (मत्ती 23:13)

“हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो” (मत्ती 23:15)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

ऐसे भी लोग हैं जो बड़े-बड़े गिरजाघरों में बाइबल पढ़ते हैं और दिन-भर इसका पाठ करते हैं, फिर भी उनमें से एक भी परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझता। उनमें से एक भी परमेश्वर को नहीं जान पाता; उनमें से कोई भी एक परमेश्वर के इरादों के अनुरूप तो और भी कम हो सकता है। वे सब बेकार और अधम लोग हैं, हर कोई “परमेश्वर” पर उपदेश झाड़ने के लिए ऊँचे पायदान पर खड़ा है। वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर का बैनर लेकर चलते हैं, फिर भी परमेश्वर का जानबूझकर प्रतिरोध करते हैं, जो मनुष्य का मांस खाते हुए और रक्त पीते हुए परमेश्वर में विश्वास करने की चिप्पी लेकर चलते हैं। ऐसे सभी लोग बुरे दानव हैं जो मनुष्य की आत्मा को निगलते हैं, दानवों के सरदार हैं जो सही मार्ग पर लोगों के कदम रखने को जानबूझकर बाधित करते हैं और वे ऐसी ठोकरें हैं जो लोगों की परमेश्वर की खोज में रुकावट बनती हैं। वे “मजबूत बनावट” वाले दिख सकते हैं, किंतु उनके अनुयायी भला कैसे जानें कि वे उन मसीह-विरोधियों के सिवाय कोई और नहीं हैं जो परमेश्वर का प्रतिरोध करने के लिए लोगों की अगुआई करते हैं? उनके अनुयायी भला कैसे जानें कि वे जीते-जागते दानव हैं जो इंसानी आत्माओं को निगलने के लिए समर्पित हैं? जो लोग परमेश्वर की उपस्थिति में खुद को उच्च सम्मान बख्शते हैं वे मनुष्यों में सर्वाधिक तुच्छ हैं, जबकि जो खुद को नीच समझते हैं वे सर्वाधिक सम्मानित हैं। और जिन्हें यह लगता है कि वे परमेश्वर के कार्य को जानते हैं और यही नहीं, जो सीधे तौर पर परमेश्वर को देखते हुए दूसरों के लिए परमेश्वर के कार्य की बड़े ही जोर-शोर से घोषणा करने में सक्षम होते हैं—ये मनुष्यों में सबसे अज्ञानी हैं। ऐसे सभी लोगों के पास परमेश्वर की गवाही नहीं होती, वे सभी अहंकारी और दंभी होते हैं। परमेश्वर का वास्तविक अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान होने के बावजूद, जो लोग ये मानते हैं कि उन्हें परमेश्वर का बहुत थोड़ा-सा ज्ञान है, वे परमेश्वर के सबसे प्रिय लोग होते हैं। ऐसे लोग ही सच में गवाह होते हैं और परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने के योग्य होते हैं।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर को न जानने वाले सभी लोग परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं

क्या तुम लोग इसकी जड़ जानना चाहते हो कि फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया? क्या तुम फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे भी ज़्यादा, उन्होंने केवल इस पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, फिर भी जीवन सत्य का अनुसरण नहीं किया। इसलिए, वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि उन्हें जीवन के मार्ग के बारे में कोई ज्ञान नहीं है, और नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है। तुम लोग क्या कहते हो, ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर का आशीष कैसे प्राप्त करेंगे? वे मसीहा को कैसे देख सकते हैं? उन्होंने यीशु का विरोध किया क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु द्वारा बताए गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे और इससे भी अधिक इसलिए क्योंकि वे मसीहा को नहीं समझते थे। और चूँकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था और कभी मसीहा के साथ नहीं जुड़े थे, उन्होंने मसीहा के बस नाम के साथ चिपके रहने की ग़लती की, जबकि हर मुमकिन ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का आज्ञापालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत था : इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता, तुम मसीह नहीं हो। क्या यह सोच हास्यास्पद और बेतुकी नहीं है? मैं तुम लोगों से आगे पूछता हूँ : क्या तुम लोगों के लिए वो गलतियाँ करना बेहद आसान नहीं जो उस समय के फरीसियों ने की थीं, क्योंकि तुम लोगों के पास यीशु की थोड़ी-भी समझ नहीं है? क्या तुम सत्य के मार्ग का भेद पहचान सकते हो? क्या तुम सचमुच विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने योग्य हो? यदि तुम नहीं जानते कि तुम मसीह का विरोध करोगे या नहीं, तो मेरा कहना है कि तुम पहले ही मौत की कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने, यीशु को अस्वीकार करने, उसे बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा-भला कहने में सक्षम हैं। इससे भी अधिक, वे यीशु के लौटने को शैतान द्वारा गुमराह किए जाने की तरह देखने में सक्षम हैं और ज्यादातर लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इस सब से तुम लोगों को डर नहीं लगता? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के खिलाफ निंदा होगी, कलीसियाओं के लिए कहे गए पवित्र आत्मा के वचनों का विनाश होगा और यीशु द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम हठपूर्वक अपनी गलतियां मानने से इनकार करते हो तो तुम लोग उस कार्य को कैसे समझ सकते हो जिसे यीशु श्वेत बादल पर देह में लौटने पर करता है? मैं तुम लोगों को यह बताता हूँ : जो लोग सत्य स्वीकार नहीं करते, फिर भी अंधों की तरह श्वेत बादलों पर यीशु के आगमन का इंतजार करते हैं, वे निश्चित रूप से वो लोग हैं जो पवित्र आत्मा की ईश-निंदा करते हैं और ये वो वर्ग है जो निश्चित तौर पर नष्ट कर दिया जाएगा। तुम लोग सिर्फ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो और सिर्फ स्वर्ग के सुखद क्षेत्र का आनंद लेना चाहते हो, तुमने यीशु के कहे वचनों का कभी पालन नहीं किया और जब यीशु देह में लौटता है तो उसके द्वारा व्यक्त किए गए सत्य को तुमने कभी नहीं स्वीकारा। यीशु के एक श्वेत बादल पर लौटने के तथ्य के बदले तुम लोग क्या दोगे? क्या वही ईमान दोगे, जिससे तुम लोग बार-बार पाप करते हो और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? श्वेत बादल पर लौटने वाले यीशु को तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या ये कार्य के कई वर्षों की वह पूँजी है, जिसके जरिए तुम अपनी बड़ाई करते हो? तुम किस चीज को थामकर रखोगे, ताकि लौटकर आए यीशु को तुम पर भरोसा हो? क्या वह तुम लोगों की अभिमानी प्रकृति है, जो किसी भी सत्य को समर्पित नहीं होती?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा

परमेश्वर द्वारा मनुष्य पर किए जाने वाले कार्य का हर कदम बाहर से यह लोगों के मध्य अंतःक्रिया प्रतीत होता है, मानो यह मानव-व्यवस्थाओं द्वारा या मानवीय विघ्न से उत्पन्न हुआ हो। किंतु, कार्य के प्रत्येक कदम, और घटित होने वाली हर चीज के पीछे शैतान द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाजी है और इनमें अपेक्षित है कि लोग परमेश्वर के लिए अपनी गवाही में अडिग बने रहें। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब का परीक्षण हुआ : पर्दे के पीछे शैतान परमेश्वर के साथ शर्त लगा रहा था और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कर्म थे और मनुष्यों के विघ्न थे। परमेश्वर द्वारा तुम लोगों पर किए गए कार्य के हर कदम के पीछे शैतान की परमेश्वर के साथ बाजी होती है—इसके पीछे एक लड़ाई होती है। ... जब परमेश्वर और शैतान आध्यात्मिक क्षेत्र में लड़ाई करते हैं, तो तुम्हें परमेश्वर को कैसे संतुष्ट करना चाहिए और किस प्रकार उसकी गवाही में अडिग रहना चाहिए? तुम्हें यह पता होना चाहिए कि जो कुछ भी तुम्हारे साथ होता है, वह एक महान परीक्षण है और वह समय है जब परमेश्वर को तुम्हारी गवाही की आवश्यकता है। हालाँकि ये बाहर से महत्त्वहीन लग सकती हैं, किंतु जब ये चीजें होती हैं तो ये दर्शाती हैं कि तुम परमेश्वर से प्रेम करते हो या नहीं। यदि तुम करते हो, तो तुम उसके लिए गवाही देने में अडिग रह पाओगे, और यदि तुम उसके प्रति प्रेम को अभ्यास में नहीं लाए हो, तो यह दर्शाता है कि तुम वह व्यक्ति नहीं हो जो सत्य को अभ्यास में लाता है, तुम सत्य से रहित हो, और जीवन से रहित हो, तुम भूसा हो!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल परमेश्वर से प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है

अगर तुम पर ऐसी कई चीजें आ पड़ती हैं, जो तुम्हारी धारणाओं के अनुरूप नहीं होतीं, परंतु फिर भी तुम उन्हें एक तरफ रखने और इन चीजों से परमेश्वर के क्रियाकलापों का ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ होते हो, और अगर शोधनों के बीच तुम अपना परमेश्वर-प्रेमी हृदय प्रकट करते हो, तो यह अपनी गवाही में अडिग रहना है। अगर तुम्हारे घर में शांति है, तुम देह-सुख का आनंद लेते हो, कोई तुम्हारा उत्पीड़न नहीं करता, और कलीसिया में तुम्हारे भाई-बहन तुम्हारा आज्ञापालन करते हैं, तो क्या तुम अपना परमेश्वर-प्रेमी हृदय प्रदर्शित कर सकते हो? क्या यह स्थिति तुम्हारा शोधन कर सकती है? केवल शोधन के माध्यम से ही तुम्हारा परमेश्वर-प्रेमी हृदय दर्शाया जा सकता है, और केवल अपनी धारणाओं के विपरीत घटित होने वाली चीजों के माध्यम से ही तुम पूर्ण बनाए जा सकते हो। कई नकारात्मक और विपरीत चीजों की सेवा और शैतान की तमाम तरह की अभिव्यक्तियों—उसके कामों, उसके आरोपों, उसकी बाधाओं और गुमराह करने के माध्यम से—परमेश्वर तुम्हें शैतान का भयानक चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाता है और इस प्रकार शैतान को पहचानने की तुम्हारी क्षमता को पूर्ण बनाता है, ताकि तुम शैतान से नफरत करो और उसके खिलाफ विद्रोह करो।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जिन्हें पूर्ण बनाया जाना है उन्हें शोधन से गुजरना होगा

तुम्हें इस या उस चीज से नहीं डरना चाहिए; चाहे तुम्हें कितनी भी मुसीबतों या खतरों का सामना करना पड़े, तुम्हें किसी भी अड़चन से बाधित हुए बिना मेरे सम्मुख अडिग रहना चाहिए ताकि मेरी इच्छा बेरोक-टोक पूरी हो सके। यह तुम्हारा कर्तव्य है; अन्यथा मैं अपना कोप तुम पर उतारूँगा और अपने हाथ से मैं...। फिर तुम अंतहीन मानसिक पीड़ा सहोगे। तुम्हें सब कुछ सहना होगा; मेरे लिए तुम्हें हर चीज का त्याग करने और अपनी पूरी ताकत से मेरा अनुसरण करने को तैयार रहना होगा और कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना होगा। अब वह समय है जब मैं तुम्हें परखूँगा : क्या तुम अपनी वफादारी मुझे अर्पित करोगे? क्या तुम मार्ग के अंत तक वफादारी से मेरा अनुसरण कर सकते हो? डरो मत; मेरे सहारे के रहते कौन कभी इस मार्ग को अवरुद्ध कर सकता है? यह याद रखो! याद रखो! हर चीज में मेरे अच्छे इरादे निहित हैं और हर चीज मेरी जाँच के अधीन है। क्या तुम अपनी हर कथनी-करनी में मेरे वचन का अनुसरण कर सकते हो? जब तुम्हारी अग्नि परीक्षाएँ होंगी तो क्या तुम घुटने टेकोगे और पुकारोगे? या तुम दुबक जाओगे और आगे बढ़ने में असमर्थ रहोगे?

तुममें मेरा साहस होना चाहिए और जब उन रिश्तेदारों का सामना करने की बात आए जो विश्वास नहीं करते तो तुम्हारे पास सिद्धांत होने चाहिए। लेकिन मेरी खातिर तुम्हें किसी भी अंधकार की शक्ति से हार भी नहीं माननी चाहिए। पूर्ण मार्ग पर चलने के लिए मेरी बुद्धि पर भरोसा रखो; शैतान के किसी भी षड्यंत्र को कामयाब न होने दो। अपने हृदय को मेरे सम्मुख रखने हेतु जो बन पड़े वह सब करो, मैं तुम्हें आराम दूँगा, तुम्हें शांति और आनंद प्रदान करूँगा। दूसरों के सामने एक विशेष तरह का होने का प्रयास मत करो; क्या मुझे संतुष्ट करना अधिक मूल्य और महत्व नहीं रखता? मुझे संतुष्ट करने से क्या तुम और भी अनंत और जीवनपर्यंत शान्ति या आनंद से नहीं भर जाओगे? तुम्हारा आज का कष्ट बताता है कि तुम्हारे भविष्य के आशीष कितने बड़े होंगे; वे अवर्णनीय हैं। तुम्हें जो आशीष प्राप्त होंगे, वे कितने बड़ें होंगे, ये तुम नहीं जानते; तुम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज यह वास्तविक बन गया है; बिल्कुल वास्तविक! यह बहुत दूर नहीं है—क्या तुम उसे देख सकते हो? इसका हर अंतिम अंश मुझमें है; आगे का मार्ग कितना रोशन है! अपने आंसू पोंछो तथा और अधिक दुःख या दर्द महसूस मत करो। हर चीज की व्यवस्था मेरे हाथों से होती है और मेरा लक्ष्य यह है कि तुम लोगों को जल्द विजेता बनाऊँ और तुम्हें अपने साथ महिमा में ले चलूँ। तुम्हारे साथ जो सब होता है, उसके लिए तुम्हें उसी अनुरूप आभारी और प्रशंसा से भरपूर होना चाहिए; इससे मुझे गहरी संतुष्टि मिलेगी।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 10

सृजित प्राणियों के रूप में लोगों को वे कर्तव्य पूरे करने चाहिए, जो उनसे अपेक्षित हैं, और शुद्धिकरण के बीच परमेश्वर के लिए गवाह बनना चाहिए। हर परीक्षण में उन्हें उस गवाही पर कायम रहना चाहिए, जो कि उन्हें देनी चाहिए, और परमेश्वर के लिए उन्हें ऐसा जबरदस्त तरीके से करना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति विजेता होता है। परमेश्वर चाहे कैसे भी तुम्हें शुद्ध करे, तुम आत्मविश्वास से भरे रहते हो और परमेश्वर पर से कभी विश्वास नहीं खोते। तुम वह करते हो, जो मनुष्य को करना चाहिए। परमेश्वर मनुष्य से इसी की अपेक्षा करता है, और मनुष्य का दिल पूरी तरह से उसकी ओर लौटने तथा हर पल उसकी ओर मुड़ने में सक्षम होना चाहिए। ऐसा होता है विजेता। जिन लोगों का उल्लेख परमेश्वर “विजेताओं” के रूप में करता है, वे लोग वे होते हैं, जो तब भी गवाही में दृढ़ बने रहने और परमेश्वर के प्रति अपना मूल आत्मविश्वास और भक्ति बनाए रखने में सक्षम होते हैं, जब वे शैतान के प्रभाव और उसकी घेरेबंदी में होते हैं, अर्थात् जब वे स्वयं को अंधकार की शक्तियों के बीच पाते हैं। यदि तुम, चाहे कुछ भी हो जाए, फिर भी परमेश्वर के समक्ष पवित्र दिल और उसके लिए अपना वास्तविक प्यार बनाए रखने में सक्षम रहते हो, तो तुम परमेश्वर के सामने गवाही में दृढ़ रहते हो, और इसी को परमेश्वर “विजेता” होने के रूप में संदर्भित करता है। यदि परमेश्वर द्वारा तुम्हें आशीष दिए जाने पर तुम्हारा अनुसरण उत्कृष्ट होता है, लेकिन उसके आशीष न मिलने पर तुम पीछे हट जाते हो, तो क्या यह पवित्रता है? चूँकि तुम निश्चित हो कि यह रास्ता सही है, इसलिए तुम्हें अंत तक इसका अनुसरण करना चाहिए; तुम्हें परमेश्वर के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखनी चाहिए। चूँकि तुमने देख लिया है कि स्वयं परमेश्वर तुम्हें पूर्ण बनाने के लिए पृथ्वी पर आया है, इसलिए तुम्हें पूरी तरह से अपना दिल उसे समर्पित कर देना चाहिए। भले ही वह कुछ भी करे, यहाँ तक कि बिलकुल अंत में तुम्हारे लिए एक प्रतिकूल परिणाम ही क्यों न निर्धारित कर दे, अगर तुम फिर भी उसका अनुसरण कर सकते हो, तो यह परमेश्वर के सामने अपनी पवित्रता बनाए रखना है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम्हें परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी कायम रखनी चाहिए

पिछला: 1. सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के माध्यम से, मेरे लिए यह निश्चित हो गया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी है, और मैं अब अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करता हूँ। लेकिन हाल ही में मेरे परिवार में कुछ नाराज़गी भरी और परेशान करने वाली बातें हुई हैं। ऐसी बातें क्यों होती हैं, और मुझे उनके साथ कैसे पेश आना चाहिए?

अगला: 3. मैं स्वीकार करता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया जिसे प्रचारित करती है, वह सही मार्ग है, लेकिन चूँकि हमारी कलीसिया में लोगों को पादरियों और एल्डर्स द्वारा फैलाए गए झूठों और भ्रांतियों से धोखा दिया गया है, वे सभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के विरोधी हैं। मुझे चिंता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य स्वीकार करने के बाद मुझे मेरी पुरानी कलीसिया के भाई-बहनों द्वारा अस्वीकार और निन्दित किया जाएगा। मेरा आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है और मैं इन सब का सामना करने के लिए पर्याप्त साहसी नहीं हूँ—मुझे क्या करना चाहिए?

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1. प्रभु ने हमसे यह कहते हुए, एक वादा किया, “मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो” (यूहन्ना 14:2-3)। प्रभु यीशु पुनर्जीवित हुआ और हमारे लिए एक जगह तैयार करने के लिए स्वर्ग में चढ़ा, और इसलिए यह स्थान स्वर्ग में होना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु लौट आया है और पृथ्वी पर ईश्वर का राज्य स्थापित कर चुका है। मुझे समझ में नहीं आता : स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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