2. आप कहते हैं कि अंतिम दिनों के दौरान, ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति को उसके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए, अच्छे को पुरस्कृत करने और बुरे को दंडित करने के लिए, पुराने युग को समाप्त करने के लिए, न्याय का कार्य करता है, और अंत में, मसीह का राज्य पृथ्वी पर साकार होगा। पृथ्वी पर मसीह का राज्य कैसे प्रकट होगा? और उस राज्य की सुंदरता किसके जैसी दिखेगी?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते देखा। वह उस दुल्हिन के समान थी जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊँचे शब्द से यह कहते हुए सुना, ‘देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है। वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्वर होगा। वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं’” (प्रकाशितवाक्य 21:2-4)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

राज्य मानवजाति के बीच फैल रहा है, यह मानवजाति के बीच बन रहा है और यह मानवजाति के बीच खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। मेरे लोग, जो आज के राज्य में हैं, तुम लोगों में से कौन मानवजाति का सदस्य नहीं है? तुममें से कौन मानवीय स्थिति के बाहर है? जब मेरा नया शुरुआती बिंदु सार्वजनिक किया जाएगा तो लोग किस तरह से प्रतिक्रिया देंगे? तुम लोगों ने अपनी आँखों से मानव दुनिया की दशा देखी है; क्या तुमने अभी तक इस दुनिया में हमेशा के लिए रहने के विचार दूर नहीं किए हैं? अभी मैं अपने लोगों के बीच चल रहा हूँ और मैं उनके बीच रहता हूँ। आज जो लोग मुझसे सच्चा प्रेम करते हैं—ऐसे लोग धन्य हैं। धन्य हैं वे लोग जो मेरे प्रति समर्पण करते हैं, वे मेरे राज्य में बने रहेंगे। धन्य हैं वे लोग जो मुझे जानते हैं, वे मेरे राज्य में ताकत सँभालेंगे। धन्य हैं वे लोग जो मेरा अनुसरण करते हैं, वे शैतान के बंधनों से मुक्त हो जाएँगे और मेरे आशीषों का आनंद लेंगे। धन्य हैं वे लोग जो अपने खिलाफ विद्रोह करने में समर्थ हैं, वे मेरे होंगे और मेरे राज्य की प्रचुरता प्राप्त करेंगे। जो लोग मेरे लिए दौड़-धूप करते हैं, उन्हें मैं याद रखूँगा, जो लोग मेरे लिए खुद को खपाते हैं, उन्हें मैं स्वीकार करूँगा और जो लोग मेरे लिए अर्पित होते हैं, उन्हें मैं उनके आनंद के लिए चीजें दूँगा। जो लोग मेरे वचनों का आनंद लेते हैं, उन्हें मैं आशीष दूँगा; वे मेरे राज्य में शहतीर थामे रखने वाले स्तंभ होंगे, वे मेरे घर में बेजोड़ प्रचुरता का आनंद लेंगे और कोई भी उनसे मुकाबला नहीं कर सकेगा। क्या तुम लोगों ने कभी वे आशीष स्वीकार किए हैं जो तुम्हारे लिए तैयार किए गए थे? क्या तुम लोगों ने कभी उन वादों का पीछा किया है जो तुम लोगों के लिए किए गए थे? तुम लोग मेरे प्रकाश के मार्गदर्शन में अन्धकार की शक्तियों का शिकंजा तोड़कर बाहर आ जाओगे। तुम अंधकार के बीच प्रकाश का मार्गदर्शन नहीं खोओगे। तुम सभी चीजों के मालिक होगे। तुम शैतान के सामने विजेता होगे। तुम बड़े लाल अजगर के देश के पतन पर मेरी जीत के सबूत के रूप में अनगिनत लोगों के बीच उठ खड़े होगे। तुम लोग सिनिम की जमीन पर दृढ़ और अटल रहोगे। तुम जो कष्ट सहते हो उनके परिणामस्वरूप विरासत में मेरे आशीष प्राप्त करोगे और तुम पूरे ब्रह्माण्ड में मेरी महिमा के प्रकाश की किरणें बिखेरोगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 19

एक बार जब विजय का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, तब मनुष्य को एक सुंदर संसार में लाया जाएगा। निस्संदेह, यह जीवन तब भी पृथ्वी पर ही होगा, किंतु यह मनुष्य के आज के जीवन के बिल्कुल विपरीत होगा। यह वह जीवन है, जो संपूर्ण मानव-जाति पर विजय प्राप्त कर लिए जाने के बाद मानव-जाति के पास होगा, यह पृथ्वी पर मनुष्य के लिए एक नई शुरुआत होगी, और मनुष्य के पास इस प्रकार का जीवन होना इस बात का सबूत होगा कि मनुष्य ने एक नए और सुंदर क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। यह पृथ्वी पर मनुष्य और परमेश्वर के जीवन की शुरुआत होगी। ऐसे सुंदर जीवन का आधार ऐसा होना चाहिए, कि मनुष्य को शुद्ध कर दिए जाने और उस पर विजय पा लिए जाने के बाद वह परमेश्वर के सम्मुख समर्पण कर दे। और इसलिए, मानव-जाति के अद्भुत मंज़िल में प्रवेश करने से पहले विजय का कार्य परमेश्वर के कार्य का अंतिम चरण है। ऐसा जीवन ही पृथ्वी पर मनुष्य का भविष्य का जीवन है, पृथ्वी पर सबसे अधिक सुंदर जीवन, उस प्रकार का जीवन जिसकी लालसा मनुष्य करता है, और उस प्रकार का जीवन, जिसे मनुष्य ने संसार के इतिहास में पहले कभी प्राप्त नहीं किया है। यह 6,000 वर्षों के प्रबंधन के कार्य का अंतिम परिणाम है, यह वही है जिसकी मानव-जाति सर्वाधिक अभिलाषा करती है, और यह मनुष्य के लिए परमेश्वर की प्रतिज्ञा भी है। किंतु यह प्रतिज्ञा तुरंत पूरी नहीं हो सकती : मनुष्य भविष्य की मंज़िल में केवल तभी प्रवेश करेगा, जब अंत के दिनों का कार्य पूरा कर लिया जाएगा और उस पर पूरी तरह से विजय पा ली जाएगी, अर्थात् जब शैतान को पूरी तरह से पराजित कर दिया जाएगा। शोधन कर दिए जाने के बाद मनुष्य पापपूर्ण प्रकृति से रहित हो जाएगा, क्योंकि परमेश्वर ने शैतान को पराजित कर दिया होगा, अर्थात् विरोधी ताक़तों द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं होगा, और कोई विरोधी ताक़तें नहीं होंगी जो मनुष्य की देह पर आक्रमण कर सकें। और इसलिए मनुष्य स्वतंत्र और पावनीकृत होगा—वह शाश्वतता में प्रवेश कर चुका होगा। अंधकार की विरोधी ताकतों को बंधन में रखे जाने पर ही मनुष्य जहाँ कहीं जाएगा, वहाँ स्वतंत्र होगा, और इसलिए वह विद्रोहशीलता या विरोध से रहित होगा। बस शैतान को क़ैद में रखना है, और मनुष्य के साथ सब ठीक हो जाएगा; वर्तमान स्थिति इसलिए विद्यमान है, क्योंकि शैतान अभी भी पृथ्वी पर हर जगह विघ्न पैदा करता है, और क्योंकि परमेश्वर के प्रबंधन का संपूर्ण कार्य अभी तक लक्ष्य तक नहीं पहुँचा है। एक बार जब शैतान को पराजित कर दिया जाएगा, तो मनुष्य पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा; जब मनुष्य परमेश्वर को प्राप्त कर लेगा और शैतान की सत्ता से बाहर आ जाएगा, तो वह धार्मिकता के सूर्य को देखेगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

जब परमेश्वर अपने महान कोप को बंधन से मुक्त करेगा, तो परिणामस्वरूप, पूरी दुनिया, ज्वालामुखी के फटने की तरह, सभी प्रकार की आपदाओं का अनुभव करेगी। आकाश में ऊपर खड़े हो कर, यह देखा जा सकता है कि पृथ्वी पर सभी प्रकार की आपदाएँ, दिन प्रति दिन मानवजाति को घेर रही हैं। ऊपर से नीचे देखने पर, पृथ्वी विभिन्न दृश्य प्रदर्शित करती है जो भूकंप से पहले के दृश्य जैसे हैं। तरल अग्नि अनियंत्रित बहती है, लावा बेरोकटोक बहता है, पहाड़ सरकते हैं, और हर जगह उदासीन प्रकाश चमकता है। पूरी दुनिया आग में डूब गई है। यह परमेश्वर के कोप के उत्सर्जन का दृश्य है, और यह उसके न्याय का समय है। वे सभी जो मांस और रक्त वाले हैं भागने में असमर्थ होंगे। इस प्रकार, पूरी दुनिया को नष्ट करने के लिए देशों के बीच युद्ध और लोगों के बीच संघर्ष की आवश्यकता नहीं होगी; इसके बजाय दुनिया परमेश्वर की ताड़ना के पालने में “स्वयं का होशहवास में आनंद” लेगी। कोई भी बच निकलने में सक्षम नहीं होगा; हर एक व्यक्ति को, एक के बाद एक, इस कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। इसके बाद संपूर्ण ब्रह्माण्ड एक बार पुनः पवित्र कांति से जगमगाएगा और समस्त मानवजाति एक बार पुनः एक नया जीवन शुरू करेगी। और परमेश्वर ब्रह्मांड के ऊपर आराम करेगा और हर दिन मानवजाति को आशीष देगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों की व्याख्या, अध्याय 18

मेरे वचन ज्यों-ज्यों पूर्ण होते हैं, पृथ्वी पर धीरे-धीरे राज्य बनता जाता है और मनुष्य धीरे-धीरे सामान्यता की ओर लौटता है, और इस प्रकार पृथ्वी पर वह राज्य स्थापित हो जाता है जो मेरे हृदय में है। राज्य में, परमेश्वर के सभी लोग सामान्य मनुष्य का जीवन पुनः प्राप्त कर लेते हैं। पाले वाली शीत ऋतु विदा हुई, उसका स्थान वासंती नगरों के संसार ने ले लिया है, जहाँ पूरे साल बहार रहती है। लोगों के सामने अब मनुष्य का निस्सार संसार नहीं रह गया है, और न ही वे मनुष्य के संसार की ठण्डी सिहरन सहते हैं। लोग एक दूसरे से लड़ते नहीं हैं, देश एक दूसरे के विरुद्ध युद्ध में नहीं उतरते हैं, नरसंहार अब और नहीं हैं और न वह लहू जो नरसंहार से बहता है; सारे भूभाग आनंद से भरे हैं, और हर जगह मनुष्यों की आपसी गर्माहट से भरी है। मैं पूरे संसार में घूमता हूँ, मैं ऊपर अपने सिंहासन से आनंदित होता हूँ, और मैं तारों के बीच रहता हूँ। और स्वर्गदूत मेरे लिए नए-नए गीत और नए-नए नृत्य प्रस्तुत करते हैं। उनके चेहरों से उनकी क्षणभंगुरता के कारण अब और आँसू नहीं ढलकते हैं। अब मुझे स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनाई देती, और अब कोई मुझसे कठिनाइयों की शिकायत नहीं करता। आज, तुम सब लोग मेरे सामने रहते हो; कल तुम सब लोग मेरे राज्य में रहोगे। क्या यह सबसे बड़ा आशीष नहीं है जो मैं मनुष्य को देता हूँ?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 20

विश्राम में जीवन का अर्थ है युद्ध के बिना, गंदगी के बिना और स्थायी अधार्मिकता के बिना जीवन। कहने का अर्थ है कि यह जीवन शैतान के विघ्नों (यहाँ “शैतान” का अर्थ शत्रुतापूर्ण शक्तियों से है) और शैतान की भ्रष्टता से मुक्त है और इसे परमेश्वर विरोधी किसी भी शक्ति के आक्रमण का ख़तरा नहीं है; यह ऐसा जीवन है, जिसमें हर चीज़ अपनी किस्म का अनुसरण करती है और सृष्टि के प्रभु की आराधना कर सकती है और जिसमें स्वर्ग और पृथ्वी पूरी तरह शांत हैं—“मनुष्यों का विश्रामपूर्ण जीवन,” इन शब्दों का यही अर्थ है। जब परमेश्वर विश्राम करेगा, तो पृथ्वी पर अधार्मिकता नहीं रहेगी, न ही शत्रुतापूर्ण शक्तियों का फिर कोई आक्रमण होगा और मानवजाति एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेगी—शैतान द्वारा भ्रष्ट मानवता नहीं होगी, बल्कि ऐसी मानवता होगी, जिसे शैतान के भ्रष्ट किए जाने के बाद बचाया गया है। मानवता के विश्राम का दिन ही परमेश्वर के विश्राम का दिन भी होगा। मानवता के विश्राम में प्रवेश करने में असमर्थता के कारण परमेश्वर ने अपना विश्राम खोया था, इसलिए नहीं कि वह मूल रूप से विश्राम करने में असमर्थ था। विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ यह नहीं कि सभी चीज़ों का चलना या विकसित होना बंद हो जाएगा, न ही इसका यह अर्थ है कि परमेश्वर कार्य करना बंद कर देगा या मनुष्यों का जीवन रुक जाएगा। विश्राम में प्रवेश करने का चिह्न होगा जब शैतान नष्ट कर दिया गया है, जब उसके साथ बुरे कामों में शामिल दुष्ट लोग दंडित किए गए हैं और मिटा दिए गए हैं और जब परमेश्वर के प्रति सभी शत्रुतापूर्ण शक्तियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। परमेश्वर के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि वह मानवता के उद्धार का कार्य अब और नहीं करेगा। मानवता के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि समस्त मानवता परमेश्वर के प्रकाश के भीतर और उसके आशीष के अधीन, शैतान की भ्रष्टता के बिना जिएगी और कोई अधार्मिकता नहीं होगी। परमेश्वर की देखभाल में मनुष्य सामान्य रूप से पृथ्वी पर रहेंगे। जब परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे, तो इसका अर्थ होगा कि मानवता को बचा लिया गया है और शैतान का विनाश हो चुका है, कि मनुष्यों के बीच परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है। परमेश्वर मनुष्यों के बीच अब और कार्य नहीं करता रहेगा और वे अब शैतान की सत्ता के अधीन और नहीं रहेंगे। वैसे तो, परमेश्वर अब और व्यस्त नहीं रहेगा और मनुष्य लगातार गतिमान नहीं रहेंगे; परमेश्वर और मानवता एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपने मूल स्थान पर लौट जाएगा और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान पर लौट जाएगा। ये वे गंतव्य हैं, जहाँ परमेश्वर का समस्त प्रबंधन पूरा होने पर परमेश्वर और मनुष्य रहेंगे। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मानवता के पास मानवता की। विश्राम करते समय, परमेश्वर पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा, जबकि वे उसके प्रकाश में, स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेंगे। परमेश्वर अब मानवता के बीच और नहीं रहेगा, न ही मनुष्य परमेश्वर के साथ उसके गंतव्य में रहने में समर्थ होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक ही क्षेत्र के भीतर नहीं रह सकते; बल्कि दोनों के जीने के अपने-अपने तरीक़े हैं। परमेश्वर वह है, जो समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता है और समस्त मानवता परमेश्वर के प्रबंधन-कार्य का ठोस स्वरूप है। मनुष्य वे हैं, जिनकी अगुआई की जाती है और वे परमेश्वर के सार के समान नहीं हैं। “विश्राम” का अर्थ है अपने मूल स्थान में लौटना। इसलिए, जब परमेश्वर विश्राम में प्रवेश करता है, तो इसका अर्थ है कि परमेश्वर अपने मूल स्थान में लौट जाता है। वह पृथ्वी पर अब और नहीं रहेगा, या मानवता की ख़ुशियाँ या उसके दुःख साझा नहीं करेगा। जब मनुष्य विश्राम में प्रवेश करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे सच्चे सृजित प्राणी बन गए हैं; वे पृथ्वी से परमेश्वर की आराधना करेंगे और सामान्य मानवीय जीवन जिएंगे। लोग अब और परमेश्वर से विद्रोह या उसका प्रतिरोध नहीं करेंगे और वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएंगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के अपने-अपने जीवन और गंतव्य होंगे। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इसी तरह, अपना प्रबंधन-कार्य पूरा करने के बाद परमेश्वर का विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश अपरिहार्य प्रवृत्ति बन गए हैं। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम में परमेश्वर की आराधना करते हैं, वे पृथ्वी पर रहेंगे और जब परमेश्वर बाकी मानवता को विश्राम में ले जाएगा, वह स्वर्ग से उनका नेतृत्व करेगा न कि पृथ्वी से। परमेश्वर तब भी पवित्र आत्मा ही होगा, जबकि मनुष्य तब भी देह होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों अलग ढंग से विश्राम करते हैं। जब परमेश्वर विश्राम करता है, वह मनुष्यों के बीच आएगा और प्रकट होगा; जबकि मनुष्यों को विश्राम के दौरान स्वर्ग की यात्रा करने और साथ ही वहाँ के जीवन का आनंद उठाने के लिए परमेश्वर द्वारा अगुआई की जाएगी।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

जब मनुष्य पृथ्वी पर असली मानवीय जीवन प्राप्त कर लेगा और शैतान की सभी ताकतों को बंधन में डाल दिया जाएगा, तब मनुष्य बड़ी आसानी से पृथ्वी पर जीवन-यापन करेगा। चीज़ें उतनी जटिल नहीं होंगी, जितनी आज हैं : पारस्परिक रिश्ते, सामाजिक रिश्ते, जटिल पारिवारिक रिश्ते—वे इतनी परेशानी, इतना दर्द लेकर आते हैं! इन सबके बीच जीना बहुत अप्रिय है! एक बार मनुष्य पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी, तो उसका दिल और दिमाग बदल जाएगा : उसके पास परमेश्वर का भय मानने वाला और परमेश्वर-प्रेमी हृदय होगा। एक बार जब विश्व के ऐसे लोगों पर, जो परमेश्वर से प्रेम करने की इच्छा रखते हैं, विजय पा ली जाएगी, अर्थात् एक बार जब शैतान को हरा दिया जाएगा, और एक बार जब शैतान को—अंधकार की सभी ताकतों को—बंधन में डाल दिया जाएगा, तो पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन निर्विघ्न हो जाएगा, और वह पृथ्वी पर आज़ादी से जीवन जीने में सक्षम हो जाएगा। यदि मनुष्य का जीवन दैहिक रिश्तों और देह के जटिल मामलों से रहित होता, तो यह बहुत अधिक आसान होता। मनुष्य के दैहिक रिश्ते बहुत जटिल होते हैं, और मनुष्य के लिए ऐसी चीज़ों का होना इस बात का प्रमाण है कि उसने स्वयं को अभी तक शैतान के प्रभाव से मुक्त नहीं किया है। यदि अपने प्रत्येक भाई-बहन के साथ तुम्हारा रिश्ता समान होता, यदि अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ तुम्हारा रिश्ता समान होता, तो तुम्हें परेशान करने के लिए कुछ न होता और तुम्हें किसी के बारे में चिंता करने की आवश्यकता न होती। इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता था, और इस तरह से मनुष्य को उसकी आधी तकलीफों से मुक्ति मिल गई होती। पृथ्वी पर एक सामान्य मानवीय जीवन जीने से मनुष्य स्वर्गदूतों के समान होगा; यद्यपि अभी भी वह देह का प्राणी होगा, फिर भी वह स्वर्गदूत के समान होगा। यही वह अंतिम प्रतिज्ञा है, आख़िरी वादा, जो मनुष्य को प्रदान किया गया है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

जब मनुष्य शाश्वत मंज़िल में प्रवेश करेगा, तो मनुष्य सृजनकर्ता की आराधना करेगा, और चूँकि मनुष्य ने उद्धार प्राप्त कर लिया है और शाश्वतता में प्रवेश कर लिया है, इसलिए मनुष्य किसी उद्देश्य की खोज नहीं करेगा, इसके अतिरिक्त, न ही उसे शैतान द्वारा घेरे जाने की चिंता करने की आवश्यकता होगी। इस समय हर मनुष्य अपने स्थान पर रहेगा और अपना कर्तव्य निभाएगा, और भले ही लोगों को ताड़ना न दी जाए या उनका न्याय न किया जाए, फिर भी प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य निभाएगा। उस समय मनुष्य पहचान और हैसियत दोनों से एक प्राणी होगा। तब ऊँच और नीच का भेद नहीं रहेगा; प्रत्येक व्यक्ति बस एक भिन्न कार्य करेगा। फिर भी मनुष्य एक मंज़िल में जीवन बिताएगा, जो मानव-जाति के लिए एक व्यवस्थित और उपयुक्त मंज़िल होगी; मनुष्य सृष्टिकर्ता की आराधना करने के वास्ते अपना कर्तव्य निभाएगा, और यही वह मानव-जाति होगी, जो शाश्वतता की मानव-जाति बनेगी। उस समय, मनुष्य ने परमेश्वर द्वारा रोशन किया गया जीवन प्राप्त कर लिया होगा, ऐसा जीवन जो परमेश्वर की देखरेख और संरक्षण के अधीन है, ऐसा जीवन जो परमेश्वर के साथ है। मानव-जाति पृथ्वी पर एक सामान्य जीवन जीएगी, और सभी लोग सही मार्ग में प्रवेश करेंगे। 6,000-वर्षीय प्रबंधन योजना ने शैतान को पूरी तरह से पराजित कर दिया होगा, अर्थात् परमेश्वर ने मनुष्य की मूल छवि पुनः प्राप्त कर ली होगी जैसी पृथ्वी पर उसके सृजन के बाद थी, और इस प्रकार परमेश्वर के मूल इरादे पूरे हो चुके होंगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

जब मनुष्यों को उनकी मूल समानता में बहाल कर लिया जाएगा, और जब वे अपने-अपने कर्तव्य निभा सकेंगे, अपने उचित स्थानों पर बने रह सकेंगे और परमेश्वर की सभी व्यवस्थाओं को समर्पण कर सकेंगे, तब परमेश्वर ने पृथ्वी पर उन लोगों का एक समूह प्राप्त कर लिया होगा, जो उसकी आराधना करते हैं और उसने पृथ्वी पर एक राज्य भी स्थापित कर लिया होगा, जो उसकी आराधना करता है। पृथ्वी पर उसकी अनंत विजय होगी और वे सभी जो उसके विरोध में हैं, अनंतकाल के लिए नष्ट हो जाएँगे। इससे मनुष्य का सृजन करने की उसकी मूल इच्छा बहाल होगी; इससे सब चीजों के सृजन की उसकी मूल इच्छा बहाल होगी और इससे पृथ्वी पर सभी चीज़ों पर और शत्रुओं के बीच उसका अधिकार भी बहाल हो जाएगा। ये उसकी संपूर्ण विजय के प्रतीक होंगे। इसके बाद से मानवता विश्राम में प्रवेश करेगी और ऐसे जीवन में प्रवेश करेगी, जो सही मार्ग पर है। मानवता के साथ परमेश्वर भी अनंत विश्राम में प्रवेश करेगा और मनुष्यों और स्वयं के साथ एक अनंत जीवन का आरंभ करेगा। पृथ्वी से गंदगी और विद्रोहीपन मिट जाएगा, पृथ्वी पर से सारा विलाप भी समाप्त हो जाएगा और परमेश्वर का विरोध करने वाली प्रत्येक चीज़ का अस्तित्व नहीं रहेगा। केवल परमेश्वर और वही लोग बचेंगे, जिनका उसने उद्धार किया है; केवल उसकी सृष्टि ही बचेगी।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

पूरी धरती खिलखिलाहट की गूँज से भर जाती है, पृथ्वी पर हर जगह स्तुति का वातावरण है, और कोई भी जगह मेरी महिमा से रहित नहीं है। मेरी बुद्धि पृथ्वी पर हर जगह, और समूचे ब्रह्माण्ड भर में है। सभी चीजों के बीच मेरी बुद्धि के फल हैं, सभी लोगों के बीच मेरी बुद्धि की उत्कृष्ट कृतियाँ समाई हैं; सब कुछ मेरे राज्य की सारी चीजों के समान है, और सभी लोग मेरी चारागाहों पर भेड़ों के समान मेरे आसमानों के नीचे विश्राम में रहते हैं। मैं सभी मनुष्यों से ऊपर चलता हूँ और हर कहीं देख रहा हूँ। कुछ भी कभी पुराना दिखाई नहीं देता है, और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर विश्राम करता हूँ, मैं संपूर्ण ब्रह्माण्ड के ऊपर आराम से पीठ टिकाता हूँ, और मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ, क्योंकि सभी चीजों ने अपनी पवित्रता पुनः प्राप्त कर ली है, और मैं एक बार फिर सिय्योन के भीतर शांतिपूर्वक निवास कर सकता हूँ, और पृथ्वी पर लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन शांत, संतुष्ट जीवन जी सकते हैं। सभी लोग सब कुछ मेरे हाथों में प्रबंधित कर रहे हैं, सभी लोगों ने अपनी पूर्व बुद्धिमता और मूल प्रकटन पुनः प्राप्त कर लिया है; वे धूल से अब और ढके नहीं हैं, बल्कि, मेरे राज्य में, हरिताश्म के समान पवित्र हैं, प्रत्येक का चेहरा मनुष्य के हृदय के भीतर पवित्र जन के चेहरे के समान है, क्योंकि मनुष्यों के बीच मेरा राज्य स्थापित हो गया है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 16

“मैं सभी मनुष्यों से ऊपर चलता हूँ और हर कहीं देख रहा हूँ। कुछ भी कभी पुराना दिखाई नहीं देता है, और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर विश्राम करता हूँ, मैं संपूर्ण ब्रह्माण्ड के ऊपर आराम से पीठ टिकाता हूँ...।” यह परमेश्वर के वर्तमान कार्य का परिणाम है। परमेश्वर के चुने हुए सभी लोग अपने मूल स्वरूप में वापस आ जाते हैं, जिसके कारण वे स्वर्गदूत, जिन्होंने इतने वर्षों तक कष्ट झेला है, मुक्त हो जाते हैं, जैसा कि परमेश्वर कहता है “उनके चेहरे मनुष्य के हृदय के भीतर एक पवित्र जन जैसे हैं।” चूँकि स्वर्गदूत पृथ्वी पर कार्य करते हैं और पृथ्वी पर परमेश्वर की सेवा करते हैं, और परमेश्वर की महिमा दुनिया भर में फैलती है, इसलिए स्वर्ग को पृथ्वी पर लाया जाता है, और पृथ्वी को स्वर्ग तक उठाया जाता है। इसलिए, मनुष्य वह कड़ी है जो स्वर्ग और पृथ्वी को जोड़ती है; स्वर्ग और पृथ्वी अब दूर-दूर नहीं हैं, अलग नहीं हैं, बल्कि जुड़कर एक हो गए हैं। दुनिया भर में, केवल परमेश्वर और मनुष्य हैं। कोई गुबार या गंदगी नहीं है, सब कुछ नया हो गया है, जैसे कि आकाश के नीचे हरे-भरे चरागाह में लेटा हुआ भेड़ का कोई छोटा-सा बच्चा, परमेश्वर के सभी अनुग्रहों का आनंद ले रहा हो। हरियाली के आगमन की वजह से जीवन की साँस दमकने लगती है, क्योंकि परमेश्वर मनुष्य के साथ सदा-सर्वदा रहने के लिए दुनिया में आता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे परमेश्वर के मुख से कहा गया था कि “मैं एक बार फिर से सिय्योन के भीतर शांतिपूर्वक निवास कर सकता हूँ।” यह शैतान की हार का प्रतीक है, यह परमेश्वर के विश्राम का दिन है, और सभी लोग इस दिन की प्रशंसा और घोषणा करेंगे और स्मरणोत्सव मनाया जाएगा। जब परमेश्वर सिंहासन पर आराम करता है तभी वह पृथ्वी पर अपना कार्य भी समाप्त कर लेता है, और इसी क्षण इंसान को परमेश्वर के रहस्य भी दिखाए जाते हैं; परमेश्वर और मनुष्य हमेशा सामंजस्य में रहेंगे, कभी अलग नहीं होंगे—ऐसे हैं राज्य के सुंदर दृश्य!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों की व्याख्या, अध्याय 16

बिजली की एक कौंध में, सभी प्रकार के जानवर अपने असली स्वरूप में प्रकट हो जाते हैं। इसी प्रकार, मेरे प्रकाश से रोशन होकर मनुष्य ने भी उस पवित्रता को वापस पा लिया है, जो कभी उसके पास थी। ओह, अतीत का वह भ्रष्ट संसार! अंततः यह गंदे पानी में पलट गया है और सतह के नीचे डूबकर कीचड़ में घुल गया है! ओह, पूरी मानवजाति, मेरी अपनी सृष्टि! अंततः वे इस प्रकाश में फिर से जीवित हो गए हैं, उन्होंने अस्तित्व का आधार प्राप्त कर लिया है और कीचड़ में संघर्ष करना बंद कर चुके हैं! ओह, असंख्य वस्तुएं, जिन्हें मैं अपने हाथों में थामे हूँ! मेरे वचनों के माध्यम से वे पुनः नई कैसे नहीं हो सकतीं? वे इस प्रकाश में, अपने कामों को कैसे पूरी तरह विकसित नहीं कर सकते? पृथ्वी अब मौत सी स्थिर और मूक नहीं है, स्वर्ग अब उजाड़ और दुःखी नहीं है। स्वर्ग और पृथ्वी अब एक रिक्त स्थान द्वारा अलग नहीं हैं, कभी अलग न होने के लिए एकाकार हो गए हैं। इस उल्लासपूर्ण अवसर पर, इस हर्षोन्माद के क्षण में, मेरी धार्मिकता और मेरी पवित्रता पूरे ब्रह्मांड में फैल गई है और सभी मनुष्यों के बीच उनकी निरंतर जयकार की जाती है। स्वर्ग के नगर आनंद से हँस रहे हैं और पृथ्वी का साम्राज्य प्रसन्न होकर नृत्य कर रहा है। इस समय कौन आनंदित नहीं है और इस समय कौन रो नहीं रहा है? पृथ्वी अपनी मूल स्थिति में स्वर्ग से संबद्ध है और स्वर्ग पृथ्वी के साथ जुड़ा है। मनुष्य, स्वर्ग और पृथ्वी को बाँधे रखने वाली डोर है और मनुष्य की पवित्रता के कारण, मनुष्य के नवीनीकरण के कारण, स्वर्ग अब पृथ्वी से छुपा हुआ नहीं है और पृथ्वी अब स्वर्ग की ओर मौन नहीं है। सभी मनुष्यों के चेहरे आभार की मुस्कान से सज्जित हैं और उनके हृदय में एक असीमित मिठास छिपी है, जिसकी कोई सीमा नहीं। मनुष्य अन्य मनुष्य से झगड़ा नहीं करता, न मनुष्य एक दूसरे के साथ मारपीट करते हैं। क्या कुछ ऐसे हैं, जो मेरे प्रकाश में दूसरों के साथ शांति से नहीं रहते? क्या कुछ ऐसे हैं, जो मेरे दिवस में मेरा नाम बदनाम करते हैं? सभी मनुष्य मुझे भयभीत नजरों से देखते हैं और अपने हृदय में वे चुपचाप मेरी दुहाई देते हैं। मैंने उनके हर कर्म को जांचा है : जिन मनुष्यों की शुद्धि कर दी गई है, उनमें से कोई भी मेरे खिलाफ विद्रोही नहीं है, कोई भी मेरी आलोचना नहीं करता। मेरे स्वभाव सभी मनुष्यों में पैठ जाते हैं। सभी मनुष्य मेरे बारे में जान रहे हैं, मेरे निकट आ रहे हैं और मेरी स्तुति कर रहे हैं। मैं मनुष्य की आत्मा में अडिग खड़ा हूँ, उसकी आँखों में उच्चतम शिखर तक पहुँच गया हूँ और उसकी नसों में रक्त के साथ प्रवाहित हूँ। मनुष्यों के हृदय का आनंद पृथ्वी का हर स्थान भर देता है, हवा तीव्र और ताज़ा है, घना कोहरा अब भूमि को नहीं ढकता और सूरज अपनी दीप्ति से प्रकाशित है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 18

मेरे प्रकाश में, लोग फिर से रोशनी देखते हैं। मेरे वचन में, लोग उन चीज़ों को देखते हैं जिनसे उन्हें आनंद मिलता है। मैं पूरब से आया हूँ, मैं पूरब से हूँ। जब मेरी महिमा चमकती है, तो सभी देश प्रकाशित हो उठते हैं, सभी रोशनी में ले आए जाते हैं, एक भी चीज़ अंधकार में नहीं रहती। राज्य में, परमेश्वर के साथ परमेश्वर के लोग जो जीवन जीते हैं, वह अत्यंत उल्लासमय है। सागर लोगों के आशीषित जीवन पर आनंद से नृत्य करते हैं, पर्वत लोगों के साथ मेरी प्रचुरता का आनंद लेते हैं। सभी लोग प्रयास कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं, मेरे राज्य में अपनी निष्ठा दिखा रहे हैं। राज्य में, अब न विद्रोह है, न प्रतिरोध है; स्वर्ग और धरती एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इंसान और मैं गहरी भावना के साथ निकट आते हैं, जीवन के मधुर सुख-चैन के माध्यम से, एक-दूसरे की ओर झुक रहे हैं...। इस समय, मैं औपचारिक रूप से स्वर्ग में अपना जीवन आरंभ करता हूँ। अब शैतान का व्यवधान नहीं है, और लोग विश्राम में प्रवेश करते हैं। पूरी कायनात में, मेरे चुने हुए लोग मेरी महिमा में जीते हैं, अतुलनीय रूप से आशीषित हैं, लोग ऐसे नहीं रहते जैसे इंसानों के बीच रहते हैं, बल्कि ऐसे रहते हैं जैसे परमेश्वर के साथ रहते हैं। हर इंसान शैतान की भ्रष्टता से गुज़रा है, और उसने पूरी तरह से जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव लिए हैं। अब, मेरी रोशनी में रहते हुए, कोई आनंद कैसे न उठाएगा? कोई इस खूबसूरत पल को यों ही कैसे छोड़ देगा और हाथ से कैसे जाने देगा? तुम लोग! मेरे लिए अपने दिलों के गीत गाओ और खुशी से नाचो! अपने सच्चे दिलों को उन्नत करो और उन्हें मुझे अर्पित करो! ढोल बजाओ और मेरे लिए खुशी से क्रीड़ा करो! मैं पूरी कायनात भर में अपनी प्रसन्नता बिखेरता हूँ! मैं सभी लोगों के सामने अपना महिमामय चेहरा प्रकट करता हूँ! मैं ऊँची आवाज़ में पुकारूँगा! मैं कायनात की सीमाओं के परे जाँऊगा! मैं पहले ही लोगों के मध्य शासन करता हूँ! लोगों ने मेरा उत्कर्ष किया है! मैं ऊपर नीले आसमान में बहता हूँ और लोग मेरे साथ चलते हैं। मैं लोगों के मध्य चलता हूँ और मेरे लोग मुझे घेर लेते हैं! लोगों के दिल प्रसन्नचित्त हैं, उनके गीत कायनात को हिलाते हैं, आकाश फाड़ देते हैं! अब कायनात धुंध से घिरी हुई नहीं है; अब न कीचड़ है, न मल का जमाव है। कायनात के पवित्र लोगो! मेरी निगरानी में, तुम अपना असली चेहरा दिखाते हो। तुम लोग मल से ढके हुए इंसान नहीं हो, बल्कि हरिताश्म की तरह निर्मल संत हो, तुम सब लोग मेरे प्रिय हो, तुम सब लोग मेरा आनंद हो! हर चीज़ पुनः जीवन को प्राप्त होती है! सभी संत स्वर्ग में मेरी सेवा के लिए लौट आए हैं, मेरे स्नेहपूर्ण आलिंगन में प्रवेश कर रहे हैं, अब वे विलाप नहीं कर रहे, अब वे बेचैन नहीं हैं, वे स्वयं को मुझे अर्पित कर रहे हैं, मेरे घर वापस आ रहे हैं, और वे अपनी जन्मभूमि में बिना रुके मुझसे प्रेम करेंगे! यह अनंतकाल तक अपरिवर्तनीय होगा! कहाँ है दुख! कहाँ हैं आँसू! कहाँ है देह! धरती गुज़र जाती है, मगर स्वर्ग सदा के लिए हैं। मैं सभी लोगों के समक्ष प्रकट होता हूँ, और सभी लोग मेरी स्तुति करते हैं। यह जीवन, यह सुंदरता, चिरकाल से समय के अंत तक, बदलेगी नहीं। यही राज्य का जीवन है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, ओ लोगो! आनंद मनाओ!

पिछला: 1. प्रभु ने हमसे यह कहते हुए, एक वादा किया, “मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो(यूहन्ना 14:2-3)। प्रभु यीशु पुनर्जीवित हुआ और हमारे लिए एक जगह तैयार करने के लिए स्वर्ग में चढ़ा, और इसलिए यह स्थान स्वर्ग में होना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु लौट आया है और पृथ्वी पर ईश्वर का राज्य स्थापित कर चुका है। मुझे समझ में नहीं आता : स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?

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संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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