अध्याय 69

जब मेरी इच्छा जारी होगी, तो जो कोई भी विरोध करने की हिम्मत करेगा और जो कोई भी आलोचना या संदेह करने की हिम्मत करेगा, मैं उसका तुरंत सफाया कर दूँगा। आज, जो कोई भी मेरी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं करता है, या जो भी मेरी इच्छा को गलत ढंग से समझता है, उसे अवश्य ही हटाकर मेरे राज्य से बाहर निकाल दिया जाना चाहिए। मेरे राज्य में कोई और नहीं है—सब मेरे पुत्र हैं, जिन्हें मैं प्यार करता हूँ और जो मेरे प्रति विचारशील हैं। इसके अलावा, यही वे लोग हैं जो मेरे वचन के अनुसार कार्य करते हैं और जो सभी देशों और सभी लोगों का न्याय करने के लिए शासन करने में सक्षम हैं। साथ ही, वे ज्येष्ठ पुत्रों का एक समूह हैं, जो निर्दोष और जीवंत हैं; सादे और खुले हैं; और ईमानदार और बुद्धिमान दोनों ही हैं। मेरी इच्छा तुम लोगों में संतुष्ट होती है, और जो मैं करना चाहता हूँ वह तुम लोगों में पूर्ण होता है, बिना किसी गलती के, पूरी तरह से खुले और प्रकट रूप में। जिनके इरादे और उद्देश्य गलत हैं—मैंने उन्हें त्यागना शुरू कर दिया है, और मैं उन्हें एक-एक करके पतन की ओर ले जाऊंगा। मैं उन्हें एक-एक करके इस स्तर तक नष्ट कर दूँगा कि वे जी नहीं पाएंगे—और यह सब उनकी भावनाओं, उनकी आत्माओं, और उनकी देहों को संदर्भित करता है।

यह बात समझो कि मेरे हाथ जो काम कर रहे हैं—वे गरीबों को सहारा दे रहे हैं, जो मुझे प्यार करते हैं उनकी देखभाल और रक्षा कर रहे हैं, जो मेरे प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करते हैं उन अज्ञानी और उत्साही लोगों को बचा रहे हैं, जो मेरा विरोध करते हैं और जो सक्रिय रूप से मेरे साथ सहयोग नहीं करते हैं उन्हें दंड दे रहे हैं—इन सभी चीजों की एक-एक करके मेरे कथनों के अनुसार पुष्टि होगी। क्या तू कोई ऐसा व्यक्ति है जो वास्तव में मुझसे प्यार करता है? क्या तू कोई ऐसा व्यक्ति है जो अपने-आपको निष्ठापूर्वक मेरे लिए खपाता है? क्या तू कोई ऐसा व्यक्ति है जो मेरे वचन को सुनता है और तदनुसार कार्य करता है? क्या तू कोई ऐसा व्यक्ति है जो मेरे विरुद्ध है, या क्या तू मेरे साथ संगत में है? क्या इन मुद्दों पर तेरे मन की गहराइयों में कोई स्पष्ट विचार है? क्या तू इन चीजों में से प्रत्येक का उत्तर दे सकता है जो मैंने कही हैं? यदि नहीं, तो तू एक ऐसा व्यक्ति है जो उत्साहपूर्वक खोज तो करता है, लेकिन मेरी इच्छा को नहीं समझता है। ऐसे लोग आसानी से मेरे प्रबंधन में हस्तक्षेप करेंगे और मेरी इच्छा को गलत ढंग से समझेंगे। अगर उनका क्षण भर के लिए भी गलत इरादा होगा, तो उन्हें मेरे द्वारा सफाई और विनाश को झेलना होगा।

मुझमें अनंत रहस्य हैं, जो अथाह हैं। मैं उन्हें अपनी योजना के अनुसार लोगों के सामने एक-एक करके प्रकट करूँगा। अर्थात्, मैं उन्हें अपने ज्येष्ठ पुत्रों के लिए प्रकट करूँगा। जो लोग अविश्वासी हैं और जो मेरा विरोध करते हैं, मैं उन्हें प्रवाह के साथ बहने दूँगा, लेकिन अंत में मैं उन्हें अवश्य समझा दूँगा कि मैं प्रताप और न्याय हूँ। आज के अविश्वासियों को केवल वही पता है जो उनकी आँखों के सामने होता है, लेकिन वे मेरी इच्छा को नहीं जानते हैं। केवल मेरे पुत्र, वे जिन्हें मैं प्यार करता हूँ, मेरी इच्छा को जानते और समझते हैं। अपने पुत्रों के लिए, मैं खुले तौर पर प्रकट हूँ : शैतान के लिए मैं प्रताप और न्याय हूँ, और बिल्कुल भी छुपा हुआ नहीं हूँ। आज के दिनों में केवल मेरे ज्येष्ठ पुत्र ही मेरी इच्छा को जानने के योग्य हैं—अन्य कोई योग्य नहीं है—और मैंने सृजन से पहले ही यह सब व्यवस्थित किया था। कौन धन्य है और कौन अभिशप्त है, यह पूर्व में मेरे द्वारा पहले ही सुचारु रूप से व्यवस्थित किया जाता था, मैं इस बारे में स्पष्ट था, और आज यह पूरी तरह से अभिव्यक्त हो चुका है : जो लोग धन्य हैं, उन्होंने अपने आशीषों का आनंद लेना शुरू कर दिया है, जबकि जो लोग अभिशप्त हैं उन्होंने आपदा को झेलना शुरू कर दिया है। जो लोग अभिशाप को झेलना नहीं चाहते हैं, वे तब भी झेलेंगे क्योंकि मैंने यही निर्धारित किया है और प्रशासनिक आदेशों के मेरे हाथों ने यही व्यवस्थित किया है। वास्तव में किस प्रकार का व्यक्ति धन्य है और किस प्रकार का व्यक्ति अभिशप्त है? मैं पहले ही इन चीजों को प्रकट कर चुका हूँ; यह तुम लोगों के लिए कोई रहस्य नहीं है, बल्कि यह खुले रूप में प्रकट है: जो मुझे स्वीकार करते हैं लेकिन जिनके इरादे गलत हैं; जो मुझे स्वीकार करते हैं लेकिन खोजते नहीं हैं; जो मुझे जानते हैं लेकिन समर्पण नहीं करते हैं; जो मुझे धोखा देने के लिए कुटिलता और विश्वासघात में संलग्न रहते हैं; जो मेरे वचनों को पढ़ते हैं लेकिन नकारात्मकता उगलते हैं; और जो स्वयं को नहीं जानते हैं, जो नहीं जानते हैं कि वे क्या हैं, जो सोचते हैं कि वे महान हैं, और जो सोचते हैं कि वे परिपक्वता तक पहुँच चुके हैं (शैतान का उदाहरण), ये सभी लोग अभिशाप के लक्ष्य हैं। जो मुझे स्वीकार करते हैं और जिनके इरादे मेरी खातिर हैं (और यदि वे बाधा उत्पन्न करते हैं तो मैं उनके उल्लंघनों को याद नहीं रखूँगा, लेकिन उनके इरादे अवश्य सही होने चाहिए और उन्हें हमेशा सतर्क और सावधान रहना चाहिए और स्वच्छंद नहीं होना चाहिए, और उन्हें मेरी बात सुनने और मेरे आज्ञापालन का हमेशा इच्छुक होना चाहिए); जो शुद्ध हैं; जो खुले स्वभाव के हैं; जो ईमानदार हैं; जो किसी भी व्यक्ति, चीज़ या पदार्थ द्वारा नियंत्रित नहीं हैं; जो दिखने में बालसुलभ हैं और जीवन में परिपक्व हैं, ये लोग मेरे प्रिय लोग हैं, मेरे आशीषों के लक्ष्य हैं। अब, तुममें से प्रत्येक अपनी स्थिति के अनुसार अपनी उचित जगह लेगा। और साथ ही, तुझे पता चल जाएगा कि तू धन्य है या अभिशप्त है—मुझे सीधे-सीधे यह कहने की आवश्यकता नहीं है। जो लोग धन्य हैं उन्हें आनन्दित और प्रसन्न होना चाहिए, जबकि जिन्हें अभिशाप भुगतना है उन्हें व्यथित नहीं होना चाहिए। दोनों को मेरे हाथों द्वारा व्यवस्थित किया गया है, लेकिन मुझे दोष नहीं दिया जा सकता : यह मेरे साथ तेरे सक्रिय सहयोग की तेरी स्वयं की कमी है, और यह समझने में तेरी विफलता है कि मैं एक परमेश्वर हूँ जो मनुष्य के हृदय के अंतर्तम को टटोलता है; यही है वह जो मैंने पहले से निर्धारित किया है, और तूने अपनी तुच्छ चालों से स्वयं को नुकसान पहुँचाया है; यह तेरा खुद का करा-धरा है! तेरा अधोलोक में गिरना तेरे साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं है! य तेरा अंत है; यह तेरा परिणाम है!

धन्य ज्येष्ठ पुत्रो! जयजयकार करने के लिए शीघ्र उठो! स्तुतिगान के लिए शीघ्र उठो! अब आगे से, कोई और कड़वाहट नहीं होगी, और कोई और कष्ट नहीं होगा, और सब कुछ हमारे अपने हाथों में है। जिसके भी विचार पूरी तरह मेरे अनुरूप हैं मैं उससे प्रेम करता हूँ, और वह आपदा के कष्ट नहीं झेलेगा। जो कुछ भी तेरे ह़ृदय की इच्छा है, मैं उसे पूरा करूँगा (लेकिन यह मनमाना नहीं हो सकता), यह मेरा कार्य है।

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