प्रश्न 11: पादरी युआन पर भी पहले सीसीपी ने उनके विश्वास के लिए अत्याचार किया था। मैंने कभी सोचा भी न था कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर का विरोध करने के लिए शैतान सीसीपी के साथ हाथ मिलायेंगे। क्या ये नीचता से परमेश्‍वर का विरोध करना नहीं हैं? ये पादरीगण और नेतागण इतने कपटी और दुर्भावनापूर्ण कैसे हो सकते हैं?

उत्तर: हर वक्त जब परमेश्‍वर देहधारण करते हैं, वो धार्मिक मंडलियों में कई यीशु विरोधियों और शैतानों का पर्दाफाश करते हैं। जब प्रभु यीशु पृथ्वी पर आए, तो उन्होंने सभी कपटी फरीसियों और यीशु विरोधी शैतानी ताकतों का पर्दाफाश किया। अब सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर आ गए हैं, और उन्होंने अंत के दिनों में धार्मिक मंडलियों में शैतानी यीशु विरोधी शक्तियों का पर्दाफाश भी किया है। देहधारी परमेश्‍वर का प्रकटन और उनके कार्य लोगों को इतना कुछ प्रत्यक्ष करते हैं। वास्तव में ऐसे कई धार्मिक नेता हुए हैं जो दुष्ट सीसीपी के द्वारा प्रताड़ित किए गए। कुछ तो 10 या 20 सालों के लिए जेल भी भेजे गए। कुछ अपने बच्चों और पत्नियों से अलग कर दिए गए और उनके परिवार नष्ट हो गए। फिर भी लोग सीसीपी के दुष्टों का असली चेहरा नहीं देखते हैं। परंतु जब सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर सत्य की अभिव्यक्ति करते हैं और अपने अंत के दिनों के न्याय कार्य करते हैं, तो ये शैतानी सीसीपी के साथ मिलीभगत करके सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की उग्रतापूर्वक निंदा और प्रतिरोध करते हैं, और असल में परमेश्‍वर को पुनः सूली पर चढ़ा देते हैं। ये उनके सत्य से घृणा करने वाले और परमेश्‍वर विरोधी शैतानी स्वभाव के कारण होता है। यह दिखाता है कि ये धार्मिक मंडलियां ठीक शैतानी व्यवस्था की तरह हैं—ये सब शैतान के शिविर के हैं। ये सभी शैतानी, दुष्ट शक्तियां हैं जो उग्रतापूर्वक परमेश्‍वर की निंदा और प्रतिरोध करती हैं। आइए हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों का एक और अंश देखें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "उनमें से कितने सत्य की खोज करते हैं और धार्मिकता का पालन करते हैं? वे सभी जानवर हैं, जो सूअरों और कुत्तों से बेहतर नहीं हैं, वे गोबर के एक ढेर के बीच में बदबूदार मक्खियों के एक समूह के ऊपर दंभपूर्ण आत्म-बधाई में अपने सिर हिलाते हैं और हर तरह का उपद्रव भड़काते[1] हैं। उनका मानना है कि नरक का उनका राजा सबसे बड़ा राजा है, और इतना भी नहीं जानते कि वे खुद बदबूदार मक्खियों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। ... अपनी पीठ पर हरे पंख लगाए (जो उनके परमेश्वर पर विश्वास करने के दावे का सूचक है), वे आत्मतुष्ट हैं और हर जगह अपनी सुंदरता और आकर्षण की डींग हाँकते हैं, जबकि वे चुपके से अपने शरीर की मलिनताओं को मनुष्य पर फेंक देते हैं। इतना ही नहीं, वे स्वयं से अत्यधिक प्रसन्न होते हैं, मानो वे इंद्रधनुष के रंगों वाले एक जोड़ी पंखों का इस्तेमाल कर अपनी मलिनताएँ छिपा सकते हों, और इस तरह वे सच्चे परमेश्वर के अस्तित्व पर अपना कहर बरपाते हैं (यह धार्मिक दुनिया में परदे के पीछे चलने वाली हकीकत बताता है)। मनुष्य को कैसे पता चलेगा कि मक्खी के पंख कितने भी खूबसूरत और आकर्षक हों, मक्खी एक अत्यंत छोटे प्राणी से बढ़कर कुछ नहीं है, जिसका पेट गंदगी से भरा हुआ और शरीर रोगाणुओं से ढका हुआ है? अपने माता-पिता रूपी सूअर और कुत्तों के बल पर वे देश-भर में हैवानियत में निरंकुश होकर अंधाधुंध दौड़ते हैं (यह उस तरीके को संदर्भित करता है, जिससे परमेश्वर को सताने वाले धार्मिक अधिकारी सच्चे परमेश्वर और सत्य से विद्रोह करने के लिए राष्ट्र की सरकार से मिले मजबूत समर्थन पर भरोसा करते हैं)। ऐसा लगता है, मानो यहूदी फरीसियों के भूत परमेश्वर के साथ बड़े लाल अजगर के देश में, अपने पुराने घोंसले में लौट आए हों। उन्होंने हजारों साल पहले का अपना काम फिर करते हुए उत्पीड़न का दूसरा दौर शुरू कर दिया है। पतितों के इस समूह का अंततः पृथ्वी पर नष्ट हो जाना निश्चित है! ऐसा प्रतीत होता है कि कई सहस्राब्दियों के बाद अशुद्ध आत्माएँ और भी चालाक और धूर्त हो गई हैं। वे गुप्त रूप से लगातार परमेश्वर के काम को क्षीण करने के तरीकों के बारे में सोच रही हैं। प्रचुर छल-कपट के साथ वे अपनी मातृभूमि में कई हजार साल पहले की त्रासदी की पुनरावृत्ति करना चाहती हैं और परमेश्वर को लगभग पुकार उठने की कगार तक ले आती हैं। परमेश्वर उन्हें नष्ट करने के लिए तीसरे स्वर्ग में लौट जाने से खुद को मुश्किल से रोक पाता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (7)')। जब से सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने अपना न्याय कार्य करने के लिए सत्य अभिव्यक्त करना प्रारंभ किया है, धार्मिक नेता निंदा और विरोध कर रहे हैं। वे शैतानी सीसीपी के साथ मिल गए हैं और सीसीपी व्यवस्था की दुष्ट शक्तियों पर भरोसा करते हैं, एक तरफ वे विभिन्न धार्मिक मंडलियों को बंद करके कड़ाई से नियंत्रण में लेते हैं ताकि विश्वासियों को अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के कार्यों की खोज करने और पता लगाने से रोक सकें, और दूसरी ओर परमेश्‍वर के चुने हुए लोगों की निगरानी करने के राजी से सीसीपी के जासूस बनते हैं। वे सीसीपी को परमेश्‍वर के चुने हुए लोगों को गिरफ़्तार करवाने के लिए सूचना देते हैं, और दुष्ट सीसीपी के साथ मिल कर एक संयुक्त मोर्चा बना रहे हैं ताकि एक साथ मिलकर अंत के दिनों में परमेश्‍वर के कार्य को नष्ट कर सकें। ये तथ्य यह पूर्ण करने के लिए प्रर्याप्त हैं कि अधिकांश धार्मिक नेताओं की प्रकृति भी सीसीपी के दुष्टों की तरह सत्य से घृणा करने वाली और शैतानी होती है। ये सभी अवतरित दुष्ट और परमेश्‍वर के शत्रु हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन जो प्रकट करते हैं वह पूरी तरह सही है। वर्तमान के धार्मिक नेता आधुनिक समय के फरीसी हैं। उनके परमेश्‍वर विरोधी, दुष्ट कृत्य उस समय के यहूदी फरीसियों से भी कहीं बढ़कर हैं। अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के कार्य का उनके द्वारा प्रतिरोध और निंदा, पवित्र आत्मा का अपमान है। यह तो अंत के दिनों में यीशु को पुनः सूली पर चढ़ाने जैसा हो गया। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य से सभी धार्मिक नेताओं के यीशु विरोधी होने का खुलासा हो जाता है। ये एक तथ्य है जिसे कोई भी नकार नहीं सकता!

"विजय गान" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

फुटनोट :

1. "हर तरह का उपद्रव भड़काते" का मतलब है कि कैसे वे लोग, जो राक्षसी किस्म के होते हैं, दंगा फैलाते हैं और परमेश्वर के कार्य को बाधित करते हैं तथा उसका विरोध करते हैं।

पिछला: प्रश्न 10: पादरी युआन अक्सर बाइबल की व्याख्या करते हैं और हमें विनम्र, धैर्यवान तथा आज्ञाकारी बनने की शिक्षा देते हैं। वे बहुत विश्वास के साथ बात करते हैं और बाहर से बहुत धार्मिक भी लगते हैं। पादरी युआन ने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य की आप लोगों की गवाही भी हमारे साथ सुनी थी। वे ये भी मानते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर का वचन ही सत्य है, परंतु वो इसे स्वीकार क्यों नहीं करते? वे क्यों हर जगह अफवाहें फैला रहे हैं और परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य की निंदा और प्रतिरोध कर, लोगों को सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की ओर मुड़ने से रोक रहे हैं?

अगला: प्रश्न 12: हमारे अधिकतर भाई-बहन यह नहीं समझते हैं कि: प्रभु यीशु के आगमन से पहले, फरीसी अक्सर आराधनालयों में दूसरों के सामने बाइबल की व्याख्या करते थे; वे लोगों के सामने खड़े हो कर प्रार्थना करते थे और लोगों की निंदा करने के लिए बाइबल के नियमों का उपयोग करते थे; वे बाहर से बड़े श्रद्धालु दिखाई देते थे उन लोगों की तरह जो बाइबल से कभी विश्वासघात नहीं करेंगे, परंतु, फरीसियों को प्रभु यीशु द्वारा शाप क्यों दिया गया? उन्होंने परमेश्वर का किन तरीकों से विरोध किया? उन्होंने अपना पाखंड किस प्रकार प्रदर्शित किया? उन पर परमेश्वर का कोप क्यों पड़ा?

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