3. कुछ लोगों ने स्वीकार किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी है, लेकिन चूँकि वे सीसीपी द्वारा गिरफ्तार किए जाने और सताए जाने से भयभीत हैं और धार्मिक समुदाय के पादरियों और एल्डर्स द्वारा डराए और धमकाए गए हैं, वे सच्चे मार्ग को स्वीकार करने का साहस नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों का अंत कैसा होगा?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“परन्तु डरपोकों, और अविश्‍वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों और व्यभिचारियों, और टोन्हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा जो आग और गन्धक से जलती रहती है : यह दूसरी मृत्यु है” (प्रकाशितवाक्य 21:8)

“क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा” (मत्ती 16:25)

“जो कोई मनुष्यों के सामने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के सामने मान लूँगा। पर जो कोई मनुष्यों के सामने मेरा इन्कार करेगा, उस से मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के सामने इन्कार करूँगा” (मत्ती 10:32-33)

“और जो कोई अपना क्रूस न उठाए, और मेरे पीछे न आए, वह भी मेरा चेला नहीं हो सकता” (लूका 14:27)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

तुम लोग नहीं जानते कि परमेश्वर क्या है, तुम लोग नहीं जानते कि मसीह क्या है, तुम लोग नहीं जानते कि यहोवा का भय कैसे मानें, तुम लोग नहीं जानते कि कैसे पवित्र आत्मा के कार्य में प्रवेश करें और तुम लोग नहीं जानते कि परमेश्वर स्वयं के कार्य और मनुष्य द्वारा गुमराह किए जाने के बीच कैसे भेद करें। तुम परमेश्वर द्वारा व्यक्त सत्य के किसी भी ऐसे वचन की केवल निंदा करना ही जानते हो, जो तुम्हारे विचारों के अनुरूप नहीं होता। तुम्हारी विनम्रता कहाँ है? तुम्हारा समर्पण कहाँ है? तुम्हारी सत्यनिष्ठा कहाँ है? सत्य खोजने का तुम्हारा रवैया कहाँ है? परमेश्वर का भय मानने वाला तुम्हारा हृदय कहाँ है? मैं तुम लोगों को बता दूँ कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से वह श्रेणी होगी, जो नष्ट की जाएगी। जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकारने में अक्षम हैं, वे निश्चित ही नरक के वंशज, महा देवदूत के वंशज हैं, उस श्रेणी में हैं जो हमेशा के लिए नष्ट कर दी जाएगी। बहुत से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु मैं यीशु का अनुसरण करने वाले हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे तो यह धार्मिकता के सूर्य के सार्वजनिक प्रकटन का समय होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे तो यह वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे। वह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा का समय होगा और वह समय होगा जब परमेश्वर अच्छे को पुरस्कार और बुरे को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय उस समय से पहले ही समाप्त हो चुका होगा जब मनुष्य संकेत देखता है, जब सिर्फ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और संकेत नहीं खोजते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए जा चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि “ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है” अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेत प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को मान्यता नहीं देते जो कड़ा न्याय अभिव्यक्त करता है और जीवन और सच्चा मार्ग जारी करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे तो वह उनके साथ निपटे। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अहंकारी हैं। ऐसे नीच लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा

अंत के दिनों का मसीह जीवन लाता है, और सत्य का स्थायी और शाश्वत मार्ग लाता है। यह सत्य वह मार्ग है, जिसके द्वारा मनुष्य जीवन प्राप्त करता है, और यही एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह द्वारा प्रदान किया गया जीवन का मार्ग नहीं खोजते, तो तुम यीशु की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं करोगे, और स्वर्ग के राज्य के द्वार में प्रवेश करने के योग्य कभी नहीं हो पाओगे, क्योंकि तुम इतिहास की कठपुतली और कैदी दोनों ही हो। जो लोग विनियमों से, शब्दों से और इतिहास की बेड़ियों से नियंत्रित होते हैं, वे न तो कभी जीवन प्राप्त कर पाएँगे और न ही जीवन का अनंत मार्ग प्राप्त कर पाएँगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उनके पास सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन के जल के बजाय बस मैला पानी ही है, जिससे वे हजारों सालों से चिपके हुए हैं। जिन्हें जीवन के जल की आपूर्ति नहीं की जाती, वे हमेशा मुर्दे, शैतान के खिलौने और नरक की संतानें बने रहेंगे। फिर वे कैसे परमेश्वर के दर्शन कर सकते हैं? तुम केवल अतीत को पकड़े रखने की खोज में रहते हो, स्थिर खड़े रहने और चीजों को वैसे ही रखने की कोशिश करते हो और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को छोड़ने की खोज में नहीं रहते, इसलिए क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरोधी नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के कदम उमड़ती लहरों और घुमड़ते गर्जनों की तरह विशाल और शक्तिशाली हैं—फिर भी तुम निष्क्रियता से बैठकर तबाही का इंतजार करते हो, अपनी मूर्खता से चिपके हो और कुछ नहीं करते। इस तरह, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? तुम जिस परमेश्वर को थामे हो, उसे उस परमेश्वर के रूप में सही कैसे ठहरा सकते हो, जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? और तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के शब्द तुम्हें पार कराकर नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के कदमों को ढूँढ़ने में तुम्हारी अगुआई कैसे कर सकते हैं? और वे तुम्हें ऊपर स्वर्ग में कैसे ले जा सकते हैं? जिन्हें तुम अपने हाथों में थामे हो, वे शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना दे सकते हैं, तुम्हें जीवन देने में सक्षम सत्य नहीं दे सकते। जो शास्त्र तुम पढ़ते हो, वे केवल तुम्हारी जिह्वा को समृद्ध कर सकते हैं और वे फलसफे के वे शब्द नहीं हैं, जो मानव-जीवन को जानने में तुम्हारी मदद कर सकते हों, तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाने वाला मार्ग देने की बात तो दूर रही। क्या यह विसंगति तुम्हारे लिए चिंतन का कारण नहीं है? क्या यह तुम्हें इसके भीतर समाहित रहस्यों का बोध नहीं करवाती? क्या तुम अपने बल पर परमेश्वर से मिलने के लिए अपने आप को स्वर्ग भिजवाने में समर्थ हो? परमेश्वर के आए बिना, क्या तुम परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनंद मनाने के लिए अपने आप को स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? तो मेरा सुझाव यह है कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो और उसकी ओर देखो, जो अभी कार्य कर रहा है—देखो कि अब अंत के दिनों में मनुष्य को बचाने का कार्य कौन कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो तुम कभी भी सत्य प्राप्त नहीं करोगे, और न ही कभी जीवन प्राप्त करोगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है

जो लोग मसीह द्वारा बोले गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करना चाहते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे बेतुके लोग हैं, और जो मसीह द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते, वे कोरी कल्पना में खोए हैं। और इसलिए मैं कहता हूँ कि जो लोग अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करते, उनसे परमेश्वर हमेशा घृणा करेगा। मसीह अंत के दिनों के राज्य के लिए मनुष्य का प्रवेशद्वार है और ऐसा कोई नहीं है जो उसे लाँघकर निकल सके। मसीह के माध्यम के अलावा किसी भी दूसरे तरीके से किसी को भी परमेश्वर द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता। तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, इसलिए तुम्हें उसके वचन स्वीकारने चाहिए और उसके वचन के प्रति समर्पण करना चाहिए। सत्य और जीवन के प्रावधान को स्वीकारने में असमर्थ रहते हुए केवल आशीष प्राप्त करने की मत सोचो। मसीह अंत के दिनों में इसलिए आया है ताकि वह उन सबको जीवन प्रदान कर सके जो उसमें ईमानदारी से विश्वास रखते हैं। यह कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है, और यह कार्य वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वाले सभी लोगों को अपनाना चाहिए। यदि तुम मसीह को नहीं स्वीकारते और यही नहीं, उसकी भर्त्सना, ईशनिंदा या उसका उत्पीड़न करते हो, तो तुम्हें अनंतकाल तक जलाया जाना तय है और तुम परमेश्वर के राज्य में कभी प्रवेश नहीं करोगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मसीह स्वयं पवित्र आत्मा की अभिव्यक्ति है, परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वह है जिसे परमेश्वर ने अपना कार्य पृथ्वी पर करने के लिए सौंपा है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि तुम वह सब स्वीकार नहीं करते जो अंत के दिनों के मसीह द्वारा किया जाता है, तो तुम पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करते हो। पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करने वाले जिस प्रतिफल के पात्र हैं, वह सभी को स्वतः स्पष्ट है। मैं तुम्हें यह भी बताता हूँ : अगर तुम अंत के दिनों के मसीह का प्रतिरोध करते हो, अगर तुम अंत के दिनों के मसीह को नकारते हो तो कोई भी अन्य तुम्हारे बदले में इसका अंजाम नहीं भुगत सकता है। इतना ही नहीं, उस बिंदु के बाद तुम्हें परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करने का दूसरा अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने तौर-तरीके सुधारना भी चाहो, तब भी तुम दोबारा कभी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। ऐसा इसलिए क्योंकि तुम जिसका प्रतिरोध कर रहे हो वह मानव नहीं है, तुम जिसे अस्वीकार कर रहे हो वह कोई तुच्छ व्यक्ति नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम जानते हो कि इसके क्या दुष्परिणाम हैं? तुम कोई छोटी-मोटी गलती नहीं कर रहे हो, बल्कि एक जघन्य पाप कर रहे हो। और इसलिए मैं हर व्यक्ति को सलाह देता हूँ कि सत्य के सामने अपने नुकीले दाँत और पंजे मत दिखाओ या मनमानी आलोचना मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुम्हें जीवन दिला सकता है, और सत्य के अलावा कुछ भी तुम्हें पुनः जन्म लेने या दोबारा परमेश्वर का चेहरा देखने में सक्षम नहीं बना सकता।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है

क्या अब तुम समझ गए हो कि न्याय क्या है और सत्य क्या है? अगर तुम समझ गए हो, तो मैं तुम्हें न्याय किए जाने के लिए आज्ञाकारी ढंग से समर्पित होने की सलाह देता हूँ, वरना तुम्हें कभी भी परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किए जाने या उसके द्वारा अपने राज्य में ले जाए जाने का अवसर नहीं मिलेगा। जो केवल न्याय को स्वीकार करते हैं लेकिन कभी शुद्ध नहीं किए जा सकते, अर्थात् जो न्याय के कार्य के बीच से ही भाग जाते हैं, वे हमेशा के लिए परमेश्वर द्वारा ठुकरा दिए जाएँगे। फरीसियों के पापों की तुलना में उनके पाप अधिक गंभीर हैं और अधिक संख्या में हैं, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के साथ विश्वासघात किया है और वे परमेश्वर के प्रति विद्रोही हैं। जो लोग मजदूरी करने के भी योग्य नहीं हैं, वे और कठोर दंड प्राप्त करेंगे, ऐसा दंड जो चिरस्थायी भी होगा। परमेश्वर ऐसे किसी भी गद्दार को नहीं छोड़ेगा, जिसने एक बार तो वचनों से वफादारी दिखाई, मगर फिर परमेश्वर को धोखा दे दिया। ऐसे लोग आत्मा, प्राण और शरीर के दंड के माध्यम से प्रतिफल प्राप्त करेंगे। क्या यह हूबहू परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव का प्रकटन नहीं है? क्या मनुष्य का न्याय करने और उसे उजागर करने में परमेश्वर का बिल्कुल यही उद्देश्य नहीं है? परमेश्वर उन लोगों को, जो न्याय के समय के दौरान सभी प्रकार के कुकर्म करते हैं, दुष्टात्माओं से आक्रांत स्थान पर भेजता है, और उन बुरी आत्माओं को इच्छानुसार उनके दैहिक शरीर नष्ट करने देता है, और उन लोगों के शरीरों से लाश की दुर्गंध निकलती है। यही उनका उचित प्रतिफल है। परमेश्वर उन निष्ठाहीन झूठे विश्वासियों, झूठे प्रेरितों और झूठे कार्यकर्ताओं का हर पाप उनकी रिकॉर्ड पुस्तिकाओं में लिखता है; और जब सही समय आता है, वह उन्हें गंदी आत्माओं के बीच में फेंक देता है, उन गंदी आत्माओं को अपनी इच्छानुसार उनके पूरे शरीर को अपवित्र करने देता है, और ऐसी व्यवस्था करता है कि वे कभी पुनर्जन्म नहीं ले पाते हैं और फिर कभी प्रकाश नहीं देख पाते हैं। परमेश्वर बुरे लोगों की सूची में उन पाखंडियों को जोड़ता है जो कुछ समय के लिए तो सेवा करते हैं, लेकिन अंत तक वफ़ादार नहीं रहते हैं और वह उन्हें बुरे लोगों के साथ कीचड़ में लोटने और उनके साथ मिलकर विविध प्रकार के बदमाशों का गिरोह बनाने देता है और अंत में, परमेश्वर उन्हें जड़ से मिटा देगा। परमेश्वर उन लोगों को अलग फेंक देता है और उन पर कोई ध्यान नहीं देता, जो कभी भी मसीह के प्रति वफादार नहीं रहे या जिन्होंने अपनी ताकत का बिल्कुल भी योगदान नहीं किया, और युग बदलने पर वह उन सभी को जड़ से मिटा देगा। वे अब और पृथ्वी पर मौजूद नहीं रहेंगे, परमेश्वर के राज्य का मार्ग तो बिल्कुल भी प्राप्त नहीं करेंगे। परमेश्वर उसके लोगों की सेवा करने वालों की सूची में ऐसे हर व्यक्ति को जोड़ता है, जो कभी भी परमेश्वर के प्रति ईमानदार नहीं रहा है, बल्कि उसके पास परमेश्वर के साथ लापरवाही से व्यवहार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे गिने-चुने लोग ही जीवित बचेंगे, जबकि बहुसंख्यक लोग उन लोगों के साथ नष्ट कर दिए जाएँगे जिनका श्रम मानक-स्तर का भी नहीं है। अंत में, परमेश्वर उन सभी को, जो परमेश्वर के साथ एकदिल और एकमन हैं, अपने लोगों और पुत्रों को, और परमेश्वर द्वारा याजक बनाए जाने के लिए पूर्वनियत लोगों को अपने राज्य में ले आएगा। ये परमेश्वर के कार्य का क्रिस्टलन है। जहाँ तक उन लोगों का प्रश्न है, जिन्हें परमेश्वर द्वारा निर्धारित किसी भी श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है, उन्हें अविश्वासियों की श्रेणियों में सूचीबद्ध किया जाएगा और तुम लोग निश्चित रूप से कल्पना कर सकते हो कि उनका क्या परिणाम होगा। मैं तुम सभी लोगों से पहले ही वह कह चुका हूँ, जो मुझे कहना चाहिए; तुम लोग जो मार्ग चुनते हो, वह केवल तुम्हारी पसंद है। तुम लोगों को जो समझना चाहिए, वह यह है : परमेश्वर का कार्य ऐसे किसी व्यक्ति की प्रतीक्षा नहीं करता, जो उसके साथ कदमताल नहीं कर सकता, और परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव किसी भी मनुष्य के प्रति कोई दया नहीं दिखाता।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है

पिछला: 2. सीसीपी और धार्मिक दुनिया सर्वशक्तिमान परमेश्वर की निंदा और विरोध करने में, कई अफवाहों और भ्रांतियों को फैलाते हुए, उन्मत्त रही है। परमेश्वर उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करेगा, जो इन अफवाहों और कुरीतियों को आँखें मूँद कर स्वीकार कर लेते हैं, और सही मार्ग की तलाश और जाँच करने का कोई प्रयास नहीं करते हैं? उनका अंत किस तरह का होगा?

अगला: 1. भूकंप, अकाल, महामारियों, बाढ़, और सूखे जैसी आपदाओं से आज पृथ्वी बेहाल है। ये आपदाएँ बढ़ते पैमाने पर हो रही हैं, और उनके कारण अधिकाधिक मौतें हो रही हैं। परमेश्वर इंसान से प्रेम करता है और इंसान को बचाता है, तो उसे इतनी बड़ी आपदाओं की वर्षा क्यों करनी चाहिए?

परमेश्वर का आशीष आपके पास आएगा! हमसे संपर्क करने के लिए बटन पर क्लिक करके, आपको प्रभु की वापसी का शुभ समाचार मिलेगा, और 2025 में उनका स्वागत करने का अवसर मिलेगा।

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1. प्रभु ने हमसे यह कहते हुए, एक वादा किया, “मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो” (यूहन्ना 14:2-3)। प्रभु यीशु पुनर्जीवित हुआ और हमारे लिए एक जगह तैयार करने के लिए स्वर्ग में चढ़ा, और इसलिए यह स्थान स्वर्ग में होना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु लौट आया है और पृथ्वी पर ईश्वर का राज्य स्थापित कर चुका है। मुझे समझ में नहीं आता : स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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