अध्याय 18

कलीसिया का निर्माण करना वास्तव में कोई आसान काम नहीं है! मैंने इसके निर्माण में अपना पूरा दिल लगा दिया, और शैतान इसे तोड़ गिराने के लिए वह सब-कुछ करेगा, जो उसके सामर्थ्य में होगा। यदि तुम निर्मित होना चाहते हो, तो तुम्हें ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जिसके पास दर्शन है; तुम्हें मुझ पर निर्भर रहना चाहिए, मसीह की गवाही देनी चाहिए, उसे ऊँचाई पर रखना चाहिए और मेरे प्रति निष्ठावान रहना चाहिए। तुम्हें बहाने नहीं बनाने चाहिए, बल्कि बिना शर्त आज्ञापालन करना चाहिए। तुम्हें किसी भी परीक्षण को सहना चाहिए, और जो कुछ भी मुझसे आता है, उसे स्वीकार करना चाहिए। तुम्हें पवित्र आत्मा का अनुसरण करना चाहिए, चाहे वह तुम्हारी किसी भी तरह से अगुआई करे। तुम्हारे पास तीव्र उत्साह और चीजों को परखने की क्षमता होनी चाहिए। तुम्हें लोगों को समझना चाहिए और उनका अंधानुसरण नहीं करना चाहिए; अपनी आध्यात्मिक आँखों को उज्ज्वल रखो और सभी चीजों की गहन जानकारी रखो। मेरे जैसे मन वाले लोगों को मेरी गवाही देनी चाहिए और शैतान के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी चाहिए। तुम्हें निर्मित होना और युद्ध में भाग लेना, दोनों काम करने चाहिए। मैं तुम लोगों के बीच हूँ, मैं तुम लोगों का समर्थन करता हूँ और मैं तुम लोगों का आश्रय हूँ।

पहली चीजें जो तुम्हें करनी चाहिए, वे हैं स्वयं को शुद्ध करना, एक बदला हुआ व्यक्ति बनना और एक स्थिर स्वभाव का होना। तुम्हें अपने जीवन में मुझ पर भरोसा करना चाहिए, चाहे तुम्हारा परिवेश अच्छा हो या बुरा; चाहे तुम घर पर हो या किसी अन्य माहौल में, तुम्हें किसी अन्य की वजह से, या किसी घटना या मुद्दे की वजह से डगमगाना नहीं चाहिए। इतना ही नहीं, तुम्हें दृढ़ रहना चाहिए और हमेशा की तरह मसीह को जीना चाहिए और स्वयं परमेश्वर को अभिव्यक्त करना चाहिए। तुम्हें सामान्य रूप से अपना कार्य करना चाहिए और अपने कर्तव्य निभाने चाहिए; यह केवल एक बार नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे निरंतर करते रहना चाहिए। तुम्हें मेरे दिल को अपना दिल मानना चाहिए, मेरे इरादे तुम्हारे विचार बन जाने चाहिए, तुम्हें बड़ी तसवीर को ध्यान में रखना चाहिए, तुम्हें मसीह को अपने में से प्रकट होने देना चाहिए, और तुम्हें दूसरों के साथ समन्वय रखकर सेवा करनी चाहिए। तुम्हें पवित्र आत्मा के कार्य के साथ तालमेल रखना चाहिए और अपने आप को उसके उद्धार की पद्धति में झोंक देना चाहिए। तुम्हें स्वयं को खाली करना चाहिए और एक निर्दोष और खुला व्यक्ति बनना चाहिए। तुम्हें अपने भाइयों और बहनों के साथ सामान्य रूप से संगति करना और जुड़ना चाहिए, उत्साह से काम करने में सक्षम होना चाहिए, एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए, उनकी ताकत से अपनी कमजोरियाँ संतुलित करनी चाहिए, और कलीसिया के भीतर निर्मित होने की इच्छा रखनी चाहिए। केवल तभी वास्तव में राज्य में तुम्हारा हिस्सा होगा।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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