वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु
  • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅰ)
    • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅱ)
      • भाग एक आरंभ में मसीह के कथन और गवाहियाँ —कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों में देहधारी परमेश्वर की गवाही
        • भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए देहधारी परमेश्वर के कथन जब उन्होंने पहली बार परमेश्वर की सेवकाई आरंभ की
          • परिशिष्ट: परमेश्वर के वचनों के रहस्यों की व्याख्या
            • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅲ)
              • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅳ)
                • सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नवीनतम कथन

                  विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए

                  वो क्या है जो मनुष्य ने प्राप्त किया है जब उसने सर्वप्रथम परमेश्वर में विश्वास किया? आपने परमेश्वर के बारे में क्या जाना है? परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण आप कितने बदले हैं? अब आप सभी जानते हैं कि परमेश्वर में विश्वास आत्मा की मुक्ति और देह के कल्याण के लिए ही नही है, और न ही यह आपके जीवन को परमेश्वर के प्रेम से सम्पन्न बनाने के लिए, इत्यादि है। जैसा यह है, यदि आप परमेश्वर को सिर्फ़ देह के कल्याण के लिए या क्षणिक आनंद के लिए प्रेम करते हैं, तो भले ही, अंत में, परमेश्वर के लिए आपका प्रेम इसके शिखर पर पहुँचता है और आप कुछ भी नहीं माँगते, यह “प्रेम” जिसे आप खोजते हैं अभी भी अशुद्ध प्रेम होता है, और परमेश्वर को भाने वाला नहीं होता। वे लोग जो परमेश्वर के लिए प्रेम का उपयोग अपने बोझिल जीवन को सम्पन्न बनाने और अपने हृदय के एक शून्य को भरने के लिए करते हैं, ये वे हैं जो अपने जीवन को आसानी से जीना चाहते हैं, ना कि वे जो सचमुच में परमेश्वर को प्रेम करना चाहते हैं। इस प्रकार का प्रेम व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध होता है, भावनात्मक आनंद की खोज होता है, और परमेश्वर को इस प्रकार के प्रेम की आवश्यकता नहीं है। तो फिर, आपका प्रेम कैसा है? आप परमेश्वर को किस लिए प्रेम करते हैं? आप में परमेश्वर के लिए कितना सच्चा प्रेम है? आप में से अधिकतर का प्रेम वैसा ही है जिसका पहले जिक्र किया गया था। इस प्रकार का प्रेम सिर्फ़ यथापूर्व स्थिति को बरकरार रख सकता है; अनन्त स्थिरता को प्राप्त नहीं कर सकता, न ही मनुष्य में जड़ें जमा सकता है। इस प्रकार का प्रेम एक ऐसा फूल है जिसमें नहीं होता, यह खिला और मुरझा गया। दूसरे शब्दों में, आपने जब एक बार परमेश्वर को इस ढंग से प्रेम कर लिया और आपको इस मार्ग पर आगे ले जाने वाला कोई ना हो, तो आप गिर जाएँगे । यदि आप परमेश्वर को सिर्फ़ प्रेमी परमेश्वर के समय ही प्रेम कर सकते हैं और उसके बाद आप अपने जीवन स्वभाव में कोई बदलाव नहीं लाते, तो फिर आप अंधकार में निरंतर घिरते चले जाएँगे, आप बच नहीं पायेंगे, और शैतान द्वारा छले जाने और मूर्ख बनाये जाने से मुक्त होने में असमर्थ होंगे। ऐसा कोई भी मनुष्य परमेश्वर को पूरी तरह से प्राप्त नहीं हो सकता; अंत में, उनकी आत्मा, प्राण, और शरीर शैतान के ही होंगे। यह असंदिग्ध है। वे सभी जो पूरी तरह से परमेश्वर को प्राप्त नहीं हो पाएँगे अपने मूल स्थान में वापिस लौट जायेंगे, अर्थात, वापिस शैतान के पास, और वे परमेश्वर के दंड के अगले चरण को स्वीकार करने के लिये, उस झील में जायेंगे जो आग और गन्धक से जलती रहती है। जो परमेश्वर के हो चुके हैं, वो वे होते हैं जो शैतान के खिलाफ विद्रोह करते हैं और उसके शासन से बच जाते हैं। ऐसे मनुष्य राज्य के लोगों में आधिकारिक रूप से गिने जायेंगे इस तरह से राज्य के लोग आते हैं। क्या आप इस प्रकार के व्यक्ति क्याबनने को तैयार हैं? आप परमेश्वर द्वारा प्राप्त किये जाने के लिए तैयार हैं? क्या आप शैतान के शासन से बचना और वापिस परमेश्वर के पास जानावापिस हैं? क्या आप अब शैतान के हैं या आप राज्य के लोगों में गिने जाते हैं? ऐसी सारी चीज़ें स्पष्ट होनी चाहिए और आगे किसी भी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए।

                  बीते समयों में, अनेक लोग अपनी महत्वाकांक्षा और धारणाओं के साथ अपनी आशाओं को लेकर आगे बढ़े। अब इन मामलों पर चर्चा नहीं की जाएगी। कुंजी है अभ्यास का ऐसा ढंग खोजना जो आप में से हर एक को परमेश्वर के सन्मुख एक सामान्य को बनाये रखने और धीरे-धीरे शैतान के प्रभाव की बेड़ियों को तोड़ डालने में सक्षम करे, ताकि आप परमेश्वर को प्राप्त हो,सकें और पृथ्वी पर वैसे जीयें जैसे परमेश्वर आपसे चाहता है। केवल इसी से परमेश्वर की इच्छा पूरी हो सकती है। परमेश्वर में विश्वास तो बहुत से लोग करते हैं, फिर भी न तो यह जानते हैं कि परमेश्वर क्या चाहता है और न ही यह कि शैतान क्या चाहता है। वे मूर्खता से विश्वास करते हैं और दूसरों का अंधानुकरण करते हैं, और इसलिए उनके पास कभी भी एक सामान्य ईसाई जीवन नहीं होता; परमेश्वर के साथ संबंध होना तो दूर, उनके पास सामान्य व्यक्तिगत संबंध तक नहीं होते। इससे हम देख सकते हैं कि मनुष्य की समस्याएं और गलतियां, और दूसरे कारण जो परमेश्वर की इच्छा के आड़े आते हैं बहुत हैं। यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि मनुष्य ने अपने आप को सही रास्ते पर नहीं रखा है, न ही उसने वास्तविक जीवन का अनुभव लिया है। तो इस प्रकार यह सही रास्ते पर आना क्या है? सही रास्ते पर आने का अर्थ है कि आप सभी समय परमेश्वर के सामने अपने हृदय को शांत रख सकते हैं और स्वभाविक रूप से परमेश्वर के साथ संवाद कर सकते हैं, आपको क्रमशः यह पता लगने लगता है कि आपमें क्या कमी है और परमेश्वर के विषय में एक गहरा ज्ञान होने लगता है। इसके द्वारा आपको प्रतिदिन अपनी आत्मा में एक नया दृष्टि बोध और प्रकाश प्राप्त होता है; आपकी तृष्णा बढ़ती है, और धीरे-धीरे आप सत्य में प्रवेश करना चाहते हैं। हर दिन नया प्रकाश और नई समझ होती है। इस रास्ते के द्वारा, धीरे-धीरे आप शैतान के प्रभाव से मुक्त होते जाते हैं, और आपका जीवन महान बनता जाता है। इस प्रकार का व्यक्ति सही रास्ते पर आ चुका होता है। उपरोक्त के मुक़ाबले अपने वास्तविक अनुभवों का मूल्यांकन करें और आपने विश्वास का जो रास्ता चुना है उसे जांचें। क्या आप वह व्यक्ति हैं जो सही रास्ते पर आ चुका है? आप किन मामलों में शैतान की बेड़ियों और शैतान के प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं? यदि आप सही रास्ते पर आ चुके हैं तब भी शैतान के साथ आपके संबंधों का टूटना बाकी है। इस तरह, क्या परमेश्वर के प्रेम की इस तलाश का निष्कर्ष एक ऐसे प्रेम के रूप में होगा जो प्रमाणिक, समर्पित, और शुद्ध हो? आप कहते हैं कि परमेश्वर के लिए आपका प्रेम दृढ़ और हार्दिक है, फिर भी आप शैतान की बेड़ियों सेअपने आपको मुक्त नहीं कर पाये हैं। क्या आप परमेश्वर को मूर्ख नहीं बना रहे हैं? यदि आप परमेश्वर के लिए विशुद्ध प्रेम प्राप्त करना चाहते हैं, परमेश्वर कोप्राप्त हो जाना चाहते हैं और चाहते हैं कि आप राज्य के लोगों मेंमें गिने जायें तो आपको पहले खुदको सही रास्ते पर लाना होगा।