एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंधन करना हमेशा मेरा कर्तव्य रहा है। इससे भी बढ़कर, मनुष्य पर विजय कुछ ऐसा है जो मैंने बहुत पहले तब नियत की थी, जब मैंने संसार की रचना की थी। लोग नहीं जानते हैं कि अंत के दिनों में मैं मनुष्य को पूरी तरह से जीत लूँगा, या कि मानवजाति के बीच से विद्रोही लोगों को जीत लेना शैतान को मेरे द्वारा हराए जाने का प्रमाण है। परंतु जब मेरा शत्रु मेरे साथ युद्ध में शामिल हुआ, तो मैंने उसे पहले से ही बता दिया कि मैं उन लोगों को जीत लूँगा, जिन्हें शैतान ने बंदी और अपनी संतान बना लिया था और अपने घर की निगरानी करने वाले वफादार सेवकों में तब्दील कर दिया था। जीतने का मूल अर्थ है परास्त करना, अपमानित करना; इस्राएलियों की भाषा में इसका अर्थ है बुरी तरह से हराना, नष्ट कर देना और मेरे खिलाफ फिर से प्रतिरोध करने में अक्षम कर देना। परंतु आज, जब तुम्हारे बीच इसका उपयोग किया जाता है, तो इसका अर्थ होता है जीतना। तुम लोगों को पता होना चाहिए कि मेरा इरादा हमेशा से मानवजाति के उन दुष्टों को पूरी तरह से हराना और नष्ट करना है, ताकि वे फिर मुझसे विश्वासघात न कर सकें, मेरे कार्य में गड़बड़ी करने या उसमें विघ्न डालने की तो हिम्मत भी न कर सकें। इस प्रकार, जहाँ तक मनुष्य का सवाल है, इस शब्द का अर्थ जीतना हो गया है। शब्द के चाहे कुछ भी संकेतार्थ हों, मेरा कार्य मनुष्यों को हराना है। क्योंकि जहाँ यह बात सच है कि मानवजाति मेरे प्रबंधन में एक अधीनस्थ है, परंतु सटीक रूप से कहूँ तो मनुष्य मेरे शत्रुओं के अलावा कुछ नहीं हैं। मनुष्य वे दुष्ट हैं, जो मेरा विरोध और मुझसे विद्रोह करते हैं। मनुष्य मेरे द्वारा शापित उस दुष्ट की संतान के अतिरिक्त कुछ नहीं हैं। मनुष्य उस प्रधान दूत के वंशजों के अतिरिक्त कुछ नहीं है, जिसने मेरे साथ विश्वासघात किया था। मनुष्य उस दुष्ट दानव की विरासत के अतिरिक्त कुछ नहीं है जो बहुत पहले ही मेरे द्वारा ठुकरा दिया गया था और जो सीधे मुझसे शत्रुता रखता है। चूँकि सारी मानवजाति के ऊपर का आसमान, स्पष्टता की जरा-सी झलक के बिना, मलिन और अंधकारमय है, और मानव-संसार स्याह अँधेरे में इस तरह डूबा हुआ है कि उसमें रहने वाला व्यक्ति अपने चेहरे के सामने लाकर अपने हाथ को या अपना सिर उठाकर सूरज को भी नहीं देख सकता। उसके पैरों के नीचे की कीचड़दार और गड्ढों से भरी सड़क घुमावदार और टेढ़ी-मेढ़ी है; पूरी जमीन पर लाशें बिखरी हुई हैं। अँधेरे कोने मृतकों के अवशेषों से भरे पड़े हैं, जबकि ठंडे और छायादार कोनों में दानवों की भीड़ ने अपना निवास बना लिया है। हर कदम पर, दानव लोगों के बीच झुंडों में आते-जाते रहते हैं। सभी तरह के जंगली जानवरों की गंदगी से ढकी हुई संतानें घमासान युद्ध में उलझी हुई हैं, जिनकी आवाज दिल में दहशत पैदा करती है। ऐसे समय में, इस तरह के संसार में, ऐसे “सांसारिक स्वर्गलोक” में व्यक्ति जीवन के आनंद की खोज करने कहाँ जा सकता है? अपने जीवन की मंजिल खोजने के लिए कोई कहाँ जा सकता है? लंबे समय से शैतान के पैरों के नीचे रौंदी हुई मानवजाति शैतान की छवि लिए एक प्रस्तोता रही है—इससे भी अधिक, मानवजाति शैतान का मूर्त रूप है और वह शैतान की ओर से “जबरदस्त गवाही” देने वाले प्रमाण के रूप में काम करती है। ऐसी मानवजाति, ऐसे अधम लोगों का झुंड, भ्रष्ट मानव-परिवार की ऐसी संतान परमेश्वर की गवाही कैसे दे सकती है? मेरी महिमा कहाँ से आती है? क्या मेरी ऐसी कोई गवाही है जिसके बारे में बात की जा सके? क्योंकि उस शत्रु ने, जो मेरे खिलाफ खड़ा है और जिसने मानवजाति को भ्रष्ट किया है, पहले ही उस मानवजाति को—जिसे मैंने बहुत पहले बनाया था और जो मेरी महिमा और मेरे जीवन यापन से भरी थी—दूषित कर दिया है। उसने मेरी महिमा छीन ली है और मनुष्य में जो चीज भर दी है, वह शैतान की कुरूपता की भारी मिलावट वाला जहर और अच्छे और बुरे के ज्ञान के वृक्ष के फल का रस है। आरंभ में मैंने मानवजाति का सृजन किया; अर्थात् मैंने मानवजाति के पूर्वज, आदम का सृजन किया। वह रूप और छवि से संपन्न, जीवन शक्ति से भरपूर, जोश से भरपूर था और इससे भी बढ़कर, वह मेरी महिमा के साहचर्य में था। वह महिमामय दिन था, जब मैंने मनुष्य का सृजन किया। इसके बाद आदम के शरीर से हव्वा उत्पन्न हुई, वह भी मनुष्य की पूर्वज थी। इस प्रकार जिन लोगों का मैंने सृजन किया था, वे मेरे श्वास से भरे थे और मेरी महिमा से भरपूर थे। आदम मूल रूप से मेरे हाथ से “पैदा हुआ” और वह मेरी छवि का प्रतिनिधित्व था। इसलिए “आदम” का मूल अर्थ था मेरे द्वारा सृजित किया गया प्राणी, जो मेरी जीवन-ऊर्जा से भरा हुआ, मेरी महिमा से भरा हुआ, रूप और छवि से युक्त, आत्मा और श्वास से युक्त था। आत्मा से संपन्न वह एकमात्र सृजित प्राणी था, जो मेरा प्रतिनिधित्व करने और मेरी छवि धारण करने में सक्षम था, जिसने मेरा श्वास प्राप्त किया। आरंभ में, हव्वा दूसरी ऐसी इंसान थी जो श्वास से संपन्न थी, जिसका सृजन मैंने नियत किया था, इसलिए “हव्वा” का मूल अर्थ था, ऐसा सृजित प्राणी जो मेरी महिमा जारी रखेगा, जो मेरी जीवन शक्ति से भरा हुआ है और इससे भी बढ़कर, मेरी महिमा से संपन्न है। हव्वा आदम से आई, इसलिए उसने भी मेरी छवि धारण की, क्योंकि वह मेरी छवि में सृजित की जाने वाली दूसरी इंसान थी। “हव्वा” का मूल अर्थ था आत्मा, देह और हड्डियों से युक्त एक जीवित मनुष्य। वह मेरी दूसरी गवाही और साथ ही मानवजाति के बीच मेरी दूसरी छवि थी। वे मानवजाति के पूर्वज थे, मानवजाति में बहुमूल्य और शुद्ध मनुष्य थे और मूल रूप से आत्माओं से संपन्न जीवित प्राणी थे। किंतु उस दुष्ट ने मानवजाति के पूर्वजों की संतान को कुचल दिया और उन्हें बंदी बना लिया, उसने मानव-संसार को पूर्णतः अंधकार में डुबो दिया, और हालात ऐसे बना दिए कि उनकी संतान मेरे अस्तित्व में विश्वास नहीं करती। इससे भी अधिक घिनौनी बात यह है कि जहाँ दुष्ट ने लोगों को भ्रष्ट किया और उन सभी को कुचल दिया, वहीं उसने मेरी महिमा, मेरी गवाही, वह प्राणशक्ति जो मैंने उन्हें प्रदान की थी, वह श्वास और जीवन जो मैंने उनमें फूँका था, मानव-संसार में मेरी समस्त महिमा, और हृदय का समस्त रक्त जो मैंने मानवजाति पर खर्च किया था, वह सब भी क्रूरतापूर्वक छीन लिया। मानवजाति अब प्रकाश में नहीं है, लोगों ने वह सब खो दिया है जो मैंने उन्हें प्रदान किया था, और उन्होंने उस महिमा को भी छोड़ दिया है जो मैंने उन्हें प्रदान की थी। वे कैसे स्वीकार कर सकते हैं कि मैं समस्त सृष्टि का प्रभु हूँ? वे स्वर्ग में मेरे अस्तित्व में कैसे विश्वास कर सकते हैं? कैसे वे पृथ्वी पर मेरी महिमा की अभिव्यक्तियों को देख सकते हैं? ये पोते-पोतियाँ परमेश्वर को वह परमेश्वर कैसे मान सकते हैं जिसका भय उनके पूर्वज ऐसे प्रभु के रूप में मानते थे जिसने उनका सृजन किया था? इन बेचारे पोते-पोतियों ने वास्तव में वह महिमा, छवि, और वह गवाही जो मैंने आदम और हव्वा को प्रदान की थी, और वह जीवन जो मैंने मानवजाति को प्रदान किया था और जिस पर वे अपने अस्तित्व के लिए निर्भर हैं, काफी उदारता के साथ उस दुष्ट को “भेंट कर दिया”; और वे उस दुष्ट की उपस्थिति की बिल्कुल भी परवाह नहीं करते और मेरी सारी महिमा उसे दे देते हैं। क्या यह “अधम लोगों का झुंड” शब्द का स्रोत नहीं है? ऐसी मानवजाति, ऐसे दुष्ट राक्षस, ऐसी चलती-फिरती लाशें, ऐसे शैतान, मेरे ऐसे शत्रु मेरी महिमा से कैसे संपन्न हो सकते हैं? मैं अपनी महिमा वापस पा लूँगा, मनुष्यों के बीच अपनी गवाही और वह सब वापस पा लूँगा, जो मूल रूप से मेरा था और जिसे मैंने बहुत पहले मानवजाति को दे दिया था—मैं मानवजाति को पूरी तरह से जीत लूँगा। किंतु तुम्हें पता होना चाहिए कि जिन मनुष्यों का मैंने सृजन किया था, वे शुद्ध मनुष्य थे जो मेरी छवि और मेरी महिमा धारण करते थे। वे शैतान के नहीं थे, न ही वे उससे कुचले जाने के भागी थे, बल्कि शैतान के लेशमात्र जहर से भी मुक्त, शुद्ध रूप से मेरी ही अभिव्यक्ति थे। और इसलिए, मैं मानवता को यह बताता हूँ : मैं केवल उन शुद्ध लोगों को चाहता हूँ जिन्हें मेरे हाथ से रचा गया था और जिनसे मैं प्रेम करता हूँ और जो किसी अन्य इकाई के नहीं हैं और मैं उनसे आनंद प्राप्त करूँगा और उन्हें अपनी महिमा मानूँगा; हालाँकि, मैं उस मानवजाति को नहीं चाहता जिसे शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है, जो आज शैतान की है और जो अब मेरी मूल सृष्टि नहीं है। चूँकि मैं मानव-संसार में अपनी महिमा वापस पाना चाहता हूँ, इसलिए मैं शैतान को पराजित करने में अपनी महिमा के प्रमाण के रूप में, मानवजाति के शेष उत्तरजीवियों को पूर्ण रूप से जीत लूँगा। मैं सिर्फ अपनी गवाही को अपनी कड़ी मेहनत का नतीजा, अपनी आनंद की वस्तु मानता हूँ। यही मेरा इरादा है।

आज के दिन तक मानवजाति के विकास के इतिहास के दसियों हजार साल पहले ही बीत चुके हैं। और फिर भी जिस मानवजाति को मैंने शुरुआत में रचा था वह बहुत पहले ही पतन में डूब चुकी है और मानवजाति अब वह मानवजाति नहीं है जिसकी मैं इच्छा करता हूँ और इस प्रकार, मेरी आँखों में, लोगों ने बहुत पहले ही मानवजाति के रूप में जाने जाना बंद कर दिया है। बल्कि वे मानवजाति के अधम लोगों का झुंड हैं जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया है, वे चलती-फिरती सड़ी हुई लाशें हैं जिनमें शैतान बसा हुआ है और जिनसे शैतान स्वयं को आवृत करता है। लोगों को मेरे अस्तित्व में बिल्कुल भी कोई विश्वास नहीं है, न ही वे मेरे आने का स्वागत करते हैं। मानवजाति केवल बेमन से मेरी अपेक्षाओं के साथ लापरवाही से पेश आती है, अस्थायी रूप से उन्हें मान लेती है और सच्चे मन से मेरे आनंद और क्लेशों में भागीदार नहीं होती है। चूँकि लोग मुझे अबोधगम्य समझते हैं, इसलिए वे मुझे अनिच्छुक मुस्कान देते हैं, वे किसी सत्ताधारी का अनुग्रह प्राप्त करने का हाव-भाव दिखाते हैं, क्योंकि लोगों को मेरे कार्य का कोई ज्ञान नहीं है, मेरे वर्तमान इरादे तो वे बिल्कुल भी नहीं जानते। मैं तुम लोगों से सच कहूँगा : जब वह दिन आएगा, तो मेरी आराधना करने वाले हर उस व्यक्ति का दुःख तुम लोगों के दुःख की तुलना में सहने में अधिक आसान होगा। मुझमें तुम्हारी आस्था का स्तर, वास्तव में, अय्यूब की आस्था से अधिक नहीं है—यहाँ तक कि यहूदी फरीसियों की आस्था भी तुम लोगों की आस्था से बढ़कर है—और इसलिए, यदि आग का दिन आता है, तो तुम लोगों के दिन यीशु से फरीसियों को मिली फटकार से, मूसा का विरोध करने वाले 250 अगुआओं द्वारा सहे गए कष्टों से और अपने विनाश के दौरान सदोम को जिस आग में जलना पड़ा था उससे भी बदतर होंगे। जब मूसा ने चट्टान पर प्रहार किया, और यहोवा द्वारा प्रदान किया गया पानी उसमें से बहने लगा, तो यह उसकी आस्था के कारण ही था। जब दाऊद ने—आनंद से भरे अपने हृदय के साथ—मुझ यहोवा की स्तुति में तंतुवाद्य और वीणा बजाई, तो यह उसकी आस्था के कारण ही था। जब अय्यूब ने पहाड़ों में भरे अपने पशु और संपदा के अनगिनत ढेर खो दिए, और उसका शरीर पीड़ादायक फोड़ों से भर गया, तो यह उसकी आस्था के कारण ही था। जब वह मुझ यहोवा की वाणी सुन सका, और मेरी महिमा देख सका, तो यह उसकी आस्था के कारण ही था। पतरस उसकी आस्था के कारण ही यीशु मसीह का अनुसरण कर सका था। वह जो मेरे वास्ते सलीब पर चढ़ाया जा सका और महिमामयी गवाही दे सका, यह भी उसकी आस्था के कारण ही था। जब यूहन्ना ने मनुष्य के पुत्र की महिमामयी छवि देखी, तो यह उसकी आस्था के कारण ही था। जब उसने अंत के दिनों का दर्शन देखा, तो यह सब और भी ज्यादा उसकी आस्था के कारण था। इतने सारे तथाकथित अन्य-जाति राष्ट्रों के लोगों ने मेरा प्रकाशन प्राप्त कर लिया है और वे जान गए हैं कि मैं मनुष्यों के बीच अपना कार्य करने के लिए देह में लौट आया हूँ, यह भी उनकी आस्था के कारण ही है। वे सब जो मेरे कठोर वचनों द्वारा मार खाते हैं और फिर भी इससे सांत्वना पाते हैं और बचाए जाते हैं—क्या उन्होंने ऐसा अपनी आस्था के कारण ही नहीं किया है? जो लोग मुझमें विश्वास करते हुए भी कठिनाइयों का सामना करते हैं, क्या वे भी संसार द्वारा अस्वीकृत नहीं किए गए हैं? जो लोग मेरे वचन से बाहर जी रहे हैं और परीक्षण के कष्टों से भाग रहे हैं, क्या वे सभी संसार में उद्देश्यहीन नहीं भटक रहे हैं? वे पतझड़ के पत्तों के सदृश इधर-उधर फड़फड़ा रहे हैं, जिनके पास आराम के लिए कोई जगह नहीं है, मेरी सांत्वना के वचन तो बिल्कुल भी नहीं हैं। यद्यपि मेरी ताड़ना और शोधन उनका पीछा नहीं करते, फिर भी क्या वे ऐसे भिखारी नहीं हैं, जो स्वर्ग के राज्य के बाहर सड़कों पर, एक जगह से दूसरी जगह उद्देश्यहीन भटक रहे हैं? क्या संसार सच में तुम्हारे आराम करने की जगह है? क्या तुम वास्तव में, मेरी ताड़ना से बचकर संसार से संतुष्टि की कमजोर-सी मुसकराहट प्राप्त कर सकते हो? क्या तुम वास्तव में अपने क्षणभंगुर आनंद का उपयोग अपने हृदय के खालीपन को ढकने के लिए कर सकते हो, उस खालीपन को, जिसे छिपाया नहीं जा सकता? तुम अपने परिवार में हर किसी को धोखा दे सकते हो, लेकिन मुझे कभी धोखा नहीं दे सकते। चूँकि तुम्हारी आस्था बहुत कम है इसलिए तुम आज भी जीने का आनंद नहीं पा सकते। तुम्हारे लिए मेरा प्रोत्साहन यह है : देह की खातिर अपना पूरा जीवन निरर्थक स्थिति में बिताने और उन सभी कष्टों को सहने के बजाय जिन्हें एक व्यक्ति मुश्किल से ही सह सकता है, तुम्हारे लिए बेहतर होगा कि तुम अपना आधा जीवन सच्चे मन से मेरे लिए खुद को खपाने में बिताओ। अपने आप को इतना अधिक सँजोने और मेरी ताड़ना से भागने से कौन-सा उद्देश्य पूरा होता है? केवल अनंतकाल की शर्मिंदगी, अनंतकाल की ताड़ना का फल भुगतने के लिए मेरी क्षणिक ताड़ना से अपने आप को छिपाने से कौन-सा उद्देश्य पूरा होता है? मैं अपनी अपेक्षाएँ मनुष्य पर नहीं थोपता। यदि कोई सच में मेरी सभी व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने का इच्छुक है, तो मैं उसके साथ खराब बरताव नहीं करूँगा। परंतु मैं अपेक्षा करता हूँ कि सभी लोग मुझमें विश्वास करें, वैसे ही जैसे अय्यूब ने मुझ यहोवा में विश्वास किया था। यदि तुम लोगों की आस्था थोमा की आस्था से बढ़कर होगी, तो तुम लोगों की आस्था मेरी स्वीकृति प्राप्त करेगी, तुम लोगों की निष्ठा मुझे खुश करेगी और तुम लोग अपने दिनों में मेरी महिमा निश्चित रूप से प्राप्त करोगे। लेकिन जो लोग संसार और दुष्ट दानव पर विश्वास करते हैं, उनके हृदय ठीक सदोम शहर के लोगों की तरह कठोर बन गए हैं, जिनकी आँखों में हवा से उड़े हुए रेत के कण और जिनके मुँह में दुष्ट दानव से मिली भेंट भरी हुई थी, जिनके अस्पष्ट मन बहुत पहले ही उस दुष्ट द्वारा कब्जे में कर लिए गए हैं जिसने संसार को हड़प लिया है। उनके विचार लगभग पूरी तरह से प्राचीन काल के दुष्ट दानव के वश में आ गए हैं। इसलिए मानवजाति की आस्था हवा के झोंके के साथ उड़ गई है, और वे लोग मेरे कार्य पर ध्यान देने में भी असमर्थ हैं। वे केवल इतना ही कर सकते हैं कि मेरे कार्य के साथ अनमने ढंग से पेश आएँ या उसका एक मोटे तौर पर विश्लेषण करें, क्योंकि वे लंबे समय से शैतान के जहर से ग्रस्त हैं।

मैं मानवजाति को जीत लेता हूँ, क्योंकि लोग मेरे द्वारा बनाए गए थे, और इसके अलावा, उन्होंने मेरी सृष्टि की सभी भरपूर वस्तुओं का आनंद लिया है। किंतु लोगों ने मुझे अस्वीकार भी किया है; मैं उनके हृदय से अनुपस्थित हूँ, और वे मुझे अपने अस्तित्व पर एक बोझ के रूप में देखते हैं, और यहाँ तक कि वास्तव में मुझे देखने के बाद भी मुझे अस्वीकार कर देते हैं और मुझे हराने के हर संभव तरीके पर विचार करते हुए अपने दिमाग खँगालते हैं। लोग मुझे अपने साथ गंभीरता से व्यवहार करने या अपने से सख्त अपेक्षाएँ नहीं करने देते, न ही वे मुझे अपनी अधार्मिकता का न्याय करने या उसके लिए ताड़ना देने देते हैं। इसे नया मानने की तो बात ही छोड़ दो, वे इससे ऊब चुके हैं। और इसलिए मेरा कार्य उस मानवजाति को हराना है जो मुझे खाती, पीती और मेरा आनंद लेती है लेकिन मुझे नहीं जानती; मेरा कार्य उसे अपने हथियार डालने और अपमानित होकर भागने पर मजबूर करना है। फिर, अपने स्वर्गदूतों को लेकर, अपनी महिमा को लेकर, मैं अपने निवास स्थान पर लौट जाऊँगा। लोगों के क्रियाकलापों ने मेरा हृदय बहुत पहले ही तोड़ दिया है और मेरे कार्य को टुकड़े-टुकड़े कर दिया है, इसलिए मैं खुशी-खुशी जाने से पहले अपनी वह महिमा वापिस पाना चाहता हूँ, जिसे उस दुष्ट ने छीन लिया है, और मानवजाति को उनका जीवन जीते रहने देना, “शांति और संतुष्टि में रहने और कार्य करते रहने” देना, “अपने खेतों में खेती करते रहने” देना चाहता हूँ, और मैं उनके जीवन में अब और हस्तक्षेप नहीं करूँगा। किंतु अब मेरा इरादा अपनी महिमा उस दुष्ट के हाथ से पूरी तरह से वापस ले लेने का है, वह संपूर्ण महिमा वापस लेने का है जो मैंने संसार के सृजन के समय मनुष्य में गढ़ी थी। मैं दोबारा कभी इसे पृथ्वी पर मानवजाति को प्रदान नहीं करूँगा। क्योंकि लोग न केवल मेरी महिमा बनाए रखने में असफल रहे हैं, बल्कि उन्होंने उसे शैतान की छवि से बदल लिया है। लोग मेरे आने को सँजोते नहीं, न ही वे मेरी महिमा के दिन को महत्व देते हैं। वे मेरी ताड़ना को स्वीकार करने में खुश नहीं हैं, मेरी महिमा मुझे लौटाने के इच्छुक तो बिल्कुल भी नहीं हैं, न ही वे उस दुष्ट का जहर निकाल फेंकने के इच्छुक हैं। इंसान उसी पुराने तरीके से मुझे धोखा देता रहता है, लोग अभी भी उसी पुराने तरीके से उज्ज्वल मुसकराहट और खुशनुमा चेहरे बनाए रहते हैं। वे अंधकार की उन गहराइयों से अनजान हैं जो मानवजाति पर उस समय उतरेंगी जब मेरी महिमा उसे छोड़ देगी। विशेष रूप से, वे इस बात से अनजान हैं कि जब समस्त मानवजाति के सामने मेरा दिन आएगा, तब वह उनके लिए नूह के समय के लोगों से भी अधिक कठिन होगा, क्योंकि वे नहीं जानते हैं कि जब इस्राएल से मेरी महिमा चली गई थी, तो वह कितना अंधकारमय हो गया था, क्योंकि भोर होते ही मनुष्य भूल जाता है कि घोर अँधेरी रात गुजारना कितना मुश्किल था। जब सूर्य वापस छिप जाएगा और अँधेरा मनुष्य पर उतरेगा, तो वह फिर से रोएगा और अंधेरे में अपने दाँत पीसेगा। क्या तुम लोग भूल गए हो, जब मेरी महिमा इस्राएल से चली गई, तो इस्राएलियों के लिए दुःख के वे दिन सहना कितना मुश्किल हो गया था? अब वह समय है, जब तुम लोग मेरी महिमा देखते हो, और यह वह समय भी है, जब तुम लोग मेरी महिमा का दिन साझा करते हो। जब मेरी महिमा गंदी धरती को छोड़ देगी, तब मनुष्य अँधेरे में रोएगा। अब महिमा का वह दिन है जब मैं अपना कार्य करता हूँ, और यह वह दिन भी है जब मैं मानवजाति को कष्टों से मुक्त करता हूँ, क्योंकि मैं उसके साथ यातना और कष्ट के पल साझा नहीं करूँगा। मैं सिर्फ मानवजाति को पूरी तरह से जीत लूँगा और मानवजाति के उन दुष्टों को पूरी तरह से हरा दूँगा।

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अगला: तुम आस्था के बारे में क्या जानते हो?

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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