परमेश्वर के बारे में तुम्हारी समझ क्या है?

लोगों ने लम्बे समय से परमेश्वर में विश्वास किया है, फिर भी उनमें से ज्यादातर को कोई समझ नहीं है कि "परमेश्वर" शब्द का अर्थ क्या है, वे बस घबराहट में अनुसरण करते हैं। उन्हें पता नहीं है कि वास्तव में मनुष्य को परमेश्वर में विश्वास क्यों करना चाहिए, या परमेश्वर क्या है। यदि लोग सिर्फ़ परमेश्वर में विश्वास करना और उसका अनुसरण करना जानते हैं, परन्तु यह नहीं जानते कि परमेश्वर क्या है, और यदि वे परमेश्वर को भी नहीं जानते, तो क्या यह बस एक बहुत बड़ा मज़ाक नहीं है? इतनी दूर आने के बाद, भले ही लोगों ने अब तक बहुत-से स्वर्गिक रहस्य देखे हैं और अथाह ज्ञान की बहुत-सी बातें सुनी हैं, जो मनुष्य ने पहले कभी नहीं समझी थीं, तब भी वे बहुत से अत्यंत प्राथमिक सत्यों से अनजान हैं जिन पर मनुष्य ने पहले कभी चिंतन-मनन नहीं किया। कुछ लोग कह सकते हैं, "हमने कई वर्ष परमेश्वर में विश्वास किया है। हम कैसे नहीं जान सकते हैं कि परमेश्वर क्या है? क्या यह प्रश्न हमारा निरादर नहीं करता?" परन्तु वास्तविकता में, यद्यपि आज लोग मेरा अनुसरण करते हैं, किंतु वे आज के किसी कार्य के बारे में कुछ भी नहीं जानते, और सबसे सीधे-सादे और सबसे आसान प्रश्नों को भी समझने में विफल हो जाते हैं, फिर ऐसे अत्यंत जटिल प्रश्नों की तो बात ही छोड़ दें जो परमेश्वर के बारे में हैं। जान लो कि जिन प्रश्नों से तुम लोगों का कोई वास्ता नहीं है, जिन्हें तुम लोगों ने पहचाना नहीं है, यही वे प्रश्न हैं जिन्हें समझना तुम लोगों के लिए सबसे आवश्यक है, क्योंकि तुम लोग केवल भीड़ के पीछे चलना जानते हो और जिनसे तुम लोगों को स्वयं को सुसज्जित करना चाहिए उन पर कोई ध्यान नहीं देते हो और उनकी कोई परवाह नहीं करते हो। क्या तुम सचमुच जानते भी हो कि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास क्यों करना चाहिए? क्या तुम सचमुच जानते हो कि परमेश्वर क्या है? क्या तुम लोग सचमुच जानते हो कि मनुष्य क्या है? परमेश्वर में विश्वास करने वाले व्यक्ति के रूप में यदि तुम इन बातों को समझने में विफल हो जाते हो, तो क्या तुम परमेश्वर के विश्वासी की गरिमा खो नहीं देते? आज मेरा कार्य यह है : लोगों को उनका सार समझाना, वह सब समझाना जो मैं करता हूँ, और परमेश्वर के असली चेहरे से परिचित करवाना। यह मेरी प्रबंधन योजना का समापन भाग, मेरे कार्य का अंतिम चरण है। यही कारण है कि मैं जीवन के सारे सत्य तुम लोगों को पहले से बता रहा हूँ, ताकि तुम लोग उन्हें मुझ से स्वीकार कर सको। चूंकि यह अंतिम युग का कार्य है, इसलिए मुझे तुम सब लोगों को जीवन के सारे जीवन-सत्य बताने होंगे जिन्हें तुम लोगों ने पहले कभी ग्रहण नहीं किया है, बावजूद इसके कि बहुत अपूर्ण और बहुत अनुपयुक्त होने के कारण तुम लोग उसे समझने या धारण करने में असमर्थ हो। मैं अपने कार्य का समापन करूँगा; मुझे जो कार्य करना है, उसे मैं पूरा करूँगा, और तुम लोगों को मैंने जो आदेश दिए हैं उन सबके बारे में तुम लोगों को बताऊँगा, ताकि कहीं ऐसा न हो कि जब अँधेरा छाये तब तुम लोग फिर भटक जाओ और दुष्ट के कुचक्रों के फेर में पड़ जाओ। कई तरीके हैं जो तुम नहीं समझते हो, कई मामले हैं जिनका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं है। तुम लोग इतने अज्ञानी हो; मैं तुम लोगों की कद-काठी और तुम लोगों की कमियां अच्छी तरह जानता हूँ। इसलिए, यद्यपि कई वचन हैं जिन्हें समझने में तुम लोग असमर्थ हो, फिर भी मैं तुम सब लोगों को ये सारे सत्य बताने का इच्छुक हूँ जिन्हें तुमने पहले कभी ग्रहण नहीं किया हैहे, क्योंकि मैं चिंता करता रहता हूँ कि तुम लोगों की वर्तमान कद-काठी में, तुम मेरे प्रति अपनी गवाही पर डटे रहने में समर्थ हो या नहीं। ऐसा नहीं है कि मुझे तुम लोगों की कोई परवाह नहीं है; तुम लोग पूरे जंगली हो जिन्हें अभी मेरे औपचारिक प्रशिक्षण से गुज़रना है, और मैं पूरी तरह देख नहीं सकता कि तुम लोगों के भीतर कितनी महिमा है। हालाँकि तुम लोगों पर कार्य करते हुए मैंने बहुत ऊर्जा व्यय की है, तब भी तुम लोगों में सकारात्मक तत्व वास्तव में अविद्यमान प्रतीत होते हैं, जबकि नकारात्मक तत्व अँगुलियों पर गिने जा सकते हैं और केवल ऐसी गवाहियों का काम कर सकते हैं, जो शैतान को लज्जित करती हैं। तुम्हारे भीतर लगभग बाकी सब कुछ शैतान का ज़हर है। तुम लोग मुझे ऐसे दिखते हो जैसे तुम उद्धार से परे हो। अभी स्थिति यह है कि मैं तुम लोगों की विभिन्न अभिव्यक्तियों और व्यवहारों को देखता हूँ, और अंततः, मैं तुम लोगों की असली कद-काठी जानता हूँ। यही कारण है कि मैं तुम लोगों को लेकर अत्यधिक चिंता करता रहता हूँ: जीवन जीने के लिए अकेले छोड़ दिये जायें, तो क्या मनुष्य आज जैसे हैं, उसके तुल्य या उससे बेहतर हो पाएंगे? क्या तुम लोगों की बचकानी कद-काठी तुम लोगों को व्याकुल नहीं करती? क्या तुम लोग सचमुच इस्राएल के चुने हुए लोगों जैसे हो सकते हो-हर समय, केवल और केवल मेरे प्रति निष्ठावान? तुम लोगों में जो उद्घाटित हुआ है, वह अपने माता-पिता से बिछड़े बच्चों का शरारतीपन नहीं है, बल्कि जंगलीपन है जो अपने स्वामियों के चाबुक की पहुँच से बाहर हो चुके जानवरों से फूटकर बाहर आ जाता है। तुम लोगों को अपनी प्रकृति जाननी चाहिए, जो तुम लोगों में समान कमज़ोरी भी है; यह एक रोग है जो तुम लोगों में समान है। इस प्रकार, आज तुम लोगों को मेरा एकमात्र उपदेश यह है कि मेरे प्रति अपनी गवाही पर अडिग रहो। किसी भी परिस्थिति में पुरानी बीमारी को फिर भड़कने न दो। गवाही देना ही वह है, जो सबसे महत्वपूर्ण है—यह मेरे कार्य का मर्म है। तुम लोगों कोमेरे वचन वैसे ही स्वीकार करने चाहिए जैसे मरियम ने यहोवा का प्रकाशन स्वीकार किया था, जो उस तक एक स्वप्न में आया था : विश्वास करके और आज्ञापालन करके। केवल यही पवित्रता की कसौटी पर खरा उतरता है। क्योंकि तुम लोग ही हो जो मेरे वचनों को सबसे अधिक सुनते हो, जिन्हें मेरा सबसे अधिक आशीष प्राप्त है। मैंने तुम लोगों को अपनी समस्त मूल्यवान चीज़ें दे दी हैं, मैंने सब कुछ तुम लोगों को प्रदान कर दिया है, तो भी तुम लोग इस्राएल के लोगों से इतने अत्यधिक भिन्न कद-काठी के हो; तुम बहुत ही अलग-अलग हो। लेकिन उनकी तुलना में, तुम लोगों ने इतना अधिक प्राप्त किया है; जहां वे मेरे प्रकटन की हताशा से प्रतीक्षा करते हैं, तुम लोग मेरे साथ, मेरी उदारता को साझा करते हुए, सुखद दिन बिताते हो। इस भिन्नता को देखते हुए, मेरे ऊपर चीखने-चिल्लाने और मेरे साथ झगड़ा करने और जो मेरा है, उसमें अपने हिस्से की माँग करने का अधिकार तुम लोगों को कौन देता है? क्या तुम लोगों को बहुत नहीं मिला है? मैं तुम लोगों को इतना अधिक देता हूँ, परन्तु बदले में तुम लोग जो मुझे देते हो, वह है हृदयविदारक उदासी और दुष्चिंता और अदम्य रोष और असंतोष। तुम बहुत घृणास्पद हो—तथापि तुम दयनीय भी हो, इसलिए मेरे पास इसके सिवा कोई चारा नहीं है कि मैं अपना सारा रोष निगल लूँ और तुम लोगों के सामने बार-बार अपनी आपत्तियों को ज़ाहिर करूँ। हज़ारों वर्षों के कार्य के दौरान, मैंने कभी मानवजाति के साथ प्रतिवाद नहीं किया क्योंकि मैंने पाया है कि मानवता के समूचे विकास में, तुम लोगों के बीच केवल "चकमेबाज" ही हैं जो सबसे अधिक प्रख्यात बने हैं, प्राचीन कालों के प्रसिद्ध पुरखों द्वारा तुम लोगों के लिए छोड़ी गई बहुमूल्य धरोहरों की तरह। उन सूअर और कुत्तों से, निचले दर्जे के इन्सानों से मुझे कितनी घृणा है। तुम लोगों में अंतरात्मा की कमी है! तुम लोग बहुत अधम चरित्र के हो! तुम लोगों के हृदय बहुत कठोर हैं! यदि मैं अपने ऐसे वचनों और कार्य को इस्राएलियों के बीच ले गया होता, तो मैं बहुत पहले ही महिमा प्राप्त कर चुका होता। परन्तु तुम लोगों के बीच यह अप्राप्य है; तुम लोगों के बीच सिर्फ़ क्रूर उपेक्षा, तुम्हारा रूखा व्यवहार और तुम्हारे बहाने हैं। तुम लोग बहुत संवेदनाशून्य और बिल्कुल बेकार हो!

तुम लोगों को अपना सर्वस्व मेरे कार्य के लिए अर्पित कर देना चाहिए। तुम लोगों को वह कार्य करना चाहिए जो मुझे लाभ पहुंचाता हो। मैं तुम लोगों को वह सब समझाने का इच्छुक हूँ जो तुम लोग नहीं समझते ताकि तुम लोग मुझसे वह सब प्राप्त कर सको जिसका तुम लोगों में अभाव है। यद्यपि तुम लोगों में इतने अनगिनत दोष हैं कि गिने नहीं जा सकते, फिर भी, तुम लोगों को अपनी अंतिम दया प्रदान करते हुए, मैं तुम लोगों पर वह कार्य करते रहने को तत्पर हूँ जो कार्य मुझे करना चाहिए, ताकि तुम लोग मुझ से लाभ प्राप्त कर सको और उस महिमा को प्राप्त कर सको जो तुम लोगों में अनुपस्थित है और जिसे संसार ने कभी देखा नहीं है। मैंने इतने अधिक वर्षों तक कार्य किया है, फिर भी मनुष्यों में से किसी ने भी कभी मुझे नहीं जाना है। मैं तुम लोगों को वे रहस्य बताना चाहता हूँ जो मैंने कभी भी किसी और को नहीं बताए हैं।

मनुष्यों के बीच, मैं वह पवित्रात्मा था जिसे वे देख नहीं सकते थे, वह पवित्रात्मा जिसके सम्पर्क में वे कभी भी नहीं आ सकते थे। पृथ्वी पर मेरे कार्य के तीन चरणों (संसार का सृजन, छुटकारा और विनाश) के कारण, मैं मनुष्यों के बीच अपना कार्य करने के लिए भिन्न-भिन्न समयों पर प्रकट हुआ हूँ (कभी भी सार्वजनिक रूप से नहीं)। मैं पहली बार उनके बीच छुटकारे के युग के दौरान आया। निस्संदेह मैं यहूदी परिवार में आया; इस प्रकार पृथ्वी पर परमेश्वर का आगमन देखने वाले सबसे पहले लोग यहूदी थे। मैंने इस कार्य को व्यक्तिगत रूप से किया, उसका कारण यह था कि छुटकारे के अपने कार्य में, मैं अपने देहधारी शरीर का उपयोग पापबलि के रूप में करना चाहता था। इस प्रकार मुझे सबसे पहले देखने वाले अनुग्रह के युग के यहूदी थे। वह पहली बार था जब मैंने देह में कार्य किया था। राज्य के युग में, मेरा कार्य जीतना और पूर्ण बनाना है, इसलिए मैं पुनः देह में चरवाही का कार्य करता हूँ। यह दूसरी बार है जब मैं देह में कार्य कर रहा हूँ। कार्य के अंतिम दो चरणों में, लोग जिसके सम्पर्क में आते हैं, वह अब अदृश्य, अस्पर्शनीय पवित्रात्मा नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति है जो देह के रूप में साकार पवित्रात्मा है। इस प्रकार मनुष्य की नज़रों में, मैं पुनः इन्सान बन जाता हूँ जिसमें परमेश्वर के रूप और एहसास का लेशमात्र भी नहीं है। इतना ही नहीं, जिस परमेश्वर को लोग देखते हैं, वह न सिर्फ़ नर, बल्कि नारी भी है, जो कि उनके लिए सबसे अधिक विस्मयकारी और उलझन में डालने वाला है। मेरे असाधारण कार्य ने बार-बार, कई-कई वर्षों से धारण किए गए पुराने विश्वासों को चूर-चूर किया है। लोग अवाक रह गए हैं! परमेश्वर केवल पवित्रात्मा, सात गुना तीव्र पवित्रात्मा, या सर्व-व्यापी पवित्रात्मा ही नहीं है, बल्कि एक मनुष्य भी है—एक साधारण मनुष्य, अत्यधिक सामान्य मनुष्य। वह न सिर्फ़ नर, बल्कि नारी भी है। वे इस बात में एक समान हैं कि वे दोनों ही एक मनुष्य से जन्मे हैं, और इस बात में असमान हैं कि एक पवित्र आत्मा के द्वारा गर्भ में आया और दूसरा, मनुष्य से जन्मा है, परन्तु प्रत्यक्ष रूप से पवित्रात्मा से उत्पन्न है। वे इस बात में एक समान हैं कि परमेश्वर द्वारा धारण किए गए दोनों शरीर परमपिता परमेश्वर का कार्य करते हैं, और इस बात में असमान हैं कि एक ने छुटकारे का कार्य किया जबकि दूसरा विजय का कार्य करता है। दोनों पिता परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हैं, परन्तु एक प्रेममय-करुणा और दयालुता से भरा मुक्तिदाता है और दूसरा प्रचंड क्रोध और न्याय से भरा धार्मिकता का परमेश्वर है। एक सर्वोच्च सेनापति है जिसने छुटकारे का कार्य आरंभ किया, जबकि दूसरा धार्मिक परमेश्वर है जो विजय का कार्य संपन्न करता है। एक आरम्भ है, दूसरा अंत है। एक निष्पाप शरीर है, दूसरा वह शरीर है जो छुटकारे को पूरा करता है, कार्य को आगे बढ़ाता है और कभी भी पापी नहीं है। दोनों एक ही पवित्रात्मा हैं, परन्तु वे भिन्न-भिन्न देहों में वास करते हैं और भिन्न-भिन्न स्थानों में पैदा हुए हैं और उनके बीच कई हज़ार वर्षों का अंतर है। फिर भी उनका सम्पूर्ण कार्य एक दूसरे का पूरक है, कभी भी परस्पर विरोधी नहीं है, और एक दूसरे के तुल्य है। दोनों ही लोग हैं, परन्तु एक बालक शिशु था और दूसरी बालिका शिशु थी। इन कई वर्षों तक, लोगों ने न सिर्फ़ पवित्रात्मा को और न सिर्फ एक मनुष्य, एक नर को देखा है, बल्कि कई ऐसी चीजों को भी देखा है जो मानव धारणाओं मेल नहीं खातीं; इस प्रकार, वे कभी भी मुझे पूरी तरह समझ नहीं पाते हैं। वे मुझ पर आधा विश्वास और आधा संदेह करते रहते हैं, मानो मेरा अस्तित्व है, परन्तु मैं एक मायावी स्वप्न भी हूँ। यही कारण है कि आज तक, लोग अभी भी नहीं जानते हैं कि परमेश्वर क्या है। क्या तुम वास्तव में एक सीधे-सादे वाक्य में मेरा सार प्रस्तुत कर सकते हो? क्या तुम सचमुच यह कहने का साहस करते हो "यीशु परमेश्वर के अलावा कोई और नहीं है, और परमेश्वर यीशु के अलावा कोई और नहीं है"? क्या तुम सचमुच यह कहने का साहस रखते हो, "परमेश्वर पवित्रात्मा के अलावा कोई और नहीं है, और पवित्रात्मा परमेश्वर के अलावा कोई और नहीं है"? क्या तुम सहजता से कह सकते हो, "परमेश्वर बस देह धारण किए एक मनुष्य है"? क्या तुममें सचमुच दृढ़तापूर्वक कहने का साहस है कि "यीशु की छवि परमेश्वर की महान छवि है"? क्या तुम परमेश्वर के स्वभाव और छवि को पूर्ण रूप से समझाने के लिए अपनी वाक्पटुता का उपयोग कर सकते हो? क्या तुम वास्तव में यह कहने की हिम्मत करते हो, "परमेश्वर ने अपनी छवि के अनुरूप सिर्फ़ नरों की रचना की, नारियों की नहीं"? यदि तुम ऐसा कहते हो, तो फिर मेरे चुने हुए लोगों के बीच कोई नारी नहीं होगी, नारियां मानवजाति का एक वर्ग तो और भी नहीं क्या अब तुम वास्तव में जानते हो कि परमेश्वर क्या है? क्या परमेश्वर मनुष्य है? क्या परमेश्वर पवित्रात्मा है? क्या परमेश्वर वास्तव में नर है? मुझे जो कार्य करना है, क्या वह केवल यीशु ही पूरा कर सकता है? यदि तुम मेरा सार प्रस्तुत करने के लिए उपरोक्त में से केवल एक को चुनते हो, तो फिर तुम एक अत्यंत अज्ञानी निष्ठावान विश्वासी हो। यदि मैंने एक बार और केवल एक बार देहधारी के रूप में कार्य किया, तो क्या तुम लोग मेरा सीमांकन करोगे? क्या तुम सचमुच एक झलक में मुझे पूरी तरह समझ सकते हो? अपने जीवनकाल के दौरान जिन बातों का तुमने अनुभव किया है, क्या पूर्णतः उन्हीं के आधार पर सचमुच तुम मेरा सम्पूर्ण सार प्रस्तुत कर सकते हो? और यदि मैं अपने दोनों देहधारणों में एक समान कार्य करता, तो तुम मेरे बारे में क्या सोचते? क्या तुम मुझे हमेशा के लिए सलीब पर कीलों से जड़ा छोड़ दोगे? क्या परमेश्वर उतना सीधा-सरल हो सकता है जैसा कि तुम दावा करते हो?

यद्यपि तुम लोगों का विश्वास बहुत सच्चा है, फिर भी तुम लोगों में से कोई भी मेरा पूर्ण विवरण दे पाने में समर्थ नहीं है कोई भी उन सारे तथ्यों की पूर्ण गवाही नहीं दे सकता जिन्हें तुम देखते हो। इसके बारे में सोचो: आज तुममें से ज्यादातर लोग अपने कर्तव्यों में लापरवाह हैं, शरीर का अनुसरण कर रहे हैं, शरीर को तृप्त कर रहे हैं, और लालचपूर्वक शरीर का आनंद ले रहे हैं। तुम लोगों के पास सत्य बहुत कम है। तो फिर तुम लोग उस सबकी गवाही कैसे दे सकते हो जो तुम लोगों ने देखा है? क्या तुम लोग सचमुच आश्वस्त हो कि तुम लोग मेरे गवाह बन सकते हो? यदि ऐसा एक दिन आता है जब तुम उस सबकी गवाही देने में असमर्थ हो जो तुमने आज देखा है, तो तुम सृजित प्राणी के कार्यकलाप गंवा चुके होगे, और तुम्हारे अस्तित्व का ज़रा-भी कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। तुम एक मनुष्य होने के लायक नहीं होगे। यह कहा जा सकता है कि तुम मानव नहीं रहोगे! मैंने तुम लोगों पर अथाह कार्य किया है, परन्तु चूंकि फिलहाल तुम न कुछ सीख रहे हो, न कुछ जानते हो, और तुम्हारा परिश्रम अकारथ है, इसलिए जब मेरे लिए अपने कार्य का विस्तार करने का समय होगा, तब तुम बस शून्य में ताकोगे, तुम्हारे मुँह से आवाज़ न निकलेगी और सर्वथा बेकार हो जाओगे। क्या यह तुम्हें सदा के लिए पापी नहीं बना देगा? जब वह समय आएगा, क्या तुम सबसे अधिक पछतावा महसूस नहीं करोगे? क्या तुम उदासी में नहीं डूब जाओगे? आज का मेरा सारा कार्य बेकारी और ऊब के कारण नहीं, बल्कि भविष्य के मेरे कार्य की नींव रखने के लिए किया जाता है। ऐसा नहीं है कि मैं बंद गली में हूँ और मुझे कुछ नया सोचने की जरूरत है। मैं जो कार्य करता हूँ, उसे तुम्हें समझना चाहिए; यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे सड़क पर खेल रहे किसी बच्चे द्वारा नहीं किया गया है, बल्कि यह ऐसा कार्य है जो मेरे पिता के प्रतिनिधित्व में किया जाता है। तुम लोगों को यह जानना चाहिए कि यह केवल मैं नहीं हूँ जो स्वयं यह सब कर रहा है; बल्कि, मैं अपने पिता का प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ। इस बीच, तुम लोगों की भूमिका केवल दृढ़ता से अनुसरण, आज्ञापालन, परिवर्तन करने और गवाही देने की है। तुम लोगों को समझना चाहिए कि तुम लोगों को मुझमें विश्वास क्यों करना चाहिए; यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न है जो तुम लोगों में से प्रत्येक को समझना चाहिए। मेरे पिता ने अपनी महिमा के वास्ते तुम सब लोगों को उसी क्षण मेरे लिए पूर्वनियत कर दिया था, जिस क्षण उसने इस संसार की सृष्टि की थी। मेरे कार्य के वास्ते, और उसकी महिमा के वास्ते उसने तुम लोगों को पूर्वनियत किया था। यह मेरे पिता के कारण ही है कि तुम लोग मुझ में विश्वास करते हो; यह मेरे पिता द्वारा पूर्वनियत करने के कारण ही है कि तुम मेरा अनुसरण करते हो। इसमें से कुछ भी तुम लोगों का अपना चुनाव नहीं है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि तुम लोग यह समझो कि तुम्हीं वे लोग हो जिन्हें मेरे लिए गवाही देने के उद्देश्य से मेरे पिता ने मुझे प्रदान किया है। चूंकि उसने तुम लोगों को मुझे दिया है, इसलिए तुम लोगों को उन तरीकों का पालन करना चाहिए, जो मैं तुम लोगों को प्रदान करता हूँ, साथ ही उन तरीकों और वचनों का भी, जो मैं तुम लोगों को सिखाता हूँ, क्योंकि मेरे तरीकों का पालन करना तुम लोगों का कर्तव्य है। यह मुझ में तुम्हारे विश्वास का मूल उद्देश्य है। इसलिए मैं तुम लोगों से कहता हूँ: तुम मात्र वे लोग हो, जिन्हें मेरे पिता ने मेरे तरीकों का पालन करने के लिए मुझे प्रदान किया है। हालाँकि, तुम लोग सिर्फ़ मुझ में विश्वास करते हो; तुम लोग मेरे नहीं हो क्योंकि तुम लोग इस्राएली परिवार के नहीं हो, और इसके बजाय प्राचीन साँप जैसे हो। मैं तुम लोगों से सिर्फ़ इतना करने को कह रहा हूँ कि मेरे लिए गवाही दो, परन्तु आज तुम लोगों को मेरे तौर-तरीकों के अनुसार चलना ही चाहिए। यह सब भविष्य की गवाही के वास्ते है। यदि तुम लोग केवल उन लोगों की तरह कार्य करते हो जो मेरे तरीकों को सुनते हैं, तो तुम्हारा कोई मूल्य नहीं होगा और मेरे पिता द्वारा तुम लोगों को मुझे प्रदान किए जाने का महत्त्व व्यर्थ हो जायेगा। तुम लोगों को जो बताने पर मैं जोर दे रहा हूँ, वह यह है: तुम्हें मेरे तरीकों पर चलना चाहिए।

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