वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु

तुम किस के प्रति वफादार हो?

जो जीवन तुम हर दिन जीते हो वह अब तुम्हारी नियति और तुम्हारी तकदीर के लिए निर्णायक और बहुत ही महत्वपूर्ण है। अतः जो कुछ तुम्हारे पास है और हर मिनट जो गुज़रता जाता है उसमें तुम्हें आनन्दित होना चाहिए। खुद को सबसे बड़ा लाभ देने के लिए तुम्हें अपने समय का हर सम्भव सदुपयोग करना चाहिए, ताकि तुम अपने जीवन को व्यर्थ में न जियो। शायद तुम इसके बारे में भ्रमित हो कि मैं ये वचन क्यों कह रहा हूँ? खुलकर कहूँ, तो मैं तुम में से किसी के भी कार्यों से प्रसन्न नहीं हूँ। क्योंकि तुम्हारे लिए मुझ में जो आशाएँ हैं वे वैसी नहीं हैं जैसे तुम अब हो। इस प्रकार, मैं इसे इस तरह से प्रकट कर सकता हूँ: तुम सभी खतरे के मुहाने पर हो। उद्धार के लिए तुम्हारा पहले का रोना और सत्य का अनुसरण करने और ज्योति की खोज करने के लिए तुम्हारी पूर्व आकांक्षाएँ खत्म होने वाली हैं। अंत में, क्या तुम मुझे इस तरह का प्रतिफल दोगे, यह कुछ ऐसा है जिसकी इच्छा मैंने कभी नहीं की थी। मैं प्रमाणित सत्य के विपरीत कुछ भी नहीं कहना चाहता हूँ, क्योंकि तुमने मुझे बहुत निराश किया है। शायद तुम उस मामले को वहाँ तक ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहते और वास्तविकता का सामना नहीं करना चाहते। फिर भी मैं गम्भीरतापूर्वक तुमसे यह प्रश्न पूछना चाहता हूँ: इन सभी वर्षों में, तुम्हारा हृदय किन चीज़ों से भरा हुआ था? तुम्हारा हृदय किसके प्रति वफादार है? यह मत कहो कि मेरा प्रश्न अचानक आ गया है, और मुझसे यह मत पूछो कि मैंने यह प्रश्न क्यों सामने रखा है। तुम्हें इसे जानना ही होगाः यह इसलिए है क्योंकि मैं तुम्हें बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ, तुम्हारी बहुत परवाह करता हूँ, और जो कुछ तुम करते हो उस पर बहुत ज़्यादा ध्यान लगाता हूँ; क्योंकि मैं लगातार तुमसे प्रश्न करता हूँ और अकथनीय तकलीफ सहता हूँ। तो भी, मुझे बदले में अनादर और असहनीय परित्याग दिया जाता है। इस प्रकार तुम मेरे प्रति कर्तव्य में ढीले हो; मैं कैसे इसके बारे में कुछ नहीं जानूँगा। यदि तुम विश्वास करते हो कि यह संभव हो सकता है, तो इससे यह सत्य और भी अधिक प्रमाणित होता है कि तुम मेरे साथ कोमलता के साथ बर्ताव नहीं कर रहे हो। तब मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम अपने आपको को धोखा दे रहे हो। तुम इतने चतुर हो कि तुम नहीं जानते कि तुम क्या कर रहे हो; मुझे लेखा देते समय तुम किस चीज़ का प्रयोग करोगे?

वह प्रश्न जो मुझे सबसे अधिक चिंतित करता है वो यह है कि तुम्हारा हृदय किसके प्रति वफादार है। मैं तुम में से हर एक से चाहता हूँ कि तुम अपने विचारों को व्यवस्थित करो और तुम खुद से पूछो कि तुम किस के प्रति वफादार हो और तुम किस के लिए जीते हो। कदाचित, तुमने इस प्रश्न पर कभी सावधानीपूर्वक विचार नहीं किया है। अतः मुझे तुम्हारे लिए उत्तर को प्रकट करने दो।

वे सभी जिनके पास स्मरण-शक्ति है वे इस सत्य को स्वीकार करेंगेः मनुष्य अपने आप के लिए जीता है और अपने आप के प्रति वफादार होता है। मैं यह विश्वास नहीं करता हूँ कि तुम्हारा उत्तर पूरी तरह सही है, क्योंकि तुम में से प्रत्येक अपने-अपने जीवन में बना हुआ है और प्रत्येक अपने तनावों से संघर्ष कर रहा है। इसलिए, तुम जिन लोगों के प्रति वफादार हो वे ऐसे लोग हैं जिनसे तुम प्रेम करते हो और वे ऐसी चीज़ें हैं जिनसे तुम प्रसन्न होते हो, और तुम स्वयं अपने प्रति वफादार नहीं हो। क्योंकि तुम में से हर एक अपने आस-पास के लोगों, घटनाओं, और चीज़ों से प्रभावित है, इसलिए तुम सचमुच में अपने आप के प्रति वफादार नहीं हो। मैं इन बातों को इसलिए नहीं कहता हूँ कि मैं इस बात की तारीफ करूँ कि तुम स्वयं के प्रति वफादार हो, बल्कि इसलिए कि किसी एक चीज़ के प्रति तुम्हारी वफादारी का खुलासा करूँ। क्योंकि इन वर्षों में, मैंने तुम में से किसी से कभी भी कोई वफादारी प्राप्त नहीं की है। इन वर्षों में, तुमने मेरा अनुसरण किया है, फिर भी तुमने मेरे प्रतिवफादारी नहीं दिखाई है। इसके बजाए, तुम उन लोगों के चारों ओर घूमते रहे हो जिनसे तुम प्रेम करते हो और ऐसी चीज़ों के चारों ओर जो तुम्हें प्रसन्न करती हैं, इतना ज़्यादा कि उन्हें हृदय के करीब रख लिया और उन्हें कभी भी, किसी भी समय, कहीं भी छोड़ा नहीं। जब तुम किसी एक चीज़ के विषय में, जिसे तुम प्रेम करते हो, उत्सुकता और जुनून से भर जाते हो, तो यह हमेशा उस समय में होता है जब तुम मेरा अनुसरण करते हो, या तब होता है जब तुम मेरे वचनों को ध्यान से सुनते हो। इसलिए मैं कहता हूँ कि अपनी पसंदीदा चीज़ों के प्रति वफादार होने और उनसे प्रसन्न होने के बजाए, तुम उस वफादारी का इस्तेमाल करो जो मैं तुम से चाहता हूँ। यद्यपि तुम मेरे लिए किसी एक या दो चीज़ों का बलिदान करते हो, फिर भी यह पूरी तरह तुम्हें नहीं दर्शाता है, और यह नहीं दिखाता है कि वह मैं हूँ जिसके प्रति तुम सचमुच में वफादार हो। तुम अपने आप को उन कार्यों में लीन कर देते हो जिनके विषय में, तुम में जुनून हैः जैसे कि कोई बेटे बेटियों को लेकर, कोई अपने पतियों, पत्नियों, धन सम्पत्ति, कार्य, ऊँचे अधिकारियों, पदस्थिति या स्त्रियों को लेकर वफादार होते हैं। जिनके प्रति तुम वफादार होते हो, उन्हें लेकर तुम कभी भी ऊबते नहीं हो और झुंझलाते नहीं हो; सिवाय इसके, तुम उन चीज़ों को, जिनके प्रति तुम वफादार हो, बड़ी मात्रा और गुणवत्ता में पाने के लिए अधिक लालायित होते हो, और तुम कभी भी निराश नहीं होते हो। उन चीज़ों की तुलना में एवं उन चीज़ों को लेकर जिनके बारे में तुम जुनूनी हो, मुझे और मेरे वचनों को हमेशा ही सबसे आखिरी स्थान में धकेल देते हो। और तुम्हारे पास इसके सिवाए कोई विकल्प नहीं बचता कि उन्हें आखिरी श्रेणी में रखो। कुछ लोग आखिरी स्थान को किसी और चीज़ के लिए छोड़ देते हैं ताकि वे उसके प्रति वफादार हो सकें जिसे अभी तक खोजा नहीं गया है। ऐसे लोगों ने कभी भी अपने हृदय में मेरा थोडा-सा भी स्थान नहीं रखा है। शायद तुम सोचोगे कि मैं तुमसे बहुत कुछ अपेक्षा करता हूँ या भूलवश तुम पर दोष लगाता हूँ, लेकिन क्या तुमने कभी उस सच्चाई पर गौर किया है कि जब तुम आनन्दपूर्वक अपने परिवार के साथ समय बिताते रहते हो, तब तुम एक बार भी मेरे प्रति वफादार नहीं होते हो? ऐसे समय में, क्या तुम्हें इससे तकलीफ नहीं होती है? अपने परिश्रम का प्रतिफल पाकर जब तुम्हारा हृदय आनन्द से भर जाता है, तब क्या तुम इस बात को लेकर हताशा महसूस करते हो कि तुमने अपने आपको पर्याप्त सच्चाई प्रदान नहीं की है? मेरी स्वीकृति न पाने के बाद तुम कब रोए हो? तुमने अपने दिमाग को घासफूस से भर दिया है और अपने बेटे बेटियों के लिए बड़ी तकलीफ उठाते हो। फिर भी तुम सन्तुष्ट नहीं होते हो एवं तुम तब भी विश्वास करते हो कि तुम उनके प्रति परिश्रमी नहीं हो, और यह कि तुम ने पूरी कोशिश नहीं की है। परन्तु तुम मेरे लिए, हमेशा से कर्तव्यों को लेकर ढीले और लापरवाह रहे हो, और तुमने केवल मुझे अपनी यादों में रखा है पर अपने हृदय में नहीं। मेरा प्रेम और कोशिश हमेशा तुम्हारे द्वारा महसूस किए बगैर ही चला जाता है और तुमने कभी इसे समझने की कोशिश नहीं की है। तुम सिर्फ संक्षिप्त विचारों में ही लगे रहते हो, और विश्वास करते हो कि यह काफी होगा। इस तरह की “वफादारी” वह नहीं है जिसके लिए मैंने लम्बे समय से लालसा की है; परन्तु यह लम्बे समय से मेरे लिए घृणास्पद है। तो भी, बावजूद इसके मैं कहता हूँ कि तुम केवल एक या दो चीज़ों को ही निरन्तर स्वीकार कर पाओगे, और तुम उसे पूरी तरह स्वीकार करने में सक्षम नहीं होगे। क्योंकि तुम सभी बहुत आश्वस्त हो, और तुम हमेशा उन वचनों से जो मैंने कहे हैं, बटोरते और चुनते हो कि किसे स्वीकार करें। यदि तुम अभी इसी मार्ग में हो, तो तुम्हारे आत्मविश्वास का सामना करने के लिए मेरे पास तरीके बचे हुए हैं और मैं उन्हें इस्तेमाल करूँगा ताकि तुम स्वीकार कर सको कि मेरे वचन सत्य हैं और प्रमाणित सत्य का तोड़ा मरोड़ा रूप नहीं है।

यदि अब मुझे तुम्हारे सामने कुछ धन-सम्पत्ति रखनी होती और तुम से कहना होता कि खुलकर चुनिए, यह जानते हुए कि मैं तुम्हें दोषी नहीं ठहराऊँगा, तो बहुतेरे धन-सम्पत्ति को चुनते और सत्य को छोड़ देते। पर तुम से बेहतर वे होंगे जो धन-सम्पत्ति को छोड़ कर अनिच्छा से सत्य को चुनेंगे, जबकि वे जो दोनों के बीच हैं, वे एक हाथ से धन-सम्पत्ति को पकड़ेंगे और दूसरे हाथ से सत्य को । इस तरह से, क्या तुम्हारा असली स्वभाव प्रकट नहीं होता? जब सत्य और किसी अन्य चीज़ के बीच, जिसके प्रति तुम वफादार हो, चयन करते समय तुम सभी ऐसा ही निर्णय लोगे, और तुम्हारी मानसिकता वही रहेगी। क्या ऐसा नहीं है? क्या तुम में बहुतेरे ऐसे नहीं हैं जो सही या ग़लत के बीच में झूल गए? सकारात्मक और नकारात्मक, तथा काले और सफेद के बीच प्रतियोगिता में, तुम निश्चित तौर पर अपने उन चुनावों से परिचित हो जो तुमने परिवार और परमेश्वर, संतान और परमेश्वर, शांति और बिखराव, धन-सम्पत्ति और ग़रीबी, पदस्थिति और सामान्य स्थिति, समर्थन दिए जाने और अलग फेंक दिए जाने इत्यादि के बीच किया है। शांतिपूर्ण परिवार और टूटे हुए परिवार के बीच, तुमने बेझिझक पहले को चुना, और वह भी बिना किसी संकोच के; धन-सम्पत्ति और कर्तव्यों के बीच, तुमने फिर से पहले को चुना, और तुम में किनारे पर पहुँचने की इच्छा भी कम है; भोग-विलास और ग़रीबी के बीच, तुमने फिर से पहले को चुना; बेटे, बेटियों, पत्नियों और मेरे बीच में, तुमने पहले को चुना; धारणा और सत्य के बीच में, तुमने एक बार फिर पहले को चुना। तुम्हारी हर प्रकार की बुराइयों का सामना करते हुए भी, मेरा विश्वास तुम में कम नहीं हुआ है। मैं बहुत ज़्यादा आश्चर्यचकित हूँ कि तुम्हारा हृदय कोमल होने से इतना प्रतिरोध करता है। सालों के अथक प्रेम और प्रयास ने मुझे प्रकट रूप में केवल तुम्हारा तिरस्कार और निराशा ही प्रदान की है। फिर भी मेरी आशाएँ हर गुज़रते दिन के साथ बढ़ती ही जाती हैं, क्योंकि मेरा दिन तो पहले से ही हर किसी के सामने पूरी तरह से रख दिया गया है। तो भी, तुम लगातार उसकी खोज करते हो जो अंधकार और बुराई से सम्बंध रखता है, और वह तुम पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देता है। अगर ऐसा है, तो तुम्हारा परिणाम क्या होगा? क्या तुमने कभी इस पर सावधानी से विचार किया है? यदि तुम्हें फिर से चुनने को कहा जाए, तो तुम्हारी स्थिति क्या होगी? तो क्या पहले जैसी ही होगी? जो तुम मुझे दोगे क्या वह तब भी निराशा और अति दुखदायी कष्ट होगा? क्या तुम्हारे हृदयों में थोड़ा-सा भी उत्साह होगा? क्या तुम तब भी नहीं जानोगे कि मेरे हृदय को सुकून देने के लिए तुम्हें क्या करना चाहिए? इस समय, तुम्हारा चुनाव क्या है? क्या तुम मेरे वचनों के प्रति अपना सर्मपण करोगे या उनसे उकता जाओगे? मेरे दिन को तुम सब की आँखों के सामने रख दिया गया है, और जिसका तुम सामना करते हो वह नया जीवन और एक नई शुरूआत है। तो भी, मुझे तुम्हें बताना होगा कि यह शुरूआत पुराने कामों को प्रारम्भ करने के लिए नहीं है, बल्कि पुराने कामों का अंत है, अर्थात् यह अंतिम कार्य है। मेरा ख्याल है तुम सब लोग समझ जाओगे कि इस आरम्भिक बिंदु के बारे में असाधारण क्या है। परन्तु जल्द ही एक दिन, तुम इस शुरूआती बिन्दु के अर्थ को समझ जाओगे, अतः आइए हम एक साथ उस से होकर गुज़र जाएँ और अगले अंत से परिचित हो जायें। फिर भी, जिस बात से मैं निरन्तर बेचैन हो जाता हूँ वह यह है कि जब अन्याय और न्याय का सामना होता है, तो तुम हमेशा पहले को चुनते हो। परन्तु यह तो तुम्हारे भूतकाल की बात थी। साथ ही, मैं यह आशा करता हूँ कि उन बातों को एक एक करके अपने दिमाग से बाहर कर दूँ जो तुम्हारे भूतकाल में घटी थी, भले ही ऐसा करना बहुत कठिन है। फिर भी मेरे पास उसे करने का एक अच्छा कारण है। भविष्य को भूतकाल का स्थान लेने दो और आज अपने सच्चे व्यक्तित्व के बदले में अपने भूतकाल की छाया को हटने दो। इसका मतलब है कि मुझे तुम्हें परेशान करना होगा कि तुम एक बार फिर चुनाव करो और यह देखो कि तुम किसके प्रति वफादार हो।

फूट नोट्सः

अ. मूल पाठ में "यह जानते हुए" नहीं है।

ब. किनारे पर आनाः चीन की एक कहावत है, अर्थात् "बुरे मार्गों से फिरना।"