अध्याय 13

अपनी वर्तमान स्थिति में, तुम लोग स्वयं की धारणाओं से अत्यधिक चिपके रहते हो, और तुम्हारे अंदर काफ़ी गंभीर धार्मिक व्यवधान हैं। तुम आत्मा में कार्य करने में असमर्थ हो, तुम पवित्र आत्मा के काम को समझ नहीं पाते और नए प्रकाश को अस्वीकार करते हो। तुम दिन का सूरज नहीं देख पाते क्योंकि तुम अंधे हो, तुम लोगों को नहीं जानते, तुम अपने "माता-पिता" को कभी छोड़ नहीं पाते, तुम में आध्यात्मिक समझ की कमी है, तुम पवित्र आत्मा के काम को नहीं पहचानते, और तुम्हें नहीं पता कि मेरे वचनों को कैसे खाना और पीना चाहिए। यह एक समस्या है कि तुम्हें नहीं पता इन्हें कैसे स्वयं खाना और पीना चाहिए। पवित्र आत्मा का कार्य दिन-प्रतिदिन एक बेहद तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है; हर दिन नई रोशनी होती है, और हर दिन नई और ताज़ा चीज़ें भी होती हैं। लेकिन तुम समझते नहीं हो। इसके बजाए, तुम शोध करना पसंद करते हो, तुम उन पर सावधानीपूर्वक विचार किए बिना, अपनी निजी प्राथमिकताओं के चश्मे से चीज़ों को देखते हो और भ्रम की स्थिति में सुनते हो। तुम आत्मा में लगन से प्रार्थना नहीं करते, न तो तुम मेरी ओर देखते हो, न ही मेरे वचनों पर विचार करते हो। इस कारण, तुम्हारे पास केवल शाब्दिक अर्थ, नियम और सिद्धांत हैं। तुम्हें साफ तौर पर पता होना चाहिए कि मेरे वचनों को कैसे खाना और पीना चाहिए और तुम्हें मेरे वचनों को अक्सर मेरे सामने लाना चाहिए।

लोग आजकल स्वयं को छोड़ नहीं पाते; वे हमेशा सोचते हैं कि वही सही हैं। वे अपनी छोटी-सी दुनिया में फंसे रहते हैं और वे लोग सही किस्म के इंसान नहीं हैं। उनके उद्देश्य और इरादे गलत हैं, और यदि वे इन बातों पर अड़े रहे, तो निश्चित रूप से उनका न्याय किया जाएगा, और गंभीर मामलों में, उन्हें हटा दिया जाएगा। तुम्हें मेरे साथ निरंतर सहभागिता बनाए रखने के लिए अधिक प्रयास करने चाहिए, यह नहीं कि जिसके साथ चाहा सहभागिता कर ली। तुम्हें उन लोगों की समझ होनी चाहिए जिनके साथ तुम सहभागिता करते हो और तुम्हें जीवन में आध्यात्मिक मामलों पर सहभागिता करनी चाहिए; तभी तुम दूसरों के जीवन की आपूर्ति कर सकते हो और उनकी कमियों को दूर कर सकते हो। तुम्हें उनसे भाषण देने वाले अंदाज़ में बात नहीं करनी चाहिए; ऐसा दृष्टिकोण रखना मूलत: गलत है। सहभागिता में तुम्हें आध्यात्मिक मामलों की समझ होनी चाहिए, तुम्हारे अंदर बुद्धि होनी चाहिए और तुम्हें यह समझना चाहिए कि लोगों के दिल में क्या है। यदि तुम्हें दूसरों की सेवा करनी है, तो तुम्हें सही व्यक्ति होना चाहिए और तुम्हारे पास जो कुछ भी है उसके साथ तुम्हें सहभागिता करनी चाहिए।

अब महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम मेरे साथ सहभागिता करो, मेरे साथ निकटता से संवाद करो, अपने आप खाओ और पिओ, और परमेश्वर के करीब हो जाओ। जितनी जल्दी हो सके, तुम्हें आध्यात्मिक मामलों को समझ लेना चाहिए और तुम्हें साफ तौर पर अपने परिवेश की थाह पा लेनी चाहिए और जान लेना चाहिए कि तुम्हारे आसपास क्या व्यवस्था की गई है। क्या तुम यह समझने में समर्थ हो कि मैं क्या हूं? यह महत्वपूर्ण है कि तुम अपनी कमियों के आधार पर खाओ और पिओ और मेरे वचन के अनुसार जीवन व्यतीत करो! मेरे हाथों को पहचानो और शिकायत न करो। यदि तुम शिकायत करते हो और अलग हो जाते हो, तो हो सकता है कि तुम परमेश्वर का अनुग्रह प्राप्त करने का अवसर खो दो। मेरे निकट आना शुरू कर दो : तुम में क्या कमी है, तुम्हें मेरे निकट कैसे आना चाहिए और मेरे दिल को कैसे समझना चाहिए? लोगों के लिए मेरे पास आना मुश्किल होता है क्योंकि वे अपनी इच्छाओं को त्याग नहीं पाते। उनका स्वभाव हमेशा अस्थिर बना रहता है, निरंतर गर्म और ठंडा होता रहता है, और जब उन्हें मिठास का थोड़ा-सा भी स्वाद प्राप्त हो जाता है, तो वे अभिमानी और स्वयं से संतुष्ट हो जाते हैं। कुछ लोग अभी तक नहीं जागे हैं; तुम जो कहते हो, उसमें वो कितना साकार होता है जो तुम हो? उसमें से कितनी आत्म-रक्षा है, उसमें से कितना दूसरों की नकल करना है और उसमें से कितना नियमों का पालन करना रहा है? तुम्हें पवित्र आत्मा के काम की समझ या बोध इसलिए नहीं है क्योंकि तुम नहीं जानते कि मेरे करीब कैसे आना है। बाहर से, तुम हमेशा चीज़ों पर विचार करते रहते हो, अपनी धारणाओं और अपने मस्तिष्क पर भरोसा करते हो; तुम गुप्त रूप से शोध करते और तुच्छ षडयंत्रों में लगे रहते हो, और उन्हें खुले में प्रकट भी नहीं कर पाते हो। इससे पता चलता है कि तुम पवित्र आत्मा के काम को वास्तव में नहीं समझते। यदि तुम वास्तव में समझते हो कि कोई चीज़ परमेश्वर से नहीं आती, तो तुम खड़े होकर उसे अस्वीकार करने से क्यों डरते हो? कितने हैं जो खड़े होकर मेरे लिए बोल सकें? तुम्हारे अंदर एक मर्द-बच्चे की चारित्रिक शक्ति का ज़रा-सा भी अंश नज़र नहीं आता।

जो कुछ भी वर्तमान में व्यवस्थित किया गया है वह तुम लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए है, ताकि तुम लोग अपने जीवन में विकास कर सको, अपनी आत्माओं को उत्सुक और तीक्ष्ण कर सको, अपनी आध्यात्मिक आंखों को खोल सको ताकि उन चीज़ों को पहचान सको जो परमेश्वर से आती हैं। परमेश्वर से आने वाली हर चीज़ तुम्हें क्षमता और बोझ के साथ सेवा करने और आत्मा में दृढ़ होने में सक्षम बनाती है। जो चीज़ें मुझसे नहीं आतीं वे खाली हैं; वे तुम्हें कुछ नहीं देतीं, वे तुम्हारी आत्मा में एक शून्य पैदा कर देती हैं, तुम्हारा विश्वास खत्म कर देती हैं और तुम्हारे और मेरे बीच दूरी पैदा कर देती हैं, तुम्हें अपने ही मस्तिष्क में फंसा देती हैं। जब तुम आत्मा में जीते हो, तो धर्मनिरपेक्ष विश्व में हर चीज़ से ऊपर उठ सकते हो, लेकिन अपने मस्तिष्क में जीने का अर्थ है शैतान द्वारा कब्ज़ा; यह एक बंद गली है। अब यह बहुत सरल है : मुझे अपने दिल से देखो, तुम्हारी आत्मा तुरंत मजबूत हो जाएगी। तुम्हारे पास अभ्यास करने का मार्ग होगा और मैं हर कदम पर तुम्हारा मार्गदर्शन करूंगा। मेरा वचन हर समय और हर स्थान पर तुम्हारे लिए प्रकट किया जाएगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कहाँ या कब, या वातावरण कितना प्रतिकूल है, मैं तुम्हें स्पष्टता से दिखाऊंगा और मेरा दिल तुम्हारे लिए प्रकट किया जाएगा, यदि तुम मेरी ओर अपने दिल से देखते हो; इस तरह, तुम रास्ते में आगे निकल जाओगे और कभी अपने रास्ते से नहीं भटकोगे। कुछ लोग बाहर से अपना रास्ता खोजने की कोशिश करते हैं, लेकिन कभी अपनी आत्मा के भीतर से ऐसा नहीं करते। वे अक्सर पवित्र आत्मा के काम को समझ नहीं पाते। जब वे दूसरों के साथ सहभागिता करते हैं, तो वे और अधिक उलझन में पड़ जाते हैं और उनके पास अनुसरण करने के लिए कोई रास्ता नहीं होता और उन्हें नहीं मालूम होता कि उन्हें क्या करना है। ऐसे लोग नहीं जानते कि उन्हें क्या चीज़ परेशान कर रही है; उनके पास कई चीज़ें हो सकती हैं और वे आंतरिक रूप से परिपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन क्या इसका कोई उपयोग है? क्या तुम्हारे पास वास्तव में अनुसरण करने का कोई मार्ग है? क्या तुम्हारे पास कोई रोशनी या प्रबुद्धता है? क्या तुम्हारे पास कोई नई अंतर्दृष्टि है? क्या तुमने प्रगति की है या पीछे चले गए हो? क्या तुम नई रोशनी के साथ कदम से कदम मिला सकते हो? तुम में समर्पण नहीं है; जिस समर्पण का उल्लेख तुम अक्सर करते हो वह बातों के अलावा कुछ नहीं है। क्या तुमने आज्ञाकारी जीवन जिया है?

लोगों की आत्म-धार्मिकता, परितोष, आत्म-संतुष्टि और अहंकार द्वारा प्रस्तुत की गयी बाधा कितनी बड़ी है? जब तुम वास्तविकता में प्रवेश नहीं कर पाते हो, तो इसका दोषी कौन है? यह देखने के लिए कि तुम एक सही व्यक्ति हो या नहीं, तुम्हें सावधानीपूर्वक स्वयं की जाँच करनी चाहिए। क्या तुम्हारे लक्ष्य और इरादे मुझे ध्यान में रखकर बनाए गए हैं? क्या तुम्हारे शब्द और कार्य मेरी उपस्थिति में कहे और किए गए हैं? मैं तुम्हारी सभी सोच और विचारों की जाँच करता हूँ। क्या तुम दोषी महसूस नहीं करते? तुम दूसरों को झूठा चेहरा दिखाते हो और शांति से आत्म-धार्मिकता का दिखावा करते हो; तुम यह अपने बचाव के लिए करते हो। तुम यह अपनी बुराई छुपाने के लिए करते हो, और किसी दूसरे पर उस बुराई को थोपने के तरीके भी सोचते हो। तुम्हारे दिल में कितना विश्वासघात भरा हुआ है! जो कुछ भी तुमने कहा है उसके बारे में सोचो। क्या यह तुम्हारे अपने फ़ायदे के लिए नहीं था कि इस डर से कि तुम्हारी आत्मा को नुकसान पहुंचेगा इसलिए तुमने शैतान को छुपा लिया, और फिर जबरन अपने भाइयों और बहनों का खाना और पीना उनसे छीन लिया? तुम्हें अपने लिए क्या कहना है? क्या तुम्हें लगता है कि शैतान ने इस बार जो खाना और पीना छीना है, उसकी पूर्ति तुम अगली बार कर सकोगे? इस प्रकार, अब तुम इसे स्पष्ट रूप से देखते हो; क्या यह ऐसा है जिसकी तुम क्षतिपूर्ति कर सकते हो? क्या तुम खोए हुए समय की पूर्ति कर सकते हो? तुम सबको यह देखने के लिए मेहनत से जाँच करनी चाहिए कि आखिर पिछली कुछ बैठकों में कोई खाना और पीना क्यों नहीं हुआ था और यह समस्या किसके कारण पैदा हुई थी। जब तक यह स्पष्ट न हो जाए, तब तक तुम्हें एक-एक करके सहभागिता करनी चाहिए। अगर ऐसे व्यक्ति को सख्ती से रोका नहीं गया, तो भाइयों और बहनों को समझ में नहीं आएगा, और यह फिर से होगा। तुम्हारी आध्यात्मिक आंखें बंद हैं; तुम में से कई व्यक्ति अंधे हैं! इसके अलावा, जो लोग देख सकते हैं, वे इस बारे में लापरवाह हैं। वे खड़े होकर बोलते नहीं हैं और वे भी अंधे हैं। जो देखते हैं लेकिन बोलते नहीं हैं, वे मूक हैं। यहाँ कई लोग विकलांग हैं।

कुछ लोग समझ नहीं पाते कि सत्य क्या है, जीवन क्या है, मार्ग क्या है, और वे आत्मा को नहीं समझते। वे मेरे वचनों को बस एक सूत्र मानते हैं। यह बहुत ही कठोर है। वे समझते नहीं कि सच्ची कृतज्ञता और प्रशंसा क्या होती है। कुछ लोग महत्वपूर्ण और प्राथमिक बातों को समझने में असमर्थ रहते हैं; वे केवल गौण बातों को समझते हैं। परमेश्वर के प्रबंधन में बाधा डालने का क्या मतलब है? कलीसिया की संरचना को ध्वस्त करने का क्या मतलब है? पवित्र आत्मा के काम को बाधित करने का क्या मतलब है? शैतान का अनुचर कौन है? इन सत्यों को स्पष्ट रूप से समझा जाना चाहिए, न कि बस एक नज़र फेरनी चाहिए। इस बार कोई खाना और पीना नहीं हुआ, इसका क्या कारण है? कुछ लोग महसूस करते हैं कि उन्हें आज ज़ोर से परमेश्वर की स्तुति करनी चाहिए, लेकिन उन्हें उसकी प्रशंसा कैसे करनी चाहिए? क्या उन्हें भजन गाकर और नृत्य करके उसकी प्रशंसा करनी चाहिए? क्या अन्य तरीकों की गिनती प्रशंसा में नहीं होती? कुछ लोग इस धारणा के साथ बैठकों में आते हैं कि परमेश्वर की स्तुति करने का तरीका उल्लसित स्तुति है। लोगों की ये धारणाएं हैं, और वे पवित्र आत्मा के काम पर ध्यान नहीं देते हैं; अंतत: इसका परिणाम यह होता है कि उसके बाद भी बाधाएं आती रहती हैं। इस बैठक में कोई खाना और पीना नहीं था; तुम सभी कहते हो कि तुम परमेश्वर के बोझ के प्रति विचारशील हो और कलीसिया की गवाही की रक्षा करोगे, लेकिन वास्तव में तुम में से कौन परमेश्वर के बोझ के प्रति विचारशील रहा है? अपने आप से पूछो : क्या तुम उसके बोझ के प्रति विचारशील रहे हो? क्या तुम उसके लिए धार्मिकता का अभ्यास कर सकते हो? क्या तुम मेरे लिए खड़े होकर बोल सकते हो? क्या तुम दृढ़ता से सत्य का अभ्यास कर सकते हो? क्या तुम में शैतान के सभी दुष्कर्मों के विरूद्ध लड़ने का साहस है? क्या तुम अपनी भावनाओं को किनारे रखकर मेरे सत्य की खातिर शैतान का पर्दाफ़ाश कर सकोगे? क्या तुम मेरी इच्छा को स्वयं में पूरा होने दोगे? सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में क्या तुमने अपने दिल को समर्पित किया है? क्या तुम ऐसे व्यक्ति हो जो मेरी इच्छा पूरी करता है? स्वयं से ये सवाल पूछो और अक्सर इनके बारे में सोचो। शैतान के उपहार तुम्हारे अंदर हैं और तुम इसके लिए दोषी हो क्योंकि तुम लोगों को नहीं समझते और तुम शैतान के विष को पहचानने में असफल हो; तुम स्वयं को मृत्यु की ओर ले जा रहे हो। शैतान ने तुम्हें इस हद तक धोखा दिया है कि तुम बुरी तरह से उलझन में हो; तुम संकीर्णता की शराब के नशे में डूबे हुए हो, तुम दृढ़ दृष्टिकोण बनाने में समर्थ हुए बिना डांवाडोल होते रहते हो, तुम्हारे पास अभ्यास का कोई मार्ग नहीं है। तुम ठीक से खाते और पीते नहीं हो, तुम जंगलियों की तरह लड़ते और झगड़ते हो, तुम गलत और सही के बीच का अंतर नहीं जानते और जो भी तुम्हारी अगुवाई करता है तुम उसके पीछे चल पड़ते हो। क्या तुम में थोड़ा-भी सत्य है? कुछ लोग स्वयं की रक्षा करते हैं, यहां तक कि धोखाधड़ी में लिप्त रहते हैं। वे दूसरों के साथ सहभागिता करते हैं, लेकिन यह उन्हें बंद गली में ले जाता है। क्या ये लोग मुझसे अपने इरादे, लक्ष्य, प्रेरणा, और स्रोत प्राप्त करते हैं? क्या तुम्हें लगता है कि तुम भाइयों और बहनों के खाने और पीने के छिन जाने के तथ्य की क्षतिपूर्ति कर सकते हो? कुछ लोगों को सहभागिता के लिए ढूंढो और उनसे पूछो; उन्हें स्वयं के लिए बोलने दो : क्या उन्हें कुछ भी प्रदान किया गया है? या उनका पेट गंदे पानी और कचरे से भर दिया गया है और अब उनके पास अनुसरण का कोई रास्ता नहीं बचा है? क्या यह कलीसिया को ध्वस्त नहीं करेगा? भाइयों और बहनों के बीच प्यार कहाँ है? तुम चुपके से शोध करते हो कि कौन सही है और कौन गलत है, लेकिन तुम कलीसिया के लिए बोझ क्यों नहीं उठाते? आमतौर पर तुम मशहूर कहावतों को चिल्लाकर बोलने का काम अच्छी तरह से करते हो, लेकिन जब चीज़ें वास्तव में होती हैं तो तुम उनके बारे में गोलमोल बातें करते हो। कुछ लोग समझते हैं लेकिन केवल चुपचाप फुसफुसाते हैं, जबकि अन्य लोग वह बोलते हैं जो उन्हें समझ आता है, लेकिन कोई और एक शब्द नहीं कहता है। वे नहीं जानते कि परमेश्वर से क्या आता है और शैतान का काम क्या है। जीवन के बारे में तुम लोगों की आंतरिक भावनाएं कहाँ हैं? तुम पवित्र आत्मा के काम को बिल्कुल नहीं समझ पाते हो और न ही तुम उसे पहचानते हो। तुम्हारे लिए नई चीज़ें स्वीकार करना मुश्किल है। तुम केवल धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष चीज़ें ही स्वीकार करते हो, जो लोगों की धारणाओं के अनुरूप होती हैं। परिणामस्वरूप, तुम निर्दयतापूर्वक लड़ते हो। पवित्र आत्मा के काम को कितने लोग समझ पाते हैं? कलीसिया के लिए वास्तव में कितने लोगों ने बोझ उठाया है? क्या तुम इसे समझते हो? भजन गायन परमेश्वर की प्रशंसा करने का एक तरीका है, लेकिन तुम परमेश्वर की स्तुति करने के सत्य को स्पष्टता से नहीं समझते हो। इसके अलावा, और तुम उसकी प्रशंसा करने के तरीके में ज़िद्दी हो। क्या यह तुम्हारी अपनी धारणा नहीं है जो तुम्हारे पास है? तुम हमेशा अपनी धारणाओं से सख्ती से चिपके रहते हो और इस पर ध्यान नहीं देते कि पवित्र आत्मा आज क्या करने जा रहा है, यह महसूस नहीं कर पाते हो कि तुम्हारे भाई-बहन क्या महसूस कर रहे हैं, और शांत तरीके से परमेश्वर की इच्छा की खोज नहीं कर पाते हो। तुम आँखें मूंदकर काम करते हो; तुम गाने अच्छे गा सकते हो, लेकिन नतीजा पूरी तरह से अस्तव्यस्त रहता है। क्या यह सचमुच खाना और पीना है? क्या तुम देखते हो कि वास्तव में बाधा कौन उत्पन्न कर रहा है? तुम आत्मा में बिल्कुल नहीं रहते; बल्कि विभिन्न धारणाओं पर कायम रहते हो। आखिर कलीसिया के लिए बोझ उठाने का यह कैसा तरीका है? तुम्हें देखना चाहिए कि पवित्र आत्मा का काम अब और भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यदि तुम अपनी धारणाओं को कसकर पकड़े रहते हो और पवित्र आत्मा का विरोध करते हो, तो क्या तुम अंधे नहीं हो? क्या यह दीवारों से टकराती हुई और चारों ओर भिनभिनाती हुई मक्खी की तरह नहीं है? यदि तुम इसी तरह से चलते रहे, तो तुम्हें दरकिनार कर दिया जाएगा।

जिन्हें आपदा से पहले पूर्ण किया जाता है वे परमेश्वर के प्रति समर्पित होते हैं। वे मसीह पर निर्भर होकर जीते हैं, वे उसकी गवाही देते हैं, और वे उसकी जयकार करते हैं। वे मसीह के विजयी मर्द-बच्चे और अच्छे सैनिक होते हैं। इस समय यह महत्वपूर्ण है कि तुम स्वयं को शांत करो, परमेश्वर के पास आओ और उसके साथ सहभागिता करो। यदि तुम परमेश्वर के करीब नहीं आओगे, तो तुम पर शैतान द्वारा कब्ज़ा किए जाने का डर है। यदि तुम मेरे पास आकर मेरे साथ सहभागिता कर सकते हो, तो सभी सत्य तुम्हारे सामने प्रकट किए जाएंगे, और तुम्हारे पास जीने और कार्यों को करने का एक मानक होगा। चूँकि तुम मेरे नज़दीक हो, मेरे वचन कभी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेंगे, न ही तुम कभी जीवन में मेरे वचनों से भटकोगे; शैतान के पास तुम्हारा फ़ायदा उठाने का कोई रास्ता नहीं होगा, बल्कि वह शर्मिंदा होगा और हारकर भाग जाएगा। यदि तुम बाहर से देखो कि तुम्हारे अंदर क्या कमी है, तो शायद तुम्हें कभी कुछ मिल जाए, लेकिन जो मिलेगा उसमें से अधिकतर ऐसे नियम और ऐसी चीज़ें होंगी जिनकी तुम्हें आवश्यकता नहीं है। तुम्हें अपने आप को छोड़ना होगा, मेरे वचनों को अधिक खाना और पीना होगा और जानना होगा कि उनपर कैसे विचार किया जाए। अगर तुम्हें कुछ समझ में नहीं आए, तो मेरे करीब आओ और अक्सर मेरे साथ सहभागिता करो; इस तरह, तुम जो बातें समझोगे वे वास्तिवक और सत्य होंगी। तुम्हें मेरे करीब आना आरंभ करना होगा। यह महत्वपूर्ण है! अन्यथा, तुम्हें नहीं पता होगा कि कैसे खाना और पीना है। तुम अपने आप खा और पी नहीं सकते; सच में, तुम्हारा आध्यात्मिक कद बहुत ही छोटा है।

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