416  इंसान को संभालने का काम है शैतान को हराने का काम

1  परमेश्वर का सारा कार्य शैतान को पराजित करने के लिए है। उसका समस्त कार्य—चाहे वह ताड़ना हो या न्याय—शैतान की ओर निर्देशित है; इसे मानव-जाति के उद्धार के वास्ते किया जाता है, यह सब शैतान को पराजित करने के लिए है, और इसका एक ही उद्देश्य है : शैतान के विरुद्ध बिल्कुल अंत तक युद्ध करना! परमेश्वर जब तक शैतान पर विजय प्राप्त न कर ले, तब तक कभी विश्राम नहीं करेगा! वह केवल तभी विश्राम करेगा, जब वह शैतान को हरा देगा।

2  चूँकि परमेश्वर द्वारा किया गया समस्त कार्य शैतान की ओर निर्देशित है, और चूँकि वे सभी लोग जिन्हें शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है, शैतान की सत्ता के नियंत्रण में हैं और सभी शैतान की सत्ता के अधीन जीवन बिताते हैं, इसलिए शैतान के विरुद्ध युद्ध किए बिना और उससे संबंध-विच्छेद किए बिना शैतान इन लोगों पर से अपना शिकंजा ढीला नहीं करेगा, और उन्हें प्राप्त नहीं किया जा सकेगा। यदि उन्हें प्राप्त नहीं किया गया, तो यह साबित करेगा कि शैतान को पराजित नहीं किया गया है, कि उसे वश में नहीं किया गया है। अपनी 6,000-वर्षीय प्रबंधन योजना में परमेश्वर ने प्रथम चरण के दौरान व्यवस्था का कार्य किया, दूसरे चरण के दौरान उसने अनुग्रह के युग का कार्य किया, अर्थात् सलीब पर चढ़ने का कार्य, और तीसरे चरण के दौरान वह मानव-जाति पर विजय प्राप्त करने का कार्य करता है। यह समस्त कार्य उस सीमा पर निर्देशित है, जिस तक शैतान ने मानव-जाति को भ्रष्ट किया है, यह सब शैतान को पराजित करने के लिए है, और इन चरणों में से प्रत्येक चरण शैतान को पराजित करने के वास्ते है।

3  परमेश्वर के प्रबंधन के 6,000 वर्षों के कार्य का सार बड़े लाल अजगर के विरुद्ध युद्ध है, और मानव-जाति का प्रबंधन करने का कार्य भी शैतान को हराने का कार्य है, शैतान के साथ युद्ध करने का कार्य है। परमेश्वर ने 6,000 वर्षों तक युद्ध किया है, और इस प्रकार उसने अंततः मनुष्य को नए क्षेत्र में लाने के लिए 6,000 वर्षों तक कार्य किया है। जब शैतान पराजित हो जाएगा, तो मनुष्य पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा। कार्य का प्रत्येक चरण मनुष्य की वास्तविक आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुसार कार्यान्वित किया जाता है, और यह शैतान को हराने के वास्ते है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

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परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

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