18. राज्य की सुंदरता और मानवजाति के गंतव्य की भविष्यवाणी एवं परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं और आशीषों पर वचन

757. जैसे-जैसे मेरे वचन पूर्णता तक पहुँचते हैं, राज्य धीरे-धीरे पृथ्वी पर आकार लेने लगता है और मनुष्य धीरे-धीरे सामान्य हो जाता, और इस प्रकार पृथ्वी पर मेरे हृदय में जो राज्य है वो स्थापित हो जाता है। उस राज्य में, परमेश्वर के सभी लोगों को सामान्य मनुष्य का जीवन वापस मिल जाता है। बर्फीली शीत ऋतु चली गई है, उसका स्थान बहारों के संसार ने ले लिया है, जहाँ साल भर बहार बनी रहती है। लोग आगे से मनुष्य के उदास और अभागे संसार का सामना नहीं करते हैं, और न ही वे आगे से मनुष्य के शांत ठण्डे संसार को सहते हैं। लोग एक दूसरे से लड़ाई नहीं करते हैं। एक दूसरे के विरूद्ध युद्ध नहीं करते हैं, वहाँ अब कोई नरसंहार नहीं होता है और न ही नरसंहार से लहू बहता है; पूरी ज़मीं प्रसन्नता से भर जाती है, और यह हर जगह मनुष्यों के बीच उत्साह को बढ़ाता है। मैं पूरे संसार में घूमता हूँ, मैं ऊपर सिंहासन से आनन्दित होता हूँ, और मैं सितारों के मध्य रहता हूँ। और स्वर्गदूत मेरे लिए नए नए गीत गाते और नए नए नृत्य करते हैं। अब उनके चेहरों से उनकी स्वयं की क्षणभंगुरता के कारण आँसू नहीं ढलकते हैं। मैं अब अपने सामने स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनता हूँ, और अब कोई मुझ से किसी कठिनाई की शिकायत नहीं करता है। आज, तुम लोग मेरे सामने रहते हो; कल तुम लोग मेरे राज्य में बने रहोगे। क्या यह सब से बड़ा आशीष नहीं है जिसे मैं मनुष्य को देता हूँ?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 20' से उद्धृत

758. बिजली की एक चमक पर, प्रत्येक जानवर अपने असली स्वरूप में प्रकट हो जाता है। इसी प्रकार, मेरे प्रकाश से रोशन हो कर मनुष्यों ने भी उस पवित्रता को पुनः प्राप्त कर लिया है जो उनके पास पहले कभी थी। ओह, अतीत का वह भ्रष्ट संसार! अंतत: यह गंदे पानी में पलट गया है, और सतह के नीचे डूब कर कीचड़ में घुल गया है! ओह, मैंने जो मानवजाति बनाई थी वह अंततः इस प्रकाश में पुनः जीवित हो गई है, उसने अस्तित्व की नींव खोज ली है और कीचड़ में संघर्ष करना बंद कर चुकी है! ओह, सृजन की असंख्य वस्तुएं जिन्हें मैं अपने हाथों में थामे हुये हूँ! मेरे वचनों के माध्यम से वे पुन: नई कैसे नहीं हो सकतीं? वे, इस प्रकाश में, अपने प्रयोजनों को कैसे कार्यान्वित नहीं कर सकतीं? पृथ्वी अब निष्प्राण रूप से स्थिर और मूक नहीं है, स्वर्ग अब उजाड़ और दुःखी नहीं है। स्वर्ग और पृथ्वी अब एक रिक्त स्थान द्वारा अलग नहीं हैं, कभी अलग ने होने के लिये एक हो गये हैं। इस उल्लासपूर्ण अवसर पर, इस आनंदित क्षण में, मेरी धार्मिकता और मेरी पवित्रता पूरे ब्रह्मांड में फैल गई है, और समस्त मानव जाति उनकी निरंतर जयकार कर रही है। स्वर्ग के नगर आनंद से हंस रहे हैं, और पृथ्वी के साम्राज्य प्रसन्न हो कर नृत्य कर रहे हैं। इस समय कौन आनंदित नहीं है? और इस समय कौन रो नहीं रहा है? पृथ्वी अपनी मौलिक स्थिति में स्वर्ग से संबद्ध है और स्वर्ग पृथ्वी के साथ एक हो जाता है। मनुष्य, स्वर्ग और पृथ्वी को बाँधे रखने वाली डोर है, और मनुष्य की पवित्रता के कारण, मनुष्य के नवीनीकरण के कारण, स्वर्ग अब पृथ्वी से छुपा हुआ नहीं है, और पृथ्वी अब स्वर्ग की ओर मौन नहीं है। मानवजाति के चेहरे आभार की मुस्कान से खिले हुये हैं, और उनके हृदय में एक असीमित मिठास छिपी है। मनुष्य अन्य मनुष्य से झगड़ा नहीं करता, न ही वे एक दूसरे के साथ मार-पीट करते हैं। क्या कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मेरे प्रकाश में, दूसरों के साथ शांति से नहीं रहते? क्या कुछ लोग ऐसे हैं, जो मेरे दिवस में, मेरा नाम बदनाम करते हैं? सभी मनुष्य मेरी ओर श्रद्धा से देखते हैं, और अपने हृदय में वे मुझे चुपके से पुकारते हैं। मैंने मानवजाति के हर कर्म को जांचा है: जिन मनुष्यों की शुद्धि कर दी गई है, उनमें से कोई भी मेरे समक्ष अवज्ञाकारी नहीं है, कोई भी मेरी आलोचना नहीं करता। समस्त मानवजाति मेरे स्वभाव से ओतप्रोत हैं। हर कोई मेरे बारे में जान रहा है, मेरे निकट आ रहा है, और मेरी उपासना कर रहा है। मैं मनुष्य की आत्मा में अडिग खड़ा हूँ, उसके नेत्रों में उच्चतम शिखर तक पहुंच गया हूँ, और उसकी नसों में रक्त के साथ प्रवाहित हूँ। मनुष्यों के हृदय में आनंदमय उमंग पृथ्वी का हर स्थान भरती है, हवा तीव्र और ताज़ा है, घना कोहरा अब भूमि को नहीं ढकता, और सूरज अपनी दीप्ति से प्रकाशित है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 18' से उद्धृत

759. मेरे प्रकाश में, लोग फिर से रोशनी देखते हैं। मेरे वचन में, लोग उन चीज़ों को देखते हैं जिनसे उन्हें आनंद मिलता है। मैं पूरब से आया हूँ, मैं पूरब से हूँ। जब मेरी महिमा चमकती है, तो सभी देश प्रकाशित हो उठते हैं, सभी रोशनी में ले आए जाते हैं, एक भी चीज़ अंधकार में नहीं रहती। राज्य में, परमेश्वर के साथ परमेश्वर के लोग जो जीवन जीते हैं, वह अत्यंत उल्लासमय है। सागर लोगों के आशीषित जीवन पर आनंद से नृत्य करते हैं, पर्वत लोगों के साथ मेरी प्रचुरता का आनंद लेते हैं। सभी लोग प्रयास कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं, मेरे राज्य में अपनी निष्ठा दिखा रहे हैं। राज्य में, अब न विद्रोह है, न प्रतिरोध है; स्वर्ग और धरती एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इंसान और मैं गहरी भावना के साथ निकट आते हैं, जीवन के मधुर सुख-चैन के माध्यम से, एक-दूसरे की ओर झुक रहे हैं...। इस समय, मैं औपचारिक रूप से स्वर्ग में अपना जीवन आरंभ करता हूँ। अब शैतान का व्यवधान नहीं है, और लोग विश्राम में प्रवेश करते हैं। पूरी कायनात में, मेरे चुने हुए लोग मेरी महिमा में जीते हैं, अतुलनीय रूप से आशीषित हैं, लोग ऐसे नहीं रहते जैसे इंसानों के बीच रहते हैं, बल्कि ऐसे रहते हैं जैसे परमेश्वर के साथ रहते हैं। हर इंसान शैतान की भ्रष्टता से गुज़रा है, और उसने पूरी तरह से जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव लिए हैं। अब, मेरी रोशनी में रहते हुए, कोई आनंद कैसे न उठाएगा? कोई इस खूबसूरत पल को यों ही कैसे छोड़ देगा और हाथ से कैसे जाने देगा? तुम लोग! मेरे लिए अपने दिलों के गीत गाओ और खुशी से नाचो! अपने सच्चे दिलों को उन्नत करो और उन्हें मुझे अर्पित करो! ढोल बजाओ और मेरे लिए खुशी से क्रीड़ा करो! मैं पूरी कायनात भर में अपनी प्रसन्नता बिखेरता हूँ! मैं सभी लोगों के सामने अपना महिमामय चेहरा प्रकट करता हूँ! मैं ऊँची आवाज़ में पुकारूँगा! मैं कायनात की सीमाओं के परे जाँऊगा! मैं पहले ही लोगों के मध्य शासन करता हूँ! लोगों ने मेरा उत्कर्ष किया है! मैं ऊपर नीले आसमान में बहता हूँ और लोग मेरे साथ चलते हैं। मैं लोगों के मध्य चलता हूँ और मेरे लोग मुझे घेर लेते हैं! लोगों के दिल प्रसन्नचित्त हैं, उनके गीत कायनात को हिलाते हैं, आकाश फाड़ देते हैं! अब कायनात धुंध से घिरी हुई नहीं है; अब न कीचड़ है, न मल का जमाव है। कायनात के पवित्र लोगो! मेरी निगरानी में, तुम अपना असली चेहरा दिखाते हो। तुम लोग मल से ढके हुए इंसान नहीं हो, बल्कि हरिताश्म की तरह निर्मल संत हो, तुम सब लोग मेरे प्रिय हो, तुम सब लोग मेरा आनंद हो! हर चीज़ पुन: जीवन को प्राप्त होती है! सभी संत स्वर्ग में मेरी सेवा के लिए लौट आए हैं, मेरे स्नेहपूर्ण आलिंगन में प्रवेश कर रहे हैं, अब वे विलाप नहीं कर रहे, अब वे बेचैन नहीं हैं, वे स्वयं को मुझे अर्पित कर रहे हैं, मेरे घर वापस आ रहे हैं, और वे अपनी जन्मभूमि में बिना रुके मुझसे प्रेम करेंगे! यह अनंतकाल तक अपरिवर्तनीय होगा! कहाँ है दुख! कहाँ हैं आँसू! कहाँ है देह! धरती गुज़र जाती है, मगर स्वर्ग सदा के लिए हैं। मैं सभी लोगों के समक्ष प्रकट होता हूँ, और सभी लोग मेरी स्तुति करते हैं। यह जीवन, यह सुंदरता, चिरकाल से समय के अंत तक, बदलेगी नहीं। यही राज्य का जीवन है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'ओ लोगो! आनंद मनाओ!' से

760. पृथ्वी पर हर कहीं और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में मेरी बुद्धि है। सभी चीजों के बीच मेरी बुद्धि के परिणाम ही हैं, सभी लोगों में मेरी बुद्धि की उत्कृष्ट कृतियाँ भरी है; सब कुछ मेरे राज्य की चीजों के समान है और सभी लोग मेरे आसमानों के नीचे मेरे चारागाहों पर भेड़ों के समान आराम में रहते हैं। मैं सभी मनुष्यों से ऊपर चलता हूँ और हर कहीं देख रहा हूँ। कोई भी चीज कभी भी पुरानी नहीं दिखाई देती है, और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर आराम करता हूँ, मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ऊपर आराम से पीठ टिकाए हुए हूँ और मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ, क्योंकि सभी चीजों ने अपनी पवित्रता को पुनः प्राप्त कर लिया है, और मैं एक बार फिर से सिय्योन में शान्तिपूर्वक निवास कर सकता हूँ, और पृथ्वी पर लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन शान्त, तृप्त जीवन बिता सकते हैं। सभी लोग सब कुछ मेरे हाथों में प्रबंधित कर रहे हैं, सभी लोगों ने अपनी पूर्व की बुद्धिमत्‍ता और मूल प्रकटन को पुनः प्राप्त कर लिया है; वे धूल से अब और ढके हुए नहीं हैं, बल्कि, मेरे राज्य में, हरिताश्म के समान पवित्र हैं, प्रत्येक का चेहरा मनुष्य के हृदय के भीतर के एक पवित्र जन के जैसा है, क्योंकि मनुष्यों के बीच मेरा राज्य स्थापित हो चुका है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 16' से उद्धृत

761. "मैं सभी मनुष्यों से ऊपर चलता हूँ और हर कहीं देख रहा हूँ। कोई भी चीज कभी भी पुरानी नहीं दिखाई देती है, और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर आराम करता हूँ, मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ऊपर आराम से पीठ टिकाए हुए हूँ...।" यह परमेश्वर के वर्तमान कार्य का परिणाम है। परमेश्वर के चुने हुए सभी लोग अपने मूल स्वरूप में वापस आ जाते हैं, जिसके कारण वे स्वर्गदूत, जिन्होंने इतने वर्षों तक कष्ट झेला था, मुक्त हो जाते हैं, ठीक जैसा कि परमेश्वर कहता है "प्रत्येक का चेहरा मनुष्य के हृदय के भीतर के एक पवित्र जन के जैसा है।" क्योंकि स्वर्गदूत पृथ्वी पर कार्य करते हैं और पृथ्वी पर परमेश्वर की सेवा करते हैं, और परमेश्वर की महिमा दुनिया भर में फैलती है, इसलिए स्वर्ग पृथ्वी पर लाया जाता है, और पृथ्वी को स्वर्ग तक उठाया जाता है। इसलिए, मनुष्य वह कड़ी है जो स्वर्ग और पृथ्वी को जोड़ती है; स्वर्ग और पृथ्वी अब और दूर-दूर नहीं हैं, अब और पृथक नहीं हैं, किन्तु एक के रूप में जुड़े हुए हैं। दुनिया भर में, केवल परमेश्वर और मनुष्य अस्तित्व में हैं। कोई धूल या गंदगी नहीं है, और सब कुछ नया कर दिया जाता है, जैसे कि आकाश के नीचे हरे-भरे चरागाह में लेटा हुआ भेड़ का कोई छोटा सा बच्चा, परमेश्वर के सभी अनुग्रहों का आनंद उठा रहा हो। हरियाली के आगमन की वजह से जीवन की साँस आगे बढ़ती है, क्योंकि परमेश्वर मनुष्य के साथ सदा-सर्वदा रहने के लिए दुनिया में आता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे परमेश्वर के मुँह से कहा गया था कि "मैं एक बार फिर से सिय्योन में शान्तिपूर्वक निवास कर सकता हूँ।" यह शैतान की हार का प्रतीक है, यह परमेश्वर के विश्राम का दिन है, और इस दिन की सभी लोगों द्वारा प्रशंसा और घोषणा की जाएगी, और इसका सभी लोगों द्वारा स्मरणोत्सव मनाया जाएगा। परमेश्वर सिंहासन पर आराम भी तभी करता है जब परमेश्वर पृथ्वी पर अपना काम समाप्त कर लेता है, और यही वह क्षण है जब परमेश्वर के रहस्य सभी मनुष्य को दिखाए जाते हैं; परमेश्वर और मनुष्य सदैव सामंजस्य में होंगे, कभी भी दूर नहीं होंगे—राज्य के सुंदर दृश्य ऐसे हैं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या' के 'अध्याय 16' से उद्धृत

762. जब राज्य पूरी तरह से पृथ्वी पर उतरेगा, तो सभी लोग अपनी मूल सदृशता को पुनःप्राप्त कर लेंगे। इस प्रकार, परमेश्वर कहता है, "मैं ऊपर सिंहासन से आनन्दित होता हूँ, और मैं सितारों के मध्य रहता हूँ। और स्वर्गदूत मेरे लिए नए नए गीत गाते और नए नए नृत्य करते हैं। अब उनके चेहरों से उनकी स्वयं की क्षणभंगुरता के कारण आँसू नहीं ढलकते हैं। मैं अब अपने सामने स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनता हूँ, और अब कोई मुझ से किसी कठिनाई की शिकायत नहीं करता है।" यह दर्शाता है कि जिस दिन परमेश्वर पूरी महिमा को प्राप्त करता है यह वह दिन है जब मनुष्य अपने आराम का आनंद लेता है; लोग शैतान के उपद्रव के परिणामस्वरूप अब और इधर-उधर नहीं भागते हैं, दुनिया आगे प्रगति करने से रुक जाती है, और लोग आराम से रहते हैं—क्योंकि आकाश में असंख्य सितारे नए हो जाते हैं, और सूरज, चंद्रमा, सितारे इत्यादि, और स्वर्ग में तथा धरती पर सभी पहाड़ और नदियाँ, सब बदल जाते हैं। और क्योंकि मनुष्य बदल गया है, और परमेश्वर बदल गया है, इसलिए, भी, सभी चीज़ें बदल जाएँगी। यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना का अंतिम लक्ष्य है, और जिसे अंततः प्राप्त किया जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या' के 'अध्याय 20' से उद्धृत

763. मेरा कार्य केवल छह हजार वर्ष तक रहेगा, और मैंने वचन दिया है कि समस्त मानवजाति पर शैतान का नियंत्रण भी छह हजार वर्षों से अधिक तक नहीं रहेगा। और इसलिए, समय पूरा हुआ। मैं अब और न तो जारी रखूँगा और न ही विलंब करूँगा: अंत के दिनों के दौरान मैं शैतान को परास्त कर दूँगा, मैं अपनी सम्पूर्ण महिमा वापस ले लूँगा, और मैं पृथ्वी पर उन सभी आत्माओं को वापस ले लूँगा जो मुझसे संबंधित हैं ताकि ये व्यथित आत्माएँ दुःख के सागर से बच कर बाहर आ जाएँ, और इस प्रकार पृथ्वी पर मेरे समस्त कार्य का समापन होगा। इस दिन के बाद, मैं पृथ्वी पर फिर कभी भी देहधारी नहीं बनूँगा, और पूर्ण-नियंत्रण करने वाला मेरा आत्मा फिर कभी भी पृथ्वी पर काम नहीं करेगा। मैं पृथ्वी पर केवल एक कार्य करूँगाः मैं मानवजाति को पुनः बनाऊँगा, ऐसी मानवजाति जो पवित्र हो, और जो पृथ्वी पर मेरा विश्वसनीय शहर हो। परन्तु जान लो कि मैं सम्पूर्ण संसार को जड़ से नहीं मिटाऊँगा, न ही मैं समस्त मानवजाति को जड़ से मिटाऊँगा। मैं उस शेष तृतीयांश को रखूँगा—वह तृतीयांश जो मुझसे प्रेम करता है और मेरे द्वारा पूरी तरह से जीत लिया गया है, और उन्हें अत्यधिक भेड़ों, पशुओं पृथ्वी की समस्त संपदा से पोषित करते हुए, मैं इस तृतीयांश को उपजाऊ बनाऊँगा और पृथ्वी पर कई गुना बढ़ाऊँगा ठीक वैसे ही जैसे इस्राएलियों ने व्यवस्था के अधीन किया था। यह मानवजाति हमेशा मेरे साथ रहेगी, मगर यह आज की बुरी तरह से गंदी मानवजाति की तरह नहीं होगी, बल्कि ऐसी मानवजाति होगी जो उन सभी लोगों का जनसमूह होगी जो मेरे द्वारा प्राप्त कर लिए गए हैं। इस प्रकार की मानवजाति को शैतान के द्वारा नष्ट, व्याकुल नहीं किया जाएगा या घेरा नहीं जायेगा, और ऐसी एकमात्र मानवजाति होगी जो मेरे द्वारा शैतान पर विजय प्राप्त करने के बाद पृथ्वी पर विद्यमान रहेगी। यही वह मानवजाति है जो आज मेरे द्वारा जीत ली गई है और जिसने मेरी प्रतिज्ञा प्राप्त कर ली है। और इसलिए, अंत के दिनों के दौरान मेरे द्वारा जीती गई मानवजाति वह मानवजाति भी होगी, जिसे छोड़ दिया जाएगा और जो मेरे अनन्त आशीष प्राप्त करेगी। शैतान पर मेरी विजय की यही एकमात्र गवाही होगी, और शैतान के साथ मेरे युद्ध का एकमात्र विजयोपहार होगा। युद्ध के ये विजयोपहार मेरे द्वारा शैतान के अधिकार क्षेत्र से बचाया गए हैं और ये ही मेरी छह-हजार-वर्षीय प्रबंधन योजना के ठोस-रूप और परिणाम हैं। ये विश्वभर के हर राष्ट्र और संप्रदाय, और हर स्थान और देश से आते हैं। ये भिन्न-भिन्न जातियों के हैं, भिन्न-भिन्न भाषाओं, रीति-रिवाज़ों और त्वचा के रंगों वाले हैं, और ये विश्व के हर देश और संप्रदाय में और यहाँ तक कि संसार के हर कोने में भी फैले हुए हैं। अंततः, वे पूर्ण मानवजाति, मनुष्यों का ऐसा जनसमूह जो शैतान की ताकतों द्वारा अगम्य है, की रचना करने के लिए एक साथ आएँगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है' से उद्धृत

764. उनके विभिन्न कार्यों और गवाहियों के आधार पर, राज्य के भीतर विजेता लोग याजकों और अनुयायियों के रूप में सेवा करेंगे, और जो क्लेश के बीच विजेता हैं वे राज्य के भीतर याजकों का एक समूह बन जाएँगे। याजकों का समूह तब बनाया जाएगा जब सम्पूर्ण विश्व में सुसमाचार का कार्य समाप्ति पर आ जाएगा। जब वह समय आएगा, तब जो मनुष्य के द्वारा किया जाना चाहिए वह परमेश्वर के राज्य के भीतर उसके कर्तव्य का निष्पादन होगा, और राज्य के भीतर परमेश्वर के साथ उसका जीवन जीना होगा। याजकों के समूह में महायाजक और याजक होंगे, और शेष लोग परमेश्वर के पुत्र और उसके लोग होंगे। यह सब क्लेश के दौरान परमेश्वर के प्रति उनकी गवाहियों के द्वारा निर्धारित होता है, ये ऐसी उपाधियाँ नहीं हैं जो सनक पर दी जाती हैं। जब एक बार मनुष्य की हैसियत स्थापित कर दी जाएगी, तो परमेश्वर का कार्य रुक जाएगा, क्योंकि प्रत्येक को प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है और उसकी मूल स्थिति में लौटाया जाता है, और यह परमेश्वर के कार्य के समापन का चिह्न है, यह परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के अभ्यास का अन्तिम परिणाम है, और यह परमेश्वर के कार्य के दर्शनों और मनुष्य के सहयोग का साकार रुप है। अंत में, मनुष्य परमेश्वर के राज्य में विश्राम पाएगा, और परमेश्वर भी विश्राम करने के लिए अपने निवास स्थान में लौट जाएगा। यह परमेश्वर और मनुष्य के बीच 6,000 वर्षों के सहयोग का अन्तिम परिणाम है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास' से उद्धृत

765. विश्राम में जीवन बिना युद्ध, बिना गंदगी और लगातार बनी रहने वाली अधार्मिकता के बिना है। कहने का अर्थ है कि इसमें शैतान के उत्पीड़न (यहाँ "शैतान" का संकेत शत्रुतापूर्ण शक्तियों से हैं), शैतान की भ्रष्टता, और साथ ही परमेश्वर की विरोधी किसी भी शक्ति के आक्रमण का अभाव है। हर चीज अपने मूल स्वभाव का अनुसरण करती है और सृष्टि के प्रभु की आराधना करती है। स्वर्ग और पृथ्वी पूरी तरह से शांत हो जाते हैं। यह मानवजाति का विश्राम से भरा जीवन है। जब परमेश्वर विश्राम में प्रवेश करेगा, तो पृथ्वी पर अब और कोई अधार्मिकता नहीं रहेगी, और शत्रुतापूर्ण शक्तियों का आक्रमण नहीं होगा। मानवजाति एक नये राज्य में भी प्रवेश करेगी, वह शैतान द्वारा भ्रष्ट की गयी मानव जाति अब और नहीं होगी, बल्कि ऐसी मानव जाति होगी जिसे शैतान द्वारा भ्रष्ट किए जाने के बाद बचाया गया है। मानवजाति के विश्राम का दिन परमेश्वर के भी विश्राम का दिन है। मानवजाति के विश्राम में प्रवेश करने की असमर्थता के कारण परमेश्वर ने अपना विश्राम खोया; ऐसा नहीं था कि वह मूलरूप में विश्राम करने में असमर्थ था। विश्राम में प्रवेश करने का यह अर्थ नहीं है कि सभी चीज़ों का चलना बंद हो जाएगा, या सभी चीजें विकसित होना बंद कर देंगी, न ही इसका यह अर्थ है कि परमेश्वर का कार्य होना बंद हो जाएगा, या मनुष्य का जीवित रहना बंद हो जाएगा। विश्राम में प्रवेश करने का चिह्न इस प्रकार है: शैतान नष्ट कर दिया गया है; शैतान के साथ बुरे कामों में शामिल दुष्ट लोगों को दण्डित किया गया है और मिटा दिया गया है; परमेश्वर के प्रति सभी शत्रुतापूर्ण शक्तियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। परमेश्वर के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि वह मानवजाति के उद्धार के अपने कार्य को अब और नहीं करेगा। मानवजाति के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि समस्त मानवजाति परमेश्वर के प्रकाश के भीतर और उसके आशीषों के अधीन जीवन जियेगीजीएगी; वहाँ शैतान की कुछ भी भ्रष्टता नहीं होगी, न ही कोई अधार्मिक बात होगी। मानवजाति सामान्य रूप से पृथ्वी पर रहेगी, वह परमेश्वर की देखभाल के अधीन रहेगी। जब परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे, तो इसका अर्थ होगा कि मानवजाति को बचा लिया गया है और शैतान का विनाश हो चुका है, कि मनुष्यों के बीच परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है। परमेश्वर मनुष्यों के बीच अब और कार्य नहीं करता रहेगा, और मनुष्य शैतान के अधिकार क्षेत्र में अब और नहीं रहेगा। इसलिए, परमेश्वर अब और व्यस्त नहीं रहेगा, और मनुष्य अब और जल्दबाजी नहीं करेगा; परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपनी मूल अवस्था में लौट जाएगा, और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान में लौट जाएगा। ये वे स्थान हैं जिनमें परमेश्वर के समस्त प्रबंधन के अंत के बाद परमेश्वर और मनुष्य अपने-अपने विश्राम करेंगे। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मनुष्य के पास मनुष्य की मंज़िल है। विश्राम करते हुए, परमेश्वर पृथ्वी पर समस्त मानवजाति के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा। जबकि परमेश्वर के प्रकाश में, मनुष्य स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेगा। परमेश्वर मनुष्यों के बीच अब और नहीं रहेगा, और मनुष्य भी परमेश्वर के साथ परमेश्वर की मंज़िल में रहने में असमर्थ होगा। परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक ही राज्य के भीतर नहीं रह सकते हैं; बल्कि दोनों के जीने के अपने स्वयं के तरीके हैं। एकमात्र परमेश्वर ही व है जो समस्त मानवजाति का मार्गदर्शन करता है, जबकि समस्त मानवजाति परमेश्वर के प्रबंधन के कार्य का ठोस स्वरूप है। यह मानवजाति है जिसकी अगुवाई की जाती है; सार के संबंध में, मानवजाति परमेश्वर के समान नहीं है। विश्राम करने का अर्थ है अपने मूल स्थान में लौटना। इसलिए, जब परमेश्वर विश्राम में प्रवेश करता है, तो इसका अर्थ है कि परमेश्वर अपने मूल स्थान में लौट जाता है। परमेश्वर पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अब और नहीं रहेगा, या मानवजाति के बीच होने के समय मानवजाति के आनंद या उसकी पीड़ाओं में सहभागी नहीं बनेगा। जब मानवजाति विश्राम में प्रवेश करती है, तो इसका अर्थ है कि मनुष्य एक सच्ची सृष्टि बन गया है; मानवजाति पृथ्वी पर परमेश्वर की आराधना करेगी और सामान्य मानवीय जीवन जियेगीजीएगी। लोग परमेश्वर के अब और अवज्ञाकारी और प्रतिरोध करने वाले नहीं होंगे; वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएँगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के संबंधित जीवन और उनकी मंज़िलें हैं। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इस तरह, परमेश्वर का अपने प्रबंधन का कार्य पूरा करने के बाद विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश इसी तरह से अपरिहार्य प्रवृत्ति बन जाता है। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है, और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम करते हुए परमेश्वर की आराधना करेगा, तो वो पृथ्वी पर जीवन यापन करेगा, और जब परमेश्वर विश्राम करते हुए मानवजाति के बचे हुए हिस्से की अगुआई करेगा; तो वह उनकी स्वर्ग से अगुआई करेगा, पृथ्वी से नहीं। परमेश्वर तब भी पवित्रात्मा ही होगा, जबकि मनुष्य तब भी देह होगा। परमेश्वर और मनुष्य दोनों के विश्राम करने के स्वयं के संबंधित भिन्न-भिन्न तरीके हैं। जिस समय परमेश्वर विश्राम करेगा, तो वह मनुष्यों के बीच आएगा और प्रकट होगा; जिस समय मनुष्य विश्राम करेगा, तो वह स्वर्ग आने में और स्वर्ग के जीवन का आनंद उठाने में भी परमेश्वर द्वारा अगुवाई किया जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे' से उद्धृत

766. जब एक बार विजय का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, तब मनुष्य को एक सुन्दर संसार में लाया जाएगा। निस्सन्देह, यह जीवन तब भी पृथ्वी पर ही होगा, किन्तु यह मनुष्य के आज के जीवन के पूरी तरह से असदृश होगा। यह वह जीवन है जो सम्पूर्ण मनुष्यजाति पर विजय प्राप्त कर लेने के बाद मनुष्यजाति के पास होगा, यह पृथ्वी पर मनुष्यजाति के लिए एक नई शुरुआत होगी, और मनुष्यजाति के लिए इस प्रकार का जीवन होना इस बात का सबूत होगा कि मनुष्यजाति ने एक नए और सुन्दर क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। यह पृथ्वी पर मनुष्य और परमेश्वर के जीवन की शुरुआत होगी। ऐसे सुन्दर जीवन का आधार ऐसा अवश्य होना चाहिए कि, मनुष्य को शुद्ध कर दिए जाने और उस पर विजय पा लिए जाने के बाद, वह परमेश्वर के सम्मुख समर्पण कर दे। और इसलिए, इससे पहले कि मनुष्यजाति अद्भुत मंज़िल में प्रवेश करे, विजय का कार्य परमेश्वर के कार्य का अंतिम चरण है। ऐसा जीवन ही पृथ्वी पर मनुष्य के भविष्य का जीवन है, यह पृथ्वी पर सबसे अधिक सुन्दर जीवन है, उस प्रकार का जीवन जिसकी लालसा मनुष्य करता है, और उस प्रकार का जीवन है जिसे मनुष्य ने संसार के इतिहास में पहले कभी प्राप्त नहीं किया गया है। यह 6,000 वर्षों के प्रबधंन के कार्य का अंतिम परिणाम है, यह वह है जिसकी मनुष्यजाति सर्वाधिक अभिलाषा करती है, और यह मनुष्य के लिए परमेश्वर की प्रतिज्ञा भी है। किन्तु यह प्रतिज्ञा तुरन्त पूरी नहीं हो सकती है: मनुष्य भविष्य की मंज़िल में केवल तभी प्रवेश करेगा जब एक बार अंत के दिनों का कार्य पूरा कर लिया जाएगा और उस पर पूरी तरह से विजय पा ली जाएगी, अर्थात्, जब एक बार शैतान को पूरी तरह से पराजित कर दिया जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना' से उद्धृत

767. जब मनुष्य शाश्वत मंज़िल में प्रवेश करेगा, तो मनुष्य सृजनकर्ता की आराधना करेगा, और क्योंकि मनुष्य ने उद्धार प्राप्त कर लिया है और शाश्वतता में प्रवेश कर लिया है, इसलिए मनुष्य किसी उद्देश्य की खोज नहीं करेगा, इसके अतिरिक्त, न ही उसे इस बात की चिंता करने की आवश्यकता होगी कि शैतान के द्वारा उसकी घेराबंदी की जाती है। इस समय, मनुष्य अपने स्थान को जानेगा, और अपने कर्तव्य को निभाएगा, और भले ही उन्हें ताड़ना नहीं दी जाती है या उनका न्याय नहीं किया जाता है, तब भी प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य को निभाएगा। उस समय, मनुष्य पहचान और हैसियत दोनों में एक प्राणी होगा। ऊँच और नीच का अब और भेद नहीं होगा; प्रत्येक व्यक्ति बस एक भिन्न कार्य करेगा। मगर मनुष्य तब भी मनुष्यजाति की एक व्यवस्थित और उपयुक्त मंज़िल में जीवन बिताएगा, मनुष्य सृजनकर्ता की आराधना करने के वास्ते अपना कर्तव्य निभाएगा, और इस प्रकार की मनुष्यजाति ही शाश्वतता की मनुष्यजाति होगी। उस समय, मनुष्य ने परमेश्वर के द्वारा रोशन किए गए जीवन को प्राप्त कर लिया होगा, ऐसा जीवन जो परमेश्वर की देखरेख और संरक्षण के अधीन है, और ऐसा जीवन जो परमेश्वर के साथ है। मनुष्यजाति पृथ्वी पर एक सामान्य जीवन जीयेगी, और सम्पूर्ण मनुष्यजाति सही मार्ग में प्रवेश करेगी। 6,000-वर्षीय प्रबंधन योजना ने शैतान को पूरी तरह से पराजित कर दिया होगा, जिसका अर्थ है कि परमेश्वर ने मनुष्य के सृजन के बाद उसकी मूल छवि को पुनः प्राप्त कर लिया होगा, और अपने आप में, परमेश्वर का मूल इरादा पूरा हो गया होगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना' से उद्धृत

768. जब मनुष्य पृथ्वी पर मनुष्य के असली जीवन को प्राप्त कर लेगा और शैतान की सभी ताक़तों को बाँध दिया जाएगा, तब मनुष्य आसानी से पृथ्वी पर जीवन यापन करेगा। चीज़ें उतनी जटिल नहीं होंगी जितनी आज हैं: मानवीय रिश्ते, सामाजिक रिश्ते, जटिल कौटुम्बिक रिश्ते..., वे इतने परेशान करने वाले और बहुत दुःखदायी हैं! यहाँ पर मनुष्य का जीवन कितना दयनीय है! एक बार मनुष्य पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी तो, उसका दिल और दिमाग बदल जाएगा उसके पास ऐसा हृदय होगा जो परमेश्वर पर श्रद्धा रखेगा और ऐसा हृदय होगा जो परमेश्वर से प्रेम करेगा। जब एक बार ऐसे लोगों पर जो इस विश्व में हैं जो परमेश्वर से प्रेम करने की इच्छा रखते हैं विजय पा ली जाती है, कहने का तात्पर्य है कि, जब एक बार शैतान को हरा दिया जाएगा, और जब एक बार शैतान की अंधकार की सभी ताक़तों को बाँध दिया जाएगा, तो पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन शांत हो जाएगा, और वह पृथ्वी पर आज़ादी से जीवन जीने में सक्षम हो जाएगा। यदि मनुष्य का जीवन दैहिक रिश्तों से रहित हो, और देह की जटिलताओं से रहित हो, तो यह बहुत अधिक आसान होगा। मनुष्य के देह के रिश्ते बहुत जटिल होते हैं, और मनुष्य के लिए ऐसी चीज़ों का होना इस बात का प्रमाण है कि उसने स्वयं को अभी तक शैतान के प्रभाव से मुक्त नहीं किया है। यदि अपने प्रत्येक भाई-बहन के साथ तुम्हारा रिश्ता समान होता, यदि अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ तुम्हारा रिश्ता समान होता, तो तुम्हें कोई चिंता नहीं होती, और किसी के बारे में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता था, और इस तरह से मनुष्य को उसकी आधी तकलीफों से मुक्ति मिल गई होती। पृथ्वी पर एक सामान्य मानवीय जीवन जीने से, मनुष्य स्वर्गदूत के समान होगा; यद्यपि अभी भी वह देह का प्राणी होगा, फिर भी वह स्वर्गदूत के समान होगा। यही वह अंतिम प्रतिज्ञा है जो मनुष्य को प्रदान की गई है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना' से उद्धृत

769. जब मनुष्यजाति को उसकी मूल समानता में पुनर्स्थापित कर दिया जाता है, जब मानवजाति अपने संबंधित कर्तव्यों को पूरा कर सकती है, अपने स्वयं के स्थान को सुरक्षित रख सकती है और परमेश्वर की सभी व्यवस्थाओं का पालन कर सकती है, तो परमेश्वर पृथ्वी पर लोगों के एक समूह को प्राप्त कर चुका होगा जो उसकी आराधना करते हैं, वह पृथ्वी पर एक राज्य स्थापित कर चुका होगा जो उसकी आराधना करता है। उसके पास पृथ्वी पर अनंत विजय होगी, और जो उसके विरोध में है वे अनंतकाल के लिए नष्ट हो जाएँगे। इससे मनुष्य का सृजन करने का उसका मूल अभिप्राय पुनर्स्थापित हो जाएगा; इससे सब चीजों के सृजन का उसका मूल अभिप्राय पुनर्स्थापित हो जाएगा, और इससे पृथ्वी पर उसका अधिकार, सभी चीजों के बीच उसका अधिकार और उसके शत्रुओं के बीच उसका अधिकार भी पुनर्स्थापित हो जाएगा। ये उसकी संपूर्ण विजय के प्रतीक हैं। इसके बाद से मानवजाति विश्राम में प्रवेश करेगी और ऐसे जीवन में प्रवेश करेगी जो सही मार्ग का अनुसरण करता है। मनुष्य के साथ परमेश्वर भी अनंत विश्राम में प्रवेश करेगा, और एक अनंत जीवन में प्रवेश करेगा जो परमेश्वर और मनुष्य द्वारा साझा किया जाता है। पृथ्वी पर से गंदगी और अवज्ञा ग़ायब हो जाएगी, वैसे ही पृथ्वी पर से विलाप ग़ायब हो जाएगा। उन सभी का अस्तित्व पृथ्वी पर नहीं रहेगा जो परमेश्वर का विरोध करते हैं। केवल परमेश्वर और वे ही शेष बचेंगे जिन्हें उसने बचाया है; केवल उसकी सृष्टि ही बचेगी।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे' से उद्धृत

770. आशीष का अर्थ है कि जिन चीज़ों से तुम लोग घृणा करते हो वे भविष्य में तुम लोगों के साथ अब और नहीं होंगी, जिसका अर्थ है कि, ये चीज़ें तुम्हारे वास्तविक जीवन में अब और मौजूद नहीं रहेंगी। उन्हें तुम लोगों की आँखों के सामने पूरी तरह से हटा दिया जाएगा: परिवार, कार्य, पत्नी, पति, बच्चे, मित्र और रिश्तेदार। यहाँ तक कि दिन में तीन बार का भोजन भी जिससे तुम नफ़रत करते हो, चला जाएगा। (इसका अर्थ समय के द्वारा सीमित होना और देह से पूरी तरह निकल जाना नहीं है। केवल जीव में तुष्ट होकर ही तेरा शरीर बना रह सकता है। यह तेरा शरीर है, न कि देह, जिसे संदर्भित किया जा रहा है। तू पूरी तरह से मुक्त और ज्ञानातीत हो जाएगा। संसार के सृजन से लेकर अब तक, परमेश्वर द्वारा व्यक्त किया गया यह सबसे महान और सबसे स्पष्ट चमत्कार है।) तुम लोगों के शरीर से मिट्टी के सभी तत्व हटा दिए जाएँगे और तुम लोग पूरी तरह से आध्यात्मिक शरीर बन जाओगे जो पवित्र और निष्कलंक है, और पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के छोरों तक यात्रा करने में समर्थ है। तब से आगे उन सभी कष्टप्रद धुलाई और रगड़ाई से भी मुक्ति मिल जाएगी और, तुम लोग पूरा आनंद उठाओगे। उस समय से आगे, तुम लोग विवाह की धारणा अब और नहीं रखोगे (क्योंकि मैं एक युग को समाप्त कर रहा हूँ, संसार का सृजन नहीं कर रहा हूँ), और अब वे प्रसव पीड़ाएँ नहीं होंगी जो महिलाओं के लिए अत्यंत दुःखदायी होती हैं। न ही तुम लोग भविष्य में अब और काम या परिश्रम करोगे। तुम लोग पूरी तरह से मेरे प्रेम के आलिंगन में डूब जाओगे और उन आशीषों का आनंद लोगे जो मैंने तुम लोगों को दिए हैं। यह पूर्ण सत्य है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 84' से उद्धृत

771. मैंने तुम लोगों के लिए जो बनाये हैं, अर्थात्, दुनिया भर के दुर्लभ और अनमोल ख़जाने, वे सब तुम लोगों को दिए जाएँगे। वर्तमान में तुम लोग इनके बारे में अनुमान या कल्पना भी नहीं कर सकते हो, और किसी भी मनुष्य ने इससे पहले इनका आनंद नहीं लिया है। जब ये आशीष तुम लोगों पर आएँगे, तो तुम लोग अंतहीन रूप से उन्मत्त हो जाओगे, किन्तु यह न भूलना कि ये सब मेरी सामर्थ्य, मेरे कार्यकलाप, मेरी धार्मिकता और उनसे भी बढ़कर, मेरे प्रताप से हैं। (मैं उन लोगों के प्रति अनुग्रहशील रहूँगा जिनके प्रति मैं अनुग्रहशील होना चुनता हूँ, और मैं उन लोगों के प्रति दयालु रहूँगा जिनके प्रति मैं दयालु होना चुनता हूँ।) उस समय तुम लोगों के कोई माता-पिता नहीं होंगे, और कोई रक्त संबंधी नहीं होंगे। मेरे प्यारे पुत्रों, तुम सब वे लोग हो जिनसे मैं प्रेम करता हूँ। तब से कोई भी तुम लोगों को सताने का साहस नहीं करेगा। यह तुम लोगों के लिए वयस्क बनने का समय होगा, और राष्ट्रों पर एक लौह दण्ड के साथ शासन करने का समय होगा। कौन मेरे प्यारे पुत्रों को रोकने का साहस करता है? कौन मेरे प्यारे पुत्रों पर हमला करने का साहस करता है? वे सभी मेरे प्रिय पुत्रों का आदर करेंगे क्योंकि परमपिता की महिमा हुई है। वे सभी चीज़ें जिनकी कभी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था, तुम लोगों की आँखों के सामने दिखाई देंगी। वे असीम, अक्षय और अंतहीन होंगी। शीघ्र ही, निश्चय ही तुम लोगों को धूप से झुलसने और अति कष्टदायी गर्मी को सहने की अब और आवश्यकता नहीं होगी। न तो तुम लोगों को सर्दी को झेलनी पड़ेगी और न ही वर्षा, बर्फ या हवाएँ तुम लोगों तक पहुँच पाएँगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं तुम लोगों से प्रेम करता हूँ, और यह पूरी तरह से मेरे प्रेम की दुनिया होगी। मैं तुम लोगों को वह सब कुछ दूँगा जो तुम लोग चाहते हो, और मैं उस हर चीज़ को तैयार कर दूँगा जिसकी तुम लोगों को आवश्यकता है। कौन यह कहने की हिम्मत करता है कि मैं धार्मिक नहीं हूँ? मैं तुझे फ़ौरन मार डालूँगा, क्योंकि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मेरा कोप (दुष्ट लोगों के खिलाफ़) अनंत काल तक चलेगा, और मैं ज़रा सी भी नरमी नहीं दिखाऊँगा। हालाँकि, मेरा प्रेम (मेरे प्रिय पुत्रों के लिए) भी अनंत काल तक चलेगा; मैं इसे ज़रा-सा भी रोक कर नहीं रखूँगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 84' से उद्धृत

772. उठ, और मेरे साथ सहयोग कर! मैं निश्चित रूप से उन लोगों के साथ क्षुद्रता से व्यवहार नहीं करूँगा जो ईमानदारी से खुद को मेरे लिए खपाते हैं। जो अपने आप को ईमानदारी से मेरे प्रति समर्पित करता है, मैं तुझे अपने सभी आशीष प्रदान करूँगा। अपने आप को पूरी तरह से मेरे प्रति अर्पित कर दे! तू क्या खाता है, क्या पहनता है, और तेरा भविष्य, ये सब मेरे हाथों में है; मैं सब को ठीक से व्यवस्थित कर दूँगा, ताकि तू अनंत आनंद पा सके जो कभी ख़त्म न हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने कहा है, "जो ईमानदारी से मेरे लिए स्वयं को खपाता है, मैं निश्चित रूप से तुझे बहुत आशीष दूँगा।" सारी आशीष हर उस व्यक्ति पर आएगी जो खुद को ईमानदारी से मेरे लिए खपाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 70' से उद्धृत

773. आज, मुझे वह आदमी पसंद है, जो मेरी इच्छा पूरी कर सके, जो मेरी ज़िम्मेदारियों का ध्यान रख सके, और जो मेरे लिए सच्चे दिल और ईमानदारी से अपना सब-कुछ दे सके। मैं उन्हें लगातार प्रबुद्ध करूँगा, उन्हें अपने से दूर नहीं जाने दूँगा। मैं अकसर कहता हूँ, "जो ईमानदारी से मेरे लिए स्वयं को खपाता है, मैं निश्चित रूप से तुझे बहुत आशीष दूँगा।" "आशीष" किस चीज़ का संकेत करता है? क्या तुम जानते हो? पवित्र आत्मा के वर्तमान कार्य के संदर्भ में, यह उन ज़िम्मेदारियों का संकेत करता है, जो मैं तुम्हें देता हूँ। वे सभी, जो कलीसिया के लिए ज़िम्मेदारी वहन कर पाते हैं, और जो ईमानदारी से मेरे लिए खुद को अर्पित करते हैं, उनकी ज़िम्मेदारियाँ और उनकी ईमानदारी दोनों आशीष हैं, जो मुझसे आते हैं। इसके अलावा, उनके लिए मेरे प्रकटन भी मेरे आशीष हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 82' से उद्धृत

774. राज्य मनुष्यों के मध्य विस्तार पा रहा है, यह मनुष्यों के मध्य बन रहा है, यह मनुष्यों के मध्य खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। आज के राज्य में जो मेरे लोग हैं, उनमें से ऐसा कौन है जो मानवों में मानव नहीं है? तुम लोगों में से कौन मानवीय परिस्थितियों से बाहर है? जब भीड़ के मध्य मेरे प्रारम्भ बिन्दु को सुनाया जायेगा, तो मनुष्य किस प्रकार से प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे? तुम सबने अपनी आंखों से मानवजाति की दशा को देखा है; निश्चय ही तुम लोग अब भी इस संसार में हमेशा के लिए बने रहने की आशा नहीं कर रहे हो? अब मैं निर्बाध अपने लोगों के मध्य चल रहा हूँ, उनके मध्य में रहता हूँ। आज, जो मेरे लिए वास्तविक प्रेम रखते हैं, ऐसे लोग ही धन्य हैं। धन्य हैं वे जो मुझे समर्पित हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में रहेंगे। धन्य हैं वे जो मुझे जानते हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में शक्ति प्राप्त करेंगे। धन्य हैं वे जो मुझे खोजते हैं, वे निश्चय ही शैतान के बंधनों से स्वतंत्र होंगे और मेरी आशीषों का आनन्द लेंगे। धन्य हैं वे जो अपने आप को मेरे लिए त्यागते हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में प्रवेश करेंगे और मेरे राज्य की उदारता को पाएंगे। जो लोग मेरी खातिर हर ओर दौड़-भाग करते हैं उन्हें मैं याद रखूंगा, जो लोग मेरे लिए अपने आप को समर्पित करते हैं, मैं उन्हें आनन्द से गले लगाऊंगा, जो लोग मुझे भेंट देते हैं मैं उन्हें आनन्द दूंगा। जो लोग मेरे वचनों में आनन्द प्राप्त करते हैं उन्हें मैं आशीष दूंगा; वे निश्चय ही ऐसे खम्भे होंगे जो मेरे राज्य में शहतीर को थामेंगे, वे निश्चय ही मेरे घर में अतुलनीय प्रचुरता को प्राप्त करेंगे और उनके साथ कोई तुलना नहीं कर पाएगा। क्या तुम सबने कभी मिलने वाली आशीषों को स्वीकार किया है? क्या कभी तुम सबने तुमसे किए गए वायदों को खोजा है? तुम लोग निश्चय ही, मेरी रोशनी के नेतृत्व में, अंधकार की शक्तियों के गढ़ को तोड़ोगे। तुम अंधकार के मध्य, निश्चय ही मार्गदर्शन करने वाली ज्योति को नहीं खोओगे। तुम सब निश्चय ही सम्पूर्ण सृष्टि पर स्वामी होगे। तुम लोग शैतान पर निश्चय ही विजयी बनोगे। तुम सब निश्चय ही बड़े लाल अजगर के राज्य के पतन के समय, मेरी विजय की गवाही देने के लिए असंख्य लोगों की भीड़ में खड़े होगे। तुम लोग निश्चय ही सिनिम के देश में दृढ़ और अटूट खड़े रहोगे। तुम सब जो कष्ट सह रहे हो, उनके द्वारा तुम मेरे आशीषों को प्राप्त करोगे और मेरी महिमा को ब्रह्माण्ड भर में निश्चय ही बिखेरोगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 19' से उद्धृत

775. जिन लोगों को परमेश्वर पूर्ण बनाने का इरादा रखता है, वे सब उसके आशीष और उसकी विरासत प्राप्त करेंगे। अर्थात्, वे वही ग्रहण करते हैं जो परमेश्वर के पास है और वह जो है, ताकि यह वह बन जाए जो उनके भीतर है; उनमें परमेश्वर के सारे वचन गढ़े हुए हैं; परमेश्वर जो है, तुम लोग उसे ठीक जैसा है वैसा लेने और इस प्रकार सत्य को जीवन में उतारने में सक्षम हो। ऐसे ही व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाया और प्राप्त किया जाता है। केवल इसी प्रकार का मनुष्य परमेश्वर द्वारा दिए जाने वाले आशीष पाने योग्य है :

1) परमेश्वर के संपूर्ण प्रेम को पाना।

2) सभी बातों में परमेश्वर की इच्छानुसार चलना।

3) परमेश्वर के मार्गदर्शन को पाना, परमेश्वर के प्रकाश में जीवन व्यतीत करना और परमेश्वर का प्रबोधन प्राप्त करना।

4) पृथ्वी पर परमेश्वर को प्रिय लगने वाली छवि जीना; परमेश्वर से सच्चा प्रेम करना जैसा कि पतरस ने किया, जिसे परमेश्वर के लिए सलीब पर चढ़ा दिया गया और जो परमेश्वर के प्रेम के प्रतिदान में मरने के लिए तैयार हो गया; पतरस के समान महिमा प्राप्त करना।

5) पृथ्वी पर सभी का प्रिय, सम्मानित और प्रशंसित बनना।

6) मृत्यु और पाताल के सारे बंधनों पर काबू पाना, शैतान को कार्य करने का कोई अवसर न देना, परमेश्वर के अधीन रहना, एक ताज़ा और जीवंत आत्मा के भीतर रहना, और हारा-थका नहीं रहना।

7) जीवन भर हर समय उत्साह और उमंग की एक अवर्णनीय भावना रखना, मानो परमेश्वर की महिमा के दिन का आगमन देख लिया हो।

8) परमेश्वर के साथ महिमा को जीतना और परमेश्वर के प्रिय संतों जैसा चेहरा रखना।

9) वह बनना जो पृथ्वी पर परमेश्वर को प्रिय है, अर्थात्, परमेश्वर का प्रिय पुत्र।

10) स्वरूप बदलना और परमेश्वर के साथ तीसरे स्वर्ग में आरोहण करना तथा देह के पार जाना।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'प्रतिज्ञाएँ उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं' से उद्धृत

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