अध्याय 42

मुझे नहीं पता कि लोगों ने आज के वचनों में कोई बदलाव देखा है या नहीं। कुछ लोगों ने थोड़ा-सा देखा होगा, लेकिन निश्चित होने की हिम्मत नहीं करते। शायद दूसरों ने कुछ नहीं देखा। माह के बारहवें और पंद्रहवें दिन के बीच परमेश्वर के वचनों में इतना बड़ा बदलाव क्यों आया है? क्या तुमने इस पर विचार किया है? तुम्हारी क्या राय है? क्या तुमने परमेश्वर के सभी वचनों से कुछ भी समझा है? दो अप्रैल से पंद्रह मई के बीच किया गया मुख्य कार्य क्या था? आज लोग बेख़बर और इतने दिग्भ्रमित क्यों हैं, मानो उनके सिर पर किसी ने डंडे से वार कर दिया हो? आज “राज्य के लोगों के घोटाले” शीर्षक कोई स्तंभ क्यों नहीं है? दो और चार अप्रैल को परमेश्वर ने मनुष्य की अवस्था नहीं बताई; इसी तरह आज के बाद कई दिनों तक उसने लोगों की अवस्था की ओर इशारा नहीं किया—ऐसा क्यों है? इसमें निश्चित रूप से कोई अनसुलझी गुत्थी है—यह 180-डिग्री घुमाव क्यों? आओ पहले इस बारे में थोड़ी बात करें कि परमेश्वर ने इस तरह क्यों कहा। आओ, परमेश्वर के पहले वचनों पर नज़र डालें, जिनमें उसने यह कहने में कोई समय बरबाद नहीं किया, “जैसे ही नया काम शुरू होता है।” यह वाक्य पहले तुम्हें यह समझाता है कि परमेश्वर का कार्य एक नई शुरुआत में प्रवेश कर चुका है, कि उसने एक बार फिर नया काम शुरू किया है। इससे पता चलता है कि ताड़ना समापन की ओर अग्रसर है; यह कहा जा सकता है कि पहले ही ताड़ना की पराकाष्ठा में प्रवेश किया जा चुका है, और इसलिए तुम लोगों को अपने समय का अधिकतम लाभ उठाते हुए ताड़ना के समय के कार्य का उपयुक्त रूप से अनुभव करना चाहिए, ताकि तुम पीछे न रह जाओ और त्याग न दिए जाओ। यह सारा कार्य मनुष्य का है, और इसके लिए आवश्यक है कि मनुष्य सहयोग करने की पूरी कोशिश करे। जब ताड़ना को पूरी तरह विदा कर दिया जाएगा, तब परमेश्वर अपने कार्य का अगला हिस्सा प्रारंभ करेगा, क्योंकि परमेश्वर कहता है : “... इसलिए मैंने मनुष्यों के बीच अपना कार्य करना जारी रखा है...। इस समय मेरा दिल बहुत प्रसन्नता से भर गया है, क्योंकि मैंने लोगों के एक भाग को प्राप्त कर लिया है, और इसलिए मेरे ‘उद्यम’ में अब मंदी नहीं है, यह अब खोखले वचन नहीं है।” अतीत में लोगों ने परमेश्वर के वचनों में उसके इरादे की तात्कालिकता देखी। और यह वास्तव में सच है कि आज परमेश्वर अपना काम ज्यादा तेजी से कर रहा है। मनुष्य के हिसाब से चीजें पूरी तरह से परमेश्वर की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं लगतीं—परंतु परमेश्वर के हिसाब से उसका काम पहले ही समाप्त हो चुका है। चूँकि लोगों के सोचने का तरीका बहुत जटिल है, इसलिए चीज़ों के प्रति उनका दृष्टिकोण भी अकसर कुछ ज़्यादा ही जटिल होता है। लोगों की लोगों से बहुत ज़्यादा अपेक्षाएँ होती हैं, परंतु परमेश्वर मनुष्य से इतनी ऊँची अपेक्षाएँ नहीं करता, और इसके कारण, यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर और मनुष्य के बीच कितनी बड़ी विसंगति है। परमेश्वर जो कुछ करता है, उसमें लोगों की धारणाएँ प्रकट होती हैं। ऐसा नहीं है कि परमेश्वर लोगों से बड़ी माँगें करता है और लोग उन्हें पूरा करने में असमर्थ होते हैं, बल्कि लोग परमेश्वर से बड़ी माँगें करते हैं और परमेश्वर उन्हें पूरा करने में असमर्थ होता है। क्योंकि कई हज़ार वर्षों से शैतान द्वारा भ्रष्ट मानवजाति में उपचार के बाद उसके उत्तर-प्रभाव होते हैं, इसलिए लोगों ने हमेशा परमेश्वर से ऐसी बड़ी माँगें की हैं, और वे बिलकुल भी उदार नहीं होते, और इस बात से बेहद भयभीत रहते हैं कि परमेश्वर प्रसन्न नहीं है। इसलिए, यह तथ्य कि लोग कई चीज़ों में सक्षम नहीं होते, एक तरीका है, जिससे वे खुद को आत्म-ताड़ना के अधीन कर लेते हैं; वे स्वयं के कार्यों के परिणाम भोगते हैं—यह सरासर पीड़ा है। लोगों द्वारा भोगी गई कठिनाइयों में से 99% से अधिक को परमेश्वर तिरस्कृत कर देता है। इसे स्पष्ट रूप से कहा जाए तो, किसी ने भी वास्तव में परमेश्वर के लिए पीड़ा नहीं उठाई है। सभी लोग अपने ही कर्मों के परिणाम भोगते हैं—और बेशक ताड़ना का यह चरण भी इसका अपवाद नहीं है; यह एक ऐसा कड़वा प्याला है, जिसे मनुष्य स्वयं तैयार करता है और स्वयं ही उसे पीने के लिए उठाकर अपने मुँह तक ले जाता है। चूँकि परमेश्वर ने अपनी ताड़ना का वास्तविक उद्देश्य प्रकट नहीं किया है, अतः हालाँकि लोगों का एक हिस्सा है जो शापित है, फिर भी यह ताड़ना का प्रतिनिधित्व नहीं करता। लोगों का एक हिस्सा धन्य है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि वे भविष्य में भी धन्य रहेंगे। लोगों को ऐसा लगता है कि परमेश्वर एक ऐसा परमेश्वर है, जो अपने वचन पूरे नहीं करता। अधीर मत बनो। शायद ये वचन कुछ ज़्यादा हो गए, लेकिन नकारात्मक मत बनो। मैं जो कहता हूँ, वह मनुष्य के दुख से कुछ संबंध रखता है, फिर भी मुझे लगता है कि तुम्हें परमेश्वर के साथ अच्छे संबंध बनाने चाहिए। तुम्हें उसे अधिक “उपहार” देने चाहिए—यह उसे निश्चित रूप से प्रसन्न कर देगा। मुझे विश्वास है कि परमेश्वर उन्हें प्रेम करता है, जो उसे “उपहार” देते हैं। क्या तुम्हें लगता है कि ये वचन सही हैं?

अब तक तुमने अपनी संभावनाएँ किस हद तक अलग रखी हैं? परमेश्वर का कार्य जल्दी ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए तुम लोगों ने अपने भविष्य की संभावनाएँ लगभग अलग रख दी होंगी, है ना? तुम लोग स्वयं भी अपनी जाँच कर सकते हो : तुम लोगों को हमेशा ऊँचाई पर खड़े रहना, अपनी बड़ाई करना और दूसरों के सामने दिखावा करना पसंद है—यह क्या है? आज, मुझे अभी तक नहीं पता है कि लोगों की संभावनाएँ क्या हैं। अगर लोग वास्तव में दुख के समुद्र में डूबे हुए जीते हैं, कठिनाइयों के शोधन के बीच या फिर यातना के विभिन्न उपकरणों के खतरे के अंतर्गत रहते हैं, या सभी लोगों द्वारा अस्वीकृति के समय में रहते हैं और आकाश की ओर देखते हुए गहरी आहें भरते हैं, तो शायद ऐसे समय अपने विचारों में वे अपनी संभावनाओं को अलग रख देते हैं। इसका कारण यह है कि जब लोग मुश्किल हालात में होते हैं तो वे सभी किसी दूसरी दुनिया के आदर्शलोक की खोज करते हैं, और आरामदायक परिस्थितियों में किसी ने भी कभी अपने सुंदर सपनों की अपनी खोज का त्याग नहीं किया। मैं नहीं जानता कि क्या यह कथन वास्तविकता से मेल खाता है, लेकिन काश, यह लोगों के दिलों में न होता। क्या तुम लोग अभी भी जीवित रहते हुए स्वर्गारोहण करना चाहते हो? क्या तुम अभी भी देह में अपना स्वरूप बदलना चाहते हो? मुझे नहीं पता कि तुम सभी इस पर एकमत हो या नहीं, परंतु मैंने हमेशा यह महसूस किया है कि यह अवास्तविक है—ऐसे विचार कुछ ज्यादा ही बढ़-चढ़कर लगते हैं। लोग इस तरह की बातें करते हैं : “अपनी संभावनाओं को अलग रखो, अधिक यथार्थवादी बनो।” तुम कहते हो कि लोग धन्य होने के विचार छोड़ दें—लेकिन तुम्हारा अपना क्या? क्या तुम दूसरों को आशीष पाने के विचार छोड़ने पर मजबूर करते हो, जबकि खुद आशीष खोजते हो? तुम दूसरों को आशीष खोजने नहीं देते, परंतु स्वयं गुप्त रूप से उन्हें पाने के बारे में सोचते रहते हो—यह तुम्हें क्या बनाता है? एक ढोंगी! जब तुम इस तरह व्यवहार करते हो, तो क्या तुम्हारा अंतःकरण अभियुक्त नहीं बन जाता? अपने दिल में क्या तुम्हें अपराध-बोध नहीं होता? क्या तुम धोखेबाज़ नहीं हो? तुम दूसरों के दिलों में छिपे वचनों को खोदकर निकालते हो, परंतु अपने ही दिल में जो वचन हैं, उनके बारे में कुछ नहीं कहते—कैसे कचरे के बेकार टुकड़े हो तुम! मुझे आश्चर्य होता है कि जब तुम लोग यह बोलते हो, तो अपने दिलों में क्या सोचते हो—क्या तुम लोगों को पवित्र आत्मा द्वारा फटकारा नहीं जा सकता? क्या इससे तुम्हारे आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुँचती? तुम लोग वास्तव में नहीं जानते कि तुम लोगों के लिए क्या अच्छा है! तुम सब हमेशा श्री नांगुओ की तरह ही रहे हो—ढोंगी। कोई आश्चर्य नहीं कि परमेश्वर ने “सभी लोग ‘स्वयं को समर्पित’ करने के लिए तैयार हैं” में “स्वयं को समर्पित” को उद्धरण-चिह्नों के बीच रखा है। परमेश्वर मनुष्य को बहुत अच्छी तरह से जानता है, और मनुष्य की धोखेबाज़ी कितनी भी चतुराई भरी क्यों न हो—भले ही वह कुछ भी प्रकट न करे और उसका चेहरा लाल न हो और न उसका दिल तेज़ी से धड़के—परमेश्वर की आँखें उज्ज्वल हैं, इसलिए मनुष्य को हमेशा परमेश्वर की नज़र से बचने में परेशानी हुई है। ऐसा लगता है, मानो परमेश्वर के पास एक्स-रे दृष्टि है और वह मनुष्य के भीतरी अंग देख सकता है, मानो वह बिना किसी टेस्ट के लोगों का ब्लड ग्रुप बता सकता हो। ऐसी है परमेश्वर की बुद्धि, और मनुष्य द्वारा इसका अनुकरण नहीं किया जा सकता। जैसा कि परमेश्वर कहता है, “मैंने इतना काम क्यों किया है, फिर भी लोगों में इसका कोई सबूत नहीं है? क्या मैंने पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं?” परमेश्वर के साथ मनुष्य का सहयोग बहुत कम है, और यह कहा जा सकता है कि मनुष्य के भीतर बहुत-कुछ नकारात्मक है, और लोगों में कोई सकारात्मकता शायद ही कभी देखने को मिलती है। केवल कभी-कभार ही थोड़ी सकारात्मकता दिखाई देती है, लेकिन वह बहुत दूषित होती है। यह दिखाता है कि लोगों के दिलों में परमेश्वर के लिए कितना प्रेम है; ऐसा लगता है मानो उनके दिल में परमेश्वर के लिए करोड़ों में से केवल एक हिस्सा प्रेम होता है, जिसमें से भी 50% दूषित होता है। यही वजह है कि परमेश्वर कहता है कि उसे मनुष्य में कोई सबूत नहीं दिखता। ठीक मनुष्य की विद्रोहशीलता के कारण ही परमेश्वर के वचनों का लहजा बहुत ही निष्ठुर और निर्मम होता है। हालाँकि परमेश्वर मनुष्य के साथ बीते हुए समय के बारे में बात नहीं करता, परंतु लोग हमेशा बीते हुए समय को याद करना चाहते हैं, ताकि वे परमेश्वर के सामने स्वयं को दिखा सकें और वे हमेशा बीते हुए समय की ही बातें करना चाहते हैं—फिर भी परमेश्वर ने कभी भी मनुष्य के बीते हुए कल को उसके आज की तरह नहीं लिया है; बल्कि वह आज के लोगों के साथ आज के संदर्भ में ही व्यवहार करता है। यही परमेश्वर का दृष्टिकोण है और यहाँ परमेश्वर ये वचन स्पष्ट रूप से कहता है, ताकि लोग भविष्य में यह न कह सकें कि परमेश्वर बहुत अनुचित है। क्योंकि परमेश्वर अंतरात्मा के विरुद्ध कोई काम नहीं करता, बल्कि लोगों को सच्चे तथ्य बताता है, ताकि ऐसा न हो कि लोग दृढ़ता से खड़े न हो सकें—क्योंकि मनुष्य, आख़िरकार, कमज़ोर है। ये वचन सुनकर तुम लोगों का इस बारे में क्या विचार है : क्या तुम लोग सुनने और समर्पण करने के लिए और इस बारे में अब और न सोचने के लिए तैयार हो?

उपर्युक्त बात विषय से अलग है; इसके बारे में बात की जाए या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे आशा है कि तुम लोग इसका बुरा नहीं मानोगे, क्योंकि परमेश्वर वचनों का कार्य करने के लिए आया है, और वह संसार के हर विषय के बारे में बात करना पसंद करता है। लेकिन मुझे आशा है कि फिर भी तुम लोग इन्हें पढ़ोगे, और तुम इन वचनों को अनदेखा नहीं करोगे। ठीक है? क्या तुम लोग ऐसा करोगे? अभी-अभी यह कहा गया था कि आज के वचनों में परमेश्वर ने नई जानकारी प्रकट की है : जिस पद्धति से परमेश्वर कार्य करता है, वह बदलने वाली है। इसलिए आओ हम इस प्रासंगिक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए इसे विषय बनाएँ। यह कहा जा सकता है कि आज के सभी वचन भविष्य के मामलों की भविष्यवाणी करते हैं और वे परमेश्वर के कार्य के अगले कदम के लिए उसकी व्यवस्थाओं का वर्णन करते हैं। परमेश्वर ने कलीसिया के लोगों पर अपना काम लगभग पूरा कर लिया है और इसके बाद वह सभी लोगों के सामने क्रोध के साथ प्रकट होगा। जैसा कि परमेश्वर कहता है, “मैं धरती के लोगों से अपने कार्यों को स्वीकार करवाऊँगा और ‘न्यायपीठ’ के सामने अपने कर्म साबित करवाऊँगा, पूरी पृथ्वी के लोगों के बीच अपने कर्म स्वीकार करवाऊँगा और सभी को झुका दूँगा।” क्या तुम लोगों ने इन वचनों में कुछ देखा? इनमें परमेश्वर के कार्य के अगले हिस्से का सारांश है। पहले परमेश्वर उन सभी संरक्षक कुत्तों को, जो राजनीतिक शक्ति का संचालन करते हैं, पूरी तरह से आश्वस्त करेगा और वे इतिहास के मंच से खुद अपनी मर्जी से पीछे हट जाएँगे, ताकि वे फिर कभी प्रतिष्ठा के लिए न लड़ें और फिर कभी कुचक्रों तथा षड्यंत्रों में न उलझें। यह कार्य परमेश्वर द्वारा पृथ्वी पर लाई गई विभिन्न आपदाओं के जरिये करना होगा। लेकिन परमेश्वर प्रकट नहीं होगा। इस समय, बड़े लाल अजगर का देश अभी भी गंदगी की भूमि होगा, और इसलिए परमेश्वर प्रकट नहीं होगा, परंतु केवल ताड़ना के रूप में उभरेगा। ऐसा है परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव, जिससे कोई बच नहीं सकता। इस दौरान, बड़े लाल अजगर के देश में रहने वाले सभी लोग विपत्ति झेलेंगे, जिसमें स्वाभाविक रूप से पृथ्वी पर राज्य (कलीसिया) भी शामिल है। यह वही समय है जब लोगों के ऊपर तथ्य आएँगे। इसलिए इसका अनुभव सभी लोगों द्वारा किया जाता है, और कोई बच नहीं पाएगा। यह परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत किया गया है। ठीक कार्य के इसी चरण के कारण परमेश्वर कहता है, “यही समय है महान योजनाओं को पूरा करने का।” क्योंकि भविष्य में पृथ्वी पर कोई कलीसिया नहीं होगी और आपदाओं के आगमन के कारण लोग केवल उसी के बारे में सोच पाएँगे, जो उनके सामने होगा और बाकी हर चीज़ को वे नज़रअंदाज़ कर देंगे, और आपदाओं के बीच परमेश्वर का आनंद लेना उनके लिए मुश्किल होगा। इसलिए, लोगों से कहा जाता है कि वे इस अद्भुत समय में परमेश्वर से खुलकर और पूरी तरह से प्रेम करें, ताकि वे इस अवसर को गँवा न बैठें। जब यह तथ्य गुज़र जाएगा, तो परमेश्वर ने बड़े लाल अजगर को पूरी तरह हरा दिया होगा, और इस प्रकार परमेश्वर के लोगों का उसके लिए गवाही देने का कार्य समाप्त हो गया होगा; इसके बाद परमेश्वर कार्य के अगले चरण की शुरुआत करेगा, वह बड़े लाल अजगर के देश को तबाह कर देगा, और अंततः पूरे ब्रह्मांड के लोगों को सलीब पर उलटा लटका देगा, जिसके बाद वह पूरी मानवजाति को नष्ट कर देगा—ये परमेश्वर के कार्य के भावी चरण हैं। इसलिए, तुम लोगों को इस शांतिपूर्ण वातावरण में परमेश्वर से ईमानदारी से प्रेम करने का प्रयास करना चाहिए। भविष्य में तुम लोगों के पास परमेश्वर से प्रेम करने के और अधिक अवसर नहीं होंगे, क्योंकि लोगों के पास केवल देह में रहते हुए परमेश्वर से प्रेम करने का अवसर होता है; जब वे किसी दूसरे संसार में रहेंगे, तो कोई परमेश्वर से प्रेम करने की बात नहीं करेगा। क्या यह एक सृजित प्राणी की ज़िम्मेदारी नहीं है? और इसलिए तुम लोगों को अपने जीवन-काल के दौरान परमेश्वर से कैसे प्रेम करना चाहिए? क्या तुमने कभी इस बारे में सोचा है? क्या तुम परमेश्वर से प्रेम करने के लिए मर जाने के बाद का इंतज़ार कर रहे हो? क्या यह खोखली बात नहीं है? तुम आज ही परमेश्वर से प्रेम करने का प्रयास क्यों नहीं करते? क्या व्यस्त रहते हुए परमेश्वर से प्रेम करना परमेश्वर के प्रति सच्चा प्रेम हो सकता है? परमेश्वर के कार्य का यह चरण शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा, ऐसा कहने का कारण यह है कि परमेश्वर के पास शैतान के सामने पहले से ही गवाही है। इसलिए मनुष्य को कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है; मनुष्य से केवल इतना कहा जा रहा है कि वह अपने जीवित रहने के वर्षों में परमेश्वर से प्रेम करने का प्रयत्न करता रहे—यही कुंजी है। चूँकि परमेश्वर की अपेक्षाएँ बहुत ऊँची नहीं हैं, और इसके अलावा, चूँकि उसके दिल में एक झुलसाने वाली बेचैनी है, इसलिए उसने कार्य के इस चरण के पूरी तरह से समाप्त होने से पहले ही कार्य के अगले चरण का सारांश प्रकट कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कितना समय बचा है; यदि परमेश्वर अपने दिल में चिंतित न होता, तो क्या वह ये वचन इतनी जल्दी कहता? समय कम होने के कारण ही परमेश्वर इस तरह से कार्य करता है। आशा है कि तुम लोग अपने पूरे दिल से, अपने पूरे मस्तिष्क से, और अपनी पूरी शक्ति से परमेश्वर से प्रेम कर पाओगे, ठीक वैसे ही, जैसे तुम लोग अपने जीवन को सँजोते हो। क्या यह परम सार्थक जीवन नहीं है? जीवन का अर्थ खोजने के लिए तुम और कहाँ जाओगे? क्या तुम बहुत अंधे नहीं हो रहे हो? क्या तुम परमेश्वर से प्रेम करने के लिए तैयार हो? क्या परमेश्वर मनुष्य के प्रेम के योग्य है? क्या लोग मनुष्य के लाड़-प्यार के योग्य हैं? तो तुम्हें क्या करना चाहिए? परमेश्वर से बिना किसी हिचकिचाहट के निडर होकर प्रेम करो और देखो कि परमेश्वर तुम्हारे साथ क्या करेगा। देखो कि क्या वह तुम्हें मार डालेगा? संक्षेप में, परमेश्वर से प्रेम करने का कार्य परमेश्वर के लिए प्रतिलिपि बनाने और बातें लिखने के कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है। तुम्हें उस चीज़ को पहला स्थान देना चाहिए, जो सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि तुम्हारे जीवन का अधिक मूल्य हो और वह ख़ुशियों से भरा हो, और फिर तुम्हें अपने लिए परमेश्वर के “दंडादेश” की प्रतीक्षा करनी चाहिए। मैं सोचता हूँ कि क्या तुम्हारी योजना में परमेश्वर से प्रेम करना शामिल है। मैं चाहता हूँ कि हर व्यक्ति की योजनाएँ परमेश्वर द्वारा पूरी की जाने की पात्र बनें और वे सब साकार हो जाएँ।

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परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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