वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु
  • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅰ)
    • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅱ)
      • भाग एक आरंभ में मसीह के कथन और गवाहियाँ —कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों में देहधारी परमेश्वर की गवाही
        • भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए देहधारी परमेश्वर के कथन जब उन्होंने पहली बार परमेश्वर की सेवकाई आरंभ की
          • परिशिष्ट: परमेश्वर के वचनों के रहस्यों की व्याख्या
            • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅲ)
              • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅳ)
                • सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नवीनतम कथन

                  एक सामान्य अवस्था में प्रवेश कैसे करें

                  परमेश्वर के वचनों के प्रति लोग जितने अधिक ग्रहणशील होते हैं, वे उतने ही अधिक प्रबुद्ध हो जाते हैं और धार्मिकता के लिए उतनी ही अधिक भूख और प्यास के साथ वे परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। केवल उनको जो परमेश्वर के वचनों को पाते हैं, अधिक गहरे और समृद्ध अनुभव प्राप्त होते हैं; केवल वे ही हैं जिनके जीवन अधिक से अधिक फलते-फूलते हैं। हर कोई जो जीवन का अनुसरण करता है, उसे इसको इस तरह मानना चाहिए जैसे कि यह उनका अपना काम हो, और उनकी यह भावना होनी चाहिए कि वे परमेश्वर के बिना नहीं रह सकते, परमेश्व के बिना एक भी सफलता नहीं है, और परमेश्वर के बिना सब शून्य है। उन्हें पवित्र आत्मा की उपस्थिति के बिना कुछ भी न करने का संकल्प होना चाहिए, और वे कुछ भी करने को अनिच्छुक हों यदि उनके कार्य फल न दें। उन्हें स्वयं को समायोजित करने के लिए कार्य नहीं करना चाहिए। जीवन के अनुभव परमेश्वर के ज्ञान और मार्गदर्शन के माध्यम से आते हैं, और वे आपके व्यक्तिपरक प्रयासों का फल भी हैं। आप सभी के पास अपने जीवन के अनुभव में अपने लिए बहस न करने की आवश्यकता होनी चाहिए।

                  कभी-कभी आपकी परिस्थितियां सामान्य नहीं होतीँ - आप परमेश्वर की उपस्थिति खो देते हैं और आप प्रार्थना करते समय उन्हें महसूस नहीं कर सकते हैं; ऐसे समय में डर लगना सामान्य है। आपको तत्काल खोजने के लिए निकल आना चाहिए वर्ना परमेश्वर आपसे और दूर हो जाएंगे, और पवित्र आत्मा एक या दो दिन, यहाँ तक कि एक या दो महीने के लिए, आपके साथ नहीं रहेंगी, और उससे भी अधिक, आप उनके काम के बिना रह जायेंगे। जब आप इस प्रकार की स्थिति का सामना करते हैं तो आप कुछ हद तक स्तब्ध रह जाते हैं; आप एक बार फिर शैतान द्वारा बंदी बना लिए जाते हैं, और कुछ भी कर सकते हैं - पैसे के लिए प्यार और लालसा, भाइयों और बहनों को धोखा देना, गलत फिल्म और वीडियो देखना, महजोंग खेलना, यहाँ तक ​​कि धूम्रपान और मदिरासेवन - किसी भी अनुशासन के अधीन हुए बिना। आपका दिल परमेश्वर से दूर हो जाता है, आप चुपके से स्वतंत्र बनने की कोशिश करते हैं, और आप अपनी मनमानी से उनके काम पर निर्णय लेते हैं। कुछ मामलों में यह इतना गंभीर हो जाता है कि लोग झेंप या शर्मिंदगी के बिना विपरीत लिंग के साथ पाप करते हैं। ऐसे लोगों को पवित्र आत्मा के द्वारा त्याग दिया गया है और वास्तव में, वे लंबे समय तक पवित्र आत्मा के काम के बिना रह गए हैं।आप उनमें केवल यही देख सकते हैं कि वे अधिकाधिक भ्रष्ट होते जाते हैं, वे अपने बुरे हाथों को आगे, और आगे बढ़ाते हैं, और अंत में वे इस तरह के मार्ग के अस्तित्व से इनकार करते हैं - वे अपने पापों के माध्यम से शैतान के कैदी बन जाते हैं। यदि आपको पता चलता है कि आपके पास पवित्र आत्मा की उपस्थिति तो है लेकिन उनका काम नहीं, तो आप पहले से ही एक बहुत खतरनाक स्थिति में हैं। जब आप पवित्र आत्मा की उपस्थिति महसूस नहीं कर सकते, तो आप मृत्यु की कगार पर हैं। यदि आप अभी भी पश्चाताप करने में असफल रहते हैं, तो आप पूरी तरह से शैतान के हो जाएंगे और उन लोगों में से एक हो जाएंगे जो हटा दिए गए हैं। इसलिए जब आपको यह पता लगे कि आप एक ऐसी अवस्था में हैं जहां पर आपके पास सिर्फ पवित्र आत्मा की उपस्थिति तो है (जैसे पाप नहीं करना, व्यभिचार न करना या परमेश्वर का खुला विरोध न करना), लेकिन आपके पास पवित्र आत्मा के काम की कमी है (जैसे कि, जब आप प्रार्थना करते हैं तब आप द्रवित नहीं होते हैं, जब आप परमेश्वर के शब्दों को खाते-पीते हैं तब आप परमेश्वर से कोई स्पष्ट ज्ञान और रोशनी प्राप्त नहीं करते हैं, आप परमेश्वर के शब्दों को खाने - पीने के बारे में आलसी हैं, हमेशा जीवन में विकास की कमी बनी रहती है, लंबे समय तक कोई महत्वपूर्ण प्रकाश नहीं पाया), इन समय पर आपको विशेष सावधान रहना चाहिए। आप अब अपने आपको समायोजित नहीं कर सकते या जिद नहीं कर सकते। पवित्र आत्मा की उपस्थिति किसी भी समय गायब हो सकती है, इसलिए ये परिस्थितियाँ खतरनाक हैं। यदि आप इस तरह की अवस्था का सामना करते हैं, तो आपको शीघ्रता से संशोधन करने चाहिए। सबसे पहले, आपको पश्चाताप करने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, परमेश्वर की दया के लिए विनय तथा अधिक निष्ठा से प्रार्थना करनी चाहिए ; उससे भी अधिक, परमेश्वर के शब्दों को खाने - पीने के लिए आपको अपने ह्रदय को शांत करना चाहिए, और इस आधार पर आपको अधिक प्रार्थना करनी चाहिए। भजन गाने, प्रार्थना करने, परमेश्वर के शब्दों को खाने-पीने में, या अपना कर्तव्य पूरे करने में अपने प्रयासों को मजबूत करें। जब आप सबसे कमजोर होते हैं, तो आपके दिल को शैतान द्वारा आसानी से कब्जे में ले लिया जाता है; यदि ऐसा होता है, तो आपका दिल परमेश्वर के सामने से दूर हो जाएगा और शैतान को लौटा दिया जाएगा ; इसके बाद आपके पास पवित्र आत्मा की उपस्थिति न होगी, और पवित्र आत्मा के काम को पुनः पाना आपके लिए अत्यधिक कठिन होगा। यह बेहतर है कि पवित्र आत्मा के काम की तलाश तब करें जब आपके पास उनकी उपस्थिति हो, परमेश्वर से आपको और अधिक प्रबुद्ध करने के लिए कहें, और उन्हें आप से दूर न जाने दें। आपको प्रार्थना करनी चाहिए, भजन गाने चाहिए, अपने कार्य करें, और परमेश्वर के शब्दों को खायें-पीयें ताकि शैतान को अपना काम करने का अवसर न मिले। ऐसा करने से, आप पवित्र आत्मा का काम हासिल करेंगे। यदि आप इस तरह से ठीक नहीं करते हैं, और बस रुके रहते हैं, तो जब आप पवित्र आत्मा की उपस्थिति खो देते हैं, यह ठीक हो जाना मुश्किल हो जाएगा, जब तक कि पवित्र आत्मा विशेष रूप से आपको द्रवित, प्रकाशित और प्रबुद्ध न करे ; फिर भी, आपकी अवस्था एक से दो दिन या आधे साल के अंतराल के भीतर पुनर्प्राप्ति के योग्य नहीं होगी। यह सब इसलिए है क्योंकि लोग सुस्त हैं और जीवन को ठीक से अनुभव करने में सक्षम नहीं हैं; इसलिए, उन्हें पवित्र आत्मा द्वारा त्याग दिया जाता है। यहाँ तक ​​कि अगर आप ठीक हो भी गए हैं, तो आप परमेश्वर के वर्तमान कार्य पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होंगे क्योंकि आप अपने जीवन के अनुभव में बहुत पीछे हैं, मानो कि यह अचानक गिर गया हो। क्या यह जीवन के लिए एक घातक काम नहीं है? लेकिन मैं ऐसे लोगों को बताता हूँ : पश्चाताप करने में इतनी देर नहीं हुई है कि आप इसे अब न कर सकें, लेकिन एक शर्त है कि आपको कड़ी मेहनत करनी होगी और आप आलसी नहीं हो सकते। यदि अन्य लोग रोजाना पांच बार प्रार्थना करते हैं, तो आपको दस बार प्रार्थना करनी चाहिए; अगर दूसरे लोग रोजाना दो घंटे के लिए परमेश्वर के शब्द खाते-पीते हैं, तो आपको चार से छह घंटे खर्च करने चाहिए; अगर दूसरे लोग दो घंटे के लिए भजन सुनते हैं, तो आपको इसमें कम से कम आधा दिन लगाना चाहिए। प्रायः परमेश्वर के सामने अपने आप को शांत करें और परमेश्वर के प्रेम के बारे में सोचें; जब तक आप द्रवित नहीं हो जाते, तब तक आप का दिल उनकी तरफ घूम न जाए, और जब तक आप उनसे दूर जाने की हिम्मत ही नहीं कर पाते, फल प्राप्त नहीं होगा। केवल इन अभ्यासों के माध्यम से आप अतीत की तरह एक सामान्य अवस्था को पुनर्प्राप्त कर सकते हैं।

                  कुछ लोग उत्साहपूर्वक खोज तो करते हैं, लेकिन सही मार्ग में प्रवेश नहीं कर सकते। इसका कारण यह है कि वे बहुत लापरवाह हैं और आध्यात्मिक मामलों पर बिलकुल ध्यान ही नहीं देते। उन्हें नहीं पता कि परमेश्वर के वचनों का अनुभव कैसे करना है, वे नहीं जानते कि पवित्र आत्मा की उपस्थिति या पवित्र आत्मा का काम क्या है। ये लोग उत्साही लेकिन भ्रमित हैं; वे जीवन का अनुसरण नहीं कर रहे हैं। क्योंकि वे परमात्मा को किंचित भी नहीं जानते हैं, न ही पवित्र आत्मा के कार्य की गतिशीलता को जानते हैं, और वे स्वयं की आध्यात्मिक स्थिति से भी परिचित नहीं हैं। क्या यह भ्रमित विश्वास का एक प्रकार नहीं है? ऐसे लोगों को कुछ भी नहीं मिलेगा, चाहे वे बिलकुल अंत तक तलाश करें। परमेश्वर में विश्वास और अपने जीवन में विकास की जड़ यह समझने में है कि परमेश्वर अनुभवों के माध्यम से कौन से कार्य करते हैं, परमेश्वर कितने प्यारे हैं, और आप उनकी इच्छा को कैसे समझें ताकि आप परमेश्वर की सभी व्यवस्थाओं के प्रति समर्पित हों सकें, उनके वचन आप में कार्यान्वित होकर आपका जीवन बन जाएँ, और परमेश्वर संतुष्ट हों। यदि आपके पास केवल एक भ्रमित प्रकार का विश्वास मात्र है, यदि आप आध्यात्मिक मामलों या जीवन के स्वभाव में परिवर्तन से संबंधित बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, और आप सच्चाई की ओर प्रयास नहीं करते हैं, तो क्या आप उनकी इच्छा को समझ पाएँगे? यदि आप परमेश्वर की आवश्यकताओं को नहीं समझते हैं, तो आप अनुभव प्राप्त नहीं कर सकेंगे, और आपको अभ्यास के लिए पथ नहीं मिलेगा। परमेश्वर के वचनों का अनुभव करने में केंद्र-बिंदु है इस बात पर ज़ोर देना कि परमेश्वर के वचन आपके भीतर क्या प्रभाव लाते हैं, और उसके द्वारा परमेश्वर को जानना। यदि आप केवल परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं लेकिन उन्हें कैसे अनुभव करना यह नहीं जानते, तो क्या इससे यह नहीं मालूम पड़ता कि आपके पास आध्यात्मिक समझ नहीं है? चूंकि अधिकांश लोग इस समय परमेश्वर के शब्दों का अनुभव नहीं कर सकते हैं, वे उनके कार्य को नहीं जानते; क्या यह अभ्यास में कमी नहीं है? यदि वह बात बनी रहती है, तो समृद्ध अनुभव और जीवन में विकास कब हासिल किये जा सकेंगे? क्या यह खोखली बात नहीं होगी? आपमें से कई लोग मतों पर ध्यान देते हैं; आपको आध्यात्मिक चीजों की कोई समझ नहीं है, लेकिन फिर भी आप लोग चाहते हैं कि परमेश्वर आपको कुछ महान कार्य के लिए इस्तेमाल करें और उसके द्वारा आशीर्वाद दें। यह यथार्थवादी नहीं है! इसलिए, आप सब को इस कमी को पूरा करना चाहिए ताकि आप लोग अपने आध्यात्मिक जीवन में सही मार्ग में प्रवेश कर सकें, सच्चा अनुभव प्राप्त कर सकें, और वास्तव में परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश कर सकें।