3. मैं देख रहा हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ने सुसमाचार को फैलाने और अंतिम दिनों के परमेश्वर के कार्य की गवाही देने के अलावा, लोगों से यह कहने के अलावा कि वे ईमानदार रहें और मानव जीवन के सही मार्ग पर चलें, और कुछ नहीं किया है। लेकिन सीसीपी इस बात की सूचना प्रसारित कर रही है कि कलीसिया द्वारा सुसमाचार फैलाने का अंतिम उद्देश्य सीसीपी शासन को उखाड़ फेंकना है। मुझे कैसे पता चले कि CCP का कहना सही है या गलत?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :
परमेश्वर मनुष्य की राजनीति में भाग नहीं लेता, फिर भी वह हर देश और राष्ट्र का भाग्य नियंत्रित करता है, वह इस संसार को और संपूर्ण ब्रह्मांड को नियंत्रित करता है। मानवजाति का भाग्य और परमेश्वर की योजना घनिष्ठता से जुड़े हुए हैं, और कोई भी व्यक्ति, देश या राष्ट्र परमेश्वर की संप्रभुता से बच नहीं सकता है। यदि मनुष्य अपना भाग्य जानना चाहता है तो उसे परमेश्वर के सामने आना होगा। परमेश्वर उन लोगों को समृद्ध करेगा जो उसका अनुसरण और उसकी आराधना करते हैं, और वह उनका पतन और विनाश करेगा, जो उसका प्रतिरोध करते हैं और उसे अस्वीकार करते हैं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 2 : परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य पर संप्रभु है
तो फिर, व्यापक रूप से सुसमाचार प्रचार करने का क्या उद्देश्य है? (जितने लोगों को बचा सकें उतने लोगों को बचाना।) जितने लोगों को बचा सकें उतने लोगों को बचाना परमेश्वर के उद्धार का सिद्धांत तो है, लेकिन इस सवाल का जवाब नहीं है। इस कार्य की शुरुआत से मैंने बार-बार इस बारे में बात की है कि कैसे इस बार परमेश्वर का आगमन एक युग का उद्घाटन करने, एक नया युग लाने और पुराने युग को समाप्त करने हेतु कार्य करने के लिए हुआ है—राज्य का युग लाने और अनुग्रह का युग समाप्त करने के लिए हुआ है। अंतिम दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने वाले सभी लोगों ने इस तथ्य को देखा है। परमेश्वर नया कार्य करता रहा है, मानवता के साथ न्याय करने के लिए सत्य व्यक्त कर रहा है और मानवता को शुद्ध कर रहा है और उसे बचा रहा है। राज्य का सुसमाचार कई देशों में फैलना शुरू हो गया है। यह मानवता पहले से ही व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग से निकल चुकी है। अब वे बाइबल नहीं पढ़ते हैं, अब वे क्रूस के नीचे नहीं जीते हैं और अब वे उद्धारकर्ता यीशु का नाम नहीं पुकारते हैं। इसके बजाय, वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम पर प्रार्थना करते हैं और इसके साथ ही, परमेश्वर के मौजूदा वचनों को अपने जीवन में जीवित रहने के सिद्धांतों, तरीकों और लक्ष्यों के रूप में स्वीकार करते हैं। इस अभिप्राय से, क्या ये लोग पहले से ही एक नये युग में प्रवेश नहीं कर चुके हैं? (बिल्कुल।) वे एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं। तो, वह कौन-सा युग है जिसमें अंतिम दिनों में सुसमाचार और परमेश्वर के नए वचनों को स्वीकार नहीं करने वाले इससे भी ज्यादा लोग अब भी जी रहे हैं? वे अब भी अनुग्रह के युग में जी रहे हैं। अब, तुम लोगों की क्या जिम्मेदारी बनती है? यह कि तुम उन्हें अनुग्रह के युग से निकालकर नए युग में ले जाओ। क्या तुम लोग सिर्फ परमेश्वर से प्रार्थना करके और उसका नाम पुकारकर परमेश्वर का आदेश पूरा कर सकते हो? क्या सिर्फ परमेश्वर के कुछ वचनों का प्रचार करना ही काफी है? यकीनन नहीं है। इसके लिए तुम सभी को सुसमाचार प्रचार करने के इस आदेश को स्वीकारने, परमेश्वर के वचनों को व्यापक रूप से प्रसारित करने, परमेश्वर के वचनों का प्रसार विभिन्न तरीकों से करने और राज्य के सुसमाचार का प्रसार करने और इसे फैलाने का बोझ उठाने की जरूरत है। फैलाने का क्या मतलब है? इसका मतलब है परमेश्वर के वचनों को उन लोगों तक पहुँचाना जिन्होंने अंतिम दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार नहीं किया है, ज्यादा लोगों को यह बताना कि परमेश्वर नया कार्य करता रहा है और फिर उन्हें परमेश्वर के वचनों के बारे में गवाही देना, परमेश्वर के कार्य के बारे में गवाही देने के लिए अपने अनुभवों का उपयोग करना और उन्हें भी नए युग में ले जाना—इस तरह वे भी बस तुम लोगों की तरह नए युग में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर का इरादा स्पष्ट है। नए युग में प्रवेश करना सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं है जिन्होंने उसके वचनों को सुना है, उन्हें स्वीकार किया है और उसका अनुसरण किया है, बल्कि वह पूरी मानवता को इस नए युग में जाने का मार्ग दिखाएगा। यह परमेश्वर का इरादा है और एक ऐसा सत्य है जिसे अब परमेश्वर का अनुसरण करने वाले हर व्यक्ति को समझना चाहिए। परमेश्वर लोगों के एक समूह, एक छोटे गुट या एक छोटे जातीय समूह को नए युग में जाने का मार्ग नहीं दिखा रहा है; बल्कि, उसका इरादा संपूर्ण मानवता को इस नए युग में ले जाने का है। इस लक्ष्य को कैसे हासिल किया जा सकता है? (व्यापक रूप से सुसमाचार प्रचार कर।) सचमुच, इस लक्ष्य को व्यापक रूप से सुसमाचार प्रचार कर, व्यापक रूप से सुसमाचार प्रचार के तरीकों और मार्गों का उपयोग कर हासिल करना होगा।
—वचन, खंड 4, मसीह-विरोधियों को उजागर करना, मद एक : वे लोगों के दिल जीतने का प्रयास करते हैं
सभी लोगों को पृथ्वी पर मेरे कार्य के उद्देश्यों को समझने की आवश्यकता है, अर्थात् मैं अंततः क्या प्राप्त करना कहता हूँ, और इस कार्य को पूरा करने से पहले मुझे इसमें कौन-सा स्तर प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि आज तक मेरे साथ चलते रहने के बाद भी लोग यह नहीं समझते कि मेरा कार्य क्या है, तो क्या वे मेरे साथ व्यर्थ में नहीं चले? यदि लोग मेरा अनुसरण करते हैं, तो उन्हें मेरे इरादे जानने चाहिए। मैं पृथ्वी पर हज़ारों सालों से कार्य कर रहा हूँ और आज भी मैं अपना कार्य इसी तरह से जारी रखे हुए हूँ। यद्यपि मेरे कार्य में कई परियोजनाएँ शामिल हैं, किंतु इसका उद्देश्य अपरिवर्तित है; यद्यपि, उदाहरण के लिए, मैं मनुष्य के प्रति न्याय और ताड़ना से भरा हुआ हूँ, फिर भी मैं जो करता हूँ, वह उसे बचाने के वास्ते, और अपने सुसमाचार को बेहतर ढंग से फैलाने और मनुष्य को पूर्ण बना दिए जाने पर अन्यजाति देशों के बीच अपने कार्य को आगे बढ़ाने के वास्ते है। इसलिए आज, एक ऐसे वक्त, जब कई लोग लंबे समय से निराशा में गहरे डूब चुके हैं, मैं अभी भी अपना कार्य जारी रखे हुए हूँ, मैं वह कार्य जारी रखे हुए हूँ जो मनुष्य को न्याय और ताड़ना देने के लिए मुझे करना चाहिए। इस तथ्य के बावजूद कि जो कुछ मैं कहता हूँ, मनुष्य उससे उकता गया है और मेरे कार्य से जुड़ने की उसकी कोई इच्छा नहीं है, मैं फिर भी अपना कर्तव्य कर रहा हूँ, क्योंकि मेरे कार्य का उद्देश्य अपरिवर्तित है और मेरी मूल योजना भंग नहीं होगी। मेरे न्याय का उद्देश्य मनुष्य को मेरे प्रति बेहतर ढंग से समर्पण करने में सक्षम बनाना है, और मेरी ताड़ना का उद्देश्य मनुष्य को अधिक प्रभावी ढंग से बदलाव हासिल करने में सक्षम बनाना है। यद्यपि मैं जो कुछ भी करता हूँ, वह मेरे प्रबंधन के वास्ते है, फिर भी मैंने कभी ऐसा कोई कार्य नहीं किया है, जो मनुष्य के लाभ के लिए न हो, क्योंकि मैं इस्राएल से बाहर के सभी देशों को इस्राएलियों के समान ही आज्ञाकारी बनाना चाहता हूँ, उन्हें वास्तविक मनुष्य बनाना चाहता हूँ, ताकि इस्राएल के बाहर के देशों में मेरे लिए पैर रखने की जगह हो सके। यही मेरा प्रबंधन है; यही मेरा अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच कार्य है। अभी भी बहुत-से लोग मेरे प्रबंधन को नहीं समझते, क्योंकि उन्हें ऐसी चीज़ों की परवाह नहीं है और इसके बजाय वे अपने स्वयं के भविष्य और मंजिल की ही परवाह करते हैं। मैं चाहे कुछ भी कहता रहूँ, लोग उस कार्य के प्रति उदासीन रहते हैं जो मैं करता हूँ, इसके बजाय वे पूरे दिल से अपनी भविष्य की मंजिलों पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। अगर चीजें इसी तरह से चलती रहीं, तो मेरा कार्य कैसे फैल सकता है? मेरा सुसमाचार का पूरे संसार में कैसे प्रचार किया जा सकता है? तुम लोगों को जानना चाहिए कि जब मेरा कार्य फैलेगा, तो मैं तुम लोगों को तितर-बितर कर दूँगा और उसी तरह मारूँगा, जैसे यहोवा ने इस्राएल के प्रत्येक कबीले को मारा था। यह सब इसलिए किया जाएगा, ताकि मेरा सुसमाचार सारी पृथ्वी पर फैल सके और अन्य-जाति राष्ट्रों तक मेरा कार्य फैल सके, इस तरह मेरे नाम का सम्मान वयस्कों और बच्चों में समान रूप से किया जाना संभव हो सके और मेरे पवित्र नाम का सभी जातियों और राष्ट्रों के लोगों के मुँह से गुणगान हो। इस अंतिम युग में मेरा नाम अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच बड़ाई पा सके, मेरे कर्म अन्य-जाति राष्ट्रों के लोगों द्वारा देखे जा सकें, उन्हें मेरे कर्मों के आधार पर मुझे सर्वशक्तिमान कहने दिया जाए और मेरे वचन शीघ्र ही साकार हो सकें। मैं सभी लोगों को ज्ञात करवाऊँगा कि मैं केवल इस्राएलियों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि समस्त अन्य-जाति राष्ट्रों के लोगों का भी परमेश्वर हूँ, यहाँ तक कि उन राष्ट्रों का भी परमेश्वर हूँ जिन्हें मैंने शाप दिया है। मैं सभी लोगों को यह दिखवाऊँगा कि मैं सभी सृजित प्राणियों का परमेश्वर हूँ। यह मेरा सबसे बड़ा कार्य है, अंत के दिनों के लिए मेरी कार्य-योजना का उद्देश्य है और यह एकमात्र कार्य है, जिसे अंत के दिनों में पूरा करने की इच्छा है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्य को बचाने का कार्य भी है
संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण :
परमेश्वर में अपनी आस्था में, हम परमेश्वर के वचनों, सत्य और परमेश्वर की अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करते हैं। हम न तो राजनीति में शामिल होते हैं और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेते हैं। परमेश्वर उन लोगों से जो उस पर विश्वास करते हैं, कम से कम यह अपेक्षा करता है कि सबसे पहले, हम सत्य का अनुसरण करें और उसका अभ्यास करें, हम बाहरी दुनिया की दुष्ट प्रवृत्तियों का अनुसरण न करें और भ्रष्ट मानवजाति द्वारा किए गए बुरे कार्य न करें; हमारे कर्म दूसरों के हित में होने चाहिए, हमें प्रकाश और नमक बनना चाहिए। इसके अलावा, सृजित प्राणियों के रूप में हमें परमेश्वर की इच्छा का पालन करना चाहिए, खुद को परमेश्वर के लिए खपाना चाहिए और अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। चूँकि परमेश्वर ने हमें उद्धार से अनुग्रहित किया है, तो यह हमारी जिम्मेदारी और दायित्व है कि हम सुसमाचार का प्रसार करें और परमेश्वर की गवाही दें, ताकि जो लोग परमेश्वर में विश्वास नहीं करते, अभी तक परमेश्वर को नहीं जानते और शैतान के अधीन हैं, वे परमेश्वर के सामने आकर सच्चे मार्ग की खोज कर सकें, सत्य स्वीकार कर सकें, सत्य प्राप्त कर सकें, अपनी भ्रष्टता त्याग सकें और परमेश्वर द्वारा बचाए जा सकें। यह परमेश्वर का आदेश है, और यह उस सुसमाचार को फैलाने के कार्य के असली मायने हैं जो हम करते हैं। हमारे सुसमाचार के प्रचार और परमेश्वर की गवाही देने का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है—इसमें कोई राजनीतिक इरादे या मकसद नहीं हैं, और न ही यह किसी सरकार-विशेष या किसी राजनीतिक दल-विशेष को उखाड़ फेंकने के लिए किया जाता है। यह पूरी तरह से भ्रष्ट मानवजाति को परमेश्वर के सामने लाने के लिए किया जाता है, ताकि लोग परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर सकें और उन्हें शुद्ध किया और बचाया जा सके, ताकि वे अंततः अंधेरे और बुरे प्रभावों से बच सकें और प्रकाश में रह सकें, परमेश्वर द्वारा उनकी देखभाल हो सके, वे संरक्षित हो सकें और परमेश्वर का आशीष पा सकें। जब हम लोगों को परमेश्वर के सामने लाते हैं जिससे कि वे परमेश्वर के कार्य और उद्धार को स्वीकार कर सकें, तो हम कोई राजनीतिक अनुरोध नहीं कर रहे होते हैं; परमेश्वर के वचन अपने चुने हुए लोगों से यह नहीं कहते कि उठो और सीसीपी को उखाड़ फेंको। परमेश्वर केवल सत्य व्यक्त करता है, उसके वचन लोगों के भ्रष्ट सार को उजागर करते हैं, लोगों को बचाते हैं, उन्हें बदलते हैं, पूर्ण बनाते हैं, उनके जरिए लोग परमेश्वर को जानने लगते हैं और उसकी आज्ञा मानने लगते हैं। हम जो कुछ भी करते हैं वह परमेश्वर के वचनों और अपेक्षाओं पर आधारित होता है। हमारी कलीसिया ने न तो कभी किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा लिया है और न ही उसका कोई राजनीतिक नारा है। कलीसियाई जीवन जीने का अर्थ केवल सत्य पर संगति करना और स्वयं को जानना है, इनका उद्देश्य है सत्य को प्राप्त करना, परमेश्वर का आज्ञापालन करना, एक सच्चे इंसान की तरह जीना और परमेश्वर द्वारा बचाना जाना। यही नहीं, हमें राजनीति में जरा-भी दिलचस्पी नहीं है। राजनीति कोई सकारात्मक चीज नहीं है, सत्य तो यह बिल्कुल नहीं है। राजनीति लोगों को सत्य या परमेश्वर का आशीष नहीं दे सकती, राजनीति लोगों को बचाने का कार्य तो बिल्कुल नहीं कर सकती; जाहिर है कि नौकरशाही लोगों को ज्यादा दुष्ट और ज्यादा भ्रष्ट बनाती है। और इसलिए, परमेश्वर में अपनी आस्था में हम लोग कभी भी राजनीति में शामिल नहीं हुए हैं, क्योंकि हम साफ तौर पर जानते हैं कि केवल परमेश्वर में आस्था ही लोगों को बेहतरी के लिए बदल सकती है और उन्हें अधिक मानवता, विवेक और समझ प्रदान कर सकती है। यदि लोग वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करके सत्य का अनुसरण करें, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे अपनी भ्रष्टता को दूर करके एक सच्चे इंसान की तरह जीने योग्य बन जाएँगे—और यही परमेश्वर में इंसान आस्था में उद्धार प्राप्त करने का मानक है।
परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है और केवल परमेश्वर ही भ्रष्ट मानवजाति को बचा सकता है। हम सुसमाचार फैलाते हैं और परमेश्वर की गवाही देते हैं ताकि सारी मानवजाति सृष्टिकर्ता को जान सके, सृष्टिकर्ता के सामने आ सके और एक सच्चे परमेश्वर की आराधना कर सके; यह मनुष्य के आशीष का मार्ग है, इसके अलावा, मनुष्य के उद्धार का मार्ग है। आज संसार और अधिक कलुषित और बुरा होता जा रहा है, मानवजाति और अधिक भ्रष्ट होती जा रही है। दुनिया और नैतिकता का पतन हो रहा है। यदि मानवजाति को इन मुद्दों का समाधान करना है, तो लोगों को परमेश्वर में विश्वास करना चाहिए, उन्हें परमेश्वर के वचनों, परमेश्वर के कार्य, परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करना चाहिए, और परमेश्वर के वचनों से सत्य प्राप्त करना चाहिए। तभी दुनिया के अंधेरे, बुराई और मानवजाति की भ्रष्टता की समस्याओं को जड़ से मिटाया जा सकता है। इसलिए समाज की स्थिरता और मानवजाति की खुशी के लिए सुसमाचार का प्रसार आवश्यक है। मानवजाति के लिए सच्ची खुशी प्राप्त करने और समाज के लिए स्थायी शांति प्राप्त करने का एक ही तरीका है, और वह है परमेश्वर के कार्य और उद्धार को स्वीकार करना। इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं है। तुम्हें किसी देश या राजनीतिक दल से मानवजाति को बचाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, किसी राजनेता, लेखक या विचारक से तो इसकी बिल्कुल ही कोई आशा नहीं रखनी चाहिए; यह भ्रष्ट मानवजाति की क्षमताओं से परे है। एकमात्र सृष्टिकर्ता, एक सच्चा परमेश्वर ही मानवता को बचाने में पूरी तरह सक्षम है। इसलिए हमारा सुसमाचार का प्रचार और परमेश्वर की गवाही देना मानवजाति के लिए अत्यंत लाभकारी है, मानवजाति और समाज को इसी की आवश्यकता है और यह पूरी तरह से न्यायसंगत है। इससे अधिक सार्थक और कुछ नहीं है। हमें विश्वास है कि जो लोग विवेकपूर्ण, तर्कशील और न्याय की भावना रखते हैं, वे हमारे सुसमाचार के प्रचार का समर्थन करेंगे और हमारे दृष्टिकोण से सहमत होंगे।
चूँकि हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को स्वीकार करते हैं, इसलिए हम मानवजाति को बचाने की परमेश्वर की इच्छा को समझते हैं, हमें यकीन है कि मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है और इसी वजह से हमने सुसमाचार का प्रसार करना शुरू किया और अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य की गवाही दी। सुसमाचार फैलाने में, हम लोगों के साथ उद्धार का सच्चा मार्ग साझा कर रहे हैं, ताकि वे सच्चे मार्ग को स्वीकार कर सकें और अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा बचाए जा सकें। परमेश्वर के विश्वासी के नाते यह हमारा कर्तव्य है और हमारा सबसे सच्चा प्रेम है। हम अंत के दिनों के जिस राज्य-सुसमाचार का प्रचार करते हैं, वह मनुष्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। एक सत्तारूढ़ दल के रूप में, सीसीपी न केवल कुछ भी सार्थक कर पाने या लोगों की असली समस्याओं को सुलझाने और उन्हें शांति व खुशी दे पाने में असमर्थ है, बल्कि वह अपने दायित्वों को निभाने में भी लापरवाह है, वह हम लोगों सता रही है, गिरफ्तार कर रही है, अपमानित कर रही है और पूरी तरह से विवेकशून्य हो चुकी है। क्या वह स्वर्ग के विरुद्ध नहीं है, विकृत और घृणित नहीं है? सीसीपी स्वर्ग की इच्छा और लोगों के दिल की आवाज को सुनने के बजाय, बुराई की पूजा और धार्मिकता का विरोध क्यों करती है? क्या सीसीपी मानवीयता से विहीन नहीं है? सुसमाचार के प्रचार और अपने कर्तव्य का पालन करने के क्रम में, परमेश्वर के चुने हुए लोगों में से अनेक ने सुविधाओं और देह-सुख का त्याग किया है। वे लोग तेज आँधी-तूफान में, हड्डियाँ कँपा देने वाली ठंड में और भीषण गर्मी में भी, परमेश्वर के राज्य-सुसमाचार को फैलाना जारी रखते हैं; लोग उनका घोर अपमान करते हैं, उन्हें नकारते करते हैं, मारते-पीटते, धिक्कारते हैं, सीसीपी उन्हें गिरफ्तार करके सताती है, लेकिन इस सबके बावजूद, वे लोग पूरी तत्परता से सुसमाचार फैलाने और अपना कर्तव्य निभाने में लगे रहते हैं। उनसे जो कुछ भी करने को कहा जाता है, वे करते हैं, लोग उसे स्वीकार करें या नहीं, लेकिन वे उनके साथ पूरी जिम्मेदारी और करुणा का व्यवहार करते हैं। यदि हम सच्चे मार्ग के बारे में जानकर भी उसका प्रचार न करें या उसकी गवाही न दें, तो हमारे अंतःकरण को शांति नहीं मिलेगी; न ही यह लोगों के साथ उचित होगा। इसलिए हम सुसमाचार का प्रचार करते हैं और परमेश्वर की गवाही देते हैं, लोगों को सच्चे मार्ग और अंत के दिनों के उद्धार के मार्ग से अवगत कराते हैं। हमारे सुसमाचार के प्रचार का राजनीति से बिल्कुल कोई लेना-देना नहीं है, यह सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालना तो बिल्कुल भी नहीं है; बल्कि यह तो नेक कर्मों की तैयारी है, ताकि इंसान परमेश्वर के सामने आकर उसके शुद्धिकरण और उद्धार को स्वीकार कर सके, बड़ी आपदाओं से बच सके और इंसान के लिए परमेश्वर द्वारा बनाए गए सुंदर गंतव्य में प्रवेश कर सके—यह एक तथ्य है।
—ऊपर से संगति से उद्धृत