II. परमेश्वर का प्रकटन और कार्य

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 46

स्तुति सिय्योन तक आ गई है और परमेश्वर का निवास स्थान-प्रकट हो गया है। सभी लोगों द्वारा प्रशंसित, महिमामंडित पवित्र नाम फैल रहा है। आह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! ब्रह्मांड का मुखिया, अंत के दिनों का मसीह—वह जगमगाता सूर्य है, जो पूरे ब्रह्मांड में प्रताप और वैभव में ऊँचे पर्वत सिय्योन पर उदित हुआ है ...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम हर्षोल्लास में तुझे पुकारते हैं; हम नाचते और गाते हैं। तू वास्तव में हमारा उद्धारकर्ता, ब्रह्मांड का महान सम्राट है! तूने विजेताओं का एक समूह बनाया है और परमेश्वर की प्रबंधन-योजना पूरी की है। सभी लोग इस पर्वत की ओर बढ़ेंगे। सभी लोग सिंहासन के सामने घुटने टेकेंगे! तू एकमेव सच्चा परमेश्वर है और तू ही महिमा और सम्मान के योग्य है। समस्त महिमा, स्तुति और अधिकार सिंहासन का हो! जीवन का झरना सिंहासन से प्रवाहित होता है, जो बड़ी संख्या में परमेश्वर के लोगों को सींचता और पोषित करता है। जीवन प्रतिदिन बदलता है; नई रोशनी और नए प्रकटन हमारा अनुसरण करते हैं, जो लगातार परमेश्वर के बारे में अंतर्दृष्टियाँ देते हैं। अनुभवों के बीच हम परमेश्वर के बारे में पूर्ण निश्चितता पर पहुँचते हैं। उसके वचन लगातार प्रकट किए जाते हैं, उनके भीतर प्रकट किए जाते हैं, जो सही हैं। हम सचमुच बहुत धन्य हैं! परमेश्वर से रोज़ाना आमने-सामने मिल रहे हैं, सभी बातों में परमेश्वर के साथ संवाद कर रहे हैं, और हर बात में परमेश्वर को संप्रभुता दे रहे हैं। हम सावधानीपूर्वक परमेश्वर के वचन पर विचार करते हैं, हमारे हृदय परमेश्वर में शांति पाते हैं, और इस प्रकार हम परमेश्वर के सामने आते हैं, जहाँ हमें उसका प्रकाश मिलता है। रोज़ाना अपने जीवन, कार्यों, वचनों, विचारों और धारणाओं में हम परमेश्वर के वचन के भीतर जीते हैं, और हम हमेशा पहचान करने में सक्षम होते हैं। परमेश्वर का वचन सुई में धागा पिरोता है; अप्रत्याशित ढंग से हमारे भीतर छिपी हुई चीज़ें एक-एक करके प्रकाश में आती हैं। परमेश्वर के साथ संगति देर सहन नहीं करती; हमारे विचार और धारणाएँ परमेश्वर द्वारा उघाड़कर रख दी जाती हैं। हर पल हम मसीह के आसन के सामने जी रहे हैं, जहाँ हम न्याय से गुज़रते हैं। हमारे शरीर के भीतर हर जगह पर शैतान का कब्ज़ा है। आज, परमेश्वर की संप्रभुता पुन: प्राप्त करने के लिए, उसके मंदिर को स्वच्छ करना होगा। पूरी तरह से परमेश्वर के अधीन होने के लिए हमें जीवन-मरण के संघर्ष में संलग्न होना होगा। केवल हमारी पुरानी अस्मिता को सलीब पर चढ़ाए जाने के बाद ही मसीह का पुनरुत्थित जीवन संप्रभुता में शासन कर सकता है।

अब पवित्र आत्मा हमारे उद्धार की लड़ाई लड़ने के लिए हमारे हर कोने में धावा बोलता है! जब तक हम अपने आपको नकारने और परमेश्वर के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, तब तक परमेश्वर निश्चित रूप से हमें हर समय भीतर से रोशन और शुद्ध करेगा, और उसे नए सिरे से प्राप्त करेगा, जिस पर शैतान ने कब्ज़ा कर रखा है, ताकि हम परमेश्वर द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण किए जा सकें। समय बरबाद मत करो—और हर क्षण परमेश्वर के वचन के भीतर रहो। संतों के साथ बढ़ो, राज्य में लाए जाओ, और परमेश्वर के साथ महिमा में प्रवेश करो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 1' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 47

फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है, और यह पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है। परमेश्वर के लिए प्रेम अनेक संतों में जगता है जो बिना डगमगाए अपने आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। वे अपने इस विश्वास पर दृढ़ रहते हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीज़ों को नियंत्रित करता है : इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और यह पर्वतों की तरह अचल है! यह कभी नहीं बदल सकता!

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आज तुमने हमारी आध्यात्मिक आँखें खोल दी हैं, जिससे अंधे देख रहे हैं, लंगड़े चल रहे हैं, और कुष्ठरोगी चंगे हो रहे हैं। यह तुम ही हो जिसने स्वर्ग की ओर की खिड़की खोल दी है और इसके द्वारा हमें आध्यात्मिक दुनिया के रहस्यों को समझने दिया है। तुम्हारे पवित्र शब्द हमारे भीतर जज़्ब हो गए हैं, और शैतान द्वारा दूषित हमारी मानवता से हम बचा लिए गए हैं। यह तुम्हारा अपरिमेय महान काम है और तुम्हारी महान अपरिमेय दया है। हम तुम्हारे गवाह हैं!

तुम लंबे समय से विनम्रता और ख़ामोशी में छिपे रहे हो। तुम मृत्यु से पुनरुत्थित हुए हो और सूली पर चढ़ने की पीड़ा सहने का, मानव जीवन के सुखों और दुखों का, और साथ-साथ उत्पीड़न और विपत्ति का अनुभव किया है; तुमने मानव संसार के दर्द का अनुभव और स्वाद लिया है, और तुम्हें युग द्वारा त्यागा गया है। देहधारी परमेश्वर स्वयं परमेश्वर है। तुमने हमें परमेश्वर की इच्छा की खातिर मैले के ढेर से बचाया है, हमें अपने दाहिने हाथ से उठाया है और मुक्त रूप से अपना अनुग्रह हमें दिया है। कोई प्रयास बाकी न रखते हुए, तुमने अपना जीवन हममें गढ़ा है; अपने रक्त, पसीने, और आँसूओं से जो कीमत तुमने चुकाई है, वह संतों में ठोस रूप में उपस्थित है। हम तुम्हारे श्रमसाध्य प्रयासों के परिणाम[क] हैं; हम वह कीमत हैं जो तुमने चुकाई है।

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारी प्रेमपूर्ण दया और कृपा, तुम्हारी धार्मिकता और महिमा, तुम्हारी पवित्रता और नम्रता के कारण ही सभी लोग तुम्हारे सामने झुकेंगे और अनंत काल तक तुम्हारी आराधना करेंगे।

आज तुमने सभी कलीसियों को पूरा किया है—फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया—और इस प्रकार अपनी 6,000 साल की प्रबंधन योजना को पूरा किया है। सभी संत अब नम्रता से तुम्हारे सामने समर्पित हो सकते हैं; वे एक दूसरे से आत्मा में जुड़े हुए हैं और एक दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक आगे बढ़ते हैं। वे झरने के स्रोत से जुड़े हैं। जीवन का जीवित पानी निरंतर बहता है और वह कलीसिया की सभी गंदगी और कीचड़ को बहा ले जाता है, और एक बार फिर तुम्हारे मंदिर को शुद्ध करता है। हमने व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर को जाना है, उसके वचनों में चले हैं, अपने कार्यों और कर्तव्यों को पहचाना है, और कलीसिया के लिए खुद को खपाने के लिए जो कुछ हम कर सकते थे वो हमने किया है। तुम्हारे सामने हर एक पल शांत रहते हुए, हमें पवित्र आत्मा के काम पर ध्यान देना चाहिए ताकि तुम्हारी इच्छा हमारे भीतर अवरुद्ध न हो। संतों के बीच आपसी प्रेम है, और कुछ की मज़बूतियां दूसरों की विफलताओं की भरपाई करेंगी। वे हर पल आत्मा में चल सकते हैं और पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध और प्रकाशित किए गए हैं। सत्य समझने के तुरंत बाद वे उसे अभ्यास में ले आते हैं। वे नई रोशनी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हैं।

सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो; उसे नियंत्रण सौंपने का अर्थ है उसके साथ चलना। हमारे सभी विचार, धारणाएं, सोच और धर्मनिरपेक्ष उलझनें, धुएं की तरह हवा में गायब हो जाती हैं। हम परमेश्वर को अपनी आत्माओं पर शासन करने देते हैं, उसके साथ चलते हैं और इस तरह उत्थान हासिल करते हुए दुनिया पर विजय प्राप्त करते हैं, और हमारी आत्माएं मुक्त हो जाती हैं और रिहाई प्राप्त करती हैं : जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर राजा बनेगा तो येपरिणाम होंगे। ऐसा कैसे हो सकता है कि हम नृत्य न करें और स्तुति में न गाएं, अपनी प्रशंसा भेंट न करें, और अपने नए भजन न पेश करें?

वास्तव में परमेश्वर की स्तुति करने के कई तरीके हैं : उसका नाम पुकारना, उसके पास आना, उसके बारे में सोचना, प्रार्थना करते हुए पढ़ना, साहचर्य में शामिल होना, चिंतन करना, सोच-विचार करना, प्रार्थना करना और प्रशंसा के गीत गाना। इस तरह की स्तुति में आनंद है, और अभिषेक है; स्तुति में शक्ति है और एक दायित्व भी है। स्तुति में विश्वास है, और एक नई अंतर्दृष्टि भी है।

सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो, सेवा में समन्वय करो और एक हो जाओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करो, एक पवित्र आध्यात्मिक शरीर बनने के लिए तत्पर रहो, शैतान को कुचलो, और उसकी नियति समाप्त करो। फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया परमेश्वर के सामने आरोहित की गयी है और परमेश्वर की महिमा में प्रकट की जाती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 2' से

फुटनोट :

क. मूल पाठ में, "के परिणाम" यह वाक्यांश नहीं है।

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 48

विजयी राजा अपने शानदार सिंहासन पर बैठता है। उसने छुटकारा दिलाने का कार्य पूरा कर लिया है और महिमा में प्रकट होने के लिए अपने सभी लोगों की अगुआई की है। वह ब्रह्मांड को अपने हाथों में धारण करता है और अपने दिव्य ज्ञान और पराक्रम से उसने अटल सिय्योन का निर्माण किया है। अपने प्रताप से वह पापी दुनिया का न्याय करता है; उसने सभी देशों और सभी लोगों, पृथ्वी और समुद्र और उनमें रहने वाले सभी जीवों पर, और साथ ही स्वच्छंद भोग की मदिरा के नशे में डूबे लोगों पर फैसला सुनाया है। परमेश्वर उनका न्याय ज़रूर करेगा, और वह निश्चित रूप से उन पर क्रोधित होगा और इसमें परमेश्वर की महिमा प्रकट होगी, जिसका न्याय तत्क्षण होता है और अविलंब प्रदान किया जाता है। उसके क्रोध की अग्नि उनके घृणित अपराधों को भस्म कर देगी और किसी भी क्षण उन पर विपत्ति टूटेगी; उन्हें बच निकलने के लिए किसी भी मार्ग और छिपने के किसी भी स्थान का पता नहीं होगा, वे रोएँगे और अपने दाँत पीसेंगे, और अपने ऊपर विनाश ले आएँगे।

परमेश्वर के प्यारे विजयी पुत्र निश्चित रूप से सिय्योन में रहेंगे, उससे कभी विदा नहीं होंगे। बड़ी संख्या में लोग करीब से उसकी आवाज़ सुनेंगे, वे सावधानी से उसके कार्यों पर ध्यान देंगे, और उनकी प्रशंसा की आवाजें कभी बंद नहीं होंगी। एक सच्चा परमेश्वर प्रकट हुआ है! हम आत्मा में उसके बारे में निश्चित होंगे और ध्यानपूर्वक उसका अनुसरण करेंगे; हम अपनी पूरी ताकत से आगे बढ़ेंगे और अब और नहीं झिझकेंगे। दुनिया का अंत हमारे सामने प्रकट हो रहा है; चर्च के एक उपयुक्त जीवन के साथ-साथ लोग, कामकाज और चीजें, जिनसे हम घिरे हैं, हमारे प्रशिक्षण को घनीभूत कर रही हैं। आओ, जल्दी से अपने हृ्दयों को वापस लें, जो दुनिया से बहुत प्रेम करते हैं! आओ, जल्दी से अपनी दृष्टि वापस लें, जो इतनी धुँधली है! आओ, अपने कदम रोक लें, ताकि हम सीमाएँ न लाँघ जाएँ। आओ, अपना मुँह बंद करें, ताकि हम परमेश्वर के वचन में जा सकें, और अब अपनी लाभ-हानियों पर झगड़ा न करें। आह, धर्मनिरपेक्ष दुनिया और धन-दौलत के प्रति तुम्हारा लालची शौक—इसे त्याग दो! पतियों, बेटियों और बेटों के साथ तुम्हारा अडिग लगाव—इससे अपने को मुक्त करो! आह, तुम्हारे दृष्टिकोण और पूर्वाग्रह—इनसे पीठ मोड़ लो! आह, जागो; समय कम है! आत्मा के भीतर से देखो, ऊपर देखो, और परमेश्वर को नियंत्रण करने दो। कुछ भी हो जाए, लूत की दूसरी पत्नी न बनो। बेकार समझकर छोड़ दिया जाना कितना दयनीय होता है! सचमुच, कितना दयनीय! आह, जागो!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 3' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 49

पर्वत और नदियां बदल जाती हैं, धाराएं अपनी दिशा में बहती रहती हैं, और मनुष्य का जीवन उतना स्थायी नहीं होता जितना पृथ्वी और आकाश का। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर का शाश्वत और पुनर्जीवित जीवन है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी शाश्वत रूप से चलता रहता है! सभी चीज़ें और घटनाएं उसके हाथों में हैं, और शैतान उसके पैरों तले है।

आज परमेश्वर अपने पूर्वनिर्धारित चयन के कारण ही हम लोगों को शैतान के चंगुल से बचाता है। वह वास्तव में हमारा उद्धारक है। मसीह का शाश्वत, पुनर्जीवित जीवन हमारे भीतर निश्चय ही गढ़ दिया गया है, जो हमें परमेश्वर के जीवन से जुड़ने के लिए नियत कर रहा है, ताकि हम निश्चित रूप से उसके रूबरू आ सकें, उसे खा सकें, उसे पी सकें और उसका आनंद ले सकें। यह वह निस्वार्थ बलिदान है जिसे परमेश्वर ने अपने दिल के खून की कीमत से चुकाया है।

मौसम आते हैं, जाते हैं, आँधी-तूफान से गुज़रते, जीवन के कितने ही दुख-दर्द, उत्पीड़न और यातनाओं को झेलते हुए, दुनिया के कितने ही अस्वीकरण और अभिशाप बर्दाश्त करते हुए, सरकार के कितने ही झूठे आरोपों का सामना करते हुए, फिर भी न तो परमेश्वर में विश्वास और न ही उसका संकल्प ज़रा-सा कम होता है। पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा को समर्पित, परमेश्वर के प्रबंधन और योजना को पूरा करने के लिए तहेदिल से काम करते हुए, वह अपने जीवन की परवाह नहीं करता। अपने सभी लोगों के लिए, वह कोई प्रयास नहीं छोड़ता, सावधानी से उनका पोषण और सिंचन करता है। हम चाहे कितने भी अनाड़ी हों, या कितने भी जिद्दी हों, हमें केवल उसके प्रति समर्पित होने की ज़रूरत है, और मसीह का पुनर्जीवित जीवन हमारी पुरानी प्रकृति को बदल देगा...। इन सभी पहले जन्मे पुत्रों के लिए, वह अथक परिश्रम करता है, खाने और आराम की परवाह नहीं करता। कितने ही दिन और रात गुज़रें, कितनी ही तेज़ गर्मी और जमाने वाली ठंड से गुज़रना पड़े, वह सिय्योन में तहेदिल से निगरानी करता है।

दुनिया, घर, काम और हर चीज़ को प्रसन्नता और स्वेच्छा से त्याग देता है, सांसारिक सुख-सुविधाओं से उसे कोई लेना-देना नहीं...। उसके मुँह के वचन हमारे भीतर वार करते हैं, हमारे दिल में गहरी छिपी चीज़ों को उजागर करते हैं। हम कैसे आश्वस्त नहीं हो सकते? उसके मुँह से निकलने वाला हर वाक्य हमारे भीतर किसी भी समय सच साबित हो सकता है। हम जो भी करते हैं, उसके सामने या उससे छिपाकर, ऐसा कुछ नहीं है जो वो नहीं जानता, ऐसा कुछ नहीं है जो वो नहीं समझता। हमारी योजनाओं और व्यवस्थाओं के बावजूद सब उसके सामने प्रकट होगा।

उसके सामने बैठकर, अपनी आत्मा में आनंद महसूस करते हुए, सुखी और शांत रहते हुए, फिर भी हमेशा खालीपन और परमेश्वर के प्रति सचमुच ऋणी महसूस करना : यह एक अकल्पनीय आश्चर्य है और इसे हासिल करना असंभव है। पवित्र आत्मा पर्याप्त रूप से साबित करता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सच्चा परमेश्वर है! यह एक अकाट्य प्रमाण है! इस समूह के हम लोग, वास्तव में अवर्णनीय रूप से धन्य हैं! यदि परमेश्वर का अनुग्रह और दया नहीं होती, तो हमारा विनाश हो जाता और हमें शैतान का अनुसरण करना पड़ता। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही हमें बचा सकता है!

आह! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यवहारिक परमेश्वर! तुम ही हो जिसने हमारी आध्यात्मिक आंखें खोली हैं, और हमें आध्यात्मिक दुनिया के रहस्यों को देखने दिया है। राज्य की संभावनाएँ अनंत हैं। आइए सावधान रहकर प्रतीक्षा करें। वह दिन बहुत दूर नहीं हो सकता।

युद्ध की लपटें चक्कर लगाती हैं, तोप का धुआं हवा में भर गया है, मौसम गर्म हो गया, जलवायु परिवर्तित हो रही है, महामारी फैलेगी, लोग मरेंगे और बचने की कोई उम्मीद न होगी।

आह! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यवहारिक परमेश्वर! तुम हमारे मज़बूत किले हो। तुम हमारा आश्रय हो। हम तुम्हारे पंखों के नीचे सिमटते हैं, और आपदा हम तक नहीं पहुंच सकती। ऐसी है तुम्हारी दिव्य सुरक्षा और देखभाल।

हम सब ऊँचे सुर में गाते हैं; स्तुति करते हैं और हमारा स्तुति-गान पूरे सिय्योन में गूंजता है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यवहारिक परमेश्वर ने हमारे लिए गौरवशाली मंज़िल तैयार की है। सावधान रहो—नज़र रखो! अभी भी देर नहीं हुई है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 5' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 50

जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर—राज्य के राजा—की गवाही दी गई है, तब से पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर के प्रबंधन का दायरा पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। परमेश्वर के प्रकटन की गवाही न केवल चीन में दी गई है, बल्कि सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही दी गई है। वे सभी इस पवित्र नाम को पुकार रहे हैं, किसी भी तरह से परमेश्वर के साथ सहभागिता करने का प्रयास कर रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छा को समझ रहे हैं और कलीसिया में मिल कर सेवा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा इसी अद्भुत तरीके से काम करता है।

विभिन्न राष्ट्रों की भाषाएँ एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आत्मा एक ही है। यह आत्मा संसार भर की कलीसियाओं को जोड़ता है और बिना किसी भेदभाव के, परमेश्वर के साथ एक है, और इसमें कोई शक नहीं है। पवित्र आत्मा अब उन्हें पुकारता है और उसकी वाणी उन्हें जगाती है। यह परमेश्वर की दया की वाणी है। वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पवित्र नाम को पुकार रहे हैं! वे स्तुति भी करते हैं और गाते भी हैं। पवित्र आत्मा के कार्य में कभी भी कोई चूक नहीं हो सकती: और सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाते हैं, वे पीछे नहीं हटते हैं—चमत्कारों पर चमत्कार होते रहते हैं। लोगों के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है और इसका अनुमान लगाना उन्हें असंभव लगता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सारे ब्रह्मांड में जीवन का राजा है! वह महिमामय सिंहासन पर बैठता है और दुनिया का न्याय करता है, सभी पर वर्चस्व रखता है, और सभी राष्ट्रों पर शासन करता है; सभी लोग उसके सामने घुटने टेकते हैं, उससे प्रार्थना करते हैं, उसके करीब आते हैं और उसके साथ संवाद करते हैं। चाहे तुमने परमेश्वर में कितने भी लम्बे समय से विश्वास रखा हो, चाहे तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊंचा हो या तुम्हारी वरिष्ठता कितनी भी अधिक हो, यदि तुम अपने दिल में परमेश्वर का विरोध करते हो तो तुम्हारा न्याय किया जाना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सामने दंडवत होकर दर्द भरा अनुनय-विनय करना चाहिए; यह वास्तव में तुम्हारा अपने कर्मों के फल को भुगतना है। यह विलाप का स्वर अग्नि और गंध की झील में पीड़ा सहने का स्वर है, और यह परमेश्वर की लोहे की छड़ी से प्रताड़ित होने का क्रंदन है; यह मसीह के आसन के सामने किया गया न्याय है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 8' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 51

सभी कलीसियाओं में परमेश्वर पहले से ही प्रकट हो चुका है। आत्मा बोल रहा है, वह एक प्रबल अग्नि है, उसमें महिमा है और वह न्याय कर रहा है; वह मनुष्य का पुत्र है, जो पाँवों तक का वस्त्र पहने हुए है और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए है। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन के समान उज्ज्वल हैं, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं; उसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, मानो भट्ठी में तपे हुए हों; और उसका शब्द अनेक जल के शब्द के समान है। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है, और उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित है, जैसे सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता हो!

मनुष्य के पुत्र को देखा गया है, और परमेश्वर ने अपने आप को खुले रूप से प्रकट किया है। जमकर चमकते सूरज की तरह परमेश्वर की महिमा प्रकट की गई है! परमेश्वर का तेजस्वी मुख अपनी चमक से चकाचौंध करता है; किसकी आंखें उसके विरोध की हिम्मत कर सकती हैं? विरोध का अर्थ है मृत्यु! अपने दिल में जो कुछ भी तुम सोचते हो, जो भी शब्द तुम कहते हो या जो कुछ भी तुम करते हो, उसके लिए थोड़ी-सी भी दया नहीं दिखाई जाती है। तुम लोग सब समझोगे और देखोगे कि तुम लोगों ने क्या पाया है—मेरे न्याय के अलावा कुछ नहीं! अगर तुम लोग मेरे वचनों को खाने और पीने के लिए अपना प्रयास नहीं करते हो, बल्कि मनमाने ढंग से बाधा डालते हो और मेरा निर्माण नष्ट करते हो, तो क्या मैं इसे बरदाश्‍त कर सकता हूँ? मैं इस तरह के व्यक्ति के साथ नरमी नहीं करूँगा! यदि तुम्हारा व्यवहार और अधिक बिगड़ा, तो तुम आग में भस्म हो जाओगे! सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक आध्यात्मिक शरीर में प्रकट हुआ है, और सिर से पैर तक देह या रक्त से बिल्‍कुल जुड़ा नहीं है। वह ब्रह्मांडीय दुनिया से परे है, और तीसरे स्वर्ग के गौरवशाली सिंहासन पर बैठा प्रशासन करता है! ब्रह्मांड और सभी चीज़ें मेरे हाथों में हैं। मैं जो भी कहूँगा वही होगा। मेरा आदेश पूरा होगा। शैतान मेरे पैरों के तले है; वह एक अथाह कुंड में है! मेरे एक आदेश के जारी होने पर तो आकाश और पृथ्वी गायब हो जाएंगे और उनका कोई अस्तित्‍व नहीं रहेगा! सभी चीज़ें नवीनीकृत हो जाएंगी; यह एक अटल सत्य है, जो पूरी तरह सही है। मैंने दुनिया को जीत लिया है, सभी बुरों पर विजय प्राप्त की है। मैं यहाँ बैठा तुम लोगों से बात कर रहा हूँ; जिनके पास कान हैं, उन्हें सुनना चाहिए और जो जीवित हैं, उन्हें स्वीकार करना चाहिए।

दिन समाप्त हो जाएंगे; दुनिया की सभी चीज़ों का कोई मूल्य नहीं रहेगा, और सब कुछ नया बनकर उत्पन्न होगा। यह याद रखना! भूलना नहीं! इस बात में कोई संदिग्‍धता नहीं हो सकती है! आकाश और पृथ्वी गायब हो जाएँगे, परन्तु मेरे वचन रहेंगे! एक बार फिर तुम लोगों को प्रेरित करता हूँ: व्यर्थ में भागो मत! जागो! पश्चाताप करो और उद्धार हाथ में होगा! मैं पहले ही तुम लोगों के बीच प्रकट हो चुका हूँ और मेरी वाणी उदय हो चुकी है। मेरी वाणी तुम लोगों के सामने उदय हो चुकी है, हर दिन वह तुम लोगों के सामने रूबरू होती है, हर दिन वह ताज़ी और नई होती है। तुम मुझे देखते हो और मैं तुम्हें देखता हूँ; मैं तुमसे निरंतर बात करता हूँ और तुम्हारे साथ आमने-सामने होता हूँ। फिर भी तुम मुझे अस्वीकार करते हो, तुम मुझे नहीं जानते हो; मेरी भेड़ें मेरे वचन सुनती हैं और फिर भी तुम लोग संकोच करते हो! तुम संकोच करते हो! तुम्हारा मन मोटा हो गया है, तुम्हारी आंखों को शैतान ने अंधा कर दिया है और तुम मेरे गौरवशाली मुख को देख नहीं पाते हो—तुम कितने दयनीय हो! कितने दयनीय!

मेरे सिंहासन के सामने उपस्थित सात आत्माओं को पृथ्वी के सभी कोनों में भेजा गया है और मैं कलीसियाओं से बात करने के लिए अपने संदेशवाहक भेजूंगा। मैं धार्मिक और विश्वासयोग्य हूँ; मैं वह परमेश्वर हूँ जो मनुष्यों के दिल की गहराइयों की जांच करता है। पवित्र आत्मा कलीसियाओं से बात करता है और ये मेरे वचन हैं जो मेरे पुत्र के भीतर से निकलते हैं; जिनके कान हैं उन्हें सुनना चाहिए! जो जीवित हैं उन्हें स्वीकार करना चाहिए! बस उन्हें खाओ और पिओ, और संदेह न करो। जो लोग मुझे समर्पित करेंगे और मेरे वचनों पर ध्यान देंगे, उन्हें महान आशीष प्राप्त होंगे! जो लोग ईमानदारी से मेरे मुख की खोज करेंगे, उनके पास निश्चित रूप से नई रोशनी, नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि होगी; सब कुछ ताज़ा और नया होगा। मेरे वचन तुम्हारे लिए किसी भी समय प्रकट होंगे और वे तुम्हारी आत्मा की आंखें खोल देंगे ताकि तुम आध्यात्मिक क्षेत्र के सभी रहस्यों को देख सको और देख सको कि राज्य मनुष्य के बीच है। शरण में प्रवेश करो और सभी अनुग्रह और आशीष तुम्हें प्राप्त होंगे, अकाल और महामारी तुम्हें छू नहीं सकेंगी, और भेड़िए, साँप, बाघ और तेंदुए तुम्हें नुकसान पहुंचाने में असमर्थ रहेंगे। तुम मेरे साथ जाओगे, मेरे साथ चलोगे और मेरे साथ महिमा में प्रवेश करोगे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 15' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 52

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसका गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट होता है, पवित्र आध्यात्मिक शरीर उदय होता है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और देह दोनों बदल गए हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्‍यक्तित्‍व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए है और दुनिया की सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं, उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम उज्ज्वल है और उसकी महिमा उदित हो रही और चमक रही है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्‍य मग्‍न हैं, और सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, और अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का स्वागत करते हैं, जिनकी विजयी वापसी उसके छह हज़ार वर्ष की प्रबंधन योजना को पूरा करने की घोषणा करती है। ख़ुशी से सब कूदते और नाचते हैं! जय हो! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज प्रतापी, भव्‍य सिय्योन पर्वत की ऊंचाई पर लहराता है! सभी राष्ट्र उत्साहित हैं, सभी लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्‍नता से हँस रहा है, और परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का चेहरा देखूंगा, फिर भी आज मैंने देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने, मैं अपना दिल खोलकर रखता हूँ। खाने पीने का सभी कुछ, वह प्रचुरता से प्रदान करता है। जीवन, वचन, कार्य, सोच, विचार—उसका महिमामय प्रकाश इन सभी को उज्जवल करता है। वह रास्ते के हर कदम पर अगुवाई करता है, और यदि कोई दिल विद्रोह करता है तो उसका न्याय तुरंत करता है।

परमेश्वर के साथ मिलकर खाना, साथ रहना, साथ जीना, उसके साथ होना, साथ चलना, साथ आनंद लेना, साथ-साथ महिमा और आशीष प्राप्त करना, परमेश्वर के साथ शासन साझा करना और राज्य में एक साथ होना—ओह, कितना आनंददायक है! ओह, कितना प्यारा है! हम हर दिन उसके साथ आमने-सामने होते हैं, हर दिन उससे बात करते हैं और निरंतर वार्तालाप करते हैं, हर दिन नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं। हमारी आध्यात्मिक आंखें खुल गई हैं और हम सब कुछ देखते हैं; आत्मा के सभी रहस्य हमारे सामने प्रकट होते हैं। पवित्र जीवन कितना निश्चिंत है; तेज़ी से भागो और रुको मत, निरंतर आगे बढ़ो-आगे इससे भी अधिक अद्भुत एक जीवन है। केवल मीठे स्वाद से संतुष्ट न हो; हमेशा परमेश्वर में प्रवेश करने का प्रयास करो। वह सर्वव्यापी और प्रचुर है, और उसके पास सभी प्रकार की चीज़ें हैं जिनकी हम में कमी है। सक्रियता से सहयोग करो, उसके अंदर प्रवेश करो और कुछ भी कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा। हमारे जीवन का उत्थान होगा और कोई भी व्यक्ति, मामला या बात हमें परेशान नहीं कर पाएगी।

उत्थान! उत्थान! सच्चा उत्थान! परमेश्वर का जीवन उत्थान भीतर है और सभी वस्तुएं वास्तव में शांत हो जाती हैं! हम दुनिया और सांसारिक चीज़ों से परे चले जाते हैं, पतियों या बच्चों से कोई मोह नहीं रहता। बीमारी और वातावरण के नियंत्रण के परे चले जाते हैं। शैतान हमें परेशान करने की हिम्मत नहीं कर सकता है। सभी आपदाओं से हम ऊपर हो जाते हैं—यह परमेश्वर को शासन की अनुमति देना है! हम शैतान को अपने कदमों के तले कुचल देते हैं, कलीसिया के लिए गवाही देते हैं और पूरी तरह से शैतान के बदसूरत चेहरे को बेनकाब करते हैं। कलीसिया का निर्माण मसीह में है, गौरवशाली शरीर का उदय हुआ है—यह स्‍वर्गारोहण में जीना है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 15' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 53

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, शाश्वत पिता, शांति का राजकुमार, हमारा परमेश्वर राजा है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने चरण जैतून के पर्वत पर रखता है। यह कितना खूबसूरत है! सुनो! हम प्रहरी पुकार रहे हैं; एक साथ गा रहे हैं, क्योंकि परमेश्वर सिय्योन में लौट आया है। हम अपनी आँखों से यरूशलेम की वीरानी देख रहे हैं। तेज़ स्वर में उमंग से एक साथ गाओ, क्योंकि परमेश्वर ने हमें शान्ति दी है और यरूशलेम को छुड़ा लिया है। परमेश्वर ने सारे राष्ट्रों के सामने अपनी पवित्र भुजा प्रकट की है, परमेश्वर का वास्तविक स्‍वरूप प्रकट हुआ है! पृथ्वी के सभी छोरों ने हमारे परमेश्‍वर के उद्धार को देखा है।

हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तेरे समस्त रहस्यों को उजागर करने के लिए, तेरे सिंहासन से सात आत्माओं को प्रत्येक कलीसिया में भेजा गया है। अपने महिमा के सिंहासन पर बैठकर, तूने अपने राज्य का संचालन किया है और इसे न्‍याय और धार्मिकता द्वारा मजबूत और स्थिर बनाया है, और तूने सभी राष्ट्रों को अपने अधीन कर लिया है। हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तूने राजाओं के कमरबंद को ढीला कर दिया है, अपने सामने फाटकों को फिर कभी न बंद होने के लिए खोल दिया है। क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है और तेरी महिमा उदित हो गई है, और अपनी चमक फैला रही है। पृथ्‍वी पर अन्धियारा और लोगों पर घोर अन्‍धकार छाया हुआ है। हे परमेश्वर! परन्तु तू हम पर प्रकट हुआ है, और तूने अपना प्रकाश हम पर चमकाया है और तेरी महिमा हम पर प्रगट होगी; सारे राष्ट्र तेरी रोशनी में और सारे राजा तेरी चमक में आएँगे। तू अपनी आँखें उठाकर चारों ओर देखता है : तेरे पुत्र तेरे सामने इकट्ठे होते हैं और वे बहुत दूर से आए हैं और तेरी पुत्रियाँ हाथों-हाथ पहुँचाई जा रही हैं। हे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर, तेरे महान प्रेम ने हमें अपनी गिरफ्त में ले लिया है; यह तू ही है, जो हमें तेरे राज्य की ओर जाने वाले मार्ग पर चलने के लिए आगे बढ़ाता है और ये तेरे पवित्र वचन ही हैं जो हमें भिगोते हैं।

हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम तुझे धन्यवाद देते हैं और हम तेरी प्रशंसा करते हैं! हमें तेरा सम्मान करने दे, तेरी गवाही देने दे, तुझे ऊँचा उठाने दे, और ऐसे हृदय से तेरे लिए गाने दे जो निष्कपट है, शांत है और अविभाजित है। हमें एक मन हो जाने दे और हमें एक ही गठन बन जाने दे, और काश! तू जल्द ही, हमें उनके जैसा बना दे जो तेरे हृदय के अनुसार हैं, ताकि हम तेरे द्वारा काम में लाए जाएँ। तेरी इच्छा बिना किसी बाधा के पृथ्‍वी पर पूरी हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 25' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 54

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सर्वशक्तिसंपन्न, सर्वस्व प्राप्त करने वाला और पूरा सच्चा परमेश्वर है! वह न केवल सात सितारों को थामता है, सात आत्माओं को धारण करता है, उसकी सात आँखें हैं, वह सात मुहरें तोड़ता है और पुस्तक को खोलता है, लेकिन उससे भी अधिक वह सात विपत्तियों और सात कटोरों का प्रशासन करता है और सात गर्जनों को खोलता है। बहुत पहले उसने भी सात तुरही बजाई हैं! उसके द्वारा बनाई और पूर्ण की गई सभी चीज़ों को उसकी प्रशंसा करनी चाहिए, उसे महिमा देनी चाहिए और उसके सिंहासन को ऊंचा करना चाहिए। हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम सर्वस्व हो, तुमने सब कुछ पूरा कर लिया है और तुम्हारे साथ सब कुछ पूर्ण है, सब कुछ उज्ज्वल, बंधन से मुक्त, स्वतंत्र, मजबूत और शक्तिशाली है! गुप्त या छिपा हुआ बिल्कुल भी कुछ नहीं है; तुम्हारे साथ सभी रहस्य प्रकट हो जाते हैं। इसके अलावा, तुमने अपने बहुसंख्य दुश्मनों का न्याय किया है, तुम अपना प्रताप प्रदर्शित करते हो, अपनी उग्रता की आग दिखाते हो, अपना क्रोध दिखाते हो और उससे भी अधिक तुम अपनी अभूतपूर्व, अनंत, पूरी तरह से असीम महिमा को प्रदर्शित करते हो! सभी लोगों को जागृत होना चाहिए और बिना किसी झिझक के जय-जयकार और गायन करना चाहिए, इस सर्वशक्तिमान, सर्वथा-सच्चे, सर्वथा-जीवंत, उदार, महिमावान और सच्चे परमेश्वर का गुणगान करना चाहिए, जो हमेशा से चिरस्थायी है। उसके सिंहासन को लगातार सराहना चाहिए, उसके पवित्र नाम की प्रशंसा और महिमा करनी चाहिए। यह मेरे—परमेश्वर की—शाश्वत इच्छा है और यह वह अनंत आशीर्वाद है, जो वह हमारे लिए प्रकट करता है और हमें देता है! हममें से कौन इसका वारिस नहीं है? परमेश्वर के आशीर्वाद को विरासत में पाने के लिए, व्यक्ति को परमेश्वर के पवित्र नाम को सराहना चाहिए और सिंहासन की चारों ओर से आराधना करने के लिए आना चाहिए। वे सभी लोग जो उसके सामने अन्य उद्देश्यों और इरादों के साथ जाते हैं, वे उसकी उग्र आग से पिघल जाएँगे। आज वह दिन है, जब उसके दुश्मनों का न्याय किया जाएगा और वे इसी दिन नष्ट भी हो जाएँगे। इसके अलावा, यही वह दिन है, जब मैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट होऊँगा और महिमा और सम्मान प्राप्त करूँगा। सारे लोगों! उस सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सराहना और स्वागत करने के लिए शीघ्र उठो, जो सदा-सर्वदा के लिए हमें प्रेमपूर्ण दयालुता देता है, उद्धार को अमल में लाता है, हमें आशीर्वाद प्रदान करता है, अपने पुत्रों को पूरा करता है और सफलतापूर्वक अपने राज्य को हासिल करता है! यह परमेश्वर का अद्भुत कर्म है! यह परमेश्वर का शाश्वत प्रारब्ध और व्यवस्था है-कि हमें बचाने, हमें पूरा करने और हमें महिमा में लाने के लिए वह स्वयं ही आया है।

वे सभी जो उठकर गवाही नहीं देते हैं, वे अंधों के अग्रगामी हैं और अज्ञानता के राजा हैं। वे शाश्वत अज्ञानी, सतत मूर्ख बनेंगे; अनंत काल के लिए मृतक, जो अंधे हैं। इसलिए हमारी आत्माओं को जागृत होना चाहिए! सभी लोगों को उठ खड़े होना चाहिए! महिमा के राजा, दया के पिता, उद्धार के पुत्र, उदार सात आत्माओं की, सर्वशक्तिमान परमेश्वर जो प्रतापी उग्र आग और धार्मिक न्याय लाता है और जो सर्व-पर्याप्त, उदार, सर्वशक्तिमान और पूर्ण है, उसकी अनंत जय-जयकार, प्रशंसा और सराहना करो। उसके सिंहासन की हमेशा के लिए सराहना होगी! सभी लोगों को देखना चाहिए कि यह परमेश्वर की बुद्धि है; उद्धार का यह उसका अद्भुत तरीका है और उसकी महिमामय इच्छा की पूर्ति है। अगर हम नहीं उठते हैं और गवाही नहीं देते हैं, तो इस पल के बीत जाने के बाद, हम लौट कर नहीं जा सकेंगे। हम आशीर्वाद प्राप्त करेंगे या दुर्भाग्य, यह हमारी यात्रा के इस वर्तमान चरण में तय किया जा रहा है, अर्थात इस समय हम क्या करते हैं, क्या सोचते हैं और अभी कैसे जीते हैं। तो तुम सभी को कैसे कार्य करना चाहिए? गवाही दो और परमेश्वर की हमेशा सराहना करो; सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा—शाश्वत, अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का उत्कर्ष करो!

अब से तुम्हें स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि जो लोग परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते—जो अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते, साथ ही जो उसके बारे में संदेह रखते हैं—वे सभी बीमार और मरे हुए लोग हैं और ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर की अवज्ञा करते हैं! प्राचीन काल से ही परमेश्वर के वचन सच साबित हो चुके हैं : जो लोग मेरे साथ नहीं हैं, वे बिखर जाते हैं, और जो भी मेरे साथ नहीं हैं, वे मेरे विरुद्ध हैं; पत्थर में तराशा गया यह एक अटल सत्य है! जो लोग परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते, वे शैतान के अनुचर हैं। ये लोग परमेश्वर की संतानों को परेशान करने और धोखा देने और उसके प्रबंधन में बाधा डालने के लिए आए हैं; उनका नाश किया जाना चाहिए! जो कोई भी उनके प्रति अच्छे इरादे प्रकट करते हैं, वो अपना विनाश चाहते हैं। तुम्हें परमेश्वर के आत्मा के कथनों को सुनना और उन पर विश्वास करना चाहिए, परमेश्वर के आत्मा के मार्ग पर चलना चाहिए और परमेश्वर के आत्मा के वचनों को जीना चाहिए। उससे भी बढ़कर, तुम्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सिंहासन की अंत के दिनों तक सराहना करनी चाहिए!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सात आत्माओं का परमेश्वर है! सात आँखों और सात तारों वाला भी, वही है; वह सात मुहरों को खोलता है और सारी पुस्तक भी उसी के द्वारा खोली गई है! उसने सात तुरहियों को बजाया है, सात कटोरे और सात विपत्तियाँ भी उसी के नियंत्रण में हैं, जिन्हें वह अपनी इच्छानुसार उपयोग में लाता है। ओह, वे सात गर्जनाएं जो हमेशा मुहर-बंद थीं! उन्हें प्रकट करने का समय आ गया है! वह, जो उन सात गर्जनाओं को खोलेगा, पहले ही हमारी आँखों के सामने प्रकट हो चुका है!

हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारे साथ सब कुछ बंधनमुक्त और स्वतंत्र होता है; कोई कठिनाइयाँ नहीं होती हैं और सब कुछ आसानी से चलता है! तुम्हें कुछ भी अवरुद्ध या बाधित करने का साहस नहीं कर सकता और सभी तुम्हारे सामने समर्पित हो जाते हैं। जो समर्पण नहीं करते, मृत्यु को प्राप्त होंगे!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, सात आँखों वाले परमेश्वर! सब कुछ पूर्ण रूप से स्पष्ट है, सब कुछ उज्ज्वल है और खुला हुआ है और सभी कुछ प्रकट और अनावृत किया गया है। उसके होते हुए, सब कुछ बिल्कुल साफ़ है और न केवल स्वयं परमेश्वर इस तरह है, बल्कि उसके पुत्र भी ऐसे ही हैं। कोई भी व्यक्ति, वस्तु को और कोई भी बात, परमेश्वर या उसके पुत्रों से छिपाकर नहीं रखी जा सकती!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सात सितारे उज्ज्वल हैं! कलीसिया को उसके द्वारा परिपूर्ण किया गया है; वह कलीसिया के संदेशवाहकों को निर्धारित करता है और समग्र कलीसिया उसकी देखरेख में होती है। वह सभी सात मुहरों को खोलता है, वह स्वयं अपनी प्रबंधन योजना को और उसे पूरा करने की अपनी इच्छा को लाता है। वह पुस्तक उसकी प्रबंधन योजना की रहस्यमयी आध्यात्मिक भाषा है और उसने इसे खोलकर प्रकट कर दिया है!

सभी लोगों को उसकी सात गुंजायमान तुरहियों को ध्यान लगाकर सुनना चाहिए। उसके साथ सब कुछ स्पष्ट कर दिया जाता है, फिर कभी न छिपने के लिए और अब कोई दुख नहीं होता। सब कुछ प्रकट है, सब कुछ विजयी है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सात तुरहियाँ खुली, महिमामय और विजयी तुरहियाँ हैं! यही वो तुरहियाँ भी हैं, जो उसके शत्रुओं का न्याय करती हैं! उसकी विजय के बीच, उसके सींग को ऊँचा उठाया जाता है! वह पूरे ब्रह्मांड पर राज्य करता है!

उसने विपत्तियों के सात कटोरे तैयार किए हैं, उसके शत्रुओं पर निशाना लगाया गया है और वे चरम सीमा तक खोले गए हैं और वे शत्रु उसकी उग्र आग की लपटों में भस्म हो जाएँगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने अधिकार की शक्ति दिखाता है और उसके सभी शत्रु नष्ट हो जाते हैं। अंतिम सात गर्जनाएं अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने मुहर-बंद नहीं हैं; वे सभी प्रकट हैं! वे सभी प्रकट हैं! उन सात गर्जनाओं के साथ वह अपने शत्रुओं को मौत के घाट उतारता है, ताकि पृथ्वी स्थिर हो जाए, उसकी सेवा कर सके, और फिर से बर्बाद न हो!

हे धार्मिक सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम निरंतर तुम्हारा गुणगान करते हैं! तुम अनंत प्रशंसा, अनंत अभिनन्दन और अनंत सराहना के योग्य हो! तुम्हारी सात गर्जनाएं केवल तुम्हारे न्याय के लिए ही नहीं हैं, बल्कि उससे भी ज्यादा वे तुम्हारी महिमा और तुम्हारे अधिकार के लिए हैं, ताकि सब कुछ पूर्ण हो सके!

सभी लोग सिंहासन के सामने खुशियाँ मनाते हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा का गुणगान और उसकी स्तुति करते हैं! उनकी आवाजें समस्त विश्व को गर्जना की तरह कँपाती हैं! सभी चीज़ें बिलकुल उसी के कारण मौजूद हैं और उसी से उत्पन्न होती हैं। कौन है जो उसे समस्त महिमा, सम्मान, अधिकार, ज्ञान, पवित्रता, विजय और प्रकटन का पूर्ण श्रेय न देने का साहस करेगा? यह उसकी इच्छा की उपलब्धि है और यह उसके प्रबंधन की रचना का अंतिम समापन है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 34' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 55

सिंहासन से सात गर्जनें निकलती हैं, वे ब्रह्मांड को हिला देती हैं, स्वर्ग और पृथ्वी को उलट-पुलट कर देती हैं, और आकाश में गूँजती हैं! यह आवाज़ कानों के परदे फाड़ देती है, लोग न तो इससे बचकर भाग सकते हैं, और न ही इससे छिप सकते हैं। बिजली की चमक और गरज की गूँजें फूट निकलती हैं, एक क्षण में स्वर्ग और पृथ्वी दोनों रूपांतरित हो जाते हैं, और लोग मृत्यु की कगार पर हैं। फिर, आकाश से बरसता एक प्रचंड तूफ़ान बिजली की रफ़्तार से समस्त ब्रह्माण्ड को अपनी लपेट में ले लेता है! धरती के सुदूर कोनों तक, मूसलाधार वर्षा के समान सब कुछ को सिर से पैर तक धो डालता है, कहीं एक दाग़ तक बाक़ी नहीं रहता है; उससे कुछ भी छिपा नहीं रह सकता है और न ही कोई व्यक्ति इससे बचाया जा सकता है। बिजली की कौंध की तरह ही, गर्जन की गड़गड़ाहट, सर्द रोशनी के साथ दमकती है और मनुष्यों को भय से थरथरा देती है! तेज दुधारी तलवार विद्रोह के पुत्रों को मार गिराती है और शत्रुओं को घोर विपत्ति का सामना करना पड़ता है, ऐसा कोई आश्रय नहीं बचता है जहाँ वे भाग कर छिप सकें; आँधी-बरसात की प्रचंडता से वे चकरा जाते हैं, और उसके वार से लड़खड़ाते हुए वे तुरंत बेहोश होकर बहते पानी में गिर जाते हैं और बहा लिए जाते हैं। केवल मौत होती है, उनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं होता। सात गर्जनें मुझसे निकलती हैं, और मिस्र के ज्येष्ठ पुत्रों को मार गिराने, दुष्टों को दंडित करने और मेरी कलीसियाओं को शुद्ध करने के मेरे इरादे को व्यक्त करती हैं, ताकि सभी कलीसियाएँ एक-दूसरे से निकटता से जुड़ी रहें, भीतर-बाहर से एक हों, और वे मेरे साथ एक ही दिल की हों, ताकि ब्रह्मांड की सभी कलीसियाओं को एक बनाया जा सके। यह मेरा उद्देश्य है।

गर्जना होती है, और रोने-चीखने की आवाज़ें फूट निकलती हैं। कुछ अपनी नींद से जगा दिए जाते हैं, और, बहुत घबड़ा कर, वे अपनी आत्माओं को गहराई से जाँचते हुए सिंहासन के सामने वापस भाग आते हैं। वे अपनी अनियंत्रित चालाकी, नीच हरकतें करना बंद कर देते हैं; ऐसे लोगों के जागने में अभी देर नहीं हुई है। मैं सिंहासन से देखता हूँ। मैं लोगों के दिलों की गहराई में झाँकता हूँ। मैं उन लोगों को बचाता हूँ जो मुझे ईमानदारी और लगन से चाहते हैं, और मैं उन पर दया करता हूँ। मैं अनंत काल तक उन लोगों को बचाऊँगा जो अपने दिलों में मुझे सब से अधिक प्यार करते हैं, जो मेरी इच्छा को समझते हैं, और जो मार्ग के अंत तक मेरा अनुसरण करते हैं। मेरा हाथ उन्हें सुरक्षित रखेगा ताकि वे इस परिस्थिति का सामना न करें और उन्हें कोई भी नुकसान न पहुँचे। जब कुछ लोग चमकती बिजली के इस दृश्य को देखते हैं, तो उनके दिल में एक ऐसा क्लेश होता है जिसे व्यक्त करना उनके लिए बहुत कठिन होता है, और उन्हें अत्यधिक पश्चाताप होता है। अगर वे इस तरह के व्यवहार करते रहते हैं, तो उनके लिए बहुत देर हो चुकी है। ओह, सब कुछ, सब कुछ! यह सब कुछ किया जाएगा। यह भी उद्धार के मेरे साधनों में से एक है। मैं उन लोगों को बचाता हूँ जो मुझसे प्यार करते हैं और मैं दुष्टों को मार गिराता हूँ। मैं पृथ्वी पर अपने राज्य को स्थायी और सुस्थिर बनाता हूँ सभी राष्ट्रों और लोगों को, कायनात में और पृथ्वी के अंतिम छोरों के सभी लोगों को पता लगने देता हूँ कि मैं प्रताप हूँ, मैं भड़कती आग हूँ, मैं वो परमेश्वर हूँ जो हर व्यक्ति के अंतरतम हृदय की जांच करता है। इस समय से, महान श्वेत सिंहासन का न्याय लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट किया जाता है और सभी लोगों के सामने यह घोषणा की जाती है कि न्याय शुरू हो गया है! यह बात संदेह से परे है कि जिनकी बात दिल से नहीं निकलती है, जो संदेह करते हैं और निश्चित होने की हिम्मत नहीं रखते हैं, समय बर्बाद करने वाले, जो मेरी इच्छाओं को समझते तो हैं लेकिन उन्हें अभ्यास में लाने के इच्छुक नहीं हैं, उनका न्याय किया जाना चाहिए। तुम लोगों को अपने इरादों और उद्देश्यों की सावधानी से जाँच करनी चाहिए, और अपना उचित स्थान ले लेना चाहिए; मेरे वचनों का गंभीरता से अभ्यास करो, अपने जीवन के अनुभवों को महत्व दो, ऊपरी जोश से काम मत करो, बल्कि अपने जीवन का विकास करो, उसे परिपक्व, स्थिर और अनुभवी बनाओ, केवल तब ही तुम मेरे दिल के अनुसार होगे।

शैतान के अनुचरों को और उन दुष्ट आत्माओं को जो मेरे निर्माण को बाधित और नष्ट करते हैं, चीज़ों को अपने हित के लिए शोषित करने का कोई भी मौका न दो। उन्हें कठोरता से सीमित और नियंत्रित किया जाना चाहिए; उनके साथ केवल तेज़ तलवार से निपटा जा सकता है। उनमें जो सबसे बुरे हैं, उन लोगों को तत्काल जड़ से उखाड़ दिया जाना चाहिए ताकि वे भविष्य में कोई खतरा पैदा न करें। और कलीसिया को पूर्ण किया जाएगा, किसी भी विरूपता से मुक्त, और वह स्वास्थ्य, जीवनशक्ति और ऊर्जा से भरपूर होगी। चमकती बिजली के बाद, गड़गड़ाहटें गूँज उठती हैं। तुम लोगों को उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, और हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि जो छूट गया है उसे पकड़ने का पूरा प्रयास करना चाहिए, और तुम सब निश्चित रूप से देख सकोगे कि मेरा हाथ क्या करता है, मैं क्या हासिल करना चाहता हूँ, किसे हटाना चाहता हूँ, किसे पूर्ण करना चाहता हूँ, किसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता हूँ, और किसे मार गिराना चाहता हूँ। यह सब तुम लोगों की आँखों के सामने घटित होगा ताकि तुम सब स्पष्ट रूप से मेरी सर्वशक्तिमत्ता को देख सको।

सिंहासन से लेकर पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के सिरों तक, सात गर्जनें गूँज उठती हैं। लोगों का एक बड़ा समूह बचाया जाएगा और मेरे सिंहासन के सामने समर्पित होगा। जीवन के इस प्रकाश का अनुसरण करते हुए लोग जीवित रहने के साधनों को तलाशते हैं और वे स्वयं को मेरे पास आकर, घुटने टेककर आराधना करने अपने मुंह से सर्वशक्तिमान सच्चे परमेश्वर के नाम को पुकारने, और अपनी प्रार्थनाओं को व्यक्त करने से नहीं रोक पाते। लेकिन जो लोग मेरा विरोध करते हैं, जो अपने दिल को कठोर कर लेते हैं, उनके कानों में गर्जन गूँजती है और बिना किसी संदेह के, उन्हें मरना ही होगा। उनके लिए केवल यही अंतिम परिणाम प्रतीक्षारत है। मेरे प्यारे पुत्र जो विजयी हैं, सिय्योन में रहेंगे और सभी लोग देखेंगे कि वे क्या प्राप्त करेंगे, और तुम सब के सामने विशाल महिमा प्रकट होगी। सचमुच यह एक महान आशीर्वाद है, और ऐसी मधुरता है जिसका वर्णन करना मुश्किल है।

गर्जन के सात शब्दों की गड़गड़ाहट गूँज आ रही है, जो मुझसे प्यार करते हैं, जो मुझे सच्चे दिल से चाहते हैं, ये उन लोगों का उद्धार है। जो मेरे हैं और जिन्हें मैंने पूर्वनिर्धारित किया और चुना है, वे सभी मेरे नाम की शरण में आ पाते हैं। वे मेरी आवाज़ सुन सकते हैं, जो उनके लिए परमेश्वर की पुकार है। पृथ्वी के सिरों पर रहने वालों को देखने दो कि मैं धार्मिक हूँ, मैं वफ़ादार हूँ, मैं प्रेममय दया हूँ, मैं करुणा हूँ, मैं प्रताप हूँ, मैं प्रचंड अग्नि हूँ, और अंततः मैं निर्मम न्याय हूँ।

दुनिया में सभी को देखने दो कि मैं वास्तविक और संपूर्ण परमेश्वर स्वयं हूँ। सभी मनुष्य पूरी तरह आश्वस्त हैं और फिर से कोई भी मेरा विरोध, मेरी आलोचना करने की, या मेरी निंदा करने की हिम्मत नहीं करता है। अन्यथा, उन्हें तुरंत शाप मिलता है और उन पर विपत्ति आती है। वे केवल रो सकते हैं और अपने दांत पीस सकते हैं चूंकि वे खुद अपना विनाश लाए हैं।

सभी लोगों को जान लेने दो, पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के सिरों को ज्ञात होने दो और प्रत्येक गृहस्थी और सभी लोग ये जान जाएँ : सर्वशक्तिमान परमेश्वर एकमात्र सच्चा परमेश्वर है। सभी लोग एक के बाद एक घुटने टेक कर मेरी आराधना करेंगे और यहाँ तक कि वे बच्चे भी जिन्होंने अभी बात करना सीखा ही है, वे भी "सर्वशक्तिमान परमेश्वर" बोल उठेंगे! सत्ताधारी अधिकारी अपनी ही आँखों के सामने सच्चे परमेश्वर को प्रकट होते देखेंगे और वे भी उपासना में साष्टांग करेंगे, दया और क्षमा की भीख माँगेंगे, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है क्योंकि उनकी मृत्यु का समय आ चुका है। उन्हें तो बस खत्म करके असीम रसातल की सज़ा ही दी जा सकती है। मैं पूरे युग को समाप्त कर दूँगा, और अपने राज्य को और भी मजबूत करूँगा। सभी राष्ट्र और समस्त लोग अनंत काल के लिए मेरे सामने समर्पण कर देंगे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 35' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 56

सर्वशक्तिमान सच्चा परमेश्वर, सिंहासन पर विराजमान राजा, सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने, पूरे ब्रह्मांड पर शासन करता है, और स्वर्ग के नीचे सब-कुछ परमेश्वर की महिमा से चमकता है। ब्रह्मांड में और पृथ्वी के अंतिम छोर तक सभी जीवित प्राणी देखेंगे। सच्चे परमेश्वर के चेहरे के प्रकाश में पर्वतों, नदियों, झीलों, मैदानी इलाकों, महासागरों और सभी जीवित प्राणियों ने अपने पर्दे खोल दिए हैं, और वे पुनर्जीवित हो गए हैं, मानो किसी सपने से जाग उठे हों, मानो वे मिट्टी को चीरकर फूट निकलने वाले अंकुर हों!

आह! वह एकमात्र सच्चा परमेश्वर दुनिया के सामने प्रकट होता है। कौन प्रतिरोध के साथ उसके पास आने का दुस्साहस कर सकता है? सभी भय से काँपते हैं। सभी पूरी तरह से आश्वस्त हैं, और सभी बारंबार क्षमा-याचना करते हैं। सभी लोग उसके सामने घुटने टेक देते हैं, और सभी लोग उसकी पूजा करते हैं! महाद्वीप और महासागर, पहाड़, नदियाँ—सभी चीज़ें उसकी निरंतर प्रशंसा करती हैं! वसंत ऋतु अपनी गर्म हवाओं के साथ आती है, जिससे वसंत की सुहावनी बारिश होती है। समस्त लोगों की तरह, नदियों की धाराएँ कृतज्ञता और आत्मग्लानि के आँसू बहाती हुई शोक और हर्ष के साथ बहती हैं। नदियाँ, झीलें, लहरें और हिलोरें, सभी गा रही हैं, सच्चे परमेश्वर के पवित्र नाम की प्रशंसा करते हुए! प्रशंसा की ध्वनि इतनी स्पष्ट सुनाई देती हैं! पुरानी चीज़ें, जिन्हें कभी शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया था—उनमें से प्रत्येक को नवीनीकृत किया जाएगा, परिवर्तित किया जाएगा, और वे पूर्णत: एक नए राज्य में प्रवेश करेंगी ...

यह पवित्र तुरही है, और इसने बजना शुरू कर दिया है! ध्यान से सुनो। वह इतनी मधुर आवाज़ सिंहासन की आवाज़ है, जो सभी देशों और लोगों के लिए घोषणा कर रही है कि समय आ गया है, निर्णायक अंत आ गया है। मेरी प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। मेरा राज्य पृथ्वी पर खुलकर प्रकट हो गया है। धरती के राज्य मेरे, यानी परमेश्वर के राज्य बन गए हैं। सिंहासन से मेरी सात तुरहियाँ बजती हैं, और ऐसी चमत्कारी चीज़ें घटित होंगी! धरती के कोने-कोने से लोग हिमस्खलन और वज्रपात की प्रचंडता के साथ हर दिशा से एक-साथ लपककर आएँगे। ...

मैं अपने लोगों को ख़ुशी से देखता हूँ, जो मेरी आवाज़ सुनते हैं, हर देश और भूमि से आकर इकट्ठे होते हैं। सभी लोग सच्चे परमेश्वर को हमेशा अपनी ज़ुबान पर रखकर उसकी प्रशंसा करते हैं और खुशी से लगातार उछलते-कूदते हैं! वे दुनिया को गवाही देते हैं, और सच्चे परमेश्वर के लिए उनकी गवाही की आवाज़ कई समुद्रों के गरजने जैसी है। सभी लोग मेरे राज्य में आकर भीड़ लगाएँगे।

मेरी सात तुरहियाँ बजकर सोए हुए लोगों को जगाती हैं! जल्दी उठो, ज्यादा देर नहीं हुई। अपने जीवन को देखो! अपनी आँखें खोलो और देखो कि अभी क्या समय हुआ है। खोजने लायक क्या चीज़ है? सोचने के लिए क्या रखा है? और चिपके रहने के लिए क्या है? क्या तुमने कभी मेरे जीवन को पाने और उन सभी चीज़ों को पाने के मूल्य के अंतर पर विचार नहीं किया, जिनसे तुम प्यार करते हो और जिनसे चिपके रहते हो? अब और ज़िद या मनमानी मत करो। इस अवसर को मत गँवाओ। यह समय फिर नहीं आएगा! तुरंत खड़े हो जाओ, अपनी आत्मा से काम लेने का अभ्यास करो, शैतान की हर साजिश और चाल का भेद जानने और उसे नाकाम करने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करो, और शैतान पर विजय प्राप्त करो, ताकि तुम्हारे जीवन का अनुभव गहरा हो सके और तुम मेरे स्वभाव को जी सको, ताकि तुम्हारा जीवन परिपक्व और अनुभवी बन सके और तुम हमेशा मेरे पदचिह्नों का अनुसरण कर सको। निडर, मज़बूत, हमेशा आगे बढ़ते हुए, कदम-दर-कदम, ठीक मार्ग के अंत तक!

जब सात तुरहियाँ फिर से बजेंगी, तो यह न्याय के लिए पुकार होगी, विद्रोह के पुत्रों के न्याय के लिए, सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के न्याय के लिए, और प्रत्येक राष्ट्र परमेश्वर के सामने आत्मसमर्पण करेगा। परमेश्वर का भव्य मुख-मंडल निश्चित रूप से सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने प्रकट होगा। हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त हो जाएगा, और निरंतर चीखते-चिल्लाते हुए सच्चे परमेश्वर को पुकारेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर और अधिक महिमा-मंडित होगा, और मेरे पुत्र इस महिमा में हिस्सा बँटाएँगे, मेरे साथ राजसत्ता साझी कर सभी राष्ट्रों और सभी लोगों का न्याय करेंगे, बुरे को दंडित करेंगे, जो मेरे हैं उन्हें बचाएँगे और उन पर दया करेंगे, और राज्य को मज़बूत और स्थिर बनाएँगे। सात तुरहियों की आवाज़ से बहुत सारे लोगों को बचाया जाएगा, जो निरंतर प्रशंसा के साथ मेरे सामने घुटने टेकने और मेरी आराधना करने के लिए लौट आएँगे!

जब सात तुरहियाँ एक बार फिर से बजेंगी, तो यह युग का समापन होगा, दुष्ट शैतान पर जीत का तूर्यनाद, पृथ्वी पर राज्य में खुलकर जीने की शुरुआत की सूचना देने वाली सलामी! कितनी बुलंद आवाज़ है, वह आवाज़ जो सिंहासन के चारों ओर गूँजती है, यह तूर्यनाद स्वर्ग और पृथ्वी को हिला देता है, जो मेरी प्रबंधन योजना की जीत का संकेत है, जो शैतान का न्याय है; यह इस पुरानी दुनिया को पूरी तरह से मौत की सज़ा और अथाह कुंड में गिरने की सज़ा देता है! तुरही का यह तूर्यनाद दर्शाता है कि अनुग्रह का द्वार बंद होने वाला है, पृथ्वी पर राज्य का जीवन शुरू होगा, जो पूरी तरह से उचित और उपयुक्त है। परमेश्वर उन्हें बचाता है, जो उससे प्रेम करते हैं। एक बार जब वे उसके राज्य में वापस लौट जाएँगे, तो धरती पर लोग अकाल और महामारी का सामना करेंगे, परमेश्वर के सात कटोरे और सात विपत्तियाँ एक के बाद एक प्रभावी होंगी। पृथ्वी और स्वर्ग मिट जाएँगे, परंतु मेरा वचन नहीं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 36' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 57

अंत के दिनों का मसीह जीवन लेकर आता है, और सत्य का स्थायी और शाश्वत मार्ग लेकर आता है। यह सत्य वह मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य जीवन प्राप्त करता है, और यह एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह द्वारा प्रदान किया गया जीवन का मार्ग नहीं खोजते हो, तो तुम यीशु की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं करोगे, और स्वर्ग के राज्य के फाटक में प्रवेश करने के योग्य कभी नहीं हो पाओगे, क्योंकि तुम इतिहास की कठपुतली और कैदी दोनों ही हो। वे लोग जो नियमों से, शब्दों से नियंत्रित होते हैं, और इतिहास की जंजीरों में जकड़े हुए हैं, न तो कभी जीवन प्राप्त कर पाएँगे और न ही जीवन का शाश्वत मार्ग प्राप्त कर पाएँगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास, सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन के जल की बजाय, बस मैला पानी ही है जिससे वे हजारों सालों से चिपके हुए हैं। वे जिन्हें जीवन के जल की आपूर्ति नहीं की गई है, हमेशा के लिए मुर्दे, शैतान के खिलौने, और नरक की संतानें बने रहेंगे। फिर वे परमेश्वर को कैसे देख सकते हैं? यदि तुम केवल अतीत को पकड़े रखने की कोशिश करते हो, केवल जड़वत खड़े रहकर चीजों को जस का तस रखने की कोशिश करते हो, और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को ख़ारिज़ करने की कोशिश नहीं करते हो, तो क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरुद्ध नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के चरण उमड़ती लहरों और गरजते तूफानों की तरह विशाल और शक्तिशाली हैं—फिर भी तुम निठल्ले बैठकर तबाही का इंतजार करते हो, अपनी नादानी से चिपके रहते हो और कुछ भी नहीं करते हो। इस तरह, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? तुम जिस परमेश्वर को थामे हो उसे उस परमेश्वर के रूप में सही कैसे ठहरा सकते हो जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? और तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के शब्द तुम्हें नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के चरणों को ढूँढ़ने में तुम्हारी अगुआई कैसे कर सकते हैं? और वे तुम्हें ऊपर स्वर्ग में कैसे ले जा सकते हैं? तुम अपने हाथों में जो थामे हो वे शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना दे सकते हैं, जीवन देने में सक्षम सत्य नहीं दे सकते। तुम जो शास्त्र पढ़ते हो वे केवल तुम्हारी जिह्वा को समृद्ध कर सकते हैं और ये बुद्धिमत्ता के वचन नहीं हैं जो मानव जीवन को जानने में तुम्हारी मदद कर सकते हैं, तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाने की बात तो दूर रही। क्या यह विसंगति तुम्हारे लिए गहन चिंतन का कारण नहीं है? क्या यह तुम्हें अपने भीतर समाहित रहस्यों का बोध नहीं करवाती है? क्या तुम परमेश्वर से अकेले में मिलने के लिए अपने आप को स्वर्ग को सौंप देने में समर्थ हो? परमेश्वर के आए बिना, क्या तुम परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनंद मनाने के लिए अपने आप को स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? तो मेरा सुझाव यह है कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो और उसकी ओर देखो जो अभी कार्य कर रहा है—उसकी ओर देखो जो अब अंत के दिनों में मनुष्य को बचाने का कार्य कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते हो, तो तुम कभी भी सत्य प्राप्त नहीं करोगे, और न ही कभी जीवन प्राप्त करोगे।

मसीह द्वारा बोले गए सत्य पर भरोसा किए बिना जो लोग जीवन प्राप्त करना चाहते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे बेतुके लोग हैं, और जो मसीह द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं, वे कोरी कल्पना में खोए हैं। और इसलिए मैं कहता हूँ कि वे लोग जो अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं सदा के लिए परमेश्वर की घृणा के भागी होंगे। मसीह अंत के दिनों के दौरान राज्य में जाने के लिए मनुष्य का प्रवेशद्वार है, और ऐसा कोई नहीं जो उससे कन्नी काटकर जा सके। मसीह के माध्यम के अलावा किसी को भी परमेश्वर द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता। तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, और इसलिए तुम्हें उसके वचनों को स्वीकार करना और उसके मार्ग का पालन करना चाहिए। सत्य को प्राप्त करने में या जीवन का पोषण स्वीकार करने में असमर्थ रहते हुए तुम केवल आशीष प्राप्त करने के बारे में नहीं सोच सकते हो। मसीह अंत के दिनों में आता है ताकि वह उसमें सच्चा विश्वास करने वाले सभी लोगों को जीवन प्रदान कर सके। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है, और उसका कार्य वह मार्ग है जिसे उन सभी लोगों को अपनाना चाहिए जो नए युग में प्रवेश करेंगे। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और इसकी बजाय उसकी भर्त्सना, निंदा, या यहाँ तक कि उसे उत्पीड़ित करते हो, तो तुम्हें अनंतकाल तक जलाया जाना तय है और तुम परमेश्वर के राज्य में कभी प्रवेश नहीं करोगे। क्योंकि यह मसीह स्वयं पवित्र आत्मा की अभिव्यक्ति है, और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वह जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर करने के लिए अपना कार्य सौंपा है। और इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि तुम वह सब स्वीकार नहीं करते हो जो अंत के दिनों के मसीह के द्वारा किया जाता है, तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को जो प्रतिशोध सहना होगा वह सभी के लिए स्वत: स्पष्ट है। मैं तुम्हें यह भी बताता हूँ कि यदि तुम अंत के दिनों के मसीह का प्रतिरोध करोगे, यदि तुम अंत के दिनों के मसीह को ठुकराओगे, तो तुम्हारी ओर से परिणाम भुगतने वाला कोई अन्य नहीं होगा। इतना ही नहीं, इस दिन के बाद तुम्हें परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करने का दूसरा अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने प्रायश्चित का प्रयास भी करते हो, तब भी तुम दोबारा कभी परमेश्वर का चेहरा नहीं देखोगे। क्योंकि तुम जिसका प्रतिरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, तुम जिसे ठुकरा रहे हो वह कोई अदना प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम जानते हो कि इसके क्या परिणाम होंगे? तुमन कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि एक जघन्य अपराध किया होगा। और इसलिए मैं सभी को सलाह देता हूँ कि सत्य के सामने अपने जहरीले दाँत मत दिखाओ, या छिछोरी आलोचना मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुम्हें जीवन दिला सकता है, और सत्य के अलावा कुछ भी तुम्हें पुनः जन्म लेने नहीं दे सकता, और न ही तुम्हें दोबारा परमेश्वर का चेहरा देखने दे सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 58

यह पूरी तरह से मेरे अनुग्रह और दया की वजह से ही है कि मेरे रहस्य प्रकट और खुले तौर पर व्यक्त होते हैं, और अब छुपे हुए नहीं है हैं। और यही नहीं, मेरे वचन का मनुष्यों के बीच प्रकट होना, और उनका छुपा न होना भी मेरे अनुग्रह और मेरी दया की वजह से ही है। मैं उन सभी से प्यार करता हूँ जो ईमानदारी से मेरे लिए स्वयं को खपाते हैं और खुद को मेरे प्रति समर्पित करते हैं। मैं उन सभी से घृणा करता हूँ जो मुझ से जन्मे हैं, फिर भी, मुझे नहीं जानते हैं, और यहाँ तक कि मेरा विरोध भी करते हैं। मैं ऐसे किसी भी व्यक्ति का परित्याग नहीं करूँगा जो ईमानदारी से मेरे प्रति समर्पित है; बल्कि मैं उसके आशीषों को दुगुना कर दूँगा। जो लोग कृतघ्न हैं और मेरी अनुकंपा का अनादर करते हैं, उन्हें मैं दुगुनी सजा दूँगा और हल्के में नहीं छोड़ूँगा। मेरे राज्य में कोई कुटिलता या छल नहीं है, कोई सांसारिकता नहीं है; अर्थात् मृतकों की कोई दुर्गंध नहीं है। बल्कि पूर्ण रूप से सत्यपरायणता, और धार्मिकता है; पूर्ण रूप से शुद्धता और खुलापनहै, कुछ भी छुपाया या गुप्त नहीं रखा गया है। सब कुछ ताज़ा है, सब कुछ आनंदपूर्ण है, और सब कुछ आत्मिक उन्नति है। अगर किसी से अभी भी मृतकों की दुर्गंध आती है, तो वह किसी भी तरीके से मेरे राज्य में नहीं रह सकता है, बल्कि मेरी लोहे की छड़ द्वारा उसका फैसला किया जाएगा। पुरातन काल से लेकर वर्तमान समय तक के सभी अंतहीन रहस्य, पूरी तरह से तुम लोगों को प्रकट किए गए हैं—उन लोगों के समूह को जिन्हें अंतिम दिनों में मेरे द्वाराप्राप्त किया जाता है। क्या तुम सब धन्य महसूस नहीं करते हो? वे दिन जब सब खुले तौर पर प्रकट किया जाता है, यही नहीं, वे दिन जिनमें तुम लोग मेरे शासन को साझा करते हो।

लोगों का समूह जो वास्तव में राजाओं के रूप में शासन करता है, वह मेरे द्वारा पूर्वनियत किए जाने और चयन पर निर्भर करता है, और उसके अंदर बिलकुल भी कोई मानवीय इच्छा नहीं होती। यदि कोई इसमें हिस्सा लेने की हिम्मत करता है, तो उसे अवश्य मेरे हाथ के प्रहार को झेलना होगा, और ऐसे लोग मेरी प्रचण्ड अग्नि का लक्ष्य बनेंगे; यह मेरी धार्मिकता और प्रताप का एक अन्य पहलू है। मैंने कहा है कि मैं सभी चीज़ों पर शासन करता हूँ, मैं ही वह बुद्धिमान परमेश्वर हूँ जो पूर्ण अधिकार का उपयोग करता है, और मैं किसी भी व्यक्ति के प्रति उदार नहीं हूँ; मैं अत्यंत निष्ठुर हूँ, व्यक्तिगत भावनाओं से पूरी तरह रहित हूँ। मैं हर किसी के साथ अपनी धार्मिकता, सत्यपरायणता, और अपने प्रताप के साथ व्यवहार करता हूँ (चाहे कोई कितना भी अच्छा क्यों न बोलता हो, मैं उसे नहीं छोड़ूँगा), और इस बीच मैं हर किसी को मेरे कर्मों के चमत्कार को बेहतर ढंग से देखने, साथ ही साथ, मेरे कर्मोंके अर्थ को समझने में सक्षम बनाता हूँ। एक-एक करके, मैंने दुष्ट आत्माओं के उनके सभी प्रकार के कर्मों के लिए जो वे करते हैं, दण्डित किया, प्रत्येक को करके अथाह कुंड में फेंक दिया। उनके लिए कोई पद न छोड़ते हुए, उनके लिए उनके कार्य करने की कोई जगह न छोड़ते हुए, समय शुरू होने से पहले ही मैंने इस कार्य को पूरा कर लिया था। मेरे चुने हुए लोगों में से कोई भी व्यक्ति—जो मेरे द्वारा पूर्वनियत और चुने गए हैं—उन्हें कभी भी कोई दुष्टात्मा अपने कब्ज़े में नहीं ले सकती है, बल्कि वह हमेशा पवित्र रहेगा। जहाँ तक उनकी बात है जिन्हें मैंने पूर्वनियत और चुना नहीं है, उन्हें मैं शैतान को सौंप दूँगा और उन्हें अब और नहीं रहने दूँगा। सभी पहलुओं में, मेरे प्रशासनिक आदेशों में मेरी धार्मिकता, मेरा प्रताप शामिल हैं। मैं उन लोगों में से एक को भी नहीं जाने दूँगा जिन पर शैतान कार्य करता है, बल्कि उन्हें सशरीर रसातल में डाल दूँगा, क्योंकि मैं शैतान से घृणा करता हूँ। मैं इसे किसी भी तरह से आसानी से नहीं छोड़ूँगा, बल्कि इसे पूरी तरह से नष्ट कर दूँगा, और उसे अपना कार्य करने के लिए ज़रा-सा भी मौका नहीं दूँगा। जिन्हें शैतान ने एक निश्चित सीमा तक भ्रष्ट कर दिया है (अर्थात, वे जो आपदा के लक्ष्य हैं) वे मेरे स्वयं के हाथ की बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवस्था के अधीन हैं। यह मत सोच कि ऐसा शैतान की क्रूरता की वजह से हुआ है; जान ले कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ, जो ब्रह्मांड और सभी चीज़ों पर शासन करता है! मेरे लिए, ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे सुलझाया नहीं जा सकता है, ऐसी कोई चीज़ तो बिल्कुल भी नहीं है जिसे पूरा नहीं किया जा सकता, या ऐसा कोई वचन नहीं है जिसे कहा नहीं जा सकता है। मनुष्यों को मेरे सलाहकारों के रूप में कार्य बिलकुल नहीं करना चाहिए। मेरे हाथ से मारे जाने और रसातल में डाल दिए जाने के प्रति सावधान रह। मैं तुझे बताता हूँ! आज जो मेरे साथ अग्रसक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं, वे ही सबसे चतुर हैं, और वे नुकसान से दूर रहेंगे और न्याय की पीड़ा से बचे रहेंगे। यह सब मेरी व्यवस्थाएँ हैं, मेरे द्वारा पूर्वनियत हैं। यह सोचकर कि तू बहुत महान है, बड़ी-बड़ी बातें मत कर, अविवेकपूर्ण टीका-टिप्पणियाँ मत कर। क्या यह सब मेरे द्वारा पूर्वनियति के माध्यम से नहीं है? तुम लोगों को, जो मेरे सलाहकार होंगे, कोई शर्म नहीं है! तुम लोग अपनी स्वयं की क़द-काठी को नहीं जानते हो; दयनीय रूप से यह कितनी तुच्छ है! फिर भी, तुम सोचते हो कि ये कोई बड़ा मामला नहीं है, और खुद को नहीं समझते हो। बार-बार तुम लोग मेरे वचनों को अनसुना कर देते हो, मेरे मेहनती प्रयासों को व्यर्थ होने देते हो, और बिलकुल नहीं समझते हो कि ये मेरे अनुग्रह और कृपा के प्रकटीकरण हैं। इसके बजाय, तुम लोग बार-बार अपनी चालाकी दिखाने की कोशिश करते हो। क्या तुम लोगों को यह याद है? उन लोगों को कैसी ताड़ना मिलनी चाहिए जो सोचते हैं कि वे चतुर हैं? मेरे वचनों के प्रति उदासीन और अविश्वासी रहकर, और उन्हें अपने हृदय में नहीं उकेरते हुए, तुम लोग तमाम चीज़ें करने के लिए दिखावे के रूप में मेरा उपयोग करते हो। कुकर्मियों! तुम लोग कब मेरे हृदय पर पूरी तरह से विचार कर पाओगे? इसके प्रति तुम्हारे अंदर कोई आदर नहीं है, और इसलिए तुम लोगों को "कुकर्मी" कहना तुम लोगों के प्रति दुर्व्यवहार करना नहीं होगा। यह तुम्हारे लिए बिलकुल उपयुक्त है!

आज मैं तुम लोगों को, एक-एक करके, उन चीज़ों को दिखा रहा हूँ जो कभी छुपी हुई थीं। बड़े लाल अजगर को अथाह कुंड में फेंक दिया जाता है और उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है, क्योंकि इसे रखने का कोई फायदा नहीं होगा; जिसका अर्थ है कि यह मसीह की सेवा नहीं कर सकता है। इसके बाद, लाल चीज़ें अब अस्तित्व में नहीं रहेंगी; धीरे-धीरे इन्हें क्षीण होकर मिट जाना होगा। मैं जो कहता हूँ वह करता हूँ; यह मेरे कार्य की पूर्णता है। मानवीय धारणाओं को हटा दे, मैंने जो कुछ भी कहा है, उसे मैंने किया है। जो कोई भी चालाक बनने का प्रयास करता है, वह खुद पर विनाश और तिरस्कार ला रहा है, और जीना नहीं चाहता है। इसलिए, मैं तुझे संतुष्ट करूँगा और निश्चित रूप से ऐसे लोगों को नहीं रखूँगा। इसके बाद, आबादी उत्कृष्टता में बढ़ेगी, जबकि जो लोग मेरे साथ अग्रसक्रिय रूप से सहयोग नहीं करते हैं, उनका नामो-निशान तक मिटा दिया जाएगा। जिन्हें मैंने स्वीकार किया है, ये वे लोग हैं जिन्हें मैं पूर्ण करूँगा, और मैं एक को भी नहीं निकालूँगा। मैं जो कहता हूँ, उसमें कोई विरोधाभास नहीं है। जो लोग मेरे साथ अग्रसक्रिय रूप से सहयोग नहीं करते हैं, वे और अधिक ताड़ना भुगतेंगे, भले ही अंततः मैं उन्हें निश्चित रूप से बचाऊँगा। हालाँकि, उस समय तक उनके जीवन का विस्तार काफी अलग होगा। क्या तू ऐसा व्यक्ति बनना चाहता है? उठ, और मेरे साथ सहयोग कर! मैं निश्चित रूप से उन लोगों के साथ क्षुद्रता से व्यवहार नहीं करूँगा जो ईमानदारी से खुद को मेरे लिए खपाते हैं। जो अपने आप को ईमानदारी से मेरे प्रति समर्पित करता है, मैं तुझे अपने सभी आशीष प्रदान करूँगा। अपने आप को पूरी तरह से मेरे प्रति अर्पित कर दे! तू क्या खाता है, क्या पहनता है, और तेरा भविष्य, ये सब मेरे हाथों में है; मैं सब को ठीक प्रकार से व्यवस्थित कर दूँगा, ताकि तू असीमित आनंद पा सके जो कभी ख़त्म न हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने कहा है, "जो ईमानदारी से मेरे लिए स्वयं को खपाता है, मैं निश्चित रूप से तुझे बहुत आशीष दूँगा।" हर वह व्यक्ति जो खुद को ईमानदारी से मेरे लिए खपाता है, उस पर सारी आशीषें आएँगी।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 70' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 59

लोग मेरी जय-जयकार करते हैं, लोग मेरी स्तुति करते हैं; सभी अपने मुख से एकमात्र सच्चे ईश्वर का नाम लेते हैं, सभी लोगों की दृष्टि मेरे कर्मों को देखने के लिए उठती है। राज्य लोगों के जगत में अवतरित होता है, मेरा व्यक्तित्व समृद्ध और प्रचुर है। इस पर कौन खुश न होगा? कौन है जो इसके लिए आनंदित हो, नृत्य न करेगा? ओह, सिय्योन! मेरा जश्न मनाने के लिए अपनी विजयी-पताका उठाओ! जीत का अपना विजय-गीत गाओ और मेरा पवित्र नाम फैलाओ! पृथ्वी की समस्त वस्तुओ! मुझे अर्पण होने के लिए स्वयं को शुद्ध करो! आसमान के तारो! अब अपने स्थानों पर लौट जाओ और नभ-मंडल में मेरा प्रबल सामर्थ्य दिखाओ! मैं पृथ्वी के लोगों की उन आवाज़ों को सुन रहा हूं, जो अपने गायन में मेरे लिए असीम प्रेम और श्रद्धा प्रकट कर रही हैं! इस दिन, जबकि हर चीज़ फिर से जीवित होती है, मैं पृथ्वी पर आता हूं। इस पल, फूल खिलते हैं, पक्षी एक सुर में गाते हैं, हर चीज़ पूरे उल्लास से धड़कती है! राज्य के अभिनंदन की ध्वनि में, शैतान का राज्य ध्वस्त हो गया है, राज्य-गान के प्रतिध्वनित होते समूह-गान में नष्ट हो गया है। और ये अब फिर कभी सिर नहीं उठाएगा!

पृथ्वी पर कौन है जो सिर उठाने और विरोध करने का साहस करे? जब मैं पृथ्वी पर आता हूं तो ज्वलन, क्रोध, और तमाम विपदाएं लाता हूं। पृथ्वी के सारे राज्य अब मेरे राज्य हैं! ऊपर आकाश में बादल गोते लगाते और तरंगित होते हैं; आकाश के नीचे झीलें और नदियाँ हिलोरे मारती हैं और जिससे मधुर संगीत निकलता है। अपनी मांद में विश्राम करते जीव-जंतु बाहर निकलते हैं और जो लोग उनींदी अवस्था में थे, उन्हें भी मैं जगा देता हूं। हर कोई जिसकी प्रतीक्षा में था, वो दिन आखिर आ गया! वे मुझे सर्वाधिक सुंदर गीत भेंट करते हैं!

इस खूबसूरत पल में, इस रोमांचक समय में,

ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्वी पर सब स्तुति करते हैं। इसके लिए कौन उल्लसित न होगा?

किसका दिल हल्का न होगा? इस अवसर पर कौन खुशी के आँसू न बहाएगा?

अब यह वही आकाश नहीं है, अब यह राज्य का आकाश है।

अब यह वही पृथ्वी नहीं है, बल्कि अब यह पवित्र धरती है।

घनघोर वर्षा के बाद, मलिन जीर्ण विश्व पूरी तरह से बदल दिया गया है।

पर्वत बदल रहे हैं ... जलस्रोत बदल रहे हैं ...

इन्सान भी बदल रहे हैं ... हर चीज़ बदल रही है...।

शांत पर्वतो! उठो और मेरे लिए नृत्य करो!

स्थिर जलस्रोतो! स्वतंत्र रूप से प्रवाहमान रहो!

सपनों में खोये मनुष्यो! उठो और दौड़ो!

मैं आ गया हूं ... मैं ही राजा हूँ...।

सब लोग अपनी आँखों से मेरा चेहरा देखेंगे, सब लोग अपने कानों से मेरी आवाज़ सुनेंगे,

वे स्वयं राज्य का जीवन जीएंगे...।

इतना मधुर ... इतना सुंदर...।

अविस्मरणीय ... अविस्मरणीय...।


मेरे क्रोध की ज्वाला में, बड़ा लाल अजगर संघर्षरत है;

मेरे प्रतापी न्याय में, शैतान अपना वास्तविक रूप दिखाते हैं;

मेरे कड़े वचनों में, सभी शर्म महसूस करते हैं, छिपने को जगह नहीं पाते हैं।

वे अतीत याद करते हैं, कैसे वे मेरा उपहास करते थे।

हमेशा वे दिखावा करते थे, हमेशा मेरा विरोध करते थे।

आज, कौन नहीं रोता है? कौन मलाल न करता है?

पूरा ब्रह्मांड जगत आँसुओं में डूबा है ...

आनन्द-ध्वनि से भरा है ... हँसी से भरा है...।

अतुलनीय आनन्द ... अतुलनीय आनन्द...।


हल्की बारिश गुनगुनाए ... भारी बर्फ फड़फड़ाए...।

लोगों में गम और खुशी दोनों हैं ... कुछ हँस रहे हैं...।

कुछ सुबक रहे हैं ... और कुछ जश्न मना रहे हैं...।

जैसे कि लोग भूल गए हैं ... कि यह घनघोर बादल और वर्षा वसंत है,

या खिलते हुए फूलों की ग्रीष्म ऋतु, या भरपूर फसल की एक शरद ऋतु,

या बर्फ और तुषार की ठिठुरती सर्दी, नहीं जानता कोई...।

आकाश में बादलों का बहाव, पृथ्वी पर उफनते समुद्र।

पुत्र अपनी बाहें लहराते हैं ... नृत्य में लोगों के पैर थिरकते हैं...।

स्वर्गदूत लगे हैं अपने काम में ... स्वर्गदूत संचालन कर रहे हैं...।

धरती पर लोगों में हलचल है, धरती पर हर चीज़ वृद्धि कर रही है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'राज्य गान' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 60

मानवजाति में हर व्यक्ति को मेरे आत्मा द्वारा अवलोकन किया जाना स्वीकार करना चाहिए, अपने हर वचन और कार्य की बारीकी से जाँच करनी चाहिए और इसके अलावा, मेरे चमत्कारिक कर्मों पर विचार करना चाहिए। पृथ्वी पर राज्य के आगमन के समय तुम लोग कैसा महसूस करते हो? जब मेरे पुत्र एवं लोग मेरे सिंहासन की ओर उमड़ते हैं, तो मैं औपचारिक रूप से महान सफेद सिंहासन के सम्मुख न्याय आरम्भ करता हूँ। इसका अर्थ यह है कि जब मैं पृथ्वी पर व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य आरम्भ करता हूँ, और जब न्याय का युग अपने समापन के समीप होता है, तो मैं अपने वचनों को संपूर्ण ब्रह्मांड की ओर भेजना आरम्भ करता हूँ और अपनी आत्मा की आवाज़ को संपूर्ण ब्रह्मांड में जारी करता हूँ। अपने वचनों के ज़रिए, मैं उन सभी लोगों और वस्तुओं को निर्मल कर दूँगा, जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर हैं, ताकि भूमि अब और अपवित्र और अनैतिक न रहे, बल्कि एक पवित्र राज्य बन जाए। मैं सभी चीज़ों को नया कर दूँगा, ताकि वे मेरे उपयोग के लिए उपलब्ध हों, ताकि उन्हें फिर कभी धरती की साँस न लेनी पड़े, और वे कभी फिर धरती की गंध से दूषित न हों। पृथ्वी पर, मनुष्य ने मेरे वचनों के लक्ष्य और मूल की टोह ली है, और मेरे कर्मों को देखा है, फिर भी कभी किसी ने वास्तव में मेरे वचनों के मूल को नहीं जाना है, और किसी ने भी, कभी भी, वास्तव में मेरे कर्मों की चमत्कारिकता को नहीं देखा है। ऐसा यह केवल आज ही हुआ है कि मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच आया हूँ और अपने वचन कहे हैं, कि मनुष्य को मेरे बारे में ज्ञान कम है, वो अपने विचारों में से "मेरे" स्थान को हटा रहे हैं, और उसके बजाय अपनी चेतना में व्यावहारिक परमेश्वर के लिए स्थान बना रहे हैं। मनुष्य की अपनी धारणाएँ हैं और वह उत्सुकता से भरा है; परमेश्वर को कौन नहीं देखना चाहेगा? कौन परमेश्वर से नहीं मिलना चाहेगा? फिर भी केवल एक चीज़ जो मनुष्य के हृदय में एक निश्चित स्थान रखती है, वह परमेश्वर है जिसके बारे में मनुष्य को लगता है कि वह अस्पष्ट और अमूर्त है। यदि मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से न बताया होता तो कौन इसे जान पाता? कौन सचमुच, यकीन के साथ और लेशमात्र भी शंका के बगैर, विश्वास करता कि वाकई मेरा अस्तित्व भी है? मनुष्य के हृदय में "मैं" और असलियत के "मैं" के बीच बहुत बड़ा अंतर है, और उनके बीच तुलना करने में कोई भी सक्षम नहीं है। यदि मैं देहधारी न होता, तो मनुष्य ने मुझे कभी भी न जाना होता, और यदि उसने मुझे जान भी लिया होता, तो क्या इस प्रकार का ज्ञान अभी भी एक धारणा न होता? हर दिन मैं लोगों के निर्बाध प्रवाह के बीच चलता हूँ, और हर दिन मैं हर व्यक्ति के भीतर कार्य करता हूँ। जब मनुष्य मुझे वास्तव में देख लेगा, तो वह मुझे मेरे वचनों में जान पाएगा, और वह उन उपायों को समझ पाएगा जिसके माध्यम से मैं बोलता हूँ, साथ ही वह मेरे इरादे भी समझ जाएगा।

जब राज्य औपचारिक तौर पर पृथ्वी पर आता है, तो सभी चीजों में वह कौन-सी चीज़ है, जो शांत नहीं होती? सभी लोगों में वह कौन है, जो भयभीत नहीं होता? मैं संपूर्ण ब्रह्मांड में हर जगह चलता हूँ, और हर चीज़ व्यक्तिगत रूप से मैं ही व्यवस्थित करता हूँ। इस समय, कौन नहीं जानता कि मेरे कार्य अद्भुत हैं? मेरे हाथ सभी चीज़ों को थामते हैं, फिर भी मैं सभी चीज़ों से ऊपर हूँ। क्या आज मेरा देहधारण और मनुष्यों के बीच मेरी व्यक्तिगत उपस्थिति मेरी विनम्रता और गोपनीयता का सही अर्थ नहीं है? बाहरी तौर पर, बहुत-से लोग नेक कहकर मेरी सराहना करते हैं, और सुंदर कहकर मेरी प्रशंसा करते हैं, किन्तु वास्तव में मुझे जानता कौन है? आज, मैं क्यों कहता हूँ कि तुम लोग मुझे जानो? क्या मेरा लक्ष्य बड़े लाल अजगर को शर्मिंदा करना नहीं है? मैं मनुष्य को मेरी प्रशंसा करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहता, बल्कि चाहता हूँ कि वह मुझे जाने, जिसके ज़रिए वह मुझे प्रेम करने लगेगा, और इस तरह मेरी प्रशंसा करेगा। ऐसी प्रशंसा नाम के अनुरूप सार्थक होती है, और निरर्थक बात नहीं होती; केवल इस प्रकार की प्रशंसा ही मेरे सिंहासन तक पहुँच सकती है और आसमान में ऊँची उड़ान भर सकती है। क्योंकि मनुष्य को शैतान द्वारा प्रलोभित और भ्रष्ट किया गया है, क्योंकि उस पर धारणाओं और सोच ने क़ब्ज़ा कर लिया है, इसलिए व्यक्तिगत तौर पर संपूर्ण मानवजाति को जीतने, मनुष्य की सभी धारणाओं को उजागर करने, और मनुष्य की सोच की धज्जियां उड़ाने के उद्देश्य से मैं देहधारी बना हूँ। परिणामस्वरूप, मनुष्य मेरे सामने अब और आडंबर नहीं करता, तथा अपनी धारणाओं के ज़रिए मेरी सेवा नहीं करता, और इस प्रकार मनुष्य की धारणाओं में "मैं" पूरी तरह छितरा जाता है। जब राज्य आता है, तो मैं सबसे पहले इस चरण का कार्य आरम्भ करता हूँ, और मैं ऐसा अपने लोगों के बीच करता हूँ। मेरे लोग जो बड़े लाल अजगर के देश में पैदा हुए हैं, निश्चित रूप से तुम लोगों के भीतर बड़े लाल अजगर के ज़हर का थोड़ा-सा या अंश-मात्र भी नहीं है। इस प्रकार, मेरे कार्य का यह चरण मुख्य रूप से तुम लोगों पर केंद्रित है, और चीन में मेरे देहधारण की महत्ता का यह एक पहलू है। अधिकांश लोग मेरे बोले गए वचनों के एक अंश को भी समझने में असमर्थ हैं, और जब वे समझते भी हैं, तो उनकी समझ धुँधली और उलझी हुई होती है। यह उस विधि में एक अहम मोड़ है जिसके द्वारा मैं बोलता हूँ। यदि सभी लोग मेरे वचनों को पढ़ने में समर्थ होते और उनके अर्थ को समझ पाते, तो मनुष्यों में से किसे बचाया जा सकता था, और अधोलोक में नहीं डाला जा सकता था? जब मनुष्य मुझे जान लेगा और मेरी आज्ञा का पालन करेगा तभी मैं आराम करूँगा, और वही वह समय होगा जब मनुष्य मेरे वचनों का अर्थ समझने में समर्थ हो पाएगा। आज, तुम लोगों का आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है—यह लगभग दयनीय रूप से छोटा है, यहाँ तक कि यह उन्नत किए जाने योग्य भी नहीं है—मेरे बारे में तुम लोगों के ज्ञान को लेकर तो कहना ही क्या।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 11' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 61

जब पूर्व से बिजली चमकती है, जो कि निश्चित रूप से वो क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जब बिजली चमकती है, तो संपूर्ण नभमण्डल रोशन हो उठता है, और सभी तारों का रूपान्तरण हो जाता है। मानो पूरी मानवजाति को निपटा दिया जा चुका हो। पूर्व से आने वाले इस प्रकाश की रोशनी में, समस्त मानवजाति अपने मूल स्वरूप में प्रकट हो जाती है, उनकी आँखें चुँधिया जाती हैं, उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करें और यह तो वे और भी नहीं समझ पाते कि अपने कुरूप स्वरूप को कैसे छिपाएँ। वे उन पशुओं की तरह भी हैं जो मेरे प्रकाश से दूर भागते हैं और पहाड़ी गुफाओं में शरण लेते हैं—फिर भी, उनमें से एक को भी मेरे प्रकाश में से मिटाया नहीं जा सकता। सभी मनुष्य भौचक्के हैं, सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन का आनन्द मनाते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोसते हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना असंभव है; आत्म-ताड़ना के आँसुओं की नदियाँ बन जाती हैं और वे व्यापक जल प्रवाह में बह जाते हैं और फिर पल भर में ही उनका नामो-निशान मिट जाता है। एक बार फिर, मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जाग्रत कर रहा है और मानवजाति को एक और नई शुरुआत दे रहा है। मेरा हृदय धड़कता है और मेरी धड़कनों की लय का अनुसरण करते हुए, पहाड़ आनन्द से उछलते हैं, समुद्र खुशी से नृत्य करता है और लहरें लय में चट्टानों की दीवारों से टकराती हैं। जो मेरे हृदय में है, उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं सभी अशुद्ध चीज़ों को घूरकर भस्म कर देना चाहता हूँ; मैं चाहता हूँ कि सभी अवज्ञाकारी पुत्र मेरी नज़रों के सामने से ओझल हो जाएँ और आगे से उनका कोई अस्तित्व ही न रहे। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरुआत की है, बल्कि विश्व में एक नए कार्य की शुरुआत भी की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य बन जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य, मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए अस्तित्वहीन हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी होकर लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा में, बड़ा लाल अजगर मेरी योजना में रुकावट डालने का हर हथकंडा आज़मा चुका है, लेकिन क्या मैं उसकी छलपूर्ण कार्यनीतियों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या मैं उसकी धमकियों से डरकर आत्मविश्वास खो सकता हूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी एक भी ऐसा प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैंने अपनी मुट्ठी में न रखा हो; बड़े लाल अजगर के बारे में यह बात और भी सत्य है, क्या वह मेरे लिए एक विषमता की तरह है? क्या वह ऐसी चीज़ नहीं है जिसे मैं अपने हाथों अपने हिसाब से चलाता हूँ?

मानव जगत में मेरे देहधारण के दौरान मानवजाति मेरे मार्गदर्शन में अनजाने में इस दिन तक आ पहुँची है, और अनजाने में मुझे जान गयी है। लेकिन, जहाँ तक इसकी बात है कि जो मार्ग सामने है उस पर कैसे चला जाए, तो किसी को कोई आभास नहीं है, कोई नहीं जानता है, और किसी के पास इसका कोई सुराग तो और भी नहीं है कि वह मार्ग उन्हें किस दिशा में ले जाएगा? सर्वशक्तिमान की निगरानी में ही कोई भी मार्ग पर अंत तक चल पाएगा; केवल चमकती पूर्वी बिजली के मार्गदर्शन से ही कोई भी मेरे राज्य तक ले जाने वाली दहलीज़ को पार कर पाएगा। इंसानों में कभी ऐसा कोई नहीं हुआ है जिसने मेरा चेहरा देखा हो, जिसने चमकती पूर्वी बिजली को देखा हो; ऐसा कौन हुआ है जिसने मेरे सिंहासन से जारी कथनों को सुना हो? वास्तव में, प्राचीन काल से ही कोई भी मनुष्य सीधे मेरे व्यक्तित्व के सम्पर्क में नहीं आया है; केवल आज जबकि मैं संसार में आ चुका हूँ, तो लोगों के पास मुझे देखने का अवसर है। किन्तु आज भी, लोग मुझे नहीं जानते, ठीक वैसे ही जैसे वे बस मेरे चेहरे को देखते हैं और केवल मेरी आवाज़ सुनते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि मेरे कहने का क्या अर्थ है। सभी मनुष्य ऐसे ही हैं। मेरे लोगों में से एक होने के नाते, जब तुम लोग मेरा चेहरा देखते हो, तो क्या तुम लोग बहुत ज़्यादा गर्व महसूस नहीं करते? और क्या तुम लोग बेहद शर्मिन्दगी महसूस नहीं करते, क्योंकि तुम लोग मुझे नहीं जानते? मैं इंसानों के बीच चलता-फिरता हूँ, उन्हीं के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैं देह बन गया हूँ और मानव जगत में आ गया हूँ। मेरा उद्देश्य मात्र इतना नहीं है कि इंसान मेरे देह को देख पाए; अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इंसान मुझे जान सके। इसके अलावा, मैं अपने देहधारण के माध्यम से मानवजाति को उसके पापों का आरोपी सिद्ध करूँगा; मैं अपने देहधारण के माध्यम से उस बड़े लाल अजगर को परास्त करूँगा और उसके अड्डे को नष्ट कर दूँगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 12' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 62

पूरे ब्रह्माण्ड में लोग मेरे दिन के आगमन का उत्सव मनाते हैं, और स्वर्गदूत मेरे लोगों के बीच घूमते-फिरते हैं। जब शैतान परेशानियाँ पैदा करता है, तो स्वर्गदूत, स्वर्ग में अपनी सेवाओं की वजह से, हमेशा मेरे लोगों की सहायता करते हैं। वे मानवीय कमज़ोरियों के कारण शैतान के हाथों धोखा नहीं खाते, बल्कि अंधकार की शक्तियों के आक्रमण की वजह से कोहरे में लिपटे इंसानी जीवन का कहीं ज़्यादा अनुभव प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। मेरे सभी लोग मेरे नाम को समर्पित होते हैं, और कभी कोई खुलकर मेरा विरोध नहीं करता। स्वर्गदूतों के परिश्रम की वजह से, इंसान मेरे नाम को स्वीकार करता है और सभी मेरे कार्य के प्रवाह में आ जाते हैं। संसार का पतन हो रहा है! बेबीलोन गतिहीनता की स्थिति में है! ओह, धार्मिक संसार! धरती पर मेरे सामर्थ्य से यह कैसे नष्ट न होता? आज भी किसकी हिम्मत है कि मेरी अवज्ञा या मेरा विरोध करे? धर्मशास्त्री? धर्म का हर ठेकेदार? पृथ्वी के शासक और अधिकारी? स्वर्गदूत? कौन मेरे शरीर की पूर्णता और विपुलता का उत्सव नहीं मनाता? कौन है जो अनवरतमेरी स्तुति नहीं करता, कौन है जो शाश्वत रूप से प्रसन्न नहीं है? मैं बड़े लाल अजगर की माँद के देश में रहता हूँ, फिर भी मैं इस वजह से डर कर काँपता या भागता नहीं हूँ, क्योंकि उसके लोगों ने पहले ही उससे घृणा करनी शुरू कर दी है। किसी भी चीज़ ने कभी भी अजगर के सामने उसकी खातिर अपने "कर्तव्य" का निर्वहन नहीं किया है; बल्कि, सभी चीज़ें जैसा उचित समझती हैं, करती हैं, और हर कोई अपने रास्ते चला जाता है। पृथ्वी के राष्ट्रों का विनाश कैसे नहीं होगा? पृथ्वी के राष्ट्रों का पतन कैसे नहीं होगा? मेरे लोग आनंदित कैसे नहीं होंगे? वे खुशी के गीत कैसे न गाएँगे? क्या यह मनुष्य का कार्य है? क्या यह इंसानी हाथों का कृत्य है? मैंने इंसान को उसके अस्तित्व का मूल दिया है और उसे भौतिक वस्तुएँ प्रदान की हैं, फिर भी वह अपनी वर्तमान परिस्थितियों से असंतुष्ट होकर मेरे राज्य में प्रवेश करना चाहता है। लेकिन वह इतनी आसानी से, बिना कोई कीमत चुकाए, और निःस्वार्थ भक्ति अर्पित करने की इच्छा न रखते हुए मेरे राज्य में प्रवेश कैसे कर सकता है? इंसान से कुछ वसूलने के बजाए, मैं उससे अपेक्षाएँ करता हूँ, ताकि पृथ्वी पर मेरा राज्य महिमा से भर जाए। मैं इंसान को वर्तमान युग में लेकर आया हूँ जिससे वह इस स्थिति में जी रहा है, और मेरे प्रकाश के मार्गदर्शन में रह रहा है। यदि ऐसा न हुआ होता, तो पृथ्वी के लोगों में ऐसा कौन है जो अपने भविष्य के बारे में जान पाता? कौन मेरी इच्छा को समझ पाता? मैं अपने प्रावधान मनुष्य से की गई अपेक्षाओं से जोड़ देता हूँ; क्या यह प्रकृति के नियमों के अनुसार नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 22' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 63

राज्य में, सृष्टि की असंख्य चीज़ें पुनर्जीवित होना और अपनी जीवन शक्ति फिर से प्राप्त करना आरम्भ करती हैं। पृथ्वी की अवस्था में परिवर्तनों के कारण, एक तथा दूसरी भूमि के बीच सीमाएँ भी खिसकने लगती हैं। मैं भविष्यवाणी कर चुका हूँ कि जब ज़मीन को ज़मीन से अलग किया जाता है, और जब ज़मीन ज़मीन से जुड़ती है, यही वह समय होगा जब मैं सारे राष्ट्रों के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। इस समय, मैं सारी सृष्टि को फिर नया करूँगा और समस्त ब्रह्माण्ड को पुनर्विभाजित करूँगा, इस प्रकार पूरे ब्रह्माण्ड को व्यवस्थित करूँगा, और पुराने को नए में रूपान्तरित कर दूँगा—यह मेरी योजना है और ये मेरे कार्य हैं। जब संसार के सभी राष्ट्र और लोग मेरे सिंहासन के सामने लौटेंगे, तब मैं स्वर्ग का सारी वदान्यता लेकर इसे मानव संसार को सौंप दूँगा, जिससे, मेरी बदौलत, वह संसार बेजोड़ वदान्यता से लबालब भर जाएगा। किन्तु जब तक पुराने संसार का अस्तित्व बना रहता है, मैं अपना प्रचण्ड रोष इसके राष्ट्रों के ऊपर पूरी ज़ोर से बरसाऊंगा, समूचे ब्रह्माण्ड में खुलेआम अपनी प्रशासनिक आज्ञाएँ लागू करूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करेगा, उनको ताड़ना दूँगा:

जैसे ही मैं बोलने के लिए ब्रह्माण्ड की तरफ अपना चेहरा घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ सुनती है, और उसके उपरांत उन सभी कार्यों को देखती है जिन्हें मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध खड़े होते हैं, अर्थात् जो मनुष्य के कर्मों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन आएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और, मेरी बदौलत, सूर्य और चन्द्रमा नये हो जाएँगे—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था और पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। ब्रह्माण्ड के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से बाँटा जाएगा और उनका स्थान मेरा राज्य लेगा, जिससे पृथ्वी पर विद्यमान राष्ट्र हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राज्य बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ब्रह्माण्ड के भीतर मनुष्यों में से उन सभी का, जो शैतान से संबंध रखते हैं, सर्वनाश कर दिया जाएगा, और वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें मेरी जलती हुई आग के द्वारा धराशायी कर दिया जायेगा—अर्थात उनको छोड़कर जो अभी धारा के अन्तर्गत हैं, शेष सभी को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत-से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीते जाने के उपरांत, भिन्न-भिन्न अंशों में, मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। सभी लोगों को उनकी किस्म के अनुसार अलग-अलग किया जाएगा, और वे अपने-अपने कार्यों के अनुरूप ताड़नाएँ प्राप्त करेंगे। वे सब जो मेरे विरुद्ध खड़े हुए हैं, नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है, जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कर्मों में मुझे शामिल नहीं किया है, उन्होंने जिस तरह अपने आपको दोषमुक्त किया है, उसके कारण वे पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर अस्तित्व में बने रहेंगे। मैं अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, और अपनी वाणी से, पृथ्वी पर ज़ोर-ज़ोर से और ऊंचे तथा स्पष्ट स्वर में, अपने महा कार्य के पूरे होने की उद्घोषणा करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे।

जैसे-जैसे मेरी आवाज़ की तीव्रता गहरी होती जाती है, मैं ब्रह्माण्ड की दशा का भी अवलोकन करता हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से, सृष्टि की असंख्य चीज़ें बिल्कुल नई बना दी जाती हैं। स्वर्ग बदलता है, और पृथ्वी भी बदलती है। मानवता अपने मूल रूप में उजागर होती है और, धीरे-धीरे, प्रत्येक व्यक्ति को उसके प्रकार के अनुसार पृथक कर दिया जाता है और वह एकाएक अपने परिवारों के आलिंगन में वापस जाने का अपना रास्ता खोज लेता है। इससे मुझे अत्यधिक प्रसन्नता होगी। मैं व्यवधान से मुक्त हूँ, और, अलक्षित रूप से, मेरा महा कार्य संपन्न होता है, और सृष्टि की सभी असंख्य चीज़ें रूपान्तरित हो गई हैं। जब मैंने संसार की सृष्टि की थी, मैंने सभी चीज़ों को उनकी किस्म के अनुसार ढाला था, रूपाकृतियों वाली सभी चीज़ों को उनकी किस्म के अनुसार एक साथ रखा था। मेरी प्रबन्धन योजना का अंत ज्यों-ज्यों नज़दीक आएगा, मैं सृष्टि की पूर्व दशा बहाल कर दूँगा, मैं प्रत्येक चीज़ को पूर्णतः बदलते हुए हर चीज़ को उसी प्रकार बहाल कर दूँगा जैसी वह मूलतः थी, जिससे हर चीज़ मेरी योजना के आलिंगन में लौट आएगी। समय आ चुका है! मेरी योजना का अंतिम चरण संपन्न होने वाला है। आह, पुराना अस्वच्छ संसार! तू पक्का मेरे वचनों के अधीन आएगा! तू पक्का मेरी योजना के द्वारा अस्तित्वहीन हो जाएगा! आह, सृष्टि की अनगिनत चीज़ो! तुम सब मेरे वचनों के भीतर नया जीवन प्राप्त करोगी—तुम्हारे पास तुम्हारा सार्वभौम प्रभु होगा! आह, शुद्ध और निष्कलंक नये संसार! तू पक्का मेरी महिमा के भीतर पुनर्जीवित होगा! आह, सिय्योन पर्वत! अब और मौन मत रह। मैं विजयोल्लास के साथ लौट आया हूँ! सृष्टि के बीच से, मैं समूची पृथ्वी को बारीक़ी से देखता हूँ। पृथ्वी पर मानवजाति ने नए जीवन की शुरुआत की है, और नई आशा जीत ली है। आह, मेरे लोगो! ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम लोग मेरे प्रकाश के भीतर पुनर्जीवित न हो? ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन आनन्द से न उछलो? भूमि उल्लास से चिल्ला रही है, समुद्र उल्लासपूर्ण हंसी से उफन रहे हैं! आह, पुनर्जीवित इस्राएल! मेरे द्वारा पूर्वनियत किए जाने की वजह से तुम कैसे गर्व महसूस नहीं कर सकते हो? कौन रोया है? किसने विलाप किया है? पहले का इस्राएल समाप्त हो गया है, और आज के इस्राएल का उदय हुआ है, जो संसार में सीधा और बहुत ऊँचा खड़ा है, और समस्त मानवता के हृदय में तनकर डटा हुआ है। आज का इस्राएल मेरे लोगों के माध्यम से अस्तित्व का स्रोत निश्चित रूप से प्राप्त करेगा! आह, घृणास्पद मिस्र! निश्चित रूप से तू अब भी मेरे विरुद्ध खड़ा तो नहीं है? तू कैसे मेरी दया का लाभ उठा सकता है और मेरी ताड़ना से बचने की कोशिश कर सकता है? ऐसा कैसे हो सकता है कि तू मेरी ताड़ना के के दायरे में विद्यमान न हो? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरे विरुद्ध खड़े हैं, निश्चय ही अनन्त काल तक मेरे द्वारा ताड़ित किए जाएँगे। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ, मनुष्यों ने जो किया है, उस सबके लिए उन्हें हल्के में नहीं छोडूँगा। मैं पूरी पृथ्वी पर निगरानी रखूँगा, और धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ संसार के पूर्व में प्रकट होते हुए, मानवजाति के असंख्य समुदायों के समक्ष स्वयं को उजागर करूँगा!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 64

जब स्वर्गदूत मेरी स्तुति में संगीत बजाते हैं, यह और कुछ नहीं बल्कि मनुष्य के प्रति मेरी सहानुभूति को उकसा देता है। मेरा हृदय तत्काल उदासी से भर जाता है, और मेरे लिए इस कष्टदायक भावना से स्वयं को मुक्त कर पाना असंभव हो जाता है। मनुष्य से पृथक होने और फिर एक होने के आनंद और विषाद में, हम भावनाओं का आदान-प्रदान नहीं कर पाते हैं। ऊपर स्वर्ग और नीचे पृथ्वी पर अलग-अलग होकर, बिरले ही मैं और मनुष्य मिल सकते हैं। पूर्व की भावनाओं के प्रति ललक से कौन मुक्त हो सकता है? अतीत के बारे में स्मरण करना कौन बंद कर सकता है? अतीत के मनोभावों की निरंतरता की आशा कौन नहीं करेगा? मेरी वापसी के लिए कौन लालायित नहीं होगा? मनुष्य के साथ मेरे पुनर्मिलन की लालसा कौन नहीं करेगा? मेरा हृदय अत्यंत अशांत है, और मनुष्य की आत्मा गहराई तक चिंतामग्न हैं। आत्माओं में एक समान होते हुए भी, हम प्रायः एक साथ नहीं हो सकते हैं, और हम प्रायः एक दूसरे को नहीं देख सकते हैं। इस प्रकार समस्त मानवजाति का जीवन व्यथा से भरा है और प्राणशक्ति से रिक्त है, क्योंकि मनुष्य मेरे लिए हमेशा तड़पा है। यह ऐसा है मानो मानवजाति स्वर्ग से ठोकर मारकर गिराई गई वस्तुएँ हों; वे धरती से मेरी ओर अपनी नज़र उठाते हुए, पृथ्वी से मेरा नाम पुकारते हैं—परंतु वे भूखे और हिंसक भेड़िए के जबड़ों से कैसे बच सकते हैं? वे उसके ख़तरों और प्रलोभनों से स्वयं को कैसे मुक्त कर सकते हैं? मेरी योजना की व्यवस्था के प्रति आज्ञाकारिता के कारण मनुष्य अपना बलिदान कैसे नहीं दे सकते हैं? जब वे ज़ोर-ज़ोर से गिड़गिड़ाते हैं, मैं उनसे अपना मुँह फेर लेता हूँ, मैं उन्हें देखना अब और सहन नहीं कर सकता हूँ; परंतु मैं उनकी अश्रुपूरित पुकार को कैसे नहीं सुन सकता हूँ? मैं मानव संसार के अन्यायों को ठीक करूँगा। मैं समूचे संसार में स्वयं अपने हाथों से अपना कार्य करूँगा, अपने लोगों को पुनः हानि पहुँचाने से शैतान को रोकूँगा, शत्रुओं को पुनः उनका मनचाहा करने से रोकूँगा। अपने सभी शत्रुओं को धराशायी करते हुए और अपने सामने उनसे उनके अपराध स्वीकार करवाते हुए, मैं पृथ्वी पर राजा बन जाऊँगा और अपना सिंहासन वहाँ ले जाऊँगा। अपनी उदासी में, जिसमें क्रोध मिला हुआ है, मैं समूचे ब्रह्माण्ड को सपाट रौंद दूँगा, किसी को नहीं छोड़ूँगा, और अपने शत्रुओं के हृदय में आतंक बरपा दूँगा। मैं समूची पृथ्वी को खण्डहरों में बदल दूँगा, और अपने शत्रुओं को उन खण्डहरों में पटक दूँगा, ताकि उसके बाद मानवजाति को वे अब और भ्रष्ट नहीं कर सकें। मेरी योजना पहले से ही निश्चित है, और किसी को भी, वे चाहे जो हों, इसे बदलना नहीं चाहिए। जब मैं प्रतापी ठाट-बाट से ब्रह्माण्ड के ऊपर घूमूँगा, तब समस्त मानवजाति नई बना दी जाएगी, और सब कुछ पुनः जी उठेगा। मनुष्य अब और नहीं रोएगा, सहायता के लिए मुझे अब और नहीं पुकारेगा। तब मेरा हृदय आनंदित होगा, और लोग उत्सव मनाते हुए मेरे पास लौट आएँगे। समूचा ब्रह्माण्ड, ऊपर से नीचे तक, हर्षोल्लास में झूमेगा ...।

आज, संसार के देशों के बीच, मैं वह कार्य कर रहा हूँ जिसे संपन्न करने का मैंने बीड़ा उठाया है। अपनी योजना के अंतर्गत समस्त कार्य करते हुए, मैं मानवजाति के बीच घूम रहा हूँ, और समस्त मानवजाति मेरी इच्छा के अनुसार नानाविध देशों को विभाजित कर रही है। पृथ्वी पर लोगों ने अपना ध्यान स्वयं अपनी मंज़िल पर जमा लिया है, क्योंकि दिन सचमुच नज़दीक आ रहा है और स्वर्गदूत अपनी तुरहियाँ बजा रहे हैं। अब और देरी नहीं होगी, और इसके तत्काल बाद समस्त सृष्टि हर्षविभोर होकर नृत्य करने लगेगी। मेरा दिन अपनी इच्छा से कौन आगे बढ़ा सकता है? क्या कोई पृथ्वीवासी? या आकाश के तारे? या स्वर्गदूत? जब मैं इस्राएल के लोगों का उद्धार आरंभ करने के लिए कथन कहता हूँ, तब मेरा दिन संपूर्ण मानवजाति पर दबाव बनाता जाता है। प्रत्येक मनुष्य इस्राएल की वापसी से भय खाता है। जब इस्राएल वापस आएगा, वह मेरी महिमा का दिन होगा, और इसलिए यह वह दिन भी होगा जब सब कुछ बदल जाता है और नया हो जाता है। धार्मिक न्याय ज्यों-ज्यों आसन्न रूप से संपूर्ण ब्रह्माण्ड के निकट आता है, सारे मनुष्य कातर और भयभीत हो जाते हैं, क्योंकि मानव संसार में धार्मिकता अनसुनी है। जब धार्मिकता का सूर्य प्रकट होगा, पूर्वदिशा रोशन हो जाएगी, और फिर वह समूचे ब्रह्माण्ड को रोशन कर देगी, प्रत्येक के पास पहुँचेगी। यदि मनुष्य वास्तव में मेरी धार्मिकता को क्रियान्वित कर सकता है, तो किस बात का डर होगा? मेरे सारे लोग मेरे दिन के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं, वे सब मेरे दिन के आने की लालसा करते हैं। वे प्रतीक्षा करते हैं कि मैं संपूर्ण मानवजाति के ऊपर प्रतिफल लाऊँगा और धार्मिकता के सूर्य के रूप में अपनी भूमिका में मानवजाति की मंज़िल संजोऊँगा। मेरा राज्य समस्त ब्रह्माण्ड के ऊपर आकार ग्रहण कर रहा है, और मेरा सिंहासन हज़ारों-लाखों लोगों के हृदय में प्रभुत्व संपन्न होता है। स्वर्गदूतों की सहायता से, मेरी महान उपलब्धि शीघ्र ही फलीभूत होगी। मेरे सभी पुत्र और लोग मेरी वापसी की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं, अपने साथ पुनः एक होने, फिर कभी अलग नहीं होने के लिए मेरी लालसा करते हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि मेरे राज्य के असंख्य जनसाधारण, मेरे उनके साथ होने की वजह से, हर्षोल्लास से भरे उत्सव में एक दूसरे की ओर दौड़ न पड़ें? क्या यह ऐसा पुनर्मिलन हो सकता है जिसके लिए कोई क़ीमत चुकाना आवश्यक नहीं हो? मैं सभी मनुष्यों की नज़रों में सम्मानीय हूँ, मैं सभी के वचनों में उद्घोषित होता हूँ। इतना ही नहीं, जब मैं लौटूँगा, मैं सारी शत्रु शक्तियों को जीत लूँगा। समय आ गया है! मैं अपने कार्य को गति दूँगा, मैं मनुष्यों के बीच राजा के रूप में शासन करूँगा! मैं वापसी की कगार पर हूँ! और मैं प्रस्थान करने ही वाला हूँ! यही है वह जिसकी सब आशा कर रहे हैं, यही है वह जो वे चाहते हैं। मैं संपूर्ण मानवजाति को मेरे दिन का आगमन देखने दूँगा और वे सब आनंदोल्लास से मेरे दिन के आगमन का स्वागत करेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 27' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 65

जिस दिन सभी चीज़ें पुनर्जीवित हुईं, मैं मनुष्यों के बीच आया, और मैंने उनके साथ अद्भुत दिन और रातें बिताई हैं। केवल इस बिंदु पर ही मनुष्य को मेरी सुलभता का थोड़ा-सा एहसास होता है, और जैसे-जैसे मेरे साथ उसकी अंत:क्रिया बढ़ने लगती है, वह मेरी सत्ता और स्वरूप को थोड़ा-सा देखता है—और परिणामस्वरूप, वह मेरे बारे में कुछ ज्ञान प्राप्त करता है। सभी लोगों के बीच, मैं अपना सिर उठाता हूँ और देखता हूँ, और वे सभी मुझे देखते हैं। फिर भी जब संसार पर आपदा आती है, तो वे तुरंत व्याकुल हो जाते हैं, और उनके हृदयों से मेरी छवि ग़ायब हो जाती है; आपदा आने से घबराकर वे मेरे उपदेशों पर कोई ध्यान नहीं देते। मैंने मनुष्यों के बीच बहुत वर्ष बिताए हैं, फिर भी वह हमेशा अनभिज्ञ रहा है, और उसने मुझे कभी नहीं जाना है। आज मैं उसे यह अपने मुँह से बताता हूँ, और सभी लोगों से कहता हूँ कि वे मुझसे कुछ प्राप्त करने के लिए मेरे पास आएँ, पर वे मुझसे अभी भी अपनी दूरी बनाए हुए हैं, और इसलिए वे मुझे नहीं जानते। जब मेरे कदम ब्रह्मांड भर में और पृथ्वी के छोरों तक पड़ेंगे, तब मनुष्य खुद पर चिंतन करना शुरू करेगा, और सभी लोग मेरे पास आएँगे और मेरे सामने दंडवत करेंगे तथा मेरी आराधना करेंगे। यह मेरे महिमा-मंडन का, मेरी वापसी का, और साथ ही मेरे प्रस्थान का भी दिन होगा। अब मैंने पूरी मानवजाति के बीच अपना कार्य आरंभ कर दिया है, और पूरे ब्रह्मांड में अपनी प्रबंधन योजना के अंतिम अंश की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस क्षण से आगे, जो कोई भी सावधान नहीं हैं, वे निर्मम ताड़ना में गोता लगाने के भागी होंगे, और यह किसी भी क्षण हो सकता है। यह इसलिए नहीं है क्योंकि मैं निर्दयी हूँ, बल्कि यह मेरी प्रबंधन योजना का एक चरण है; सभी को मेरी योजना के चरणों के अनुसार आगे बढ़ना होगा, और कोई भी मनुष्य इसे बदल नहीं सकता। जब मैं औपचारिक रूप से अपना कार्य शुरू करता हूँ, तो सभी लोग वैसे ही चलते हैं जैसे मैं चलता हूँ, इस तरह कि समस्त संसार के लोग मेरे साथ कदम मिलाते हुए चलने लगते हैं, संसार भर में "उल्लास" होता है, और मनुष्य को मेरे द्वारा आगे की ओर प्रेरित किया जाता है। परिणामस्वरूप, स्वयं बड़ा लाल अजगर मेरे द्वारा उन्माद और व्याकुलता की स्थिति में डाल दिया जाता है, और वह मेरा कार्य करता है और अनिच्छुक होने के बावजूद अपनी स्वयं की इच्छाओं का अनुसरण करने में समर्थ नहीं होता, और उसके पास मेरे नियंत्रण में समर्पित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। मेरी सभी योजनाओं में बड़ा लाल अजगर मेरी विषमता, मेरा शत्रु, और साथ ही मेरा सेवक भी है; उस हैसियत से मैंने उससे अपनी "अपेक्षाओं" को कभी भी शिथिल नहीं किया है। इसलिए, मेरे देहधारण के काम का अंतिम चरण उसके घराने में पूरा होता है। इस तरह से बड़ा लाल अजगर मेरी उचित तरीके से सेवा करने में अधिक समर्थ है, जिसके माध्यम से मैं उस पर विजय पाऊँगा और अपनी योजना पूरी करूँगा। जब मैं कार्य करता हूँ, तो सभी स्वर्गदूत निर्णायक युद्ध में मेरे साथ हो लेते हैं और अंतिम चरण में मेरी इच्छाएँ पूरी करने का दृढ़ निश्चय करते हैं, ताकि पृथ्वी के लोग मेरे सामने स्वर्गदूतों के समान समर्पण कर दें, और मेरा विरोध करने की इच्छा न करें, और ऐसा कुछ न करें जो मेरे विरुद्ध विद्रोह करता हो। समस्त संसार में ये मेरे कार्य की गतिशीलताएँ हैं।

मनुष्यों के बीच मेरे आगमन का उद्देश्य और महत्व संपूर्ण मानवजाति को बचाना, संपूर्ण मानवजाति को अपने परिवार में वापस लाना, स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से मिलाना, और मनुष्य से स्वर्ग और पृथ्वी के बीच "संकेतों" का संप्रेषण करवाना है, क्योंकि मनुष्य का अंतर्निहित कार्य ऐसा ही है। जब मैंने मानवजाति का सृजन किया था, उस समय मैंने मानवजाति के लिए सभी चीज़ें तैयार की थीं, और बाद में मैंने मानवजाति को अपनी अपेक्षाओं के अनुसार वह संपत्ति प्राप्त करने की अनुमति दी, जो मैंने उसे दी थी। इसलिए मैं कहता हूँ कि यह मेरे मार्गदर्शन के अंतर्गत है कि संपूर्ण मानवजाति आज यहाँ तक पहुँची है। और यह सब मेरी योजना है। संपूर्ण मानवजाति के बीच अनगिनत संख्या में लोग मेरे प्रेम की सुरक्षा में विद्यमान हैं, और अनगिनत संख्या में ही लोग मेरी घृणा की ताड़ना के अधीन रहते हैं। यद्यपि सभी लोग मुझसे प्रार्थना करते हैं, फिर भी वे अपनी वर्तमान परिस्थितियों को बदलने में असमर्थ हैं; एक बार जब वे आशा खो देते हैं, तो वे केवल प्रकृति को अपना काम करने दे सकते हैं और मेरी अवज्ञा करने से रुक सकते हैं, क्योंकि बस इतना ही मनुष्य द्वारा किया जा सकता है। जब मनुष्य के जीवन की स्थिति की बात आती है, तो मनुष्य को अभी भी वास्तविक जीवन को ढूँढ़ना शेष है, उसने अभी भी अन्याय, वीरानी और संसार की दयनीय स्थितियों का हल नहीं निकाला है—और इसलिए, अगर यह आपदा के आगमन के लिए न होता, तो अधिकतर लोग अभी भी प्रकृति माँ को गले से लगाते, और अभी भी अपने आपको "जीवन" के स्वाद में तल्लीन कर देते। क्या यह संसार की सच्चाई नहीं है? क्या यह उस उद्धार की आवाज़ नहीं है, जिसे मैं मनुष्य से कहता हूँ? क्यों मानवजाति में से कभी भी किसी ने मुझसे सच में प्रेम नहीं किया है? क्यों मनुष्य केवल ताड़ना और परीक्षणों के बीच ही मुझसे प्रेम करता है, और कोई भी मेरी सुरक्षा के अधीन मुझसे प्रेम नहीं करता? मैंने कई बार मानवजाति को ताड़ना दी है। वे उस पर एक नज़र डालते हैं, लेकिन फिर वे उसे अनदेखा कर देते हैं, और वे उस समय इसका अध्ययन और मनन नहीं करते, और इसलिए मनुष्य के ऊपर जो कुछ भी आकर पड़ता है, वह है निष्ठुर न्याय। यह मेरे कार्य करने के तरीकों में से केवल एक तरीका है, परंतु यह फिर भी मनुष्य को बदलने और उसे मुझसे प्रेम करवाने के लिए है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 29' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 66

मैं राज्य में शासन करता हूँ, और इतना ही नहीं, मैं पूरे ब्रह्मांड में शासन करता हूँ; मैं राज्य का राजा और ब्रह्मांड का मुखिया दोनों हूँ। अब से मैं उन सभी को इकट्ठा करूँगा, जो चुने हुए नहीं हैं और अन्यजातियों के बीच अपना कार्य आरंभ करूँगा, और मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करूँगा, ताकि मैं सफलतापूर्वक अपने कार्य के अगले चरण की शुरुआत कर सकूँ। अन्यजातियों के बीच अपने कार्य को फैलाने के लिए मैं ताड़ना का उपयोग करूँगा, जिसका अर्थ है कि मैं उन सभी के विरूद्ध बल का उपयोग करूँगा, जो अन्यजातियाँ हैं। स्वाभाविक रूप से, यह कार्य उसी समय किया जाएगा, जिस समय मेरा कार्य चुने हुओं के बीच किया जाएगा। जब मेरे लोग पृथ्वी पर शासन करेंगे और सामर्थ्य का उपयोग करेंगे, तो यही वह दिन भी होगा जब पृथ्वी के सभी लोगों को जीत लिया जाएगा, और, इससे भी बढ़कर, यही वह समय होगा जब मैं विश्राम करूँगा—और केवल तभी मैं उन सबके सामने प्रकट होऊँगा, जिन्हें जीता जा चुका है। मैं पवित्र राज्य के लिए प्रकट होता हूँ, और अपने आपको मलिनता की भूमि से छिपा लेता हूँ। वे सभी, जिन्हें जीता जा चुका है और जो मेरे सामने आज्ञाकारी बन गए हैं, अपनी आँखों से मेरे चेहरे को देखने और अपने कानों से मेरी आवाज़ सुनने में समर्थ हैं। यह उन लोगों के लिए आशीष है, जो अंत के दिनों में पैदा हुए हैं, यह मेरे द्वारा पहले से ही नियत किया गया आशीष है, और यह किसी भी मनुष्य के द्वारा अपरिवर्तनीय है। आज मैं भविष्य के कार्य के वास्ते इस तरीके से कार्य करता हूँ। मेरा समस्त कार्य परस्पर-संबंधित है, इस सबमें एक आह्वान और अनुक्रिया है : कभी भी कोई चरण अचानक नहीं रुका है, और कभी भी किसी भी कदम को किसी भी अन्य कदम से स्वतंत्र रूप से नहीं किया गया है। क्या यह ऐसा नहीं है? क्या अतीत का कार्य आज के कार्य की नींव नहीं है? क्या अतीत के वचन आज के वचनों के अग्रदूत नहीं हैं? क्या अतीत के चरण आज के चरणों के उद्गम नहीं हैं? जब मैं औपचारिक रूप से पुस्तक खोलता हूँ, तो ऐसा तब होता है जब संपूर्ण ब्रह्मांड में लोगों को ताड़ना दी जाती है, जब दुनिया भर के लोगों को परीक्षणों के अधीन किया जाता है, और यह मेरे काम की पराकाष्ठा है; सभी लोग एक प्रकाशरहित भूमि में रहते हैं, और सभी लोग अपने वातावरण द्वारा खड़े किए गए ख़तरे के बीच रहते हैं। दूसरे शब्दों में, यही वह जीवन है, जिसे मनुष्य ने सृष्टि की उत्पत्ति के समय से आज के दिन तक कभी अनुभव नहीं किया है, और युगों-युगों से किसी ने भी इस प्रकार के जीवन का "आनंद" नहीं लिया है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि मैंने वह कार्य किया है, जो पहले कभी नहीं किया गया है। यह मामलों की वास्तविक स्थिति है, और यही आंतरिक अर्थ है। चूँकि मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, चूँकि यह दूर प्रतीत नहीं होता, परंतु यह मनुष्य की आँखों के बिल्कुल सामने ही है, तो परिणामस्वरूप कौन भयभीत नहीं हो सकता? और कौन इसमें आनंदित नहीं हो सकता? बेबिलोन का गंदा शहर अंततः अपने अंत पर आ गया है; मनुष्य फिर से एक बिलकुल नए संसार से मिला है, और स्वर्ग और पृथ्वी परिवर्तित और नवीकृत कर दिए गए हैं।

जब मैं सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने प्रकट होता हूँ, तो आसमान में सफेद बादल घुमड़ने लगते हैं और मुझे घेर लेते हैं। इसी प्रकार, पृथ्वी पर वातावरण को उभारते पृथ्वी के पक्षी भी मेरे लिए आनंद के साथ गाते और नृत्य करते हैं, और इस प्रकार पृथ्वी की सभी चीज़ों के सजीव होने का कारण बनते हैं, ताकि वे अब और "धीरे-धीरे नीचे की ओर न बहें", बल्कि इसके बजाए जीवन-शक्ति से भरे हुए वातावरण के बीच जिएँ। जब मैं बादलों के मध्य होता हूँ, तो मनुष्य मेरे चेहरे और मेरी आँखों को धुँधले रूप में ही देखता है, और उस समय वह थोड़ा भयभीत अनुभव करता है। अतीत में उसने मुझसे संबंधित ऐतिहासिक अभिलेखों को किंवदंतियों में सुना था, जिसके परिणामस्वरूप वह मेरे प्रति केवल आधा विश्वासी है और बाकी आधा संदिग्ध है। वह नहीं जानता कि मैं कहाँ हूँ, या मेरा चेहरा आखिर कितना बड़ा है—वह समुद्र के समान विशाल है या हरे चरागाहों जितना असीम है? कोई इन चीज़ों को नहीं जानता। जब आज मनुष्य मेरा चेहरा बादलों में देखता है, केवल तभी वह महसूस करता है कि किंवदंती में वर्णित मैं वास्तविक हूँ, और इसलिए वह मेरे प्रति थोड़ा अधिक अनुकूल हो जाता है और यह केवल मेरे कर्मों के कारण है कि मेरे लिए उसकी प्रशंसा थोड़ी बढ़ जाती है। परंतु मनुष्य अभी भी मुझे नहीं जानता और वह बादलों में मेरा केवल एक ही अंश देखता है। उसके बाद मैं अपनी बाँहें फैलाता हूँ और उन्हें मनुष्य को दिखाता हूँ। मनुष्य आश्चर्यचकित हो जाता है, और मेरे हाथों मार गिराए जाने से अत्यधिक भयभीत होकर अचानक अपने हाथ अपने मुँह पर रख लेता है, और इस प्रकार वह अपनी प्रशंसा में थोड़ा आदर मिला देता है। मनुष्य इस बात से बेहद डरकर मेरी हर हलचल के ऊपर अपनी आँखें टिकाए रहता है, कि ध्यान न देने पर वह मेरे द्वारा मार न गिराया जाए—फिर भी मनुष्य द्वारा देखे जाने से मैं प्रतिबंधित नहीं होता, और मैं अपने हाथों के कार्यों को करना जारी रखता हूँ। यह केवल उन सभी कर्मों के कारण है, जिन्हें मैं करता हूँ, कि मनुष्य मेरे प्रति कुछ अनुकूल है, और इस कारण मुझसे जुड़ने के लिए धीरे-धीरे मेरे सामने आता है। मैं जब अपनी संपूर्णता में मनुष्य के सामने प्रकट होऊँगा, तो मनुष्य मेरा चेहरा देखेगा, और उसके बाद से मैं मनुष्य से अपने आपको और नहीं छिपाऊँगा या अव्यक्त नहीं करूँगा। संपूर्ण ब्रह्मांड में मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा, और रक्त और माँस से बने सभी प्राणी मेरे सभी कर्मों को देखेंगे। सभी आत्मावान लोग निश्चित ही मेरे परिवार में शांति से रहेंगे, और वे निश्चित रूप से मेरे साथ अद्भुत आशीषों का आनंद उठाएँगे। वे सभी, जिनकी मैं परवाह करता हूँ, निश्चित रूप से ताड़ना से बच जाएँगे, और निश्चित रूप से आत्मा की पीड़ा और देह की यंत्रणा से दूर रहेंगे। मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा और शासन करूँगा और सामर्थ्य का उपयोग करूँगा, ताकि लाशों की दुर्गंध संपूर्ण ब्रह्मांड में अब और न फैले; इसके बजाय मेरी मोहक सुगंध पूरे संसार में फैल जाएगी, क्योंकि मेरा दिन नज़दीक आ रहा है, मनुष्य जाग रहा है, पृथ्वी पर हर चीज़ व्यवस्थित है, और पृथ्वी के बचे रहने के दिन अब और नहीं रहे हैं, क्योंकि मैं पहुँच गया हूँ!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 29' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 67

मैं अपने कृत्‍यों के प्रकटन से आकाश को भर दूँगा, ताकि पृथ्वी का सब कुछ मेरी सत्ता के सामने बिछ जाए, और इस तरह मैं "वैश्विक एकता" की योजना को कार्यान्वित करने की अपनी इस अभिलाषा को फलीभूत करूँगा, ताकि मानवजाति को पृथ्वी पर और अधिक "भटकना" न पड़े, बल्कि वह अविलम्ब एक उपयुक्त मंज़िल पा ले। मैं हर तरह से मानवजाति के हित में सोचता हूँ, इस तरह कि समस्त मानवजाति शीघ्र ही सुख-शांति से परिपूर्ण भूमि में रहने लगे, ताकि उसकी जिंदगी के दिन अब और दुखमय और वीरान न हों, और पृथ्वी पर मेरी योजना व्यर्थ न जाए। चूँकि पृथ्‍वी पर मनुष्य मौजूद है, इसलिए मैं वहाँ अपने राष्‍ट्र का निर्माण करूँगा, क्योंकि मेरी महिमा की अभिव्यक्ति का एक हिस्सा पृथ्वी पर है। ऊपर स्वर्ग में, मैं अपने शहर को व्‍यवस्थित रूप दूँगा और इस तरह, ऊपर और नीचे दोनों जगह सब कुछ नया बना दूँगा। स्वर्ग से ऊपर और नीचे दोनों ओर जो कुछ भी अस्तित्व में है, मैं उन सभी को संगठित कर दूँगा, ताकि जो कुछ स्वर्ग में है उससे पृथ्‍वी की सारी चीज़ें एकीकृत हो जाएँ। यह मेरी योजना है, यही मैं अंतिम युग में करूँगा—मेरे कार्य के इस हिस्से में कोई भी हस्तक्षेप न करे! अन्य-जाति राष्‍ट्रों में अपने कार्य का विस्तार करना पृथ्वी पर मेरे कार्य का अंतिम भाग है। जो कार्य मैं करूँगा, उसकी थाह लेने में कोई भी समर्थ नहीं है, और इसलिए लोग पूरी तरह से संभ्रमित हैं। चूँकि मैं पृथ्वी पर अपने काम में बहुत अधिक व्‍यस्‍त हूँ, इसलिए लोग इस अवसर का लाभ उठाकर "लापरवाही बरतने लगते हैं।" उन्हें अनियन्त्रित होने से रोकने के लिए, मैंने सबसे पहले उन्हें अपनी ताड़ना के अधीन आग की झील का अनुशासन भुगतने के लिए रखा है। यह मेरे कार्य का एक चरण है, और मैं अपने इस कार्य को पूरा करने के लिए आग की झील की शक्ति का उपयोग करूँगा, अन्यथा मेरे लिए अपने कार्य को पूरा करना असंभव होगा। मैं सारे ब्रह्मांड के मनुष्यों से अपने सिंहासन के समक्ष समर्पण करवाऊँगा, अपने न्याय के अनुसार उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करूँगा, इन श्रेणियों के अनुसार उन्हें वर्गीकृत करूँगा, और फिर उन्हें उनके परिवारों में बाँट दूँगा, जिससे पूरी मानवजाति मेरी अवज्ञा करना बंद कर देगी, बल्कि मेरे द्वारा नामांकित की गई श्रेणियों के अनुसार एक साफ़-सुथरी और अनुशासित व्यवस्था में आ जाएगी—किसी को भी यूँ ही इधर-उधर भटकने नहीं दिया जाएगा! पूरे ब्रह्मांड में, मैंने नया कार्य किया है; पूरे ब्रह्मांड में, संपूर्ण मानवजाति मेरे अचानक प्रकट होने से घबराई हुई और अचंभित है, मेरी स्पष्ट उपस्थिति के सामने उनकी सीमाएँ इस तरह खंडित हो गई हैं जैसी कि पहले कभी नहीं हुई थीं। क्या आज बिल्कुल ऐसा ही नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 43' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 68

मैं अपने कार्य को अन्य जाति देशों में फैला रहा हूँ। मेरी महिमा पूरे ब्रह्मांड में जगमगा रही है; मेरी इच्छा सितारे-सितारे-बिंदु-बिंदु लोगों में सन्निहित है, सबकी कमान मेरे हाथों में है और सब मेरे द्वारा सौंपे गए कार्य को करने में लगे हुए हैं। इस समय से, मैं सभी मनुष्यों को दूसरी दुनिया में लाते हुए एक नए युग में प्रवेश कर गया हूँ। जब मैं अपने "गृह-देश" में वापस लौटा, तो मैंने अपनी मूल योजना के कार्य का एक अन्य भाग भी शुरू कर दिया, ताकि मनुष्य मुझे और गहराई से जान सके। मैं ब्रह्मांड को उसके संपूर्ण रूप में देखता हूँ और पाता हूँ कि[क] यह मेरे कार्य के लिए एक उचित अवसर है, इसलिए मैं मनुष्य पर अपना नया कार्य करते हुए जल्दी से इधर से उधर आ-जा रहा हूँ। आखिरकार, यह एक नया युग है, और मैं और ज़्यादा नए लोगों को नए युग में लेकर जाने के लिए और जिन्हें मैं हटाऊँगा, उनमें से और ज़्यादा लोगों को एक तरफ करने के लिए, नए कार्य को लेकर आया हूँ। बड़े लाल अजगर के देश में मैंने कार्य का एक ऐसा चरण पूरा कर लिया है, जिसकी थाह मनुष्य नहीं पा सकते, इसके कारण वे हवा में डोलने लगते हैं, जिसके बाद कई लोग हवा के वेग में चुपचाप बह जाते हैं। सचमुच, यह एक ऐसी "खलिहान" है जिसे मैं साफ़ करने वाला हूँ, यही मेरी लालसा है और यही मेरी योजना है। क्योंकि जब मैं कार्य कर रहा होता हूँ, तो कई दुष्ट लोग चोरी-छिपे आ घुसे हैं, लेकिन मुझे इन्हें खदेड़ कर निकालने की कोई जल्दी नहीं है। इसके बजाय, सही समय आने पर मैं उन्हें छिन्न-भिन्न कर दूँगा। केवल इसके बाद ही मैं जीवन का सोता बनूँगा, और उन लोगों को जो मुझे सच में प्रेम करते हैं, मुझसे अंजीर के पेड़ का फल और कुमुदिनी की सुगंध प्राप्त करने दूँगा। उस देश में जहाँ शैतान का डेरा है, जो गर्दो-गुबार का देश है, वहाँ अब शुद्ध सोना नहीं रहा, सिर्फ रेत ही रेत है, और इसलिए इन हालत को देखते हुए, मैं कार्य का ऐसा चरण पूरा करता हूँ। तुम्हें यह पता होना चाहिए कि मैं जो प्राप्त करता हूँ वह रेत नहीं बल्कि शुद्ध, परिष्कृत सोना है। दुष्ट लोग मेरे घर में कैसे रह सकते हैं? मैं लोमड़ियों को अपने स्वर्ग में परजीवी कैसे बनने दे सकता हूँ। मैं इन चीज़ों को खदेड़ने के लिए हर संभव तरीका अपनाता हूँ। मेरी इच्छा प्रकट होने से पहले कोई भी यह नहीं जानता कि मैं क्या करने वाला हूँ। इस अवसर का लाभ उठाते हुए, मैं उन दुष्टों को दूर खदेड़ देता हूँ, और वे मेरी उपस्थिति को छोड़कर जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। मैं दुष्टों के साथ यही करता हूँ, लेकिन फिर भी उनके लिए एक ऐसा दिन होगा जब वे मेरे लिए सेवा कर पाएंगे। मनुष्यों की आशीष पाने की इच्छा अत्यंत प्रबल है; इसलिए मैं उनकी ओर घूम जाता हूँ और अन्यजातियों को अपना महिमामयी मुखमंडल दिखाता हूँ, ताकि सभी मनुष्य अपनी दुनिया में जी सकें और अपने आपको आंक सकें, इस दौरान मैं वे वचन कहता रहता हूँ जो मुझे कहने चाहिए, और मनुष्यों को वह सब कुछ देता रहता हूँ जिसकी उन्हें आवश्यकता है। जब तक मनुष्यों को होश आएगा, उससे बहुत पहले ही मैं अपने कार्य को फैला चुका हूँगा। उसके बाद मैं मनुष्यों के सामने अपनी इच्छा व्यक्त करूँगा और मनुष्यों पर अपने कार्य का दूसरा भाग शुरू करूँगा, मैं सभी लोगों को करीब से अपना अनुसरण करने दूँगा ताकि वे मेरे कार्य के साथ तालमेल बिठा सकें। मैं मनुष्यों को उनकी क्षमता के अनुसार वो सब कुछ करने दूँगा, जिससे वे मेरे साथ मिलकर उस कार्य को कर सकें जो मुझे अवश्य करना है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ गूँजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएँगे' से उद्धृत

फुटनोट :

क. मूल पाठ में, "पाता हूँ कि" यह वाक्यांश नहीं है।

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 69

किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि वह मेरी महिमा को देख पाएगा, और मैं उन्हें मजबूर नहीं करता, बल्कि मैं मानवजाति के बीच से अपनी महिमा को हटा लूँगा और इसे दूसरी दुनिया में ले जाऊँगा। जब मनुष्य एक बार फिर पश्चाताप करेगा, तब मैं अपनी महिमा को ज़्यादा से ज़्यादा आस्थावान लोगों को दिखाऊंगा। यही वह सिद्धांत है जिसके अनुसार मैं कार्य करता हूँ। क्योंकि एक समय ऐसा आएगा जब मेरी महिमा कनान को छोड़ देगी, और ऐसा समय भी आएगा जब मेरी महिमा चुने हुए लोगों को भी छोड़ देगी। और फिर, एक समय ऐसा आएगा जब मेरी महिमा पूरी पृथ्वी को छोड़ देगी, जिससे यह धुंधली पड़कर अंधकार में डूब जाएगी। कनान की धरती भी सूरज की रोशनी नहीं देखेगी; सभी लोग अपनी आस्था खो देंगे, लेकिन कोई भी कनान की धरती की सुगंध को छोडना सहन नहीं कर पाएगा। जब मैं नये स्वर्ग और पृथ्वी में प्रवेश करूँगा, सिर्फ तभी मैं अपनी महिमा का दूसरा भाग लेकर इसे सबसे पहले कनान की धरती पर प्रकट करूँगा, जिससे रात के गहरे अंधकार में डूबी पूरी पृथ्वी पर रोशनी की चमक फ़ैल जाएगी और पूरी पृथ्वी प्रकाशमान हो जाएगी। इस प्रकाश की ऊर्जा से पूरी पृथ्वी के मनुष्यों को शक्ति प्राप्त करने दो, जिससे मेरी महिमा बढ़ सके और हर देश में नई होकर प्रकट हो सके। पूरी मानवता को यह एहसास होने दो कि मैं बहुत पहले मानव की दुनिया में आ चुका हूँ और बहुत पहले अपनी महिमा को इस्राएल से पूरब को ला चुका हूँ; क्योंकि मेरी महिमा पूरब से चमकती है, जहाँ अनुग्रह के युग से इसे आज के दिन में लाया गया है। लेकिन यह इस्राएल ही था जहाँ से मैं गया था और वहीं से मैं पूरब में पहुँचा था। जब पूरब का प्रकाश धीरे-धीरे सफ़ेद रोशनी में तब्दील होगा, तभी पूरी धरती का अंधकार प्रकाश में बदलना शुरू हो जाएगा, और तभी मनुष्य को यह पता चलेगा कि मैं बहुत पहले इस्राएल से जा चुका हूँ और नए सिरे से पूरब में उभर रहा हूँ। एक बार इस्राएल में अवतरित होने और फिर यहाँ से चले जाने के बाद, मैं दुबारा इस्राएल में पैदा नहीं हो सकता, क्योंकि मेरा कार्य पूरे ब्रह्मांड की अगुवाई करता है। यही नहीं, रोशनी सीधे पूरब से पश्चिम की ओर चमकती है। यही कारण है कि मैं पूरब में अवतरित हुआ हूँ और कनान को पूरब के लोगों तक लाया हूँ। मैं पूरी पृथ्वी के लोगों को कनान की धरती पर लाना चाहता हूँ, और इसलिए मैं कनान की धरती से लगातार अपने कथनों को प्रकट कर रहा हूँ, ताकि पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकूं। इस समय, कनान के अलावा पूरी पृथ्वी पर अंधकार छाया है, सभी लोग भूख और ठंड के कारण संकट में हैं। मैंने अपनी महिमा इस्राएल को दी और फिर उसे हटा लिया, इसके बाद मैं इस्राएलियों को, और पूरी मानवता को पूरब में ले आया। मैं उन सभी को प्रकाश में ले आया हूँ ताकि वे इसके साथ फिर से मिल जाएं और इससे जुड़े रह सकें, और उन्हें इसकी खोज न करनी पड़े। जो प्रकाश की खोज कर रहे हैं, उन्हें मैं फिर से प्रकाश देखने दूँगा और उस महिमा को देखने दूँगा जो मेरे पास इस्राएल में थी; मैं उन्हें यह देखने दूँगा कि मैं बहुत पहले एक सफ़ेद बादल पर सवार होकर मनुष्यों के बीच आ चुका हूँ, मैं उन्हें असंख्य सफ़ेद बादलों और प्रचुर मात्रा में फलों के गुच्छों को देखने दूँगा। यही नहीं, मैं उन्हें इस्राएल के यहोवा परमेश्वर को भी देखने दूँगा। मैं उन्हें यहूदियों के गुरु, बहुप्रतीक्षित मसीहा को देखने दूँगा, और अपने पूर्ण प्रकटन को देखने दूँगा, जिन्हें हर युग के राजाओं द्वारा सताया गया है। मैं संपूर्ण ब्रह्मांड पर कार्य करूँगा और मैं महान कार्य करूँगा, जो अंत के दिनों में लोगों के सामने मेरी पूरी महिमा और मेरे सभी कर्मों को प्रकट कर देगा। मैं अपना महिमामयी मुखमंडल अपने संपूर्ण रूप में उन लोगों को दिखाऊँगा, जिन्होंने कई वर्षों से मेरी प्रतीक्षा की है, जो मुझे सफ़ेद बादल पर सवार होकर आते हुए देखने के लिए लालायित रहे हैं। मैं अपना यह रूप इस्राएल को दिखाऊँगा जिसने मेरे एक बार फिर प्रकट होने की लालसा की है। मैं उस पूरी मनष्यजाति को अपना यह रूप दिखाऊँगा जो मुझे कष्ट पहुँचाते हैं, ताकि सभी लोग यह जान सकें कि मैंने बहुत पहले ही अपनी महिमा को हटा लिया है और इसे पूरब में ले आया हूँ, जिस कारण यह अब यहूदिया में नहीं रही। क्योंकि अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं!

मैं पूरे ब्रह्मांड में अपना कार्य कर रहा हूँ, और पूरब से असंख्य गर्जनाएं निरंतर गूँज रही हैं, जो सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरी वाणी है जो सभी मनुष्यों को वर्तमान में लाई है। मैं अपनी वाणी से सभी मनुष्यों को जीत लूँगा, उन्हें इस धारा में बहाऊँगा और अपने सामने समर्पण करवाऊँगा, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा को वापस लेकर इसे नये सिरे से पूरब में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा को देखने के लिए लालायित नहीं है? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतज़ार नहीं कर रहा है? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी सुंदरता को देखने के लिए तरस नहीं रहा है? कौन प्रकाश में नहीं आना चाहता? कौन कनान की समृद्धि को नहीं देखना चाहता? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन महान सर्वशक्तिमान की आराधना नहीं करता है? मेरी वाणी पूरी पृथ्वी पर फैल जाएगी; मैं चाहता हूँ कि अपने चुने हुए लोगों के समक्ष मैं और अधिक वचन बोलूँ। मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए और पूरी मानवजाति के लिए अपने वचन बोलता हूँ, उन शक्तिशाली गर्जनाओं की तरह जो पर्वतों और नदियों को हिला देती हैं। इस प्रकार, मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य का खज़ाना बन गए हैं, और सभी मनुष्य मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूरब से चमकते हुए दूर पश्चिम तक जाती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उन्हें छोड़ना बिलकुल पसंद नहीं करता, पर साथ ही उनकी थाह भी नहीं ले पाता, लेकिन फिर भी उनमें और अधिक आनंदित होता है। सभी मनुष्य खुशी और आनंद से भरे होते हैं और मेरे आने की खुशी मनाते हैं, मानो किसी शिशु का जन्म हुआ हो। अपनी वाणी के माध्यम से मैं सभी मनुष्यों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद, मैं औपचारिक तौर पर मनुष्य जाति में प्रवेश करूँगा ताकि वे मेरी आराधना करने लगें। मुझमें से झलकती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों से, मैं ऐसा करूँगा कि सभी मनुष्य मेरे समक्ष आएंगे और देखेंगे कि बिजली पूरब से चमकती है और मैं भी पूरब में "जैतून के पर्वत" पर अवतरित हो चुका हूँ। वे देखेंगे कि मैं बहुत पहले से पृथ्वी पर मौजूद हूँ, यहूदियों के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि पूरब की बिजली के रूप में। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मनुष्यों के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ लोगों के बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। इसके अलावा, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी लोग मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामयी मुखमंडल को देखें, मेरी वाणी सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरी संपूर्ण इच्छा है; यही मेरी योजना का अंत और उसका चरमोत्कर्ष है, यही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है। सभी राष्ट्र मेरी आराधना करें, हर ज़बान मुझे स्वीकार करे, हर मनुष्य मुझमें आस्था रखे और सभी लोग मेरी अधीनता स्वीकार करें!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ गूँजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएँगे' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 70

कई सहस्राब्दियों से मनुष्य ने उद्धारकर्ता के आगमन को देख पाने की लालसा की है। मनुष्य उद्धारकर्ता यीशु को एक सफेद बादल पर सवार होकर व्यक्तिगत रूप से उन लोगों के बीच उतरते देखने के लिए तरसा है, जिन्होंने हज़ारों सालों से उसकी अभिलाषा की है और उसके लिए लालायित रहे हैं। मनुष्य ने उद्धारकर्ता के वापस लौटने और लोगों के साथ फिर से जुड़ने की लालसा भी की है; अर्थात् उन्होंने लोगों से हज़ारों सालों से अलग हुए उद्धारकर्ता यीशु के वापस आने और एक बार फिर से छुटकारे के उस कार्य को करने की, जो उसने यहूदियों के बीच किया था, मनुष्य के प्रति करुणामय और प्रेममय होने की, मनुष्य के पाप क्षमा करने और उन्हें अपने ऊपर लेने की, यहाँ तक कि मनुष्य के सभी अपराध ग्रहण करने और उसे पापमुक्त करने की लालसा की है। मनुष्य उद्धारकर्ता यीशु से पहले के समान होने की लालसा करता है—ऐसा उद्धारकर्ता जो प्यारा, दयालु और आदरणीय है, जो मनुष्य के प्रति कभी कोप से भरा नहीं रहता, और जो कभी मनुष्य को धिक्कारता नहीं, बल्कि जो मनुष्य के सारे पाप क्षमा करता है और उन्हें अपने ऊपर ले लेता है, यहाँ तक कि जो एक बार फिर से मनुष्य के लिए सलीब पर अपनी जान दे देगा। जब से यीशु गया है, वे चेले जो उसका अनुसरण करते थे, और वे सभी संत जिन्हें उसके नाम पर बचाया गया था, बेसब्री से उसकी अभिलाषा और प्रतीक्षा कर रहे हैं। वे सभी, जो अनुग्रह के युग के दौरान यीशु मसीह के अनुग्रह द्वारा बचाए गए थे, अंत के दिनों के दौरान उस उल्लासभरे दिन की लालसा कर रहे हैं, जब उद्धारकर्ता यीशु सफेद बादल पर सवार होकर सभी लोगों के बीच उतरेगा। निस्संदेह, यह उन सभी लोगों की सामूहिक इच्छा भी है, जो आज उद्धारकर्ता यीशु के नाम को स्वीकार करते हैं। विश्व भर में वे सभी, जो उद्धारकर्ता यीशु के उद्धार को जानते हैं, यीशु मसीह के अचानक आकर, पृथ्वी पर कहे अपने ये वचन पूरे करने की लालसा कर रहे हैं : "मैं जैसे गया था वैसे ही मैं वापस आऊँगा।" मनुष्य मानता है कि सलीब पर चढ़ने और पुनरुत्थान के बाद यीशु सर्वोच्च परमेश्वर की दाईं ओर अपना स्थान ग्रहण करने के लिए सफेद बादल पर सवार होकर स्वर्ग वापस चला गया था। इसी प्रकार यीशु फिर से सफेद बादल पर सवार होकर (यह बादल उस बादल को संदर्भित करता है, जिस पर यीशु तब सवार हुआ था, जब वह स्वर्ग वापस गया था), उन लोगों के बीच वापस आएगा, जिन्होंने हज़ारों सालों से उसके लिए बेतहाशा लालसा की है, और वह यहूदियों का स्वरूप और उनके कपड़े धारण करेगा। मनुष्यों के सामने प्रकट होने के बाद वह उन्हें भोजन प्रदान करेगा, उनके लिए जीवन के जल की बौछार करवाएगा और मनुष्यों के बीच में रहेगा, अनुग्रह और प्रेम से भरा हुआ, जीवंत और वास्तविक। ये सभी वे धारणाएँ हैं, जिन्हें लोग मानते हैं। किंतु उद्धारकर्ता यीशु ने ऐसा नहीं किया; उसने मनुष्य की कल्पना के विपरीत किया। वह उन लोगों के बीच में नहीं आया, जिन्होंने उसकी वापसी की लालसा की थी, और वह सफेद बादल पर सवार होकर सभी मनुष्यों के सामने प्रकट नहीं हुआ। वह पहले ही आ चुका है, किंतु मनुष्य उसे नहीं जानता, वह उससे अनभिज्ञ रहता है। मनुष्य केवल निरुद्देश्य होकर उसका इंतज़ार कर रहा है, इस बात से अनभिज्ञ कि वह तो पहले ही "सफेद बादल" पर सवार होकर आ चुका है (वह बादल, जो उसका आत्मा, उसके वचन, उसका संपूर्ण स्वभाव और उसका स्वरूप है), और वह अब उन विजेताओं के समूह के बीच है, जिसे वह अंत के दिनों के दौरान बनाएगा। मनुष्य इसे नहीं जानता : मनुष्य के प्रति संपूर्ण स्नेह और प्रेम रखने के बावजूद पवित्र उद्धारकर्ता यीशु अशुद्ध और अपवित्र आत्माओं से भरे "मंदिरों" में कैसे कार्य कर सकता है? यद्यपि मनुष्य उसके आगमन का इंतज़ार करता रहा है, फिर भी वह उनके सामने कैसे प्रकट हो सकता है जो अधार्मिक का मांस खाते हैं, अधार्मिक का रक्त पीते हैं और अधार्मिकों के वस्त्र पहनते हैं, जो उस पर विश्वास तो करते हैं परंतु उसे जानते नहीं, और लगातार उससे जबरदस्ती माँगते रहते हैं? मनुष्य केवल यही जानता है कि उद्धारकर्ता यीशु प्रेम और करुणा से परिपूर्ण है, और वह एक पाप-बलि है जो छुटकारे से भरपूर है। परंतु मनुष्य को नहीं पता कि वह स्वयं परमेश्वर है, जो धार्मिकता, प्रताप, कोप और न्याय से लबालब भरा है, और अधिकार और गौरव से संपन्न है। इसलिए, भले ही मनुष्य छुटकारा दिलाने वाले की वापसी के लिए लालायित रहता है और उसके लिए तरसता है, यहाँ तक कि उसकी प्रार्थनाएँ स्वर्ग को भी द्रवित कर देती हैं, किंतु उद्धारकर्ता यीशु उन लोगों के सामने प्रकट नहीं होता, जो उस पर विश्वास तो करते हैं किंतु उसे जानते नहीं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "उद्धारकर्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 71

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है, जो उसका प्रकटन चाहते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है, जो तुम खोजते हो? क्या तुम परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम उसके पदचिह्न खोज रहे हो? परमात्मा के दर्शन के लिए व्यक्ति कैसे लालायित होता है! और परमेश्वर के पदचिह्नों को पाना कितना कठिन है! इस तरह के युग में, इस तरह की दुनिया में, हमें उस दिन को देखने के लिए क्या करना चाहिए, जिस दिन परमेश्वर प्रकट होता है? हमें परमेश्वर के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों से उन सभी का सामना होता है, जो परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तुम लोगों ने उन सभी पर एक से अधिक अवसरों पर विचार किया है—लेकिन परिणाम क्या रहा? परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है? परमेश्वर के पदचिह्न कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को उत्तर मिल गया है? बहुत-से लोग इस तरह उत्तर देंगे : "परमेश्वर उन सभी के बीच प्रकट होता है, जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिह्न हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है!" कोई भी फार्मूलाबद्ध उत्तर दे सकता है, किंतु क्या तुम लोग समझते हो कि परमेश्वर के प्रकटन या उसके पदचिह्नों का क्या अर्थ है? परमेश्वर का प्रकटन व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य करने के लिए उसके पृथ्वी पर आगमन को संदर्भित करता है। अपनी स्वयं की पहचान और स्वभाव के साथ, और अपने जन्मजात तरीके से वह एक युग का आरंभ करने और एक युग का अंत करने के कार्य का संचालन करने के लिए मनुष्यजाति के बीच उतरता है। इस तरह का प्रकटन किसी समारोह का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तसवीर, कोई चमत्कार या किसी प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और यह किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो बिलकुल भी नहीं है। यह एक असली और वास्तविक तथ्य है, जिसे किसी के भी द्वारा छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन बेमन से किसी कार्य को करने के लिए, या किसी अल्पकालिक उपक्रम के लिए नहीं है; बल्कि यह उसकी प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है। परमेश्वर का प्रकटन हमेशा अर्थपूर्ण होता है और हमेशा उसकी प्रबंधन योजना से कुछ संबंध रखता है। यहाँ जिसे "प्रकटन" कहा गया है, वह उस प्रकार के "प्रकटन" से पूरी तरह से भिन्न है, जिसमें परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन, अगुआई और प्रबोधन करता है। हर बार जब परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है, तो वह अपने महान कार्य के एक चरण को कार्यान्वित करता है। यह कार्य किसी भी अन्य युग के कार्य से भिन्न होता है। यह मनुष्य के लिए अकल्पनीय है, और इसका मनुष्य द्वारा कभी भी अनुभव नहीं किया गया है। यह वह कार्य है, जो एक नए युग का आरंभ करता है और पुराने युग का समापन करता है, और यह मनुष्यजाति के उद्धार के कार्य का एक नया और बेहतर रूप है; इतना ही नहीं, यह वह कार्य है, जो मनुष्यजाति को नए युग में लाता है। परमेश्वर के प्रकटन का यही तात्पर्य है।

एक बार जब तुम लोग समझ जाते हो कि परमेश्वर के प्रकटन का क्या अर्थ है, तो तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्न कैसे खोजने चाहिए? इस प्रश्न को समझाना कठिन नहीं है : जहाँ कहीं भी परमेश्वर का प्रकटन होता है, वहाँ तुम्हें उसके पदचिह्न मिलेंगे। इस तरह की व्याख्या सीधी-सादी लगती है, किंतु इसे अभ्यास में लाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि बहुत लोग नहीं जानते कि परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है, और यह तो बिलकुल भी नहीं जानते कि वह कहाँ प्रकट होना चाहता है, या उसे कहाँ प्रकट होना चाहिए। कुछ लोग आवेगपूर्वक यह मान लेते हैं कि जहाँ भी पवित्र आत्मा कार्य पर है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। या फिर वे यह मानते हैं कि जहाँ भी आध्यात्मिक हस्तियाँ होती हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। या फिर वे यह मानते हैं कि जहाँ कहीं अत्यधिक प्रतिष्ठित लोग होते हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। फिलहाल, आओ इस बात को छोड़ दें कि ऐसी मान्यताएँ सही हैं या ग़लत। इस तरह के प्रश्न को समझाने के लिए पहले हमारे पास एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए : हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं। हम आध्यात्मिक हस्तियों की खोज नहीं कर रहे हैं, हम विख्यात हस्तियों की खोज तो बिलकुल नहीं कर रहे है; हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं। चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम परमेश्वर की इच्छा, उसके वचन और कथनों की खोज करें—क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं। जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में तुम लोगों ने इन वचनों की उपेक्षा कर दी है कि "परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है।" और इसलिए, बहुत-से लोग सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं, और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो बिलकुल भी स्वीकार नहीं करते। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर के प्रकटन का समाधान मनुष्य की धारणाओं से नहीं किया जा सकता, और परमेश्वर मनुष्य के आदेश पर तो बिलकुल भी प्रकट नहीं हो सकता। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसके बारे में उसे मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, और अपने कार्य के बारे में हर-एक व्यक्ति को सूचित करने की आवश्यकता तो उसे बिलकुल भी नहीं है। यह परमेश्वर का स्वभाव है, जिसे हर व्यक्ति को पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकटन को देखने और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करने की इच्छा रखते हो, तो तुम लोगों को पहले अपनी धारणाओं को त्याग देना चाहिए। तुम लोगों को यह माँग नहीं करनी चाहिए कि परमेश्वर ऐसा करे या वैसा करे, तुम्हें उसे अपनी सीमाओं और अपनी धारणाओं तक सीमित तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, तुम लोगों को यह पूछना चाहिए कि तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश कैसे करनी है, तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन को कैसे स्वीकार करना है, और तुम्हें परमेश्वर के नए कार्य के प्रति कैसे समर्पण करना है। मनुष्य को ऐसा ही करना चाहिए। चूँकि मनुष्य सत्य नहीं है, और उसके पास भी सत्य नहीं है, इसलिए उसे खोजना, स्वीकार करना और आज्ञापालन करना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 72

चाहे तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश या फिर किसी अन्य देश के, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य को एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। इस तरह तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आजकल बहुत-से लोग इसे असंभव समझते हैं कि परमेश्वर किसी विशेष राष्ट्र में या कुछ निश्चित लोगों के बीच प्रकट होगा। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन अर्थ है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है! मनुष्य की धारणाएँ और सोच भला उन्हें कैसे माप सकती हैं? और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। केवल इसी प्रकार से तुम अपनी धारणाओं से बाध्य नहीं होगे; केवल इसी प्रकार से तुम परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत करने के योग्य होगे। अन्यथा, तुम शाश्वत अंधकार में रहोगे, और कभी भी परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त नहीं करोगे।

परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति का परमेश्वर है। वह स्वयं को किसी भी राष्ट्र या लोगों की निजी संपत्ति नहीं मानता, बल्कि अपना कार्य अपनी बनाई योजना के अनुसार, किसी भी रूप, राष्ट्र या लोगों द्वारा बाधित हुए बिना, करता जाता है। शायद तुमने इस रूप की कभी कल्पना नहीं की है, या शायद इस रूप के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण इनकार करने वाला है, या शायद वह देश, जहाँ परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है और वे लोग, जिनके बीच वह स्वयं को प्रकट करता है, ऐसे हैं, जिनके साथ सभी के द्वारा भेदभाव किया जाता है और वे पृथ्वी पर सर्वाधिक पिछड़े हुए हैं। लेकिन परमेश्वर के पास अपनी बुद्धि है। उसने अपने महान सामर्थ्य के साथ, और अपने सत्य और स्वभाव के माध्यम से, सचमुच ऐसे लोगों के समूह को प्राप्त कर लिया है, जो उसके साथ एक मन वाले हैं, और जिन्हें वह पूर्ण बनाना चाहता है—उसके द्वारा विजित समूह, जो सभी प्रकार के परीक्षणों, क्लेशों और उत्पीड़न को सहन करके, अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है। किसी भी रूप या राष्ट्र की बाध्यताओं से मुक्त, परमेश्वर के प्रकटन का लक्ष्य उसे अपनी योजना के अनुसार कार्य पूरा करने में सक्षम बनाना है। यह वैसा ही है जैसे, जब परमेश्वर यहूदिया में देह बना, तब उसका लक्ष्य समस्त मानवजाति के छुटकारे के लिए सलीब पर चढ़ने का कार्य पूरा करना था। फिर भी यहूदियों का मानना था कि परमेश्वर के लिए ऐसा करना असंभव है, और उन्हें यह असंभव लगता था कि परमेश्वर देह बन सकता है और प्रभु यीशु का रूप ग्रहण कर सकता है। उनका "असंभव" वह आधार बन गया, जिस पर उन्होंने परमेश्वर की निंदा और उसका विरोध किया, और जो अंततः इस्राएल को विनाश की ओर ले गया। आज कई लोगों ने उसी तरह की ग़लती की है। वे अपनी समस्त शक्ति के साथ परमेश्वर के आसन्न प्रकटन की घोषणा करते हैं, मगर साथ ही उसके प्रकटन की निंदा भी करते हैं; उनका "असंभव" परमेश्वर के प्रकटन को एक बार फिर उनकी कल्पना की सीमाओं के भीतर कैद कर देता है। और इसलिए मैंने कई लोगों को परमेश्वर के वचनों के आने के बाद जँगली और कर्कश हँसी का ठहाका लगाते देखा है। लेकिन क्या यह हँसी यहूदियों के तिरस्कार और ईशनिंदा से किसी भी तरह से भिन्न है? तुम लोग सत्य की उपस्थिति में श्रद्धावान नहीं हो, और सत्य के लिए तरसने की प्रवृत्ति तो तुम लोगों में बिलकुल भी नहीं है। तुम बस इतना ही करते हो कि अंधाधुंध अध्ययन करते हो और पुलक भरी उदासीनता के साथ प्रतीक्षा करते हो। इस तरह से अध्ययन और प्रतीक्षा करने से तुम क्या हासिल कर सकते हो? क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हें परमेश्वर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलेगा? यदि तुम परमेश्वर के कथनों को नहीं समझ सकते, तो तुम किस तरह से परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हो? जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य व्यक्त होता है, और वहाँ परमेश्वर की वाणी होगी। केवल वे लोग ही परमेश्वर की वाणी सुन पाएँगे, जो सत्य को स्वीकार कर सकते हैं, और केवल इस तरह के लोग ही परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को जाने दो! स्वयं को शांत करो और इन वचनों को ध्यानपूर्वक पढ़ो। यदि तुम सत्य के लिए तरसते हो, तो परमेश्वर तुम्हें प्रबुद्ध करेगा और तुम उसकी इच्छा और उसके वचनों को समझोगे। "असंभव" के बारे में अपनी राय जाने दो! लोग किसी चीज़ को जितना अधिक असंभव मानते हैं, उसके घटित होने की उतनी ही अधिक संभावना होती है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से ऊँची उड़ान भरती है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से ऊँचे हैं, और परमेश्वर का कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमाओं के पार जाता है। जितना अधिक कुछ असंभव होता है, उतना ही अधिक उसमें सत्य होता है, जिसे खोजा जा सकता है; कोई चीज़ मनुष्य की धारणा और कल्पना से जितनी अधिक परे होती है, उसमें परमेश्वर की इच्छा उतनी ही अधिक होती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भले ही वह स्वयं को कहीं भी प्रकट करे, परमेश्वर फिर भी परमेश्वर है, और उसका सार उसके प्रकटन के स्थान या तरीके के आधार पर कभी नहीं बदलेगा। परमेश्वर के पदचिह्न चाहे कहीं भी हों, उसका स्वभाव वैसा ही बना रहता है, और चाहे परमेश्वर के पदचिह्न कहीं भी हों, वह समस्त मनुष्यजाति का परमेश्वर है, ठीक वैसे ही, जैसे कि प्रभु यीशु न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, बल्कि वह एशिया, यूरोप और अमेरिका के सभी लोगों का, और इससे भी अधिक, समस्त ब्रह्मांड का एकमात्र परमेश्वर है। तो आओ, हम परमेश्वर की इच्छा खोजें और उसके कथनों में उसके प्रकटन की खोज करें, और उसके पदचिह्नों के साथ तालमेल रखें! परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है। उसके वचन और उसका प्रकटन साथ-साथ विद्यमान हैं, और उसका स्वभाव और पदचिह्न मनुष्यजाति के लिए हर समय खुले हैं। प्यारे भाइयो और बहनो, मुझे आशा है कि तुम लोग इन वचनों में परमेश्वर का प्रकटन देख सकते हो, एक नए युग में आगे बढ़ते हुए तुम उसके पदचिह्नों का अनुसरण करना शुरू कर सकते हो, और उस सुंदर नए स्वर्ग और पृथ्वी में प्रवेश कर सकते हो, जिसे परमेश्वर ने उन लोगों के लिए तैयार किया है, जो उसके प्रकटन का इंतजार करते हैं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 73

परमेश्वर मौन है, और हमारे सामने कभी प्रकट नहीं हुआ, फिर भी उसका कार्य कभी नहीं रुका है। वह पूरी पृथ्वी का सर्वेक्षण करता है, हर चीज़ पर नियंत्रण रखता है, और मनुष्य के सभी वचनों और कर्मों को देखता है। वह अपना प्रबंधन नपे-तुले कदमों के साथ और अपनी योजना के अनुसार, चुपचाप और नाटकीय प्रभाव के बिना करता है, फिर भी उसके कदम, एक-एक करके, हमेशा मनुष्यों के निकट बढ़ते जाते हैं, और उसका न्याय का आसन बिजली की रफ्तार से ब्रह्मांड में स्थापित होता है, जिसके बाद हमारे बीच उसके सिंहासन का तुरंत अवरोहण होता है। वह कैसा आलीशान दृश्य है, कितनी भव्य और गंभीर झाँकी! एक कपोत के समान, और एक गरजते हुए सिंह के समान, पवित्र आत्मा हम सबके बीच आता है। वह बुद्धि है, वह धार्मिकता और प्रताप है, और अधिकार से संपन्न और प्रेम और करुणा से भरा हुआ वह चुपके से हमारे बीच आता है। कोई उसके आगमन के बारे में नही जानता, कोई उसके आगमन का स्वागत नहीं करता, और इतना ही नहीं, कोई नहीं जानता है कि वह क्या करने वाला है। मनुष्य का जीवन पहले जैसा चलता रहता है; उसका हृदय नहीं बदलता, और दिन हमेशा की तरह बीतते जाते हैं। परमेश्वर अन्य मनुष्यों की तरह एक मनुष्य के रूप में, एक सबसे महत्वहीन अनुयायी की तरह और एक साधारण विश्वासी के समान रहता है। उसके पास अपने काम-काज हैं, अपने लक्ष्य हैं, और इससे भी बढ़कर, उसमें दिव्यता है, जो साधारण मनुष्यों में नहीं है। किसी ने भी उसकी दिव्यता की मौजूदगी पर ध्यान नहीं दिया है, और किसी ने भी उसके सार और मनुष्य के सार के बीच का अंतर नहीं समझा है। हम उसके साथ, बिना किसी बंधन और भय के, मिलकर रहते हैं, क्योंकि हमारी दृष्टि में वह एक महत्वहीन विश्वासी से अधिक कुछ नही है। वह हमारी हर चाल देखता है, और हमारे सभी विचार और अवधारणाएँ उसके सामने बेपर्दा हैं। कोई भी उसके अस्तित्व में रुचि नहीं लेता, कोई भी उसके कार्य के बारे में कोई कल्पना नहीं करता, और इससे भी बढ़कर, किसी को उसकी पहचान के बारे में रत्ती भर भी संदेह नहीं है। हम बस अपने-अपने काम में लगे रहते हैं, मानो उसका हमसे कुछ लेना-देना न हो ...

संयोगवश, पवित्र आत्मा उसके "माध्यम से" वचनों का एक अंश व्यक्त करता है, और भले ही यह बहुत अनपेक्षित महसूस होता हो, फिर भी हम इसे परमेश्वर से आने वाला कथन समझते हैं, और परमेश्वर की ओर से आया मानकर तुरंत उसे स्वीकार कर लेते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि चाहे इन वचनों को कोई भी व्यक्त करता हो, यदि ये पवित्र आत्मा से आते हैं, तो हमें उन्हें स्वीकार करना चाहिए, नकारना नहीं चाहिए। अगला कथन मेरे माध्यम से आ सकता है, या तुम्हारे माध्यम से, या किसी अन्य के माध्यम से। वह कोई भी हो, सब परमेश्वर का अनुग्रह है। परंतु यह व्यक्ति चाहे जो भी हो, हमें इसकी आराधना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि चाहे कुछ भी हो, यह संभवतः परमेश्वर नहीं हो सकता; न ही हम किसी भी तरह से ऐसे किसी साधारण व्यक्ति को अपने परमेश्वर के रूप में चुन सकते हैं। हमारा परमेश्वर बहुत महान और सम्माननीय है; ऐसा कोई महत्वहीन व्यक्ति उसकी जगह कैसे ले सकता है? और तो और, हम सब परमेश्वर के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि वह आकर हमें वापस स्वर्ग के राज्य में ले जाए, इसलिए कोई इतना महत्वहीन व्यक्ति कैसे इतना महत्वपूर्ण और कठिन कार्य करने में सक्षम हो सकता है? यदि प्रभु दोबारा आता है, तो उसे सफ़ेद बादल पर आना चाहिए, ताकि सभी लोग उसे देख सकें। वह कितना महिमामय होगा! यह कैसे संभव है कि वह चुपके से साधारण मनुष्यों के एक समूह में छिप जाए?

और फिर भी, लोगों के बीच छिपा हुआ यही वह साधारण मनुष्य है, जो हमें बचाने का नया काम कर रहा है। वह हमें कोई सफाई नहीं देता, न ही वह हमें यह बताता है कि वह क्यों आया है, वह केवल नपे-तुले कदमों से और अपनी योजना के अनुसार उस कार्य को करता है, जिसे करने का वह इरादा रखता है। उसके वचन और कथन अब ज्यादा बार सुनाई देते हैं। सांत्वना देने, उत्साह बढ़ाने, स्मरण कराने और चेतावनी देने से लेकर डाँटने-फटकारने और अनुशासित करने तक; दयालु और नरम स्वर से लेकर प्रचंड और प्रतापी वचनों तक—यह सब मनुष्य पर दया करता है और उसमें कँपकँपी भरता है। जो कुछ भी वह कहता है, वह हमारे अंदर गहरे छिपे रहस्यों पर सीधे चोट करता है; उसके वचन हमारे हृदयों में डंक मारते हैं, हमारी आत्माओं में डंक मारते हैं, और हमें असहनीय शर्म से भर देते हैं, हम समझ नहीं पाते कि कहाँ मुँह छिपाएँ। हम सोचने लगते हैं कि इस व्यक्ति के हृदय का परमेश्वर हमसे वास्तव में प्रेम करता भी है या नहीं, और वास्तव में उसका इरादा क्या है। शायद ये पीड़ाएँ सहने के बाद ही हमें स्वर्गारोहण कराया जा सकता हो? अपने मस्तिष्क में हम गणना कर रहे हैं ... आने वाली मंजिल के बारे में और अपनी भावी नियति के बारे में। फिर भी, पहले की तरह, हममें से कोई विश्वास नहीं करता कि हमारे बीच कार्य करने के लिए परमेश्वर पहले ही देहधारण कर चुका है। भले ही वह इतने लंबे समय तक हमारे साथ रहा हो, भले ही वह हमसे आमने-सामने पहले ही इतने सारे वचन बोल चुका हो, फिर भी हम इतने साधारण व्यक्ति को अपने भविष्य का परमेश्वर स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, और इस मामूली व्यक्ति को अपने भविष्य और नियति का नियंत्रण सौंपने को तो हम बिलकुल भी तैयार नहीं हैं। उससे हम जीवन के जल की अंतहीन आपूर्ति का आनंद लेते हैं, और उसके माध्यम से हम परमेश्वर के आमने-सामने रहते हैं। फिर भी हम केवल स्वर्ग में मौजूद प्रभु यीशु के अनुग्रह के लिए धन्यवाद देते हैं, और हमने कभी इस साधारण व्यक्ति की भावनाओं पर ध्यान नहीं दिया, जो दिव्यता से युक्त है। फिर भी वह पहले की तरह विनम्रता से देह में छिपे रहकर अपना कार्य करता है, अपने अंतर्मन की वाणी व्यक्त करता है, मानो वह इंसान की अस्वीकृति से बेख़बर हो, मानो वह इंसान के बचकानेपन और अज्ञानता को हमेशा के लिए क्षमा कर रहा हो, और अपने प्रति इंसान के अपमानजनक रवैये के प्रति हमेशा के लिए सहिष्णु हो।

हमारे बिना जाने ही यह मामूली व्यक्ति हमें परमेश्वर के कार्य के एक कदम के बाद दूसरे कदम में ले गया है। हम अनगिनत परीक्षणों से गुजरते हैं, अनगिनत ताड़नाएँ सहते हैं और मृत्यु द्वारा परखे जाते हैं। हम परमेश्वर के धार्मिक और प्रतापी स्वभाव के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, उसके प्रेम और करुणा का आनंद भी लेते हैं; परमेश्वर के महान सामर्थ्य और बुद्धि की समझ हासिल करते हैं, परमेश्वर की सुंदरता निहारते हैं, और मनुष्य को बचाने की परमेश्वर की उत्कट इच्छा देखते हैं। इस साधारण मनुष्य के वचनों में हम परमेश्वर के स्वभाव और सार को जान जाते है; परमेश्वर की इच्छा समझ जाते हैं, मनुष्य की प्रकृति और उसका सार जान जाते हैं, और हम उद्धार और पूर्णता का मार्ग देख लेते हैं। उसके वचन हमारी "मृत्यु" का कारण बनते हैं, और वे हमारे "पुनर्जन्म" का कारण भी बनते हैं; उसके वचन हमें दिलासा देते हैं, लेकिन हमें ग्लानि और कृतज्ञता की भावना के साथ मिटा भी देते हैं; उसके वचन हमें आनंद और शांति देते हैं, परंतु अपार पीड़ा भी देते हैं। कभी-कभी हम उसके हाथों में वध हेतु मेमनों के समान होते हैं; कभी-कभी हम उसकी आँख के तारे के समान होते हैं और उसके कोमल प्रेम का आनंद उठाते हैं; कभी-कभी हम उसके शत्रु के समान होते हैं और उसकी आँखों के सामने उसके कोप द्वारा भस्म कर दिए जाते हैं। हम उसके द्वारा बचाई गई मानवजाति हैं, हम उसकी दृष्टि में भुनगे हैं, और हम वे खोए हुए मेमने हैं, जिन्हें ढूँढ़ने में वह दिन-रात लगा रहता है। वह हम पर दया करता है, वह हमसे नफ़रत करता है, वह हमें ऊपर उठाता है, वह हमें दिलासा देता है और प्रोत्साहित करता है, वह हमारा मार्गदर्शन करता है, वह हमें प्रबुद्ध करता है, वह हमें ताड़ना देता है और हमें अनुशासित करता है, यहाँ तक कि वह हमें शाप भी देता है। रात हो या दिन, वह कभी हमारी चिंता करना बंद नहीं करता, वह रात-दिन हमारी सुरक्षा और परवाह करता है, कभी हमारा साथ नहीं छोड़ता, बल्कि हमारे लिए अपने हृदय का रक्त बहाता है और हमारे लिए हर कीमत चुकाता है। इस छोटी और साधारण-सी देह के वचनों में हमने परमेश्वर की संपूर्णता का आनंद लिया है और उस मंजिल को देखा है, जो परमेश्वर ने हमें प्रदान की है। इसके बावजूद, थोथा घमंड अभी भी हमारे हृदय को परेशान करता है, और हम अभी भी ऐसे किसी व्यक्ति को अपने परमेश्वर के रूप में स्वीकार करने के लिए सक्रिय रूप से तैयार नहीं हैं। यद्यपि उसने हमें बहुत अधिक मन्ना, बहुत अधिक आनंद दिया है, किंतु इनमें से कुछ भी हमारे हृदय में प्रभु का स्थान नहीं ले सकता। हम इस व्यक्ति की विशिष्ट पहचान और हैसियत को बड़ी अनिच्छा से ही स्वीकार करते हैं। जब तक वह हमसे यह स्वीकार करने के लिए कहने हेतु अपना मुँह नहीं खोलता कि वह परमेश्वर है, तब तक हम स्वयं उसे शीघ्र आने वाले परमेश्वर के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेंगे, जबकि वह हमारे बीच बहुत लंबे समय से काम करता आ रहा है।

विभिन्न तरीकों और परिप्रेक्ष्यों के उपयोग द्वारा हमें इस बारे में सचेत करते हुए कि हमें क्या करना चाहिए, और साथ ही अपने हृदय को वाणी प्रदान करते हुए, परमेश्वर अपने कथन लगातार रखता है। उसके वचनों में जीवन-सामर्थ्य है, वे हमें वह मार्ग दिखाते हैं जिस पर हमें चलना चाहिए, और हमें यह समझने में सक्षम बनाते हैं कि सत्य क्या है। हम उसके वचनों से आकर्षित होने लगते हैं, हम उसके बोलने के लहजे और तरीके पर ध्यान केंद्रित करने लगते हैं, और अवचेतन रूप में इस साधारण व्यक्ति की अंतरतम भावनाओं में रुचि लेना आरंभ कर देते हैं। वह हमारी ओर से काम करने में अपने हृदय का रक्त बहाता है, हमारे लिए नींद और भूख त्याग देता है, हमारे लिए रोता है, हमारे लिए आहें भरता है, हमारे लिए बीमारी में कराहता है, हमारी मंज़िल और उद्धार के लिए अपमान सहता है, और हमारी संवेदनहीनता और विद्रोहशीलता के कारण उसका हृदय आँसू बहाता है औ लहूलुहान हो जाता है। ऐसा स्वरूप किसी साधारण व्यक्ति का नहीं हो सकता, न ही यह किसी भ्रष्ट मनुष्य में हो सकता है या उसके द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। वह जो सहनशीलता और धैर्य दिखाता है, वह किसी साधारण मनुष्य में नहीं पाया जाता, और उसके जैसा प्रेम भी किसी सृजित प्राणी में नहीं है। उसके अलावा कोई भी हमारे समस्त विचारों को नहीं जान सकता, या हमारी प्रकृति और सार को स्पष्ट और पूर्ण रूप से नहीं समझ सकता, या मानवजाति की विद्रोहशीलता और भ्रष्टता का न्याय नहीं कर सकता, या इस तरह से स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से हमसे बातचीत या हमारे बीच कार्य नहीं कर सकता। उसके अलावा किसी में परमेश्वर का अधिकार, बुद्धि और गरिमा नहीं है; उसमें परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप अपनी संपूर्णता में प्रकट होते हैं। उसके अलावा कोई हमें मार्ग नहीं दिखा सकता या हमारे लिए प्रकाश नहीं ला सकता। उसके अलावा कोई भी परमेश्वर के उन रहस्यों को प्रकट नहीं कर सकता, जिन्हें परमेश्वर ने सृष्टि के आरंभ से अब तक प्रकट नहीं किया है। उसके अलावा कोई हमें शैतान के बंधन और हमारे भ्रष्ट स्वभाव से नहीं बचा सकता। वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है। वह संपूर्ण मानवजाति के प्रति परमेश्वर के अंतर्तम, परमेश्वर के प्रोत्साहनों और परमेश्वर के न्याय के सभी वचनों को व्यक्त करता है। उसने एक नया युग, एक नया काल आरंभ किया है, और एक नए स्वर्ग और पृथ्वी और नए कार्य में ले गया है, और हमारे द्वारा अस्पष्टता में बिताए जा रहे जीवन का अंत करते हुए और हमारे पूरे अस्तित्व को उद्धार के मार्ग को पूरी स्पष्टता से देखने में सक्षम बनाते हुए हमारे लिए आशा लेकर आया है। उसने हमारे संपूर्ण अस्तित्व को जीत लिया है और हमारे हृदय प्राप्त कर लिए हैं। उस क्षण से हमारे मन सचेत हो गए हैं, और हमारी आत्माएँ पुर्नजीवित होती लगती हैं : क्या यह साधारण, महत्वहीन व्यक्ति, जो हमारे बीच रहता है और जिसे हमने लंबे समय से तिरस्कृत किया है—ही प्रभु यीशु नहीं है; जो सोते-जागते हमेशा हमारे विचारों में रहता है और जिसके लिए हम रात-दिन लालायित रहते हैं? यह वही है! यह वास्तव में वही है! यह हमारा परमेश्वर है! यह सत्य, मार्ग और जीवन है! इसने हमें फिर से जीने और ज्योति देखने लायक बनाया है, और हमारे हृदयों को भटकने से रोका है। हम परमेश्वर के घर लौट आए हैं, हम उसके सिंहासन के सामने लौट आए हैं, हम उसके आमने-सामने हैं, हमने उसका मुखमंडल देखा है, और हमने आगे का मार्ग देखा है। इस समय हमारे हृदय परमेश्वर द्वारा पूरी तरह से जीत लिए गए हैं; अब हमें संदेह नहीं है कि वह कौन है, अब हम उसके कार्य और वचन का विरोध नहीं करते, और अब हम उसके सामने पूरी तरह से दंडवत हैं। हम अपने शेष जीवन में परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करने, और उसके द्वारा पूर्ण किए जाने, और उसके अनुग्रह का बदला चुकाने, और हमारे प्रति उसके प्रेम का बदला चुकाने, और उसके आयोजनों और व्यवस्थाओं का पालन करने, और उसके कार्य में सहयोग करने, और उसके द्वारा सौंपे जाने वाला हर कार्य पूरा करने के लिए सब-कुछ करने से अधिक कुछ नहीं चाहते।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 74

परमेश्वर और मनुष्य की बराबरी पर बात नहीं की जा सकती। परमेश्वर का सार और कार्य मनुष्य के लिए सर्वाधिक अथाह और समझ से परे है। यदि परमेश्वर मनुष्य के संसार में व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य न करे और अपने वचन न कहे, तो मनुष्य कभी भी परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझ पाएगा। और इसलिए वे लोग भी, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन परमेश्वर को समर्पित कर दिया है, उसका अनुमोदन प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे। यदि परमेश्वर कार्य करने के लिए तैयार न हो, तो मनुष्य चाहे कितना भी अच्छा क्यों न करे, वह सब व्यर्थ हो जाएगा, क्योंकि परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से सदैव ऊँचे रहेंगे और परमेश्वर की बुद्धि मनुष्य की समझ से परे है। और इसीलिए मैं कहता हूँ कि जो लोग परमेश्वर और उसके कार्य को "पूरी तरह से समझने" का दावा करते करते हैं, वे मूर्खों की जमात हैं; वे सभी अभिमानी और अज्ञानी हैं। मनुष्य को परमेश्वर के कार्य को परिभाषित नहीं करना चाहिए; बल्कि, मनुष्य परमेश्वर के कार्य को परिभाषित नहीं कर सकता। परमेश्वर की दृष्टि में मनुष्य एक चींटी जितना महत्वहीन है; तो फिर वह परमेश्वर के कार्य की थाह कैसे पा सकता है? जो लोग गंभीरतापूर्वक यह कहना पसंद करते हैं, "परमेश्वर इस तरह से या उस तरह से कार्य नहीं करता," या "परमेश्वर ऐसा है या वैसा है"—क्या वे अहंकारपूर्वक नहीं बोलते? हम सबको जानना चाहिए कि मनुष्य, जो कि देहधारी है, शैतान द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है। मानवजाति की प्रकृति ही है परमेश्वर का विरोध करना। मानवजाति परमेश्वर के समान नहीं हो सकती, परमेश्वर के कार्य के लिए परामर्श देने की उम्मीद तो वह बिलकुल भी नहीं कर सकती। जहाँ तक इस बात का संबंध है कि परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन कैसे करता है, तो यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। यह उचित है कि इस या उस विचार की डींग हाँकने के बजाय मनुष्य को समर्पण करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य धूल मात्र है। चूँकि हमारा इरादा परमेश्वर की खोज करने का है, इसलिए हमें परमेश्वर के विचार के लिए उसके कार्य पर अपनी अवधारणाएँ नहीं थोपनी चाहिए, और जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए अपने भ्रष्ट स्वभाव का भरसक उपयोग तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। क्या ऐसा करना हमें मसीह-विरोधी नहीं बनाएगा? ऐसे लोग परमेश्वर में विश्वास कैसे कर सकते हैं? चूँकि हम विश्वास करते हैं कि परमेश्वर है, और चूँकि हम उसे संतुष्ट करना और उसे देखना चाहते हैं, इसलिए हमें सत्य के मार्ग की खोज करनी चाहिए, और परमेश्वर के अनुकूल रहने का मार्ग तलाशना चाहिए। हमें परमेश्वर के कड़े विरोध में खड़े नहीं होना चाहिए। ऐसे कार्यों से क्या भला हो सकता है?

आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है। हो सकता है, तुम इन वचनों को स्वीकार न कर पाओ और वे तुम्हें अजीब लगें, पर मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम अपनी स्वाभाविकता प्रकट मत करो, क्योंकि केवल वे ही सत्य को पा सकते हैं, जो परमेश्वर के समक्ष धार्मिकता के लिए सच्ची भूख-प्यास रखते हैं, और केवल वे ही परमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध किए जा सकते हैं और उसका मार्गदर्शन पा सकते हैं जो वास्तव में धर्मनिष्ठ हैं। परिणाम संयम और शांति के साथ सत्य की खोज करने से मिलते हैं, झगड़े और विवाद से नहीं। जब मैं यह कहता हूँ कि "आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है," तो मैं परमेश्वर के देह में लौटने की बात कर रहा हूँ। शायद ये वचन तुम्हें व्याकुल न करते हों; शायद तुम इनसे घृणा करते हो; या शायद ये तुम्हारे लिए बड़े रुचिकर हों। चाहे जो भी मामला हो, मुझे आशा है कि वे सब, जो परमेश्वर के प्रकट होने के लिए वास्तव में लालायित हैं, इस तथ्य का सामना कर सकते हैं और इसके बारे में झटपट निष्कर्षों पर पहुँचने के बजाय इसकी सावधानीपूर्वक जाँच कर सकते हैं; जैसा कि बुद्धिमान व्यक्ति को करना चाहिए।

ऐसी चीज़ की जाँच-पड़ताल करना कठिन नहीं है, परंतु इसके लिए हममें से प्रत्येक को इस सत्य को जानने की ज़रूरत है: जो देहधारी परमेश्वर है, उसके पास परमेश्वर का सार होगा और जो देहधारी परमेश्वर है, उसके पास परमेश्वर की अभिव्यक्ति होगी। चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया है, इसलिए वह उस कार्य को सामने लाएगा, जो वह करना चाहता है, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया है, इसलिए वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है और वह मनुष्य के लिए सत्य को लाने, उसे जीवन प्रदान करने और उसे मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस देह में परमेश्वर का सार नहीं है, वह निश्चित रूप से देहधारी परमेश्वर नहीं है; इसमें कोई संदेह नहीं। अगर मनुष्य यह पता करना चाहता है कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, तो इसकी पुष्टि उसे उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव और उसके द्वारा बोले गए वचनों से करनी चाहिए। इसे ऐसे कहें, व्यक्ति को इस बात का निश्चय कि यह देहधारी परमेश्वर है या नहीं और कि यह सही मार्ग है या नहीं, उसके सार से करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने की कुंजी कि यह देहधारी परमेश्वर की देह है या नहीं, उसके बाहरी स्वरूप के बजाय उसके सार (उसका कार्य, उसके कथन, उसका स्वभाव और कई अन्य पहलू) में निहित है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी स्वरूप की ही जाँच करता है, और परिणामस्वरूप उसके सार की अनदेखी करता है, तो इससे उसके अनाड़ी और अज्ञानी होने का पता चलता है। बाहरी स्वरूप सार का निर्धारण नहीं कर सकता; इतना ही नहीं, परमेश्वर का कार्य कभी भी मनुष्य की अवधारणाओं के अनुरूप नहीं हो सकता। क्या यीशु का बाहरी रूपरंग मनुष्य की अवधारणाओं के विपरीत नहीं था? क्या उसका चेहरा और पोशाक उसकी वास्तविक पहचान के बारे में कोई सुराग देने में असमर्थ नहीं थे? क्या आरंभिक फरीसियों ने यीशु का ठीक इसीलिए विरोध नहीं किया था क्योंकि उन्होंने केवल उसके बाहरी स्वरूप को ही देखा, और उसके द्वारा बोले गए वचनों को हृदयंगम नहीं किया? मुझे उम्मीद है कि परमेश्वर के प्रकटन के आकांक्षी सभी भाई-बहन इतिहास की त्रासदी को नहीं दोहराएँगे। तुम्हें आधुनिक काल के फरीसी नहीं बनना चाहिए और परमेश्वर को फिर से सलीब पर नहीं चढ़ाना चाहिए। तुम्हें सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि परमेश्वर की वापसी का स्वागत कैसे किया जाए और तुम्हारे मस्तिष्क में यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति कैसे बना जाए, जो सत्य के प्रति समर्पित होता है। यह हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है, जो यीशु के बादल पर सवार होकर लौटने का इंतजार कर रहा है। हमें अपनी आध्यात्मिक आँखों को मलकर उन्हें साफ़ करना चाहिए और अतिरंजित कल्पना के शब्दों के दलदल में नहीं फँसना चाहिए। हमें परमेश्वर के व्यावहारिक कार्य के बारे में सोचना चाहिए और परमेश्वर के व्यावहारिक पक्ष पर दृष्टि डालनी चाहिए। खुद को दिवास्वप्नों में बहने या खोने मत दो, सदैव उस दिन के लिए लालायित रहो, जब प्रभु यीशु बादल पर सवार होकर अचानक तुम लोगों के बीच उतरेगा और तुम्हें, जिन्होंने उसे कभी जाना या देखा नहीं और जो नहीं जानते कि उसकी इच्छा कैसे पूरी करें, ले जाएगा। अधिक व्यावहारिक मामलों पर विचार करना बेहतर है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" की 'प्रस्तावना' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 75

क्या तुम लोग कारण जानना चाहते हो कि फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया? क्या तुम फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे भी ज़्यादा, उन्होंने केवल इस पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, फिर भी जीवन-सत्य की खोज नहीं की। इसलिए, वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि उन्हें जीवन के मार्ग के बारे में कोई ज्ञान नहीं है, और नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है? तुम लोग क्या कहते हो, ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर का आशीष कैसे प्राप्त करेंगे? वे मसीहा को कैसे देख सकते हैं? उन्होंने यीशु का विरोध किया क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु द्वारा बताए गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे और इसके अलावा क्योंकि उन्होंने मसीहा को नहीं समझा था। और चूँकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था और कभी मसीहा के साथ नहीं रहे थे, उन्होंने मसीहा के नाम के साथ व्यर्थ ही चिपके रहने की ग़लती की, जबकि हर मुमकिन ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का पालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत था : इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता, तुम मसीह नहीं हो। क्या ये दृष्टिकोण हास्यास्पद और बेतुके नहीं हैं? मैं तुम लोगों से आगे पूछता हूँ : क्या तुम लोगों के लिए वो ग़लतियां करना बेहद आसान नहीं, जो बिल्कुल आरंभ के फरीसियों ने की थीं, क्योंकि तुम लोगों के पास यीशु की थोड़ी-भी समझ नहीं है? क्या तुम सत्य का मार्ग जानने योग्य हो? क्या तुम सचमुच विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने योग्य हो? यदि तुम नहीं जानते कि तुम मसीह का विरोध करोगे या नहीं, तो मेरा कहना है कि तुम पहले ही मौत की कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने, यीशु को अस्वीकार करने, उसे बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा-भला कहने में सक्षम हैं। इसके अलावा, वे यीशु के लौटने को शैतान द्वारा किए गए धोखे की तरह देखने में सक्षम हैं और अधिकांश लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इस सबसे तुम लोगों को डर नहीं लगता? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के ख़िलाफ़ निंदा होगी, कलीसियाओं के लिए कहे गए पवित्र आत्मा के वचनों का विनाश होगा और यीशु द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो, तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम हठपूर्वक अपनी ग़लतियां मानने से इनकार करते हो, तो श्वेत बादल पर यीशु के देह में लौटने पर तुम लोग उसके कार्य को कैसे समझ सकते हो? मैं तुम लोगों को यह बताता हूँ : जो लोग सत्य स्वीकार नहीं करते, फिर भी अंधों की तरह श्वेत बादलों पर यीशु के आगमन का इंतज़ार करते हैं, निश्चित रूप से पवित्र आत्मा के ख़िलाफ़ निंदा करेंगे और ये वे वर्ग हैं, जो नष्ट किए जाएँगे। तुम लोग सिर्फ़ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो और सिर्फ़ स्वर्ग के सुखद क्षेत्र का आनंद लेना चाहते हो, जब यीशु देह में लौटा, तो तुमने यीशु के कहे वचनों का कभी पालन नहीं किया और यीशु द्वारा व्यक्त किए सत्य को कभी ग्रहण नहीं किया। यीशु के एक श्वेत बादल पर लौटने के तथ्य के बदले तुम लोग क्या दोगे? क्या यह वही ईमानदारी है, जिसमें तुम लोग बार-बार पाप करते हो और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? श्वेत बादल पर लौटने वाले यीशु को तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या ये कार्य के वे वर्ष हैं, जिनके ज़रिए तुम स्वयं अपनी बढ़ाई करते हो? लौटकर आए यीशु को तुम लोगों पर विश्वास कराने के लिए तुम लोग किस चीज को थामकर रखोगे? क्या वह तुम लोगों का अभिमानी स्वभाव है, जो किसी भी सत्य का पालन नहीं करता?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 76

तुम लोगों की सत्यनिष्ठा सिर्फ़ वचन में है, तुम लोगों का ज्ञान सिर्फ़ बौद्धिक और वैचारिक है, तुम लोगों की मेहनत सिर्फ़ स्वर्ग की आशीष पाने के लिए है और इसलिए तुम लोगों का विश्वास किस प्रकार का होना चाहिए? आज भी, तुम लोग सत्य के प्रत्येक वचन को अनसुना कर देते हो। तुम लोग नहीं जानते कि परमेश्वर क्या है, तुम लोग नहीं जानते कि मसीह क्या है, तुम लोग नहीं जानते कि यहोवा का आदर कैसे करें, तुम लोग नहीं जानते कि कैसे पवित्र आत्मा के कार्य में प्रवेश करें और तुम लोग नहीं जानते कि परमेश्वर स्वयं के कार्य और मनुष्य के धोखों के बीच कैसे भेद करें। तुम परमेश्वर द्वारा व्यक्त सत्य के किसी भी ऐसे वचन की केवल निंदा करना ही जानते हो, जो तुम्हारे विचारों के अनुरूप नहीं होता। तुम्हारी विनम्रता कहाँ है? तुम्हारी आज्ञाकारिता कहाँ है? तुम्हारी सत्यनिष्ठा कहाँ है? सत्य खोजने की तुम्हारी इच्छा कहाँ है? परमेश्वर के लिए तुम्हारा आदर कहाँ है? मैं तुम लोगों को बता दूँ कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से वह श्रेणी होगी, जो नष्ट की जाएगी। जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकार करने में अक्षम हैं, वे निश्चित ही नरक के वंशज, महादूत के वंशज हैं, उस श्रेणी में हैं, जो अनंत विनाश झेलेगी। बहुत से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को, जो यीशु का अनुसरण करते हैं, बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे, यही वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे। वह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति का समय होगा, और वह समय होगा, जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और संकेतों की खोज नहीं करते और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि "ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है" अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेत प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को स्वीकार नहीं करते, जो कड़े न्याय की घोषणा करता है और जीवन का सच्चा मार्ग बताता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे, तो वह उनके साथ निपटे। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं? यीशु की वापसी उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है, जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, पर उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, यह दंडाज्ञा का संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के ख़िलाफ़ निंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए, जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। निष्कर्ष पर पहुँचने की जल्दी में न रहो; और परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और विचारहीन न बनो। तुम लोगों को जानना चाहिए कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उन्हें विनम्र और श्रद्धावान होना चाहिए। जिन्होंने सत्य सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक-भौं सिकोड़ते हैं, वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जिन्होंने सत्य सुन लिया है और फिर भी लापरवाही के साथ निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या उसकी निंदा करते हैं, ऐसे लोग अभिमान से घिरे हैं। जो भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को शाप देने या निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जो समझदार है और सत्य स्वीकार करता है। शायद, सत्य के मार्ग को सुनकर और जीवन के वचन को पढ़कर, तुम विश्वास करते हो कि इन 10,000 वचनों में से सिर्फ़ एक ही वचन है, जो तुम्हारे दृढ़ विश्वास और बाइबल के अनुसार है, और फिर तुम्हें इन 10,000 वचनों में खोज करते रहना चाहिए। मैं अब भी तुम्हें सुझाव देता हूँ कि विनम्र बनो, अति-आत्मविश्वासी न बनो और अपनी बहुत बढ़ाई न करो। परमेश्वर के लिए अपने हृदय में इतना थोड़ा-सा आदर रखकर तुम बड़े प्रकाश को प्राप्त करोगे। यदि तुम इन वचनों की सावधानी से जाँच करो और इन पर बार-बार मनन करो, तब तुम समझोगे कि वे सत्य हैं या नहीं, वे जीवन हैं या नहीं। शायद, केवल कुछ वाक्य पढ़कर, कुछ लोग इन वचनों की आँखें मूँदकर यह कहते हुए निंदा करेंगे, "यह पवित्र आत्मा की थोड़ी प्रबुद्धता से अधिक कुछ नहीं है," या "यह एक झूठा मसीह है जो लोगों को धोखा देने आया है।" जो लोग ऐसी बातें कहते हैं वे अज्ञानता से अंधे हो गए हैं! तुम परमेश्वर के कार्य और बुद्धि को बहुत कम समझते हो और मैं तुम्हें पुनः शुरू से आरंभ करने की सलाह देता हूँ! तुम लोगों को अंत के दिनों में झूठे मसीहों के प्रकट होने की वजह से आँख बंदकर परमेश्वर द्वारा अभिव्यक्त वचनों का तिरस्कार नहीं करना चाहिए और चूँकि तुम धोखे से डरते हो, इसलिए तुम्हें पवित्र आत्मा के ख़िलाफ़ निंदा नहीं करनी चाहिए। क्या यह बड़ी दयनीय स्थिति नहीं होगी? यदि, बहुत जाँच के बाद, अब भी तुम्हें लगता है कि ये वचन सत्य नहीं हैं, मार्ग नहीं हैं और परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हैं, तो फिर अंततः तुम दंडित किए जाओगे और आशीष के बिना होगे। यदि तुम ऐसा सत्य, जो इतने सादे और स्पष्ट ढंग से कहा गया है, स्वीकार नहीं कर सकते, तो क्या तुम परमेश्वर के उद्धार के अयोग्य नहीं हो? क्या तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो, जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौटने के लिए पर्याप्त सौभाग्यशाली नहीं है? इस बारे में सोचो! उतावले और अविवेकी न बनो और परमेश्वर में विश्वास को खेल की तरह पेश न आओ। अपनी मंज़िल के लिए, अपनी संभावनाओं के वास्ते, अपने जीवन के लिए सोचो और स्वयं से खेल न करो। क्या तुम इन वचनों को स्वीकार कर सकते हो?

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