II. परमेश्वर का प्रकटन और कार्य

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 46

स्तुति सिय्योन तक आ गई है और परमेश्वर का निवास स्थान-प्रकट हो गया है। सभी लोगों द्वारा प्रशंसित, महिमामंडित पवित्र नाम फैल रहा है। आह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! ब्रह्मांड का मुखिया, अंत के दिनों का मसीह—वह जगमगाता सूर्य है, जो पूरे ब्रह्मांड में प्रताप और वैभव में ऊँचे पर्वत सिय्योन पर उदित हुआ है ...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम हर्षोल्लास में तुझे पुकारते हैं; हम नाचते और गाते हैं। तू वास्तव में हमारा उद्धारकर्ता, ब्रह्मांड का महान सम्राट है! तूने विजेताओं का एक समूह बनाया है और परमेश्वर की प्रबंधन-योजना पूरी की है। सभी लोग इस पर्वत की ओर बढ़ेंगे। सभी लोग सिंहासन के सामने घुटने टेकेंगे! तू एकमेव सच्चा परमेश्वर है और तू ही महिमा और सम्मान के योग्य है। समस्त महिमा, स्तुति और अधिकार सिंहासन का हो! जीवन का झरना सिंहासन से प्रवाहित होता है, जो बड़ी संख्या में परमेश्वर के लोगों को सींचता और पोषित करता है। जीवन प्रतिदिन बदलता है; नई रोशनी और नए प्रकटन हमारा अनुसरण करते हैं, जो लगातार परमेश्वर के बारे में अंतर्दृष्टियाँ देते हैं। अनुभवों के बीच हम परमेश्वर के बारे में पूर्ण निश्चितता पर पहुँचते हैं। उसके वचन लगातार प्रकट किए जाते हैं, उनके भीतर प्रकट किए जाते हैं, जो सही हैं। हम सचमुच बहुत धन्य हैं! परमेश्वर से रोज़ाना आमने-सामने मिल रहे हैं, सभी बातों में परमेश्वर के साथ संवाद कर रहे हैं, और हर बात में परमेश्वर को संप्रभुता दे रहे हैं। हम सावधानीपूर्वक परमेश्वर के वचन पर विचार करते हैं, हमारे हृदय परमेश्वर में शांति पाते हैं, और इस प्रकार हम परमेश्वर के सामने आते हैं, जहाँ हमें उसका प्रकाश मिलता है। रोज़ाना अपने जीवन, कार्यों, वचनों, विचारों और धारणाओं में हम परमेश्वर के वचन के भीतर जीते हैं, और हम हमेशा पहचान करने में सक्षम होते हैं। परमेश्वर का वचन सुई में धागा पिरोता है; अप्रत्याशित ढंग से हमारे भीतर छिपी हुई चीज़ें एक-एक करके प्रकाश में आती हैं। परमेश्वर के साथ संगति देर सहन नहीं करती; हमारे विचार और धारणाएँ परमेश्वर द्वारा उघाड़कर रख दी जाती हैं। हर पल हम मसीह के आसन के सामने जी रहे हैं, जहाँ हम न्याय से गुज़रते हैं। हमारे शरीर के भीतर हर जगह पर शैतान का कब्ज़ा है। आज, परमेश्वर की संप्रभुता पुन: प्राप्त करने के लिए, उसके मंदिर को स्वच्छ करना होगा। पूरी तरह से परमेश्वर के अधीन होने के लिए हमें जीवन-मरण के संघर्ष में संलग्न होना होगा। केवल हमारी पुरानी अस्मिता को सलीब पर चढ़ाए जाने के बाद ही मसीह का पुनरुत्थित जीवन संप्रभुता में शासन कर सकता है।

अब पवित्र आत्मा हमारे उद्धार की लड़ाई लड़ने के लिए हमारे हर कोने में धावा बोलता है! जब तक हम अपने आपको नकारने और परमेश्वर के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, तब तक परमेश्वर निश्चित रूप से हमें हर समय भीतर से रोशन और शुद्ध करेगा, और उसे नए सिरे से प्राप्त करेगा, जिस पर शैतान ने कब्ज़ा कर रखा है, ताकि हम परमेश्वर द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण किए जा सकें। समय बरबाद मत करो—और हर क्षण परमेश्वर के वचन के भीतर रहो। संतों के साथ बढ़ो, राज्य में लाए जाओ, और परमेश्वर के साथ महिमा में प्रवेश करो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 1' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 47

फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है, और यह पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है। परमेश्वर के लिए प्रेम अनेक संतों में जगता है जो बिना डगमगाए अपने आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। वे अपने इस विश्वास पर दृढ़ रहते हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीज़ों को नियंत्रित करता है : इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और यह पर्वतों की तरह अचल है! यह कभी नहीं बदल सकता!

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आज तुमने हमारी आध्यात्मिक आँखें खोल दी हैं, जिससे अंधे देख रहे हैं, लंगड़े चल रहे हैं, और कुष्ठरोगी चंगे हो रहे हैं। यह तुम ही हो जिसने स्वर्ग की ओर की खिड़की खोल दी है और इसके द्वारा हमें आध्यात्मिक दुनिया के रहस्यों को समझने दिया है। तुम्हारे पवित्र शब्द हमारे भीतर जज़्ब हो गए हैं, और शैतान द्वारा दूषित हमारी मानवता से हम बचा लिए गए हैं। यह तुम्हारा अपरिमेय महान काम है और तुम्हारी महान अपरिमेय दया है। हम तुम्हारे गवाह हैं!

तुम लंबे समय से विनम्रता और ख़ामोशी में छिपे रहे हो। तुम मृत्यु से पुनरुत्थित हुए हो और सूली पर चढ़ने की पीड़ा सहने का, मानव जीवन के सुखों और दुखों का, और साथ-साथ उत्पीड़न और विपत्ति का अनुभव किया है; तुमने मानव संसार के दर्द का अनुभव और स्वाद लिया है, और तुम्हें युग द्वारा त्यागा गया है। देहधारी परमेश्वर स्वयं परमेश्वर है। तुमने हमें परमेश्वर की इच्छा की खातिर मैले के ढेर से बचाया है, हमें अपने दाहिने हाथ से उठाया है और मुक्त रूप से अपना अनुग्रह हमें दिया है। कोई प्रयास बाकी न रखते हुए, तुमने अपना जीवन हममें गढ़ा है; अपने रक्त, पसीने, और आँसूओं से जो कीमत तुमने चुकाई है, वह संतों में ठोस रूप में उपस्थित है। हम तुम्हारे श्रमसाध्य प्रयासों के परिणाम[क] हैं; हम वह कीमत हैं जो तुमने चुकाई है।

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारी प्रेमपूर्ण दया और कृपा, तुम्हारी धार्मिकता और महिमा, तुम्हारी पवित्रता और नम्रता के कारण ही सभी लोग तुम्हारे सामने झुकेंगे और अनंत काल तक तुम्हारी आराधना करेंगे।

आज तुमने सभी कलीसियों को पूरा किया है—फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया—और इस प्रकार अपनी 6,000 साल की प्रबंधन योजना को पूरा किया है। सभी संत अब नम्रता से तुम्हारे सामने समर्पित हो सकते हैं; वे एक दूसरे से आत्मा में जुड़े हुए हैं और एक दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक आगे बढ़ते हैं। वे झरने के स्रोत से जुड़े हैं। जीवन का जीवित पानी निरंतर बहता है और वह कलीसिया की सभी गंदगी और कीचड़ को बहा ले जाता है, और एक बार फिर तुम्हारे मंदिर को शुद्ध करता है। हमने व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर को जाना है, उसके वचनों में चले हैं, अपने कार्यों और कर्तव्यों को पहचाना है, और कलीसिया के लिए खुद को खपाने के लिए जो कुछ हम कर सकते थे वो हमने किया है। तुम्हारे सामने हर एक पल शांत रहते हुए, हमें पवित्र आत्मा के काम पर ध्यान देना चाहिए ताकि तुम्हारी इच्छा हमारे भीतर अवरुद्ध न हो। संतों के बीच आपसी प्रेम है, और कुछ की मज़बूतियां दूसरों की विफलताओं की भरपाई करेंगी। वे हर पल आत्मा में चल सकते हैं और पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध और प्रकाशित किए गए हैं। सत्य समझने के तुरंत बाद वे उसे अभ्यास में ले आते हैं। वे नई रोशनी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हैं।

सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो; उसे नियंत्रण सौंपने का अर्थ है उसके साथ चलना। हमारे सभी विचार, धारणाएं, सोच और धर्मनिरपेक्ष उलझनें, धुएं की तरह हवा में गायब हो जाती हैं। हम परमेश्वर को अपनी आत्माओं पर शासन करने देते हैं, उसके साथ चलते हैं और इस तरह उत्थान हासिल करते हुए दुनिया पर विजय प्राप्त करते हैं, और हमारी आत्माएं मुक्त हो जाती हैं और रिहाई प्राप्त करती हैं : जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर राजा बनेगा तो येपरिणाम होंगे। ऐसा कैसे हो सकता है कि हम नृत्य न करें और स्तुति में न गाएं, अपनी प्रशंसा भेंट न करें, और अपने नए भजन न पेश करें?

वास्तव में परमेश्वर की स्तुति करने के कई तरीके हैं : उसका नाम पुकारना, उसके पास आना, उसके बारे में सोचना, प्रार्थना करते हुए पढ़ना, साहचर्य में शामिल होना, चिंतन करना, सोच-विचार करना, प्रार्थना करना और प्रशंसा के गीत गाना। इस तरह की स्तुति में आनंद है, और अभिषेक है; स्तुति में शक्ति है और एक दायित्व भी है। स्तुति में विश्वास है, और एक नई अंतर्दृष्टि भी है।

सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो, सेवा में समन्वय करो और एक हो जाओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करो, एक पवित्र आध्यात्मिक शरीर बनने के लिए तत्पर रहो, शैतान को कुचलो, और उसकी नियति समाप्त करो। फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया परमेश्वर के सामने आरोहित की गयी है और परमेश्वर की महिमा में प्रकट की जाती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 2' से

फुटनोट:

क. मूल पाठ में, "के परिणाम" यह वाक्यांश नहीं है।

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 48

विजयी राजा अपने शानदार सिंहासन पर बैठता है। उसने छुटकारा दिलाने का कार्य पूरा कर लिया है और महिमा में प्रकट होने के लिए अपने सभी लोगों की अगुआई की है। वह ब्रह्मांड को अपने हाथों में धारण करता है और अपने दिव्य ज्ञान और पराक्रम से उसने अटल सिय्योन का निर्माण किया है। अपने प्रताप से वह पापी दुनिया का न्याय करता है; उसने सभी देशों और सभी लोगों, पृथ्वी और समुद्र और उनमें रहने वाले सभी जीवों पर, और साथ ही स्वच्छंद भोग की मदिरा के नशे में डूबे लोगों पर फैसला सुनाया है। परमेश्वर उनका न्याय ज़रूर करेगा, और वह निश्चित रूप से उन पर क्रोधित होगा और इसमें परमेश्वर की महिमा प्रकट होगी, जिसका न्याय तत्क्षण होता है और अविलंब प्रदान किया जाता है। उसके क्रोध की अग्नि उनके घृणित अपराधों को भस्म कर देगी और किसी भी क्षण उन पर विपत्ति टूटेगी; उन्हें बच निकलने के लिए किसी भी मार्ग और छिपने के किसी भी स्थान का पता नहीं होगा, वे रोएँगे और अपने दाँत पीसेंगे, और अपने ऊपर विनाश ले आएँगे।

परमेश्वर के प्यारे विजयी पुत्र निश्चित रूप से सिय्योन में रहेंगे, उससे कभी विदा नहीं होंगे। बड़ी संख्या में लोग करीब से उसकी आवाज़ सुनेंगे, वे सावधानी से उसके कार्यों पर ध्यान देंगे, और उनकी प्रशंसा की आवाजें कभी बंद नहीं होंगी। एक सच्चा परमेश्वर प्रकट हुआ है! हम आत्मा में उसके बारे में निश्चित होंगे और ध्यानपूर्वक उसका अनुसरण करेंगे; हम अपनी पूरी ताकत से आगे बढ़ेंगे और अब और नहीं झिझकेंगे। दुनिया का अंत हमारे सामने प्रकट हो रहा है; चर्च के एक उपयुक्त जीवन के साथ-साथ लोग, कामकाज और चीजें, जिनसे हम घिरे हैं, हमारे प्रशिक्षण को घनीभूत कर रही हैं। आओ, जल्दी से अपने हृ्दयों को वापस लें, जो दुनिया से बहुत प्रेम करते हैं! आओ, जल्दी से अपनी दृष्टि वापस लें, जो इतनी धुँधली है! आओ, अपने कदम रोक लें, ताकि हम सीमाएँ न लाँघ जाएँ। आओ, अपना मुँह बंद करें, ताकि हम परमेश्वर के वचन में जा सकें, और अब अपनी लाभ-हानियों पर झगड़ा न करें। आह, धर्मनिरपेक्ष दुनिया और धन-दौलत के प्रति तुम्हारा लालची शौक—इसे त्याग दो! पतियों, बेटियों और बेटों के साथ तुम्हारा अडिग लगाव—इससे अपने को मुक्त करो! आह, तुम्हारे दृष्टिकोण और पूर्वाग्रह—इनसे पीठ मोड़ लो! आह, जागो; समय कम है! आत्मा के भीतर से देखो, ऊपर देखो, और परमेश्वर को नियंत्रण करने दो। कुछ भी हो जाए, लूत की दूसरी पत्नी न बनो। बेकार समझकर छोड़ दिया जाना कितना दयनीय होता है! सचमुच, कितना दयनीय! आह, जागो!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 3' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 49

पर्वत और नदियां बदलती रहती हैं, धाराएं अपनी दिशा में बहती रहती हैं, और मनुष्य का जीवन उतना स्थायी नहीं होता जितना पृथ्वी और आकाश का। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर का जीवन ही शाश्वत है और पुनर्जीवित होता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी शाश्वत रूप से चलता रहता है! सभी चीज़ें और घटनाएं उसके हाथों में हैं, और शैतान उसके चरणों में है।

आज परमेश्वर के पूर्वनिर्धारित चयन के कारण ही हम लोग शैतान की पकड़ से बचे हुए हैं। वह वास्तव में हमारा उद्धारक है। दरअसल, मसीह का शाश्वत पुनर्जीवित जीवन हमारे भीतर गढ़ दिया गया है, जो हमारे जीवन को परमेश्वर के जीवन से जुड़ने के लिए नियत कर रहा है, ताकि हम उसके रूबरू आ सकें, उसे खा सकें, उसे पी सकें और उसका आनंद ले सकें। यह वह निस्वार्थ बलिदान है जिसे परमेश्वर ने अपने दिल के खून की कीमत से चुकाया है।

मौस आते हैं, जाते हैं, आँधी-तूफान से गुज़रते, जीवन के कितने ही दुख-दर्द, उत्पीड़न और यातनाओं को झेलते हुए, दुनिया के कितने ही अस्वीकरण और अभिशाप बर्दाश्त करते हुए, सरकार के कितने ही झूठे आरोपों का सामना करते हुए, न तो परमेश्वर का विश्वास और न ही उसका संकल्प ज़रा-सा कम होता है। पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा के लिए, परमेश्वर के प्रबंधन और योजना को पूरा करने के लिए तहेदिल से काम करते हुए, वह अपने जीवन की परवाह नहीं करता। अपने सभी लोगों के लिए, वह कोई प्रयास नहीं छोड़ता, सावधानी से उनका पोषण और सिंचन करता है। हम चाहे कितने भी अनाड़ी हों, या कितने भी जिद्दी हों, हमें केवल उसके प्रति समर्पित होने की ज़रूरत है, और मसीह का पुनर्जीवित जीवन हमारी पुरानी प्रकृति को बदल देगा...। इन सबसे पहले जन्मे पुत्रों के लिए, वह अथक परिश्रम करता है, खाने और सोने की परवाह नहीं करता। कितने ही दिन और रात गुज़रें, कितनी ही तेज़ गर्मी और जमाने वाली ठंड से गुज़रना पड़े, वह सिय्योन को तहेदिल से देखता है।

दुनिया, घर, काम और हर चीज़ को प्रसन्नता और स्वेच्छा से त्याग देता है, सांसारिक सुख-सुविधाओं से उसे कोई लेना-देनानहीं...। उसके मुंह के वचन हमारे भीतर वार करते हैं, हमारे दिल में गहरी छिपी चीज़ों को उजागर करते हैं। हम कैसे आश्वस्त नहीं होंगे? उसके मुंह से निकलने वाला हर वाक्य हमारे भीतर किसी भी समय सच साबित होता है। हम जो भी करते हैं, उसके सामने या उससे छिपाकर, ऐसा कुछ नहीं है जो वो नहीं जानता, ऐसा कुछ नहीं है जो वो नहीं समझता। हमारी योजनाओं और व्यवस्थाओं के बावजूद सब उसके सामने प्रकट होगा।

उसके सामने बैठकर, हमारी आत्मा आनंद लेती है, सुखी और शांत रहती है, फिर भी हमेशा खालीपन और परमेश्वर के प्रति सचमुच ऋणी महसूस करती है; यह एक अकल्पनीय आश्चर्य है और इसे हासिल करना असंभव है। पवित्र आत्मा पर्याप्त रूप से साबित करता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सच्चा परमेश्वर है! यह एक अकाट्य प्रमाण है! समूह के हम लोग, वास्तव में बहुत धन्य हैं! यदि परमेश्वर का अनुग्रह और दया नहीं होती, तो हमारा विनाश हो जाता और हमें शैतान का अनुसरण करना पड़ता। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही हमें बचा सकता है!

आह! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यवहारिक परमेश्वर है! तुम हो जिसने हमारी आध्यात्मिक आंखें खोली हैं, और हम आध्यात्मिक दुनिया के रहस्यों को देख पाए हैं। राज्य की संभावनाएँ अनंत हैं। आओ सावधान रहकर प्रतीक्षा करें। वह दिन बहुत दूर नहीं हो सकता।

युद्ध की लपटें चक्कर लगाती हैं, तोप का धुआं हवा में भर गया है, मौसम गर्म हो गया, जलवायु परिवर्तित हो रही है, महामारी फैलेगी, लोग मरेंगे और उनके बचने की उम्मीद बहुत कम है।

आह! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यवहारिक परमेश्वर! तुम हमारे मज़बूत किले हो। तुम हमारा आश्रय हो। हम तुम्हारे पंखों के नीचे सिमटते हैं, और आपदा हम तक नहीं पहुंच सकती। ऐसी है तुम्हारी दिव्य सुरक्षा और देखभाल।

हम सब ऊँचे सुर में गाते हैं; स्तुति करते हैं और हमारा स्तुति-गान पूरे सिय्योन में गूंजता है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यवहारिक परमेश्वर ने हमारे लिए गौरवशाली मंज़िल तैयार की है। सावधान रहो—नज़र रखो! अभी भी देर नहीं हुई है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 5' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 50

जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर—राज्य के राजा—की गवाही दी गई है, तब से पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर के प्रबंधन का दायरा पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। परमेश्वर के प्रकटन की गवाही न केवल चीन में दी गई है, बल्कि सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही दी गई है। वे सभी इस पवित्र नाम को पुकार रहे हैं, किसी भी तरह से परमेश्वर के साथ सहभागिता करने का प्रयास कर रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छा को समझ रहे हैं और कलीसिया में मिल कर सेवा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा इसी अद्भुत तरीके से काम करता है।

विभिन्न राष्ट्रों की भाषाएँ एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आत्मा एक ही है। यह आत्मा संसार भर की कलीसियाओं को जोड़ता है और बिना किसी भेदभाव के, परमेश्वर के साथ एक है, और इसमें कोई शक नहीं है। पवित्र आत्मा अब उन्हें पुकारता है और उसकी वाणी उन्हें जगाती है। यह परमेश्वर की दया की वाणी है। वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पवित्र नाम को पुकार रहे हैं! वे स्तुति भी करते हैं और गाते भी हैं। पवित्र आत्मा के कार्य में कभी भी कोई चूक नहीं हो सकती: और सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाते हैं, वे पीछे नहीं हटते हैं—चमत्कारों पर चमत्कार होते रहते हैं। लोगों के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है और इसका अनुमान लगाना उन्हें असंभव लगता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सारे ब्रह्मांड में जीवन का राजा है! वह महिमामय सिंहासन पर बैठता है और दुनिया का न्याय करता है, सभी पर वर्चस्व रखता है, और सभी राष्ट्रों पर शासन करता है; सभी लोग उसके सामने घुटने टेकते हैं, उससे प्रार्थना करते हैं, उसके करीब आते हैं और उसके साथ संवाद करते हैं। चाहे तुमने परमेश्वर में कितने भी लम्बे समय से विश्वास रखा हो, चाहे तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊंचा हो या तुम्हारी वरिष्ठता कितनी भी अधिक हो, यदि तुम अपने दिल में परमेश्वर का विरोध करते हो तो तुम्हारा न्याय किया जाना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सामने दंडवत होकर दर्द भरा अनुनय-विनय करना चाहिए; यह वास्तव में तुम्हारा अपने कर्मों के फल को भुगतना है। यह विलाप का स्वर अग्नि और गंध की झील में पीड़ा सहने का स्वर है, और यह परमेश्वर की लोहे की छड़ी से प्रताड़ित होने का क्रंदन है; यह मसीह के आसन के सामने किया गया न्याय है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 8' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 51

सभी कलीसियाओं में परमेश्वर पहले से ही प्रकट हो चुका है। आत्मा बोल रहा है, वह एक प्रबल अग्नि है, उसमें महिमा है और वह न्याय कर रहा है; वह मनुष्य का पुत्र है, जो पाँवों तक का वस्त्र पहने हुए है और छाती पर सोने की पटुका बाँधे हुए है। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन के समान उज्ज्वल हैं, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं; उसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, मानो भट्ठी में तपे हुए हों; और उसके वचन अनेक जलों के समान हैं। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है, और उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित है, जैसे सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता हो!

सूर्य की कड़ी धूप के समय की चमक में, मनुष्य के पुत्र को देखा गया है, परमेश्वर ने अपने आप को खुले रूप से प्रकट किया है, परमेश्वर की महिमा प्रकट की गई है! परमेश्वर का गौरवशाली मुख अपनी चमक से चकाचौंध करता है; किसकी आंखें उसके प्रति अवज्ञा करने की हिम्मत कर सकती हैं? अवज्ञा का अर्थ है मृत्यु! अपने दिल में जो कुछ भी तुम सोचते हो, जो भी शब्द तुम कहते हो या जो कुछ भी तुम करते हो, उसके लिए थोड़ी-सी भी दया नहीं है। तुम लोग सब समझोगे और देखोगे कि तुम लोगों ने क्या पाया है—मेरे न्याय के अलावा कुछ नहीं! अगर तुम लोग मेरे वचनों को खाने और पीने के लिए अपना प्रयास नहीं करते हो, बल्कि मनमाने ढंग से बाधा डालते हो और मेरा निर्माण नष्ट करते हो, तो क्या मैं इसे बरदाश्‍त कर सकता हूं? मैं इस तरह के व्यक्ति के साथ नरमी नहीं करूंगा! यदि यह थोड़ा और गंभीर हुआ, तो तुम आग में भस्म हो जाओगे! सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक आध्यात्मिक शरीर में प्रकट हुआ है, और सिर से पैर तक देह या रक्त से बिल्‍कुल जुड़ा नहीं है। वह ब्रह्मांडीय दुनिया से परे है, और तीसरे स्वर्ग के गौरवशाली सिंहासन पर बैठा प्रशासन करता है! ब्रह्मांड और सभी चीज़ें मेरे हाथों में हैं। मैं जो भी कहूंगा वही होगा। मेरा आदेश पूरा होगा। शैतान मेरे पैरों के तले है, वह एक अथाह गड्ढे में है! मेरे एक आदेश के जारी होने पर तो आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे और उनका कोई अस्तित्‍व नहीं रहेगा! सभी चीज़ें नवीनीकृत हो जाएंगी और यह एक अटल सत्य है, जो अत्‍यधिक सत्य है। मैंने दुनिया को जीत लिया है, सभी दुष्टों पर विजय प्राप्त की है। मैं यहाँ बैठा तुम लोगों से बात कर रहा हूँ; जिनके पास कान हैं, उन्हें सुनना चाहिए और जो जीवित हैं उन्हें स्वीकार करना चाहिए।

दिन समाप्त हो जाएंगे; दुनिया की सभी चीज़ों का कोई मूल्य नहीं रहेगा, और सब कुछ नया बनकर उत्पन्न होगा। यह याद रखना! यह याद रखना! इस बात में कोई संदिग्‍धता नहीं हो सकती है! आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी! एक बार फिर मुझे तुम लोगों को प्रेरित करने दो: व्यर्थ में भागो मत! जागो! पश्चाताप करो और उद्धार हाथ में होगा! मैं पहले ही तुम लोगों के बीच प्रकट हो चुका हूं और मेरी वाणी उदय हो चुकी है। मेरी वाणी तुम लोगों के सामने उदय हो चुकी है, हर दिन वह तुम लोगों के सामने है, हर दिन वह ताज़ी और नई है। तुम मुझे देखते हो और मैं तुम्हें देखता हूं, मैं तुम्हारे साथ आमने-सामने निरंतर बात करता हूं। और फिर भी तुम मुझे अस्वीकार करते हो, तुम मुझे नहीं जानते हो; मेरी भेड़ें मेरे वचन सुनती हैं और फिर भी तुम लोग संकोच करते हो! तुम संकोच करते हो! तुम्हारा मन मोटा हो गया है, तुम्हारी आंखों को शैतान ने अंधा कर दिया है और तुम मेरे गौरवशाली मुख को देख नहीं पाते हो—यह कितना दयनीय है! कितना दयनीय है!

मेरे सिंहासन के सामने उपस्थित सात आत्माओं को पृथ्वी के सभी कोनों में भेजा जाता है और मैं कलीसियाओं से बात करने के लिए अपने संदेशवाहक भेजूंगा। मैं धर्मी और विश्वासयोग्य हूं, मैं वह परमेश्वर हूं जो मनुष्यों के दिल की गहराइयों की जांच करता है। पवित्र आत्मा कलीसियाओं से बात करता है और मेरे पुत्र के भीतर से निकलने वाले वचन मेरे हैं; जिनके कान हैं उन्हें सुनना चाहिए! जो जीवित हैं उन्हें स्वीकार करना चाहिए! बस उन्हें खाओ और पिओ, और संदेह न करो। जो लोग मेरी आज्ञा मानेंगे और मेरे वचनों का पालन करेंगे, उन्हें महान आशीष प्राप्त होंगे! जो लोग ईमानदारी से मेरे मुख की खोज करेंगे, उनके पास निश्चित रूप से नई रोशनी, नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि होगी; सब कुछ ताज़ा और नया होगा। मेरे वचन तुम्हारे लिए किसी भी समय प्रकट होंगे और वे तुम्हारी आत्मा की आंखें खोल देंगे ताकि तुम आध्यात्मिक दुनिया के सभी रहस्यों को देख सको और देख सको कि राज्य मनुष्य के बीच है। शरण में प्रवेश करो और सभी अनुग्रह और आशीष तुम्हें प्राप्त होंगे, अकाल और महामारी तुम्हें छू नहीं सकेंगी, भेड़िए, साँप, बाघ और तेंदुए तुम्हें नुकसान पहुंचाने में असमर्थ रहेंगे। तुम मेरे साथ जाओगे, साथ चलोगे और मेरे साथ महिमा में प्रवेश करोगे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 15' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 52

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसका गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट होता है, पवित्र आध्यात्मिक शरीर उदय होता है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और देह दोनों बदल गए हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्‍यक्तित्‍व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सोने की पटुका बाँधे हुए है और दुनिया की सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं, उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम उज्ज्वल है और उसकी महिमा उदित हो रही और चमक रही है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्‍य मग्‍न हैं, सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, और अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का स्वागत करते हैं, जिनकी विजयी वापसी उनके छह हज़ार वर्ष की प्रबंधन योजना को पूरा करती है। ख़ुशी से सब कूदते और नाचते हैं! जय हो! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज राजसी, भव्‍य सिय्योन की ऊंचाई पर लहराता है! सभी राष्ट्र उत्साहित हैं, सभी लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्‍नता से हँस रहा है, परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का चेहरा देखूंगा, लेकिन आज मैंने इसे देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने, मैं अपना दिल खोलकर रखता हूं। खाने पीने का सभी कुछ, वह प्रचुरता से प्रदान करता है। जीवन, वचन, कार्य, सोच, विचार—उसका महिमामय प्रकाश इन सभी को उज्जवल करता है। वह रास्ते के हर कदम पर अगुवाई करता है, और यदि कोई दिल विद्रोह करता है तो उसका न्याय तुरंत होगा।

परमेश्वर के साथ मिलकर खाना, साथ रहना, साथ जीना, साथ होना, साथ चलना, साथ आनंद लेना, साथ-साथ महिमा और आशीष प्राप्त करना, परमेश्वर के साथ शासन साझा करना और राज्य में एक साथ होना—ओह कितना आनंददायक है! ओह कितना प्यारा है! हम हर दिन उसके साथ आमने-सामने होते हैं, हर दिन बोलते हैं, निरंतर वार्तालाप करते हैं, हर दिन नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं। हमारी आध्यात्मिक आंखें खुल गई हैं और हम सब कुछ देखते हैं, आत्मा के सभी रहस्य हमें प्रकट होते हैं। पवित्र जीवन कितना निश्चिंत है। तेज़ी से भागो और रुको मत, निरंतर आगे बढ़ो, आगे इससे भी अधिक अद्भुत एक जीवन है। केवल मीठे स्वाद से संतुष्ट न हो, बल्कि हमेशा परमेश्वर में प्रवेश करने का प्रयास करो। वह सर्वव्यापी और प्रचुर है, और उसके पास सभी प्रकार की चीज़ें हैं जिनकी हम में कमी है। सक्रियता से सहयोग करो, उसके अंदर प्रवेश करो और कुछ भी कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा। हमारे जीवन का उत्थान होगा और कोई भी व्यक्ति, मामला या बात हमें परेशान नहीं कर पाएगी।

उत्थान! उत्थान! सच्चा उत्थान! परमेश्वर का जीवन उत्थान भीतर है और सभी वस्तुएं वास्तव में शांत हो जाती हैं! हम दुनिया और सांसारिक चीज़ो से परे चले जाते हैं, पतियों या बच्चों से कोई मोह नहीं रहता। बीमारी और वातावरण के नियंत्रण के परे चले जाते हैं। शैतान हमें परेशान नहीं कर सकता है। सभी आपदाओं से हम ऊपर हो जाते हैं—यह परमेश्वर को शासन की अनुमति देना है! हम शैतान को अपने कदमों के तले कुचल देते हैं, कलीसिया के लिए गवाही देते हैं और पूरी तरह से शैतान के बदसूरत चेहरे को बेनकाब करते हैं। कलीसिया का निर्माण मसीह में है, गौरवशाली शरीर का उदय हुआ है—यह स्‍वर्गारोहण में जीना है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 15' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 53

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अनन्‍तकाल का पिता, शांति का राजकुमार, हमारा परमेश्वर राजा है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने चरण जैतून के पर्वत पर रखता है। यह कितना खूबसूरत है! सुनो! हम पहरूए पुकार रहे हैं; एक साथ जयजयकार कर रहे हैं, क्योंकि परमेश्वर सिय्योन में लौट आया है। हम अपनी आँखों से यरूशलेम को खंडहर होता देख रहे हैं। उमंग में सामने आओ और साथ में गाओ, क्योंकि परमेश्वर ने हमें शान्ति दी है और यरूशलेम को छुड़ा लिया है। परमेश्वर ने सारी जातियों के सामने अपनी पवित्र भुजा प्रकट की है, परमेश्वर का वास्तविक स्‍वरूप प्रकट हुआ है! पृथ्वी के दूर-दूर देशों के सब लोग हमारे परमेश्‍वर का किया हुआ उद्धार देख लेंगे।

ओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तेरे सिंहासन से सात आत्माओं को सभी कलीसियाओं में भेजा गया है ताकि तेरे सभी रहस्यों को उजागर किया जा सके। अपनी महिमा की राजगद्दी पर बैठकर, तूने अपने राज्य का संचालन किया है और इसे न्‍याय और धर्म के द्वारा मजबूत और स्थिर किया है, तूने सभी जातियों को अपने सामने दबा दिया है। ओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तूने राजाओं के कमरबंद को ढीला कर दिया है, अपने सामने फाटकों को ऐसा खोल दिया है कि वे फाटक बन्‍द न किए जाएँ। क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है और तेरा तेज़ उदित हुआ है, और अपनी कान्ति चम का रहा है। पृथ्‍वी पर तो अन्धियारा और राज्‍य–राज्‍य के लोगों पर घोर अन्‍धकार छाया हुआ है। हे परमेश्वर! परन्तु तू हम पर प्रकट हुआ है, तूने अपना प्रकाश हम पर चमकाया है और तेरी महिमा हम पर प्रगट होगी; जाति-जाति तेरे पास प्रकाश के लिये और राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आएँगे। तू अपनी आँखें उठाकर चारों ओर देखता है: वे सब-के-सब इकट्ठे होकर तेरे पास आ रहे हैं, तेरे पुत्र दूर से आ रहे हैं और तेरी पुत्रियाँ हाथों-हाथ पहुँचाई जा रही हैं। हे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर, तेरा महान प्रेम हमें थाम लेता है; यह तू ही है, जो हमें तेरे राज्य को जाते मार्ग पर आगे बढ़ाता है और ये तेरे पवित्र वचन ही हैं जो हमें भेदते हैं।

ओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम तुझे धन्यवाद देते हैं और हम तेरी प्रशंसा करते हैं! हम तेरी ओर देखें, तेरे दर्शन करें, तुझे ऊंचा उठाएं, और एक नेक, प्रशांत और एकचित्त ह्रदय के साथ तेरे लिए गाएँ। हमारा बस एक ही मन हो और हम एक साथ मिलकर निर्मित हों और तू जल्द ही, हमें वैसा बनाए जो तेरे दिल का अनुसरण करते हैं, जो तेरे द्वारा काम में लाए जाते हैं। हम चाहते हैं कि तेरी इच्छा पूरी पृथ्‍वी पर अबाधित रूप से पूरी हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 25' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 54

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सर्वशक्तिसंपन्न, सर्वस्व प्राप्त करने वाला और पूरा सच्चा परमेश्वर है! वह न केवल सात सितारों को थामता है, सात आत्माओं को धारण करता है, सात आँखें रखता है, सात मुहरों को तोड़कर पुस्तक को खोलता है, लेकिन उससे भी अधिक वह सात विपत्तियों और सात कटोरों का प्रबंधन करता है और सात गर्जनों को खोलता है; बहुत पहले उसने सात तुरही बजाई हैं! उसके द्वारा बनाई और पूर्ण की गई सभी चीज़ों को उसकी प्रशंसा करनी चाहिए, उसे महिमा देनी चाहिए और उसके सिंहासन को सराहना चाहिए। हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम सर्वस्व हो, तुमने सब कुछ पूरा कर लिया है, और तुम्हारे साथ सब कुछ पूर्ण है, सब कुछ उज्ज्वल, बंधन से मुक्त, स्वतंत्र, मजबूत और शक्तिशाली है! गुप्त या छिपा हुआ कुछ भी नहीं है, तुम्हारे होते सभी रहस्य प्रकट हो जाते हैं। इसके अलावा, तुम अपने दुश्मनों के समूह का न्याय करते हो, अपने प्रताप को प्रदर्शित करते हो, अपनी उग्रता की आग दिखाते हो, अपना क्रोध दिखाते हो, और उससे भी अधिक तुम अपनी अभूतपूर्व, अनन्त, पूरी तरह से असीम महिमा को प्रदर्शित करते हो! सभी लोगों को जागृत होना चाहिए और बिना किसी झिझक के जय-जयकार और गायन करना चाहिए, सर्वशक्तिमान, सर्वथा-सच्चे, सर्वथा-जीवंत, उदार, महिमावान और सच्चे परमेश्वर का गुणगान करना चाहिए जो अनंत से अनन्त काल तक है। उसके सिंहासन को लगातार सराहना चाहिए, उसके पवित्र नाम की प्रशंसा और महिमा करनी चाहिए। यह मेरे—परमेश्वर की—शाश्वत इच्छा है और यह वो अनंत आशीर्वाद है जो वह हमारे लिए प्रकट करता है और हमें देता है! हममें से कौन इसका वारिस नहीं है? परमेश्वर के आशीर्वाद को विरासत में पाने के लिए, व्यक्ति को परमेश्वर के पवित्र नाम को सराहना चाहिए और सिंहासन को चारो ओर से घेरकर आराधना करने के लिए आना चाहिए। वे सभी लोग जो उसके सामने अन्य उद्देश्यों और इरादों के साथ जाते हैं, वे उसकी उग्र आग से पिघल जाएँगे। आज वह दिन है जब उसके दुश्मनों का न्याय किया जाएगा, और वे इसी दिन नष्ट भी हो जाएँगे। उससे भी अधिक, यह वो दिन है जब मैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट होऊँगा, और महिमा और सम्मान प्राप्त करुंगा। सारे लोगों! उस सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सराहना और स्वागत करने के लिए शीघ्र ही उठो, जो सदा-सर्वदा के लिए हमें प्रेमपूर्ण दयालुता एवं उद्धार देता है, हमें आशीर्वाद प्रदान करता है, अपने पुत्रों को परिपूर्ण करता है और सफलतापूर्वक अपने राज्य को हासिल करता है! यह परमेश्वर का अद्भुत कार्य है! यह परमेश्वर का शाश्वत प्रारब्ध और उसकी व्यवस्था है कि हमें बचाने, हमें परिपूर्ण करने, और हमें महिमा में लाने के लिए वह स्वयं ही आता है।

वे सभी जो उठकर गवाही नहीं देते हैं, वे अंधों के अग्रगामी हैं, अज्ञानता के राजा हैं और वे शाश्वत अज्ञानी, शाश्वत मूर्ख और अनंत काल के लिए अंधे मृतक बनेंगे। इसलिए हमारी आत्माओं को जागृत होना चाहिए! सभी लोगों को उठ खड़े होना चाहिए! महिमा के राजा, दया के पिता, उद्धार के पुत्र, उदार सात आत्माओं की, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की, जो प्रतापी उग्र आग और धार्मिक न्याय लाता है, जो सर्व-पर्याप्त, उदार, सर्वशक्तिमान, और पूर्ण है, अनंत वाहवाही, प्रशंसा और सराहना करो। उसके सिंहासन की हमेशा के लिए सराहना होगी! सभी लोगों को देखना चाहिए कि यह परमेश्वर की बुद्धि है, उद्धार का यह उसका अद्भुत तरीका है, और उसकी महिमामय इच्छा की पूर्ति है। अगर हम नहीं उठते हैं और गवाही नहीं देते हैं, तो इस पल के बीत जाने के बाद, हम लौट कर नहीं जा सकेंगे। हम आशीर्वाद प्राप्त करेंगे या दुर्भाग्य, यह हमारी यात्रा के इस वर्तमान चरण से, अर्थात इस समय हम क्या करते, क्या सोचते और कैसे जीते हैं, इससे निर्धारित होगा। तो तुम सभी को कैसे कार्य करना चाहिए? सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा—शाश्वत, अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का उत्कर्ष करो!

अब आगे तुम्हें स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि जो लोग परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते हैं, जो अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते हैं, जो उसके बारे में संदेह रखते हैं, वे सभी बीमार, मरे हुए और ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर की अवज्ञा करते हैं! प्राचीन काल से ही परमेश्वर के वचन सच साबित हो चुके हैं: जो लोग मेरे साथ नहीं हैं, वे बिखर जाते हैं, और जो भी मेरे साथ नहीं हैं, वे मेरे विरूद्ध हैं; पत्थर में तराशा गया यह एक अटल सत्य है! जो लोग परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते, वे शैतान के अनुचर हैं। ये लोग परमेश्वर की संतानों को परेशान करने और धोखा देने के लिए आते हैं, ताकि वे परमेश्वर के प्रबंधन में बाधा डाल सकें, और उनका नाश किया जाना चाहिए! जो कोई भी उनके प्रति अच्छे इरादे प्रकट करता है, वह अपने ही विनाश की तलाश करता है। तुम्हें परमेश्वर के आत्मा के कथन को सुनना और उस पर विश्वास करना चाहिए, परमेश्वर के आत्मा के मार्ग पर चलना चाहिए, और परमेश्वर के आत्मा के वचनों को जीना चाहिए, और उससे भी बढ़कर, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सिंहासन की सदैव सराहना करनी चाहिए!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सात आत्माओं का परमेश्वर है! सात आँखों और सात तारों वाला भी, वही है; वह सात मुहरों को खोलता है और वह सारी पुस्तक भी वही खोलता है! उसने सात तुरहियों को बजाया है, सात कटोरे और सात विपत्तियाँ भी उसी के नियंत्रण में हैं, जिन्हें वह अपनी इच्छानुसार उपयोग में लाता है। ओह, वे सात गर्जनाएं जो हमेशा मुहर-बंद थीं! उन्हें खोल देने का समय आ गया है! वह जो उन सात गर्जनाओं को खोलेगा, पहले ही हमारी आँखों के सामने प्रकट हो चुका है!

हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारे साथ सब कुछ बंधन से मुक्त और स्वतंत्र होता है, कोई कठिनाइयाँ नहीं होती हैं, और सब कुछ आसानी से चलता है! तुम्हें कुछ भी अवरुद्ध या बाधित करने का साहस नहीं कर सकता, सभी तुम्हारे सामने समर्पित हो जाते हैं। जो समर्पण नहीं करते, मृत्यु को प्राप्त होते हैं!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, सात आँखों वाले परमेश्वर! सब कुछ पूर्ण रूप से स्पष्ट है, सब कुछ उज्जवल है और खोल दिया गया है, सभी कुछ प्रकट और अनावृत किया गया है। उसके होते हुए, सब कुछ बिल्कुल साफ़ है, और न केवल स्वयं परमेश्वर इस तरह है, बल्कि उसके पुत्र भी ऐसे ही हैं। कोई भी व्यक्ति, या वस्तु को, या कोई भी बात, परमेश्वर या उसके पुत्रों से छिपाकर नहीं रखी जा सकती है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सात सितारे उज्ज्वल हैं! कलीसिया को उसके द्वारा परिपूर्ण किया गया है, वह कलीसिया के संदेशवाहकों को निर्धारित करता है और समग्र कलीसिया उसकी देख-रेख में होती है। वह सभी सात मुहरों को खोलता है, वह स्वयं अपनी प्रबंधन योजना को, और उसे पूरा करने की अपनी इच्छा को, लेकर आता है। वह पुस्तक उसकी प्रबंधन योजना की रहस्यमयी आध्यात्मिक भाषा है और उसने इसे खोलकर प्रकट कर दिया है!

सभी लोगों को उसकी सात गुंजायमान तुरहियों को सुनना चाहिए। उसके साथ सब कुछ स्पष्ट कर दिया जाता है, फिर कभी न छिपने के लिए, और अब कोई दुख नहीं है। सब कुछ प्रकट हो जाता है, सब कुछ विजयी होता है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सात तुरहियाँ खुली, महिमामय और विजयी तुरहियाँ हैं! वे वो तुरहियाँ भी हैं जो उसके शत्रुओं का न्याय करती हैं! उसकी विजय के बीच, उसके सींग को सराहा जाता है! वह पूरे ब्रह्मांड पर राज्य करता है!

उसने विपत्तियों के सात कटोरे तैयार किए हैं और वे उसके शत्रुओं पर चरम सीमा तक झुकाए और खोले गए हैं, और वे शत्रु उसकी उग्र आग की लपटों में भस्म हो जाएँगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने अधिकार की शक्ति दिखाता है और उसके सभी शत्रु नष्ट हो जाते हैं। अंतिम सात गर्जनाएं अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने मुहर-बंद नहीं हैं, वे सभी खोल दी गई हैं! सब की सब खुली हैं! उन सात गर्जनाओं के साथ वह अपने शत्रुओं को मौत के घाट उतारता है, ताकि पृथ्वी स्थिर हो जाए, उसकी सेवा कर सके, और फिर से बर्बाद न हो!

हे धर्मी सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम निरंतर तुम्हारा गुणगान करते हैं! तुम अनंत प्रशंसा, अनंत अभिनन्दन और अनंत सराहना के योग्य हो! तुम्हारी सात गर्जनाएं केवल तुम्हारे न्याय के लिए ही नहीं हैं, बल्कि उससे भी ज्यादा वे तुम्हारी महिमा और तुम्हारे अधिकार के लिए हैं, ताकि सब कुछ पूर्ण हो सके!

सभी लोग सिंहासन के सामने खुशियाँ मनाते हैं, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा का गुणगान और उसकी स्तुति करते हैं! उनकी आवाजें समस्त विश्व को गर्जना की तरह कँपाती हैं! सभी चीज़ें बिलकुल उसी के कारण मौजूद हैं, और उसी से उत्पन्न होती हैं। कौन है जो उसे समस्त महिमा, सम्मान, अधिकार, ज्ञान, पवित्रता, विजय और प्रकटन का पूर्ण श्रेय न देने का साहस करेगा? यह उसकी इच्छा की उपलब्धि है और उसके प्रबंधन की रचना का अंतिम समापन है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 34' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 55

सिंहासन से सात गर्जनें निकलती हैं, वे ब्रह्मांड को हिला देती हैं, स्वर्ग और पृथ्वी को उलट-पुलट कर देती हैं, और आकाश में गूँजती हैं! यह आवाज़ कानों के परदे फाड़ देती है, लोग न तो इससे बचकर भाग सकते हैं, और न ही इससे छिप सकते हैं। बिजली की चमक और गरज की गूँजें फूट निकलती हैं, एक क्षण में स्वर्ग और पृथ्वी दोनों रूपांतरित हो जाते हैं, और लोग मृत्यु की कगार पर हैं। फिर, आकाश से बरसता एक प्रचंड तूफ़ान बिजली की रफ़्तार से समस्त ब्रह्माण्ड को अपनी लपेट में ले लेता है! धरती के सुदूर कोनों तक, मूसलाधार वर्षा के समान सब कुछ को सिर से पैर तक धो डालता है, कहीं एक दाग़ तक बाक़ी नहीं रहता है; उससे कुछ भी छिपा नहीं रह सकता है और न ही कोई व्यक्ति इससे बचाया जा सकता है। बिजली की कौंध की तरह ही, गर्जन की गड़गड़ाहट, सर्द रोशनी के साथ दमकती है और मनुष्यों को भय से थरथरा देती है! तेज दुधारी तलवार विद्रोह के पुत्रों को मार गिराती है और शत्रुओं को घोर विपत्ति का सामना करना पड़ता है, ऐसा कोई आश्रय नहीं बचता है जहाँ वे भाग कर छिप सकें; आँधी-बरसात की प्रचंडता से वे चकरा जाते हैं, और उसके वार से लड़खड़ाते हुए वे तुरंत बेहोश होकर बहते पानी में गिर जाते हैं और बहा लिए जाते हैं। केवल मौत होती है, उनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं होता। सात गर्जनें मुझसे निकलती हैं, और मिस्र के ज्येष्ठ पुत्रों को मार गिराने, दुष्टों को दंडित करने और मेरी कलीसियाओं को शुद्ध करने के मेरे इरादे को व्यक्त करती हैं, ताकि सभी कलीसियाएँ एक-दूसरे से निकटता से जुड़ी रहें, भीतर-बाहर से एक हों, और वे मेरे साथ एक ही दिल की हों, ताकि ब्रह्मांड की सभी कलीसियाओं को एक बनाया जा सके। यह मेरा उद्देश्य है।

गर्जना होती है, और रोने-चीखने की आवाज़ें फूट निकलती हैं। कुछ अपनी नींद से जगा दिए जाते हैं, और, बहुत घबड़ा कर, वे अपनी आत्माओं को गहराई से जाँचते हुए सिंहासन के सामने वापस भाग आते हैं। वे अपनी अनियंत्रित चालाकी, नीच हरकतें करना बंद कर देते हैं; ऐसे लोगों के जागने में अभी देर नहीं हुई है। मैं सिंहासन से देखता हूँ। मैं लोगों के दिलों की गहराई में झाँकता हूँ। मैं उन लोगों को बचाता हूँ जो मुझे ईमानदारी और लगन से चाहते हैं, और मैं उन पर दया करता हूँ। मैं अनंत काल तक उन लोगों को बचाऊँगा जो अपने दिलों में मुझे सब से अधिक प्यार करते हैं, जो मेरी इच्छा को समझते हैं, और जो मार्ग के अंत तक मेरा अनुसरण करते हैं। मेरा हाथ उन्हें सुरक्षित रखेगा ताकि वे इस परिस्थिति का सामना न करें और उन्हें कोई भी नुकसान न पहुँचे। जब कुछ लोग चमकती बिजली के इस दृश्य को देखते हैं, तो उनके दिल में एक ऐसा क्लेश होता है जिसे व्यक्त करना उनके लिए बहुत कठिन होता है, और उन्हें अत्यधिक पश्चाताप होता है। अगर वे इस तरह के व्यवहार करते रहते हैं, तो उनके लिए बहुत देर हो चुकी है। ओह, सब कुछ, सब कुछ! यह सब कुछ किया जाएगा। यह भी उद्धार के मेरे साधनों में से एक है। मैं उन लोगों को बचाता हूँ जो मुझसे प्यार करते हैं और मैं दुष्टों को मार गिराता हूँ। मैं पृथ्वी पर अपने राज्य को स्थायी और सुस्थिर बनाता हूँ सभी राष्ट्रों और लोगों को, कायनात में और पृथ्वी के अंतिम छोरों के सभी लोगों को पता लगने देता हूँ कि मैं प्रताप हूँ, मैं भड़कती आग हूँ, मैं वो परमेश्वर हूँ जो हर व्यक्ति के अंतरतम हृदय की जांच करता है। इस समय से, महान श्वेत सिंहासन का न्याय लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट किया जाता है और सभी लोगों के सामने यह घोषणा की जाती है कि न्याय शुरू हो गया है! यह बात संदेह से परे है कि जिनकी बात दिल से नहीं निकलती है, जो संदेह करते हैं और निश्चित होने की हिम्मत नहीं रखते हैं, समय बर्बाद करने वाले, जो मेरी इच्छाओं को समझते तो हैं लेकिन उन्हें अभ्यास में लाने के इच्छुक नहीं हैं, उनका न्याय किया जाना चाहिए। तुम लोगों को अपने इरादों और उद्देश्यों की सावधानी से जाँच करनी चाहिए, और अपना उचित स्थान ले लेना चाहिए; मेरे वचनों का गंभीरता से अभ्यास करो, अपने जीवन के अनुभवों को महत्व दो, ऊपरी जोश से काम मत करो, बल्कि अपने जीवन का विकास करो, उसे परिपक्व, स्थिर और अनुभवी बनाओ, केवल तब ही तुम मेरे दिल के अनुसार होगे।

शैतान के अनुचरों को और उन दुष्ट आत्माओं को जो मेरे निर्माण को बाधित और नष्ट करते हैं, चीज़ों को अपने हित के लिए शोषित करने का कोई भी मौका न दो। उन्हें कठोरता से सीमित और नियंत्रित किया जाना चाहिए; उनके साथ केवल तेज़ तलवार से निपटा जा सकता है। उनमें जो सबसे बुरे हैं, उन लोगों को तत्काल जड़ से उखाड़ दिया जाना चाहिए ताकि वे भविष्य में कोई खतरा पैदा न करें। और कलीसिया को पूर्ण किया जाएगा, किसी भी विरूपता से मुक्त, और वह स्वास्थ्य, जीवनशक्ति और ऊर्जा से भरपूर होगी। चमकती बिजली के बाद, गड़गड़ाहटें गूँज उठती हैं। तुम लोगों को उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, और हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि जो छूट गया है उसे पकड़ने का पूरा प्रयास करना चाहिए, और तुम सब निश्चित रूप से देख सकोगे कि मेरा हाथ क्या करता है, मैं क्या हासिल करना चाहता हूँ, किसे हटाना चाहता हूँ, किसे पूर्ण करना चाहता हूँ, किसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता हूँ, और किसे मार गिराना चाहता हूँ। यह सब तुम लोगों की आँखों के सामने घटित होगा ताकि तुम सब स्पष्ट रूप से मेरी सर्वशक्तिमत्ता को देख सको।

सिंहासन से लेकर पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के सिरों तक, सात गर्जनें गूँज उठती हैं। लोगों का एक बड़ा समूह बचाया जाएगा और मेरे सिंहासन के सामने समर्पित होगा। जीवन के इस प्रकाश का अनुसरण करते हुए लोग जीवित रहने के साधनों को तलाशते हैं और वे स्वयं को मेरे पास आकर, घुटने टेककर आराधना करने अपने मुंह से सर्वशक्तिमान सच्चे परमेश्वर के नाम को पुकारने, और अपनी प्रार्थनाओं को व्यक्त करने से नहीं रोक पाते। लेकिन जो लोग मेरा विरोध करते हैं, जो अपने दिल को कठोर कर लेते हैं, उनके कानों में गर्जन गूँजती है और बिना किसी संदेह के, उन्हें मरना ही होगा। उनके लिए केवल यही अंतिम परिणाम प्रतीक्षारत है। मेरे प्यारे पुत्र जो विजयी हैं, सिय्योन में रहेंगे और सभी लोग देखेंगे कि वे क्या प्राप्त करेंगे, और तुम सब के सामने विशाल महिमा प्रकट होगी। सचमुच यह एक महान आशीर्वाद है, और ऐसी मधुरता है जिसका वर्णन करना मुश्किल है।

गर्जन के सात शब्दों की गड़गड़ाहट गूँज आ रही है, जो मुझसे प्यार करते हैं, जो मुझे सच्चे दिल से चाहते हैं, ये उन लोगों का उद्धार है। जो मेरे हैं और जिन्हें मैंने पूर्वनिर्धारित किया और चुना है, वे सभी मेरे नाम की शरण में आ पाते हैं। वे मेरी आवाज़ सुन सकते हैं, जो उनके लिए परमेश्वर की पुकार है। पृथ्वी के सिरों पर रहने वालों को देखने दो कि मैं धार्मिक हूँ, मैं वफ़ादार हूँ, मैं प्रेममय दया हूँ, मैं करुणा हूँ, मैं प्रताप हूँ, मैं प्रचंड अग्नि हूँ, और अंततः मैं निर्मम न्याय हूँ।

दुनिया में सभी को देखने दो कि मैं वास्तविक और संपूर्ण परमेश्वर स्वयं हूँ। सभी मनुष्य पूरी तरह आश्वस्त हैं और फिर से कोई भी मेरा विरोध, मेरी आलोचना करने की, या मेरी निंदा करने की हिम्मत नहीं करता है। अन्यथा, उन्हें तुरंत शाप मिलता है और उन पर विपत्ति आती है। वे केवल रो सकते हैं और अपने दांत पीस सकते हैं चूंकि वे खुद अपना विनाश लाए हैं।

सभी लोगों को जान लेने दो, पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के सिरों को ज्ञात होने दो और प्रत्येक गृहस्थी और सभी लोग ये जान जाएँ : सर्वशक्तिमान परमेश्वर एकमात्र सच्चा परमेश्वर है। सभी लोग एक के बाद एक घुटने टेक कर मेरी आराधना करेंगे और यहाँ तक कि वे बच्चे भी जिन्होंने अभी बात करना सीखा ही है, वे भी "सर्वशक्तिमान परमेश्वर" बोल उठेंगे! सत्ताधारी अधिकारी अपनी ही आँखों के सामने सच्चे परमेश्वर को प्रकट होते देखेंगे और वे भी उपासना में साष्टांग करेंगे, दया और क्षमा की भीख माँगेंगे, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है क्योंकि उनकी मृत्यु का समय आ चुका है। उन्हें तो बस खत्म करके असीम रसातल की सज़ा ही दी जा सकती है। मैं पूरे युग को समाप्त कर दूँगा, और अपने राज्य को और भी मजबूत करूँगा। सभी राष्ट्र और समस्त लोग अनंत काल के लिए मेरे सामने समर्पण कर देंगे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 35' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 56

सर्वशक्तिमान सच्चा परमेश्वर, सिंहासन पर विराजमान राजा, सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने, पूरे ब्रह्मांड पर शासन करता है, और स्वर्ग के नीचे सब-कुछ परमेश्वर की महिमा से चमकता है। ब्रह्मांड में और पृथ्वी के अंतिम छोर तक सभी जीवित प्राणी देखेंगे। सच्चे परमेश्वर के चेहरे के प्रकाश में पर्वतों, नदियों, झीलों, मैदानी इलाकों, महासागरों और सभी जीवित प्राणियों ने अपने पर्दे खोल दिए हैं, और वे पुनर्जीवित हो गए हैं, मानो किसी सपने से जाग उठे हों, मानो वे मिट्टी को चीरकर फूट निकलने वाले अंकुर हों!

आह! वह एकमात्र सच्चा परमेश्वर दुनिया के सामने प्रकट होता है। कौन प्रतिरोध के साथ उसके पास आने का दुस्साहस कर सकता है? सभी भय से काँपते हैं। सभी पूरी तरह से आश्वस्त हैं, और सभी बारंबार क्षमा-याचना करते हैं। सभी लोग उसके सामने घुटने टेक देते हैं, और सभी लोग उसकी पूजा करते हैं! महाद्वीप और महासागर, पहाड़, नदियाँ—सभी चीज़ें उसकी निरंतर प्रशंसा करती हैं! वसंत ऋतु अपनी गर्म हवाओं के साथ आती है, जिससे वसंत की सुहावनी बारिश होती है। समस्त लोगों की तरह, नदियों की धाराएँ कृतज्ञता और आत्मग्लानि के आँसू बहाती हुई शोक और हर्ष के साथ बहती हैं। नदियाँ, झीलें, लहरें और हिलोरें, सभी गा रही हैं, सच्चे परमेश्वर के पवित्र नाम की प्रशंसा करते हुए! प्रशंसा की ध्वनि इतनी स्पष्ट सुनाई देती हैं! पुरानी चीज़ें, जिन्हें कभी शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया था—उनमें से प्रत्येक को नवीनीकृत किया जाएगा, परिवर्तित किया जाएगा, और वे पूर्णत: एक नए राज्य में प्रवेश करेंगी ...

यह पवित्र तुरही है, और इसने बजना शुरू कर दिया है! ध्यान से सुनो। वह इतनी मधुर आवाज़ सिंहासन की आवाज़ है, जो सभी देशों और लोगों के लिए घोषणा कर रही है कि समय आ गया है, निर्णायक अंत आ गया है। मेरी प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। मेरा राज्य पृथ्वी पर खुलकर प्रकट हो गया है। धरती के राज्य मेरे, यानी परमेश्वर के राज्य बन गए हैं। सिंहासन से मेरी सात तुरहियाँ बजती हैं, और ऐसी चमत्कारी चीज़ें घटित होंगी! धरती के कोने-कोने से लोग हिमस्खलन और वज्रपात की प्रचंडता के साथ हर दिशा से एक-साथ लपककर आएँगे ...

मैं अपने लोगों को ख़ुशी से देखता हूँ, जो मेरी आवाज़ सुनते हैं, हर देश और भूमि से आकर इकट्ठे होते हैं। सभी लोग सच्चे परमेश्वर को हमेशा अपनी ज़ुबान पर रखकर उसकी प्रशंसा करते हैं और खुशी से लगातार उछलते-कूदते हैं! वे दुनिया को गवाही देते हैं, और सच्चे परमेश्वर के लिए उनकी गवाही की आवाज़ कई समुद्रों के गरजने जैसी है। सभी लोग मेरे राज्य में आकर भीड़ लगाएँगे।

मेरी सात तुरहियाँ बजकर सोए हुए लोगों को जगाती हैं! जल्दी उठो, ज्यादा देर नहीं हुई। अपने जीवन को देखो! अपनी आँखें खोलो और देखो कि अभी क्या समय हुआ है। खोजने लायक क्या चीज़ है? सोचने के लिए क्या रखा है? और चिपके रहने के लिए क्या है? क्या तुमने कभी मेरे जीवन को पाने और उन सभी चीज़ों को पाने के मूल्य के अंतर पर विचार नहीं किया, जिनसे तुम प्यार करते हो और जिनसे चिपके रहते हो? अब और ज़िद या मनमानी मत करो। इस अवसर को मत गँवाओ। यह समय फिर नहीं आएगा! तुरंत खड़े हो जाओ, अपनी आत्मा से काम लेने का अभ्यास करो, शैतान की हर साजिश और चाल का भेद जानने और उसे नाकाम करने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करो, और शैतान पर विजय प्राप्त करो, ताकि तुम्हारे जीवन का अनुभव गहरा हो सके और तुम मेरे स्वभाव को जी सको, ताकि तुम्हारा जीवन परिपक्व और अनुभवी बन सके और तुम हमेशा मेरे पदचिह्नों का अनुसरण कर सको। निडर, मज़बूत, हमेशा आगे बढ़ते हुए, कदम-दर-कदम, ठीक मार्ग के अंत तक!

जब सात तुरहियाँ फिर से बजेंगी, तो यह न्याय के लिए पुकार होगी, विद्रोह के पुत्रों के न्याय के लिए, सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के न्याय के लिए, और प्रत्येक राष्ट्र परमेश्वर के सामने आत्मसमर्पण करेगा। परमेश्वर का भव्य मुख-मंडल निश्चित रूप से सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने प्रकट होगा। हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त हो जाएगा, और निरंतर चीखते-चिल्लाते हुए सच्चे परमेश्वर को पुकारेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर और अधिक महिमा-मंडित होगा, और मेरे पुत्र इस महिमा में हिस्सा बँटाएँगे, मेरे साथ राजसत्ता साझी कर सभी राष्ट्रों और सभी लोगों का न्याय करेंगे, बुरे को दंडित करेंगे, जो मेरे हैं उन्हें बचाएँगे और उन पर दया करेंगे, और राज्य को मज़बूत और स्थिर बनाएँगे। सात तुरहियों की आवाज़ से बहुत सारे लोगों को बचाया जाएगा, जो निरंतर प्रशंसा के साथ मेरे सामने घुटने टेकने और मेरी आराधना करने के लिए लौट आएँगे!

जब सात तुरहियाँ एक बार फिर से बजेंगी, तो यह युग का समापन होगा, दुष्ट शैतान पर जीत का तूर्यनाद, पृथ्वी पर राज्य में खुलकर जीने की शुरुआत की सूचना देने वाली सलामी! कितनी बुलंद आवाज़ है, वह आवाज़ जो सिंहासन के चारों ओर गूँजती है, यह तूर्यनाद स्वर्ग और पृथ्वी को हिला देता है, जो मेरी प्रबंधन योजना की जीत का संकेत है, जो शैतान का न्याय है; यह इस पुरानी दुनिया को पूरी तरह से मौत की सज़ा और अथाह कुंड में गिरने की सज़ा देता है! तुरही का यह तूर्यनाद दर्शाता है कि अनुग्रह का द्वार बंद होने वाला है, पृथ्वी पर राज्य का जीवन शुरू होगा, जो पूरी तरह से उचित और उपयुक्त है। परमेश्वर उन्हें बचाता है, जो उससे प्रेम करते हैं। एक बार जब वे उसके राज्य में वापस लौट जाएँगे, तो धरती पर लोग अकाल और महामारी का सामना करेंगे, परमेश्वर के सात कटोरे और सात विपत्तियाँ एक के बाद एक प्रभावी होंगी। पृथ्वी और स्वर्ग मिट जाएँगे, परंतु मेरा वचन नहीं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 36' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 57

महान हैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कर्म! कितने आश्चर्यजनक! कितने अद्भुत! सात तुरहियाँ बजती हैं, सात गर्जनाएँ होती हैं, सात कटोरे उँड़ेले जाते हैं—ये तुरंत खुले तौर पर प्रकट होंगे, और इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता। परमेश्वर का प्यार हमारे लिए रोज़ आता है। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही हमें बचा सकता है; हमें दुर्भाग्य मिलता है या आशीष, यह पूरी तरह से उस पर निर्भर है, और हम मनुष्यों के पास इसका निर्णय करने का कोई उपाय नहीं है। जो लोग स्वयं को पूरे दिल से समर्पित करते हैं, वे निश्चित रूप से भरपूर आशीष प्राप्त करेंगे, जबकि अपने जीवन को संरक्षित रखने के आकांक्षी अपने जीवन को ही खो देंगे; सभी चीज़ें और सभी मामले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में हैं। अब और अपने कदम मत रोको। स्वर्ग और पृथ्वी में ज़बरदस्त बदलाव आ रहा है, जिससे बचने का मनुष्य के पास कोई उपाय नहीं है। उसके लिए कटु पीड़ा से क्रंदन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। पवित्र आत्मा जो कार्य आज कर रहा है, उसका अनुसरण करो। उसके काम की प्रगति किस चरण तक हो गई है, इसके बारे में तुम्हें अपने भीतर स्वयं स्पष्ट होना चाहिए, दूसरों के द्वारा याद दिलाए जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। अब जितनी ज्यादा बार संभव हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति में लौटो। उससे सब-कुछ माँगो। वह निश्चित रूप से तुम्हें भीतर से प्रबुद्ध करेगा और संकट के क्षणों में तुम्हारी रक्षा करेगा। बिलकुल मत डरो! तुम्हारा संपूर्ण अस्तित्व पहले से ही उसके अधिकार में है। उसकी सुरक्षा और देखभाल के होते हुए तुम्हारे लिए डरने की क्या बात है? आज परमेश्वर की इच्छा फलित होने को है, और जो भी भयभीत है, वह केवल नुकसान में रहेगा। मैं तुमसे जो कह रहा हूँ, वह सच है। अपनी आध्यात्मिक आँखें खोलो : स्वर्ग एक पल में बदल सकता है, लेकिन तुम्हारे लिए डरने की क्या बात है? उसके हाथ की एक हलकी-सी हरकत से स्वर्ग और पृथ्वी तुरंत नष्ट हो जाते हैं। तो झल्लाने से मनुष्य क्या हासिल कर सकता है? क्या सब-कुछ परमेश्वर के हाथों में नहीं है? अगर वह स्वर्ग और पृथ्वी को बदलने की आज्ञा देता है, तो वे बदल जाएँगे। अगर वह कहता है कि हमें पूर्ण किया जाना है, तो हम पूर्ण किए जाएँगे। मनुष्य को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उसे शांति से आगे बढ़ना चाहिए। फिर भी, तुम्हें जितना हो सके, ध्यान देना चाहिए और सजग रहना चाहिए। स्वर्ग एक पल में बदल सकता है! मनुष्य अपनी नग्न आँखें चाहे जितनी खोल ले, वह ज्यादा कुछ नहीं देख पाएगा। अब चौकस रहो। परमेश्वर की इच्छा पूरी हो गई है, उसकी परियोजना पूरी हो गई है, उसकी योजना सफल हो गई है, और उसके सभी पुत्र उसके सिंहासन पर पहुँच गए हैं। वे मिलकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के साथ सभी राष्ट्रों और सभी लोगों का न्याय करने बैठते हैं। जो लोग कलीसिया को सताते रहे हैं, और परमेश्वर के पुत्रों को नुकसान पहुँचाते रहे हैं, उन्हें कड़ी सज़ा मिलेगी : यह निश्चित है! जो ईमानदारी से स्वयं को परमेश्वर को अर्पित कर देते हैं, जो सब-कुछ कायम रखते हैं, परमेश्वर निश्चित रूप से उन्हें, कभी भी बदले बिना, अनंत काल तक प्यार करेगा!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 42' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 58

यह पूरी तरह से मेरे अनुग्रह और मेरी दया के माध्यम से ही है कि मेरा रहस्य प्रकट और खुले तौर पर व्यक्त होता है, अब और छुपा नहीं है। इसके अतिरिक्त, मेरे वचन का मनुष्यों के बीच प्रकट होना, अब इसका छुपा न होना भी मेरे अनुग्रह और मेरी दया के कारण है। मैं उन सभी से प्यार करता हूँ जो ईमानदारी से मेरे लिए खुद को व्यय करते हैं और खुद को मेरे प्रति समर्पित करते हैं। मैं उन सभी से नफ़रत करता हूँ जो मुझ से जन्मे तो हैं, मगर मुझे नहीं जानते हैं, यहाँ तक कि मेरा विरोध भी करते हैं। मैं ऐसे किसी भी व्यक्ति का परित्याग नहीं करूँगा जो ईमानदारी से मेरे लिए है; बल्कि मैं उसके आशीषों को दुगुना कर दूँगा। जो लोग कृतघ्न हैं और मेरी दयालुता का अपमान करते हैं, उन्हें मैं दुगुनी सजा दूँगा और हल्के में नहीं छोड़ूँगा। मेरे राज्य में कोई कुटिलता या छल नहीं है, कोई सांसारिकता नहीं है; अर्थात् मृतकों की कोई गंध नहीं है। बल्कि सारी सत्यपरायणता, धार्मिकता है, सारी शुद्धता और सारा खुलापन है, कुछ भी छुपाया गया या परदे में रखा गया नहीं है। सब कुछ ताज़ा है, आनंदपूर्ण है, सब कुछ आत्मिक उन्नति है। अगर किसी से अभी भी मृतकों की गंध आती है, तो वह किसी भी तरीके से मेरे राज्य में नहीं रह सकता है, बल्कि मेरे लौहदण्ड द्वारा उसका फैसला किया जाएगा। पुरातन काल से लेकर वर्तमान समय तक के सभी अंतहीन रहस्य, पूरी तरह से तुम लोगों को प्रकट किये गए हैं—तुम सब लोगों का वो समूह जो अंत के दिनों में मेरे द्वारा प्राप्त किया जाता है—क्या तुम सब धन्य महसूस नहीं करते हो? वे दिन जब सब खुले तौर पर प्रकट किया जाता है, इसके अतिरिक्त वे दिन जब तुम लोग मेरे शासन को साझा करते हो।

लोगों का समूह जो वास्तव में राजाओं के रूप में शासन करता है, वह मेरे द्वारा पूर्वनियति और चयन पर निर्भर करता है, और इसमें बिलकुल कोई मानवीय इच्छा नहीं होती। यदि कोई इसमें हिस्सा लेने की हिम्मत करता है, तो उसे अवश्य मेरे हाथ के प्रहार को झेलना होगा, और वह मेरी उग्र अग्नि का लक्ष्य होगा; यह मेरी धार्मिकता और प्रताप का एक अन्य पक्ष है। मैंने कहा है कि मैं सभी चीज़ों पर शासन करता हूँ, मैं ही वह बुद्धिमान परमेश्वर हूँ जो पूर्ण अधिकार का उपयोग करता है, और मैं किसी भी व्यक्ति के प्रति उदार नहीं हूँ; मैं अत्यंत निष्ठुर हूँ, व्यक्तिगत भावना से पूरी तरह रहित हूँ। मैं हर किसी के साथ अपनी धार्मिकता, सत्यपरायणता, और अपने प्रताप के साथ व्यवहार करता हूँ (चाहे कोई कितना भी अच्छा क्यों न बोलता हो, मैं उसे नहीं छोड़ूँगा), और इस बीच मैं हर किसी को मेरे कर्मों के चमत्कार को बेहतर ढंग से देखने, मेरे कर्मों के अर्थ को समझने देता हूँ। मैंने दुष्ट आत्माओं के सभी प्रकार के कर्मों को एक-एक करके दण्डित किया, उन्हें एक-एक करके अथाह गड्ढे में डाल दिया। उनके लिए कोई पद न छोड़ते हुए, उनके लिए उनके कार्य करने की कोई जगह न छोड़ते हुए, समय शुरू होने से पहले ही इस कार्य को मैंने पूरा कर लिया था। मेरे चुने लोगों में से—जो मेरे द्वारा पूर्वनियत और चयनित हैं—कोई दुष्टात्माओं के कब्ज़े में नहीं हो सकता है, बल्कि वो हमेशा पवित्र रहेगा। जहाँ तक उनकी बात है जिन्हें मैंने पूर्वनियत और चयनित नहीं किया है, उन्हें मैं शैतान को सौंप दूँगा और उन्हें अब और नहीं रहने दूँगा। सभी पहलुओं में, मेरे प्रशासनिक आदेशों में मेरी धार्मिकता, मेरा प्रताप शामिल हैं। मैं उन लोगों में से एक को भी नहीं जाने दूँगा जिन पर शैतान कार्य करता है बल्कि उन्हें सशरीर अधोलोक में डाल दूँगा, क्योंकि मैं शैतान से नफ़रत करता हूँ। मैं इसे किसी भी तरह से आसानी से नहीं छोड़ूँगा बल्कि इसे पूरी तरह से नष्ट कर दूँगा और इसके लिए कार्य को करने का ज़रा-सा भी मौका नहीं छोड़ूँगा। जिन्हें शैतान ने एक निश्चित सीमा तक भ्रष्ट कर दिया है (अर्थात, वे जो आपदा के लक्ष्य हैं) वे मेरे स्वयं के हाथ की बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवस्था के अधीन हैं। ऐसा मत सोच कि यह शैतान की क्रूरता की वजह से है; जान ले कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ, जो ब्रह्मांड और सभी चीज़ों पर शासन करता है! मेरे लिए ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे हल नहीं किया जा सकता है, ऐसी कोई चीज़ बिल्कुल भी नहीं है जिसे पूरा नहीं किया जा सकता, या ऐसा कोई वचन नहीं है जिसे कहा नहीं जा सकता है। मनुष्यों को मेरे सलाहकारों के रूप में कार्य बिलकुल नहीं करना चाहिए। मेरे हाथ से मारे जाने और अधोलोक में डाल दिए जाने के प्रति सावधान रह। मैं तुझे बताता हूँ! आज जो मेरे साथ अग्रसक्रिय रूप से सहयोग करते हैं वे ही सबसे चतुर लोग हैं, वे नुकसान से दूर रहेंगे और न्याय की पीड़ा से बचे रहेंगे। यह सब मेरी व्यवस्था है, मेरे द्वारा पूर्वनियत है। यह सोचते हुए कि तू बहुत महान है, बड़ी-बड़ी बातें मत कर, अविवेकपूर्ण टीका-टिप्पणियाँ मत कर। क्या यह सब मेरे द्वारा पूर्वनियति के माध्यम से नहीं है? तुम लोगों को, जो मेरे सलाहकार होंगे, कोई शर्म नहीं है! तुम लोग अपनी स्वयं की क़द-काठी को नहीं जानते हो; यह दयनीय रूप से कितनी तुच्छ है! फिर भी, तुम सोचते हो कि ये कोई बड़ा मामला नहीं है, और खुद को नहीं समझते हो। बार-बार तुम लोग मेरे वचनों को अनसुना कर देते हो, मेरे मेहनती प्रयासों को व्यर्थ होने देते हो, तुम बिलकुल नहीं समझते हो कि यह मेरा अनुग्रह और मेरी कृपा है। इसके बजाय, तुम लोग बार-बार अपनी चालाकी दिखाने की कोशिश करते हो। क्या तुम लोगों को यह याद है? उन लोगों को कैसी ताड़ना मिलनी चाहिए जो सोचते हैं कि वे चतुर हैं? मेरे वचनों के प्रति उदासीन और अविश्वासी रहकर, उन्हें अपने हृदय में नहीं उकेरते हुए, तुम लोग तमाम चीज़ें करने के लिए दिखावे के रूप में मेरा उपयोग करते हो। कुकर्मियो! तुम लोग कब मेरे हृदय पर पूरी तरह से विचार कर पाओगे? तुम लोग मेरे हृदय पर विचार नहीं करते, और इसलिए तुम लोगों को "कुकर्मी" कहना तुम लोगों के प्रति दुर्व्यवहार नहीं होगा। यह तुम्हारे लिए बिलकुल उपयुक्त है!

आज मैं तुम लोगों को, एक-एक करके, उन चीज़ों को दिखाता हूँ जो कभी छुपी हुई थीं। बड़े लाल अजगर को अथाह गड्ढे में डाल दिया जाता है और वह पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है, क्योंकि इसे रखने का कोई उपयोग नहीं होगा; जिसका अर्थ है कि यह मसीह की सेवा नहीं कर सकता है। इसके बाद लाल चीज़ें अब और अस्तित्व में नहीं रहेंगी; धीरे-धीरे इन्हें कमज़ोर होकर मिट जाना होगा। मैं जो कहता हूँ वह करता हूँ; यह मेरे कार्य की पूर्णता है। मानवीय धारणाओं को हटा दे, मैंने जो कुछ भी कहा है, उसे मैंने किया है। जो कोई भी चालाक होने का प्रयास करता है, वह खुद पर विनाश और तिरस्कार ला रहा है, और जीना नहीं चाहता है। इसलिए मैं तुझे संतुष्ट करूँगा और निश्चित रूप से ऐसे लोगों को नहीं रखूँगा। इसके बाद, आबादी उत्कृष्टता में बढ़ेगी, जबकि जो लोग मेरे साथ अग्रसक्रिय रूप से सहयोग नहीं करते हैं, उनका नामो-निशान तक मिटा दिया जाएगा। जिन्हें मैंने स्वीकार किया है, ये वे लोग हैं जिन्हें मैं पूर्ण करूँगा। मैं एक को भी नहीं निकालूँगा। मैं जो कहता हूँ, उसमें कोई विरोधाभास नहीं है। जो लोग मेरे साथ अग्रसक्रिय रूप से सहयोग नहीं करते हैं, वे और अधिक ताड़ना भुगतेंगे, भले ही अंततः मैं उन्हें निश्चित रूप से बचाऊँगा फिर भी उस समय तक उनके जीवन का विस्तार काफी अलग होगा। क्या तू ऐसा व्यक्ति बनना चाहता है? उठ, और मेरे साथ सहयोग कर! मैं निश्चित रूप से उन लोगों के साथ क्षुद्रता से व्यवहार नहीं करूँगा जो ईमानदारी से खुद को मेरे लिए खपाते हैं। जो अपने आप को ईमानदारी से मेरे प्रति समर्पित करता है, मैं तुझे अपने सभी आशीष प्रदान करूँगा। अपने आप को पूरी तरह से मेरे प्रति अर्पित कर दे! तू क्या खाता है, क्या पहनता है, और तेरा भविष्य, ये सब मेरे हाथों में है; मैं सब को ठीक से व्यवस्थित कर दूँगा, ताकि तू अनंत आनंद पा सके जो कभी ख़त्म न हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने कहा है, "जो ईमानदारी से मेरे लिए स्वयं को खपाता है, मैं निश्चित रूप से तुझे बहुत आशीष दूँगा।" सारी आशीष हर उस व्यक्ति पर आएगी जो खुद को ईमानदारी से मेरे लिए खपाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 70' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 59

लोग मेरी जय-जयकार करते हैं, लोग मेरी स्तुति करते हैं; सभी अपने मुख से एकमात्र सच्चे ईश्वर का नाम लेते हैं, सभी लोगों की दृष्टि मेरे कर्मों को देखने के लिए उठती है। राज्य लोगों के जगत में अवतरित होता है, मेरा व्यक्तित्व समृद्ध और प्रचुर है। इस पर कौन खुश न होगा? कौन है जो इसके लिए आनंदित हो, नृत्य न करेगा? ओह, सिय्योन! मेरा जश्न मनाने के लिए अपनी विजयी-पताका उठाओ! जीत का अपना विजय-गीत गाओ और मेरा पवित्र नाम फैलाओ! पृथ्वी की समस्त वस्तुओ! मुझे अर्पण होने के लिए स्वयं को शुद्ध करो! आसमान के तारो! अब अपने स्थानों पर लौट जाओ और नभ-मंडल में मेरा प्रबल सामर्थ्य दिखाओ! मैं पृथ्वी के लोगों की उन आवाज़ों को सुन रहा हूं, जो अपने गायन में मेरे लिए असीम प्रेम और श्रद्धा प्रकट कर रही हैं! इस दिन, जबकि हर चीज़ फिर से जीवित होती है, मैं पृथ्वी पर आता हूं। इस पल, फूल खिलते हैं, पक्षी एक सुर में गाते हैं, हर चीज़ पूरे उल्लास से धड़कती है! राज्य के अभिनंदन की ध्वनि में, शैतान का राज्य ध्वस्त हो गया है, राज्य-गान के प्रतिध्वनित होते समूह-गान में नष्ट हो गया है। और ये अब फिर कभी सिर नहीं उठाएगा!

पृथ्वी पर कौन है जो सिर उठाने और विरोध करने का साहस करे? जब मैं पृथ्वी पर आता हूं तो ज्वलन, क्रोध, और तमाम विपदाएं लाता हूं। पृथ्वी के सारे राज्य अब मेरे राज्य हैं! ऊपर आकाश में बादल गोते लगाते और तरंगित होते हैं; आकाश के नीचे झीलें और नदियाँ हिलोरे मारती हैं और जिससे मधुर संगीत निकलता है। अपनी मांद में विश्राम करते जीव-जंतु बाहर निकलते हैं और जो लोग उनींदी अवस्था में थे, उन्हें भी मैं जगा देता हूं। हर कोई जिसकी प्रतीक्षा में था, वो दिन आखिर आ गया! वे मुझे सर्वाधिक सुंदर गीत भेंट करते हैं।

इस खूबसूरत पल में, इस रोमांचक समय में,

ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्वी पर सब स्तुति करते हैं।

इसके लिए कौन उल्लसित न होगा?

किसका दिल हल्का न होगा?

इस अवसर पर कौन खुशी के आँसू न बहाएगा?

अब यह वही आकाश नहीं है, अब यह राज्य का आकाश है।

अब यह वही पृथ्वी नहीं है, बल्कि अब यह पवित्र धरती है।

घनघोर वर्षा के बाद,

मलिन जीर्ण विश्व पूरी तरह से बदल दिया गया है।

पर्वत बदल रहे हैं ... जलस्रोत बदल रहे हैं ...

इन्सान भी बदल रहे हैं ... हर चीज़ बदल रही है...।

शांत पर्वतो! उठो और मेरे लिए नृत्य करो!

स्थिर जलस्रोतो! स्वतंत्र रूप से प्रवाहमान रहो!

सपनों में खोये मनुष्यो! उठो और दौड़ो!

मैं आ गया हूं ... मैं ही राजा हूँ...।

सब लोग अपनी आँखों से मेरा चेहरा देखेंगे,

सब लोग अपने कानों से मेरी आवाज़ सुनेंगे,

वे स्वयं राज्य का जीवन जीएंगे...।

इतना मधुर ... इतना सुंदर...।

अविस्मरणीय ... अविस्मरणीय...।


मेरे क्रोध की ज्वाला में, बड़ा लाल अजगर संघर्षरत है;

मेरे प्रतापी न्याय में, शैतान अपना वास्तविक रूप दिखाते हैं;

मेरे कड़े वचनों में, सभी शर्म महसूस करते हैं, छिपने को जगह नहीं पाते हैं।

वे अतीत याद करते हैं, कैसे वे मेरा उपहास करते थे,

हमेशा वे दिखावा करते थे, हमेशा मेरा विरोध करते थे।

आज, कौन नहीं रोता है? कौन मलाल न करता है?

पूरा ब्रह्मांड जगत आँसुओं में डूबा है ...

आनन्द-ध्वनि से भरा है ... हँसी से भरा है...।

अतुलनीय आनन्द ... अतुलनीय आनन्द...।


हल्की बारिश गुनगुनाए ... भारी बर्फ फड़फड़ाए...।

लोगों में गम और खुशी दोनों हैं ... कुछ हँस रहे हैं...।

कुछ सुबक रहे हैं ... और कुछ जश्न मना रहे हैं...।

जैसे कि लोग भूल गए हैं ...

कि यह घनघोर बादल और वर्षा वसंत है,

या खिलते हुए फूलों की ग्रीष्म ऋतु, या भरपूर फसल की एक शरद ऋतु,

या बर्फ और तुषार की ठिठुरती सर्दी, नहीं जानता कोई...।

आकाश में बादलों का बहाव, पृथ्वी पर उफनते समुद्र।

पुत्र अपनी बाहें लहराते हैं ... नृत्य में लोगों के पैर थिरकते हैं...।

स्वर्गदूत लगे हैं अपने काम में ... स्वर्गदूत संचालन कर रहे हैं...।

धरती पर लोगों में हलचल है, धरती पर हर चीज़ वृद्धि कर रही है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'राज्य गान' से

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 60

मनुष्यजाति में प्रत्येक व्यक्ति को मेरे आत्मा के अवलोकन को स्वीकार करना चाहिए, अपने हर वचन और कार्य की बारीकी से जाँच करनी चाहिए, और इसके अलावा, मेरे चमत्कारिक कर्मों पर विचार करना चाहिए। पृथ्वी पर राज्य के आगमन के समय तुम लोग कैसा महसूस करते हो? जब मेरे पुत्र एवं लोग मेरे सिंहासन की ओर उमड़ पड़ते हैं, तो मैं महान सफेद सिंहासन के सम्मुख औपचारिक रूप से न्याय आरम्भ करता हूँ। इसका अर्थ है कि, जब मैं पृथ्वी पर व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य आरम्भ करता हूँ, और जब न्याय का युग अपने समापन के समीप होता है, तो मैं अपने वचनों को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की ओर निर्देशित करना आरम्भ करता हूँ और अपनी आत्मा की आवाज़ को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जारी करता हूँ। अपने वचनों के माध्यम से, मैं उनमें से सभी लोगों और चीज़ों को निर्मल कर दूँगा जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर हैं, ताकि भूमि अब और गंदी और व्यभिचारी न रहे, बल्कि एक पवित्र राज्य बन जाए। मैं सभी चीज़ों को नया कर दूँगा, ताकि वे मेरे उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएँ, ताकि वे फिर कभी धरती की साँस न लें और फिर कभी धरती की गंध से दूषित न हों। पृथ्वी पर, मनुष्य ने मेरे वचनों के लक्ष्य और मूल की टोह ली है, और मेरे कर्मों को देखा है, फिर भी कभी किसी ने वास्तव में मेरे वचनों के मूल को नहीं जाना है, और किसी ने भी कभी भी वास्तव में मेरे कर्मों की चमत्कारिकता को नहीं देखा है। ऐसा केवल आज ही हुआ है कि मैं व्यक्तिगत रूप से आकर मनुष्यों के बीच अपने वचन कहता हूँ, कि मनुष्यों को मेरे बारे में अल्पज्ञान है, अपने विचारों में "मेरे" लिए स्थान को हटा रहे हैं, उसके बदले अपनी चेतना में व्यवहारिक परमेश्वर के लिए स्थान बना रहे हैं। मनुष्य की अपनी धारणाएँ हैं और वह उत्सुकता से भरा है; परमेश्वर को कौन नहीं देखना चाहेगा? कौन परमेश्वर का सामना नहीं करना चाहेगा? फिर भी केवल एक चीज जो मनुष्य के हृदय में एक निश्चित स्थान धारण किए हुए है वह यह है कि मनुष्य को लगता है कि परमेश्वर अज्ञात और अमूर्त है। यदि मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं बताया होता तो किसने इसे महसूस किया होता? किसने सच में विश्वास किया होता कि मैं वास्तव में विद्यमान हूँ? निश्चित रूप से जरा-सी भी शंका के बिना? मनुष्य के हृदय में "स्वयं" और वास्तविकता में "स्वयं" के बीच एक बहुत ही विशाल अंतर है, और उनके बीच तुलना करने में कोई भी सक्षम नहीं है। यदि मैं देहधारी नहीं होता, तो मनुष्य ने मुझे कभी भी नहीं जाना होता, और यदि उसने मुझे जान भी लिया होता, तो क्या इस प्रकार का ज्ञान अभी भी एक धारणा नहीं होता? प्रत्येक दिन मैं लोगों के अनवरत प्रवाह के बीच चलता हूँ, और प्रत्येक दिन मैं प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कार्य करता हूँ। जब मनुष्य मुझे वास्तव में देख लेगा, तो वह मुझे मेरे वचनों में जानने में समर्थ बन जाएगा, और उस उपाय को जिसके माध्यम से मैं बोलता हूँ और साथ ही मेरे इरादों को भी समझ जाएगा।

जब राज्य औपचारिक तौर पर पृथ्वी पर आता है, तो सभी चीजों में से वह कौन-सी चीज़ है जो शान्त नहीं होती? सभी मनुष्यों में से वह कौन है जो भयभीत नहीं होता? मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हर जगह चलता हूँ, और प्रत्येक चीज मेरे ही द्वारा व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थित की जाती है। इस समय, कौन नहीं जानता है कि मेरे कार्य अद्भुत हैं? मेरे हाथ सभी चीजों को थामते हैं, फिर भी मैं सभी चीजों से ऊपर हूँ। क्या आज मनुष्यों के बीच मेरा देहधारण और मेरी व्यक्तिगत उपस्थिति मेरी विनम्रता और प्रच्छन्नता का सच्चा अर्थ नहीं है? बाहरी तौर पर, बहुत-से लोग भले के रूप में मेरी सराहना करते हैं, और खूबसूरत के रूप में मेरी प्रशंसा करते हैं, किन्तु मुझे वास्तव में कौन जानता है? आज, मैं क्यों कहता हूँ कि तुम लोग मुझे जानते हो? क्या मेरा लक्ष्य बड़े लाल अजगर को शर्मिन्दा करना नहीं है? मैं मनुष्य को मेरी प्रशंसा करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहता हूँ, बल्कि चाहता हूँ कि वह मुझे जाने, जिसके माध्यम से वह मुझे प्रेम करने लगेगा, और इस प्रकार से मेरी प्रशंसा करने लगेगा। ऐसी प्रशंसा सार्थक होती है, और निरर्थक बात नहीं है; केवल इस प्रकार की प्रशंसा ही मेरे सिंहासन तक पहुँच सकती है और आसमान में ऊँची उड़ान भर सकती है। क्योंकि मनुष्य को शैतान के द्वारा प्रलोभित और भ्रष्ट किया गया है, क्योंकि उस पर अवधारणाओं और सोच द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया है, इसलिए सम्पूर्ण मनुष्यजाति को जीतने, मनुष्य की सम्पूर्ण धारणाओं को उजागर करने, और मनुष्य की सोच की धज्जियाँ उड़ाने के उद्देश्य से मैं देह बन गया हूँ। परिणामरूवरूप, मनुष्य मेरे सामने अब और आडंबर नहीं करता, तथा अपनी स्वयं की धारणाओं का अब और उपयोग करके मेरी सेवा नहीं करता, और इस प्रकार मनुष्य की धारणाओं में "मैं" पूरी तरह से तितर-बितर हो जाता है। जब राज्य आता है, तो मैं सबसे पहले इस चरण के कार्य को आरम्भ करता हूँ, और मैं ऐसा अपने लोगों के बीच करता हूँ। मेरे लोग होने के नाते जो कि बड़े लाल अजगर के देश में पैदा हुए हैं, निश्चित रूप से तुम लोगों के भीतर बड़े लाल अजगर का ज़हर थोड़ा-सा अंश-मात्र भी, नहीं है। इस प्रकार, मेरे कार्य का यह चरण मुख्य रूप से तुम लोगों पर केन्द्रित है, और चीन में मेरे देहधारण के महत्व का एक पहलू है। अधिकांश लोग मेरे द्वारा बोले गए वचनों के एक अंश को भी समझने में असमर्थ रहते हैं, और जब वे समझते भी हैं, तो उनकी समझ धुँधली और संभ्रमित होती है। यह उस विधि में एक महत्वपूर्ण बिन्दु है जिसके द्वारा मैं बोलता हूँ। यदि सभी लोग मेरे वचनों को पढ़ने में समर्थ होते और उनके अर्थ को समझ पाते, तो मनुष्यों में से किसे बचाया जा सकता था, और अधोलोक में नहीं डाला जा सकता था? जब मनुष्य मुझे जान लेगा और मेरा आज्ञापालन करेगा तभी मैं आराम करूँगा, और यही वह समय होगा जब मनुष्य मेरे वचनों के अर्थ को समझने में समर्थ होगा। आज, तुम लोगों की कद-काठी बहुत छोटी है, यह लगभग दयनीय रूप से छोटी है, यहाँ तक कि यह उन्नत किये जाने योग्य भी नहीं है—मेरे बारे में तुम्हारे ज्ञान के बारे में तो कहने के लिए कुछ नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 11' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 61

जब पूर्व से बिजली चमकती है—जो कि निश्चित रूप से वो क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जिस क्षण बिजली प्रकट होती है, तो संपूर्ण नभमण्डल जगमगा उठता है, और सभी तारों में एक रूपान्तरण हो जाता है। पूरी मानवजाति ऐसी हो जाती है मानो कि इसे निबटा दिया गया हो। पूर्व के प्रकाश की इस किरण के नीचे, समस्त मानवजाति को उसके मूल स्वरूप में प्रकट किया जाता है चुँधियाई आँखें, भ्रम में हक्के बक्के; अभी भी वे अपनी कुरूप मुखाकृति को छिपाने में समर्थ नहीं हैं। फिर से, वे ऐसे पशुओं के समान हैं जो पहाड़ों की गुफाओं में शरण लेने के लिए मेरे प्रकाश से दूर भाग रहे हैं; फिर भी, उनमें से एक को भी मेरे प्रकाश के भीतर से मिटाया नहीं जा सकता है। सभी मनुष्य भौचक्के हैं और सभी प्रतीक्षा कर रहें हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन का आनन्द मनाते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोस रहे हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना असंभव है; आत्म-दण्ड के आँसू नदियों का निर्माण करते हैं और व्यापक जल प्रवाह में बह जाते हैं और पलक झपकते ही बिना किसी निशान के चले जाते हैं। एक बार फिर, मेरा दिन मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जाग्रत कर रहा है और मानवता को एक स्थान दे रहा है जहाँ से एक नई शुरूआत की जाए। मेरा हृदय धड़कता है और, मेरे हृदय की धड़कन की लय का अनुसरण करते हुए पहाड़ आनन्द में उछलते हैं और समुद्र खुशी से नृत्य करता है तथा लहरें लय में चट्टानी भित्तियों से टकराती हैं। जो मेरे हृदय में है उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं चाहता हूँ कि सभी अशुद्ध चीज़ें मेरे घूरने से जलकर भस्म हो जाएँ। मैं चाहता हूँ कि अवज्ञा के सभी पुत्र, मेरी नज़रों के सामने से ओझल हो जाएँ और आगे से अस्तित्व में न मँडराते रहें। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरूआत की है, बल्कि मैंने विश्व में एक नए कार्य की शुरूआत की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य बन जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य, मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए समाप्त हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले से ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा करते हुए, बड़े लाल अजगर ने मेरी योजना में गड़बड़ करने के लिए हर कल्पनीय साधन को समाप्त कर लिया है, लेकिन क्या मैं उसके छलपूर्ण षडयन्त्रों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या उसकी धमकियों के द्वारा मुझे भयभीत किया जा सकता है कि मैं अपना आत्मविश्वास खो दूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी भी ऐसा एक भी प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैं अपनी हथेली पर नहीं रखता हूँ; बड़े लाल अजगर के बारे में यह बात कितनी अधिक सत्य है, जो वह युक्ति है जो मेरे लिए एक विषमता के रूप में कार्य करता है? क्या वह भी मेरे हाथों द्वारा कुशलतापूर्वक प्रयोग की जाने वाली एक वस्तु नहीं है?

मानव जगत में मेरे देहधारण के समय, मानवजाति मेरे मार्गदर्शन करने वाले हाथ की सहायता से अनजाने में इस दिन तक पहुँची है, अनजाने में मुझे जान गयी है। लेकिन, जहाँ तक इसकी बात है कि जो मार्ग सामने है उस पर कैसे चला जाए, तो किसी को कोई आभास नहीं है, कोई नहीं जानता है, और किसी के पास इसका कोई सुराग तो और भी नहीं है कि वह मार्ग उसे किस दिशा में ले जाएगा? जिस पर सर्वशक्तिमान निग़रानी रखेगा केवल वही मार्ग पर अंत तक चल पाने में समर्थ होगा; केवल पूर्व की चमकती हुई बिजली के मार्गदर्शन के द्वारा ही कोई मेरे राज्य के पार ले जाने वाली दहलीज़ को लांघने में समर्थ होगा। मनुष्यों के बीच, ऐसा कोई भी नहीं है जिसने मेरे चेहरे को देखा है, ऐसा कोई नहीं जिसने पूर्व की चमकती हुई बिजली को देखा है; ऐसा कोई तो बिल्कुल नहीं है जिसने मेरे सिंहासन से निकलती हुई आवाज़ को सुना है? वास्तव में, प्राचीन काल से, कोई भी मनुष्य सीधे मेरे व्यक्तित्व के सम्पर्क में नहीं आया है; केवल आज, जब मैं संसार में आ चुका हूँ, मनुष्यों के पास मुझे देखने का अवसर है। किन्तु अब भी, मनुष्य मुझे नहीं जानते हैं, वे बस मेरे चेहरे को देखते हैं और केवल मेरी आवाज़ को सुनते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि मेरे कहने का क्या अर्थ है। सभी मनुष्य इसी तरह के हैं। मेरे लोगों में से एक होने के नाते, जब तुम लोग मेरा चेहरा देखते हो, तो क्या तुम लोग बहुत ज़्यादा गर्व महसूस नहीं करते हो? और क्या तुम लोग भयानक शर्मिन्दगी महसूस नहीं करते हो क्योंकि तुम लोग मुझे नहीं जानते हो? मैं मनुष्यों के बीच चलता-फिरता हूँ, और मैं मनुष्यों के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैं देह बन गया हूँ और मैं मानव जगत में आ गया हूँ। मेरा उद्देश्य मानवजाति को मात्र मेरी देह की देखभाल करने में सक्षम बनाना नहीं है; अधिक महत्वपूर्ण रूप से, यह मानवजाति को मुझे जानने में सक्षम बनाने के लिए है। और तो और, मैं अपने देहधारी शरीर के माध्यम से मानवजाति को उसके पापों का दोषी ठहराऊँगा; मैं अपने देहधारी शरीर के माध्यम से उस बड़े लाल अजगर को परास्त करूँगा और उसकी माँद को जड़ से मिटा दूँगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 12' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 62

समूचे विश्व में लोग मेरे दिन के आगमन का उत्सव मनाते हैं, और स्वर्गदूत मेरे सभी लोगों के बीच चलते-फिरते हैं। जब शैतान परेशानियाँ पैदा करता है, तो स्वर्गदूत, स्वर्ग में अपनी सेवाओं की वजह से, सदैव मेरे लोगों की सहायता करते हैं। वे मानवीय कमज़ोरियों के कारण शैतान के द्वारा धोखा नहीं खाते हैं, बल्कि अंधकार की शक्तियों के आक्रमण के परिणाम स्वरूप मनुष्य के कोहरे में लिपटे हुए जीवन का कहीं ज़्यादा अनुभव प्राप्त करते हैं। सभी लोग मेरे नाम के नीचे समर्पण करते हैं, और कोई भी खुलकर मेरा विरोध करने के लिए कभी भी खड़ा नहीं होता है। स्वर्गदूतों के परिश्रम की वजह से, मनुष्य मेरे नाम को स्वीकार करता है और सभी मेरे कार्य के प्रवाह के बीच में आ जाते हैं। संसार का पतन हो रहा है! बेबीलोन गतिहीनता में है! धार्मिक संसार—कैसे इसे पृथ्वी पर मेरी सामर्थ्य द्वारा नष्ट नहीं किया जा सकता था? कौन अभी भी मेरी अवज्ञा और मेरा विरोध करने का साहस करता है? धर्म शास्त्र? सभी धार्मिक अधिकारी? पृथ्वी के शासक और अधिकारी? स्वर्गदूत? कौन मेरे शरीर की सिद्धता और परिपूर्णता का उत्सव नहीं मनाता है? सभी लोगों में से, कौन बिना रूके मेरी स्तुति नहीं गाता है, कौन बिना नागा किए प्रसन्न नहीं है? मैं बड़े लाल अजगर की माँद के देश में रहता हूँ, फिर भी मैं इसके कारण डर कर थरथराता या भागता नहीं हूँ, क्योंकि उसके सभी लोगों ने पहले से ही उससे घृणा करना प्रारम्भ कर दिया है। उस अजगर के सामने किसी भी चीज़ के "कर्तव्य" को कभी नहीं किया गया है; इसके बजाए, सभी चीज़ें जैसा वे उचित देखती हैं करती हैं, और हर कोई अपने अपने रास्ते पर जाता है। पृथ्वी के राष्ट्रों का विनाश कैसे नहीं हो सकता है? पृथ्वी के राष्ट्रों का पतन कैसे नहीं हो सकता है? मेरे लोग आनंदित कैसे नहीं हो सकते हैं? वे खुशी से गीत कैसे नहीं गा सकते हैं? क्या यह मनुष्य का कार्य है? क्या यह मनुष्य के हाथों किया गया कार्य है? मैंने मनुष्य को उसके अस्तित्व का मूल दिया है और उसे भौतिक वस्तुएँ प्रदान की हैं, फिर भी मनुष्य अपनी वर्तमान परिस्थितियों से असंतुष्ट है और मेरे राज्य में प्रवेश करने के लिए कहता है। किन्तु वह इतनी आसानी से, बिना कोई कीमत चुकाए, और अपनी निःस्वार्थ भक्ति को अर्पित करने के लिए तैयार हुए बिना, मेरे राज्य में प्रवेश कैसे कर सकता है? मनुष्य से कुछ वसूल करने के बजाए, मैं उससे अपेक्षाएँ करता हूँ, ताकि पृथ्वी पर मेरा राज्य महिमा से भर जाए। मनुष्य वर्तमान युग में मेरे द्वारा निर्देशित किया गया है तथा वह इस अवस्था में विद्यमान है, और वह मेरे प्रकाश के मार्गदर्शन के बीच रहता है। यदि ऐसा न हुआ होता, तो पृथ्वी पर लोगों में ऐसा कौन होता जो अपने भविष्य के बारे में जान पाता? कौन मेरी इच्छा को समझ पाता? मैं अपने प्रावधानों को मनुष्य से की गई अपेक्षाओं के साथ जोड़ देता हूँ; क्या यह प्रकृति के नियमों के अनुसार नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 22' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 63

राज्य में, सृष्टि की असंख्य चीज़ें पुनः जीवित होना और अपनी जीवन शक्ति फिर से प्राप्त करना आरम्भ करती हैं। पृथ्वी की अवस्था में परिवर्तनों के कारण, एक भूमि और दूसरी भूमि के बीच की सीमाएँ भी खिसकना शुरू करती हैं। पूर्व काल में, मैं भविष्यवाणी कर चुका हूँ: जब भूमि से भूमि विभाजित हो जाती है, और भूमि से भूमि संयुक्त हो जाती है, तो यही वह समय होगा जब मैं राष्ट्र को तोड़-फोड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। इस समय, मैं सारी सृष्टि को फिर से नया करूँगा और समस्त ब्रहमाण्ड को पुनः विभक्त करूँगा, इस प्रकार पूरे विश्व को व्यवस्थित रूप से रखूँगा, और इसकी पुरानी अवस्था को नए में रूपान्तरित कर दूँगा। यह मेरी योजना है। ये मेरे कार्य हैं। जब संसार के सभी राष्ट्र और लोग मेरे सिंहासन के सामने लौटते हैं, तो उसके बाद मैं स्वर्ग के सारे उपहारों को लेकर उन्हें मानवीय संसार को दे दूँगा, ताकि, मेरे कारण, वह बेजोड़ उपहारों से लबालब भर जाएगा। किन्तु जब तक पुराना संसार निरन्तर बना रहता है, मैं सारे विश्व में खुले तौर पर अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करते हुए, अपने प्रचण्ड प्रकोप को इनके राष्ट्रों के ऊपर तेजी से फेंकूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करता है उनको ताड़ना दूँगा:

जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ अपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और उसके बाद उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, अर्थात्, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और मेरे कारण सूर्य और चन्द्रमा को नया बना दिया जायेगा—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से विभक्त कर दिया जाएगा और मेरे राज्य के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राज्य बन जाएँगे जो मेरी आराधना करते हों; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान से संबंध रखते हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा दिखाया जायेगा—अर्थात उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो, भिन्न-भिन्न अंशों में, धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जा कर मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। समस्त मानवता अपने-अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उसने किया है उससे भिन्न-भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े हुए हैं सभी नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया है, वे अपने आपको दोषमुक्त करने के ढंग के कारण, पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर बने रहेंगे। मैं अपने महान कार्य की समाप्ति की घोषणा करने के लिए पृथ्वी पर अपनी ध्वनि आगे करते हुए अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे।

जैसे-जैसे मेरी आवाज़ उत्सुकता में गहरी होती है, मैं विश्व की दशा का भी अवलोकन कर रहा हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से, सृष्टि की असंख्य चीज़ों को नया बनाया जाता है। स्वर्ग बदलता है, और पृथ्वी भी बदलती है। मानवता अपने मूल रूप में उजागर होती है और, धीरे-धीरे, प्रत्येक अपने स्वभाव के अनुसार उजागर होता है, और मनुष्य अकस्मात् ही अपने-अपने परिवारों के आँचल में जाने के लिए अपना रास्ता ढूँढ़ लेता है। इस पर, मुझे बहुत अधिक प्रसन्‍नता होगी। मैं बाधाओं से मुक्त हूँ, अकस्मात् ही मेरा महान कार्य सम्पूर्ण हो जाता है, अकस्मात् ही सृष्टि की सभी असंख्य चीज़ें रूपान्तरित हो जाती हैं। जब मैंने संसार को बनाया था, तब मैंने सभी चीज़ों को उसके स्वभाव के अनुसार तराशा था, और सभी चीज़ों को आकार के साथ उनकी किस्म के अनुसार एक साथ इकट्ठा किया था। ज्यों ही मेरी प्रबन्धन योजना का अंत नज़दीक आएगा, मैं सृष्टि की भूतपूर्व की दशा पुनर्स्थापित कर दूँगा, मैं प्रत्येक चीज़ को गहराई से बदलते हुए, हर चीज को उसी प्रकार पुनः स्थापित कर दूँगा जैसी वह मूल रूप से थी, ताकि हर चीज़ मेरी योजना के आँचल में वापस लौट जाए। समय आ चुका है! मेरी योजना की अंतिम अवस्था लगभग पूरी होने ही वाली है। आह, पुराना अपवित्र संसार! तुम निश्चित रूप से मेरे वचनों के अधीन आ जाओगे! मेरी योजना के द्वारा तुम निश्चित रूप से मिटा दिए जाओगे! आह, सृष्टि की असंख्य चीज़ो! तुम सभी को मेरे वचनों के भीतर नया जीवन मिलेगा, तुम्हारे पास तुम्हारा सार्वभौम प्रभु होगा! आह, शुद्ध और निष्कलंक नये संसार! तुम निश्चय ही मेरी महिमा के भीतर पुनः जीवित हो जाओगे! आह, सिय्योन पर्वत! अब और मौन मत रह। मैं विजयोल्लास में लौटा हूँ! सृष्टि के बीच से, मैं सारी पृथ्वी का सूक्ष्म परीक्षण करता हूँ। पृथ्वी पर मानवजाति ने एक नए जीवन की शुरूआत की है, और एक नई आशा को जीत लिया है। आह, मेरे लोगो! तुम लोग मेरे प्रकाश के भीतर जीवन में वापस कैसे नहीं आ सकते हो? तुम लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन आनन्द से उछल कैसे नहीं सकते हो? भूमियाँ उल्लास में चिल्ला रही हैं, जल कर्कश ध्वनि के साथ आनन्द से ठहाका मारकर हँस रहे हैं! आह, पुनर्जीवित इस्राएल! मेरे द्वारा पूर्वनियति के कारण तुम क्यों गर्व महसूस नहीं कर सकते हो? कौन रोया है? किसने विलाप किया है? पुराना इस्राएल समाप्त हो गया है, और आज का इस्राएल संसार में उदय हुआ है, सीधा खड़ा हुआ है और ऊँचा उठता जा रहा है, और समस्त मानवता के हृदय में उठ गया है। आज का इस्राएल मेरे लोगों के माध्यम से अस्तित्व के स्रोत को निश्चित रूप से प्राप्त करेगा! आह, घृणित मिस्र! निश्चित रूप से तू अब तो मेरे विरूद्ध खड़ा नहीं होता है? तू कैसे मेरी दया का लाभ उठा सकता है और मेरी ताड़ना से बचने की कोशिश कर सकता है? तू मेरी ताड़ना के भीतर कैसे अस्तित्व में बना नहीं रह सकता है? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ वे निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरे विरूद्ध खड़े होते हैं उन्हें निश्चय ही मेरे द्वारा अनन्त काल तक ताड़ना दी जाएगी। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ, मैं उन सब के कारण जो मनुष्यों ने किया है उन्हें हल्के में नहीं छोडूँगा। मैं पूरी पृथ्वी पर निगरानी रखूँगा, और, संसार की पूर्व दिशा में धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ प्रकट हो जाऊँगा, और मैं मानवता के असंख्य मेज़बानों पर स्वयं को प्रकट करूँगा!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 64

जब स्वर्गदूत मेरी स्तुति में संगीत बजाते हैं, तो मनुष्य पर अपनी अनुकम्पा उँड़ेलने के अलावा मेरे पास अन्य कोई विकल्प नहीं होता है। तत्काल मेरा हृदय उदासी से भर जाता है, और मेरे लिए इस दुःखदायी भाव से छुटकारा पाना असंभव हो जाता है। मनुष्य से पृथक होने और फिर एक होने के आनन्द और दुःखों में, हम मनोभावों का आदान-प्रदान करने में असमर्थ होते है। ऊपर स्वर्ग और नीचे पृथ्वी पर पृथक हुए, मैं और मनुष्य नियमित रूप से मिलने में असमर्थ हैं। पूर्व की भावनाओं के विषाद से कौन मुक्त हो सकता है? कौन अतीत के बारे में स्मरण करने से अपने आप को रोक सकता है? कौन अतीत के मनोभावों की निरंतरता की आशा नहीं करेगा? कौन मेरी वापसी की अभिलाषा नहीं करेगा? कौन मनुष्य के साथ मेरे फिर से एक हो जाने की लालसा नहीं करेगा? मेरा हृदय अत्यंत अशांत है, और मनुष्य की आत्मा गहराई तक चिंतित हैं। यद्यपि आत्माओं में एक समान हैं, फिर भी हम प्रायः एक साथ नहीं हो सकते हैं, और हम प्रायः एक दूसरे को नहीं देख सकते हैं। इस प्रकार समस्त मानवजाति का जीवन व्यथा से भरा है और उसमें प्राणशक्ति की कमी है, क्योंकि मनुष्य हमेशा मेरे लिए तड़पा है। यह ऐसा है मानो कि मानवजाति स्वर्ग से गिराए गए पदार्थ हों; वे ज़मीन पर से मेरी ओर टकटकी लगाकर देखते हुए, पृथ्वी से मेरे नाम की दोहाई देते हों—परन्तु वे खूँखार भेड़िए के जबड़े से कैसे बच कर भाग सकते हैं? वे उसके ख़तरे और प्रलोभन से स्वयं को कैसे मुक्त कर सकते हैं? मानवजाति मेरी योजना की व्यवस्था के प्रति आज्ञाकारिता के कारण स्वयं को बलिदान कैसे नहीं कर सकती है? जब वे जोर से गिड़गिड़ाते हैं, तो मैं उनसे अपना मुँह फेर लेता हूँ, मैं उन्हें देखना अब और सहन नहीं कर सकता हूँ; हालाँकि, मैं उनकी अश्रुपूरित पुकारों को कैसे नहीं सुन सकता हूँ? मैं मानवीय संसार के इन अन्यायों को सही करूँगा। मैं अपने लोगों को फिर से नुकसान पहुँचाने से शैतान को रोकते हुए, शत्रु को पुनः जो चाहे वह करने से रोकते हुए, पूरे संसार में अपने स्वयं के हाथों से अपना कार्य करूँगा। मैं अपने सभी शत्रुओं को ज़मीन पर गिराते हुए और अपने सामने उनसे उनके अपराधों को अंगीकार करवाते हुए, पृथ्वी पर राजा बन जाऊँगा और वहाँ अपना सिंहासन ले जाऊँगा। अपने दुःख में, जिसमें क्रोध मिश्रित है, मैं किसी को नहीं छोड़ते हुए, और अपने शत्रुओं को भयभीत करते हुए समस्त विश्व को कुचल कर समतल कर दूँगा। मैं इस पृथ्वी को खण्डहर में बदल दूँगा, और अपने शत्रुओं को खण्डहर में गिरा दूँगा, ताकि अब से वे मानवजाति को अब और भ्रष्ट नहीं कर सकें। मेरी योजना पहले से ही निर्धारित है, और कोई भी, चाहे वह कोई भी हो, इसे बदलने में समर्थ नहीं होगा। जब मैं ब्रह्माण्ड के ऊपर प्रतापी ठाट-बाट के साथ चलूँगा, तो समस्त मानवजाति नए सिरे से बन जाएगी, और हर चीज़ पुनर्जीवित हो जाएगी। मनुष्य अब और नहीं रोएगा, और सहायता के लिए अब और मेरी दोहाई नहीं देगा। तब मेरा हृदय आनन्दित होगा, और लोग उत्सव मनाते हुए मेरे पास लौटेंगे। पूरा विश्व, ऊपर से नीचे तक, हर्षोल्लास में झूमेगा ...

आज दुनिया के देशों के बीच, मैं उस कार्य को कर रहा हूँ जिसे पूरा करने का मैने बीड़ा उठाया है। मैं अपनी योजना के अंतर्गत समस्त कार्य करते हुए मानवजाति के बीच घूम रहा हूँ, और समस्त मानवजाति मेरी योजना के अनुसार विभिन्न देशों को "खण्डित" कर रही है। पृथ्वी पर लोगों ने अपना ध्यान अपनी स्वयं की नियति पर केन्द्रित करवा लिया है, क्योंकि दिन नज़दीक आ रहा है और स्वर्गदूत अपनी तुरहियाँ बजा रहे हैं। अब और विलंब नहीं होंगे, और उसके बाद समस्त सृष्टि हर्षोल्लास में नृत्य करना आरम्भ कर देंगी। कौन अपनी इच्छा से मेरे दिन को बढ़ा सकता है? क्या कोई पृथ्वीवासी? अथवा क्या आकाश के तारे? या स्वर्गदूत? जब मैं इस्राएल के लोगों के उद्धार आरम्भ करने के लिए कोई कथन कहता हूँ, तो मेरा दिन संपूर्ण मानवजाति में पहुँच जाता है। हर मनुष्य इस्राएल की वापसी का भय खाता है। जब इस्राएल वापस आएगा, तो वह मेरी महिमा का दिन होगा, और यही वह दिन भी होगा जब सब कुछ बदल जाता है और नया हो जाता है। जैसे ही धार्मिक न्याय संपूर्ण जगत में सन्निकटता से पहुँचता है, तो सभी लोग कातर और डरे हुए हो जाते हैं, क्योंकि मानवीय संसार में धार्मिकता अनसुनी है। जब धार्मिकता का सूर्य प्रकट होगा, तो पूर्वदिशा रोशन हो जाएगी, और तब वह, हर एक के पास पहुँचते हुए, पूरे विश्व को रोशन कर देगी। यदि मनुष्य वास्तव में मेरी धार्मिकता को पूरा कर सकता, तो किस बात का डर? मेरे सभी लोग मेरे दिन के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं, वे सभी मेरे दिन के आगमन की कामना करते हैं। वे संपूर्ण मानवजाति को प्रतिफल देने और धार्मिकता के सूर्य के रूप में मेरी भूमिका में मानवजाति की नियति को व्यवस्थित करने के लिए मेरी प्रतीक्षा करते हैं। मेरा राज्य समस्त ब्रह्माण्ड के ऊपर आकार ले रहा है, और मेरा सिंहासन हज़ारों-लाखों लोगों के हृदयों में प्रभुत्व वाला हो रहा है। स्वर्गदूतों की सहायता से, मेरी महान उपलब्धि शीघ्र ही फलित हो जाएगी। मेरे सभी पुत्र और लोग, मेरे साथ उनके फिर से एक होने, और फिर कभी अलग न होने की चाहना करते हुए, साँस रोक कर मेरे आगमन की प्रतीक्षा करते हैं। मेरे राज्य की असंख्य आबादी, मेरे उनके साथ होने की वजह से, हर्षित उत्सव में एक दूसरे की ओर क्यों नहीं भाग सकती है? क्या यह कोई ऐसा पुनर्मिलन हो सकता है जिसके लिए कोई कीमत चुकाने की आवश्यकता नहीं है? मैं सभी मनुष्यों की नज़रों में सम्मानित हूँ, सभी के वचनों में मेरी घोषणा होती है। इसके अलावा, जब मैं लौटूँगा, तब मैं शत्रु की सभी ताक़तों को जीतूँगा। समय आ गया है! मैं अपने कार्य को गति दूँगा, मैं मनुष्यों के बीच राजा के रूप में शासन करूँगा! मैं लौटने के बिन्दु पर हूँ! और मैं प्रस्थान करने ही वाला हूँ! यही है वह जिसकी हर कोई आशा कर रहा है, यही है वह जिसकी वे अभिलाषा करते हैं। मैं संपूर्ण मानवजाति को मेरे दिन के आगमन को देखने दूँगा और मेरे दिन के आगमन का स्वागत करने दूँगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 27' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 65

जिस दिन सभी चीज़ें पुनर्जीवित हुईं, मैं मनुष्यों के बीच आया, और मैंने उनके साथ अद्भुत दिन और रातें बिताई हैं। केवल इस बिंदु पर ही मनुष्य को मेरी सुलभता का थोड़ा-सा एहसास होता है, और जैसे-जैसे मेरे साथ उसकी अंत:क्रिया बढ़ने लगती है, वह मेरी सत्ता और स्वरूप को थोड़ा-सा देखता है—और परिणामस्वरूप, वह मेरे बारे में कुछ ज्ञान प्राप्त करता है। सभी लोगों के बीच, मैं अपना सिर उठाता हूँ और देखता हूँ, और वे सभी मुझे देखते हैं। फिर भी जब संसार पर आपदा आती है, तो वे तुरंत व्याकुल हो जाते हैं, और उनके हृदयों से मेरी छवि ग़ायब हो जाती है; आपदा आने से घबराकर वे मेरे उपदेशों पर कोई ध्यान नहीं देते। मैंने मनुष्यों के बीच बहुत वर्ष बिताए हैं, फिर भी वह हमेशा अनभिज्ञ रहा है, और उसने मुझे कभी नहीं जाना है। आज मैं उसे यह अपने मुँह से बताता हूँ, और सभी लोगों से कहता हूँ कि वे मुझसे कुछ प्राप्त करने के लिए मेरे पास आएँ, पर वे मुझसे अभी भी अपनी दूरी बनाए हुए हैं, और इसलिए वे मुझे नहीं जानते। जब मेरे कदम ब्रह्मांड भर में और पृथ्वी के छोरों तक पड़ेंगे, तब मनुष्य खुद पर चिंतन करना शुरू करेगा, और सभी लोग मेरे पास आएँगे और मेरे सामने दंडवत करेंगे तथा मेरी आराधना करेंगे। यह मेरे महिमा-मंडन का, मेरी वापसी का, और साथ ही मेरे प्रस्थान का भी दिन होगा। अब मैंने पूरी मानवजाति के बीच अपना कार्य आरंभ कर दिया है, और पूरे ब्रह्मांड में अपनी प्रबंधन योजना के अंतिम अंश की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस क्षण से आगे, जो कोई भी सावधान नहीं हैं, वे निर्मम ताड़ना में गोता लगाने के भागी होंगे, और यह किसी भी क्षण हो सकता है। यह इसलिए नहीं है क्योंकि मैं निर्दयी हूँ, बल्कि यह मेरी प्रबंधन योजना का एक चरण है; सभी को मेरी योजना के चरणों के अनुसार आगे बढ़ना होगा, और कोई भी मनुष्य इसे बदल नहीं सकता। जब मैं औपचारिक रूप से अपना कार्य शुरू करता हूँ, तो सभी लोग वैसे ही चलते हैं जैसे मैं चलता हूँ, इस तरह कि समस्त संसार के लोग मेरे साथ कदम मिलाते हुए चलने लगते हैं, संसार भर में "उल्लास" होता है, और मनुष्य को मेरे द्वारा आगे की ओर प्रेरित किया जाता है। परिणामस्वरूप, स्वयं बड़ा लाल अजगर मेरे द्वारा उन्माद और व्याकुलता की स्थिति में डाल दिया जाता है, और वह मेरा कार्य करता है और अनिच्छुक होने के बावजूद अपनी स्वयं की इच्छाओं का अनुसरण करने में समर्थ नहीं होता, और उसके पास मेरे नियंत्रण में समर्पित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। मेरी सभी योजनाओं में बड़ा लाल अजगर मेरी विषमता, मेरा शत्रु, और साथ ही मेरा सेवक भी है; उस हैसियत से मैंने उससे अपनी "अपेक्षाओं" को कभी भी शिथिल नहीं किया है। इसलिए, मेरे देहधारण के काम का अंतिम चरण उसके घराने में पूरा होता है। इस तरह से बड़ा लाल अजगर मेरी उचित तरीके से सेवा करने में अधिक समर्थ है, जिसके माध्यम से मैं उस पर विजय पाऊँगा और अपनी योजना पूरी करूँगा। जब मैं कार्य करता हूँ, तो सभी स्वर्गदूत निर्णायक युद्ध में मेरे साथ हो लेते हैं और अंतिम चरण में मेरी इच्छाएँ पूरी करने का दृढ़ निश्चय करते हैं, ताकि पृथ्वी के लोग मेरे सामने स्वर्गदूतों के समान समर्पण कर दें, और मेरा विरोध करने की इच्छा न करें, और ऐसा कुछ न करें जो मेरे विरुद्ध विद्रोह करता हो। समस्त संसार में ये मेरे कार्य की गतिशीलताएँ हैं।

मनुष्यों के बीच मेरे आगमन का उद्देश्य और महत्व संपूर्ण मानवजाति को बचाना, संपूर्ण मानवजाति को अपने परिवार में वापस लाना, स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से मिलाना, और मनुष्य से स्वर्ग और पृथ्वी के बीच "संकेतों" का संप्रेषण करवाना है, क्योंकि मनुष्य का अंतर्निहित कार्य ऐसा ही है। जब मैंने मानवजाति का सृजन किया था, उस समय मैंने मानवजाति के लिए सभी चीज़ें तैयार की थीं, और बाद में मैंने मानवजाति को अपनी अपेक्षाओं के अनुसार वह संपत्ति प्राप्त करने की अनुमति दी, जो मैंने उसे दी थी। इसलिए मैं कहता हूँ कि यह मेरे मार्गदर्शन के अंतर्गत है कि संपूर्ण मानवजाति आज यहाँ तक पहुँची है। और यह सब मेरी योजना है। संपूर्ण मानवजाति के बीच अनगिनत संख्या में लोग मेरे प्रेम की सुरक्षा में विद्यमान हैं, और अनगिनत संख्या में ही लोग मेरी घृणा की ताड़ना के अधीन रहते हैं। यद्यपि सभी लोग मुझसे प्रार्थना करते हैं, फिर भी वे अपनी वर्तमान परिस्थितियों को बदलने में असमर्थ हैं; एक बार जब वे आशा खो देते हैं, तो वे केवल प्रकृति को अपना काम करने दे सकते हैं और मेरी अवज्ञा करने से रुक सकते हैं, क्योंकि बस इतना ही मनुष्य द्वारा किया जा सकता है। जब मनुष्य के जीवन की स्थिति की बात आती है, तो मनुष्य को अभी भी वास्तविक जीवन को ढूँढ़ना शेष है, उसने अभी भी अन्याय, वीरानी और संसार की दयनीय स्थितियों का हल नहीं निकाला है—और इसलिए, अगर यह आपदा के आगमन के लिए न होता, तो अधिकतर लोग अभी भी प्रकृति माँ को गले से लगाते, और अभी भी अपने आपको "जीवन" के स्वाद में तल्लीन कर देते। क्या यह संसार की सच्चाई नहीं है? क्या यह उस उद्धार की आवाज़ नहीं है, जिसे मैं मनुष्य से कहता हूँ? क्यों मानवजाति में से कभी भी किसी ने मुझसे सच में प्रेम नहीं किया है? क्यों मनुष्य केवल ताड़ना और परीक्षणों के बीच ही मुझसे प्रेम करता है, और कोई भी मेरी सुरक्षा के अधीन मुझसे प्रेम नहीं करता? मैंने कई बार मानवजाति को ताड़ना दी है। वे उस पर एक नज़र डालते हैं, लेकिन फिर वे उसे अनदेखा कर देते हैं, और वे उस समय इसका अध्ययन और मनन नहीं करते, और इसलिए मनुष्य के ऊपर जो कुछ भी आकर पड़ता है, वह है निष्ठुर न्याय। यह मेरे कार्य करने के तरीकों में से केवल एक तरीका है, परंतु यह फिर भी मनुष्य को बदलने और उसे मुझसे प्रेम करवाने के लिए है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 29' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 66

मैं राज्य में शासन करता हूँ, और इतना ही नहीं, मैं पूरे ब्रह्मांड में शासन करता हूँ; मैं राज्य का राजा और ब्रह्मांड का मुखिया दोनों हूँ। अब से मैं उन सभी को इकट्ठा करूँगा, जो चुने हुए नहीं हैं और अन्यजातियों के बीच अपना कार्य आरंभ करूँगा, और मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करूँगा, ताकि मैं सफलतापूर्वक अपने कार्य के अगले चरण की शुरुआत कर सकूँ। अन्यजातियों के बीच अपने कार्य को फैलाने के लिए मैं ताड़ना का उपयोग करूँगा, जिसका अर्थ है कि मैं उन सभी के विरूद्ध बल का उपयोग करूँगा, जो अन्यजातियाँ हैं। स्वाभाविक रूप से, यह कार्य उसी समय किया जाएगा, जिस समय मेरा कार्य चुने हुओं के बीच किया जाएगा। जब मेरे लोग पृथ्वी पर शासन करेंगे और सामर्थ्य का उपयोग करेंगे, तो यही वह दिन भी होगा जब पृथ्वी के सभी लोगों को जीत लिया जाएगा, और, इससे भी बढ़कर, यही वह समय होगा जब मैं विश्राम करूँगा—और केवल तभी मैं उन सबके सामने प्रकट होऊँगा, जिन्हें जीता जा चुका है। मैं पवित्र राज्य के लिए प्रकट होता हूँ, और अपने आपको मलिनता की भूमि से छिपा लेता हूँ। वे सभी, जिन्हें जीता जा चुका है और जो मेरे सामने आज्ञाकारी बन गए हैं, अपनी आँखों से मेरे चेहरे को देखने और अपने कानों से मेरी आवाज़ सुनने में समर्थ हैं। यह उन लोगों के लिए आशीष है, जो अंत के दिनों में पैदा हुए हैं, यह मेरे द्वारा पहले से ही नियत किया गया आशीष है, और यह किसी भी मनुष्य के द्वारा अपरिवर्तनीय है। आज मैं भविष्य के कार्य के वास्ते इस तरीके से कार्य करता हूँ। मेरा समस्त कार्य परस्पर-संबंधित है, इस सबमें एक आह्वान और अनुक्रिया है : कभी भी कोई चरण अचानक नहीं रुका है, और कभी भी किसी भी कदम को किसी भी अन्य कदम से स्वतंत्र रूप से नहीं किया गया है। क्या यह ऐसा नहीं है? क्या अतीत का कार्य आज के कार्य की नींव नहीं है? क्या अतीत के वचन आज के वचनों के अग्रदूत नहीं हैं? क्या अतीत के चरण आज के चरणों के उद्गम नहीं हैं? जब मैं औपचारिक रूप से पुस्तक खोलता हूँ, तो ऐसा तब होता है जब संपूर्ण ब्रह्मांड में लोगों को ताड़ना दी जाती है, जब दुनिया भर के लोगों को परीक्षणों के अधीन किया जाता है, और यह मेरे काम की पराकाष्ठा है; सभी लोग एक प्रकाशरहित भूमि में रहते हैं, और सभी लोग अपने वातावरण द्वारा खड़े किए गए ख़तरे के बीच रहते हैं। दूसरे शब्दों में, यही वह जीवन है, जिसे मनुष्य ने सृष्टि की उत्पत्ति के समय से आज के दिन तक कभी अनुभव नहीं किया है, और युगों-युगों से किसी ने भी इस प्रकार के जीवन का "आनंद" नहीं लिया है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि मैंने वह कार्य किया है, जो पहले कभी नहीं किया गया है। यह मामलों की वास्तविक स्थिति है, और यही आंतरिक अर्थ है। चूँकि मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, चूँकि यह दूर प्रतीत नहीं होता, परंतु यह मनुष्य की आँखों के बिल्कुल सामने ही है, तो परिणामस्वरूप कौन भयभीत नहीं हो सकता? और कौन इसमें आनंदित नहीं हो सकता? बेबिलोन का गंदा शहर अंततः अपने अंत पर आ गया है; मनुष्य फिर से एक बिलकुल नए संसार से मिला है, और स्वर्ग और पृथ्वी परिवर्तित और नवीकृत कर दिए गए हैं।

जब मैं सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने प्रकट होता हूँ, तो आसमान में सफेद बादल घुमड़ने लगते हैं और मुझे घेर लेते हैं। इसी प्रकार, पृथ्वी पर वातावरण को उभारते पृथ्वी के पक्षी भी मेरे लिए आनंद के साथ गाते और नृत्य करते हैं, और इस प्रकार पृथ्वी की सभी चीज़ों के सजीव होने का कारण बनते हैं, ताकि वे अब और "धीरे-धीरे नीचे की ओर न बहें", बल्कि इसके बजाए जीवन-शक्ति से भरे हुए वातावरण के बीच जिएँ। जब मैं बादलों के मध्य होता हूँ, तो मनुष्य मेरे चेहरे और मेरी आँखों को धुँधले रूप में ही देखता है, और उस समय वह थोड़ा भयभीत अनुभव करता है। अतीत में उसने मुझसे संबंधित ऐतिहासिक अभिलेखों को किंवदंतियों में सुना था, जिसके परिणामस्वरूप वह मेरे प्रति केवल आधा विश्वासी है और बाकी आधा संदिग्ध है। वह नहीं जानता कि मैं कहाँ हूँ, या मेरा चेहरा आखिर कितना बड़ा है—वह समुद्र के समान विशाल है या हरे चरागाहों जितना असीम है? कोई इन चीज़ों को नहीं जानता। जब आज मनुष्य मेरा चेहरा बादलों में देखता है, केवल तभी वह महसूस करता है कि किंवदंती में वर्णित मैं वास्तविक हूँ, और इसलिए वह मेरे प्रति थोड़ा अधिक अनुकूल हो जाता है और यह केवल मेरे कर्मों के कारण है कि मेरे लिए उसकी प्रशंसा थोड़ी बढ़ जाती है। परंतु मनुष्य अभी भी मुझे नहीं जानता और वह बादलों में मेरा केवल एक ही अंश देखता है। उसके बाद मैं अपनी बाँहें फैलाता हूँ और उन्हें मनुष्य को दिखाता हूँ। मनुष्य आश्चर्यचकित हो जाता है, और मेरे हाथों मार गिराए जाने से अत्यधिक भयभीत होकर अचानक अपने हाथ अपने मुँह पर रख लेता है, और इस प्रकार वह अपनी प्रशंसा में थोड़ा आदर मिला देता है। मनुष्य इस बात से बेहद डरकर मेरी हर हलचल के ऊपर अपनी आँखें टिकाए रहता है, कि ध्यान न देने पर वह मेरे द्वारा मार न गिराया जाए—फिर भी मनुष्य द्वारा देखे जाने से मैं प्रतिबंधित नहीं होता, और मैं अपने हाथों के कार्यों को करना जारी रखता हूँ। यह केवल उन सभी कर्मों के कारण है, जिन्हें मैं करता हूँ, कि मनुष्य मेरे प्रति कुछ अनुकूल है, और इस कारण मुझसे जुड़ने के लिए धीरे-धीरे मेरे सामने आता है। मैं जब अपनी संपूर्णता में मनुष्य के सामने प्रकट होऊँगा, तो मनुष्य मेरा चेहरा देखेगा, और उसके बाद से मैं मनुष्य से अपने आपको और नहीं छिपाऊँगा या अव्यक्त नहीं करूँगा। संपूर्ण ब्रह्मांड में मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा, और रक्त और माँस से बने सभी प्राणी मेरे सभी कर्मों को देखेंगे। सभी आत्मावान लोग निश्चित ही मेरे परिवार में शांति से रहेंगे, और वे निश्चित रूप से मेरे साथ अद्भुत आशीषों का आनंद उठाएँगे। वे सभी, जिनकी मैं परवाह करता हूँ, निश्चित रूप से ताड़ना से बच जाएँगे, और निश्चित रूप से आत्मा की पीड़ा और देह की यंत्रणा से दूर रहेंगे। मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा और शासन करूँगा और सामर्थ्य का उपयोग करूँगा, ताकि लाशों की दुर्गंध संपूर्ण ब्रह्मांड में अब और न फैले; इसके बजाय मेरी मोहक सुगंध पूरे संसार में फैल जाएगी, क्योंकि मेरा दिन नज़दीक आ रहा है, मनुष्य जाग रहा है, पृथ्वी पर हर चीज़ व्यवस्थित है, और पृथ्वी के बचे रहने के दिन अब और नहीं रहे हैं, क्योंकि मैं पहुँच गया हूँ!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 29' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 67

मैं अपने कार्य की अभिव्यक्तियों से आकाश को भर दूँगा, ताकि पृथ्वी पर सब कुछ मेरी सत्ता के सामने दण्डवत हो जाए, "वैश्विक एकता" की मेरी योजना को कार्यान्वित करे और मेरी इस एक अभिलाषा को फलीभूत करे, और ताकि मानवजाति पृथ्वी पर और "भटके" नहीं बल्कि बिना विलम्ब के एक उपयुक्त मंजिल को पा ले। मैं हर तरह से मानव प्रजाति के लिए सोचता हूँ, इसे इस तरह से करता हूँ ताकि समस्त मानव जाति शीघ्र ही सुख-शांति के देश में रहने लगे, ताकि उनकी जिंदगी के दिन अब और दुःखी और वीरान न हों, और ताकि पृथ्वी पर मेरी योजना व्यर्थ न हो जाए। चूँकि मनुष्य वहाँ मौजूद है, इसलिए मैं पृथ्वी पर अपने देश का निर्माण करूँगा, क्योंकि मेरी महिमा की अभिव्यक्ति का एक हिस्सा पृथ्वी पर है। ऊपर स्वर्ग में, मैं अपने शहरों को सही रूप में स्थापित कर दूँगा और इस तरह, ऊपर और नीचे दोनों जगह सब कुछ नया बना दूँगा। स्वर्ग से ऊपर और नीचे दोनो ओर जो कुछ भी अस्तित्व में है, मैं उन सभी को एकजुट कर दूँगा, ताकि पृथ्वी की सभी चीज़ें, जो कुछ स्वर्ग में है उससे एकीकृत हो जाएँगी। यह मेरी योजना है, यही मैं अंतिम युग में करूँगा—मेरे कार्य के इस हिस्से में कोई भी हस्तक्षेप न करे! अन्य-जाति देशों में अपने कार्य का विस्तार करना पृथ्वी पर मेरे कार्य का अंतिम भाग है। जो कार्य मैं करूँगा, उसकी थाह लेने में कोई भी समर्थ नहीं है, और इसलिए लोग पूरी तरह से संभ्रमित हैं। और चूँकि मैं पृथ्वी पर अपने काम में व्यस्तता से संलग्न हूँ, इसलिए लोग "ऊपरी तौर से दिलचस्पी लेने" का अवसर ले लेते हैं। उन्हें बहुत उच्छृंखल होने से रोकने के लिए, मैंने सबसे पहले उन्हें आग की झील का अनुशासन भुगतने के लिए, अपनी ताड़ना में रखा है। यह मेरे कार्य का एक चरण है, और मैं अपने इस कार्य को पूरा करने के लिए आग की झील की शक्ति का उपयोग करूँगा, अन्यथा अपने कार्य को पूरा करना असंभव होगा। मैं सारे ब्रह्मांड के मनुष्यों से अपने सिंहासन के समक्ष समर्पण करवाऊँगा, अपने न्याय के अनुसार उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करूँगा, इन श्रेणियों के अनुसार उन्हें वर्गीकृत करूँगा, और आगे उन्हें उनके परिवारों में बाँट दूँगा, ताकि पूरी मानव जाति मेरी अवज्ञा करना बंद कर देगी, बल्कि मेरे द्वारा नामांकित की गई श्रेणियों के अनुसार एक साफ़-सुथरी और अनुशासित व्यवस्था में आ जाएगी—किसी को भी यूँ ही इधर-उधर भटकने नहीं दिया जाएगा! पूरे ब्रह्मांड में, मैंने नया कार्य किया है; पूरे ब्रह्मांड में, संपूर्ण मानवजाति मेरे अचानक प्रकट होने से घबराई हुई और अचंभित है, मेरी स्पष्ट उपस्थिति के सामने उनकी सीमाएँ इस तरह खंडित हो गई हैं जैसी कि पहले कभी नहीं हुई थी। क्या आज बिल्कुल ऐसा ही नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 43' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 68

मैं अपने कार्य को अन्य जाति देशों में फैला रहा हूँ। मेरी महिमा पूरे ब्रह्मांड में जगमगा रही है; मेरी इच्छा सितारे-सितारे-बिंदु-बिंदु लोगों में सन्निहित है, सबकी कमान मेरे हाथों में है और सब मेरे द्वारा सौंपे गए कार्य को करने में लगे हैं। इस समय से, मैं सभी मनुष्यों को दूसरी दुनिया लाते हुए एक नये युग में प्रवेश कर गया हूँ। जब मैं अपने "गृह-देश" में वापस लौटा, तो मैंने अपनी मूल योजना के कार्य का एक अन्य भाग शुरू किया, ताकि मनुष्य मुझे और गहराई से जान सके। मैं ब्रह्मांड पर उसके संपूर्ण रूप में विचार करता हूँ और देखता हूँ कि[क] यह मेरे कार्य के लिए एक उचित अवसर है, इसलिए मैं मनुष्य पर अपना नया कार्य करते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान आ-जा रहा हूँ। आखिरकार, यह एक नया युग है, और मैं ज़्यादा लोगों को नए युग में लेकर जाने के लिए और जिन्हें मैं हटाऊंगा उनमें से ज़्यादा लोगों को अलग कर देने के लिए, नए कार्य को लेकर आया हूँ। बड़े लाल अजगर के देश में, मैंने कार्य का एक चरण पूरा किया है, जिसकी थाह मनुष्य नहीं पा सकते हैं, जिसके कारण वे हवा में डोलते हैं, जिसके बाद कई लोग हवा के वेग में चुपचाप बह जाते हैं। सचमुच, यह एक "खलिहान" है जिसे मैं साफ़ करने वाला हूँ, यही मेरी लालसा है और यही मेरी योजना है। क्योंकि जब मैं कार्य कर रहा था तो कई दुष्ट लोग इसमें चोरी से शामिल हो गए थे, लेकिन मुझे उन लोगों को दूर करने की कोई जल्दी नहीं है। इसके बजाय, सही समय आने पर मैं उन्हें छिन्न-भिन्न कर दूंगा। केवल इसके बाद ही मैं जीवन का सोता बनूंगा, उन लोगों को जो मुझे सच में प्रेम करते हैं, मुझसे अंजीर के पेड़ का फल और कुमुदिनी की सुगंध प्राप्त करने दूँगा। उस देश में जहां शैतान का डेरा है, जो गर्दो-गुबार का देश है, जहां शुद्ध सोना नहीं, सिर्फ रेत ही रेत है, इन हालातों को समाने पाकर, मैं कार्य का ऐसा चरण पूरा करता हूँ। तुम्हें यह पता होना चाहिए कि मैं जो प्राप्त करता हूँ वह रेत नहीं बल्कि शुद्ध, परिष्कृत सोना है। दुष्ट मनुष्य मेरे घर में कैसे रह सकता है? मैं लोमड़ियों को अपने स्वर्ग में परजीवी कैसे बनने दे सकता हूँ। इन चीज़ों को दूर करने के लिए हर संभव तरीका अपनाता हूँ। मेरी इच्छा प्रकट होने से पहले, कोई भी यह नहीं जानता कि मैं क्या करने वाला हूँ। इस अवसर का लाभ उठाते हुए, मैं उन दुष्ट मनुष्यों को दूर करता हूँ, और वे मेरी उपस्थिति को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। मैं दुष्टों के साथ यही करता हूँ, लेकिन फिर भी उनके लिए एक ऐसा दिन होगा जब वे मेरे लिए सेवा कर पाएंगे। आशीष पाने की मनुष्यों की इच्छा बहुत तीव्र है; इसलिए मैं उनकी ओर घूम जाता हूँ और अन्यजाति को अपना भव्य मुखमंडल दिखाता हूँ, ताकि सभी मनुष्य अपनी ही दुनिया में जी सकें और अपने आपको आंक सकें। इस दौरान मैं वे वचन कहता जाता हूँ जो मुझे कहने चाहिए, और मनुष्य को वह सब कुछ देता हूँ जिनकी उन्हें आवश्यकता है। जब तक मनुष्य को होश आता है, मैं बहुत पहले अपने कार्य को फैला चुका होता हूँ। उसके बाद मैं मनुष्यों के सामने अपनी इच्छा व्यक्त करूंगा और मनुष्यों पर अपने कार्य का दूसरा भाग शुरू करूंगा, मैं सभी लोगों को बारीकी से अपना अनुसरण करने दूँगा ताकि वे मेरे कार्य के साथ तालमेल बना सकें। मैं मनुष्य को उसकी क्षमता के अनुसार वो सब करने दूँगा जिससे वे मेरे साथ उसकार्य को कर सकें जो मुझे करना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे' से उद्धृत

फुटनोट:

क. मूल पाठ में, "देखता हूँ कि" यह वाक्यांश नहीं है।

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 69

किसी को भी ऐसा विश्वास नहीं है कि वह मेरी महिमा को देख पाएगा, और मैं उन्हें मजबूर नहीं करूंगा, बल्कि मैं मनुष्य के बीच से अपनी महिमा को हटा लूंगा और इसे दूसरी दुनिया में ले जाऊँगा। जब मनुष्य एक बार फिर पश्चाताप करेगा, तब मैं अपनी महिमा को ज़्यादा से ज़्यादा आस्थावान लोगों को दिखाऊंगा। यही वह सिद्धांत है जिसके अनुसार मैं कार्य करता हूँ। क्योंकि एक समय ऐसा आएगा जब मेरी महिमा कनान को छोड़ देगी, और ऐसा समय भी आएगा जब मेरी महिमा चुने हुए लोगों को भी छोड़ देगी। इसके अलावा, एक समय ऐसा आएगा जब मेरी महिमा पूरी धरती को छोड़ देगी, जिससे यह धुंधली पड़ जाएगी और अंधकार के गर्त में डूब जाएगी। कनान की धरती को भी सूरज की रोशनी नहीं देखेगी; सभी लोग अपना विश्वास खो देंगे, लेकिन कोई भी कनान की धरती की सुगंध को छोड़ने का साहस नहीं कर पाएगा। जब मैं नये स्वर्ग और धरती में प्रवेश करूँगा, सिर्फ तभी मैं अपनी महिमा का दूसरा भाग लेकर इसे सबसे पहले कनान की धरती पर प्रकट करूंगा, जिससे रात के गहरे अंधकार में डूबी पूरी धरती पर एक रोशनी की चमक फ़ैल जाएगी और पूरी धरती प्रकाशमान हो जाएगी। इस प्रकाश की शक्ति से पूरी धरती के मनुष्यों को शक्ति प्राप्त करने दो, जिससे मेरी महिमा बढ़ सके और हर देश में नयी होकर प्रकट हो सके। पूरी इंसानियत को यह एहसास करने दो कि मैं बहुत पहले इंसानों की दुनिया में आ चुका हूँ और बहुत पहले अपनी महिमा को इज़राइल से पूरब में ला चुका हूँ; क्योंकि मेरी महिमा पूरब से चमकती है, जहां इसे अनुग्रह के युग से आज के दिन में लाया गया है। लेकिन यह इज़राइल ही था जहां से मैं गया था और वहीं से मैं पूरब में आया हूँ। जब पूरब का प्रकाश धीरे-धीरे सफ़ेद रोशनी में तब्दील होगा, तभी पूरी धरती का अंधकार प्रकाश में बदलना शुरू हो जाएगा, और तभी मनुष्य को यह पता चलेगा कि मैं बहुत पहले इज़राइल से जा चुका हूँ और नए सिरे से पूरब में उभर रहा हूँ। एक बार इज़राइल में अवतरित होने और फिर यहाँ से चले जाने के बाद, मैं दुबारा इज़राइल में पैदा नहीं हो सकता, क्योंकि मेरा कार्य पूरे ब्रह्मांड की अगुवाई करता है। यही नहीं, रोशनी सीधे पूरब से पश्चिम की ओर चमकती है। यही कारण है कि मैं पूरब में अवतरित हुआ हूँ और कनान को पूरब के लोगों तक लाया हूँ। मैं पूरी पृथ्वी के लोगों को कनान की धरती पर लाना चाहता हूँ, और इसलिए मैं कनान की धरती में लगातार वचन बोल रहा हूँ, ताकि पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकूं। इस समय, कनान के अलावा पूरी पृथ्वी पर अंधकार छाया है, सभी लोग भूख और ठंड के कारण संकट में हैं। मैंने अपनी महिमा इज़राइल को दी और फिर उसे हटा लिया, इसके बाद मैं इज़राइलियों के साथ-साथ पूरी इंसानियत को पूरब में ले आया। मैं उन सभी को प्रकाश में लेकर आया हूँ ताकि वे इसके साथ फिर से मिल जाएं और इससे जुड़े रह सकें, और उन्हें इसकी खोज न करनी पड़े। जो प्रकाश की खोज कर रहे हैं उन्हें मैं फिर से प्रकाश देखने दूंगा और उस महिमा को देखने दूंगा जो मेरे पास इज़राइल में थी; मैं उन्हें यह देखने दूंगा कि मैं बहुत पहले एक सफ़ेद बादल पर सवार होकर मनुष्यों के बीच आ चुका हूँ, मैं उन्हें असंख्य सफ़ेद बादल और प्रचुर मात्रा में फलों के समूह देखने दूंगा। यही नहीं, मैं उन्हें इज़राइल के यहोवा परमेश्वर को देखने दूंगा। मैं उन्हें यहूदियों के स्वामी, बहुप्रतीक्षित मसीहा को देखने दूंगा, और अपने पूर्ण प्रकटन को देखने दूंगा जिसे हर युग के राजाओं द्वारा सताया गया है। मैं संपूर्ण ब्रह्मांड पर कार्य करूंगा और मैं महान कार्य पूरा करूंगा, जो अंत के दिनों में लोगों के सामने मेरी पूरी महिमा और मेरे सारे कार्यों को प्रकट कर देगा। मैं अपना भव्य मुखमंडल संपूर्ण रूप में उन लोगों को दिखाऊंगा, जिन्होंने कई वर्षों से मेरी प्रतीक्षा की है, जो मुझे सफ़ेद बादल पर सवार होकर आते हुए देखने के लिए लालायित रहे हैं। मैं अपना यह रूप इज़राइल को दिखाऊंगा जिसने मेरे एक बार फिर प्रकट होने की लालसा की है। मैं उन सभी लोगों को अपना यह रूप दिखाउंगा जो मुझे कष्ट पहुंचाते हैं, ताकि सभी लोग यह जान सकें कि मैंने बहुत पहले ही अपनी महिमा को हटा लिया है और इसे पूरब में ले आया हूँ, जिस कारण यह अब यहूदिया में नहीं रही। क्योंकि अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं!

मैं पूरे ब्रह्मांड में अपना कार्य कर रहा हूँ, और पूरब से असंख्य गर्जनायें गूँज रही हैं, जो सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरी वाणी है जिसने वर्तमान में सभी मनुष्यों की अगुवाई की है। मैं अपनी वाणी से सभी मनुष्यों को जीत लूंगा, उन्हें इस धारा में बहाऊंगा और अपने सामने समर्पण करवाऊंगा, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा को वापस लेकर इसे नये सिरे से पूरब में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा को देखने के लिए लालायित नहीं है? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतज़ार नहीं कर रहा है? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी सुंदरता को देखने के लिए तरस नहीं रहा है? कौन प्रकाश में नहीं आना चाहता? कौन कनान की समृद्धि को नहीं देखना चाहता? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन महान सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आराधना नहीं करता है? मेरी वाणी पूरी पृथ्वी पर फ़ैल जाएगी; अपने चुने हुए लोगों के समक्ष, मैं चाहता हूँ कि मैं उनसे अधिक वचन बोलूँ। मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए और पूरी मानवजाति के लिए अपने वचन बोलता हूँ, उन शक्तिशाली गर्जनाओं की तरह जो पर्वतों और नदियों को हिला देते हैं। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य के लिए खज़ाना बन जाते हैं, और सभी मनुष्य मेरे वचनों का आनंद लेते हैं। बिजली पूरब से चमकते हुए सीधे पश्चिम की ओर जाती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उन्हें छोड़ नहीं पाता है और साथ ही उसकी थाह भी नहीं ले सकता है, लेकिन उनका अधिक से अधिक आनंद उठाता है। एक नवजात शिशु की तरह, सभी मनुष्य खुश और आनंद से भरे हैं और मेरे आने की खुशी मना रहे हैं। अपने वचनों के माध्यम से, मैं सभी मनुष्यों को अपने समक्ष लाऊंगा। उसके बाद, मैं औपचारिक तौर पर मनुष्य जाति में प्रवेश करूंगा ताकि वे मेरी आराधना कर सकें। मुझसे निकलने वाली महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों से, मैं ऐसा इंतजाम करूंगा कि सभी मनुष्य मेरे समक्ष आएंगे और देखेंगे कि बिजली पूरब से चमक रही है और मैं भी पूरब में "जैतून के पर्वत" पर उतर चुका हूँ। वे यह देखेंगे कि मैं बहुत पहले से पृथ्वी पर मौजूद हूँ, यहूदियों के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि पूरब की बिजली के रूप में। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं लोगों के बीच से जा चुका हूँ, और फिर महिमा के साथ लोगों के बीच प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अनगिनत साल पहले की गई थी, और मैं वह शिशु हूँ जिसे अनगिनत साल पहले इज़राइलियों ने त्याग दिया था। इसके अलावा, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सब लोग मेरे सिंहासन के सामने आएं और मेरे भव्य मुखमंडल को देखें, मेरी वाणी सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरी संपूर्ण इच्छा है; यही मेरी योजना का अंतिम पल और उसका चरम बिंदु है, यही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य है। सभी राष्ट्र मेरी आराधना करें, हर ज़बान मुझे स्वीकार करें, हर इंसान मुझमें अपनी आस्था दिखाए और हर इंसान मुझ पर भरोसा करे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 70

कई हज़ार सालों से, मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता के आगमन को देखने में सक्षम होने की लालसा की है। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता यीशु को देखने की इच्छा की है जब वह एक सफेद बादल पर सवार होकर स्वयं उन लोगों के बीच उतरता है जिन्होंने हज़ारों सालों से उसकी अभिलाषा की है और उसके लिए लालायित रहे हैं। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता की वापसी और लोगों के साथ उसके फिर से जुड़ने की लालसा की है, अर्थात्, उद्धारकर्त्ता यीशु के उन लोगों के पास वापस आने की लालसा की है जिनसे वह हज़ारों सालों से अलग रहा है। और मनुष्य आशा करता है कि वह एक बार फिर से छुटकारे के उस कार्य को करेगा जो उसने यहूदियों के बीच किया था, वह मनुष्य के प्रति करूणामय और प्रेममय होगा, मनुष्य के पापों को क्षमा करेगा, वह मनुष्य के पापों को वहन करेगा, और यहाँ तक कि वह मनुष्य के सभी अपराधों को वहन करेगा और मनुष्य को उसके पापों से मुक्त करेगा। वे उद्धारकर्त्ता यीशु के पहले के समान होने की लालसा करते हैं—ऐसा उद्धारकर्त्ता जो प्यारा, सौम्य और आदरणीय हो, जो मनुष्य के प्रति कभी भी कोप से भरा हुआ न हो, और जो कभी भी मनुष्य को धिक्कारता न हो। यह उद्धारकर्त्ता मनुष्य के सारे पापों को क्षमा करता है और उन्हें वहन करता है, और यहाँ तक कि एक बार फिर से मनुष्य के लिए सलीब पर अपनी जान देता है। जब से यीशु गया है, वे चेले जो उसका अनुसरण करते थे, और वे सभी संत जिन्हें उसके नाम के कारण बचाया गया था, सभी बेसब्री से उसकी अभिलाषा और इन्तज़ार कर रहे हैं। वे सभी जो अनुग्रह के युग के दौरान यीशु मसीह के अनुग्रह के द्वारा बचाए गए थे, वे अंत के दिनों के दौरान उस आनन्ददायक दिन की लालसा कर रहे हैं, जब उद्धारकर्त्ता यीशु सफेद बादल पर आता है और मनुष्य के बीच में प्रकट होता है। निस्संदेह, यह उन सभी लोगों की सामूहिक इच्छा भी है जो आज उद्धारकर्त्ता यीशु के नाम को स्वीकार करते हैं। विश्व भर में, वे सभी जो उद्धारकर्त्ता यीशु के उद्धार को जानते हैं वे सभी यीशु मसीह की अचानक वापसी के लिए बहुत ज़्यादा लालायित रहे हैं, ताकि पृथ्वी पर यीशु के वचन पूरे हों: "मैं जैसे गया था वैसे ही मैं वापस आऊँगा।" मनुष्य विश्वास करता है कि सलीब पर चढ़ने और पुनरूत्थान के बाद, यीशु सफेद बादल पर स्वर्ग में वापस चला गया, और उसने सर्वोच्च महान परमेश्वर के दाएँ हाथ पर अपना स्थान ग्रहण किया। मनुष्य कल्पना करता है कि उसी प्रकार, यीशु फिर से सफेद बादल पर सवार होकर (यह बादल उस बादल की ओर संकेत करता है जिस पर यीशु तब सवार हुआ था जब वह स्वर्ग में वापस गया था), उन लोगों के बीच वापस आएगा जिन्होंने हज़ारों सालों से उसके लिए बहुत अधिक लालसा रखी है, और यह कि वह यहूदियों का स्वरूप और उनके कपड़े धारण करेगा। मनुष्य के सामने प्रकट होने के बाद, वह उन्हें भोजन प्रदान करेगा, और उनके लिए जीवन के जल की बौछार करवाएगा, और मनुष्य के बीच में रहेगा, वह अनुग्रह और प्रेम से भरपूर, जीवन्त और वास्तविक होगा, इत्यादि। फिर भी उद्धारकर्त्ता यीशु ने ऐसा नहीं किया; उसने मनुष्य की कल्पना के विपरीत किया। वह उन लोगों के बीच में नहीं आया जिन्होंने उसकी वापसी की लालसा की थी, और वह सफेद बादल पर सवार होकर सभी मनुष्यों के सामने प्रकट नहीं हुआ। वह तो पहले से ही आ चुका है, किन्तु मनुष्य उससे अनभिज्ञ ही है, और उसके आगमन से अनजान बना हुआ है। मनुष्य केवल निरुद्देश्यता से उसका इन्तज़ार कर रहा है, इस बात से अनभिज्ञ कि वह तो पहले ही "सफेद बादल" (वह बादल जो उसका आत्मा, उसके वचन, उसका सम्पूर्ण स्वभाव और उसका स्वरूप है) पर उतर चुका है, और वह अब उन विजेताओं के समूह के बीच में है जिसे वह अंत के दिनों के दौरान बनाएगा। मनुष्य इसे नहीं जानता हैः यद्यपि पवित्र उद्धारकर्त्ता यीशु मनुष्य के प्रति स्नेह और प्रेम से भरपूर है, फिर भी वह अशुद्ध और अपवित्र आत्माओं से भरे "मन्दिरों" में कैसे कार्य कर सकता है? यद्यपि मनुष्य उसके आगमन का इन्तज़ार करता आ रहा है, फिर भी वह उनके सामने कैसे प्रकट हो सकता है जो अधर्मी का मांस खाते हैं, अधर्मी का रक्त पीते हैं, एवं अधर्मी के वस्त्र पहनते हैं, जो उस पर विश्वास तो करते हैं परन्तु उसे जानते नहीं हैं, और लगातार उससे जबरदस्ती माँगते रहते हैं? मनुष्य केवल यही जानता है कि उद्धारकर्त्ता यीशु प्रेम और करुणा से परिपूर्ण है, और वह एक पाप बलि है जो छुटकारे से भरपूर है। परन्तु मनुष्य को पता नहीं है कि वह स्वयं परमेश्वर भी है, जो धार्मिकता, प्रताप, कोप, और न्याय से लबालब भरा हुआ है, और अधिकार और गौरव से संपन्न है। और इस प्रकार यद्यपि मनुष्य छुटकारा दिलाने वाले की वापसी के लिए लालायित रहता है और अभिलाषा करता है, और यहाँ तक कि मनुष्य की प्रार्थनाओं से स्वर्ग भी द्रवित हो जाता है, फिर भी उद्धारकर्त्ता यीशु उन लोगों के सामने प्रकट नहीं होता है जो उस पर विश्वास तो करते हैं किन्तु उसे जानते नहीं हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 71

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है जो उसके प्रकटन को चाहते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किसकी प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है जो तुम खोजते हो? क्या तुम परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम उसके पदचिह्नों को खोज रहे हो? परमात्मा के दर्शन के लिए कोई कैसे लालायित होता है! और परमेश्वर के पदचिह्नों को पाना कितना कठिन है! इस तरह के युग में, इस तरह की दुनिया में, हमें उस दिन को देखने के लिए क्या करना चाहिए जिस दिन परमेश्वर प्रकट होता है? हमें परमेश्वर के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों से उन सभी का सामना होता है जो परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तुम लोगों ने उन सभी पर एक से अधिक अवसरों पर विचार किया है—लेकिन परिणाम क्या हुआ? परमेश्वर कहाँ दिखाई देता है? परमेश्वर के पदचिह्न कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को उत्तर मिल गया है? बहुत से लोग इस तरह से उत्तर देंगे: परमेश्वर उन सभी के बीच प्रकट होता है जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिह्न हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है! कोई भी एक सूत्र में बँधा उत्तर दे सकता है, किन्तु क्या तुम लोग समझते हो कि परमेश्वर के प्रकटन या उनके पदचिह्नों का क्या अर्थ है? परमेश्वर का प्रकटन व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य करने के लिए उसके पृथ्वी पर आगमन का संकेत करता है। अपनी स्वयं की पहचान और स्वभाव के साथ, और उस तरीके से जो उसके लिए जन्मजात है, वह एक युग का आरंभ करने और एक युग को समाप्त करने के कार्य का संचालन करने के लिए मनुष्यजाति में अवरोहण करता है। इस तरह का प्रकटन किसी समारोह का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तस्वीर, कोई चमत्कार या किसी प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और यह किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो बिल्कुल नहीं है। यह एक असली और वास्तविक तथ्य है जिसे किसी के द्वारा भी छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन बेमन से किसी कार्य को करने के लिये, या अल्पकालिक उपक्रम के लिए नहीं है; बल्कि, यह उसकी प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है। परमेश्वर का प्रकटन हमेशा सार्थक होता है और हमेशा उसकी प्रबंधन योजना से कुछ संबंध रखता है। यहाँ जिसे "प्रकटन" कहा गया है, वह उस प्रकार के "प्रकटन" से पूरी तरह से भिन्न है जिसमें परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन, अगुआई करता है और उसे प्रबुद्ध करता है। हर बार जब परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है तो वह अपने महान कार्य के एक चरण को कार्यान्वित करता है। यह कार्य किसी भी अन्य युग के कार्य से भिन्न होता है। यह मनुष्य के लिए अकल्पनीय है, और इसका मनुष्य द्वारा कभी भी अनुभव नहीं किया गया है। यह वह कार्य है जो एक नये युग का आरम्भ करता है और पुराने युग का समापन करता है, और यह मनुष्यजाति के उद्धार के कार्य का एक नया और बेहतर रूप है; इसके अलावा, यह वह कार्य है जो मनुष्यजाति को नए युग में लाता है। यही वह है जिसका संकेत परमेश्वर का प्रकटन करता है।

एक बार जब तुम लोग समझ जाते हो कि परमेश्वर के प्रकटन का क्या अर्थ है, तो तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्नों को कैसे खोजना चाहिए? इस प्रश्न को समझाना कठिन नहीं है: जहाँ कहीं भी परमेश्वर का प्रकटन होता है, वहाँ तुम्हें उसके पदचिह्न मिलेंगे। इस तरह की व्याख्या सीधी-सादी लगती है, किन्तु इसे कार्यान्वित करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि परमेश्वर स्वयं को कहाँ प्रकट करता है, इस बात को तो बहुत कम जानते हैं कि वह स्वयं को कहाँ प्रकट करने का इच्छुक है, या उसे स्वयं को कहाँ प्रकट होना चाहिए। कुछ लोग आवेगपूर्ण रूप से यह मान लेते हैं कि जहाँ भी पवित्र आत्मा कार्य पर है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। नहीं तो वे मानते हैं कि जहाँ भी आध्यात्मिक हस्तियाँ होती हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। नहीं तो वे मानते हैं कि जहाँ कहीं भी विख्यात लोग होते हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। फिलहाल, आओ हम इस बात को एक ओर कर दें कि ऐसी मान्यताएँ सही हैं या ग़लत। इस तरह के प्रश्न को समझाने के लिए, हमारे पास पहले एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए: हम परमेश्वर के पद चिह्नों की खोज कर रहे हैं। हम आध्यात्मिक हस्तियों की तलाश नहीं कर रहे हैं, हम विख्यात हस्तियों की खोज तो बिल्कुल नहीं कर रहे है; हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं। चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए यह हमें परमेश्वर की इच्छा, परमेश्वर के वचनों, उसके कथनों को तलाशने के योग्य बनाता है—क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर के द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं। जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में, तुम लोगों ने उन वचनों की उपेक्षा कर दी है कि "परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है।" और इसलिए, बहुत से लोग, सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते हैं कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं, और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो और भी कम स्वीकार करते हैं। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर के प्रकटन का मनुष्य की धारणाओं के साथ समन्वय नहीं किया जा सकता है, परमेश्वर मनुष्य के आदेश पर तो बिल्कुल प्रकट नहीं हो सकता। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसे उसके बारे में मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, वह अपने कार्य के बारे में किसी भी व्यक्ति को सूचित तो बिल्कुल नहीं करता। परमेश्वर के इस स्वभाव को हर व्यक्ति को पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकटन को देखने, परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करने की इच्छा रखते हो, तो तुम लोगों को सबसे पहले अपनी धारणाओं को त्याग देना चाहिए। तुम लोगों को यह माँग करनी ही नहीं चाहिए कि परमेश्वर ऐसा या वैसा करे, तुम्हें उसे अपनी सीमाओं और अपनी अवधारणाओं तक सीमित नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, तुम्हें पूछना चाहिए कि तुम लोगों को परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश कैसे करनी है, तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन को कैसे स्वीकार करना है, और तुम्हें परमेश्वर के नए कार्य के प्रति कैसे समर्पण करना है; मनुष्य को ऐसा ही करना चाहिए। चूँकि मनुष्य सत्य नहीं है, और सत्य को धारण नहीं करता है, इसलिए उसे खोजना, स्वीकार करना, और आज्ञापालन करना चाहिए।

इस बात की परवाह किए बिना कि तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश हो या किसी अन्य देश के हो, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से परमेश्वर के कार्य को देखना चाहिए। इस तरह, तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि आजकल, बहुत से लोगों की धारणा है कि यह असंभव है कि परमेश्वर किसी विशेष राष्ट्र में या कुछ निश्चित लोगों के बीच दिखाई देगा। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन महत्व है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है! मनुष्य की धारणाएँ और सोच संभवतः उन्हें कैसे माप सकती हैं? और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। केवल इस प्रकार से ही तुम अपनी धारणाओं से विवश नहीं होगे; केवल इस प्रकार से ही तुम परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत करने के योग्य होगे। अन्यथा, तुम शाश्वत अंधकार में रहोगे, और कभी भी परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त नहीं करोगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 72

परमेश्वर संपूर्ण मानव जाति का परमेश्वर है। वह स्वयं को किसी भी राष्ट्र या लोगों की निजी संपत्ति नहीं मानता है, बल्कि जैसी उसने योजना बनायी है उसके अनुसार वह, किसी भी रूप, राष्ट्र या लोगों द्वारा विवश हुए बिना, कार्य को करता जाता है। शायद तुमने इस रूप की कभी कल्पना भी न की हो, या शायद इस रूप के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण इनकार करने वाला हो, या शायद वह देश जहाँ परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है और जिन लोगों के बीच वह स्वयं को प्रकट करता है, वे सब ऐसे हों जिनके साथ सभी के द्वारा भेदभाव किया जाता हो और वे सब ऐसे हों जो पृथ्वी पर सर्वाधिक पिछड़े हुए हों। फिर भी परमेश्वर के पास अपनी बुद्धि है। अपनी महान सामर्थ्य के साथ, और अपने सत्य और स्वभाव के माध्यम से, उसने वास्तव में ऐसे लोगों के समूह को प्राप्त कर लिया है जो उसके साथ एक मन वाले हैं, ऐसे लोगों का समूह जिसे वह पूर्ण बनाने की कामना करता है—उसके द्वारा विजित समूह, जो सभी प्रकार के परीक्षणों, क्लेशों और उत्पीड़न को सहन करके, अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है। किसी भी रूप या राष्ट्र की विवशताओं से मुक्त, परमेश्वर के प्रकटन का लक्ष्य, उसे अपने द्वारा बनाई गई योजना के अनुसार कार्य को पूरा करने में सक्षम बनाना है। यह वैसा ही है जैसे जब परमेश्वर यहूदिया में देह बना, तब उसका लक्ष्य समस्त मानव जाति को छुड़ाने के लिये सलीब पर चढ़ने के कार्य को पूरा करना था। फिर भी यहूदियों का मानना था कि परमेश्वर के लिए ऐसा करना असंभव है, और उन्हें यह असंभव लगता था कि परमेश्वर देह बन सकता है और प्रभु यीशु के रूप को ग्रहण कर सकता है। उनका "असंभव" वह आधार बन गया जिस पर उन्होंने परमेश्वर की निंदा और उसका विरोध किया, और अंततः इस्राएल को विनाश की ओर ले गया। आज, कई लोगों ने उसी तरह की ग़लती की है। वे अपनी समस्त शक्ति के साथ परमेश्वर के आसन्न प्रकटन की घोषणा करते हैं, मगर साथ ही उसके प्रकटन की निंदा भी करते हैं; उनका "असंभव" परमेश्वर के प्रकटन को एक बार और उनकी कल्पना की सीमा के भीतर सीमित कर देता है। और इसलिए मैंने कई लोगों को परमेश्वर के वचनों के आने के बाद जँगली और कर्कश हँसी का ठहाका लगाते देखा है। लेकिन क्या यह हँसी यहूदियों की निंदा और ईशनिंदा से किसी तरह से भिन्न है? सच्चाई की उपस्थिति तुम लोगों को श्रद्धावान नहीं बनाती, सच्चाई के लिए तरसने की तुम लोगों की प्रवृत्ति तो और भी कम है। तुम बस इतना ही करते हो कि लापरवाही से छानबीन करते हो और बेपरवाह जिंदादिली के साथ प्रतीक्षा करते हो। इस तरह से छानबीन और प्रतीक्षा करने से तुम्हें क्या फायदा हो सकता है? क्या ऐसा हो सकता है कि तुम परमेश्वर का व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करोगे? यदि तुम परमेश्वर के कथनों को नहीं समझ सकते, तो तुम किस तरह से परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हो? जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य व्यक्त होता है, और वहाँ परमेश्वर की वाणी होगी। केवल वे लोग ही परमेश्वर की वाणी को सुन पाएँगे जो सत्य को स्वीकार कर सकते हैं, और केवल इस तरह के लोग ही परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को एक ओर रख दो! शांत हो जाओ और इन शब्दों को सावधानीपूर्वक पढ़ो। यदि तुम सच्चाई के लिए तरसते हो, तो परमेश्वर तुम्हें प्रबुद्ध करेगा और तुम उसकी इच्छा और उसके वचनों को समझोगे। "असंभव" के बारे में तुम लोग अपनी राय को अलग रखो! लोग जितना अधिक मानते हैं कि कुछ असंभव है, उतना ही अधिक होने की संभावना होती है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से ऊँची उड़ान भरती है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से ऊँचे हैं, और परमेश्वर का कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमाओं से परे जाता है। जितना अधिक कुछ असंभव होता है, उतना ही अधिक उसमें सच्चाई होती है जिसे खोजा जा सकता है; कोई चीज़ मनुष्य की धारणा और कल्पना से जितनी अधिक परे रहती है, उसमें परमेश्वर की इच्छा उतनी ही अधिक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भले ही वह स्वयं को कहीं भी प्रकट क्यों न करता हो, परमेश्वर तब भी परमेश्वर है, और उसके प्रकटन के स्थान या तरीके की वजह से उसका सार कभी नहीं बदलेगा। परमेश्वर के पदचिह्न चाहे कहीं भी हों उसका स्वभाव वैसा ही बना रहता है, और चाहे परमेश्वर के पदचिह्न कहीं भी क्यों न हों, वह समस्त मनुष्यजाति का परमेश्वर है, ठीक वैसे ही जैसे कि प्रभु यीशु न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, बल्कि वह एशिया, यूरोप और अमेरिका के सभी लोगों का, और इससे भी अधिक समस्त ब्रह्मांड का एकमात्र परमेश्वर है। तो आओ हम परमेश्वर की इच्छा की खोज करें और उसके कथनों में उसके प्रकटन की खोज करें, और उसके पदचिह्नों के साथ तालमेल रखें! परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है। उसके वचन और उसका प्रकटन समकालिक रूप से विद्यमान रहते हैं, उसका स्वभाव और पदचिह्न मनुष्यजाति के लिए हर समय खुले हैं। प्यारे भाइयो और बहनो, मुझे आशा है कि इन वचनों में तुम लोग परमेश्वर के रूप को देख सकते हो, और यह कि तुम उसके पदचिह्नों का अनुसरण करना शुरू कर सकते हो जब तुम एक नए युग में आगे बढ़ते हो, और उस सुंदर नए स्वर्ग और पृथ्वी में प्रवेश करते हो जिसे परमेश्वर ने उन लोगों के लिए तैयार किया है जो उसके प्रकटन का इंतजार करते हैं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 73

परमेश्वर मौन है, और हमारे सामने कभी प्रकट नहीं हुआ, फिर भी उसका काम कभी नहीं रुका है। वह पूरी पृथ्वी पर निगाह रखता है, हर चीज़ पर नियंत्रण रखता है, और मनुष्य के सभी वचनों और कर्मों को देखता है। उसका प्रबंधन नपे-तुले चरणों में, उसकी योजना के अनुसार होता है। यह चुपचाप, नाटकीय प्रभाव के बिना आगे बढ़ता है, मगर उसके चरण मनुष्यों के निकट बढ़ते ही रहते हैं, और उसका न्याय का आसन बिजली की रफ्तार से ब्रह्माण्ड में तैनात होता है, और उसके तुरंत बाद हमारे बीच उसके सिंहासन का अवरोहण होता है। वह कैसा आलीशान दृश्य है, कितनी भव्य और गंभीर झाँकी! कपोत के समान, गरजते हुए सिंह के समान, पवित्र आत्मा हम सब के बीच में पहुँचता है। वह बुद्धिमान है, वह धार्मिकता है, वह और प्रताप है, वह अधिकार से युक्त और प्रेम एवं करुणा से भरा हुआ, चुपचाप हमारे बीच में पहुँचता है। कोई उसके आगमन के बारे में नही जानता, कोई उसके आगमन का स्वागत नहीं करता, और इसके अलावा, कोई नहीं जानता है कि वह और क्या-कुछ करेगा। मनुष्य का जीवन अपरिवर्तित रहता है; उसका हृदय भिन्न नहीं है, और दिन सामान्य दिनों के समान बीतते जाते हैं। परमेश्वर हमारे बीच एक साधारण मानव के समान, एक अत्यधिक महत्वहीन अनुयायी और एक साधारण विश्वासी के रूप में रहता है। उसके अपने काम हैं, उसके अपने लक्ष्य हैं, और इससे बढ़कर, उसमें ईश्वरत्व है जो साधारण मनुष्यों में नहीं है। किसी ने भी उसके ईश्वरत्व के अस्तित्व पर ध्यान नहीं दिया, और कोई भी उसके सार और मनुष्य के सार के बीच का अंतर नहीं समझा है। हम उसके साथ, बिना किसी बंधन और भय के, एक साथ रहते हैं, क्योंकि हम उसे एक महत्वहीन विश्वासी से अधिक नही समझते हैं। वह हमारी प्रत्येक गति को देखता है, और हमारे सभी विचार और अवधारणाएँ उसके सामने बेपर्दा हैं। उसके अस्तित्व में कोई रुचि नहीं लेता है, किसी को भी उसके कार्य के बारे में कोई कल्पना नहीं हैं, और इससे भी बढ़कर, किसी को उसके बारे में रत्ती भर भी संदेह नहीं है कि वह कौन है। हम केवल अपने-अपने काम में लगे रहते हैं मानो उसे हमसे कुछ लेना देना नहीं है ...

संयोगवश, पवित्र आत्मा उसके "माध्यम से" वचनों का एक अंश व्यक्त करता है, और यद्यपि यह अनपेक्षित महसूस हो, तब भी हम समझ जाते हैं कि यह परमेश्वर का कथन है, और हम तुरन्त उसे परमेश्वर की ओर से मानकर स्वीकार कर लेते हैं। ऐसा इसलिये है क्योंकि इस बात की परवाह किए बिना कि कौन इन वचनों को व्यक्त करता है, जब ये वचन पवित्र आत्मा से आते हैं, तो हमें उन्हें स्वीकार करना चाहिए, हम उन्हें नकारते नहीं हैं। अगला कथन मेरे माध्यम से हो सकता है, तुम्हारे माध्यम से हो सकता है, या उसके माध्यम से हो सकता है। कोई भी हो, सब परमेश्वर का अनुग्रह है। परन्तु बोलने वाला व्यक्ति चाहे जो भी हो, हमें उसकी आराधना नहीं करनी चाहिए क्योंकि चाहे कुछ भी हो, वह संभवतः परमेश्वर नहीं हो सकता है; हम ऐसे किसी भी साधारण मनुष्य को अपना परमेश्वर नहीं चुन सकते। हमारा परमेश्वर बहुत महान और सम्माननीय है; ऐसा कोई महत्वहीन व्यक्ति उसकी जगह कैसे ले सकता है? इससे ज्यादा और क्या, कि हम सब परमेश्वर के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि वह आकर हमें वापस स्वर्ग के राज्य में ले जाए। इसलिये कोई भी ऐसा महत्वहीन व्यक्ति कैसे इतने महत्वपूर्ण और कठिन कार्य को करने के योग्य हो सकता है? यदि प्रभु दोबारा आता है, तो उसे, सफ़ेद बादल पर आना चाहिए ताकि सब लोग उसे देख सकें। वह कितना महिमामय होगा! यह कैसे संभव है कि वह चुपचाप साधारण मनुष्यों के समूह में छिप जाए?

और तब भी यही वह साधारण मनुष्य है जो लोगों के बीच में छुपा हुआ है, जो हमें बचाने के नये काम को कर रहा है। वह हमें कोई सफाई नहीं देता, और न यह बताता है कि वह क्यों आया है। वह केवल उस काम को करता है जिसे वह नपे-तुले चरणों में, और अपनी योजना के अनुसार, करने का इरादा रखता है। उसके वचन और कथन अब बार-बार सुनाई देते हैं। सांत्वना देने, उत्साह बढ़ाने, स्मरण कराने, चेतावनी देने, से लेकर डाँटने-फटकारने, और अनुशासित करने तक; ऐसे स्वर जो नरम और दयालु हैं से ले कर, ऐसे वचनों तक जो भयंकर और प्रतापी हैं—वे सब मनुष्य में तरस और कँपकँपी दोनों भरते हैं। उसकी हर बात हमारे अंदर गहरे छिपे रहस्यों पर सीधे चोट करती है, उसके वचन हमारे हृदयों में डंक मारते हैं, हमारी आत्माओं पर डंक मारते हैं, हमें लज्जित और अपमानित कर देते हैं, हम सोच नहीं पाते कि कहाँ मुँह छिपाएँ। हम सोचने लगते हैं कि इस व्यक्ति के हृदय का परमेश्वर हमसे वास्तव में प्रेम करता भी है या नहीं, और वह वास्तव में उसका इरादा क्या है। शायद ऐसी पीड़ा सहने के बाद ही हमारा स्वर्गारोहण किया जा सके? हम अपने मस्तिष्क में गणनाएँ कर रहे हैं ... आने वाली मंजिल की, और अपने भविष्य की नियति की। फिर भी हममें से कोई विश्वास नहीं करता कि हमारे बीच में कार्य करने के लिये परमेश्वर ने पहले ही देहधारण कर लिया है और करता है। भले वह बहुत लंबे समय तक हमारे बीच में रहा है, भले ही उसने आमने-सामने हम से पहले कितने ही वचन बोले हैं, तब भी हम इतने साधारण व्यक्ति को अपने भविष्य का परमेश्वर स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, और ऐसे किसी महत्वहीन व्यक्ति को हम अपने भविष्य का नियंत्रण और नियति सौंपने को तो बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। उससे हम जीवन के जल की अंतहीन आपूर्ति का आनंद लेते हैं, और उसके कारण हम परमेश्वर के आमने-सामने रहते हैं। फिर भी हम केवल स्वर्ग में प्रभु यीशु के अनुग्रह के लिए धन्यवाद देते हैं, लेकिन हमने कभी भी इस साधारण व्यक्ति की भावनाओं पर ध्यान नहीं दिया जो ईश्वरत्व से युक्त है। फिर भी, वह विनम्रता से अपने देह में छिपे रह कर, अपने कार्य में लगा रहता है, अपने अंतर्मन की वाणी को व्यक्त करता है, मानो वह इंसान की अस्वीकृति से बेख़बर हो, मानो उसने इंसान के बचपने और अज्ञानता को अनंतकाल के लिए क्षमा कर दिया हो, और अपने प्रति इंसान के अनादर के बारे में सदैव के लिये सहिष्णु हो गया।

हमारी जानकारी के बिना, इस महत्वहीन व्यक्ति ने, परमेश्वर के कार्य में हर कदम पर हमारी अगुवाई की है। हम अनगिनत परीक्षणों से गुजरते हैं, अनगिनत ताड़नाएँ सहते हैं और मृत्यु द्वारा हमारी परीक्षा ली जाती है। हम परमेश्वर के धार्मिक और प्रतापी स्वभाव के बारे में समझ हासिल करते हैं, उसके प्रेम और करुणा का आनंद लेते हैं; परमेश्वर के महान सामर्थ्य और विवेक की सराहना करते हैं, परमेश्वर की सुंदरता के गवाह बनते हैं, और मनुष्य को बचाने की परमेश्वर की उत्कट इच्छा को देखते हैं। इस साधारण मनुष्य के वचनों में, हमें परमेश्वर का स्वभाव और सार ज्ञात हो जाता है; परमेश्वर की इच्छा समझ जाते हैं, हमें मनुष्य की प्रकृति और उसका सार ज्ञात हो जाता है, हम उद्धार और पूर्ण होने का मार्ग जान जाते हैं। उसके वचन हमारी मृत्यु का कारण बनते हैं, और हमारे पुनर्जन्म का कारण भी बनते हैं; उसके वचन हमें दिलासा देते हैं, मगर हमें ग्लानि और कृतज्ञता की भावना के साथ बर्बाद भी कर देते हैं; उसके वचन हमें आनंद और शांति देते हैं, परंतु अपार पीड़ा भी देते हैं। कभी-कभी हम उसके हाथों में वध हेतु मेम्नों के समान होते हैं, कभी-कभी उसकी आँख के तारे के समान होते हैं, और उसके प्रेम एवं स्नेह का आनंद उठाते हैं; कभी-कभी हम उसके शत्रु के समान होते हैं, उसकी आँखों के क्रोध से भस्म हो जाते हैं। हम उसके द्वारा बचायी गई मानवजाति हैं, हम उसकी दृष्टि में भुनगे हैं, और हम खोई हुई भेड़ें हैं जिन्हें ढूँढने में वह दिन और रात लगा रहता है। वह हम पर दया करता है, वह हमसे नफ़रत करता है, वह हमें ऊपर उठाता है, वह हमें दिलासा देता है और प्रोत्साहित करता है, वह हमारा मार्गदर्शन करता है, वह हमें प्रबुद्ध करता है, वह हमें ताड़ना देता है और हमें अनुशासित करता है, और वह हमें श्राप भी देता है। वह रात-दिन हमारी चिंता करता है, वह रात-दिन हमारी सुरक्षा और परवाह करता है, वह हमारा साथ कभी नहीं छोड़ता, और वह देखभाल हमारे लिए अपने हृदय का रक्त बहा देता है और कोई भी कीमत चुकाता है। इस छोटी और साधारण-सी देह के वचनों में, हमने परमेश्वर की संपूर्णता का आनंद लिया है, और उस मंजिल को देखा है जो परमेश्वर ने हमें प्रदान की है। इसके बावजूद, थोथा घमंड अभी भी हमारे दिलों को परेशान करता है, और हम अब भी ऐसे किसी व्यक्ति को अपने परमेश्वर के रूप में स्वीकार करने के लिए सक्रिय रूप से तैयार नहीं हैं। यद्यपि उसने हमें बहुत अधिक दिव्य-भोजन (मन्ना), बहुत अधिक आनंद दिया है, किंतु इनमें से कुछ भी हमारे हृदय में प्रभु का स्थान नहीं ले सकता है। हम इस व्यक्ति की विशिष्ट पहचान और हैसियत का आदर बड़ी अनिच्छा से करते हैं। यदि वह हम से यह नहीं कहता है कि हम उसे परमेश्वर स्वीकार करें, तो हम उसे शीघ्र आने वाले परमेश्वर के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेंगे। जबकि वह हमारे बीच में बहुत लंबे समय से काम करता आ रहा है।

परमेश्वर के कथन लगातार चल रहे हैं और वह विभिन्न तरीकों और परिप्रेक्ष्यों का उपयोग करके हमें चेतावनी देता है कि हम क्या करें, साथ ही अपने हृदय की वाणी को भी व्यक्त करता है। उसके वचनों में जीवन की सामर्थ्य है, उसके वचन हमें वह मार्ग दिखाते हैं जिन पर हमें चलना चाहिए, और हमें समझाते हैं कि सत्य क्या है। हम उसके वचनों की ओर खिंचना शुरू कर देते हैं, हम उसके लहजे और तरीके पर ध्यान केंद्रित करने लगते हैं और अवचेतन मन में इस साधारण व्यक्ति के हृदय की वाणी में रुचि लेना आरंभ कर देते हैं। हमारी मंज़िल और उद्धार के लिए, वह हमारे लिए श्रमसाध्य प्रयास करता है, नींद और भोजन गँवा देता है, हमारे लिए रोता है, हमारे लिए आहें भरता है, हमारे लिए बीमारी में कराहता है, अपमान सहता है, और हमारी संवेदनहीनता और विद्रोहीपन के कारण उसका हृदय लहूलुहान होता है और आँसू बहाता है; उसका यह व्यक्तित्व और तरीका एक साधारण मनुष्य से बढ़ कर है, और कोई भी भ्रष्ट मनुष्य उन्हें धारण कर या पा नहीं सकता है। उसमें जो सहनशीलता और धैर्य है, वह किसी साधारण मनुष्य में नहीं हो सकता, और उसके जैसा प्रेम भी किसी सृजित प्राणी में नहीं हो सकता। उसके अलावा अन्य कोई भी हमारे विचारों को नहीं जान सकता, या हमारे स्वभाव और सार को नहीं समझ सकता, या मानवजाति के विद्रोहीपन और भ्रष्टता का न्याय नहीं कर सकता, या इस तरह से स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से हमसे बातचीत या हमारे बीच में कार्य नहीं कर सकता। उसके अलावा अन्य किसी में परमेश्वर का अधिकार, विवेक और प्रतिष्ठा नहीं है; उसमें परमेश्वर का स्वभाव और उसके पास क्या है और जो वह है, अपनी संपूर्णता में, प्रवाहित होते हैं। उसके अलावा अन्य कोई हमें मार्ग नहीं दिखा सकता या प्रकाश की ओर नहीं ले जा सकता। उसके अलावा कोई अन्य परमेश्वर के उन रहस्यों को प्रकट नहीं कर सकता जिन्हें परमेश्वर ने सृष्टि के आरंभ से अब तक प्रकट नहीं किया है। उसके अलावा कोई अन्य हमें शैतान के बंधन और हमारे भ्रष्ट स्वभाव से बचा नहीं सकता। वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है और परमेश्वर के हृदय की वाणी, परमेश्वर के सभी प्रोत्साहनों, और मनुष्यजाति के प्रति परमेश्वर के न्याय के सभी वचनों को व्यक्त करता है। उसने एक नया युग, एक नया काल आरंभ किया है, वह एक नया स्वर्ग और पृथ्वी, नया काम लाया है, वह हमारे लिए नई आशा लाया है, हमारे उस जीवन का अंत किया है जिसे हम अस्पष्टता में जी रहे थे, और हमें उद्धार के मार्ग को पूरी स्पष्टता से दिखाया है। उसने हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को जीता है, हमारे हृदयों को जीता है। उस क्षण से, हमारे मन सचेत हो गए हैं, और हमारी आत्माएँ पुर्नजीवित होती हुई प्रतीत होने लगी हैं: यह साधारण, महत्वहीन व्यक्ति, जो हमारे बीच में रहता है, जिसे हमने लंबे समय तक तिरस्कृत किया है—क्या वह प्रभु यीशु नहीं हैं; जो सोते-जागते हमारे विचारों में रहता है और जिसके लिए हम रात-दिन लालायित रहते हैं? यह वही है! यह वास्तव में वही है! वह हमारा परमेश्वर है! वह सत्य, मार्ग, और जीवन है! उसी ने हमें फिर से जीने और ज्योति देखने लायक बनाया है, हमारे हृदयों को भटकने से रोका है। हम परमेश्वर के घर में लौट आए हैं, हम उसके सिंहासन के सामने लौट आए हैं, हम उसके आमने-सामने हैं, हमने उसका मुखमंडल देखा है, और आगे का मार्ग देखा है। इस समय हमारे हृदयों को परमेश्वर ने पूरी तरह से जीत लिया है, अब हमें संदेह नहीं है कि वह कौन है, अब हम उसके कार्य और वचन का विरोध नहीं करते, अब हम उसके सामने पूरी तरह से नतमस्तक हो गए हैं। अब हम अपना शेष जीवन परमेश्वर के पद चिन्हों का अनुसरण करने में लगाना चाहते हैं, और उसके द्वारा पूर्ण किए जाने, उसके अनुग्रह का बदला चुकाने, हमारे प्रति उसके प्रेम का बदला चुकाने, उसके आयोजनों और व्यवस्थाओं का पालन करने, उसके कार्य में सहयोग करने, और वह सब कार्य पूरा करने में लगाना चाहते हैं जो वह हमें सौंपता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 74

परमेश्वर और मनुष्य को समान नहीं कहा जा सकता। परमेश्वर का सार और कार्य मनुष्य के लिए सर्वाधिक अथाह और समझ से परे है। यदि परमेश्वर मनुष्यों के संसार में व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य न करे और अपने वचन न कहे, तो मनुष्य कभी भी परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझ पाएगा। और इसलिए वे लोग भी, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन परमेश्वर को समर्पित कर दिया है, उसका अनुमोदन प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे। यदि परमेश्वर कार्य कार्य करने के लिए तैयार न हो, तो मनुष्य चाहे कितना भी अच्छा क्यों न करे, वह सब शून्य होगा, क्योंकि परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से सदैव ऊँचे रहेंगे, और परमेश्वर की बुद्धि मनुष्य की समझ से परे है। और इसीलिए मैं कहता हूँ कि जो लोग परमेश्वर और उसके काम को "पूरी तरह से समझने" का दावा करते करते हैं, वे सब मूर्ख हैं, अभिमानी और अज्ञानी हैं। मनुष्य को परमेश्वर के कार्य को परिभाषित नहीं करना चाहिए; बल्कि मनुष्य परमेश्वर के कार्य को परिभाषित नहीं कर सकता। परमेश्वर की दृष्टि में मनुष्य इतना महत्त्वहीन है, जितनी कि चींटी; तो फिर वह परमेश्वर के कार्य की थाह कैसे पा सकता है? जो लोग गंभीरतापूर्वक यह कहना पसंद करते हैं, "परमेश्वर इस तरह से या उस तरह से कार्य नहीं करता," या "परमेश्वर ऐसा है या वैसा है"—क्या वे अहंकारपूर्वक नहीं बोलते? हम सबको जानना चाहिए कि मनुष्य, जो कि शरीरधारी है, शैतान द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है। मनुष्य की प्रकृति ही है परमेश्वर का विरोध करना। मनुष्य परमेश्वर के समान नहीं हो सकता, परमेश्वर के कार्य के लिए परामर्श देने की उम्मीद तो वह बिलकुल भी नहीं कर सकता। जहाँ तक इस बात का संबंध है कि परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन कैसे करता है, तो यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। यह उचित है कि इस या उस विचार की डींग हाँकने के बजाय मनुष्य को समर्पण करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य धूल मात्र है। चूँकि हमारा इरादा परमेश्वर की खोज करने का है, इसलिए हमें परमेश्वर के विचार के लिए उसके कार्य पर अपनी धारणाएँ नहीं थोपनी चाहिए, और जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए अपने भ्रष्ट स्वभाव को उसके चरम रूप में नियोजित तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। क्या ऐसा करना हमें मसीह-विरोधी नहीं बनाएगा? ऐसे लोग परमेश्वर में विश्वास कैसे कर सकते हैं? चूँकि हम विश्वास करते हैं कि परमेश्वर है, और चूँकि हम उसे संतुष्ट करना और उसे देखना चाहते हैं, इसलिए हमें सत्य के मार्ग की खोज करनी चाहिए, और परमेश्वर के अनुकूल रहने का मार्ग तलाशना चाहिए। हमें परमेश्वर के कड़े विरोध में खड़े नहीं होना चाहिए। ऐसे कार्यों से क्या भला हो सकता है?

आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है। हो सकता है, तुम इन वचनों को स्वीकार न कर पाओ और वे तुम्हें अजीब लगें, पर मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम अपनी स्वाभाविकता प्रकट मत करो, क्योंकि केवल वे ही सत्य को पा सकते हैं, जो परमेश्वर के समक्ष धार्मिकता के लिए सच्ची भूख-प्यास रखते हैं, और केवल वे ही परमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध किए जा सकते हैं और उसका मार्गदर्शन पा सकते हैं, जो वास्तव में धर्मनिष्ठ हैं। परिणाम संयम और शांति के साथ सत्य की खोज करने से मिलते हैं, झगड़े और विवाद से नहीं। जब मैं यह कहता हूँ कि "आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है," तो मैं परमेश्वर के देह में लौटने की बात कर रहा हूँ। शायद ये वचन तुम्हें व्याकुल न करते हों; शायद तुम इनसे घृणा करते हो; या शायद ये तुम्हारे लिए बड़े रुचिकर हों। चाहे जो भी मामला हो, मुझे आशा है कि वे सब, जो परमेश्वर के प्रकट होने के लिए वास्तव में लालायित हैं, इस तथ्य का सामना कर सकते हैं और इसके बारे में झटपट निष्कर्षों पर पहुँचने के बजाय इसकी सावधानीपूर्वक जाँच कर सकते हैं; बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसा ही करना चाहिए।

ऐसी चीज़ की जाँच-पड़ताल करना कठिन नहीं है, परंतु इसके लिए हममें से प्रत्येक को इस सत्य को जानने की ज़रूरत है : जो देहधारी परमेश्वर है, उसके पास परमेश्वर का सार होगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, उसके पास परमेश्वर की अभिव्यक्ति होगी। चूँकि परमेश्वर ने देह धारण की है, इसलिए वह उस कार्य को सामने लाएगा, जो वह करना चाहता है, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण की है, इसलिए वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और वह मनुष्य के लिए सत्य को लाने, उसे जीवन प्रदान करने और उसे मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस देह में परमेश्वर का सार नहीं है, वह निश्चित रूप से देहधारी परमेश्वर नहीं है; इस में कोई संदेह नहीं। अगर मनुष्य यह पता करना चाहता है कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, तो इसकी पुष्टि उसे उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव और उसके द्वारा बोले गए वचनों से करनी चाहिए। दूसरे शब्दों में, व्यक्ति को इस बात का निश्चय, कि यह देहधारी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, उसके सार से करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने की कुंजी, कि यह देहधारी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, उसके बाहरी स्वरूप के बजाय उसके सार (उसका कार्य, उसके कथन, उसका स्वभाव और कई अन्य पहलू) में निहित है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी स्वरूप की ही जाँच करता है, और परिणामस्वरूप उसके सार की अनदेखी करता है, तो इससे उसके अनाड़ी और अज्ञानी होने का पता चलता है। बाहरी स्वरूप सार का निर्धारण नहीं कर सकता; इतना ही नहीं, परमेश्वर का कार्य मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप कभी नहीं हो सकता। क्या यीशु का बाहरी रूपरंग मनुष्य की धारणाओं के विपरीत नहीं था? क्या उसका चेहरा और पोशाक उसकी वास्तविक पहचान के बारे में कोई सुराग देने में असमर्थ नहीं थे? क्या आरंभिक फरीसियों ने यीशु का ठीक इसीलिए विरोध नहीं किया था, क्योंकि उन्होंने केवल उसके बाहरी स्वरूप को ही देखा, और उसके द्वारा बोले गए वचनों को हृदयंगम नहीं किया? मुझे उम्मीद है कि परमेश्वर के प्रकट होने के आकांक्षी सभी भाई-बहन इतिहास की त्रासदी को नहीं दोहराएँगे। तुम्हें आधुनिक काल के फरीसी नहीं बनना चाहिए और परमेश्वर को फिर से सलीब पर नहीं चढ़ाना चाहिए। तुम्हें सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि परमेश्वर के वापस लौटने का स्वागत कैसे किया जाए, और इस बारे में स्पष्ट मन रखना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति कैसे बना जाए, जो सत्य के प्रति समर्पित होता है। यह हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है, जो यीशु के बादल पर सवार होकर लौटने का इंतजार कर रहा है। हमें अपनी आध्यात्मिक आँखों को मलकर उन्हें साफ़ करना चाहिए और अतिरंजित कल्पना के शब्दों के दलदल में नहीं फँसना चाहिए। हमें परमेश्वर के व्यवहारिक कार्य के बारे में सोचना चाहिए, और परमेश्वर के व्यावहारिक पक्ष पर दृष्टि डालनी चाहिए। खुद को दिवास्वप्नों में बहने या खोने मत दो, सदैव उस दिन के लिए लालायित रहो, जब प्रभु यीशु बादल पर सवार होकर अचानक तुम लोगों के बीच उतरेगा और तुम्हें, जिन्होंने कि उसे कभी जाना या देखा नहीं है, और जो नहीं जानते कि उसकी इच्छा कैसे पूरी करें, ले जाएगा। अधिक व्यावहारिक मामलों पर विचार करना बेहतर है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" की 'प्रस्तावना' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 75

फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया, क्या तुम लोग उसका कारण जानना चाहते हो? क्या तुम फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे ज्यादा और क्या, उन्होंने केवल इस बात पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, मगर जीवन के इस सत्य की खोज नहीं की। इसलिए, वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं, क्यों उन्हें जीवन के मार्ग के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है, और वे नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है? तुम लोग कैसे कहते हो कि ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर के आशीष प्राप्त करेंगे? वे मसीहा को कैसे देख सकते हैं? वे यीशु का विरोध करते थे क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा को नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु के द्धारा कहे गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे, और क्योंकि उन्होंने मसीहा को नहीं समझा था। क्योंकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था, और कभी भी मसीहा के साथ नहीं रहे थे, उन्होंने मसीहा के नाम के साथ व्यर्थ ही चिपके रहने की ग़लती की, जबकि किसी भी संभव ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का पालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत है: इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, तुम मसीह नहीं हो जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता। क्या ये दृष्टिकोण हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण नहीं हैं? मैं तुम लोगों से पुनः पूछता हूँ: मान लेते हैं कि तुम लोगों में यीशु के बारे में थोड़ी सी भी समझ नहीं है, तो क्या तुम लोगों के लिए उन गलतियों को करना अत्यंत आसान नहीं है जो बिल्कुल आरंभ के फरीसियों ने की थी? क्या तुम सत्य के मार्ग को जानने के योग्य हो? क्या तुम सचमुच में यह विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने के योग्य हो? यदि तुम नहीं जानते हो कि क्या तुम ईसा का विरोध करोगे, तो मेरा कहना है कि तुम पहले से ही मौत के कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने में, यीशु को अस्वीकार करने में, उन्हें बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते हैं, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा भला कहने में सक्षम हैं। इसके अलावा, वे यीशु के लौटने को शैतान के द्वारा दिए जाने वाले धोखे के समान देखने में सक्षम हैं और अधिकांश लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इन सबसे तुम लोगों को डर नहीं लगता है? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार होगा, कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों का विनाश होगा और यीशु के द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम लोग हठधर्मिता से अपनी गलतियों को मानने से इनकार करते हो, तो श्वेत बादल पर यीशु के देह में लौटने पर तुम लोग यीशु के कार्य को कैसे समझ सकते हो? यह मैं तुम लोगों को बताता हूँ: जो लोग सत्य को स्वीकार नहीं करते हैं, मगर अंधों की तरह यीशु के श्वेत बादलों पर आगमन का इंतज़ार करते हैं, निश्चित रूप से पवित्र आत्मा के विरोध में उनका तिरस्कार करेंगे, और ये वे वर्ग हैं जो नष्ट कर दिए जायेंगे। तुम लोग सिर्फ़ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो, और सिर्फ़ स्वर्ग के सुखद राज्य का आनंद लेना चाहता हो, मगर जब यीशु देह में लौटा, तो तुमने यीशु के द्वारा कहे गए वचनों का कभी भी पालन नहीं किया, और यीशु के द्वारा व्यक्त किये गए सत्य को कभी भी ग्रहण नहीं किया। यीशु के एक श्वेत बादल पर वापस आने के तथ्य के बदले में तुम लोग क्या थामे रखना चाहोगे? क्या वही ईमानदारी जिसमें तुम लोग बार-बार पाप करते रहते हो, और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? एक श्वेत बादल पर वापस आने वाले यीशु के लिए तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या कार्य के वे वर्ष, जिनकी तुम लोग स्वयं सराहना करते हो? लौट कर आये यीशु को तुम लोगों पर विश्वास कराने के लिए तुम लोग किस चीज को थाम कर रखोगे? क्या वह तुम्‍हारा अभिमानी स्वभाव है, जो किसी भी सत्य का पालन नहीं करता है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन अंश 76

तुम लोगों की सत्यनिष्ठा सिर्फ़ वचनों में है, तुम लोगों का ज्ञान सिर्फ़ बौद्धिक और वैचारिक है, तुम लोगों की मेहनत सिर्फ स्वर्ग की आशीषें पाने के लिए है, और इसलिए तुम लोगों का विश्वास अवश्य ही किस प्रकार का हो सकता है? आज भी, तुम लोग सत्य के प्रत्येक वचन को एक बहरे कान से ही सुनते हो। तुम लोग नहीं जानते हो कि परमेश्वर क्या है, तुम लोग नहीं जानते हो कि ईसा क्या है, तुम लोग नहीं जानते हो कि यहोवा का आदर कैसे करें, तुम लोग नहीं जानते हो कि कैसे पवित्र आत्मा के कार्य में प्रवेश किया जाए, और तुम लोग नहीं जानते हो कि परमेश्वर के स्वयं के कार्य और मनुष्य के धोखे के बीच कैसे भेद करें। तुम परमेश्वर के द्वारा व्यक्त किये गए किसी सत्य के वचन की केवल निंदा करना ही जानते हो, जो तुम्हारे विचार के अनुरूप नहीं होता है। तुम्हारी विनम्रता कहाँ है? तुम्हारी आज्ञाकारिता कहाँ है? तुम्हारी सत्यनिष्ठा कहाँ है? सत्य को खोजने की तुम्हारी इच्छा कहाँ है? परमेश्वर के बारे में तुम्हारा आदर कहाँ है? मैं तुम लोगों बता दूँ, कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से उस श्रेणी के होंगे जो विनाश को झेलेगी। वे जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकार करने में अक्षम हैं, वे निश्चित रूप से नरक के वंशज, महान फ़रिश्ते के वंशज हैं, उस श्रेणी के हैं जो अनंत विनाश के अधीन की जाएगी। कई लोग मैं क्या कहता हूँ इसकी परवाह नहीं करते हैं, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ जो यीशु का अनुसरण करते हैं, कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते हुए अपनी आँखों से देखो, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते हुए देखोगे, यही वह समय भी होगा जब तुम दण्ड दिए जाने के लिए नीचे नरक में चले जाओगे। वह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति का समय होगा, और यह तब होगा जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दण्ड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के संकेतों को देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब वहाँ सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति ही होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं तथा संकेतों की खोज नहीं करते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए जाते हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे ही जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि "ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता है एक झूठा मसीह है" अनंत दण्ड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेतों को प्रदर्शित करता है, परन्तु उस यीशु को स्वीकार नहीं करते हैं जो गंभीर न्याय की घोषणा करता है और जीवन में सच्चे मार्ग को बताता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटें तो वह उसके साथ व्यवहार करें। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं? यीशु का लौटना उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, परन्तु उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, यह निंदा का एक संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार नहीं करना चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज करने के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। निष्कर्ष पर न पहुँचो; इससे ज्यादा और क्या, परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और विचारहीन न बनो। तुम लोगों को जानना चाहिए कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उन्हें विनम्र और श्रद्धावान होना चाहिए। जिन्होंने सत्य को सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक-भौं सिकोड़ते हैं, वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जिन्होंने सत्य को सुन लिया है और फिर भी लापरवाही के साथ निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या उसकी निंदा करते हैं, ऐसे लोग अभिमान से घिरे हुए हैं। जो कोई भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को श्राप देने या दूसरों की निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो तर्कसंगत हो और सत्य को स्वीकार करता हो। शायद, सत्य के मार्ग को सुन कर और जीवन के वचन को पढ़ कर, तुम विश्वास करते हो कि इन 10,000 वचनों में से सिर्फ़ एक ही वचन है जो तुम्हारे दृढ़ विश्वास के अनुसार और बाइबल के समान है, और फिर तुम्हें उसमें इन वचनों में से 10,000वें वचन की खोज करते रहना चाहिए। मैं अब भी तुम्हें सुझाव देता हूँ कि विनम्र बनो, अति-आत्मविश्वासी न बनो, और अपने आप को बहुत ऊँचा न उठाओ। परमेश्वर के लिए अपने हृदय में इतना थोड़ा सा आदर रखकर, तुम बड़े प्रकाश को प्राप्त करोगे। यदि तुम इन वचनों की सावधानी से जाँच करो और इन पर बार-बार मनन करो, तब तुम समझोगे कि वे सत्य हैं या नहीं, वे जीवन हैं या नहीं। शायद, केवल कुछ वाक्यों को पढ़ कर, कुछ लोग इन वचनों की बिना देखे ही यह कहते हुए निंदा करेंगे, "यह पवित्र आत्मा की थोड़ी प्रबुद्धता से अधिक कुछ नहीं है," अथवा "यह एक झूठा मसीह है जो लोगों को धोखा देने के लिए आया है।" जो लोग ऐसी बातें कहते हैं वे अज्ञानता से अंधे हो गए हैं! तुम परमेश्वर के कार्य और बुद्धि को बहुत कम समझते हो और मैं तुम्हें पुनः आरंभ से शुरू करने की सलाह देता हूँ! अंत के दिनों में झूठे मसीहों के प्रकट होने की वजह से परमेश्वर द्वारा व्यक्त किये गए वचनों की तुम लोगों को निंदा अवश्य नहीं करनी चाहिए, और क्योंकि तुम लोग धोखे से डरते हो, इसलिए तुम लोगों को ऐसा अवश्य नहीं बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार करे। क्या यह एक बड़ी दयनीय स्थिति नहीं होगी? यदि, बहुत जाँच के बाद, अब भी तुम्हें लगता है कि ये वचन सत्य नहीं हैं, मार्ग नहीं हैं, और परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हैं, तो फिर अंततः तुम दण्डित किए जाओगे, और आशीषों के बिना होगे। यदि तुम ऐसे सत्य को जो साफ़-साफ़ और स्पष्ट रूप से कहा गया है स्वीकार नहीं कर सकते हो, तो क्या तुम परमेश्वर के उद्धार के अयोग्य नहीं हो? क्या तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौटने के लिए पर्याप्त सौभाग्यशाली नहीं है? इस बारे में विचार करो! उतावले और अविवेकी न बनो, और परमेश्वर में विश्वास को एक खेल की तरह न समझो। अपनी मंजिल के लिए, अपनी संभावनाओं के लिए, अपने जीवन के लिए विचार करो और अपने स्वयं के साथ ऊपरी तौर से दिलचस्पी न लो। क्या तुम इन वचनों को स्वीकार कर सकते हो?

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