626 जिन लोगों में मानवता नहीं है वे परमेश्वर की सेवा के लायक नहीं हैं

1 मेरी पीठ पीछे बहुत से लोग हैसियत के आशीष का लोभ करते हैं, वे ठूँस-ठूँस कर खाना खाते हैं, वे नींद से प्यार करते हैं तथा देह की इच्छाओं पर बहुत ध्यान देते हैं, हमेशा भयभीत रहते हैं कि देह से बाहर कोई मार्ग नहीं है। वे कलीसिया में अपना सामान्य कार्य नहीं करते हैं, और मुफ़्त में खाते हैं, या अन्यथा मेरे वचनों से अपने भाई-बहनों की भर्त्सना करते हैं, वे ऊँचे स्थान में खड़े होते हैं तथा दूसरों के ऊपर आधिपत्य जताते हैं। ये लोग निरन्तर कहते रहते हैं कि वे परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर रहे हैं, वे हमेशा कहते हैं कि वे परमेश्वर के अंतरंग हैं—क्या यह बेतुका नहीं है? यदि तुम्हारे पास सही प्रेरणाएँ हैं, किन्तु तुम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सेवा करने में असमर्थ हो, तो तुम मूर्ख हो; किन्तु यदि तुम्हारी प्रेरणाएँ सही नहीं हैं, और तुम तब भी कहते हो कि तुम परमेश्वर की सेवा करते हो, तो तुम एक ऐसे व्यक्ति हो जो परमेश्वर का विरोध करता है, और तुम्हें परमेश्वर के द्वारा दण्डित किया जाना चाहिए! ऐसे लोगों के लिए मेरे पास कोई सहानुभूति नहीं है!

2 परमेश्वर के घर में वे मुफ़्त में भोजन करते हैं, और हमेशा देह के आराम का लोभ करते हैं, और परमेश्वर की इच्छाओं पर कोई विचार नहीं करते हैं; वे हमेशा उसकी खोज करते हैं जो उनके लिए अच्छा है, वे परमेश्वर की इच्छा पर कोई ध्यान नहीं देते हैं, वे जो कुछ भी करते हैं उस पर परमेश्वर की आत्मा के द्वारा कोई विचार नहीं किया जाता है, वे हमेशा अपने भाई-बहनों के विरुद्ध चालाकी करते और साजिश करते रहते हैं, और दो-मुँहे होकर, वे दाख की बाड़ी में लोमड़ी के समान, हमेशा अंगूरों को चुराते हैं और दाख की बाड़ी को कुचलते हैं। क्या ऐसे लोग परमेश्वर के अंतरंग हो सकते हैं? क्या तुम परमेश्वर की आशीषों को प्राप्त करने के लायक़ हो? तुम अपने जीवन एवं कलीसिया के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं लेते हो, क्या तुम परमेश्वर के आदेश को लेने के लायक़ हो? कौन तुम जैसे व्यक्ति पर भरोसा करने की हिम्मत करेगा? जब तुम इस प्रकार से सेवा करते हो, तो क्या परमेश्वर तुम्हें बड़ा काम देने की हिम्मत कर सकता है? क्या तुम चीजों में विलंब नहीं कर रहे हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप सेवा कैसे करें" से रूपांतरित

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