625 परमेश्वर को न जानने से तुम आसानी से उसका अपमान करोगे

1 जो अगुवाओं के रूप में सेवा करते हैं वे हमेशा अधिक चतुरता प्राप्त करना चाहते हैं, बाकी सब से श्रेष्ठ बनना चाहते हैं, नई तरकीबें पाना चाहते हैं ताकि परमेश्वर देख सके कि वे वास्तव में कितने सक्षम हैं। हालाँकि, वे सत्य को समझने और परमेश्वर के वचन की वास्तविकता में प्रवेश करने पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं। वे हमेशा दिखावा करना चाहते हैं; क्या यह निश्चित रूप से एक अहंकारी प्रकृति का प्रकटन नहीं है? जो कुछ भी तुम्हारे मन में आता है उसे उतावलेपन में न करें। यदि तुम कृत्यों के परिणामों पर विचार नहीं करते हो तो यह ठीक कैसे हो सकता है? जब तुम परमेश्वर के स्वभाव को अपमानित करते हो और उसके प्रशासनिक आदेशों का अपमान करते हो, और तब हटा दिए जाते हो, तो तुम्हारे पास कहने के लिये कुछ नहीं बचा होगा। तुम्हारे अभिप्राय पर ध्यान दिए बिना, इस बात पर ध्यान दिए बिना कि तुम जानबूझकर ऐसा करते हो या नहीं, यदि तुम परमेश्वर के स्वभाव को नहीं समझते हो या परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते हो, तो तुम आसानी से परमेश्वर को अपमानित करोगे और आसानी से उसके प्रशासनिक आदेशों का अपमान करोगे: इस चीज़ को लेकर प्रत्येक को सतर्क रहना चाहिए।

2 एक बार जब तुम ईश्वर के प्रशासनिक आदेशों का गंभीरता से अपमान करते हो या परमेश्वर के स्वभाव को अपमानित करते हो, तो परमेश्वर यह विचार नहीं करेगा कि तुमने इसे जानबूझकर किया या अनजाने में; इस चीज़ को तुम्हें स्पष्ट रूप से अवश्य देखना चाहिए। यदि तुम इस मुद्दे को समझ नहीं कर सकते हो, तो तुम्हें निश्चित रूप से समस्या होनी ही है। परमेश्वर की सेवा करने में, लोग महान प्रगति करना, महान कार्यों को करना, महान वचनों को बोलना, महान कार्य निष्पादित करना, बड़ी-बड़ी पुस्तकें मुद्रित करना, महान बैठकें आयोजित करना और महान अगुवा बनना चाहते हैं। यदि तुम हमेशा उच्च महत्वाकांक्षाएँ रखते हो, तो तुम परमेश्वर के महान प्रशासनिक आदेशों का अपमान करोगे। यदि तुम परमेश्वर की सेवा में ईमानदार, खरे, धर्मनिष्ठ या विवेकशील नहीं हो, तो तुम कभी न कभी परमेश्वर के प्रशासनिक आदेशों का अपमान करोगे। तुम किसी भी चीज पर अधिक ध्यान नहीं देते हो और तुम परमेश्वर से नहीं डरते हो, इसलिए तुमको दण्ड भुगतना चाहिए!

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'सत्य से रहित होकर कोई परमेश्वर को नाराज़ करने का भागी होता है' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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