158 कौन है परमेश्वर के हृदय के लिए विचारवान

1

पृथ्वी अंधकार में है, प्रेत अति क्रूर हैं।

परमेश्वर प्रकट होकर काम करते हैं,

वे उनका पीछा और निंदा करते हैं।

वो सत्य व्यक्त करते पर युग उन्हें नकारता है।

कहीं नहीं जगह उनके आराम की,

उन्होंने बड़े अपमान सहे हैं।

धर्म की बैरी ताकतें, उनकी निंदा करती हैं।

यीशु का दुर्भाग्य फिर से आज सामने आता है।

ईश्वर से अनजान, वे उनको फिर सूली चढ़ाते।

वे क्रूर हैं, वे दुष्ट हैं, यीशु के समय से भी बुरे हैं।

ईश्वर महान काम करते,

पर कोई उन्हें समझता नही।

उनके दुखी दिल के लिए,

कौन विचारशील हो सकता है?

इन्सान बड़ा विद्रोही है; आपदा आनी निश्चित है।

ईश्वर के वचन होंगे पूरे, शैतान का नाश निश्चित है।

2

हैं कई विश्वासी पर ईश्वर को जानने वाले कम है।

हम जाते हर जगह, पर गवाही देना मुश्किल है।

परमेश्वर के प्रकटन की गवाही अपने संग दुर्भाग्य लाती है।

लोग घर से भगाते, हमें चाकू-छुरी से डराते।

आँखों से आँसू बहते, दुःख से हमारे दिल टूटे जाते।

क्रूस का रास्ता कठिन है, लहू संग आँसू मिलते।

मूर्तियाँ बहुत और दुष्ट सेवक सबको सताते।

कहने को हैं वे विश्वासी परमेश्वर के,

पर झूठे चरवाहों के पीछे वे हैं जाते।

ईश्वर महान काम करते,

पर कोई उन्हें समझता नही।

उनके दुखी दिल के लिए,

कौन विचारशील हो सकता है?

इन्सान बड़ा विद्रोही है; आपदा आनी निश्चित है।

ईश्वर के वचन होंगे पूरे, शैतान का नाश निश्चित है।

3

ईश्वर को तलाशने वाले और प्रेम करने वाले कहाँ हैं?

ईश्वर बुलाते, दस्तक देते पर दरवाज़े बंद ही रहते।

परमेश्वर ने इन्सान को बचाने के लिए आँसू,

खून-पसीना बहाया।

इन्सान के बीच प्यार फैलाते हुए,

बरसों तक काम किया है।

ईश्वर महान काम करते,

पर कोई उन्हें समझता नही।

उनके दुखी दिल के लिए,

कौन विचारशील हो सकता है?

इन्सान बड़ा विद्रोही है; आपदा आनी निश्चित है।

ईश्वर के वचन होंगे पूरे, शैतान का नाश निश्चित है।

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