अध्याय 29

क्या तुम जानते हो कि समय बहुत कम है? अत: तुम्हें मुझ पर शीघ्र भरोसा करना होगा और अपने में से उन सभी चीजों को दूर करना होगा, जो मेरे स्वभाव से मेल नहीं खातीं : अज्ञानता, प्रतिक्रिया करने में सुस्ती, अस्पष्ट विचार, नर्मदिली, कमजोर इच्छा-शक्ति, बेहूदगी, अति उत्तेजित भावनाएँ, भ्रम और सूझ-बूझ की कमी। इन्हें यथाशीघ्र दूर करना होगा। मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! जब तक तुम मेरे साथ सहयोग करने को तैयार हो, मैं तुम्हें परेशान करने वाली सभी चीजें ठीक कर सकता हूँ। मैं वह परमेश्वर हूँ, जो लोगों के दिलों में गहरे झाँकता है; मैं तुम्हारी सभी बीमारियों को जानता हूँ और यह भी जानता हूँ कि तुम्हारी कमियाँ कहाँ रहती हैं। ये वे चीजें हैं, जो तुम्हें तुम्हारे जीवन में उन्नति करने से रोकती हैं, और इन्हें शीघ्र दूर करना जरूरी है। वरना मेरी इच्छा तुम में कार्यान्वित नहीं की जा सकती। अपनी हर उस चीज को, जिसे मैं रोशन करता हूँ, दूर करने के लिए मुझ पर भरोसा करो, हमेशा मेरे संग रहो, मेरे नजदीक रहो, और सभी कार्य और व्यवहार मेरे अनुरूप करो। जो तुम नहीं समझते, उसके बारे में मेरे साथ अधिक बार संगति करो, और मैं तुम्हारा मार्गदर्शन करूँगा, ताकि तुम आगे बढ़ सको। अगर तुम अनिश्चित हो, तो उतावलेपन से काम मत करो; बल्कि मेरे समय की प्रतीक्षा करो। एक स्थिर स्वभाव बनाए रखो और अपना जोश कम-ज्यादा मत होने दो; तुम्हारे पास ऐसा हृदय होना चाहिए, जो सदा मुझे सम्मान दे। तुम मेरे सामने या पीठ-पीछे जो भी करो, वह मेरी इच्छा के अनुसार होना चाहिए। मेरी ओर से किसी के भी प्रति उदार मत बनो, चाहे वह तुम्हारा पति हो या परिवार; यह अस्वीकार्य है, चाहे वे कितने भी अच्छे क्यों न हों। तुम्हें सत्य के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। अगर तुम मुझसे प्रेम करते हो, तो मैं तुम्हें बड़े आशीष दूँगा। जो कोई विरोध करेगा, मैं उसे बिलकुल नहीं सहूँगा। उनसे प्रेम करो, जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, और उनसे घृणा करो, जिनसे मैं घृणा करता हूँ। किसी मनुष्य, घटना या चीज पर ध्यान न दो। अपनी आत्मा से देखो और मेरे द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले लोगों को स्पष्ट रूप से निहारो; आध्यात्मिक लोगों के साथ अधिक संपर्क बनाओ। अज्ञानी मत बनो—तुम्हें अंतर करना चाहिए। गेहूँ हमेशा गेहूँ ही रहेगा और जंगली बीज कभी गेहूँ नहीं बन सकते—तुम्हें विभिन्न प्रकार के लोगों को पहचानना होगा। तुम्हें विशेषत: अपने बोलने में सावधान रहना होगा और अपने कदम मेरी पसंद के मार्ग पर बनाए रखने होंगे। इन सब वचनों पर ध्यानपूर्वक विचार करो। तुम्हें अपनी विद्रोहशीलता तुरंत त्यागनी होगी और मेरे उपयोग के लायक बनना होगा, ताकि तुम मेरे हृदय को संतुष्ट कर सको।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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