113 परमेश्वर के वचन हैं मेरे लिए बहुमूल्य

बोलते हो तुम मेरे आगे बढ़ाने के लिए,

इसलिए अब मेरे जीवन में है प्रकाश।

मुझे भयभीत किया तुम्हारी ताड़ना ने,

लेकिन समझा नहीं मैं तुम्हारे दिल को।

मेरी प्रकृति को प्रकट किया तुम्हारे कठोर वचनों ने,

तुमने जो कहा, संदेह हुआ उस पर मुझे।

मैंने चोट पहुंचाई इस प्रक्रिया में तुम्हें,

कितना/कितनी हूँ मैं मूर्ख।

बेवकूफ़ था/थी मैं,

पता नहीं था कि तुम्हारे वचन हैं मेरा जीवन।

मैं आ पाया/पाई हूं इतनी दूर,

सिर्फ़ तुम्हारे सत्यों की वजह से।

तुम्हारे वचनों का अभ्यास करने का प्रयास करना चाहिए मुझे,

अगर मैं उनसे भटकता/भटकती हूं,

तो मेरा स्वभाव कभी नहीं बदलेगा।

जीवन देने वाले तुम्हारे वचन और अनुग्रह

करते हैं मुझे प्रेरित।

अब मैं देख रहा/रही हूं कि मसीह है सत्य, मार्ग और जीवन। वही है मेरा और केवल वही है मेरा।

सत्य कभी बदलता नहीं है,

जीवन है अधिक कीमती,

केवल तुम हो प्रशंसा के योग्य।

मैं गरीब हो सकता/सकती हूं,

मैं बीमार पड़ सकता/सकती हूं,

लेकिन छोड़ूंगा/छोड़ूंगी कभी भी नहीं तुम्हारे वचन मैं।

मैं अपनी देह छोड़ सकता/सकती हूं,

मेरा परिवार टूट सकता है,

लेकिन सत्य को धोखा नहीं दूंगा/दूंगी मैं।

तुम्हारे वचनों को खोना है जीवन खोना,

हमेशा याद रखूंगा/रखूंगी मैं।

तुम्हारे वचन छोड़ूंगा/छोड़ूंगी,

तो मेरा स्वभाव कभी नहीं बदलेगा।

तुम्हारे वचनों का अभ्यास करने के लिए,

तुम्हारी इच्छा समझने के लिए,

मुझे करनी चाहिए कड़ी मेहनत।

अब मैं देख रहा/रही हूं कि मसीह है सत्य, मार्ग और जीवन। वही है मेरा और केवल वही है मेरा।

तुम्हारे वचन हैं सत्य,

पूरा जीवन है उसके भीतर।

केवल तुम हो सभी को गले लगाने वाले।

तुम हो उद्धारक,

तुम्हारी हर अभिव्यक्ति की है मुझे आवश्यकता।

अब जाकर मुझे पता चला है,

तुमने मुझे बचा लिया है,

ख़ासकर अपने वचनों से।

तुम धारण करते हो देह,

तुम्हारा प्रेम है बहुत गहरा,

यह सब कुछ है मेरे लिए बहुमूल्य।

अपने पूरे अस्तित्व से,

तुम्हारे वचनों का करता/करती हूं मैं अनुभव,

तुम्हारी इच्छा का करता/करती हूं मैं ख्याल।

मैं चुकाऊंगा/चुकाऊंगी तुम्हारा अनुग्रह,

कभी न भूलूंगा/भूलूंगी तुम्हारे वचन,

प्रेम करूंगा/करूंगी हमेशा जीवन और सत्य से।

अब मैं देख रहा/रही हूं कि मसीह है सत्य, मार्ग और जीवन। वही है मेरा और केवल वही है मेरा।

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