114 परमेश्वर की प्रजा की प्रार्थना

परमेश्वर की प्रजा उसके सिंहासन के सामने लौट आती है।

हम परमेश्वर को अपनी प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।


I

उन सब को परमेश्वर की आशीषें मिलें

जो उसके प्रकटन की लालसा रखते हैं।

उन सबको को परमेश्वर यह आशीर्वाद दे कि

वे शीघ्र ही उसकी आवाज़ सुनें।

वे सभी जिन्हें परमेश्वर ने पूर्व-चयनित किया है,

मेमने के पद-चिन्हों का अनुसरण करें।

परमेश्वर उन सभी को प्रबुद्ध करे जो तलाश कर रहे हैं।

परमेश्वर उन सभी को प्रबुद्ध

करे जो प्रतीक्षा कर रहे हैं और बाट जोह रहे हैं।

वे सभी छुटकारे दिलाने वाले को देखें,

यह देखें कि वह लौट आया है,

उस सत्य को देखें जो वह लेकर आया है।

परमेश्वर की प्रजा उसके सिंहासन के सामने लौट आती है।

हम परमेश्वर को हमारी प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।


II

मानवजाति अपनी ही धारणाओं की बेड़ियों को तोड़ दे।

मनुष्य सच्चे मार्ग की तलाश करे और उसका अध्ययन करे।

मानवजाति परमेश्वर के वचनों का पोषण प्राप्त करे,

जिससे उनकी आत्माएँ दिनों तक और न तरसें।

इंसान विवेक रखना सीखे,

शैतान के गहनतम झूठों से और धोखा न खाए।

सुसमाचार के प्रसार और गवाही देने में परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करे,

और अपनी प्रजा को अपने प्रेम में सदा बनाये रखे।

परमेश्वर की प्रजा उसके सिंहासन के सामने लौट आती है।

हम परमेश्वर को हमारी प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।


III

परमेश्वर हमें प्रबुद्ध करे,

ताकि हम उसके वचन, उसकी इच्छा को समझ पाएँ, जान सकें।

सभी लोग परमेश्वर के वचन को संजोये रखें और इसी के अनुसार जिएँ।

वह हमारा न्याय करे और हमें अनुशासित करे ताकि हमारा कर्तव्य पूरा हो सके।

हमारे स्वभाव को बदलने के लिए परमेश्वर परीक्षणों को बढ़ाए।

सभी लोग भले और बुरे का भेद कर सकें।

सभी लोग सत्य को अभ्यास में डालें

और परमेश्वर के सभी आदेशों को मानें।


IV

बुराई करने वाले सभी लोगों को परमेश्वर सज़ा दे,

ताकि कलीसिया का जीवन अस्त-व्यस्त न हो।

परमेश्वर अधिक लोगों को पूर्ण बनाए

ताकि उनके मन उसके साथ एक हो सकें।

सच्चे और प्यारे परमेश्वर को लोग

अपना सच्चा प्रेम अर्पित करें।

परमेश्वर उस के पास लौटने वालों को आशीर्वाद दे।

हम सभी उस प्रकाश में जिएँ।

परमेश्वर की प्रजा उसके सिंहासन के सामने लौट आती है।

हम परमेश्वर को हमारी प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।

हम परमेश्वर को हमारी प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।

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