145 आँधी-तूफ़ानों में

1

हे परमेश्वर! मैंने तुझे अपना दिल दिया। हे व्यवहारिक परमेश्वर, तू कितना मनोहर है।

तूने दीन बनकर देहधारण किया है, तू इंसानों के बीच चल रहा है।

तूने इंसान को बचाने के लिये सत्य व्यक्त किया है, तू धैर्यपूर्वक हमें आहार दे रहा है, हमारा पोषण और सिंचन कर रहा है।

तू ख़ामोशी से अस्वीकृति और निंदा सहन करता है, हर मोड़ पर तू इंसान के लिये एक मिसाल है।

तेरी अगुवाई से मेरा दिल संतुष्ट है, तेरे वचन आगे की राह को रोशन करते हैं।

मैं करीब से तेरे पदचिह्नों का अनुसरण करता हूँ, काश मैं तेरे साथ आँधी-तूफ़ानों से गुज़र सकूँ।


2

हे परमेश्वर! मैंने तुझे अपना दिल दिया। हे व्यवहारिक परमेश्वर, तू कितना मनोहर है।

तेरा न्याय और ताड़ना तेरे प्रेम को प्रकट करते हैं।

हम तेरे द्वारा शुद्ध किए जाते हैं, हम नए बनाए जाते हैं और हम रूपांतरित होकर, नए इंसान बन जाते हैं।

तेरी धार्मिकता और पवित्रता कितनी सुंदर है, मेरे दिल पर तेरा पूरा अधिकार है।

तेरे वचनों ने हमें पूरा कर दिया है, हम तेरे साथ एक दिल हैं, हम तेरे और करीब हो रहे हैं।

मैं करीब से तेरे पदचिह्नों का अनुसरण करता हूँ, काश मैं तेरे साथ आँधी-तूफ़ानों से गुज़र सकूँ।


3

हे परमेश्वर! मैंने तुझे अपना दिल दिया। हे व्यवहारिक परमेश्वर, तू कितना मनोहर है।

हालाँकि हमने मुश्किलों और उत्पीड़न से गुजरते हुए बहुत अधिक सहा है, लेकिन तेरा प्रेम और वचन हमारा मार्गदर्शन करते हैं,

ताकि हमारे अंदर विश्वास और शक्ति आए और हम मुश्किलों में भी तेरी गवाही दें।

हम सदा तुझे प्रेम करेंगे और तेरे प्रेम का प्रतिदान देंगे, हम सत्य का प्रचार करेंगे और तेरी गवाही देंगे।

बरसों के हमारे साथ और आपसी प्रेम से, हमारा प्रेम आँधी-तूफ़ानों में और भी गहरा हुआ है।

मैं करीब से तेरे पदचिह्नों का अनुसरण करता हूँ, काश मैं तेरे साथ आँधी-तूफ़ानों से गुज़र सकूँ।

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