146 आँधी-तूफानों में भी साथ रहूँगा, मृत्यु तक निष्ठावान रहूँगा

1

देहधारण कर तू आया स्वर्ग से पृथ्वी पर। 

तू कार्य करे इंसानों में, बरसों गुज़ारे तूने तूफानों में। 

ऊबड़-खाबड़ राहों पर चलकर, सूत्रपात किया तूने नए युग का। 

न्याय करने इंसानों का तू सत्य व्यक्त करे और बार-बार उन्हें बचाए। 

बरसों तूने मुश्किलें सहीं हैं और इंसान की अस्वीकृति का दर्द झेला है।

दीन बनकर और छिपकर, आज तक सहा है तूने। 

2

मैं निर्णय की पीड़ा का अनुभव करूँ और मेरा दिल इसकी भयंकर यातना सहे।

ताड़ना पाकर, अनुशासित होकर, मानों मैं मरकर लौटा हूँ।

तेरी देखभाल याद कर, मुझे और भी प्रेम हो गया तुझसे।

अतीत को याद कर, पश्चाताप से भर गया है दिल मेरा।

इतने परीक्षणों और शोधन के बाद, और भी शुद्ध हो गया है प्रेम मेरा। 

आँधी-तूफान में भी तेरे साथ रहूँगा, मौत तक वफादार रहूँगा।

3 

तू मुझ पर दया करता, मेरी कमज़ोरियों के प्रति हमदर्दी दिखाता। 

तू मुझ पर क्रोध करता, मेरी अवज्ञा को धिक्कारता। 

तेरी करुणा का दायरा दूर तक फैलता है, हालाँकि तेरा क्रोध गहरा है।

मैं तेरे प्रताप को निहारता हूँ, तेरी बुद्धि को सराहता हूँ। 

इतनी काट-छाँट और निपटारे के बाद, तेरे लिए मेरा प्यार और अधिक शुद्ध हुआ है।

आँधी-तूफान में भी तेरे साथ रहूँगा, मौत तक वफादार रहूँगा।

4 

तू बोलता, काम करता, इंसान को जीवन देता। 

दुखदायी शोधन से, शुद्ध हुई है भ्रष्टता मेरा।

मैंने तेरे कार्य का अनुभव किया है, तेरी करुणा को महसूस किया है।

खट्टे-मीठे पल याद करूँ मैं, सुख-दुःख सब साथ में गुँथे हैं। 

इतनी मुश्किलों और परीक्षणों के बाद, तेरे लिए मेरा प्यार और अधिक शुद्ध हुआ है।

आँधी-तूफान में भी तेरे साथ रहूँगा, मौत तक वफादार रहूँगा।

5 

तेरी इच्छा के लिए मैं त्याग करूँ, ये मेरी कामना है। 

परीक्षणों की मौजूदगी में, मैं अपने संकल्प में और भी अटल हूँ।

तेरे लिए मेरा प्यार और भी गहरा हो गया है। मुझे दर्द में भी मधुरता दिखती है।

तेरे वचनों के संग, मेरा जीवन प्रकाश से भर गया है।

इतनी बार आघात सहकर, टूटकर, तेरे लिए मेरा प्यार और अधिक शुद्ध हुआ है।

आँधी-तूफान में भी तेरे साथ रहूँगा, मौत तक वफादार रहूँगा।

6 

मुझे बड़ा दायित उठाना चाहिए, नहीं चाहता अब देरी हो।

मेरा आध्यात्मिक कद सच में छोटा है, फिर भी तेरा प्यार पाऊँ।

तेरा आदेश मानकर, पूर्ण हुआ है जीवन मेरा। 

मैं तेरी इच्छा पूरी करूँगा और सच्चे मानव का जीवन जिऊँगा।

आँधी-तूफान, ऊबड़-खाबड़ राहें, 

दुख में, ख़ुशी में या मौत आने पर भी, मैं शिकायत न करूँगा। 

बरसों आँधी-तूफान आए, लेकिन आगे बढ़ते समय, तेरा प्रेम हमेशा मेरे साथ रहा है। 

मैं तेरे प्रति वफादार रहूँगा, मर भी जाऊँ तो पछतावा न होगा। 

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