164 मुश्किलों से गुज़रकर परमेश्वर के प्रति मेरा प्रेम और मज़बूत हुआ है

1 मुझे हैवानी सीसीपी ने उठाकर जेल में ठूँस दिया, जहाँ मैंने खून से सने यातना के उपकरण देखे। पुलिस के ख़ूँखार और पैशाचिक चेहरों को सामने पाकर मैंने ख़ुद को डरा हुआ और कमज़ोर महसूस किया। मैं इस बात से भी अनजान था कि मैं क्रूर यातना सह पाऊँगा या नहीं, परमेश्वर की गवाही दे पाऊँगा या नहीं। मुझे डर था कि मेरा आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है, और मैं परमेश्वर के साथ विश्वासघात करके यहूदा बन जाऊँगा। मैंने सच्चे मन से परमेश्वर को पुकारा, उससे प्रार्थना की कि वह मुझे शैतान के फंदे से बचाए। शैतान की भयंकर क्रूरता के बावजूद, मेरी नियति परमेश्वर के हाथ में थी। जब मैंने सत्य को समझा, तो परमेश्वर में मेरी आस्था जागी, और मेरे अंदर से उनके क्रूर अत्याचारों का भय समाप्त हो गया। चाहे जिऊँ या मरूँ, मैं परमेश्वर की व्यवस्थाओं का पालन करूँगा। मैं अपनी जान के ख़तरे के बावजूद, परमेश्वर के लिये ज़ोरदार गवाही दूँगा।

2 शैतानी सीसीपी क्रूर भी है और घिनौनी भी, उसने मुझे परमेश्वर से दगा करने पर मजबूर करने के लिए अच्छे-बुरे हर तरह के हथकण्डे अपनाए। जब मुझे बिजली के झटके दिए गए, तो मुझे लगा मेरा दम घुट जाएगा। जब मेरी उँगलियों में सुइयाँ चुभाई गईं, तो मुझे लगा इस असहनीय दर्द से तो मौत भली। पीड़ा की इस घड़ी में, परमेश्वर के वचनों ने मुझे विश्वास और शक्ति दी, और इन सारी यातनाओं को सहने का धीरज दिया। मैंने सोचा कि पहले मैं किस तरह परमेश्वर में पूरी निष्ठा से प्रेम नहीं रखता था, और मुझे बहुत पछतावा हुआ। उस पल मैं बस यही चाहता था कि मैं अपने हृदय को परमेश्वर को समर्पित कर दूँ। अगर परमेश्वर मुझे स्वीकार कर ले, तो मेरे दिल को शांति और सुकून मिल जाएगा। सीसीपी मुझे जितना चाहे सताए, मैं फिर भी परमेश्वर से प्रेम करूँगा और परमेश्वर की गवाही दूँगा। अगर कल को मुझे अवसर मिला, तो मैं निश्चित रूप से जी-जान से सत्य का अनुसरण करूँगा और परमेश्वर से अधिक गहराई से प्रेम करूँगा।

3 जब तक मौत के कगार पर नहीं पहुँच गया, दरिंदे मुझे यातना देते रहे, परमेश्वर ने गुप्त रूप से मेरी रक्षा की ताकि मुझे कोई गंभीर नुकसान न हो। मुश्किल हालात मुझे परमेश्वर के और करीब ले आए। परमेश्वर के साथ होने से, पीड़ा मधुरता में बदल गई। कठिन परिस्थितियों में, मैं परमेश्वर के रूबरू आ गया, परमेश्वर ने मुझे शुद्ध किया और बचा लिया। सीसीपी के घोर अत्याचारों को झेलते हुए, मैंने शैतान का घिनौना चेहरा साफ़-साफ़ देखा। मैं न्याय और अन्याय के बीच साफ़ अंतर कर पाया, मैंने इस बात को और भी गहराई से जाना कि केवल परमेश्वर ही प्रेम है। मुझे बड़े लाल अजगर से और भी अधिक घृणा हो गई है। मैं उसके आगे झुकने के बजाय, मर जाना पसंद करूँगा। अब मैं परमेश्वर का अनुसरण फ़ौलादी इच्छा से करता हूँ। स्वर्ग का रास्ता काँटों और चट्टानों से भरा है, प्रलोभन और ख़तरे से भरा है। परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन के संग, मेरी इच्छा है कि मैं सदा परमेश्वर की शरण में रहूँ, उनके प्रति मेरा प्रेम कभी न बदले।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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