165 गहरा दाग

1 एक दुःस्वप्न से जागकर, मैंने सोने की कोशिश की, लेकिन मेरा दुख भरा अतीत मेरा पीछा करता रहा : परमेश्वर में विश्वास रखने के कारण मुझे गिरफ्तार करके यातनाएं दी गईं—लेकिन जीने की लालसा और मौत का ख़ौफ लिए, मैं लालच में फँस गयी। शैतान के आगे, मैंने परमेश्वर को नकार दिया, जिसने मुझे एक ऐसा दाग दे दिया, जिसे मैं कभी नहीं धो सकी। मेरे दिल में मची हलचल मौत से भी बदतर थी। मुझे परमेश्वर से मिलने में बहुत शर्म आ रही थी, हर दिन मेरी आँखों से आँसू बह लगे थे। एक दिन मैंने सब-कुछ त्यागकर हमेशा के लिए परमेश्वर का अनुसरण करने की दृढ़-प्रतिज्ञा की और मैंने संकल्प लिया कि चाहे कितनी भी प्रतिकूलता आए, परमेश्वर के लिए मेरा प्यार कभी नहीं बदलेगा। आज मेरी शपथ एक झूठ साबित हुई : मैंने अपने विश्वास से मुँह मोड़ लिया और परमेश्वर का दिल को दुखाते हुए धार्मिकता त्याग दी। मैंने परमेश्वर की उपस्थिति गँवा दी और अगर कुछ शेष था तो वह था अनवरत आतंक और अंधेरा।

2 परमेश्वर में अपने बरसों के विश्वास में, मैंने कभी सत्य का अनुसरण नहीं किया और कभी सच्ची गवाही नहीं दी। अंत के दिनों में मेरा अंत मृत्यु के रुप में न हो, इसके बदले में मैं परमेश्वर के लिए सेवा करने मात्र से ही संतुष्ट हो गयी। मुझे परमेश्वर के प्रति कोई श्रद्धा नहीं थी, और मुझे इस बात की समझ तो बिल्कुल नहीं थी कि जीवन और मृत्यु परमेश्वर के हाथों में है। विपत्तियों सामने, मैंने अपने जीवन को संजोया और परीक्षा के समय अपनी गवाही गँवा दी। अपने जीवन की रक्षा करने के लिए, मैंने परमेश्वर से मुँह मोड़कर उसके स्वभाव को ठेस पहुंचाई—इस शर्मनाक अपराध का शाश्वत गहरा दाग, मेरे दिल पर नक्श हो गया। अगर मैं समय को पलट पाती, तो भले ही मेरी जान चली जाती, लेकिन मैं ऐसे हेय जीवन को न घसीटती; मेरे दिल से पश्चाताप की आह निकलती है, जैसे कोई छुरा घोंप रहा हो। मुझे लंबे समय से प्रतीक्षा है कि परमेश्वर एक बार फिर मुझ पर अपनी अनुकंपा करे। 

3 परमेश्वर के वचनों के न्याय ने मेरे दिल की गहराइयों को चीर दिया : मैंने देखा कि मेरी प्रकृति विश्वासघात करने वाली है। असफल होने, पतित होने के बाद, अंततः मैं जाग गयी और यह बात समझ में आ गयी कि सत्य प्राप्त करने से ज्यादा कीमती कुछ भी नहीं है। इतना समय बर्बाद करने के कारण मुझे अपने आपसे घृणा हो गयी। मैं परमेश्वर को निराश करने वाली बात को अब सुधार नहीं सकती थी : यह एक ऐसा कलंक था जिसे मिटाया नहीं जा सकता था, जो मेरे दिल की असीम पीड़ा की वजह बन गया था। मैं अपने अपराध को कम करने के लिए सत्य का अनुसरण करने की, थोड़ी-सी ईमानदारी और गरिमा के साथ जीने की और परमेश्वर की एक सच्ची प्राणी बनने की कोशिश कर रही हूँ। भले ही कोई गंतव्य मेरी प्रतीक्षा न कर रहा हो, फिर भी मैं खुशी से सेवा करूँगी; परमेश्वर मुझे चाहे या न चाहे, मैं अंत तक, आखिरी साँस तक परमेश्वर कोअनुसरण करूँगी। केवल परमेश्वर ही मुझे बचा सकता है।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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