107 कार्य के तीनों चरणों को करता है एक ही परमेश्वर

1

परमेश्वर के समस्त स्वभाव को प्रकट किया गया है,

पूरे छ: हज़ार वर्षों की प्रबंधन योजना के दौरान,

न कि बस व्यवस्था, अनुग्रह के युग में या बस अंत के दिनों में।

न्याय, कोप, ताड़ना, अंत के दिनों का काम है।

2

जगह नहीं ले सकता अंत के दिनों का काम

व्यवस्था या अनुग्रह के युग के काम की।

बल्कि तीनों जुड़ कर बन जाते हैं एक इकाई।

परमेश्वर ही करता है काम सारे, लेकिन अलग-अलग युगों में।

व्यवस्था के युग में काम शुरू हुआ।

अनुग्रह के युग में मिला छुटकारा।

अब अंत के दिनों का काम हर चीज़ का समापन करता है।

3

यहोवा, यीशु और आज के काम के ये तीन चरण,

परमेश्वर की प्रबंधन योजना के विस्तार को एक धागे में पिरोते हैं,

सभी हैं कार्य जो एक ही आत्मा द्वारा किये जाते हैं।

संसार की रचना से ही सदा, परमेश्वर इंसान का प्रबंधन करता रहा है।

आदि, अंत, प्रथम, अंतिम वही है,

वही है जिसके साथ एक युग शुरू और ख़त्म होता है।

अलग युग और जगह में, कार्य के तीन चरण ये,

साफ़ तौर पर काम हैं एक परमेश्वर, एक आत्मा के।

जो भी इन्हें बाँटेंगे, वो उसका विरोध करेंगे।

जो भी इन्हें बाँटेंगे, वो उसका विरोध करेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (4)' से रूपांतरित

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