106 परमेश्वर की जगह इंसान उसका काम नहीं कर सकता

1

अपनी प्रबंधन योजना स्वयं ईश्वर पूरी करता।

स्वयं ईश्वर ने रची ये दुनिया, दुनिया,

इंसान को कोई और बना न सकता था।

दूसरा चरण सभी को छुड़ाने के लिए था,

सिर्फ परमेश्वर ही योजना पूरी कर सकता था।

तीसरे चरण में ईश्वर सब काम ख़त्म करेगा।

परमेश्वर ही अपना काम कर सकता है,

इंसान उसकी जगह ले सकता नहीं।

शुरू से आज तक का काम अपना,

बस परमेश्वर ही कर सकता है।

भले ही अलग हैं युग और जगह

जहाँ काम होता है हर चरण का,

एक ईश्वर ने ही हर काम किया है।

सबसे बड़ा दर्शन है ये, जिसे सब को जानना चाहिये।

परमेश्वर ही अपना काम कर सकता है।

2

अपनी प्रबंधन योजना स्वयं ईश्वर पूरी करता।

छुड़ाया इंसान को, वो उसे जीतता, पूर्ण करता है।

शैतान को हराने को, इंसान को पाने, उसे सामान्य जीवन देने को,

इंसान के बीच काम करता और राह दिखाता है;

उसे खुद पूरा करना होगा अपना प्रबंधन-कार्य।

परमेश्वर ही अपना काम कर सकता है,

इंसान उसकी जगह ले सकता नहीं।

शुरू से आज तक का काम अपना,

बस परमेश्वर ही कर सकता है।

भले ही अलग हैं युग और जगह

जहाँ काम होता है हर चरण का,

एक ईश्वर ने ही हर काम किया है।

सबसे बड़ा दर्शन है ये, जिसे सब को जानना चाहिये।

एक परमेश्वर ही अपना काम कर सकता है।

यहोवा ने इंसान को बनाया और किस्मों में बाँटा।

अंत के दिनों में काम करेगा वो।

किस्म अनुसार बांटे जायेंगे सभी,

उसकी जगह इंसान ले सकता नहीं।

काम के तीन चरण तथ्य हैं

कैसे वो इंसां को राह दिखाता है।

काम के चरणों के अंत में, लौटेंगी चीज़ें उसके प्रभुत्व में।

परमेश्वर ही अपना काम कर सकता है,

इंसान उसकी जगह ले सकता नहीं।

शुरू से आज तक का काम अपना,

बस परमेश्वर ही कर सकता है।

भले ही अलग हैं युग और जगह

जहाँ काम होता है हर चरण का,

एक ईश्वर ने ही हर काम किया है।

सबसे बड़ा दर्शन है ये, जिसे सब को जानना चाहिये। जानना चाहिये।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है' से रूपांतरित

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