742 वही मनुष्य खुश है जो परमेश्वर का सम्मान करता है

1 जैसा कि हर कोई जानता है, अय्यूब ऐसा मनुष्य था जो जब वह जीवित था तो परमेश्वर से डरता था और बुराई से दूर रहता था; परमेश्वर ने उसके धार्मिकता के कार्यों की सराहना की थी, लोगों ने उन्हें स्मरण रखा, और उसका जीवन किसी भी अन्य इंसान से बढ़कर मूल्यवान और महत्वपूर्ण था। अय्यूब ने परमेश्वर के आशीषों का आनन्द लिया और परमेश्वर के द्वारा उसे पृथ्वी पर धार्मिक कहा गया था, और परमेश्वर के द्वारा भी उसकी परीक्षा ली गई और शैतान के द्वारा भी उसकी परीक्षा ली गई; वह परमेश्वर का गवाह बना और वह धार्मिक पुरुष कहलाने के योग्य था। परमेश्वर के द्वारा परीक्षा लिए जाने के बाद कई दशकों के दौरान, उसने ऐसा जीवन बिताया जो पहले से कहीं अधिक बहुमूल्य, अर्थपूर्ण, स्थिर, और शान्तिपूर्ण था। अय्यूब ने अपना जीवन परमेश्वर की संप्रभुता के प्रति विश्वास, पहचान, एवं समर्पण की व्यक्तिपरक खोज में बिताया था, और यह इस विश्वास, पहचान और समर्पण के साथ था कि उसने अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ को पार किया था, अपने जीवन के अंतिम वर्षों को जीया था, और अपने जीवन के अंतिम मोड़ का अभिनन्दन किया था।

2 इस बात की परवाह किए बिना कि अय्यूब ने क्या अनुभव किया, जीवन में उसकी खोज और लक्ष्य सुखद थे, कष्टपूर्ण नहीं। वह केवल उन आशीषों या प्रशंसाओं की वजह से खुश नहीं था जो सृजनकर्ता के द्वारा उसे प्रदान की गईं थीं, बल्कि अधिक महत्वपूर्ण रूप से, अपनी खोजों और जीवन के लक्ष्यों की वजह से, सृजनकर्ता की संप्रभुता के क्रमिक ज्ञान और सही समझ की वजह से जिसे उसने परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के माध्यम से अर्जित किया था, और इसके अतिरिक्त, परमेश्वर के अद्भुत कर्मों की वजह से जिन्हें अय्यूब ने सृजनकर्ता की संप्रभुता के अधीन एक व्यक्ति के रूप में अपने समय के दौरान व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया था, और मनुष्य और परमेश्वर के बीच सह-अस्तित्व, जान-पहचान, तथा पारस्परिक समझ के उत्साही और अविस्मरणीय अनुभवों और स्मृतियों की वजह से; उस दिलासा और प्रसन्नता की वजह से जो सृजनकर्ता की इच्छा को जानने से आई थी; उस आदर की वजह से जो यह देखने से बाद उभरा था कि परमेश्वर कितना महान, अद्भुत, प्यारा एवं विश्वासयोग्य है, इन कारणों की वजह से वह खुश था।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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