216 धन्य हैं वो जो परमेश्वर के नये काम को स्वीकारते हैं

1

धन्य हैं जो नए कार्य को करते हैं स्वीकार।

धन्य हैं जो नए कार्य को करते हैं स्वीकार।

धन्य हैं वो सब जो करते हैं पालन,

पवित्र आत्मा के आज के कथनों का।

नहीं फ़र्क पड़ता कि वे कैसे हुआ करते थे,

या पवित्र आत्मा उनमें कैसे काम किया करता था—

धन्य हैं वे ज़्यादा सबसे,

जिन्होंने पा लिया है नवीनतम कार्य।

आह ... आह ...

धन्य हैं वे ज़्यादा सबसे,

जिन्होंने पा लिया है नवीनतम कार्य,

और जो नाकाम हैं नवीनतम कार्य का,

पालन कर पाने में, हटा दिए गए हैं।


2

परमेश्वर चाहता है उन्हें,

जो कर पाते हैं नई रोशनी को स्वीकार,

और चाहता है उन्हें,

जो करते हैं नवीनतम कार्य को स्वीकार।

वो कर पाते हैं खोज पवित्र आत्मा के काम की

और समझ पाते हैं नई चीज़ों को,

और कर पाते हैं दरकिनार पुरानी धारणा को,

और करते हैं पालन आज, परमेश्वर के काम का।

आह ... आह ...

लोगों का ये समूह,

जो आज के नवीनतम कार्य को, करता है स्वीकार,

कर चुका था परमेश्वर जिन्हें नियत पहले से, युगों पूर्व,

और धन्य हैं ज़्यादा सबसे वो लोग।


3

सुनते हो सीधे ही परमेश्वर की आवाज़ तुम लोग,

और निहारते हो परमेश्वर का प्रकटन,

और निहारते हो परमेश्वर का प्रकटन,

और इसलिए, पूरे धरती और आकाश में,

और युगों-युगों में,

नहीं है इतना कोई धन्य,

जितना तुम लोगों का ये समूह है।

आह … आह ...

और इसलिए, पूरे धरती और आकाश में,

और युगों-युगों में,

नहीं है इतना कोई धन्य,

जितना तुम लोगों का ये समूह है।

नहीं है इतना कोई धन्य,

जितना तुम लोगों का ये समूह है।

नहीं है इतना कोई धन्य,

जितना तुम लोगों का ये समूह है।


—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करो से रूपांतरित

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