377 परमेश्वर पर विश्वास करके भी उसकी अवहेलना करने वालों का परिणाम

1

सृजन से लेकर आजतक कइयों ने की है ईश-वचनों की अवज्ञा,

इसलिए ठीक होने की धारा से निकाले गए हैं वे।

अंत में उनके शरीर हुए तबाह, उनकी आत्माएँ नरक में आज भी सज़ा पाएँ।

अनेक लोग ईश-वचन का अनुसरण करके भी

उसके प्रबोधन के विरुद्ध चले गए हैं,

इसलिए ईश्वर ने उन्हें निकाल दिया है।

शैतान के वश में, उसके विरोधी बनकर,

बस ऊपर से उसके वचनों को मानते,

उनके सार को नहीं, वचनों के सार को नहीं।

2

अनेक लोग बस कल के ईश-वचनों को सुनते हैं।

पुराने कचरे से चिपके रहते हैं, आज की फसल को सँजोते नहीं।

वे शैतान के बंदी, अनंत पापी बन गए हैं,

ईश्वर का विरोध करने वाले दुश्मन बन गए हैं।

जब ईश्वर का रोष होता है चरम पर, तब पाते वे उसका न्याय।

अंधेरी गुफाओं में कैद, वे हैं अंधी, सड़ी लाशें, वे हैं बंदी शैतान के!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 4' से रूपांतरित

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