376 जो परमेश्वर के प्रति अवज्ञाकारी हैं, वे उससे विश्वासघात करते हैं

1 ऐसा व्यवहार जो पूरी तरह से मेरी आज्ञा का पालन नहीं कर सकता है, विश्वासघात है। ऐसा व्यवहार जो मेरे प्रति निष्ठावान नहीं हो सकता है विश्वासघात है। मेरे साथ छल करना और मेरे साथ धोखा करने के लिए झूठ का उपयोग करना, विश्वासघात है। मतों से भरा होना और हर जगह उन्हें फैलाना विश्वासघात है। मेरी गवाहियों और हितों की रक्षा नहीं करना विश्वासघात है। जब कोई मुझे अपने दिल में से त्याग देता है तो झूठा मुस्कुराना विश्वासघात है। ये सभी व्यवहार ऐसी चीजें हैं जिन्हें करने में तुम लोग हमेशा सक्षम होते हो, और ये तुम लोगों के बीच आम भी हैं। तुम लोगों में से कोई भी नहीं सोच सकता है कि यह एक समस्या है, लेकिन यह ऐसा नहीं है जैसा मैं सोचता हूँ। मैं अपने साथ विश्वासघात किए जाने को एक तुच्छ बात के रूप में नहीं मान सकता हूँ, और इसके अलावा, मैं इसे अनदेखा नहीं कर सकता हूँ। मैं अब तुम लोगों के बीच कार्य कर रहा हूँ, लेकिन तुम लोग अभी भी इसी तरह से हो। यदि किसी दिन तुम लोगों की देखभाल या निगरानी करने के लिए वहाँ कोई न हो, तो क्या तुम सभी लोग पहाड़ी के राजा नहीं बन जाओगे? तब तक, तुम्हारे बाद उस गंदगी को कौन साफ करेगा जब तुम विनाश का कारण बनते हो?

2 तुम सोच सकते हो कि विश्वासघात के कुछ कार्य सतत व्यवहार के बजाय मात्र एक कभी-कभी की बात है, और वे इतने गंभीर तरीके से नहीं उठाये जाने चाहिए कि तुम्हारे अपमान का कारण बनें। यदि तुम वास्तव में ऐसा मानते हो, तो तुम में संवेदनशीलता का अभाव है। कोई व्यक्ति जितना अधिक इस तरीके से सोचता है, उतना ही वह विद्रोह का एक नमूना और विशिष्ट उदाहरण बनता है। मनुष्य की प्रकृति उसका जीवन है, यह एक सिद्धांत है जिस पर वह जीवित रहने के लिए भरोसा करता है और वह इसे बदलने में असमर्थ है। ठीक विश्वासघात की प्रकृति की तरह—यदि तुम किसी रिश्तेदार या मित्र को धोखा देने के लिए कुछ कर सकते हो, तो यह साबित करता है कि यह तुम्हारे जीवन और तुम्हारी प्रकृति का हिस्सा है जिसके साथ तुम पैदा हुए थे। यह कुछ ऐसा है जिससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "एक बहुत गंभीर समस्या: विश्वासघात (1)" से रूपांतरित

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