686 परमेश्वर का उद्धार पाने वाले ही जीवित हैं

1

अ‍न्धेरे के प्रभाव में जो, शैतान के कब्ज़े में, मृत्यु में जिए।

ईश्वर न्याय न करे, न बचाए तो इंसान निकल न सके मौत के चंगुल से।

ये मृत लोग गवाही न दे सकें,

ईश्वर द्वारा इस्तेमाल न हो सकें, राज्य में न जा सकें।

जो जीवित हैं ईश्वर उन्हीं की गवाही चाहे।

"मृत लोग" ईश्वर-विरोधी, विद्रोही हैं,

उनकी आत्मा सुन्न है, उसके वचन नहीं समझते वे,

सत्य पर अमल नहीं, ईश्वर के प्रति निष्ठा नहीं।

शैतान से शोषित हैं, उसके कब्ज़े में हैं।

जीवित प्राणी बनने की, ईश्वर से मंज़ूरी पाने की,

उसकी गवाही देने की चाह रखने वालों को

ईश्वर के न्याय, काट-छाँट का पालन करना चाहिए।

तभी वो सत्य को अमल में लाएँगे,

तभी ईश्वर से उद्धार पाएँगे, और सच्चे जीवित प्राणी बन पाएँगे।

2

ईश्वर बचाए उन्हें जो ज़िंदा हैं।

ईश्वर उनकी ताड़ना और न्याय कर चुका है,

उसकी ख़ातिर वो अपनी जान देने को, जीवन समर्पित करने को तैयार हैं।

जीवित इंसान ईश्वर की गवाही देकर, शैतान को शर्मिंदा कर सकता है।

जीवित इंसान ही ईश-कार्य को फैला सकता है।

वह असली इंसान है, ईश्वर के अनुरूप है।

जीवित प्राणी बनने की, ईश्वर से मंज़ूरी पाने की,

उसकी गवाही देने की चाह रखने वालों को

ईश्वर के न्याय, काट-छाँट का पालन करना चाहिए।

तभी वो सत्य को अमल में लाएँगे,

तभी ईश्वर से उद्धार पाएँगे, और सच्चे जीवित प्राणी बन पाएँगे।

जीवित प्राणी बनने की, ईश्वर से मंज़ूरी पाने की,

उसकी गवाही देने की चाह रखने वालों को

ईश्वर के न्याय, काट-छाँट का पालन करना चाहिए।

तभी वो सत्य को अमल में लाएँगे, तभी ईश्वर से उद्धार पाएँगे,

और सच्चे जीवित प्राणी बन पाएँगे। जो जीवित प्राणी होंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'क्या तुम ऐसे व्यक्ति हो जो जीवित हो उठा है?' से रूपांतरित

पिछला: 685 इंसान को जो करना है उस पर उसे अटल रहना चाहिये

अगला: 687 असफलता, खुद को जानने का सबसे अच्छा अवसर है

परमेश्वर की ओर से एक आशीर्वाद—पाप से बचने और बिना आंसू और दर्द के एक सुंदर जीवन जीने का मौका पाने के लिए प्रभु की वापसी का स्वागत करना। क्या आप अपने परिवार के साथ यह आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें