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मसीह का सारतत्व है परमेश्वर

I

परमेश्वर देह बनकर मसीह कहलाता है,

जो मसीह सत्य दे पाए, परमेश्वर कहलाता है।

ये कहना कोई बड़ी बात नहीं,

क्योंकि उसमें सारतत्व है परमेश्वर का।

है उसमें स्वभाव परमेश्वर का,

है उसके काम में बुद्धि परमेश्वर की,

इन तक न पहुँच पाए कभी मानव।

जो ख़ुद को मसीह तो कहते हैं,

लेकिन परमेश्वर का काम नहीं कर पाते,

वो तो केवल कपटी हैं।

मसीह केवल धरती पर, परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं,

है ख़ास देह जिसको धरकर, लोगों के बीच में रहकर,

काम सभी पूरे करता है।

II

ये देह नहीं ऐसा, कोई भी उसकी जगह ले ले।

ये देह ऐसा जो धरती पर, परमेश्वर का काम करे,

ये देह ऐसा जो, परमेश्वर का स्वभाव व्यक्त करे,

ये देह ऐसा जो धरती पर, परमेश्वर को दर्शाए,

ये देह ऐसा जो, लोगों को जीवन दे पाए।

जो कहते हैं ख़ुद को मसीह,

आज नहीं तो कल, उनका पतन होगा।

क्योंकि भले ही वो ख़ुद को मसीह कहते हैं,

मगर मसीह का उनमें कोई सार नहीं।

परमेश्वर का कहना है, नहीं कोई इंसा ऐसा,

मसीह की सच्चाई को, परिभाषित जो कर पाए।

केवल परमेश्वर है जो, इसका उत्तर दे पाए,

केवल परमेश्वर है जो इसका निश्चय कर पाए।

गर सच में तुम जीवन की राह खोजना चाहो,

तो पहले ये स्वीकार करो,

वो इंसानी धरती पर आकर,

लोगों को, राह जीवन की अर्पित करता है।

अंत के दिनों में परमेश्वर आता है,

और इंसानों को, राह जीवन की अर्पित करता है।

वो इंसानी धरती पर आकर,

लोगों को, राह जीवन की अर्पित करता है।

ये पिछले दौर की बात नहीं,

आज हो रहा है ऐसा,

आज हो रहा है ऐसा।

आज हो रहा है ऐसा,

आज हो रहा है ऐसा।

"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से

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