वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु

सर्वशक्तिमान का आह भरना

तुम्हारे हृदय में एक बहुत बड़ा रहस्य है। तुम कभी नहीं जान पाते कि वो वहाँ है क्योंकि तुम एक ऐसे संसार में जीवन बिता रहे हो जहां चमकती रोशनी नहीं है। तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा दुष्ट शक्ति द्वारा दबोच ली गई है। तुम्हारी आंखों को अंधकार ने ढक लिया है, तुम सूर्य को आकाश में नहीं देख सकते, न ही रात में टिमटिमाते तारों को। तुम्हारे कान धोखा देने वाले शब्दों से जाम हो गए हैं और तुम यहोवा की गर्जन वाली आवाज को सुन नहीं पाते हो, न ही सिंहासन से तेज बहते जल की आवाज को। जो जो तुम्हारा था और सर्वशक्तिमान ने जो तुम्हें दिया था सब कुछ तुमने खो दिया है। तुम कड़वाहट के एक अथाह सागर में प्रवेश कर चुके हो, जहां बच पाने का सामर्थ नहीं है, जीवित बचने की आशा नहीं है, बस संघर्ष और हलचल मचाने के लिये बचे हुए हो... उस घड़ी से लेकर तुम बुरी शक्ति के द्वारा यातना सहने के लिए विनाश की नियति में हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आशीषों से बहुत दूरी पर हो, सर्वशक्तिमान की पूर्वयोजनाओं से भी दूर, और तुम लौट न पाने वाली सड़क पर भटक रहे हो। लाखों पुकार न तुम्हारे हृदय को और न तुम्हारी आत्मा को जगा पाएंगी।। तुम दुष्ट शक्ति की बाहों में गहरी नींद लेते हो, जिसने तुम्हें काल्पनिक संसार में बिना किसी दिशा के और बिना किसी स्पष्ट सड़क के, ललचाकर खींच लिया है। अब यहीं से तुमने अपनी मूल पवित्रता को, मासूमियत को खो दिया है, और सर्वशक्तिमान की देखभाल से छिपने लगे हो। वह दुष्ट शक्ति तुम्हारे हृदय को चलाती है और तुम्हारा जीवन बन जाती है। अब तुम उससे डरते नहीं हो, उसे नजरअंदाज नहीं करते, उस पर संदेह नहीं करते। बल्कि उसे तो तुम अपने हृदय का ईश्वर समझने लगते हो। वह तुम्हारे मन की मूरत बन जाता है, उसकी आराधना करते हो, उसकी परछाई समान सदैव साथ रहते हो, और पारस्परिक रूप से जीवन और मृत्यु में एक दूसरे के लिए वचनबद्ध हो जाते हो। तुम्हें कोई अंदाज़ा नहीं कि तुम्हारा अस्तित्व कहां से प्राप्त हुआ, तुम अस्तित्व में क्यों हो, या तुम क्यों मरते हो? तुम्हारे लिए सर्वशक्तिमान एक अजनबी सा हो गया है, तुम उसके मूल अमर व्यक्तित्व को नहीं जानते हो, उसका कार्य जो तुम्हारे लिए उसने किया है, उसको भी भुला बैठे हो। उसका प्रत्येक कार्य तुम्हें घृणित लगने लगा है। न तुम उनसे प्रसन्न हो और न उनकी कीमत जानते हो। परमेश्वर से पोषण प्राप्त करने के उसी दिन से तुम उस दुष्ट शक्ति के साथ चलते आ रहे हो। हजारों वर्षों से तुम उस दुष्ट शक्ति के साथ आंधी तूफान में से होकर चलते रहे हो। उससे मिलकर तुमने परमेश्वर का विरोध किया, जो तुम्हारे जीवन का स्त्रोत था। तुम पश्चताप नहीं करते, अब तुम जान लो कि तुम नाश के चरम बिंदु पर जा पहुंचे हो। तुम भूल बैठे कि दुष्ट शक्ति ने तुम्हें प्रलोभित किया, तुम्हें सताया; तुम अपने मूल को भूल गए। ठीक इसी तरह दुष्ट शक्ति तुम्हें प्रत्येक कदम पर अभी भी हानि पहुंचा रही है। तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा ज्ञानहीन और रद्दी हो गये हैं। तुम अब संसार की व्याकुलता को लेकर शिकायत नहीं करते, ऐसा विश्वास ही नहीं करते कि संसार अधर्म से भरा है। तुम तो सर्वशक्तिमान के अस्तित्व की परवाह तक नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि तुमने दुष्ट शक्ति को अपना सच्चा पिता मान लिया है, और तुम अब उससे अलग नहीं हो सकते। यह तुम्हारे हृदय का एक राज़ है।

जब भोर होती है, भोर का तारा पूर्व दिशा से निकलता है। यह वह तारा है जो पहले कभी नहीं था। यह चमकते हुए आकाश को रोशनी देता है और लोगों के हृदय में बुझी हुई बत्ती को जला देता है। क्योंकि ये ज्योति तुम्हारे ऊपर और दूसरों के ऊपर भी रोशनी देती है, लोग अब अकेले नहीं हैं। परंतु सिर्फ तुम अंधकारमय रात में स्वस्थ सोते रहते हो। तुम आवाज सुनने में, रोशनी को निहार पाने में असमर्थ हो, यहां तक कि एक नए आकाश और एक नई पृथ्वी, नये युग के आगमन को जानने में भी असमर्थ हो। क्योंकि तुम्हारा पिता कहता है, "मेरे बेटे, जागना मत, अभी सुबह नहीं हुई है। बाहर सर्दी है, अंदर ही रहो, नहीं तो तलवार और भाले तुम्हारी आंखे छेद डालेंगे।" तुम्हें अपने पिता के प्रोत्साहन पर बड़ा विश्वास है क्योंकि तुम्हारा मानना है पिता जो तुमसे बड़ा है एकदम सही है और वो पिता तुमसे सच्चा प्यार भी करता है। ऐसा प्रोत्साहन और ऐसा प्यार उस किंवदन्ती पर विश्वास ही नहीं दिलाता कि इस संसार में ज्योति है, और बिल्कुल परवाह नहीं करता कि संसार में सच्चाई है। तुम अब और आशा नहीं लगाते कि सर्वशक्तिमान तुम्हें बचा ले। तुमअपनी यथा-स्थिति से संतुष्ट हो, अब रोशनी की किरण के आगमन की आशा ही नहीं रखते, और अब पौराणिक सर्वशक्तिमान परमेश्वर के आगमन हेतु आंखें भी खोलकर नहीं रखते। तुम्हारी नजरों में जो सुंदर दिखता है अब कभी भी उसका पुनरुत्थान नहीं होगा, न ही अस्तित्व में रहेगा। तुम्हारी नज़र में मानवजाति का कल या भविष्य गायब और नष्ट हो जाता है। तुम अपने पिता के वस्त्रों को पूरी शक्ति से पकड़े हुए हो, साथ में कष्ट उठाने को तैयार, अपने सहयात्री और अपनी सुदूर यात्रा की दिशा खो देने के भय से पीड़ित हो। विराट और भ्रमित संसार ने तुममें से अनेक को इस दुनिया में तरह-तरह की भूमिका निभाने हेतु निर्भीकता और निडरता से भर दिया है। उसने कई "योद्धाओं" को तैयार कर दिया है जो मृत्यु से डरते ही नहीं। इससे भी बढ़कर, उसने असंवेदनशील और लकवा ग्रसित मनुष्यों के दल बनाकर रखे हैं जो अपने सृजे जाने के अभिप्राय को बिल्कुल नहीं समझते। सर्वशक्तिमान की नज़रों ने अत्याधिक पीड़ित मानवजाति के चारों ओर देखा, वे जो दुख सह रहे थे उनके विलाप को सुना, वे जो व्यथित थे उनकी निर्लज्जता को देखा, और उस मानवजाति की बेबसी एवं भय को महसूस किया जिसने अपना उद्धार खो दिया है। मनुष्यजाति उसकी देखभाल को नकारती है, अपने ही मार्ग पर चलती है,और उस की नज़र रखने वाली आंखों से दूर रहती है। वह शत्रु के संग गहरे समुद्र की सारी कड़वाहट का स्वाद चखना अधिक पसंद करेगी। सर्वशक्तिमान की आह अब सुनाई नहीं देती। सर्वशक्तिमान के हाथ दुखित मानव जाति को अब स्पर्श करने के लिए तैयार नहीं हैं। वह अपना काम दोहराता है, बार खोता और फिर से पाता है। उस क्षण से वह थक जाता है, ऊब जाता है और तब वह अपने हाथ को रोक देता है, और फिर लोगों के बीच में भ्रमण करना बंद कर देता है... लोग इन परिवर्तनों के प्रति जागरूक नहीं हैं, सर्वशक्तिमान के आने और जाने, सर्वशक्तिमान के खेदित मन और निराशा को नहीं जानते।

कुल मिलाकर सर्वशक्तिमान की योजनाओं की नजरों के नीचे, तीव्र परिवर्तन हो रहा है। मानवजाति ने जिन चीज़ों के बारे में अब तक कभी सुना ही नहीं एकाएक टूट पड़ेगी। तथापि, मानवजाति ने जिन बातों को अब तक अपने अधिकार में रखा है, उसके हाथ से अनजाने में फिसल सकती हैं। सर्वशक्तिमान के ठौर-ठिकाने के बारे में कोई भी समझ नहीं सकता है, इसके अलावा सर्वशक्तिमान के जीवन की सामर्थ की उत्तमता और महानता को कोई महसूस नहीं कर पा रहा है। मनुष्य जो महसूस नहीं कर सकता उसे सर्वशक्तिमान महसूस कर सकता है, इसी में उसकी अलौकिकता होती है। जिस मनुष्य जाति ने, उससे नाता तोड़ लिया, वह फिर भी उसी को बचाता है, इससे उसकी महानता का परिचय मिलता है। उसे जीवन और मृत्यु का अर्थ मालूम है। इसके अलावा वह मानवजाति, जो उसकी रचना है, उसके जीवन के नियमों को जानता है। वह मनुष्य के अस्तित्व का मूल आधार है और मानवजाति को पुनर्जीवित करने के लिए उसको छुड़ाने वाला भी है। वह प्रसन्नचित हृदय को व्याकुलता से भर देता है और दुखित हृदयों को प्रसन्नता के साथ उठाता है। ये सब उसके कार्य, और उसकी योजनाओं के लिए है।

मनुष्य, जिन्होंने सर्वशक्तिमान के जीवन की आपूर्ति को त्याग दिया, नहीं जानते हैं आखिर वे क्यों अस्तित्व में हैं, और फिर भी मृत्यु से डरते रहते हैं। इस दुनिया में, जहां कोई सहारा नहीं है, सहायता नहीं है, वहाँ बहादुरी के साथ, बिन आत्माओं की चेतना के शरीरों में एक अशोभनीय अस्तित्व को दिखाते हुए मनुष्य, अपनी आंखों को बंद करने में, अभी भी अनिच्छुक है। तुम इनके समान जीते हो, आशाहीन; उसका अस्तित्व इसी प्रकार का, बिना किसी लक्ष्य का है। किंवदन्ती में मात्र एक ही पवित्र जन है जो उन्हें बचाने के लिए आएगा जो कष्ट से कराहते हैं और उसके आगमन के लिए हताश होकर तड़पते हैं। इन लोगों में जो अचेत हैं अभी यह विश्वास जगाया नहीं जा सकता है। फिर भी लोगों में ऐसा प्राप्त करने की लालसा है। वे जो बुरी तरह से दुख में हैं सर्वशक्तिमान उन पर करुणा दिखाता है। साथ ही, वह उन लोगों से ऊब चुका है जो होश में नहीं है, क्योंकि उसे उनसे प्रत्युत्तर पाने में लंबा इंतजार करना पड़ता है। वह खोजने की इच्छा करता है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारी आत्मा को ढूंढता है। वह तुम्हें भोजन-पानी देना चाहता है, जगाना चाहता है, ताकि तुम फिर और भूखे और प्यासे न रहो। जब तुम थके हो और इस संसार में खुद को तन्हा महसूस करने लगो तो, व्याकुल मत होना, रोना मत। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, रखवाला, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा। वह तुम्हारी राह देख रहा है, वह तुमतुम्हारे लौटने की प्रतीक्षा में बैठा है। वह उस दिन की प्रतीक्षा में है जब तुमतुम्हारी यादाश्त एकाएक लौट आयेगी: और इस सत्य को पहचान लेगी कि तुम परमेश्वर से ही आए हो, किसी तरह और किसी जगह एक बार बिछड़ गए थे, सड़क के किनारे बेहोश पड़े थे, और फिर अनजाने में एक पिता आ गया। और फिर तुम्हें यह भी एहसास हो कि सर्वशक्तिमान निरंतर देख रहा था, तुम्हारे लौटकर आने की प्रतीक्षा कर रहा था। वह अत्यधिक लालायित है, बिना प्रत्युत्तर के जवाब के आस में बैठा है। उसका प्रतीक्षा करना अनमोल है, और यह मनुष्य के हृदय और उसकी आत्मा के लिए है। संभवतः यह प्रतीक्षा अनिश्चित है, शायद यह प्रतीक्षा अपनी अंतिम बेला में है। परंतु तुम्हें जान लेना चाहिए कि तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा ठीक इस क्षण है कहाँ।

मई 28, 2003