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परमेश्वर के प्रबंधन कार्य का उद्देश्य

I

छह हज़ार साल तक फैली है परमेश्वर की प्रबंधन योजना,

बंटी है तीन चरणों में, हर चरण एक युग है कहलाता,

व्यवस्था युग है पहला, फिर अनुग्रह का युग आया,

आखिरी चरण है युग राज्य का।

हर चरण में परमेश्वर का काम अलग होता है,

यह मानवता की ज़रूरत के अनुसार होता है,

परमेश्वर से जिस छल के सहारे शैतान लड़ता है,

सच में उसके अनुरूप परमेश्वर का काम होता है।

परमेश्वर का काम है शैतान को हराने के लिए,

परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता प्रकट करने के लिए,

और ये है शैतान का छल सबको दिखाने के लिए,

और है ये उसके अधिकार क्षेत्र से लोगों को बचाने के लिए।

II

ये है परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता प्रकट करने के लिए,

शैतान की अत्यधिक कुरूपता दिखाने के लिए,

सृजित जीवों को भले बुरे में अंतर करना सिखाने के लिए,

और परमेश्वर है राजा सभी का, यह उन्हें बताने के लिए,

और ये है उन्हें दिखाने के लिए, कि शैतान ही मनुष्य का दुश्मन है,

वो ही है जो भ्रष्ट और दुष्ट है,

ताकि मनुष्य भले और बुरे में, सच और झूठ में,

पवित्रता और मलिनता में और महानता और नीचता

में अंतर कर सके, कर सके।

परमेश्वर का काम है शैतान को हराने के लिए,

परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता प्रकट करने के लिए,

और ये है शैतान का छल सबको दिखाने के लिए,

और है ये उसके अधिकार क्षेत्र से लोगों को बचाने के लिए।

III

ये है ताकि परमेश्वर के लिए दे सके गवाही मानवता अज्ञानी,

कि परमेश्वर ने मानव को भ्रष्ट किया नहीं,

और केवल सृष्टि का मालिक, स्वयं परमेश्वर ही,

प्रदान कर सकता है आनंद की चीज़ें और मनुष्य का उद्धार भी।

यह है इसलिए ताकि वे जानें कि परमेश्वर है सभी का राजा,

कि शैतान है महज उसकी सृष्टि, जो बाद में उसके खिलाफ हुई।

परमेश्वर की छह हज़ार साल की योजना बंटी है तीन चरणों में,

ताकि उसकी सृष्टि उसकी गवाह बने,

उसकी इच्छा को जाने,

और वो ही सत्य है इसे देखे, इसे देखे, इसे देखे।

परमेश्वर का काम है शैतान को हराने के लिए,

परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता प्रकट करने के लिए,

और ये है शैतान का छल सबको दिखाने के लिए,

और है ये उसके अधिकार क्षेत्र से लोगों को बचाने के लिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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