100 परमेश्वर बहाल कर देगा सृजन की पूर्व स्थिति

I

अपने गहरे होते वचन के साथ, परमेश्वर की नज़र है कायनात पर।

हर सृजन बनता है नया, परमेश्वर के वचनों की बुनियाद पर।

स्वर्ग बदल रहा है, धरती बदल रही है,

इंसान अपनी असलियत दिखा रहा है।

धरती बनाई जब परमेश्वर ने,

तो तराशी हर चीज़ उसके स्वभाव के अनुरूप।

गोचर रूप की हर चीज़ को संजोया एक साथ, उसके स्वभाव के अनुरूप।

परमेश्वर का प्रबंधन जब करीब होगा समापन के,

तो हर चीज़ बहाल होगी अपने मूल स्वरूप में।

थोड़ा-थोड़ा, धीरे-धीरे हो रहा है इंसान वर्गीकृत अपनी किस्म में,

है जिससे रिश्ता उसका, लौट रहा है उस परिवार में।

ख़ुश है परमेश्वर इस बात से।

कुछ भी नहीं है जो परेशाँ कर सके उसे।

परमेश्वर का महान कार्य हो जाता है पूरा,

इससे पहले कि कोई जान सके।

इससे पहले कि ख़बर हो उन्हें, बदल जाती हैं चीज़ें।

थोड़ा-थोड़ा, धीरे-धीरे हो रहा है इंसान वर्गीकृत अपनी किस्म में।


II

सृजन के समय जो स्वरूप था चीज़ों का,

परमेश्वर बहाल कर देगा उसे।

परमेश्वर बदल देता है हर चीज़ को पूरी तरह,

ले आता है वापस उन्हें अपनी योजना में।

अब वक्त आ गया है! परमेश्वर की योजना का समापन करीब है।

ओ मलिन, गंदे जगत, होगा तेरा पतन परमेश्वर के वचन तले।

परमेश्वर की योजना की बदौलत शून्य हो जाएगा तू।

परमेश्वर की बनाई हर चीज़, पाएगी नवजीवन उसके वचन में,

होगा उनके पास एक सार्वभौम प्रभु।

ओ पुनीत नव-जगत, परमेश्वर की महिमा में सजीव हो उठोगे तुम।

ओ सिय्योन पर्वत, ख़त्म कर तू अपनी ख़ामोशी,

लौटा है परमेश्वर विजेता होकर।

धरती के हर हिस्से पर, हर सृजन पर नज़र है उसकी।

मानवता ने धरती पर शुरू किया है नया जीवन एक नई आशा से।

थोड़ा-थोड़ा, धीरे-धीरे हो रहा है इंसान वर्गीकृत अपनी किस्म में।


III

ओ परमेश्वर-जनो, क्या नहीं पाओगे पुनर्जीवन परमेश्वर के प्रकाश में तुम?

परमेश्वर की अगुवाई, रहनुमाई में,

क्या ख़ुशी से कूदोगे, हँसोगे नहीं तुम?

धरती-पानी सब हर्षित हैं, सब हँसते हैं।

इस्राएल भी हो उठा सजीव फिर से।

क्या गर्व न होगा इस्राएल तुम्हें, पूर्वनियत कर दिया है परमेश्वर ने तुम्हें?

कौन रोया कभी पहले? किसने किया विलाप कभी पहले?

मिट चुका है पुराना इस्राएल।

आज का इस्राएल उदित हो चुका है जगत में।

बस चुका है ये लोगों के दिलों में।

मिलता इसे जीवन-स्रोत परमेश्वर के लोगों से।

ओ घृणित मिस्र! क्या अब भी ख़िलाफ़ जाएगा तू परमेश्वर के?

परमेश्वर की दया के कारण, कैसे बच पाएगा तू उसकी ताड़ना से?

जिसे परमेश्वर का प्रेम मिले, वो सदा रहेगा।

जो जाए ख़िलाफ़ परमेश्वर के, वो सदा दंड पाएगा।

क्योंकि, परमेश्वर, ईर्ष्यालु परमेश्वर है,

वो छोड़ता नहीं कर्म लोगों के आसानी से।

वो खोज-बीन करता है धरती के हर हिस्से की।

धार्मिकता और प्रताप लेकर, रोष और ताड़ना लेकर,

धरती के लोगों के सामने, प्रकट करने ख़ुद को,

वो अवतरित होता है, दुनिया के पूरब में,

वो अवतरित होता है, दुनिया के पूरव में।


"वचन देह में प्रकट होता है" से

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