939 परमेश्वर के स्वभाव का प्रतीक

1

परमेश्वर के स्वभाव में है शामिल

मानव जाति के लिए उसका प्यार और दिलासा,

शामिल है मानव जाति के लिए उसकी नफ़रत और उसकी पूरी समझ।

परमेश्वर का स्वभाव,

परमेश्वर का स्वभाव है मौजूद जीवित चीज़ों के शासक में, पूरी सृष्टि के प्रभु में।

परमेश्वर का स्वभाव, करता है प्रतिनिधित्व सम्मान, शक्ति, कुलीनता का,

महानता और सर्वोच्चता का।

परमेश्वर का स्वभाव।

परमेश्वर का स्वभाव है अधिकार और सभी धर्मी चीज़ों,

सभी सुंदर और सभी अच्छी चीज़ों का प्रतीक।

परमेश्वर का स्वभाव, है प्रतीक कि दबाया जा नहीं सकता परमेश्वर को,

हमला कर नहीं सकता अंधेरा या कोई दुश्मन उस पर।

किसी प्राणी को नहीं है इजाज़त, कोई उसका कर नहीं सकता अपमान।

परमेश्वर का स्वभाव है प्रतीक उच्चतम सामर्थ्य का।

परमेश्वर का स्वभाव।

कोई भी इंसान उसके काम या स्वभाव को डगमगा नहीं सकता।

परमेश्वर हमेशा करता है मेहनत मानव जाति के अस्तित्व के लिए,

फिर भी इंसान कभी रोशनी या धार्मिकता को देता नहीं योगदान।

2

कुछ समय के लिए इंसान कर सकता है मेहनत,

लेकिन एक झटके का भी सामना वो कर नहीं सकता।

क्योंकि इंसान की हर मेहनत होती है उसके लिए, नहीं होती दूसरों के लिए।

परमेश्वर है हमेशा सर्वोच्च और सम्माननीय,

और इंसान है हमेशा निम्न, कोई मूल्य नहीं है उसका।

क्योंकि परमेश्वर हमेशा इंसान के लिए करता है मेहनत,

जबकि इंसान हमेशा लेता है, सिर्फ़ ख़ुद के लिए करता है मेहनत।

इंसान है हमेशा ख़ुदगरज़, परमेश्वर है हमेशा बेगरज़।

परमेश्वर है सभी धर्मी, अच्छी, सुंदर चीज़ों का स्रोत,

जबकि इंसान करता अभिव्यक्त सारी गंदगी और बुराई,

और है उनका उत्तराधिकारी।

परमेश्वर का धार्मिक और सुंदर तत्व नहीं बदलेगा कभी भी।

परमेश्वर हमेशा करता है मेहनत मानव जाति के अस्तित्व के लिए,

फिर भी इंसान कभी रोशनी या धार्मिकता को देता नहीं योगदान।

कुछ समय के लिए इंसान कर सकता है मेहनत,

लेकिन एक झटके का भी सामना वो कर नहीं सकता।

क्योंकि इंसान की हर मेहनत होती है उसके लिए।

परमेश्वर है हमेशा सर्वोच्च और सम्माननीय,

और इंसान है हमेशा निम्न, कोई मूल्य नहीं है उसका।

परमेश्वर का धार्मिक और सुंदर तत्व नहीं बदलेगा कभी भी।

उस तत्व को वह कभी नहीं बदलेगा जो है उसके पास।

जबकि इंसान किसी भी समय या जगह, मुंह मोड़ सकता है धार्मिकता से,

भटक सकता है दूर परमेश्वर से, परमेश्वर से।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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