600 मनुष्य जिस मार्ग पर चलता है, उस पर उसकी सफलता या असफलता निर्भर करती है

1 अधिकांश लोग अपनी भविष्य की मंज़िल के लिए, या अल्पकालिक आनन्द के लिए परमेश्वर में विश्वास करते हैं। ऐसे लोग जो किसी व्यवहार से होकर नहीं गुज़रे हैं, उनके लिए परमेश्वर में उनका विश्वास स्वर्ग में प्रवेश करने के लिए, एवं प्रतिफल अर्जित करने के लिए होता है। यह, सिद्ध किए जाने के लिए या परमेश्वर के किसी प्राणी के कर्तव्य को निभाने के लिए नहीं होता है। कहने का तात्पर्य है कि अधिकांश लोग अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए, या अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए परमेश्वर में विश्वास नहीं करते हैं। अर्थपूर्ण ज़िन्दगियों को जीने के लिए बिरले ही लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, और न ही ऐसे लोग हैं जो विश्वास करते हैं कि चूँकि मनुष्य जीवित है, उसे परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना स्वर्ग की व्यवस्था है और पृथ्वी का सिद्धान्त है, और यह मनुष्य का स्वाभाविक उद्यम है।

2 पिछले कई हज़ार वर्षों से, बहुत से विश्वासी मर चुके हैं, और बहुत से लोग मर कर नया जन्म प्राप्त कर चुके हैं। ये बस एक या दो लोग ही नहीं हैं जो परमेश्वर की खोज करते हैं, न ही एक या दो हज़ार हैं, फिर भी इनमें से अधिकांश लोगों का अनुसरण उनकी स्वयं की संभावनाओं या भविष्य के लिए उनकी महिमामय आशाओं के खातिर होता है। ऐसे लोग जो मसीह के लिए समर्पित हैं वे बिरले हैं। अब भी अनेक भक्त विश्वासी अपने स्वयं के जालों में फंसकर मर चुके हैं, यद्यपि वे अपने अनुसरण में कष्टसाध्य प्रयास तो करते हैं, फिर भी जिस पथ पर वे चलते हैं वह असफलता का वो पथ है जिस पर उनके पूर्वज चले थे, और यह सफलता का पथ नहीं है।

3 क्योंकि मनुष्य परमेश्वर के प्रति स्वयं को पूरी रीति से समर्पित करने में अच्छा नहीं है; क्योंकि मनुष्य सृष्टिकर्ता के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि मनुष्य ने सत्य को देखा तो है किन्तु उसे नज़रंदाज़ करता है और अपने स्वयं के पथ पर चलता है, क्योंकि मनुष्य हमेशा उन लोगों के पथ का अनुसरण करने की कोशिश करता है जो असफल हो चुके हैं, क्योंकि मनुष्य हमेशा स्वर्ग की अवहेलना करता है, इस प्रकार, मनुष्य हमेशा असफल हो जाता है, उसे हमेशा शैतान के छल द्वारा ठग लिया जाता है, और वह स्वयं के जाल में फंस जाता है। यदि तेरे अनुसरण का पथ सही पथ है, तो तेरे पास सफलता की आशा है; यदि जिस पथ पर तूने सत्य का अनुसरण करते हुए कदम रखा है वह ग़लत पथ है, तो तू सर्वदा के लिए सफलता के अयोग्य होगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है" से रूपांतरित

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