601 पतरस और पौलुस के मार्ग

1 अब तुम लोग किस मार्ग पर चल रहे हो? यदि यह जीवन की तलाश करने, खुद को समझने और परमेश्वर को जानने के मामले में पतरस के समान स्तर का नहीं है, तो तुम पतरस के मार्ग पर नहीं चल रहे हो। इन दिनों, अधिकांश लोग इस तरह की स्थिति में हैं : "आशीष प्राप्त करने के लिए मुझे परमेश्वर के लिए खुद को खपाना होगा और परमेश्वर के लिए कीमत चुकानी होगी। आशीष पाने के लिए मुझे परमेश्वर के लिए सब-कुछ त्याग देना चाहिए; मुझे उसके द्वारा सौंपा गया काम पूरा करना चाहिए, और अपना कर्तव्य अच्छे से निभाना चाहिए।" इस पर आशीष प्राप्त करने का इरादा हावी है, जो अपने आपको पूरी तरह से परमेश्वर से पुरस्कार पाने और मुकुट हासिल करने के उद्देश्य से खपाने का उदाहरण है। ऐसे लोगों के दिल में सत्य नहीं होता, और निश्चित रूप से उनकी समझ केवल सिद्धांत के कुछ शब्दों से युक्त होती है, जिसका वे जहाँ भी जाते हैं, वहीं दिखावा करते हैं। उनका रास्ता पौलुस का रास्ता है।

2 हालाँकि तुमने पौलुस के मार्ग पर चलने की योजना नहीं बनाई होगी, लेकिन तुम्हारी प्रकृति ने यह तय कर दिया है कि तुम उसी मार्ग पर चल रहे हो, और न चाहते हुए भी तुम उसी दिशा में जा रहे हो। हालाँकि तुम पतरस के मार्ग पर चलना चाहते हो, लेकिन अगर तुम्हें यह स्पष्ट नहीं है कि यह कैसे करना है, तो तुम अनजाने में ही पौलुस के मार्ग पर चल दोगे : स्थिति की यही वास्तविकता है। यह कहा जा सकता है कि परमेश्वर ने अब तुम्हारे लिए उद्धार और पूर्णता का मार्ग प्रकट कर दिया है। यह परमेश्वर का अनुग्रह और उन्नयन है, और वही पतरस के मार्ग पर तुम्हारा मार्गदर्शन कर रहा है। परमेश्वर के मार्गदर्शन और प्रबुद्धता के बिना कोई भी पतरस के मार्ग पर नहीं चल पाएगा; पौलुस के विनाशकारी नक्शेकदम पर चलते हुए पौलुस के मार्ग पर आगे बढ़ना ही एकमात्र विकल्प होगा।

3 पौलुस का मार्ग खुद को जानने का मार्ग नहीं था, स्वभाव में बदलाव लाने की खोज करने की तो बात ही छोड़ो। उसने कभी अपनी प्रकृति का विश्लेषण नहीं किया, न ही उसने इसका कोई ज्ञान प्राप्त किया कि वह क्या है; वह बस इतना जानता था कि वह यीशु के उत्पीड़न में मुख्य अपराधी है। उसे अपनी प्रकृति की थोड़ी-सी भी समझ नहीं थी, और अपना काम खत्म करने के बाद पौलुस को वास्तव में लगा कि वह मसीह है और उसे पुरस्कृत किया जाना चाहिए। पौलुस ने जो काम किया, वह केवल परमेश्वर के लिए प्रदान की गई सेवा थी। हालाँकि पौलुस को पवित्र आत्मा से कुछ प्रकाशन मिले थे, फिर भी व्यक्तिगत रूप से उसमें कोई सत्य या जीवन नहीं था। उसे परमेश्वर द्वारा बचाया नहीं गया; उसे परमेश्वर द्वारा दंडित किया गया।

4 ऐसा क्यों कहा जाता है कि पतरस का मार्ग पूर्णता का मार्ग है? वह इसलिए, क्योंकि अपने अभ्यास में पतरस ने जीवन पर, परमेश्वर को जानने का प्रयास करने पर और खुद को जानने पर विशेष बल दिया। परमेश्वर के कार्य के अपने अनुभव से उसने खुद को जाना, मनुष्य की भ्रष्ट अवस्थाओं की समझ हासिल की, अपनी कमियों को जाना, और उस सबसे मूल्यवान चीज़ की खोज की, जिसका लोगों को अनुसरण करना चाहिए। वह परमेश्वर से ईमानदारी से प्रेम कर पाया, उसने जाना कि परमेश्वर का ऋण कैसे चुकाया जाए, उसने कुछ सत्य हासिल किया, उसमें वह वास्तविकता थी जिसकी परमेश्वर अपेक्षा करता है। अपने परीक्षणों के दौरान पतरस ने जो कुछ कहा, उन सबसे यह देखा जा सकता है कि वह निस्संदेह परमेश्वर की सबसे अधिक समझ रखने वाला व्यक्ति था। चूँकि उसे परमेश्वर के वचनों से इतना अधिक सत्य समझ में आ गया था, इसलिए उसका मार्ग और अधिक उज्ज्वल और परमेश्वर की इच्छा के और अधिक अनुरूप होता गया।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'पतरस के मार्ग पर कैसे चलें' से रूपांतरित

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