627  सृष्टिकर्ता का अधिकार अपरिवर्तनीय है

1

हालाँकि ईश्वर के पास महान अधिकार है,

(फिर भी) वो सैद्धांतिक है, सटीक है, अपने वचनों का पक्का है।

ये दिखाए, सर्जक का अपमान नहीं किया जा सकता

और उसका अधिकार अजेय है।

हालाँकि उसकी शक्ति सर्वोच्च है, सब उसके अधीन है,

वो सब पर शासन करे, पर उसने अपनी योजना को कभी हानि नहीं पहुँचाई।

वो सामर्थ्य का प्रयोग सिद्धान्त के अनुसार करे,

वही करे जो कहे, कदम-दर-कदम अपनी योजना पर चले।


स्वर्ग और धरती बदल सकते, पर ईश-अधिकार न बदले।

सभी चीज़ें नष्ट हो सकतीं, पर ईश-अधिकार नहीं।

ये ईश्वर के अधिकार का असली सार है।

न इसका अपमान किया जा सके, न ये बदले।


2

ईश-शासित(सब) चीज़ें भी उन सिद्धांतों का पालन करें

जिनसे ईश-शक्ति का प्रयोग होता।

कोई भी सर्जक की योजना से मुक्त नहीं।

कोई इंसान या चीज़ उन सिद्धांतों को न बदल सके

जिनसे उसका अधिकार राज करे।


स्वर्ग और धरती बदल सकते, पर ईश-अधिकार न बदले।

सभी चीज़ें नष्ट हो सकतीं, पर ईश-अधिकार नहीं।

ये ईश्वर के अधिकार का असली सार है।

न इसका अपमान किया जा सके, न ये बदले।


3

जो धन्य हैं, ईश-अधिकार से उन पर सौभाग्य आता है।

ये ईश्वर द्वारा लाया जाता है।

जबकि शापित लोग दंडित होते हैं।

ईश-अधिकार से कोई मुक्त या छूटा नहीं है,

न ही वे उसके प्रयोग के सिद्धांत बदल सकते।

ईश्वर का अधिकार परिवर्तन से बदला नहीं जा सकता।

उसके प्रयोग के सिद्धांत किसी कारण से नहीं बदलते।


स्वर्ग और धरती बदल सकते, पर ईश-अधिकार न बदले।

सभी चीज़ें नष्ट हो सकतीं, पर ईश-अधिकार नहीं।

ये ईश्वर के अधिकार का असली सार है।

न इसका अपमान किया जा सके, न ये बदले।


इतना अनूठा है सृष्टिकर्ता।


—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I से रूपांतरित

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