815 तुम्हें परमेश्वर की इच्छा को समझना चाहिए

1 तुमने आज के दिन जो विरासत पाई है वह पूर्वकाल के सभी प्रेरितों और नबियों से, यहाँ तक कि मूसा और पतरस से भी बढ़कर है। आशीष एक या दो दिन में नहीं मिलती; बहुत कुछ त्याग कर उसे अर्जित करना पड़ता है। अर्थात्, तुम सबों के पास परिष्कृत प्रेम होना चाहिये, बड़ा विश्वास, और वे बहुतेरे सत्य जो परमेश्वर चाहता है कि तुम लोगों के पास हों; इसके साथ-साथ, तुम सभी न्याय की ओर अपना ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना चाहिए और कभी भी नहीं डरना चाहिए या हार नहीं माननी चाहिए, और परमेश्वर के प्रति तुम लोगों का प्रेम निरंतर और कभी न समाप्त होने वाला होना चाहिए। तुम लोगों से संकल्प की अपेक्षा की जाती है, और साथ ही तुम सबों के जीवन स्वभाव में बदलाव की भी; तुम्हारे भ्रष्टाचार का निवारण होना चाहिए, और तुम लोगों को परमेश्वर के अधिकतम प्रभाव को पाने के लिए उनके द्वारा किये गए कार्य को बिना शिकायत किये स्वीकार करना चाहिए, और यहां तक कि मृत्यु तक आज्ञाकारी बने रहना चाहिए। यही वह लक्ष्य है जो तुमको हासिल करना है। यही परमेश्वर के कार्य का अंतिम लक्ष्य और अपेक्षाएं हैं जो परमेश्वर इस समूह के लोगों से चाहता है।

2 चूंकि वह तुम लोगों को सब कुछ देता है, बदले में आवश्यक है कि वह तुम सबों से बदले में कुछ माँगे और तुम सभी से उचित मांग करे। और इससे यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर क्यों बार-बार उच्च स्तर के, कड़ी आवश्यकताओं वाले कार्य करता है। इसलिये आवश्यक है कि तुम सब परमेश्वर के विश्वास से भर जाओ। संक्षेप में, परमेश्वर के सभी कार्य तुम लोगों के लिये किये जाते हैं, ताकि तुम उसकी विरासत पाने के योग्य बनो। ये सब परमेश्वर की अपनी महिमा के लिये नहीं है बल्कि तुम सबों के उद्धार के लिये है और इस समूह के लोगों को सिद्ध करने के लिये है, जो इस अशुद्ध देश में बहुत अधिक दुख उठाते हैं। तुम लोगों को परमेश्वर की इच्छा समझनी चाहिये। मैं अंतर्दृष्टि या समझ न रखने वाले बहुत से अज्ञानी लोगों को प्रोत्साहित करता हूँ: परमेश्वर की परीक्षा न करो और उसका इतना अधिक प्रतिरोध न करो।

3 परमेश्वर उन सब दुखों को सह चुका है जिन्हें मनुष्य ने कभी नहीं सहा, और बहुत पहले ही मनुष्य की जगह अत्यधिक अपमान को सहा है। वो क्या है जिसे तुम लोग नहीं छोड़ सकते? परमेश्वर की इच्छा से बढ़कर और क्या महत्वपूर्ण हो सकता है? परमेश्वर के प्रेम से बढ़कर और क्या हो सकता है? इस अशुद्ध देश में कार्य करना परमेश्वर के लिए पहले ही दोगुना कठिन है। यदि मनुष्य जानबूझकर और इच्छानुसार अवलेहना करता है, तो परमेश्वर का कार्य और लंबा चलेगा। परमेश्वर समय से नहीं बंधा हुआ है; उसके काम और उसकी महिमा पहले आती है। इसलिये, यदि यह उसका कार्य है, तो समय कितना भी लगे, वह किसी बलिदान को नहीं रख छोड़ेगा। यह परमेश्वर का स्वभाव है: वह तब तक विश्राम नहीं करेगा जब तक उसका कार्य पूरा नहीं हो जाता।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" से रूपांतरित

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