222 मैंने परमेश्वर की मनोहरता देखी है

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मैंने एक परिचित आवाज़ सुनी है जो मुझे समय-समय पर पुकारती है।

मानो मैं किसी सपने से जागा हूँ, मैं देखने उठा कि कौन बुला रहा है।

आवाज़ कोमल थी फिर भी कड़क थी, अत्यंत सुंदरता की एक छवि।

वचन किसी तेज़ तलवार की तरह थे जो मेरे दिल और आत्मा को बेध रहे थे।

उन्होंने मेरी भ्रष्टता की सच्चाई को उजागर कर दिया, मुझे मुँह छिपाने लायक नहीं छोड़ा।

विपत्ति और असंतोष में, मैंने जो कुछ भी किया था, उस पर मैंने आत्म-चिंतन किया।

पद-प्रतिष्ठा के लिये परमेश्वर से स्पर्धा कर, मैंने अपनी नीचता उजागर कर दी।

आख़िरकार परमेश्वर परमेश्वर है और इंसान इंसान है—मेरे अंदर सचमुच ज़रा भी अक्ल नहीं थी।

मैं अहंकारी, मूर्ख और अज्ञानी था, मैं खुद को नहीं जानता था।

मुझे कोई शर्म नहीं थी, मैंने शर्मनाक कामकिए, मेरा दिल पश्चाताप से भरा है।

शैतान द्वारा बुरी तरह से भ्रष्ट होकर मैं बेहद नीच बन गया था।

शैतान के विचारों के ज़हर में डूबा हुआ, मैं पूरी तरह इंसानियत खो बैठा था।

यह तथ्य सामने आया कि मैं बहुत भ्रष्ट हूँ, मेरे अंदर ज़री-सी भी इंसानियत नहीं है।

भ्रष्ट स्वभाव को दूर किए बिना, मेरी सेवा व्यर्थ होगी।

धारणाओं से भरा दिमाग लिए, परमेश्वर से अनजान, मैं उसका विरोध कैसे न करता?

मुझे शुद्ध करने और बचाने का सारा श्रेय परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को है।

2

मैं हारा हुआ हूँ, बहुत पीड़ित हूँ, फिर भी एक प्रेमपूर्ण हाथ है जो मुझे सहला रहा है।

परमेश्वर मेरे विद्रोह और अन्याय की वजह से मेरा न्याय करता है।

मुझे खुद से नफ़रत है, मैं लंबे समय से प्रभु का ऐसा अनुयायी हूँ जो परमेश्वर को जानता तक नहीं।

यह देखकर कि परमेश्वर वास्तव में धार्मिक और पवित्र है, मैं पूरी तरह से समर्पण करता हूँ।

न्याय और ताड़ना परमेश्वर का प्रेम है, उसका आशीष है।

न्याय के द्वारा उसके उद्धार के कारण ही आज मेरा यह दिन आया है।

परमेश्वर की वास्तविकता और सर्वशक्तिमत्ता पूरी तरह से इंसान के सामने प्रकट हो चुकी हैं।

प्रकाश में रहते हुए, मैं परमेश्वर को जानता हूँ और मैं उसकी मनोहरता को देखता हूँ।

परमेश्वर बहुत मनोहर है, मैं परमेश्वर को तहे-दिल से प्रेम करता हूँ, मैं हमेशा उसकी गवाही दूँगा।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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