223 जीवन मूल्यवान है

I

असीम आकाश, भव्य और विशाल, अनन्त रूप से विस्मयकारी।

आह, इस पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यो, कौन है वो जिसकी आज्ञा का पालन तुम्हें करना चाहिए और उपासना करनी चाहिए?

परमेश्वर की सृष्टि और सब कुछ पर उसका शासन रहस्यों से भरा है।

हम हर कहीं परमेश्वर के विस्मय से भरे कृत्यों को देख सकते हैं।

सृष्टि की सारी चीज़ों की गति परमेश्वर के हाथों में है।

मनुष्य के भाग्य में लिखे आशीष और विपत्तियां परमेश्वर के नियन्त्रण से मुक्त नहीं हो सकतीं।

जीवन क्षणभंगुर है, हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी आत्माओं को कोई अफसोस न हो।

परमेश्वर को और परमेश्वर के प्रेम को जानने से ही मनुष्य का जीवन सार्थक होगा।

II

वर्षों परमेश्वर में विश्वास करने के बाद ही मैं सत्य को समझ सका, और अन्ततः परमेश्वर की इच्छा को जान सका।

परमेश्वर की वचन के अनुरूप आचरण करने से ही आत्मा को शान्ति मिलती है।

एक-दूसरे को प्रेम करने से हमारे जीवन उत्तरोत्तर समृद्ध होते जाते हैं।

आत्मा से और सत्य के साथ परमेश्वर की उपासना करने से सुख और जीवन-शक्ति की प्राप्ति होती है।

न्याय के माध्यम से मैं सत्य को समझता हूँ परमेश्वर के प्रेम को पहचानता हूँ।

मैं जान चुका हूँ कि मैं इस क़दर अन्दर तक दूषित हूँ कि मैं मनुष्य कहलाने लायक़ भी नहीं हूँ।

परमेश्वर द्वारा व्यक्त सत्य मुझे जीवन की राह दिखाते हैं।

सच्चे अर्थों में परमेश्वर को प्रेम करके ही मैं अन्ततः सार्थक जीवन जीता हूँ।

III

देहधारण कर परमेश्वर का प्रगट होना और कार्य करना एक दुर्लभ संयोग है।

पूर्णता प्राप्त करने के लिए कठिनाइयों और पीड़ाओं को भोगना श्रेष्ठतम गौरव है।

आत्मशुद्धि और मानव-सदृश जीवन जीने के लिए मैं उसके न्याय से गुज़रता हूँ।

परमेश्वर की वचन के अनुसार काम करने और वास्तविकता में प्रवेश करने से मुझे सत्य और जीवन की प्राप्ति होती है।

रचे गये प्राणियों के रूप में, यह मानवजाति का अपरिहार्य कर्तव्य है कि वह परमेश्वर की आज्ञा का पालन करे, उसकी उपासना करे।

मैं परमेश्वर के लिए स्वयं को व्यय करते हुए और सत्य का अनुसरण करते हुए परमेश्वर का आशीर्वाद हासिल करता हूँ।

मैं अपने कर्तव्य निभाता हूँ, अपनी मुहिम पूरी करता हूँ, मैं परमेश्वर का प्रचार करता हूँ और उसका साक्षी होता हूँ।

मैं अगर परमेश्वर का अनुमोदन हासिल कर सकूँ और उसके द्वारा प्राप्त किया जा सकूँ, तो जीवन में मुझे कोई पछतावा शेष नहीं रह जाएगा।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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