709 स्वभाव में बदलाव लाने के लिए सत्य की खोज करो

1 केवल सत्य की खोज करके ही तुम अपने स्वभाव में बदलाव ला सकते हो: यह एक ऐसी बात है जिसे तुम्हें समझना होगा, और अच्छी तरह से समझना होगा। अगर तुम्हें सत्य की पर्याप्त समझ नहीं है, तो तुम आसानी से फिसलोगे और मार्ग से भटक जाओगे। अगर तुम्हारे पास वाकई सत्य है, तो जिस मार्ग पर तुम चलते हो वह स्वाभाविक रूप से सही मार्ग होगा। सत्य के बिना, बुरे काम करना आसान है और तुम यह अपनी मर्जी के बिना करोगे। उदाहरण के लिए, यदि तुममें अहंकार और दंभ हुआ, तो तुम परमेश्वर की अवहेलना करने से खुद को रोकना असंभव पाओगे; तुम्हें महसूस होगा कि तुम उसकी अवहेलना करने के लिए मज़बूर किये गये हो। तुम ऐसा जानबूझ कर नहीं करोगे; तुम ऐसा अपनी अहंकारी और दंभी प्रकृति के प्रभुत्व के अधीन करोगे। तुम्हारे अहंकार और दंभ के कारण तुम परमेश्वर को तुच्छ समझोगे और उसे ऐसे देखोगे जैसे कि उसका कोई महत्व ही न हो, यह आपसे स्वयं की प्रशंसा करवाएगा, यह आपसे निरंतर आपको दिखावे में रखवाएगा और अंततः यह आपको परमेश्वर के स्थान पर बैठाएगा और स्वयं के लिए गवाही दिलवाएगा। अंत में आप आराधना किए जाने हेतु सत्य में अपने स्वयं के विचार, अपनी सोच, और अपनी स्वयं की अवधारणाएँ बनाएँगे। देखो लोग अपनी उद्दंडता और अहंकारी प्रकृति के प्रभुत्व के अधीन कितनी बुराई करते हैं!

2 उनके बुरे कर्मों के समाधान के लिए, पहले उन्हें अपने स्वभाव की समस्या को हल करना होगा। स्वभाव में बदलाव किए बिना, इस समस्या को मौलिक रूप से हल करना संभव नहीं है। जब तुम्हें परमेश्वर की कुछ समझ होगी, जब तुम अपनी भ्रष्टता को देख सकोगे, अहंकार और दंभ की कुरूपता और घिनौनेपन को पहचान सकोगे, तब तुम नफरत, घृणा और व्यथा को महसूस करोगे। तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए अपनी इच्छा से कुछ काम करने में सक्षम होगे और ऐसा करने में तुम्हें सुकून महसूस होगा। तुम अपनी इच्छा से परमेश्वर के लिए गवाही देने में सक्षम होगे और ऐसा करने में तुम खुशी महसूस करोगे। तुम अपनी इच्छा से अपने आपको बेनकाब करोगे, अपनी खुद की कुरूपता को उजागर करोगे और ऐसा करके तुम अंदरूनी तौर पर अच्छा महसूस करोगे, तुम अपने आपको बेहतर मानसिक स्थिति में महसूस करोगे। इसलिये, अपने स्वभाव में बदलाव लाने की कोशिश का पहला चरण परमेश्वर के वचनों को समझने की कोशिश करना और सत्य में प्रवेश करना है। केवल सत्य को समझकर ही तुम्हारे अंदर विवेक आएगा; केवल विवेक से ही तुम चीज़ों को पूरी तरह समझ पाओगे; चीज़ों को पूरी तरह समझकर ही तुम देह की इच्छाओं का त्याग कर सकते हो और परमेश्वर में अपने विश्वास के साथ तुम कदम-दर-कदम सही मार्ग पर आगे बढ़ पाओगे।

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "केवल सत्य की खोज करके ही तू अपने स्वभाव में परिवर्तन को प्राप्त कर सकता है" से रूपांतरित

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